श्रावण मास में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व – आत्मशुद्धि और शिवभक्ति का सर्वोच्च साधन
श्रावण मास हिन्दू धर्म में वह पावन काल होता है, जब संपूर्ण सृष्टि शिवमय हो जाती है। वर्षा की हर बूंद जैसे गंगाजल बनकर शिवलिंग पर अर्पित होती है, और चारों दिशाओं में “ॐ नमः शिवाय” की पावन गूंज सुनाई देती है। यह महीना सिर्फ पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तपस्या और शिव में लीन होने का सशक्त अवसर है।
रुद्राभिषेक का महत्व
रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक अत्यंत प्रभावशाली और शुभ अनुष्ठान है। इसे श्रावण मास में करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश
मानसिक शांति और स्थिरता
मनोकामना पूर्ति
रोग और बाधाओं से मुक्ति
जीवन में सकारात्मकता और सफलता
रुद्राभिषेक के श्रेष्ठ दिन
श्रावण मास के सोमवार को रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है।
इसके अलावा श्रावणी अमावस्या, श्रावण पूर्णिमा, और प्रदोष व्रत के दिन भी रुद्राभिषेक करना विशेष फलदायी होता है।
रुद्राभिषेक विधि
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सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें
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शिवलिंग को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं
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पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें
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बिल्वपत्र, धतूरा, आक, पुष्प अर्पित करें
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रुद्र सूक्त, महामृत्युंजय मंत्र या “ॐ नमः शिवाय” का जप करें
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अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें.