राजनीति

साहीवाल गाय पर सियासत: आदिवासी महिलाओं के लिए योजना या राजनीतिक दांव? कांग्रेस-बीजेपी में जुबानी जंग तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर “गाय” को लेकर सियासत गरमा गई है। साय सरकार ने आदिवासी महिलाओं को साहीवाल नस्ल की गाय देने की योजना की घोषणा की है, जिसकी शुरुआत छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होने वाली है। इस योजना का उद्देश्य आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त करना और राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है। लेकिन इस पर कांग्रेस ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं और इसे “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया है।

साय सरकार की नई योजना, जिसके तहत छह जिलों में 325 आदिवासी महिलाओं को साहीवाल नस्ल की गायें प्रदान की जाएंगी। योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। बीजेपी ने इस योजना की घोषणा सोशल मीडिया के ज़रिए की, जिसके बाद कांग्रेस ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है।

उन्होंने याद दिलाया कि 2003 में डॉ. रमन सिंह की सरकार ने जर्सी गाय देने का वादा किया था, लेकिन वह योजना पूरी तरह से असफल रही। वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र साहू ने इस योजना को भाजपा की “गौरक्षा की आड़ में राजनीति” बताते हुए इसे दिखावटी कदम बताया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा आदिवासी महिलाओं के नाम पर सिर्फ दिखावटी योजनाएं लाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।

वहीं दूसरी ओर, डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “जब भी जनहित की कोई योजना सामने आती है, कांग्रेस नेताओं को सबसे पहले दर्द होता है। हमारा उद्देश्य है कि आदिवासी परिवार आत्मनिर्भर बनें और राज्य में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो।” उन्होंने कहा कि योजना पूरी तरह से व्यावहारिक है और इसे ज़मीन पर उतारने की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं।

साय सरकार की ये है तैयारी 

  • योजना पायलट प्रोजेक्ट के तहत 6 जिलों में लागू होगी।

  • 325 आदिवासी परिवारों को साहीवाल नस्ल की गाय दी जाएगी।

  • दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आदिवासी महिलाओं को सक्षम बनाने का दावा।

  • कांग्रेस ने पहले की असफल योजनाओं का हवाला देकर आलोचना की।

राज्य गठन के 25 साल बाद फिर गाय पर राजनीति

मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ को बने 25 साल पूरे हो चुके हैं। इन वर्षों में चार बार सरकार बदली और लंबे समय तक डॉ. रमन सिंह की अगुवाई में भाजपा सत्ता में रही। उस दौरान भी गायों को लेकर कई योजनाएं लाई गईं, लेकिन उनके ज़मीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठते रहे। अब जब भाजपा फिर सत्ता में आई है, तो गाय और आदिवासी – दोनों संवेदनशील मुद्दों पर एक साथ कदम उठाने की कोशिश नजर आ रही है।