धर्म /अध्यात्म

देशभर में गणेश महोत्सव की धूम, जानें क्या है इस पर्व का महत्व?

सनातन धर्म में गणेश महोत्सव का विशेष महत्व है। यह पर्व भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। खासकर, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में गणेश चतुर्थी को लेकर एक अलग ही जोश देखने को मिलता है। हर घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और 10 दिनों तक पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

क्यों मनाया जाता है गणेश महोत्सव?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गणपति बप्पा स्वयं पृथ्वी पर आते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए, भक्त इस दिन को एक बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं।

कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

  • प्रतिमा की स्थापना: भक्त अपने घरों में या सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करते हैं।
  • पूजा-अर्चना: 10 दिनों तक गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिसमें उन्हें मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
  • विसर्जन: 10वें दिन, अनंत चतुर्दशी को, गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन जल में किया जाता है। भक्त इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयघोष करते हैं।

गणेश महोत्सव सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि यह एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है, जहां लोग एक साथ मिलकर इस उत्सव को मनाते हैं।