प्रदेश
फटाका स्टॉल्स का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर दीपक सोनी
बलौदाबाजार। दीपावली पर्व को देखते हुए बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में फटाका दुकानों की तैयारी पूरी हो गई है. जिले के कलेक्टर दीपक सोनी ने शुक्रवार को स्थल पहुंचकर फटाका दुकानों का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सोनी ने कहा कि दीपावली पर्व को देखते हुए जगह-जगह पर पटाखे स्टॉल्स लगाए गए हैं. ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है. जैसे- 5किलो का अग्निशामक यंत्र हर दुकान में होना चाहिए, पास में पानी के टैंकर या ड्रम होना चाहिए, फायर ब्रिगेड मौके पर उपस्थित होना चाहिए. जितने भी जगहों पर वायरिंग हुए हैं, वहां पर वायरिंग ढिली न हो. इन सब मापदण्डों का पालन हो रहा है या नहीं यह देखने के लिए हम आए हैं. इसके लिए दौरा कर रहे हैं और साथ ही अलग-अलग SDM को भी अपने-अपने क्षेत्र में दौरा करने के लिए कहा गया है.
उन्होंने बताया कि सुरक्षा मापदण्डों का पालन कराने की दिशा में अधिकारियों की एक विशेष कमेटी बनाई गई है. कमेटी द्वारा सेफटी ऑडिट कराया गया है, ताकि पटाखा वेंडर्स के लिए भी सुरक्षा के इंतेजाम पुख्ता हो सके. साथ ही पटाखा खरीदारों की भी सुरक्षा का इंतेजाम हो सके. दीपावली में पटाखा स्टॉल्स में सुरक्षा को लेकर कोई चूंक न हो, इसके लिए तैयारी की जा रही है.
शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकास की नींव - मंत्री ओपी चौधरी
भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने शुक्रवार को भानुप्रतापपुर (कांकेर) के हाई स्कूल मैदान में आयोजित सर्व पिछड़ा वर्ग समाज, छत्तीसगढ़ के 13वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में राज्य सरकार लगातार योजनाएं लागू कर रही है ताकि समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिल सके.
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विश्वरंजन ताम्रकार के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब हर तबका शिक्षित और सशक्त हो। इसलिए सरकार ने शिक्षा को विकास का आधार मानते हुए पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, आवासीय छात्रावास, और उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता कार्यक्रम शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, कौशल विकास केंद्र, और लघु उद्योग प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी प्रतिभा आर्थिक अभाव के कारण पीछे न रह जाए। ओपी चौधरी ने अपने संबोधन में कहा, “हमारी सरकार सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण ही वह दो स्तंभ हैं, जिन पर एक मजबूत और न्यायपूर्ण समाज की नींव रखी जा सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना ही छत्तीसगढ़ की असली ताकत है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।
मंच से समाज के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने सरकार के प्रयासों की सराहना की और शिक्षा व सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए। स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनमें समाज के युवाओं ने पारंपरिक नृत्य और गीतों से सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में मंत्री ओपी चौधरी ने समाज के वरिष्ठजनों का सम्मान किया और कहा कि सरकार आने वाले समय में पिछड़ा वर्ग समाज के लिए नई योजनाओं का खाका तैयार कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का हर नागरिक शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बने। इसी दिशा में हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”
रायपुर में औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद श्रम विभाग की त्वरित कार्यवाही, मेंटनेंस कार्य को करवाया बंद
रायपुर। हाल ही में रायपुर में घटित औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम विभाग ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। 8 अक्टूबर 2025 को मेसर्स छत्तीसगढ़ फेरो ट्रेडस प्रा. लिमि., गोंदवारा में क्रेन ऑपरेटर फर्नेस में ब्लास्ट के कारण पिघले लोहे की छींटों से गंभीर रूप से घायल हो गए और 10 अक्टूबर 2025 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद विभाग ने कारखाने के फर्नेस और ई.ओ.टी. क्रेन को बंद करने का आदेश जारी किया।
