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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: शोकसभा के कारण न्यायिक कार्य पूरे दिन स्थगित करना उचित नहीं
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने 72 वर्षीय वृद्ध मकान मालिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, कि बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित शोकसभा के आधार पर पूरे दिन के लिए अदालती मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं की जा सकती. हाई कोर्ट ने कहा कि दिवंगत वकील या न्यायिक अधिकारी को श्रद्धांजलि देना एक सम्मानजनक परंपरा है, लेकिन इसकी वजह से पूरे दिन न्यायिक काम रोकना न्याय व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करता है. यह आदेश जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने दिया.
दरअसल, रायपुर निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली आदेश के खिलाफ केस लड़ रहे हैं. उन्होंने हाईकोर्ट में रायपुर के किराया नियंत्रक के 2 फरवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी थी. जिला बार एसोसिएशन की शोकसभा के कारण पूरे दिन का न्यायिक कार्य स्थगित कर सभी मामलों की अगली तारीख तय कर दी गई. याचिका में बताया गया कि शोकसभा, प्रशासनिक कार्य या पीठासीन अधिकारी की अनुपलब्धता जैसे कारणों से बार-बार मामलों को टाल दिया जाता है. इससे कानून के तहत त्वरित न्याय का मूल उद्देश्य ही खत्म हो रहा है.
हाई कोर्ट ने याचिका पर दिए फैसले में कहा है कि न्याय तक निर्वाध पहुंच संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का अभिन्न हिस्सा है. हाई कोर्ट ने कहा कि वकीलों की हड़ताल और कार्य बहिष्कार पहले ही अवैध घोषित हैं. केवल वकील उपलब्ध नहीं हैं, इस आधार पर कोर्ट काम स्थगित नहीं कर सकते. शोकसभा के नाम पर भी काम रोकना सही नहीं है. हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए किराया नियंत्रक द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए शोकसभा के कारण याचिकाकर्ता के केस की सुनवाई टाल दी गई थी.
बता दें, कि हाई कोर्ट में किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता या महत्वपूर्ण न्यायिक हस्ती के निधन पर फुल कोर्ट रेफरेंस का आयोजन किया जाता है. शोक सभा दोपहर 3:30 बजे या 3:45 बजे आयोजित की जाती है, ताकि दिनभर का मुख्य न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो. इस दौरान बेहद संक्षिप्त आयोजन होते हैं.
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय सक्रिय, स्वास्थ्य सचिव विवाद की मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित फोन वार्ता को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संसद से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। सांसद की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी भाजपा सांसद के समर्थन में बयान देते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
फोन पर कथित तौर पर कहा- ‘जो करना है कर लो’
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने 20 मई को फोन पर बातचीत के दौरान उनके साथ रूखा, अपमानजनक और अनादरपूर्ण व्यवहार किया तथा कथित तौर पर कहा, “जो करना है कर लो।” सांसद ने इसे संसदीय मर्यादा, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक आचरण के खिलाफ बताते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र और रिमाइंडर के बावजूद नहीं मिला जवाब
शिकायत में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र और जनहित से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के कई मामलों को लेकर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को लगातार पत्र और रिमाइंडर भेजे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सांसद के मुताबिक, यह स्थिति कई महीनों से बनी हुई थी, जिससे क्षेत्र के विकास कार्य और जनहित के मुद्दे प्रभावित हो रहे थे।
प्रमुख सचिव से चर्चा के बाद हुई फोन पर बातचीत
शिकायत के अनुसार, 20 मई की शाम सांसद ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को फोन कर स्वास्थ्य विभाग की कथित निष्क्रियता की जानकारी दी। इसके बाद प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से चर्चा कर सांसद से बात करने और लोकसभा क्षेत्र से जुड़े मामलों के निराकरण के निर्देश दिए। वहीं निर्देश मिलने के बाद अमित कटारिया ने सांसद को फोन किया, लेकिन उस समय व्यस्त होने के कारण बृजमोहन अग्रवाल कॉल रिसीव नहीं कर सके। बाद में उन्होंने स्वयं कटारिया को कॉल बैक कर लंबित मामलों की जानकारी मांगी। इसी बातचीत के दौरान कथित रूप से विवाद की स्थिति बनी।
लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग
सांसद का आरोप है कि बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव का लहजा अहंकारपूर्ण और अमर्यादित था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले का संज्ञान लेकर इसे विशेषाधिकार समिति को भेजने का अनुरोध किया है। साथ ही अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के तहत कार्मिक मंत्रालय से भी स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। इसके बाद यह विवाद प्रशासनिक आचरण के साथ-साथ संसदीय विशेषाधिकार के मुद्दे के रूप में भी सामने आया है।
‘अगर सांसद के साथ ऐसा व्यवहार, तो आम लोगों के साथ क्या होता होगा’
शिकायत में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि यदि एक निर्वाचित लोकसभा सदस्य के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों के साथ अधिकारी का रवैया कैसा होता होगा, इसका सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारी पर अपनी जवाबदेही के प्रति उदासीन रहने का आरोप भी लगाया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमित कटारिया के खिलाफ पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों से कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं।
भूपेश बघेल ने सांसद बृजमोहन का किया समर्थन, सरकार पर साधा निशाना
मामले ने राजनीतिक रंग तब पकड़ लिया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनकी और बृजमोहन अग्रवाल की वैचारिक असहमतियाँ हो सकती हैं, लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधी है। देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य है। राजधानी रायपुर के सांसद हैं।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाते हुए कहा, एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का बर्ताव यह दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में है। यही कारण है कि अधिकारियों को जनता के काम और जनप्रतिनिधियों की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता, वे केवल दिल्ली और नागपुर को खुश कर अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सांसद का नहीं, बल्कि उन सभी मतदाताओं का भी अपमान है, जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा है। वे संगठन और शासन-प्रशासन दोनों को अच्छी तरह समझते हैं और अधिकारियों से कैसे निपटना है, यह भी जानते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद अपने मतदाताओं को निराश नहीं करेंगे।
जुलाई में कम हुई बिजली खपत, स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रांतियों की पुष्टि नहीं: आधिकारिक विश्लेषण
रायपुर। रायपुर सिटी रीजन के जून एवं जुलाई 2026 के बिजली उपभोग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि जुलाई माह में बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। जून 2026 में कुल बिजली खपत 131.27 मिलियन यूनिट (एमयू) थी, जो जुलाई में घटकर 89.38 मिलियन यूनिट रह गई। इस प्रकार एक माह में बिजली खपत में 31.91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अधिक बिजली उपयोग करने वाले सभी उपभोक्ता वर्गों में खपत के साथ-साथ उपभोक्ताओं की संख्या में भी कमी आई है। 600 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 64.23 प्रतिशत तथा उनकी कुल बिजली खपत में 38.13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार 401 से 600 यूनिट श्रेणी में उपभोक्ताओं की संख्या 33.99 प्रतिशत तथा बिजली खपत 32.58 प्रतिशत घटी है।
विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि राज्य शासन की हाफ बिजली बिल योजना का सकारात्मक प्रभाव उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग के स्वरूप में दिखाई दे रहा है। जून माह में 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 96 हजार 777 थी, जो जुलाई में बढ़कर 2 लाख 56 हजार 471 हो गई। यह 30.34 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 1 लाख 20 हजार 615 से घटकर 60 हजार 921 रह गई, जो लगभग 50 प्रतिशत की कमी है। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपनी बिजली खपत को 400 यूनिट के भीतर रखने का प्रयास किया, जिससे उन्हें शासन की राहतकारी योजना का लाभ मिल सके।
आंकड़ों के अनुसार 0 से 100 यूनिट श्रेणी में उपभोक्ताओं की संख्या 53.12 प्रतिशत तथा 101 से 200 यूनिट श्रेणी में 51.79 प्रतिशत बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी का मौसम समाप्त होने, एयर कंडीशनर एवं कूलर जैसे विद्युत उपकरणों के उपयोग में कमी आने तथा ऊर्जा संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी बिजली खपत में आई कमी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार रायपुर सिटी रीजन के आधिकारिक आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जुलाई माह में बिजली की मांग में कमी आई है और उपभोक्ताओं ने अपनी बिजली खपत को नियंत्रित किया है। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि बिजली उपयोग में आया यह परिवर्तन मुख्यतः मौसमी परिस्थितियों, ऊर्जा संरक्षण की प्रवृत्ति तथा राज्य शासन की जनहितकारी योजनाओं के प्रभाव का परिणाम है।
आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण यह भी दर्शाता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब 400 यूनिट तक की श्रेणी में आ गए हैं, जिससे उन्हें शासन की राहतकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। उपलब्ध तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर स्मार्ट मीटर के संबंध में प्रचलित विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों की पुष्टि नहीं होती।
पुणे में छत्तीसगढ़ पर्यटन का दमदार रोड शो, निवेश और पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रभावी और दूरदर्शी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने उद्योग संगठन फिक्की के सहयोग से पुणे में भव्य पर्यटन रोड शो आयोजित कर राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों, वन्यजीव पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन तथा साहसिक पर्यटन की विविध संभावनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। यह आयोजन राष्ट्रीय पर्यटन बाजार में छत्तीसगढ़ की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग राज्य के पर्यटन स्थलों को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने तथा पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय विकास का सशक्त माध्यम बनाया जा रहा है। पुणे रोड शो इसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

रोड शो में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट, होटल व्यवसायी तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बी-टू-बी बैठकों के माध्यम से दोनों राज्यों के पर्यटन उद्योग के बीच नए पर्यटन पैकेज, निवेश, विपणन तथा व्यावसायिक सहयोग को लेकर सार्थक चर्चा हुई, जिससे भविष्य में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के नए अवसर सृजित होंगे।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि पर्यटन मंडल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में स्थापित करना है। उन्होंने होटल व्यवसायियों, ट्रैवल एजेंटों और टूर ऑपरेटरों से राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश-विदेश तक पहुंचाने में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए सभी हितधारकों को छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट पर्यटन अनुभवों का प्रत्यक्ष अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने कहा कि राज्य में पर्यटन अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अनेक नवाचारपूर्ण पहलें की गई हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के ट्रैवल ट्रेड से जुड़े प्रतिनिधियों से छत्तीसगढ़ के विविध पर्यटन सर्किटों और विशेष पर्यटन अनुभवों के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जसप्रीत सिंह भाटिया ने कहा कि पर्यटन मंडल के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से राज्य की समृद्ध विरासत, वन्यजीव, जनजातीय संस्कृति तथा आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान मिल रही है। ऐसे रोड शो पर्यटन उद्योग के लिए नए व्यावसायिक अवसरों का सृजन करने के साथ-साथ राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को भी सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम में चित्रकोट जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव मंदिर सहित राज्य के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। वहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग रात्रिभोज के साथ हुआ, जिसमें पर्यटन क्षेत्र में भविष्य के सहयोग, निवेश और संयुक्त पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में कुल आठ पर्यटन रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। पुणे इस श्रृंखला का तीसरा आयोजन रहा, जबकि इससे पूर्व दिल्ली और भुवनेश्वर में भी सफल आयोजन किए जा चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में छत्तीसगढ़ की सशक्त पहचान स्थापित करना तथा राज्य को प्रकृति, संस्कृति, विरासत, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को आर्थिक समृद्धि, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त आधार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग नवाचार, निवेश और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से राज्य की पर्यटन संभावनाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। पुणे पर्यटन रोड शो इसी दूरदर्शी सोच का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
भारतमाला घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 12.78 करोड़ की संपत्तियां अटैच; शेयर-म्यूचुअल फंड भी शामिल
रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर-विशाखापत्तनम नेशनल हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण में कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने 12.78 करोड़ रुपये की 62 चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की है। इन संपत्तियों में लगभग 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी शामिल हैं।
ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी करते हुए यह कार्रवाई की। एजेंसी के अनुसार, यह संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) से खरीदी गई थीं या फिर उसके बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियां हैं।
14 लोगों के खिलाफ अतिरिक्त अभियोजन शिकायत
ED ने इस मामले में जय प्रकाश गांधी समेत 14 अन्य लोगों के खिलाफ रायपुर की विशेष PMLA अदालत में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) भी दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे में अनियमितताओं के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया और बाद में उस राशि को विभिन्न निवेशों में लगाया।
EOW-ACB की FIR के आधार पर ED ने की जांच
ED ने जांच की शुरुआत छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR क्रमांक 30/2025 (23 अप्रैल 2025) के आधार पर की थी। यह मामला अभनपुर के तत्कालीन SDO (राजस्व)/CALA निर्भय साहू और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया था। बाद में विशेष अदालत (PC Act) में चार्जशीट भी पेश की गई।
नोटिफिकेशन के बाद खरीदी जमीन, फिर टुकड़े कर बढ़ाया मुआवजा
जांच में सामने आया कि कुछ भूमि मालिकों और निजी व्यक्तियों ने जमीन दलालों तथा राजस्व अधिकारियों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर 30 जनवरी 2020 को जारी अधिसूचना के बाद जमीन खरीदी और उसका फर्जी तरीके से विभाजन कराया। अधिक मुआवजा प्राप्त करने के लिए जमीन को कई छोटे हिस्सों में बांटा गया और परिवार के सदस्यों के नाम पर बिक्री व दान विलेख के जरिए हस्तांतरण किया गया।
56 लाख के हक पर मिले 9.83 करोड़
ED के अनुसार, जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को लगभग 56.76 लाख रुपये के वैध अधिकार के बदले करीब 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। इससे लगभग 9.27 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुई। जांच में पाया गया कि इस रकम को विभिन्न चरणों में घुमाकर अचल संपत्तियों, शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसमें परिवार के सदस्यों और संबंधित फर्मों के नामों का भी इस्तेमाल किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि गांव उगेतारा की भूमि के मामले में उमा तिवारी ने खुद को मृतक भूमि मालिक की गोद ली हुई बेटी बताकर कथित फर्जी राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर लगभग 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया।
पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
ED ने जय प्रकाश गांधी को 3 जून 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को की गई तलाशी कार्रवाइयों में 49 लाख रुपये नकद और लगभग 89.80 लाख रुपये मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। साथ ही, जमीन दलालों के सिंडिकेट से जुड़ी 23.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई थीं।
नई कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में ED द्वारा अब तक कुल लगभग 36.14 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है।
शिक्षा से विकसित छत्तीसगढ़ तक: मुख्यमंत्री विष्णु साय ने नीट क्वालीफाई विद्यार्थियों के साथ साझा किया भविष्य का रोडमैप
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रयास आवासीय विद्यालयों के नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि प्रदेश में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों के गरीब एवं आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 17 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता में उनके माता-पिता का आशीर्वाद, गुरुजनों का समर्पण और विद्यार्थियों की कठोर मेहनत समान रूप से शामिल है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आप सभी भविष्य के डॉक्टर हैं। समाज में डॉक्टर का स्थान भगवान के बाद माना जाता है। भगवान हमें जन्म देते हैं और डॉक्टर जीवन बचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, व्यवहारिक और मिलनसार डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ अच्छा व्यवहार स्वयं कई बीमारियों के उपचार का माध्यम बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज, प्रदेश और देश की सेवा को अपना सर्वोच्च दायित्व मानने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी संघर्षपूर्ण शिक्षा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों को शासन की ओर से पहले की तुलना में कहीं अधिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रदेशभर में नालंदा परिसर संचालित किए जा रहे हैं तथा 34 नए नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। वहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इसी वर्ष ट्रायबल यूथ हॉस्टल के 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों को मिलाकर 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। राज्य सरकार पांच नए मेडिकल कॉलेज भी स्थापित कर रही है, जिससे एमबीबीएस की 250 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देशभर में करोड़ों लोगों ने नशा नहीं करने की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह अभियान स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आगामी दो वर्षों तक संचालित होगा तथा इसमें माय भारत वालंटियर्स सहित बड़ी संख्या में युवा सहभागी बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि युवा स्वस्थ, संस्कारित, परिश्रमी और नशामुक्त रहेंगे तो स्वस्थ छत्तीसगढ़ और स्वस्थ भारत का निर्माण संभव होगा। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर और मस्तिष्क दोनों को प्रभावित करता है, अपराध को बढ़ावा देता है, पारिवारिक संबंधों को कमजोर करता है तथा पूरे परिवार को संकट में डाल देता है। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
जगदलपुर प्रयास आवासीय विद्यालय की छात्रा नेल्सा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के संसाधनों को लगातार बढ़ा रही है। प्रयास आवासीय विद्यालय इसका एक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चे यदि विदेश में अध्ययन करना चाहते हैं तो उनका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार वहन करती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला मुख्यालयों एवं प्रमुख शहरों में 34 नालंदा परिसर निर्माणाधीन हैं, जहां सातों दिन 24 घंटे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने।
अंबिकापुर प्रयास विद्यालय की छात्रा यामिनी पैकरा के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। शासकीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष विकसित करने के लिए स्मार्ट क्लास प्रारंभ की जा रही हैं, विद्यालयों का नवीनीकरण किया जा रहा है तथा शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब शासकीय विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तरह पेरेंट्स-टीचर मीटिंग आयोजित की जा रही है। विशेष अवसरों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा न्योता भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को मध्यान्ह भोजन के अतिरिक्त पौष्टिक भोजन भी मिल सके। जवाहर उत्कर्ष योजना के माध्यम से बच्चों को निजी विद्यालयों में भी प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में शासकीय विद्यालय निजी विद्यालयों से भी बेहतर बनेंगे।
जगदलपुर की छात्रा दिलेश्वरी साहू ने युवाओं की राजनीति एवं प्रशासन में भागीदारी को लेकर प्रश्न पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। डॉक्टर बनकर भी समाज और राष्ट्र की बड़ी सेवा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने सपनों के अनुरूप नौकरी, कृषि, राजनीति, जनसेवा अथवा व्यापार जैसे किसी भी क्षेत्र का चयन करना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और संस्कार हमेशा सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति सेवा का एक प्रभावी माध्यम है और लोकतंत्र के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। सेवा और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।
सरगुजा के छात्र समीर करकेट्टा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग चार से पांच दशकों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा। डबल इंजन सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से 31 मार्च 2026 को प्रदेश नक्सलमुक्त हुआ। उन्होंने कहा कि अब बस्तर और सरगुजा में पर्यटन की अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़ और रानीदाह जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के 60 देशों के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में बस्तर के धुड़मारास को स्थान दिया गया है। नई उद्योग नीति 2024-30 में पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है तथा होमस्टे योजना के माध्यम से जनजातीय परिवारों को पांच कमरों के मकान निर्माण के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव मंदिर को भारत सरकार की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है, जिसके लिए 168 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। साथ ही दंतेश्वरी, बम्लेश्वरी, चंद्रहासिनी, महामाया एवं बागेश्वरी शक्तिपीठों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। राम वन गमन पथ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों का विकास भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर में पर्यटन उद्योग के माध्यम से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
महासमुंद के छात्र हेमंत यादव के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। यह देश के मध्य में स्थित राज्य है और चारों महानगरों से बेहतर संपर्क रखता है। प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध है। देश के लगभग 19 से 20 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां कोयला, बॉक्साइट, हीरा, सोना, लिथियम और यूरेनियम जैसे बहुमूल्य खनिज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है। वर्तमान में लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है तथा ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त 30 हजार मेगावाट उत्पादन होगा। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है तथा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बस्तर संभाग में देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं पर लगभग 1700 करोड़ रुपये तथा सिकासार-कोड़ार पाइपलाइन परियोजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पशुपालन, मत्स्य पालन, हर्बल उत्पादन, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज तथा मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
सरगुजा के छात्र कोमल पटेल के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने कॉमनवेल्थ एवं ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया जैसे अभियान युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। जशपुर में 67 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा 60 करोड़ रुपये से आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खेल अलंकरण समारोह प्रारंभ किया है, जिसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, प्रशस्ति पत्र तथा शासकीय सेवा का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपये, स्वर्ण पदक विजेता को 3 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तथा उत्कृष्ट खेल मिशन का भी उल्लेख किया।
राजनांदगांव की छात्रा प्राची मलगामे के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था, लेकिन जो भी दायित्व मिला, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में आज भी वे प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता, केवल उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण से करना चाहिए।
सरगुजा की शाहिना अंसारी के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जनजीवन का महत्वपूर्ण आधार माना था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2014 को लाल किले से दिए गए आह्वान के बाद देश में स्वच्छता के प्रति व्यापक जागरूकता आई है। गांव-गांव में शौचालय बने हैं और लोगों की आदतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
दुर्ग के छात्र निखिल कुमार ठाकुर के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं में संस्कार, बड़ों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और नालंदा तथा तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय विश्वभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते थे। लंबे समय तक विदेशी शासन के कारण यह परंपरा प्रभावित हुई, लेकिन आज भारत आर्थिक दृष्टि से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, मेक इन इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और ब्रह्मोस जैसी उपलब्धियां नए भारत की शक्ति का परिचायक हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि हाल ही में प्रारंभ की गई सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशवासी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे शासन तक पहुंचा सकते हैं। इस व्यवस्था में लगभग 8 हजार अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के लिए जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भी अपने हॉस्टल अथवा शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को इस माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभ के डेढ़ माह में ही इस व्यवस्था को अच्छा प्रतिसाद मिला है और बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन जैसी अनेक समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने अंत में बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री डैशबोर्ड भी विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी शासकीय संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस डैशबोर्ड के जरिए मुख्यमंत्री निवास से ही स्कूलों, अस्पतालों, शिक्षकों की उपस्थिति, राशन की उपलब्धता सहित विभिन्न सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक बेहतर सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार का संकल्प है।
खैरागढ़ में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, तीन मांगों को लेकर मुख्य मार्ग पर किया चक्काजाम
खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में जनसमस्याओं को लेकर कांग्रेस ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया. विधायक हर्षिता बघेल, पूर्व विधायक भुनेश्वर बघेल, कांग्रेस पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खैरागढ़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया. करीब दो घंटे तक हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा. कांग्रेस ने तीन मांगों को प्रमुखता से उठाया.
