कोल ब्लॉक आवंटन पर कांग्रेस का भाजपा पर तीखा हमला: “अडानी का साथ दे रहे हैं केदार कश्यप, जंगल कटाई पर चुप क्यों?”
20-Jul-2025
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक आवंटन और हसदेव अरण्य की जंगल कटाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आज प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य के भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोला।
दीपक बैज ने स्पष्ट कहा कि “राजस्थान को कोयला खनन की अनुमति 2015 और 2022 में केंद्र सरकार ने दी। परसा ईस्ट और कांता बासन (PEKB) कोल ब्लॉक और परसा कोल ब्लॉक – दोनों छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में आते हैं और इन्हें राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को सौंपा गया।”
उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और विधि मंत्री अरुण साव क्यों नहीं आए। बैज ने आरोप लगाया, “अरुण साव को पता है कि कोल ब्लॉक आवंटन केंद्र सरकार का अधिकार है, इसलिए उन्होंने प्रेस वार्ता से दूरी बनाई ताकि उन्हें झूठ बोलने की नौबत न आए।”
दीपक बैज ने मंत्री केदार कश्यप पर भी निशाना साधा और कहा कि “एक आदिवासी मंत्री होने के बावजूद केदार कश्यप हसदेव और तमनार में जंगलों की कटाई पर चुप हैं। जब कांग्रेस आदिवासियों के हक में आवाज उठा रही है, तब केदार कश्यप अडानी का बचाव कर रहे हैं। पूरा आदिवासी समाज यह देख रहा है कि केदार कश्यप किसके साथ खड़े हैं – जनता के या अडानी के?”
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने हसदेव क्षेत्र की कटाई रोकने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से कोल खदान आवंटन रद्द करने की मांग की थी। “लेकिन भाजपा के सांसद और विधायक तब भी अडानी के बचाव में खड़े थे, ना कि छत्तीसगढ़ की जनता के पक्ष में,” उन्होंने कहा।
दीपक बैज ने दावा किया कि “भाजपा की राजस्थान सरकार को कोल खनन की अनुमति देने के बाद खुद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया था। इससे साफ है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें मिलकर छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को लूटने में लगी हैं।”
अंत में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि “कांग्रेस आर्थिक नाकेबंदी के माध्यम से इस लूट को रोकेगी। जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रहेगी। भाजपा झूठ बोलकर अपने छत्तीसगढ़ और आदिवासी विरोधी चेहरे को छिपा नहीं सकती।”
यह सियासी जंग अब पर्यावरण, खनिज संसाधन और आदिवासी अधिकारों को लेकर निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जनता की अदालत में किसकी बात ज्यादा असर करेगी, यह आने वाले वक्त में साफ होगा।