इसी प्रकार 12 अक्टूबर 2025 को लक्ष्मी नारायण रियल इस्पात प्रा. लिमि., बोरझरा में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन ई.ओ.टी. क्रेन पर मेंटेनेंस कार्य के दौरान लगभग 30 फीट की ऊँचाई से गिर गए और 13 अक्टूबर 2025 को उनकी मृत्यु हो गई। विभाग ने तत्काल कारखाने के स्ट्रीप मिल के ई.ओ.टी. क्रेन के मेंटेनेंस कार्य को बंद करवा दिया।
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने दोनों कारखानों को निर्देशित किया है कि वे सुरक्षित कार्यपद्धति (एसओपी) तैयार करें, श्रमिकों को उचित प्रशिक्षण और सुपरविजन प्रदान करें और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित करने कहा गया है। विभाग लगातार कारखानों में हो रही दुर्घटनाओं पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडर — बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं।
राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनकेंद्रित हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।”
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा।
अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफ अमित कुमार, एडीजी बीएसएफ नामग्याल, एडीजी (एएनओ) विवेकानंद सिन्हा, बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
नवा रायपुर में खुलेगी राष्ट्रीय तीरंदाजी अकादमी, त्रिपक्षीय समझौते पर हुए हस्ताक्षर
रायपुर। एनटीपीसी CSR के अंतर्गत खेलों को बढ़ावा देने खासकर तीरंदाजी के विकास के लिए 68.20 करोड़ रुपये के वित्तीय अनुदान के साथ नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने के लिए आगे आया है। आज एनटीपीसी नवा रायपुर कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में एनटीपीसी की ओर से दिवाकर कौशिक, क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (डब्ल्यूआर-।।) और सीईओ (एनएसपीसीएल); चंदन कुमार (आईएएस), सीईओ, नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरएएनवीपी) और तनुजा सलाम (आईएएस), निदेशक, खेल और युवा कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ सरकार ने एनटीपीसी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी अकादमी की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, ग्राम परसदा नवा रायपुर अटल नगर के पास सेक्टर-3 में स्थापित होने वाली यह तीरंदाजी अकादमी 13.47 एकड़ भूमि में फैली हुई है। अकादमी की प्रमुख सुविधाओं में 30 लेन की आउटडोर तीरंदाजी रेंज, वातानुकूलित इनडोर तीरंदाजी सुविधा, उत्कृष्ट प्रदर्शन केंद्र, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, कर्मचारियों के आवास, तीरंदाजी उपकरण, शूटिंग वीडियो विश्लेषण प्रणाली, डिजिटल स्कोरबोर्ड, दर्शकों के बैठने की व्यवस्था, 30 मीटर ऊंची हाई मास्ट लाइटिंग, भवनों और पार्किंग क्षेत्रों के लिए सौर पैनल, साइनेज, फव्वारे, मूर्तिकला कार्य आदि शामिल हैं।
इस अवसर पर, कौशिक ने सीएसआर के तहत खेलों को बढ़ावा देने में एनटीपीसी के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला और आशा व्यक्त की कि यह सुविधा नवोदित तीरंदाजों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी। तीरंदाजी को बढ़ावा देने में एनटीपीसी के सहयोग की सराहना करते हुए चंदन कुमार ने कहा कि एनआरएएनवीपी इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करेगा। यह राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी अकादमी राज्य में तीरंदाजी की छिपी प्रतिभाओं को एक उपयुक्त मंच प्रदान करेगी।
तनुजा सलाम ने कहा कि यह तीरंदाजी अकादमी राज्य में खेलों, विशेषकर तीरंदाजी को बढ़ावा देगी। नया रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी अकादमी के अलावा एनटीपीसी छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की शन्ना तहसील में स्थापित की जाने वाली ग्रासरूट तीरंदाजी अकादमी के लिए 20.53 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है।
साय सरकार ने दी पेंशनरों को खुशखबरी, तय की महंगाई राहत की पुनरीक्षित दरें…
रायपुर। दिवाली से पहले ही पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार खुशखबरी लेकर आई है. तमाम पेंशनर्स को एक सितंबर 2025 से पेंशन महंगाई राहत की पुनरीक्षित दर के हिसाब से मिलेगी. इस संबंध में वित्त विभाग ने तमाम विभागों को पत्र जारी कर दिया है.
वित्त विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि राज्य शासन के पेंशनरों, परिवार पेंशनरों को मूल पेंशन और परिवार पेंशन पर एक मार्च 2025 से 53% (सातवें वेतनमान में) और 246% (छठवें वेतनमान में) की दर से महंगाई राहत स्वीकृत की गई है.
