आंध्र प्रदेश में भारत की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन शुरू, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने किया उद्घाटन
कुरनूल। आंध्र प्रदेश ने पहली बार व्यावसायिक स्तर पर सोने के उत्पादन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोन्नागिरि में 405 करोड़ रुपये की लागत से विकसित गोल्ड माइनिंग एवं प्रोसेसिंग परियोजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर परियोजना के विस्तार का भी शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए कहा कि यह परियोजना 2047 तक “स्वर्ण आंध्र” के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पहले चरण में 600 एकड़ में खनन, रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने परियोजना के लिए कुल 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसमें पहले चरण में 600 एकड़ क्षेत्र में खनन शुरू हो चुका है। नायडू ने कहा कि यह देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की स्वर्ण खनन परियोजना है, जिससे रायलसीमा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पहले वर्ष 400 किलो, आगे 900 किलो सालाना उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के अनुसार, परियोजना से पहले वर्ष करीब 400 किलोग्राम सोने का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 900 किलोग्राम प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। राज्य सरकार को उत्पादन मूल्य का 4 प्रतिशत रॉयल्टी मिलेगी, जिससे पहले वर्ष लगभग 57 करोड़ रुपये और पूर्ण क्षमता पर करीब 144 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व मिलने का अनुमान है।
‘सुवर्णगिरि’ नाम और ज्वेलरी पार्क का प्रस्ताव
नायडू ने जोन्नागिरि का नाम बदलकर ‘सुवर्णगिरि’ करने का प्रस्ताव रखा और इसे मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने परियोजना के पास ज्वेलरी पार्क स्थापित करने की भी बात कही, ताकि स्थानीय स्तर पर ही सोने की शुद्धिकरण और आभूषण निर्माण को बढ़ावा मिल सके।
पिछली सरकार पर निशाना, नए औद्योगिक निवेश का दावा
मुख्यमंत्री ने पिछली वाईएसआर कांग्रेस सरकार पर उद्योगों के पलायन का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल रही है। उन्होंने बताया कि 3 जुलाई को कडप्पा में प्रस्तावित रायलसीमा स्टील प्लांट की आधारशिला रखी जाएगी और 2028 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है।