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रायपुर साहित्य उत्सव 2026: ‘वाचिक परम्परा में साहित्य’ पर गहन विमर्श, भारतीय मौखिक विरासत पर हुआ मंथन
रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में लाला जगदलपुरी मण्डप में द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में “वाचिक परम्परा में साहित्य” विषय पर गहन, विचारोत्तेजक एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई, जिसमें भारतीय साहित्य की मौखिक परम्पराओं की ऐतिहासिक भूमिका और समकालीन प्रासंगिकता पर व्यापक विमर्श किया गया।
इस परिचर्चा में प्रख्यात साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्रही, शिव कुमार पांडे, डॉ. जयमती तथा सुधीर पाठक ने अपने विचार साझा किए। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र मिश्र ने की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में वाचिक परम्परा की विविध विधाओं और उनके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. महेन्द्र मिश्र ने कहा कि वाचिक परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह समकालीन साहित्य और समाज को समझने की एक सशक्त कुंजी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में वाचिक परम्पराओं का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक उनका संवेदनशील हस्तांतरण आज की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।
वक्ताओं ने वाचिक परम्परा को भारतीय साहित्य की मूल धारा बताते हुए कहा कि लोकगीत, लोककथाएँ, कहावतें, मिथक और जनश्रुतियाँ सदियों से समाज की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करती आई हैं। उन्होंने कहा कि लिखित साहित्य के उद्भव से पूर्व वाचिक परम्परा ही ज्ञान, इतिहास, जीवन मूल्यों और सामाजिक अनुभवों के संप्रेषण का प्रमुख माध्यम रही है, जिसने पीढ़ी दर पीढ़ी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा है।
रायपुर साहित्य उत्सव 2026: ‘डिजिटल साहित्य’ पर मंथन, प्रकाशकों के सामने चुनौतियाँ और नई संभावनाएँ
रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के अंतर्गत “आदि से अनादि तक” थीम पर आयोजित सत्रों की श्रृंखला में अनिरुद्ध नीरव मंडप में एक विचारोत्तेजक चर्चा सत्र संपन्न हुआ। “डिजिटल साहित्य : प्रकाशकों के लिए चुनौती” विषय पर केंद्रित इस सत्र में डिजिटल युग में साहित्य प्रकाशन की बदलती प्रकृति, संभावनाओं और चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया गया।
सत्र में प्रभात प्रकाशन, दिल्ली के प्रतिनिधि प्रभात कुमार ने डिजिटल माध्यमों के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ई-बुक्स, ऑडियो बुक्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के नए अवसर प्रदान किए हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल परिवर्तन के चलते पारंपरिक प्रकाशन मॉडल को नई प्रतिस्पर्धा और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सत्र के सूत्रधार डॉ. सुधीर शर्मा वैभव प्रकाशन, रायपुर ने डिजिटल तकनीक, कॉपीराइट संरक्षण, पाठकों की बदलती रुचियों और साहित्यिक गुणवत्ता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर संवाद को आगे बढ़ाया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल माध्यम को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में अपनाकर नवाचार के जरिए साहित्य प्रकाशन को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
किसानों के हित और रोजगार सृजन पर केंद्रित रही उर्वरक समिति की मुंबई बैठक, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया छत्तीसगढ़ में उर्वरक एवं रसायन निवेश का मुद्दा
मुंबई/रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने शुक्रवार को संसद की रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति के अध्ययन दौरे पर मुंबई पहुंचे। यहां उर्वरक क्षेत्र के सशक्तिकरण को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए।
इस अवसर पर उर्वरक विभाग, राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड (NFL), राष्ट्रीय रसायन एवं उर्वरक लिमिटेड (RCF), रामागुंडम उर्वरक निगम लिमिटेड (RCFL), हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL), इफको (IFFCO) एवं कृभको (KRIBHCO) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया।
चर्चा के दौरान सार्वजनिक, निजी, सहकारी, संयुक्त उद्यम (JV) तथा सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से नई उर्वरक इकाइयों की स्थापना पर विस्तार से मंथन किया गया। सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, कच्चे माल की उपलब्धता, बेहतर लॉजिस्टिक्स तथा कृषि प्रधान स्वरूप की ओर विशेष ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि राज्य उर्वरक एवं रसायन क्षेत्र में निवेश के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि बहुल राज्य में उर्वरक इकाइयों की स्थापना से न केवल किसानों को समय पर एवं सुलभ उर्वरक उपलब्ध होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग (DCPC) तथा ओएनजीसी पेट्रो एडिशन्स लिमिटेड (OPaL) के प्रतिनिधियों के साथ भी सार्थक विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के विस्तार से छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को होने वाले दीर्घकालिक लाभों पर भी चर्चा हुई।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह संवाद देश की उर्वरक आत्मनिर्भरता, किसानों के हित संरक्षण, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश पर पड़ेगा।
होटल कारोबारी पर पुलिस बर्बरता: हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को 1 लाख मुआवजा देने का आदेश
बिलासपुर। दुर्ग जिले के भिलाई में होटल कारोबारी पर पुलिस की बर्बरता पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने व्यवसायी को अवैध रूप से गिरफ्तार करने और उसे जेल भेजने पर राज्य सरकार को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि राज्य सरकार जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मियों से इसकी वसूली कर सकती है। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी बर्बर घटनाएं रिपीट न हो।
दरअसल, भिलाई के अवंतीबाई चौक निवासी आकाश कुमार साहू लॉ स्टूडेंट है। इसके साथ ही वे परिवार के भरण-पोषण और आजीविका के लिए कोहका में होटल संचालित करते हैं। आकाश साहू ने अपने एडवोकेट के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस की अवैध कार्रवाई और अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता विधिवत पंजीकृत और लाइसेंस लेकर होटल चला रहा है। होटल संचालक ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी और जवान उनके होटल में पहुंचे। इस दौरान होटल में ठहरे लोगों से पूछताछ करने का बहाना बनाकर रजिस्टर और पहचान दस्तावेजों की जांच की। जिसके बाद बगैर महिला पुलिस बल के एक कमरे में जबरदस्ती घूस गए, जहां पुरूष और महिला ठहरे थे। उन्हें कमरे से बाहर लाया गया। इस दौरान मैनेजर के साथ दुर्व्यवहार किया गया। फिर कुछ समय बाद पुलिस अफसर और जवान फिर से होटल पहुंच गए।
इस दौरान होटल कर्मचारियों पर सोने के आभूषणों की चोरी का झूठा आरोप लगाया। इस पर पुलिस अधिकारियों को कर्मचारियों ने होटल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी दी और जांच करने कहा। पर पुलिस अफसर जांच करने के बजाय कमरों की तलाशी लेने पहुंच गए। उन्होंने कथित तौर पर होटल मैनेजर की बेहरमी से पिटाई की। जिसके बाद होटल मालिक को बुलाया गया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वो होटल पहुंचा तो उसने पुलिस अफसरों को संस्थान के मालिक होने की जानकारी दी। इतना सुनते ही पुलिस अफसर उसके साथ गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार करने लगे। विरोध करने पर उसे जबरिया हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट कर अभद्रता की गई। फिर बाद में बिना किसी वैध कारण के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
वहीं पुलिस अफसरों का कहना था कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस एक गुमशुदा लड़की की तलाश में उनके होटल पहुंची थी। जिस पर कमरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने दावा किया कि आकाश ने सरकारी काम में बाधा डाली। पुलिस वाहन की चाबी छीन ली और ड्राइवर के साथ हाथापाई की, जिससे शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में ले लिया और बाद में जेल भेज दिया।
इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी संज्ञेय अपराध के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। महज संदेह और कहासुनी के आधार पर जेल भेजना असंवैधानिक है। हिरासत में दिया गया मानसिक तनाव और अपमान मानवीय गरिमा को नष्ट करता है, जो अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। कानून के मुताबिक गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित में कारण बताना अनिवार्य है। बता दें, कि आकाश ने गिरफ्तारी मेमो पर खुद लिखा था कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस के साथ ही एसडीएम की भूमिका पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने बिना दिमाग लगाए पुलिस की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी और युवक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ शुरू की गई सभी आपराधिक कार्रवाई और पुलिस के इस्तगासा को निरस्त कर दिया है। राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि 4 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपये का भुगतान करे। सरकार को यह छूट दी है कि वह यह राशि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूल सकती है। भुगतान में देरी होने पर राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि पुलिस अधिकारियों के अवैध कार्य, गैर कानूनी रिमांड और पुलिस अत्याचार से आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को कमजोर करते हैं। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो।
रायपुर साहित्य उत्सव में ओपन माइक से नवीन प्रतिभाओं को मिला सशक्त मंच: पहले दिन चार सत्रों में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।
बीजापुर में प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ विधायक विक्रम मंडावी का प्रदर्शन, तहसील कार्यालय का किया घेराव
बीजापुर। नए बस स्टैंड के पीछे हाल ही में जिला प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में आज बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने नगर के करीब सात वार्डों का दौरा किया। तोड़े गए मकानों से प्रभावित परिवार के साथ तहसील कार्यालय का घेराव किया। विधायक और पीड़ित परिवार तहसील कार्यालय के सामने जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाही नहीं चलेगी”, “जिला प्रशासन होश में आओ” के नारे लगाए गए।
विधायक मंडावी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और प्रशासन की कार्रवाई को अमानवीय और जनविरोधी बताया। उन्होंने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए लोगों के आशियाने तोड़ना संवेदनहीनता का परिचायक है।
ये हैं चार सूत्रीय मांगें
प्रदर्शन के दौरान विधायक और ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
1. तोड़े गए मकानों का उचित मुआवजा तत्काल दिया जाए।
2. प्रभावित परिवारों को पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
3. बेघर हुए परिवारों को पुनः स्थायी रूप से बसाया जाए।
4. भविष्य में बसे हुए लोगों के घरों को अतिक्रमण के नाम पर न तोड़ा जाए।
मांगें पूरी नहीं हुई तो तेज होगा आंदोलन
धरना-प्रदर्शन के चलते तहसील कार्यालय के आसपास भारी संख्या में ग्रामीण जुटे रहे। मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अमला और पुलिस बल भी तैनात रहा। फिलहाल प्रशासन की ओर से मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का जंगल भ्रमण, बार नवापारा अभयारण्य में वन्य जीवन का निकट से किया अनुभव…
रायपुर। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने आज रायपुर में न्यूजीलैंड के साथ खेले जाने वाले अहम टी20 क्रिकेट मैच से प्रदेश के नैसर्गिंक सुंदरता को करीब देखा. क्रिकेट खिलाड़ियों के जंगल भ्रमण की तस्वीरें वन मंत्री केदार कश्यप ने सोशल मीडिया में साझा की हैं.
भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ टीम के अहम सदस्य संजू सैमसन, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह और कुलदीप यादव ने बार नवापारा वन्यजीव अभयारण्य का भ्रमण किया. इस दौरान वन्य जीवों को करीब से देखने के साथ अभयारण्य की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव-विविधता का अवलोकन किया.
बता दें कि रायपुर से लगभग 100-106 किमी दूर महासमुंद जिले में लगभग 245 वर्ग किलोमीटर पर फैले बार नवापारा अभयारण्य न केवल तेंदुआ, भालू, उड़ने वाली गिलहरी, सियार, चार सींग वाला मृग, चिंकारा, काला हिरण, बायसन के साथ बुलबुल, तोते, गिद्ध, मोर, कठफोड़वा, किंगफिशर, बगुले, ड्रोंगो भी नजर आते हैं.
रायपुर साहित्य उत्सव: “समकालीन महिला लेखन” पर विचारगोष्ठी, स्त्री अनुभवों और सामाजिक सरोकारों पर गहन विमर्श
रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन लाला जगदलपुरी मण्डप में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के प्रथम सत्र में “समकालीन महिला लेखन” विषय पर गहन एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई। इस सत्र में इंदिरा दांगी, श्रद्धा थवाईत, जया जादवानी तथा सोनाली मिश्र ने सहभागिता करते हुए महिला लेखन की बदलती भूमिका और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन अब भावनाओं की अभिव्यक्ति के साथ ही समाज के यथार्थ, संघर्ष, असमानताओं और संवेदनाओं को सशक्त रूप में सामने लाने का माध्यम बन चुका है। आज का स्त्री लेखन आत्मकथात्मक होने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन को भी प्रतिबिंबित कर रहा है, जो पाठक को सोचने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित करता है।
परिचर्चा के दौरान महिला सशक्तिकरण, समानता, सामाजिक न्याय और बदलते पारिवारिक व सामाजिक ढांचे जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि महिला लेखन ने साहित्य में नई भाषा, नए अनुभव और नए सरोकार जोड़े हैं, जिससे साहित्य अधिक समावेशी और यथार्थपरक बना है।
वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है। यह न केवल स्त्री अनुभवों को स्वर देता है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करता है। साथ ही महिला लेखन भारतीय साहित्य को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई दिशा प्रदान कर रहा है।
देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की थीम पर कर्तव्य पथ पर सजी छत्तीसगढ़ की झांकी
रायपुर। गणतंत्र दिवस से पूर्व कर्तव्य पथ पर आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल में छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी विशिष्ट और आकर्षक प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। झांकी में जनजातीय समाज की जीवनशैली, पारंपरिक कला, लोकनृत्य, वेशभूषा और ऐतिहासिक विरासत की झलक को प्रदर्शित किया गया है।
इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की थीम पर आधारित है, जिसमें राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय को प्रभावशाली एवं सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 10वीं और 12वीं परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज लोक भवन में 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। ये 2024 एवं 2025 के टॉप 10 मेधावी और विशेष पिछडी जनजाति के टॉप 01 विद्यार्थी है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित इस प्रतिभा सम्मान समारोह में पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना के तहत विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाएं हमारे जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रथम सीढ़ी है। आपने एक पड़ाव पार किया है अब अगले पड़ाव की ओर जा रहे है। जहां एक ओर इस सफलता की प्रेरणा आपको नवीन ऊर्जा के साथ प्रगति का रास्ता प्रशस्त करती है और वहीं यह सम्मान अन्य विद्यार्थियों को मेहनत, लगन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपार संभावनाओं का प्रदेश है। ‘‘धान का कटोरा‘‘ कहा जाने वाला हमारा राज्य अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति बहुत उन्नत है। हमें अपने राज्य की सनातन संस्कृति पर गर्व का भाव होना चाहिए।
श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थी आईआईटी, नीट की परीक्षा देकर इंजीनियरिंग और मेडिकल मे जाना चाहते है लेकिन सभी को सफलता नहीं मिलती है। इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं हैं। नए-नए विषय है जहां आप कैरियर की ऊची उड़ान भर सकते है। धैर्य के साथ आगे बढ़े। गिरना बडी बात नहीं है गिर कर खड़े होना महत्वपूर्ण है। सपना बड़ा होना चाहिए। सपनें को पूरा करने के लिए साधना और अभ्यास करना होता है। उन्होंने मौलिकता और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के बच्चें शिक्षा में आगे बढ़ रहे है, यह बहुत सराहनीय है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी हमारे देश एवं प्रदेश के भविष्य हो। आप लोगों के कंधे पर देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आज जो सफलता आप सभी छात्रों को मिली है निश्चित ही इस सफलता के पीछे आपके शिक्षक गुरुओं एवं माता पिता के आशीर्वाद है। उनके आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने सभी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन और बसंत पंचमी पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा हम सब पर सदैव मां सरस्वती का आशीर्वाद बना रहें।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि सत्र 2024 एवं 2025 के 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के 239 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप मेडल, प्रशस्ति पत्र और प्रत्येक विद्यार्थी को डेढ़-डेढ़ लाख की राशि सीधे उनके खाते में दी गई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दिए इस प्रोत्साहन सेे शिक्षा के प्रति उनका रूझान बढ़ेगा और दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
कार्यक्रम में वर्ष 2024 के 110 और वर्ष 2025 के 129 टापर विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति के विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।
स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की अध्यक्ष रेणु जी. पिल्ले ने दिया एवं आभार प्रदर्शन सचिव पुष्पा साहू ने किया।
इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, आशाराम नेताम, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
धमतरी में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता : आईजी के सामने 9 हार्डकोर नक्सलियों ने किया सरेंडर, 47 लाख घोषित था इनाम
धमतरी। जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को आज एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। आईजी अमरेश मिश्रा और धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष आज एक साथ 9 सक्रिय हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 05 महिला और 04 पुरुष नक्सली शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से सीतानदी क्षेत्र सहित नगरी, मैनपुर और गोबरा इलाकों में सक्रिय थे और कई घटनाओं में शामिल रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली प्रतिबंधित संगठन ओडिशा स्टेट कमेटी के धमतरी–गरियाबंद–नुआपाड़ा डिवीजन से जुड़े हुए थे और संगठन में डीवीसीएम, एसीएम, एसडीके एरिया कमेटी कमांडर एवं डिप्टी कमांडर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। इन सभी नक्सलियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार और सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी।


इन नक्सलियों ने किया सरेंडर
- ज्योति उर्फ जैनी उर्फ रेखा डीव्हीसीएम सीतानदी एरिया कमेटी सचिव, 08 लाख के इनामी
- उषा उर्फ बालम्मा डीव्हीसीएम टेक्निकल (डीजीएन), 08 लाख के इनामी
- रामदास मरकाम उर्फ आयता उर्फ हिमांशु, पूर्व गोबरा एलोएस कमांडर / वर्तमान नगरी एसीएम, 05 लाख के इनामी
- रोनी उर्फ उमा सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर, 05 लाख के इनामी
- निरंजन उर्फ पोदिया सीनापाली एससीएम टेक्निकल (डीजीएन), 05 लाख के इनामी
- सिंधु उर्फ सोमड़ी एसीएम, 05 लाख के इनामी
- रीना उर्फ चिरो एसीएम सीनापाली एरिया कमेटी / एलजीएस, 05 लाख के इनामी
- अमीला उर्फ सन्नी एसीएम / मैनपुर एलजीएस, 05 लाख के इनामी
- लक्ष्मी पूनेम उर्फ आरती उषा की बॉडी गार्ड, 01 लाख के ईनामी

नक्सलियों ने सौंपा ये हथियार
इंसास राइफल – 02
एसएलआर राइफल – 02
कार्बाइन – 01
भरमार बंदूक – 01
कुल राउंड – 67
मैगजीन – 11
वॉकी-टॉकी (रेडियो सेट) – 01
अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री
पुलिस दबाव और पुनर्वास नीति का दिखा असर
धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, बढ़ते दबाव और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा और विनाश का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। पुलिस द्वारा दूरस्थ नक्सल प्रभावित गांवों में पोस्टर, बैनर, पाम्फलेट, आत्मसमर्पित नक्सलियों की अपील और सिविक एक्शन कार्यक्रमों के जरिए लगातार संदेश पहुंचाया जा रहा था। युवाओं को जोड़ने के लिए खेल प्रतियोगिताएं भी कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर दिखा।

खोखली विचारधारा से हुआ मोहभंग
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में लगातार कठिन जीवन, शासन की पुनर्वास सुविधाएं और पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के सुरक्षित व खुशहाल जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी, मैनपुर एलजीएस और गोबरा एलओएस के इन सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण में धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य बलों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई और रणनीति की अहम भूमिका रही। आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा, जिले को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान लगातार जारी रहेगा। अन्य सक्रिय माओवादियों से भी आत्मसमर्पण की अपील की जा रही है।
पांच नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की हुई नियुक्ति, आदेश जारी
रायपुर। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के पांच नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति कर दी है। इसका आदेश आज चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किया।
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गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव का आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया।
उप सभापति हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है।
उपसभापति हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं।
मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा।
आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।
शनिवार अवकाश की मांग, 27 को 8 लाख बैंक कर्मचारी करेंगे हड़ताल…
रायपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस लंबे समय से बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच कार्य दिवस लागू करने की मांग करता रहा है. इस मुद्दे पर अब यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस द्वारा 27 जनवरी को हड़ताल का आह्वान किया गया है. इस यूनियन में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की 9 यूनियनें शामिल हैं, जिसके 8 लाख कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे.
अखिल भारतीय बैंक अधिकारी महासंघ के सचिव वाई. गोपालकृष्णा और छत्तीसगढ़ बैंक एम्प्लॉयिज एसोसिएशन के महासचिव शिरीष नलगुंडवार ने इस संबंध में गुरुवार को प्रेसवार्ता की.
उन्होंने बताया कि 2015 में हुए 10वें द्विपक्षीय समझौते में आईबीए और सरकार द्वारा यह सहमति बनी थी कि प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे शनिवार अवकाश रहेंगे, जबकि अन्य शनिवार पूर्ण कार्य दिवस होंगे. उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि शेष सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की हमारी मांग पर यथासमय विचार किया जाएगा, परंतु यह विषय लंबित ही रखा गया.
मेडिकल PG प्रवेश पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डोमिसाइल आरक्षण रद्द, 50% संस्थागत और 50% ओपन मेरिट सीटें तय
रायपुर। मेडिकल पीजी में प्रवेश के लिए राज्य में लागू डोमिसाइल आरक्षण को रद्द करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेंट्रल पुल और संस्थागत आरक्षण की स्थिति साफ कर दिया है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य शासन ने राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही मेडिकल पीजी में एडमिशन को लेकर अधिसूचना जारी कर दिया है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अहम फैसले में कहा, संस्थागत आरक्षण हेतु 50 प्रतिशत सीटें तथा ओपन मेरिट हेतु 50 प्रतिशत सीटेंआरक्षित रहेंगी. संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटों में शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेगा, जिन्होंने छत्तीसगढ राज्य में स्थित एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण किया है, अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी है.
इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के मध्य मेरिट के आधार पर दिया जाएगा. गैर संस्थागत आरक्षण शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी. इन सीटों पर प्रवेश सभी पात्र अभ्यर्थियों हेतु राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा. ओपन सीटों पर किसी प्रकार की संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगी. राज्य सरकार ने डॉ. समृद्धि दुबे की याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा 20 नवंबर.2025 को पारित आदेश के पैराग्राफ 21 में निहित निर्देशों के स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आवेदन पेश किया था.

खनन ब्लास्टिंग से त्रस्त ग्रामीणों का लोक सुनवाई में उग्र विरोध, अधिकारियों का घेराव, आंदोलन की चेतावनी
जगदलपुर। बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड क्षेत्र में संचालित 14 खदानों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा लोक सुनवाई में फूट पड़ा, लगातार हो रही ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, छतों का टूटना, खेती प्रभावित होना और पेयजल के स्रोतों के दूषित होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव किया. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि स्थाई समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे.
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. लोकसुनवाई में पहुंचे अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और खनिज अधिकारियों पर बात अनसुनी करने से नाराज ग्रामीणों ने उनका घेराव किया. हालात बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.
ग्रामीणों ने खनन नियमों के उल्लंघन और प्रशासन–उद्योगपति की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस खसरा नंबर में खदानें चल रही हैं, वहीं उनके घर बने हैं. खदानों की स्थापना और सहमति को लेकर भी ग्रामीणों और प्रशासन के दावे आमने-सामने हैं. फिलहाल, पिपलावंड में खदानों को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है.
ST महिला को पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं, परंपरागत उत्तराधिकार त्याग का प्रमाण जरूरी: हाईकोर्ट का अहम फैसला
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकती, जब तक यह सिद्ध न किया जाए कि संबंधित जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार व्यवस्था त्याग दी है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने (आशावती बनाम रुखमणी व अन्य) में 41 साल पुराने नामांतरण (म्यूटेशन) और बंटवारे को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
अपीलकर्ता आशावती पिता धरमसिंह ने सिविल कोर्ट में दावा किया था कि उनके पिता स्व. धरमसिंह बरीहा की दो पत्नियां थीं और वे दूसरी पत्नी हरसोवती की पुत्री हैं। उनका कहना था कि 83 एकड़ से अधिक की पैतृक कृषि भूमि में उन्हें बराबर हिस्सा मिलना चाहिए था, लेकिन वर्ष 1971-72 में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनका नाम रिकॉर्ड से हटा दिया गया। आशावती ने आरोप लगाया कि उस समय वे नाबालिग थीं, न तो उन्हें नोटिस दिया गया और न ही सहमति ली गई, इसलिए नामांतरण और बंटवारा अवैध व शून्य है।
हाईकोर्ट ने माना कि,पक्षकार बिंझवार अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। उन पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होता। अपीलकर्ता यह सिद्ध करने में विफल रहीं कि जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार प्रणाली छोड़ी है। कोर्ट ने बुटाकी बाई बनाम सुखबती बाई (2014) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी बेटी केवल हिंदू कानून के आधार पर पैतृक संपत्ति का दावा नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी अहम टिप्पणी की कि, वर्ष 1972 में प्रमाणित नामांतरण आदेश को 2013 में चुनौती देना कानूनन अस्वीकार्य है। इतने लंबे समय तक चुप्पी, दावे को समय-सीमा के बाहर ले जाती है। राजस्व रिकॉर्ड दशकों तक लागू रहे हों, तो उन्हें हल्के में खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक लागू रहे नामांतरण आदेश वैध माने जाते हैं, जब तक धोखाधड़ी का ठोस प्रमाण न हो।