इसके साथ अब राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि सातवां वेतनमान के तहत 01 सितम्बर 2025 से मूल पेंशन / परिवार पेंशन का 2% और वृद्धि उपरांत 55 प्रतिशत महंगाई राहत प्रदान की जाएगी. वहीं छठवां वेतनमान के तहत 1 सितम्बर 2025 से महंगाई राहत में 6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 252 प्रतिशत महंगाई राहत प्रदान की जाएगी.

DGP और IGP के राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की तैयारियां शुरू
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक तीन दिवसीय डी.जी.पी. और आई.जी.पी. का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के सभी राज्यों के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डी.जी.पी.) और पुलिस महानिरीक्षक (आई.जी.पी.) शामिल होंगे। सम्मेलन का आयोजन आई.आई.एम., नवा रायपुर में किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय (महादनी भवन) में उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को सम्मेलन की सभी तैयारियों को समय पर पूर्ण करने और उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने आयोजन की सुचारु व्यवस्था के लिए विभिन्न नोडल अधिकारियों की तत्काल नियुक्ति करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने सम्मेलन स्थल पर आने वाले डेलीगेट्स के आवागमन, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा एवं आवास व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने रायपुर के सर्किट हाउस, प्रशासन अकादमी और अन्य स्थानों पर अतिथियों के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, प्रमुख पुलिस अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, एन.आर.डी.ए., संस्कृति विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सक्ती जिले में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई, BMO को ACB ने किया गिरफ्तार
रायपुर। एसीबी की टीम ने आज सक्ती जिले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) राजेंद्र कुमार पटेल को अपने ही कार्यालय के बाबू से 15000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा. यह कार्रवाई बीएमओ कार्यालय डभरा के बाबू की शिकायत पर की गई. एसीबी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. एसीबी इकाई बिलासपुर की टीम ने पिछले डेढ़ साल में 35 ट्रैप की कार्रवाई है।
6 अक्टूबर 2025 को वार्ड नंबर 12 डभरा, जिला सक्ती निवासी उमेश कुमार चंद्रा बीएमओ कार्यालय डभरा में बाबू के पद पर पदस्थ है. उन्होंने एसीबी इकाई बिलासपुर में शिकायत की थी कि उसकी यात्रा भत्ता बिल की राशि 81000 रुपए का भुगतान पूर्व में हो चुका है. राशि भुगतान होने के एवज में डभरा के बीएमओ राजेंद्र कुमार पटेल ने उससे 32500 रुपए रिश्वत की मांग की. बीएमओ 16500 रुपए ले लिए हैं. 16000 रुपए की और मांग की जा रही है, जिसे वह बीएमओ को नहीं देना चाहता बल्कि उसे रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है.
जांच में शिकायत सही पाई गई. इसके बाद एसीबी ने बीएमओ को रिश्वत लेते पकड़ने का जाल बिछाया. मोलभाव पर आरोपी ने 15000 रुपए लेने सहमति दी, जिस पर ट्रैप की योजना तैयार की गई. आज प्रार्थी को रिश्वती रकम 15000 रुपए आरोपी को देने के लिए भेजा गया. बीएमओ राजेंद्र कुमार पटेल डभरा स्थित अपने कार्यालय में प्रार्थी से 15000 रुपए रिश्वत ले रहा था, इस दौरान एसीबी की टीम ने बीएमओ को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा और रिश्वत रकम को आरोपी से बरामद किया.
अचानक हुई कार्रवाई से आसपास हड़कंप मच गया. पकड़े गए आरोपी से रिश्वत की रकम 15 हजार रुपए जब्त कर एसीबी की टीम रिश्वतखोर बीएमओ के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई कर रही है. एसीबी ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.
बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक दिन, बंदूक छोड़ संविधान अपनाने वालों का स्वागत —मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जो युवा कभी माओवाद के झूठे विचारधारा के जाल में फंसे थे, उन्होंने आज संविधान, लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। जिन युवाओं ने वर्षों तक अंधेरी राहों पर भटककर हिंसा का मार्ग चुना, उन्होंने आज अपने कंधों से बंदूक उतारकर संविधान को थामा है। यह न केवल आत्मसमर्पण का क्षण है, बल्कि विश्वास, परिवर्तन और नये जीवन की शुरुआत है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में बंदूकें छोड़कर सुशासन पर विश्वास जताने वाले इन युवाओं से मेरी मुलाकात मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोष देने वाले पलों में से एक रही। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन की नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाएँ विश्वास और परिवर्तन का आह्वान हैं। इन्हीं नीतियों के प्रभाव से नक्सल प्रभावित इलाकों में बंदूक छोड़कर लोग शासन की विश्वास और विकास की प्रतिज्ञा को स्वीकार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज का यह दृश्य केवल सरकार की सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य का शिलान्यास है। हमारी सरकार आत्मसमर्पितों के पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह प्रतिज्ञा पूर्ण हो रही है। छत्तीसगढ़ अब शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।
पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन: दण्डकारण्य के 210 माओवादी कैडर लौटे समाज की मुख्यधारा में
राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम दृ पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।
बस्तर के लिए ऐतिहासिक दिन, 153 अत्याधुनिक हत्यारों के साथ आत्मसमर्पण
यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार जिनमें AK/47 SLR, INSA रायफल और LMG शामिल हैं, समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है। एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेता
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
मांझी-चालकी विधि से हुआ स्वागत, वंदे मातरम की गूंज के साथ संविधान के प्रति दिखाई निष्ठा
यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया। मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे। ‘वंदे मातरम’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
Dandakaranya Surrender: Total Cadre Profile
1. CCM 01 cadre
2. DKSZC 04 cadres
3.Regional Committee Member 01 cadre
4. DVCM 21 cadres
5. ACM level 61 cadres
6. Party Members 98 cadres
7. PLGA member/ RPC members/ Others 22 nos
Total 208 cadres
Total 110 Female] 98 Male
Dandakarnya Surrender: Total Weapon Details
1. AK 47 Rifle 19 nos
2. SLR rifle 17 nos
3. INSAS rifle 23 nos
4. INSAS LMG 01 nos
5. 303 Rifle 36 nos
6. Carbine 04 nos
7. BGL Launcher 11 nos
8. 12 Bore/ Single shot 41 nos
9. Pistol 01 nos
Total 153 weapons
बिहान की दीदियों ने तैयार किए संगिनी ब्रांड के आकर्षक गिफ्ट हैम्पर, ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कदम
रायपुर। दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत कार्यरत जिला सक्ती की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। ग्राम पलाड़ीखुर्द की राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की सदस्याएं अपने “संगिनी” ब्रांड के अंतर्गत आकर्षक गिफ्ट हैम्पर तैयार कर रही हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं डिज़ाइनर मोम उत्पाद शामिल हैं।

महिलाओं की सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह अभिनव पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जिला प्रशासन सक्ती द्वारा दीदियों को उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन के लिए निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। समूह की सदस्य पुष्पा दीदी ने बताया कि समूह द्वारा त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए राखी, रंगोली, आचार, गुलाल, तथा मोम उत्पाद जैसे विविध वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से हमें न केवल आर्थिक लाभ मिला है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
समूह को 2 लाख रुपये तक की आय
पुष्पा दीदी ने आगे बताया कि समूह की दीदियों ने पूर्व में आर-सेटी से डिज़ाइनर कैंडल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद यूट्यूब वीडियो के माध्यम से गिफ्ट हैम्पर तैयार करने का विचार आया। इस समय जिले की विभिन्न इंडस्ट्रीज और संस्थानों से गिफ्ट हैम्पर के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिनकी आपूर्ति दीदियों द्वारा समय पर और आकर्षक पैकेजिंग में की जा रही है। इस पहल से समूह को लगभग 1 लाख 50 हजार से 2 लाख रुपये तक का व्यवसाय प्राप्त होने की संभावना है। इन्हें अभी तक लगभग 60 हज़ार रुपए के गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर मिल चुके हैं । यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहा है। बिहान मिशन के तहत संचालित यह पहल महिलाओं की सृजनशीलता, परिश्रम और नवाचार की उत्कृष्ट मिसाल है, जो अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
दीपावली से पहले गन्ना उत्पादकों को मिला 5.98 करोड़ का तोहफा…
कवर्धा/पंडरिया। दीपावली पर्व से पहले कबीरधाम जिले के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. राज्य शासन ने वर्ष 2024-25 के पेराई सत्र के लिए गन्ना विक्रेता किसानों को प्रति क्विंटल 39.90 रुपए की दर से 5 करोड़ 98 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है.
यह निर्णय दीपावली से ठीक पहले आने के कारण किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. किसान अब त्योहार को और अधिक हर्षोल्लास से मना सकेंगे. किसानों ने इस निर्णय के लिए प्रदेश सरकार और विधायक भावना बोहरा के प्रति आभार व्यक्त किया है.