40 ट्रैक्टरों के साथ निकाली रैली
आंदोलन की शुरुआत ग्राम खपरी सिरदार से हुई, जहां से करीब 40 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों ने रैली निकाली. यह रैली भंडारपुर होते हुए ढारा के नितिन चौक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने डोंगरगढ़-खैरागढ़-कवर्धा मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया. प्रदर्शन के चलते सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों और यात्री बसों की लंबी कतारें लग गईं तथा राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की सड़कें बदहाल हैं, किसान खाद के लिए भटक रहे हैं और लगातार बिजली कटौती से आम जनता परेशान है, लेकिन सरकार इन मूलभूत समस्याओं के समाधान के बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित है, स्थिति देखते हुए खैरागढ़ और डोंगरगढ़ से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे.
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उनका ज्ञापन लिया और लिखित आश्वासन दिया कि डोंगरगढ़-खैरागढ़ सड़क के मरम्मत कार्य की शुरुआत परसों से कराई जाएगी. इसके बाद कांग्रेस ने अपना चक्काजाम समाप्त कर दिया. इस प्रकार का सड़क जाम स्थानीय स्तर पर प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रमुख माध्यम बनता रहा है.
जानिए क्या है मांगे ?
- खपरी सिरदार से ढारा के नितिन चौक तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रस्तावित करीब 12 किलोमीटर सड़क का तत्काल निर्माण कराया जाए.
- अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाकर बढ़े हुए बिजली बिलों से उपभोक्ताओं को राहत दी जाए, और स्मार्ट मीटर लगाना बंद किया जाए.
- किसानों को उचित मूल्य पर समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए.
नशा दीमक की तरह जीवन को खोखला कर देता है: राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशव्यापी 'नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के वर्चुअल शुभारंभ के साथ ही बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में भी इस महाअभियान का शंखनाद हुआ। मुख्य अतिथि की आसंदी से राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि "नशा एक दीमक की तरह है जो न केवल व्यक्ति को खोखला करता है, बल्कि उसके परिवार, माता-पिता के सपनों और भविष्य को भी तबाह कर देता है।

बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार व समाज को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि देश में जितने भी बड़े परिवर्तन हुए हैं, वे युवाओं के दम पर ही संभव हुए हैं। युवाओं को नशे के चंगुल से मुक्त रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगानी होगी।
100 सप्ताह तक चलेगा जनजागरूकता का महाअभियान
इस संकल्प अभियान के तहत आगामी 100 हफ्तों तक जिले भर में खेल, कला, संस्कृति और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने नशामुक्ति पर केंद्रित एक बेहद संवेदनशील व आकर्षक नाटिका का मंचन किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने युवाओं को संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का विनाश करता है। हमारी युवा पीढ़ी को सही संस्कार और विचार अपनाकर अपने भविष्य को सुरक्षित करना होगा। एक समृद्ध और स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए युवाओं का व्यसनमुक्त होना अनिवार्य है। इस 100-साप्ताहिक अभियान में जिले के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, जिला पंचायत सदस्य ईशान वैष्णव, कलेक्टर कुलदीप शर्मा, खेल अधिकारी सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में युवा उपस्थित थे।
स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय, कहा—
रायपुर। वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।
उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि नए कानूनों से न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हुई है। कागजी औपचारिकताओं में कमी आई है तथा सीमित संसाधनों में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने में भी ये कानून अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने नौ नए साइबर थाने प्रारंभ किए हैं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
दिल्ली में होगी मध्यप्रदेश कांग्रेस की बड़ी समीक्षा बैठक, संगठन में बड़े बदलाव के संकेत
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में कसावट और कसाव लाने की कवायद तेज हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश के शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब किया है, जहां 4 अगस्त को प्रदेश संगठन की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत सभी प्रदेश सह-प्रभारियों को विशेष रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
संगठन सृजन और जिलाध्यक्षों के कामकाज का होगा रिव्यू
सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में मध्यप्रदेश में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन’ अभियान की गहन समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, जिला स्तर पर पार्टी की स्थिति का आकलन करने के लिए सभी जिलाध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट का रिव्यू होगा। खबर है कि जिन जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है या जो संगठन की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं, उनकी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर उन्हें पद से हटाने की तैयारी भी कर ली गई है।
इन मुद्दों पर बनेगी भविष्य की रणनीति
4 अगस्त को होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा प्रदेश में संगठन को फिर से मजबूत करना है। बैठक के दौरान- प्रदेश संगठन की वर्तमान स्थिति और जिला-ब्लॉक स्तर पर चल रही गतिविधियों की समीक्षा होगी। आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को लेकर नया रोडमैप तैयार किया जाएगा। राज्य के मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने और पार्टी के रुख को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। आलाकमान की इस समीक्षा बैठक के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में कई बड़े और प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में लोक भवन से ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आज देशभर में प्रारंभ हुए ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन तथा विभिन्न युवा संगठनों के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया और समाज को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से देशभर के युवाओं को संबोधित करते हुए 100 सप्ताह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और यदि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग करें, तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से स्वयं नशामुक्त जीवन अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने का आह्वान किया।
लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं ने उत्साहपूर्वक देखा। राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया।

उल्लेखनीय है कि ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ 2 अगस्त 2026 से प्रारंभ होकर आगामी 100 सप्ताह तक देशभर में संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), माय भारत युवा संगठन तथा अन्य युवा संगठनों के सहयोग से विविध जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम, जागरूकता रैलियाँ, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ, वाद-विवाद, निबंध लेखन, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लघु फिल्म प्रदर्शन, सोशल मीडिया अभियान तथा सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।
अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर इसे जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनाया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
भाजपा का सहयोग केंद्र सोमवार से शुरू, पांच दिन सुनेंगे मंत्री जनता की समस्याएं
रायपुर। भाजपा के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दोबारा सहयोग केंद्र की सोमवार से शुरुआत होने जा रही है. 3 से 7 अगस्त तक कैबिनेट मंत्रियों के बैठने का सिलसिला चलेगा. इस दौरान वह कार्यकर्ताओं और आमजनों की समस्याएं सुनेंगे.
सहयोग केंद्र प्रभारी सच्चिदानंद उपासने के मुताबिक सहयोग केंद्र में आगामी 3 अगस्त से लगातार पांच दिन राज्य सरकार के मंत्री दोपहर 3 से 5 बजे तक प्रदेश भर से आने वाले कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे. साथ ही इसके निराकरण की पहल भी करेंगे. इसके लिए कार्यकर्ताओं को दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक प्रदेश कार्यालय आकर पंजीयन कराना होगा. आबंटित टोकन के आधार पर क्रमशः सुनवाई होगी.
सहयोग केंद्र में 3 अगस्त को मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, 4 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, 5 अगस्त को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, 6 अगस्त को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और 7 अगस्त को कृषि मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित रहेंगे.
IPS रतनलाल डांगी मामले में हाईकोर्ट पहुंची पीड़िता, IAS अधिकारी से जांच की मांग
बिलासपुर। आईपीएस अफसर रतनलाल डांगी के खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर IPS की बजाय IAS अफसर से जांच की मांग की है। याचिकाकर्ता पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा है कि दोनों आईपीएस अधिकारियों को उक्त मामले की जांच का अधिकार ही नहीं है। पीड़िता ने उक्त मामलें में आईपीएस अधिकारी के स्थान पर आईएएस अधिकारी से जांच कराने के लिए अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है।
याचिका में बताया गया है कि तत्कालीन आईजीपी आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया, जबकि आनंद छाबड़ा रतनलाल डांगी के समान रैंक के अधिकारी हैं, अतः उन्हें उक्त मामले की जांच की अधिकारिता नहीं है। आईपीएस आनंद छाबड़ा के विरूद्ध महादेव सट्टा एप मामले में आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है, अतः पीड़िता उक्त अधिकारी से अपने मामले की जांच नहीं कराना चाहती है। इसके साथ ही मिलना कुर्रे जो कि तत्कालीन डीआईजीपी के पद पर पदस्थ थी, जो आईपीएस रतनलाल डांगी से एक रैंक नीचे की अधिकारी है। लिहाजा IPS मिलना कुर्रे को भी उक्त मामले की जांच की अधिकारिता नहीं है।
अवैध संपत्ति की जांच और सेवा से बर्खास्त करने की मांग
याचिका के अनुसार आईपीएस डांगी के विरूद्ध इतने गंभीर आरोप लगने के बावजूद भी राज्य शासन द्वारा उन्हें सेवा से निलंबित नहीं किया। पीड़िता ने अपनी याचिका में सीनियर आईएएस अधिकारी और महिला आईएएस अधिकारी से उक्त गंभीर शिकायत की जांच कराए जाने व आईपीएस डांगी के राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ राज्य में बनाई गई अवैध संपत्ति की जांच पश्चात् आईपीएस रतनलाल डांगी को सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है।
आरक्षण पर विवादित पोस्ट पड़ी भारी, 'जनमन' के संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी सेवा से हटाए गए
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक पत्रिका ‘जनमन’ के संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी को फेसबुक पर आरक्षण को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद सेवा से हटा दिया गया है। आरक्षण पर की गई इस विवादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बढ़ते आक्रोश के बाद यह कार्रवाई की गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आरक्षण पर की गई इस टिप्पणी पर सरकार ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। अनिल द्विवेदी की इस व्यक्तिगत टिप्पणी पर सरकार की गहरी नाराजगी का असर हुआ और उनकी छुट्टी कर दी है।
छत्तीसगढ़ संवाद ने प्लेसमेंट कंपनी को लिखी चिट्ठी में ये कहा है कि अनिल द्विवेदी का कृत्य निविदा नियम एवं शर्ते की कंडिका 6 का उल्लंघन है।

क्या था पूरा मामला?
