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गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं देखते चांद? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा और मान्यताएं

देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा घर लाकर उनकी पूजा करते हैं। लेकिन, इस त्योहार से जुड़ी एक खास मान्यता यह भी है कि इस दिन भूलकर भी चांद नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है, जिसके कारण यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

गणेश जी और चंद्रमा की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश चतुर्थी के दिन अपने प्रिय भोजन मोदक और लड्डू खाकर कैलाश पर्वत से लौट रहे थे। भारी भरकम शरीर और हाथी के सिर के कारण वे चलते-चलते रास्ते में गिर पड़े। यह देखकर चंद्रमा अपनी हंसी नहीं रोक पाए और जोर-जोर से हंसने लगे।

चंद्रमा के इस उपहास से गणेश जी को बहुत क्रोध आया। उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो भी गणेश चतुर्थी के दिन तुम्हें देखेगा, उस पर झूठा आरोप या मिथ्या दोष लग जाएगा। गणेश जी ने कहा कि तुम्हारी हंसी ने मेरे स्वरूप का अपमान किया है, इसलिए आज से तुम्हारा सौंदर्य और चमक भी फीकी पड़ जाएगी।

इस श्राप का प्रभाव

चंद्रमा ने तुरंत अपनी गलती का एहसास किया और भगवान गणेश से माफी मांगी। गणेश जी शांत हुए और उन्होंने कहा कि मेरा श्राप पूरी तरह से खत्म तो नहीं हो सकता, लेकिन इसे सीमित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गलती से इस दिन चांद देख लेता है, उसे कुछ उपाय करने होंगे, जिससे इस श्राप का प्रभाव कम हो सके। इसी वजह से आज भी गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखने की मनाही होती है।