कारखाना प्रबंधन ने बताया कि गन्ना किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का उद्देश्य उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि किसानों के हित और खुशहाली ही उनकी प्राथमिकता है, और यह प्रयास उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है.
त्योहार के इस मौसम में राज्य शासन की यह पहल निश्चित रूप से किसानों के लिए “दीपावली का बोनस तोहफा” साबित हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई रौनक देखने को मिलेगी.
बड़ी खबर : छत्तीसगढ़ में जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता खत्म
रायपुर। जमीन से जुड़ी अगर रत्ती भर की भी कभी आपने कोई कार्रवाई की होगी, या कभी किसी किसान या जमीन के कारोबारी से पाला पड़ा हो तो आपको ऋण पुस्तिका की अहमियत अच्छे से पता है. इसको लेकर अच्छी यादें कम, बुरी यादें ज्यादा होंगी. अब साय सरकार ने ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लेते हुए जमीन की खरीदी-बिक्री में ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त कर दी है.
किसानों-जमीन मालिकों की समस्या को इंगित करते हुए पत्र में लिखा गया है कि कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख की प्रविष्टियों का इंद्राज कर किसानों को ऋण पुस्तिका जारी की जाती है. इसके अलावा किसानों को समय समय पर दिए जाने वाले ऋण, बंधक आदि का रिकार्ड भी ऋण पुस्तिका में दर्ज किया जाता है.
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में राजस्व अभिलेख ऑनलाइन कर दिए गए हैं, तथा भूमि पर भारित ऋण की प्रविष्टि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है. राजस्व अभिलेखों के गिरदावरी संबंधी रिकार्ड ऑनलाईन अद्यतन होते हैं जो ऋण पुस्तिका में अद्यतन नहीं हो पाते हैं.
पंजीयन अधिकारियों के द्वारा रजिस्ट्री के समय ऑनलाइन प्रविष्टियों से डाटा मिलान किया जाता है, दस्तावेज में शुल्क अवधारण के या पंजीयन के उद्देश्य से ऋण पुस्तिका की कोई विशेष प्रासंगिता नहीं होती हैं. पंजीयन अधिकारियों के लिए ऋण पुस्तिका के तथ्यों की सत्यता जांचने का कोई प्रावधान नहीं है.
प्रायः यह देखने में आया है कि भौतिक ऋण पुस्तिका की कमी अथवा अन्य कारणों से क्रेता किसानों को जमीन खरीदी-बिक्री के बाद नई ऋण पुस्तिकाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं. इससे पक्षकारों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा शासन की छवि भी खराब होती हैं.
प्रदेश में दस्तावेजों का ऑनलाईन पंजीयन वर्ष 2017 से किया जा रहा है, तथा भुईयां से किसानों को नक्शा खसरा व बी-1 की प्रति भी ऑनलाइन प्राप्त हो रही है. विक्रेता के स्वामित्व के वेरिफिकेशन हेतु पंजीयन साफ्टवेयर का भुईया के साथ इंटीग्रेशन किया गया है, जिससे पंजीयन के समय दस्तावेज में वर्णित तथ्यों का राजस्व विभाग के डाटा से ऑनलाइन मिलान होने पर पंजीयन की कार्रवाई की जाती है.
शासन द्वारा राजस्व विभाग के साफ्टवेयर में ऑटो म्यूटेशन का प्रावधान किया गया है. जिसके तहत् भूमि के पंजीयन के साथ ही स्वतः खसरे का बटांकन होकर नवीन बी-1 जनरेट हो जाता है, जिसमें क्रेता एवं विक्रेता के पास धारित भूमि की जानकारी स्वतः अद्यतन हो जाती है.
प्रदेश में भूमि के पंजीयन से लेकर अन्य कार्य ऑनलाईन हो रहे हैं, जिसके तहत् पंजीयन प्रणाली को पेपरलेस भी किया गया है। भुईयां पोर्टल पर भूमि का बी-1, खसरा एवं नक्शा आदि ऑनलाइन उपलब्ध है, और मान्य भी है. अतः अब भौतिक रूप से प्रदाय की जा रही ऋण पुस्तिका या किसान किताब की पंजीयन हेतु आवश्यकता नहीं है. अतः दस्तावेजों के पंजीयन के लिए किसानों / पक्षकारों से ऋण पुस्तिका की मांग न की जाए. भूमि के स्वामित्व फसल विवरण एवं पंजीयन हेतु प्रासंगिक अन्य तथ्यों की पुष्टि ऑनलाइन डाटा से अनिवार्य रूप से किया जाए.


‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’: दण्डकारण्य के 210 माओवादी कैडर लौटे समाज की मुख्यधारा में
रायपुर। राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।

यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं—समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है—एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।
यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे।
‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
नवगठित सक्ती जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना में रचा नया कीर्तिमान, प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुँचा- 30 हजार से अधिक परिवारों को मिला पक्का घर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ती जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन में एक नया इतिहास रच दिया है। नवगठित जिला होने के बावजूद, सक्ती ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2024-25 में 30 हजार 512 आवास पूर्ण कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल संख्यात्मक सफलता का प्रतीक है, बल्कि उन हजारों परिवारों के जीवन में आई स्थिरता, सुरक्षा और सम्मान की कहानी भी है, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे और असुरक्षित मकानों में जीवन व्यतीत किया था।
कच्चे से पक्के घरों तक का सफर- सक्ती बना मिसाल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सक्ती जिले में अब तक वर्ष 2016 से 2023 तक कुल 44 हजार 319 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया, जो 95ः लक्ष्य प्राप्ति दर्शाता है। वहीं, वर्ष 2024-25 में 30 हजार से अधिक मकान पूर्ण कर जिले ने मिशन मोड में कार्य का उदाहरण प्रस्तुत किया है। हर ग़रीब का पक्का घर राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता रही है । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छतीसगढ़ के सभी जिलों में
यह योजना प्रभावी ढंग से संचालित हुई। नियमित फील्ड विजिट, समयबद्ध वित्तीय सहायता, और हितग्राहियों के साथ सतत संवाद के परिणामस्वरूप यह उल्लेखनीय प्रगति संभव हुई।
टीमवर्क और जनसहभागिता से मिली सफलता
जिला पंचायत अध्यक्ष द्रौपदी कीर्तन चंद्रा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “हमारी प्राथमिकता रही है कि पात्र परिवारों तक योजना का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुँचे। टीमवर्क और ग्रामीणों के सहयोग से ही यह संभव हुआ है।” कलेक्टर ने कहा, “प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि यह हर ग्रामीण परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है। सक्ती जिला इसी दिशा में सतत प्रगति कर रहा है।”
वित्तीय पारदर्शिता और तेज क्रियान्वयन
वर्ष 2024-25 के लिए जिले को कुल 63 हजार 591 आवासों का लक्ष्य मिला, जिनमें से 52हजार 913 आवासों को स्वीकृति दी गई। निर्माण कार्य की गति बनाए रखने हेतु सरकार द्वारा तीन किश्तों में वित्तीय सहायता प्रदान की गई । पहली किश्त में 51हजार 427 हितग्राहियों को,दूसरी किश्त में 40 हजार 318 हितग्राहियों को और तीसरी किश्त में 25 हजार 65 हितग्राहियों को वित्तीय सहायता दी गई। समय पर किश्तें जारी होने से निर्माण कार्यों में तेजी आई और निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य पूरा किया जा सका।
गरीब परिवारों के जीवन में आया बदलाव
प्रधानमंत्री आवास योजना ने ग्रामीण अंचलों के गरीब परिवारों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास की नई किरण जगाई है। पक्के घरों के निर्माण से बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिला, बुजुर्गों को मौसम से सुरक्षा मिली और महिलाओं को घर-परिवार के संचालन में सुविधा हुई। यह योजना अब केवल आवास निर्माण कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के सामाजिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।
मोर आवास, मोर अधिकार पोर्टल -पारदर्शिता की दिशा में पहल
शासन द्वारा प्रारंभ किया गया “मोर आवास, मोर अधिकार” पोर्टल हितग्राहियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। इसके माध्यम से कोई भी पात्र व्यक्ति अपने आवेदन की स्थिति और पात्रता की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है, जिससे योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की समय पर किस्त जारी
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत हितग्राहियों को कुल 1 लाख 20 हजार की सहायता राशि तीन किश्तों में प्रदान की जाती है जिसके अन्तर्गत प्रथम किश्त में 40हजार, द्वितीय किश्त में 55 हजार और तृतीय किश्त में 25 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसका उद्देश्य है कि कोई भी ग्रामीण परिवार बेघर न रहे और प्रत्येक पात्र हितग्राही को सुरक्षित, टिकाऊ और सम्मानजनक आवास प्राप्त हो सके।