हाल ही में डॉ. अनिल द्विवेदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक) पर आरक्षण को लेकर एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक पोस्ट लिखी थी। पोस्ट की शब्दावली सामाजिक वैमनस्य बढ़ाने वाली थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां आरक्षण समर्थकों ने इस टिप्पणी को सामाजिक रूप से अपमानजनक और अमर्यादित बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया, वहीं भाषा के चयन को लेकर विभिन्न वर्गों ने आपत्ति जताई। अनिल द्विवेदी ने लिखा था कि – शिक्षा शेरनी का दूध है लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है जिसे पीकर 33% वाला 90% वाले पर भौंकता है।
मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद हटी पोस्ट
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह प्रकरण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंचा। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सरकार ने पोस्ट की भाषा और इसके सामाजिक प्रभावों को बेहद गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के तुरंत बाद डॉ. अनिल द्विवेदी ने उक्त विवादित पोस्ट को फेसबुक से हटा दिया था, हालांकि तब तक विवाद काफी बढ़ चुका था। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं आदिवासी समुदाय से आते हैं और ‘जनमन’ जिस जनसंपर्क विभाग द्वारा संचालित होती है, उसका प्रभार भी मुख्यमंत्री के पास ही है। ऐसे में सरकारी तंत्र और जनसंपर्क विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ पद पर आसीन व्यक्ति की इस तरह की टिप्पणी से सरकार की छवि पर सवाल उठने लगे थे।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी उठाए थे सवाल
इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत भी गरमा गई थी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे प्रदेश के आरक्षित वर्गों और संविधान का अपमान बताया। डॉ. महंत ने अपने बयान में कहा था कि आरक्षण प्राप्त करने वाले लोगों के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग संविधान के तहत अधिकार पाने वाले करोड़ों लोगों का अपमान है। केवल पोस्ट हटाना या खेद व्यक्त कर देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा था कि जनसंपर्क विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, जो खुद आदिवासी समाज से आते हैं। ऐसे में ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर जिम्मेदारी देना और मामले पर सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा था कि संत रविदास जयंती जैसे अवसर पर जहां सामाजिक समानता का संदेश दिया जा रहा है, वहीं इस तरह की टिप्पणी गंभीर विरोधाभास दर्शाती है। कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेश के हर शहर और कस्बे तक लेकर जाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।
अग्रिम कर हस्तांतरण से छत्तीसगढ़ के विकास कार्यों को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को अग्रिम कर हस्तांतरण के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि राज्यों की विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समय से पहले कर हिस्सेदारी उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की संवेदनशील, दूरदर्शी और विकासोन्मुखी सोच का परिचायक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को अग्रिम कर हस्तांतरण के रूप में ₹3,602 करोड़ की राशि प्राप्त होने से प्रदेश में अधोसंरचना विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन को और गति मिलेगी। इससे सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी और विकास के लाभ अंतिम व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और समन्वय की भावना ही विकसित भारत के निर्माण का मजबूत आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार निरंतर राज्यों को सशक्त बनाने तथा उनकी वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रभावी निर्णय ले रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।
जबलपुर को सीएम डॉ. मोहन यादव की बड़ी सौगात, 362 करोड़ की सीवेज परियोजना समेत कई विकास कार्यों का किया लोकार्पण
भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 अगस्त को जबलपुर के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। उन्होंने यहां 362.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार ‘अमृत 1.0’ सीवेज परियोजना का शुभारंभ किया, कठौंदा, ललपुर और तेवर में बने तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया। उन्होंने सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी, गुरंदी में 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बने नए मछली बाजार का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पीएम स्वनिधि के हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड भी प्रदान किए। इतना ही नहीं, उन्होंने जबलपुर में इमारती लकड़ियों से फर्नीचर निर्माण के लिए फर्नीचर कलस्टर स्थापित करने और सांदीपनि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जबलपुर फर्नीचर निर्माण का नया केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत 11 लाख पौधरोपण महाअभियान का भी शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आकाशवाणी को नई पहचान दी और युवाओं को संचार तकनीक से परिचित कराया। देश की 80 करोड़ आबादी को नि:शुल्क राशन, पक्का मकान, नि:शुल्क शौचालय, हर घर नल से जल, आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिल रही है। रेहड़ी वाले छोटे व्यापारियों को पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभ मिल रहा है। आज जबलपुर के अनेक हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड प्रदान किए गए हैं। हर गरीब के जीवन में सुख का सूरज निकले, राज्य सरकार सहयोग की भावना से कार्य कर रही है। सरकार का अर्थ सहकार और सहकार का अर्थ परिवार की सहायता करना है।
ऋषि-मुनियों के समान हैं पेड़
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुनिया के सामने भारत वसुधैब कुटुम्बकम का एक आदर्श उदाहरण है। भारतीय परंपरा प्राचीनकाल से इसी भाव से आगे बढ़ती रही है। प्रकृति के साथ रिश्ता बनाने के लिए आज जबलपुर से 11 लाख पौधे लगाने के लिए पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया है। पेड़ हमारे जीवन में ऋषि-मुनियों के समान हैं, जिनसे हमें स्वच्छ हवा मिलती है। वृक्षारोपण के लिए नई मियावाकी पद्धति से एक एकड़ भूमि पर 12 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। यह क्षेत्र तीन साल में सघन वन बन जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां हरे-भरे सघन वन हैं। नदियां जंगलों को आबाद रखती हैं। लोगों को जल मिलता है। सभी को खुशहाली और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। नर्मदा नदी से गुजरात और राजस्थान को भी समृद्धि मिलती है। मध्यप्रदेश की जलराशि गंगा बेसिन और यमुना नदी से माध्यम से गंगा सागर तक जाकर समुद्र में मिलती हैं। चंबल और सोन जैसी नदियां गंगा-यमुना की धारा को रफ्तार देती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी गई है। वहीं, गुरंदी में मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से पक्के मत्स्य बाजार का लोकार्पण किया गया है। खुले में मछली बिकने से इसे नहीं खाने वालों को बड़ी कठिनाई होती है। दूसरी ओर, खाने वालों के लिए खानपान की शुद्धता पर असर पड़ता है।
यूसीसी की दिशा में आगे बढ़े हम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद कांग्रेस ने समाज को वोट बैंक के चश्मे से देखा। धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की गई। रहीम और रसखान की रचनाएं देखिए, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश में कहीं कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। यह बदलते दौर का भारत है। मध्यप्रदेश सरकार ने इसी भावना से हिंदू और मुस्लिम सहित सभी वर्गों के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। यूसीसी लागू करने के लिए राज्य सरकार ने 3 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे, जिसके बाद 10 लाख से अधिक सुझाव समिति के पास आए। इन सुझावों में 74 प्रतिशत मुस्लिम बहनों ने यूसीसी लागू करने का समर्थन किया। एक जैसे हैं, वैसे ही सभी हैं। इसी भावना से एक समान कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़े हैं।
देश के लिए हमारे काम बने मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग देश में सबसे अच्छा काम करने वाला विभाग है। हमारे द्वारा लागू कई काम देश में लागू हो रहे हैं। मध्यप्रदेश ने ब्रिटिशकाल के राजमार्ग कानून और फायर सेफ्टी एक्ट में संशोधन किया। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रतीक हैं। हमारे बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा मिले, इसीलिए प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए गए हैं। युवाओं का भविष्य संवारने के लिए दो साल में 10 हजार शिक्षक और पुलिस विभाग में 18 हजार पदों पर भर्ती की गई है। सभी विभागों के लगभग ढाई लाख से अधिक शासकीय सेवकों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पुलिस विभाग में ही 25 हजार अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए। देश की आजादी के बाद केवल सागर और उज्जैन में ही विश्वविद्यालय थे। लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। वर्तमान समय में 75 से अधिक विश्वविद्यालय हो चुके हैं। हमारी यूनिवर्सिटी ऐसी बनें, जहां विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता के साथ शिक्षा मिले। भविष्य में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी एक प्रकार से प्रदेश के एम्स की तर्ज पर विकसित होगी और यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
और निखरेगी संस्कारधानी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर के समग्र विकास के लिए अधिकारी मेट्रोपोलिटन सिटी का ड्राफ्ट तैयार करें। सरकार एक साल के अंदर जबलपुर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएगी। यहां चारों दिशा में नैसर्गिक सौंदर्य है। मदन महल के पास एक बड़ा जू (चिड़ियाघर) बनाया जाएगा, जो देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट तो पहले से है, अब तो चीता भी मध्यप्रदेश में जीता है। यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश मगरमच्छ, घड़ियाल, गिद्ध, तेंदुआ जैसे वन्यजीवों के मामले में भी अग्रणी राज्य है। एशिया महाद्वीप से चीता विलुप्त हो गया था, लेकिन मध्यप्रदेश की धरती पर आते ही उनकी संख्या 20 से बढ़कर 52 हो गए। उन्होंने कहा कि यह हमारे सहअस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। हम जीयो और जीने दो की भावना के साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रदेश की धरती से 100 साल पहले हाथी लुप्त हो गए थे। अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं। भविष्य में गैंडे और किंग कोबरा जैसे जीवों को भी लाकर बसाया जाएगा। वनों की समृद्धि के लिए और पर्यटन से रोजगार के अवसर दिलवाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बेटियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का होता है विकास : मंत्री लखन लाल देवांगन
रायपुर। वाणिज्य उद्योग, श्रम एवं आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन आज जिला कुडो संघ द्वारा मंगल भवन, कटघोरा में आयोजित राज्य स्तरीय आवासीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई प्रतिभाशाली बेटियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना केवल उन्हें स्वयं की सुरक्षा के लिए सक्षम बनाना नहीं है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, साहस और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है। जब हमारी बेटियाँ आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनती हैं, तभी एक सुरक्षित, सशक्त और विकसित समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में खेल अधोसंरचना के विकास, प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करना है।
मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि भारत सरकार भी खेलो इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने और खिलाड़ियों को बेहतर मंच प्रदान करने का कार्य कर रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के खिलाड़ियों को नई पहचान और बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियाँ आज खेल, शिक्षा, कला और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उन्हें उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराकर देश के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह राज्य स्तरीय आवासीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर प्रतिभागियों को जीवन की हर चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना करने, अनुशासित जीवन जीने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री देवांगन ने जिला कुडो संघ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर बेटियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी विकास करते हैं।
इस अवसर पर पार्षद नरेंद्र देवांगन, पार्षद जनक राजपूत, कुडो कराते संघ की अध्यक्ष सीता रजक सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
