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संसदीय समिति की बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया छत्तीसगढ़ के हाईवे विकास का मुद्दा

नई दिल्ली। संसद भवन एनेक्सी में आयोजित संसदीय स्थायी समिति की बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से "देश में नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं" पर दी गई प्रस्तुति के दौरान उन्होंने राज्य के लिए वित्तीय आवंटन, परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल किए।

बैठक में सांसद अग्रवाल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ में हाई-स्पीड कॉरिडोर और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए आवंटित तथा वास्तविक रूप से खर्च की गई राशि का विस्तृत ब्यौरा मांगा। साथ ही वर्ष 2014 से पहले और उसके बाद राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई, नए निर्माण और प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर की जानकारी भी मांगी।

उन्होंने राज्य में शहरी क्षेत्रों की यातायात समस्या को कम करने के लिए रिंग रोड, बाईपास और पुल निर्माण परियोजनाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा 1 लाख और 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को डीकंजेशन नीति के तहत प्राथमिकता दिए जाने की जानकारी भी मांगी।

सांसद ने औद्योगिक विकास के संदर्भ में DPIIT द्वारा चिन्हित NICDC नोड्स, स्मार्ट सिटी योजना में छत्तीसगढ़ की भागीदारी तथा राज्य में 2-लेन से 4-लेन और 4-लेन से 6-लेन में अपग्रेड किए गए राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर भी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।

बैठक के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के भूमिबद्ध (लैंडलॉक्ड) राज्यों को प्रमुख समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जाएं। उन्होंने नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत करने, औद्योगिक निवेश में क्षेत्रीय संतुलन बनाने, पिछड़े क्षेत्रों के लिए रियायती संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अतिरिक्त भूमि के व्यावसायिक उपयोग से राजस्व बढ़ाने पर भी जोर दिया।

"छत्तीसगढ़ जैसे लैंडलॉक्ड (भू-आबद्ध) राज्य के प्रमुख औद्योगिक शहरों को विशाखापटनम और पारादीप जैसे प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ने के लिए सीधे एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर की आवश्यकता है। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी और हमारे उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इसके अतिरिक्त, बस्तर और अन्य नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में राजमार्ग विकास को केवल बुनियादी ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षा, आर्थिक विकास और स्थानीय युवाओं के रोजगार के मुख्य स्तंभ के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। "
— बृजमोहन अग्रवाल, सांसद (लोकसभा)