सक्ति की सफलता - प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा
सक्ति जिले की यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दर्शाती है कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण समाज मिलकर कार्य करते हैं, तो बड़े लक्ष्य भी समय पर प्राप्त किए जा सकते हैं।
धान उपार्जन अवधि में उड़ीसा व अन्य राज्यों से अवैध परिवहन पर सख्त निगरानी
महासमुंद। छत्तीसगढ़ शासन की खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान एवं मक्का उपार्जन नीति के तहत इस वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर सुचारू और पारदर्शी रूप से धान खरीदी सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिले में उड़ीसा एवं अन्य राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर छत्तीसगढ़ के उपार्जन केंद्रों में विक्रय को रोकने के लिए कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर 16 जांच चौकियों (चेक पोस्ट) की स्थापना की जा रही है।
ये चौकियां जिले की सीमाओं पर आगामी 01 नवंबर 2025 से धान उपार्जन अवधि की समाप्ति तक संचालित रहेंगी। इन चौकियों पर राजस्व, कृषि उपज मंडी समिति, वन विभाग और पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी जांच चौकियों पर वाहनों की गहन जांच की जाएगी ताकि बाहरी राज्यों से आने वाले अवैध धान के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। इसके साथ ही, सभी तहसीलों में एक-एक निरीक्षण दल भी गठित किया गया है, जो क्षेत्र में अवैध भंडारण और परिवहन गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखेगा। कलेक्टर लंगेह ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले ही सतर्क रहें और आवश्यकतानुसार छापामार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन ने इस वर्ष भी किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए सुदृढ़ और पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। शासन की नीति के अनुसार, राज्य के पंजीकृत किसानों से ही धान की खरीदी की जाएगी तथा प्रत्येक उपार्जन केंद्र में टोकन प्रणाली और बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि जिले के वास्तविक किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करें और बाहरी राज्यों से आने वाले अवैध व्यापारियों के कारण राज्य की नीति और किसानों के हितों को कोई क्षति न पहुंचे।
कटघोरा को जिला बनाने की मांग, SDM को सौंपा गया ज्ञापन
कोरबा। राज्योत्सव के अवसर पर कटघोरा को जिला घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. वर्षों से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे अधिवक्ताओं और स्थानीय संगठनों ने एक बार फिर प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि अगर 1 नवंबर तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
कटघोरा के अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपते हुए कटघोरा को अलग जिला बनाए जाने की मांग की. मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि राज्योत्सव के दिन – यानी 1 नवंबर को कटघोरा को जिला घोषित किया जाए. अब एक बार फिर यह मांग जोरों पर है, जिसमें 50 से अधिक सामाजिक संगठन और समुदाय समर्थन दे चुके है.
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों में जनप्रतिनिधियों ने कटघोरा को जिला बनाने का वादा किया था, लेकिन चुनाव के बाद यह वादे पूरे नहीं हुए। अब जनता की मांग है कि वर्तमान सरकार इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करें.
होटलों में खाद्य विभाग की रेड, मिठाइयों के लिए गए सैंपल
रायगढ़। जिले में त्यौहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम होटलों में जांच कर रही है। दूसरे दिन जांच टीम ने किरोड़ीमल नगर क्षेत्र के कई होटलों में जांच की। इस दौरान दो होटलों की मिठाइयों पर संदेह के आधार पर सैंपल लेकर जांच के लिए राज्य प्रयोग शाला में भेजा गया है।
16 अक्टूबर को अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन सुधा चौधरी व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा जिले के मिठाई दुकानों और खाद्य निर्माण जगह पहुंचकर अचानक निरीक्षण किया।टीम ने संदेह के आधार किरोड़ीमल नगर के पूजा स्वीट्स से चमचम और बेसन लड्डू, होटल संदीप से मीठी बूंदी और छेना ड्राई रसगुल्ला का नमूना लिया। जिसे जांच के लिए रायपुर भेजा है।
यदि नमूनों की जांच में मिलावट या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित होटलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम ने होटल के सभी मिठाइयों की जांच की। जहां संदेह पर कुछ मिठाइयों के सैंपल लिए गए। वहीं जांच टीम ने सभी होटल संचालकों को निर्देशित किया है कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाए और सभी खाद्य निर्माण में गुणवत्ता व शुद्धता का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए।