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श्रीमंत शंकर देव के लेखनी से पूरा देश गौरवान्वित हुआ है - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं।
श्री डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।
राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। शंकर देव ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने श्री कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।
गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
धान खरीदी में भारी लापरवाही: मुंगेली के खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना निलंबित, शासन की सख्त कार्रवाई
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में धान खरीदी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। इसका आदेश खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जारी किया है।
धान खरीदी केंद्रों में भारी अनियमितता उजागर
आदेश के अनुसार खाद्य अधिकारी ने धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था पर समुचित ध्यान नहीं दिया। धान खरीदी में मिलरों द्वारा किए जा रहे उठाव की प्रभावी निगरानी नहीं की गई। खरीदी केन्द्रों का नियमित निरीक्षण भी नहीं किया गया, जिससे अव्यवस्थाएं बढ़ती गईं। धान उठाव की नियमित जांच नहीं होने से गड़बड़ियों को समय रहते रोका नहीं जा सका। इसे आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया। राज्य शासन ने इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई। नियम-9 के उप-नियम (1) खंड (क) के अंतर्गत निलंबन आदेश जारी किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार के स्पष्ट निर्देश, धान खरीदी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
निलंबन अवधि के दौरान खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना काे नवा रायपुर स्थित संचालनालय खाद्य विभाग के मुख्यालय में अटैच किया गया है। इस अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय रहेगा। विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। धान खरीदी व्यवस्था पर शासन की कड़ी नजर है। राज्य शासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि धान खरीदी में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जिलों के खाद्य अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आगामी दिनों में अन्य जिलों में भी जांच और कार्रवाई तेज हो सकती है। इस कार्रवाई के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

दुर्ग में धार्मिक कथा के दौरान पैरावट में लगी आग, दमकल की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टला
दुर्ग। धार्मिक कथा के दौरान कथा स्थल के समीप रखे धान के पैरावट में अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की दमकल टीम तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना हुई। यह घटना दुर्ग जिले के बोरी थाना क्षेत्र के ग्राम दनिया की है।
मौके पर पहुंचने पर दमकल कर्मियों ने पाया कि आग पैरावट से बढ़कर कथा स्थल के पंडाल के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अग्निशमन कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पानी के माध्यम से आग पर काबू पाना शुरू किया।
चार दमकल गाड़ियों के पानी की मदद से पैरावट में लगी आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, जिससे आग को आगे फैलने से रोका जा सका और कथा स्थल सहित आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। दमकल विभाग की समय पर प्रभावी कार्रवाई से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या अन्य नुकसान की सूचना नहीं है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच की जा रही है।
मृत्योपरांत अंगदान को सम्मान देने की पहल: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सीएम साय को लिखा पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राज्य में अंगदान को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और मानवीय पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि मृत्योपरांत अंगदान करने वाले व्यक्तियों को “राजकीय सम्मान” प्रदान करने की नीति पर गंभीरता से विचार किया जाए.
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में सुरेश खांडवे (अध्यक्ष सर्वधर्म सेवा संस्था, भिलाई) की माँग को आगे बढ़ाते हुए उल्लेख किया है कि देश में अंगदान की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. वर्तमान में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर मात्र 0.34 प्रतिशत लोग ही अंगदान कर रहे हैं, जबकि आँख, किडनी, लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर वर्ष लाखों लोगों की असमय मृत्यु हो जाती है. यदि अंगदान को सामाजिक सम्मान और सरकारी मान्यता मिले, तो इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
डॉ. रमन सिंह ने पत्र में यह भी लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य अंगदान के मामले में देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में पीछे है, जबकि तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अंगदाताओं को राजकीय सम्मान देने की घोषणा कर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है. इन राज्यों में इस निर्णय के बाद अंगदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है.
विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी बताया कि सर्वधर्म सेवा संस्था, (छ.ग.) के अध्यक्ष सुरेश खांडे द्वारा राज्य में मृत्योपरांत अंगदान करने वालों को राजकीय सम्मान दिए जाने की मांग की गई है, जिसे जनहित में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है.
डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर उपयुक्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि छत्तीसगढ़ में अंगदान को सामाजिक स्वीकृति, सम्मान और प्रेरणा मिल सके.
पत्र की कॉपी:

रायपुर में 23 जनवरी से लागू होगी पुलिस कमिश्नरी प्रणाली: सीएम साय का ऐलान, पहले कमिश्नर को लेकर मंथन तेज
lरायपुर। रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को लेकर प्रदेश में चर्चा तेज है। इस बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था ठीक करना चाहते हैं। इंतजार करिए, बहुत जल्द पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो रही है।
23 जनवरी से औपचारिक अमल में आएगी नई व्यवस्था
राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था के संचालन को लेकर यह एक निर्णायक प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है। 23 जनवरी से रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आज शाम तक इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
पहले कमिश्नर की दौड़ में दो नाम
सूत्रों के मुताबिक दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किए जाने की प्रबल संभावना है। हालांकि अंतिम क्षणों में परिस्थितियों ने करवट बदली तो सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा का नाम भी विकल्प के तौर पर सामने आ सकता है। कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर शासन-प्रशासन के गलियारों में गहन मंथन जारी है और अंतिम मुहर अधिसूचना के साथ लग सकती है।
राज्य सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 3 आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारी, किरण कौशल समग्र शिक्षा आयुक्त, आकाश छिकारा बस्तर कलेक्टर
रायपुर। राज्य सरकार ने तीन आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार 2009 बैच की आईएएस अधिकारी किरण कौशल को समग्र शिक्षा के आयुक्त के पद पर पदस्थ किया है। इसके साथ ही उन्हें प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
इसी क्रम में 2009 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश कुमार शरण को रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। 2017 बैच के आईएएस अधिकारी आकाश छिकारा बस्तर के कलेक्टर बनाए गए हैं।
देखिये आदेश की कॉपी-

रायपुर में जल्द लागू होगी पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था: डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बयान, पूरे जिले में होगा क्रियान्वयन
Mरायपुर। पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर गृहमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ही एक बैठक में इस विषय पर निर्णय लिया था। अब इसे पूरे रायपुर जिले में लागू करेंगे। समूचे जिले की दृष्टिकोण से इस पर विचार किया जा रहा है। सीएम साय जल्द निर्णय लेंगे। बता दें कि स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में सीएमव साय ने रायपुर में पुलिस आयुक्त (कमिश्नरेट) प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।
पुलिस को सीधे प्रशासनिक अधिकार
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद कई ऐसे अधिकार जो अब तक जिला प्रशासन के अधीन थे, वह सीधे पुलिस कमिश्नर को सौंपे जाएंगे। सरकार की दलील है कि इसका मकसद अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, यातायात संचालन और आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय को सुनिश्चित करना है। हालांकि कहा जा रहा है कि शस्त्र लाइसेंस और आबकारी से जुड़े अधिकार इस प्रणाली के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
धरना-प्रदर्शन और आयोजनों पर सीधा नियंत्रण
पुलिस कमिश्नरी की नई व्यवस्था के तहत धरना-प्रदर्शन, जुलूस, सार्वजनिक आयोजनों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज होने की उम्मीद है। इससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस को सीधे कार्रवाई करने की शक्ति मिलेगी और प्रशासनिक विलंब कम होगा।
पुलिस कमिश्नर को मिलेंगे ये प्रमुख अधिकार
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस कमिश्नर को विभिन्न कानूनों के अंतर्गत व्यापक अधिकार प्रदान किए गए हैं—
कैदी अधिनियम, 1900 – विशेष परिस्थितियों में बंदियों को अल्प अवधि के लिए पैरोल पर रिहा करने का अधिकार।
छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, 2007 – धरना, प्रदर्शन, जुलूस व सभाओं की अनुमति तथा निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार।
विष अधिनियम, 1919 – अवैध जहर भंडारण या बिक्री पर तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति।
जेल अधिनियम, 1894 – जेलों की सुरक्षा व्यवस्था व बंदियों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई।
अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 – देह व्यापार से जुड़े मामलों में छापेमारी व जांच के आदेश।
गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 – प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार।
राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 – असामाजिक तत्वों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 – यातायात संचालन, मार्ग निर्धारण और भारी वाहनों पर नियंत्रण।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 – सार्वजनिक व्यवस्था या आंतरिक सुरक्षा पर खतरे की स्थिति में निरुद्ध करने का अधिकार।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 – जासूसी की आशंका पर संवेदनशील सूचनाओं की जांच।
विस्फोटक अधिनियम, 1884 एवं पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 – विस्फोटक व ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, परिवहन और उपयोग पर नियंत्रण।
BCI नोटिस पर कल्याण लॉ कॉलेज का जवाब: प्रिंसिपल सुशीला यादव ने दिल्ली में रखा पक्ष, 42.60 लाख जमा होने का दावा
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के प्रतिष्ठित कल्याण लॉ कॉलेज को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में कॉलेज की प्रिंसिपल सुशीला यादव दिल्ली पहुंचीं। उन्होंने BCI के समक्ष कॉलेज प्रबंधन की ओर से पक्ष रखा और नोटिस से जुड़े तथ्यों की जानकारी दी। दरअसल, BCI ने नोटिस जारी कर आरोप लगाया था कि कॉलेज द्वारा छात्रों से BCI के नाम पर लिए गए 1600 रुपये जमा नहीं किए गए और BCI से मान्यता नहीं ली गई। इसी आधार पर साल 2011 से 2025 तक के सभी छात्रों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने की चेतावनी दी गई थी।
कॉलेज प्रबंधन ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि साल 2011 से 2025 तक की राशि कुल 42 लाख 60 हजार रुपये वर्ष 2023 में ही जमा कर दी गई थी। इसके अलावा BCI द्वारा 2026 से 2029 तक की फीस जमा करने के लिए भेजे गए नोटिस की तैयारी भी प्रबंधन कर रहा था। प्रबंधन का आरोप है कि BCI ने 2023 में जमा की गई राशि और कॉलेज की मान्यता को अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में अपडेट नहीं किया, जिसके कारण यह पूरा विवाद उत्पन्न हुआ।
कॉलेज से पढ़कर निकले वकील और न्यायाधीशों में आक्रोश
कॉलेज का कहना है कि यह BCI की लापरवाही का मामला है, न कि संस्थान की गलती। इस नोटिस के बाद कॉलेज से पढ़कर निकले कई वकील और न्यायाधीशों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि इस नोटिस से कॉलेज की छवि को नुकसान पहुंचा है, जबकि यह संस्थान वर्षों से कानून शिक्षा के क्षेत्र में अपनी साख बनाए हुए है।
प्रेस कांफ्रेंस कर मामले की हकीकत बताएंगी प्रिंसिपल
गौरतलब है कि कल्याण लॉ कॉलेज की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी। कॉलेज में वर्तमान में एलएलबी की 150 सीटें और एलएलएम की 19 सीटों पर अध्ययन कराया जा रहा है। यहां से पढ़कर निकले कई छात्र आज न्यायपालिका और वकालत के क्षेत्र में अहम पदों पर कार्यरत हैं। प्रिंसिपल सुशीला यादव ने बताया कि वह जल्द ही भिलाई पहुंचकर मीडिया के सामने पूरे मामले की हकीकत रखेंगी।BCI के समक्ष सभी दस्तावेज प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
बीमा कंपनी को बड़ा झटका: उपभोक्ता आयोग का आदेश, मैक्स लाइफ 1 करोड़ रुपये 12% ब्याज सहित दे, 2 लाख जुर्माना भी
बिलासपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण और मिसाल कायम करने वाले फैसले में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और वाद व्यय (केस खर्च) के तौर पर 2 लाख रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया है।
यह मामला आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ के समक्ष सुना गया। प्रकरण बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से “प्लैटिनम वेल्थ प्लान” के अंतर्गत 1 करोड़ रुपये का जीवन बीमा कराया था।
जानकारी के अनुसार, यह बीमा पॉलिसी मई 2020 से प्रभावी थी। बीमा पॉलिसी जारी करने से पहले मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने अपने नियमों के अनुसार बीमित महिला की संपूर्ण मेडिकल जांच करवाई थी। जांच में शैल कौशिक को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था, जिसके बाद पॉलिसी स्वीकृत की गई।
सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हो गईं। इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति कौशल प्रसाद कौशिक ने बीमा क्लेम के लिए कंपनी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमित महिला को पॉलिसी लेने से पहले गंभीर बीमारी थी, जिसे जानबूझकर छिपाया गया। कंपनी ने बीमा राशि देने के बजाय केवल जमा किया गया प्रीमियम वापस कर दिया।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए कौशल प्रसाद कौशिक ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। उन्होंने आयोग को बताया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी करने से पहले अपनी ओर से दो अलग-अलग अस्पतालों में मेडिकल जांच करवाई थी, जिसमें उनकी पत्नी को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया था। इसके बावजूद कंपनी ने बिना ठोस प्रमाण के दावा खारिज कर दिया, जो स्पष्ट रूप से उपभोक्ता के साथ अन्याय है।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह दलील दी कि बीमित महिला को वर्ष 2016 से हृदय संबंधी बीमारी थी। लेकिन आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह असफल रही कि पॉलिसी जारी होने से पहले के 48 महीनों में बीमित किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थीं या उनका कोई उपचार चल रहा था।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब बीमा कंपनी स्वयं मेडिकल जांच कराकर पॉलिसी जारी करती है, तो बाद में केवल अनुमान या अप्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत “सेवा में कमी” की श्रेणी में आता है।
स्पा संचालक से वसूली मामला: गृह मंत्री के निर्देश पर पूर्व एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल निलंबित
रायपुर। गृह मंत्री विजय शर्मा ने बिलासपुर में स्पा संचालक से वसूली मामले में एडिशनल SP राजेंद्र जायसवाल को सस्पेंड कर दिया है. इस मामले में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा ऐसे अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड करके जांच की जाए.
बता दें, बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित स्पा एंड वेलनेस सेंटर के संचालक ने पूर्व एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल पर डराने-धमकाने और पैसों की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस मामले में स्पा संचालक ने पुलिस महानिरीक्षक (IG) संजीव शुक्ला से पूर्व एडिशनल एसपी के स्टिंग वीडियो और व्हाट्सऐप कॉल रिकॉर्डिंग साझा करते हुए लिखित शिकायत की है. जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बिलासपुर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है.
शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने पूर्व ASP का स्टिंग किया, जिसमें कथित रूप से पैसों की मांग और धमकी से जुड़ी बातचीत रिकॉर्ड हुई है। उसके अनुसार, लगातार दबाव के कारण वह मानसिक रूप से परेशान हो गया था, जिसके बाद उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का निर्णय लिया है।
वहीं आज इस मामले की जानकारी मिलने पर उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंंत्री विजय शर्मा ने पूर्व एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल को निलंबित कर दिया है.
साय कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2026-27 को मिली मंजूरी, प्रबंध संस्थान को लीज पर दी जाएगी 40 एकड़ जमीन… जानिए अन्य फैसले
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई. नए साल में हुई पहली साय कैबिनेट की बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई. इसके बाद कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है.
मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में हुई सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव का अनुमोदन तथा इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया गया।
2) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जाने हेतु श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना के लिए सेक्टर-18 में चिन्हांकित लगभग 40 एकड़ भू-खण्ड का आबंटन लीज के रूप में एकमुश्त 90 वर्षाें के लिए करने की स्वीकृति प्रदान की है।
एसव्हीकेएम एक ख्याति प्राप्त संस्था है, जो वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत तथा वर्तमान में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित है, जोकि एक लाख से अधिक छात्रों को प्रति वर्ष प्री-प्राइमरी से लेकर डॉक्टोरल कार्यक्रमों में शिक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2025 में एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी रैकिंग में इस संस्था को 52वां रैंक प्राप्त हुआ है। नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूती मिलेगी।
3) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में 04 नवीन उद्यमिता केन्द्रों की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू का निर्णय लिया है। इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग तथा तकनीकी स्टार्ट-अप इको सिस्टम को प्रोत्साहित करने में यह एमओयू महत्वपूर्ण होगा।
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 68 केन्द्र संचालित है, जिनमें 60 भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट एग्री उद्यमिता केन्द्रों के माध्यम से आगामी तीन से पांच सालों में डोमेन विशेष के 133 स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देंगे। राज्य सरकार द्वारा छात्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं तथा उद्योगों को ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकसित करने में सहयोग प्रदान करने के लिए एसटीपीआई के माध्यम से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ईएसडीडी) केन्द्र स्थापित किया जाएगा, जो प्रति वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर, स्टार्टअप और एमएसएमई को सभी सहायता प्रदान करेगा।
4) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओ में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वर्तमान संसाधनों को सुदृढीकरण करने तथा निर्धारित मानक के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लैब के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक निर्णय लिए गए हैं।
परीक्षा पे चर्चा 2026 : प्रथम चरण में महासमुंद की बेटी सृष्टि साहू का चयन, आज दिल्ली में करेगी राज्य का प्रतिनिधित्व
रायपुर। परीक्षा पे चर्चा के नवें संस्करण में इस वर्ष भी विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों में व्यापक उत्साह देखने को मिला। पंजीयन की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ राज्य से कुल 29.29 लाख प्रतिभागियों ने पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया। यह आंकड़ा गत वर्ष की तुलना में 7.16 लाख अधिक है, जो कार्यक्रम के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
गत वर्ष पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा था, जबकि इस वर्ष अंडमान एवं निकोबार, चंडीगढ़ एवं लक्षद्वीप के बाद राज्य को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य से 1.41 लाख पालकों द्वारा पंजीयन किया गया, जो पालकों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।
प्रथम चरण की चयन प्रक्रिया
प्रथम चरण में विद्यार्थियों के चयन हेतु जिलों से विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित वीडियो आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित तिथि तक कुल 171 विद्यार्थियों के वीडियो प्राप्त हुए। गठित समिति द्वारा इन वीडियो का गहन परीक्षण किया गया, जिसके उपरांत 18 विद्यार्थियों का चयन कर उनका विवरण केंद्र को भेजा गया। चयनित विद्यार्थियों में पीएमश्री विद्यालय से 04, सेजस से 06, निजी विद्यालयों से 04, शासकीय विद्यालयों से 03 तथा केजीबीव्ही से 01 विद्यार्थी शामिल हैं।
सृष्टि साहू का केंद्रीय स्तर पर चयन
केंद्र की समिति द्वारा महासमुंद जिले के स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की गणित संकाय की कक्षा 12वीं की छात्रा सृष्टि साहू का चयन किया गया है। सृष्टि साहू, पिता नरेन्द्र कुमार साहू एवं माता दिनेश्वरी साहू को 21 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया गया है।
प्रशासन एवं शाला परिवार की प्रतिक्रिया
सृष्टि साहू के चयन पर जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगहे ने उनसे भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शाला की प्राचार्या अमी रूफस ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि सृष्टि एक अनुशासित, परिश्रमी एवं अध्ययनशील छात्रा है। उन्होंने यह भी बताया कि सृष्टि बाल दिवस के अवसर पर शाला नायक की भूमिका में प्राचार्य की कुर्सी पर बैठकर नेतृत्व प्रदान कर चुकी है।
परिवार का गर्व और सहयोग
सृष्टि साहू के पिता शासकीय विद्यालय में शिक्षक हैं तथा माता गृहणी हैं। दोनों ने अपनी पुत्री के चयन पर गर्व एवं प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे परिवार के साथ-साथ जिले के लिए भी गौरव का विषय बताया है।
शाला एवं विभागीय प्रयासों की सराहना
शाला प्राचार्य के अनुसार विद्यालय के सभी शिक्षकों द्वारा परीक्षा पे चर्चा में विद्यार्थियों के पंजीयन हेतु विशेष प्रयास किए गए। विद्यालय में 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया गया तथा विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास भी कराया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।
सृष्टि साहू के चयन पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे एवं शिक्षा विभाग द्वारा हार्दिक बधाई दी गई। छात्रा के दिल्ली प्रवास से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण कराने में जिला परियोजना समन्वयक रेखराज शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा भी महासमुंद जिले को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।
आगामी चरण की प्रतीक्षा
परीक्षा पे चर्चा 2026 के आगामी चरणों में और विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।
कक्षा 5वीं-8वीं की वार्षिक परीक्षा का समय सारिणी जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक शिक्षा संचालनालय ने कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा की समय सारिणी जारी कर दी है. इस बार परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न में आयोजित की जाएगी. जारी एग्जाम शेड्यूल में 5वीं कक्षा की 16 मार्च और 8वीं कक्षा की 17 मार्च से वार्षिक परीक्षा (Final Examination Schedule) आयोजित होंगी. सुबह 9 बजे से दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं शुरू होंगी। हालांकि इसमें CBSE और ICSE स्कूलों के छात्र इन परीक्षाओं में शामिल नहीं होंगे. संचालनालय की ओर से इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है.
जारी टाइमटेबल के अनुसार, कक्षा 5वीं की परीक्षा कुल 50 अंकों की होगी, जिसमें 40 अंक लिखित परीक्षा के लिए और 10 अंक प्रोजेक्ट वर्क के लिए निर्धारित हैं. जबकि कक्षा 8वीं की परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी, जिसमें 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक प्रोजेक्ट वर्क के होंगे. कक्षा 5वीं की परीक्षा सुबह 9:00 बजे से 11:00 बजे तक और कक्षा 8वीं की परीक्षा सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक होगी.

मुंगेली में 11 लाख क्विंटल धान घोटाले का पर्दाफाश: 200% से 1116% तक ओवरलोडिंग, 8.14 करोड़ की क्षति, राइस मिल सील, 4 गिरफ्तार
मुंगेली। जिले में धान के अवैध ओवरलोडिंग और रिसाइक्लिंग की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। आईसीसीसी मार्कफेड रायपुर से प्राप्त अलर्ट के आधार पर जांच में सामने आया कि धान उठाव करने वाले वाहनों द्वारा वास्तविक क्षमता से 200 प्रतिशत से लेकर 1116 प्रतिशत तक अधिक ओवरलोडिंग कर धान का अवैध परिवहन किया गया है। कलेक्टर कुंदन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देशानुसार खाद्य विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धान खरीदी एवं परिवहन में व्यापक फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में राइस मिलरों, समिति प्रबंधकों एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों द्वारा मिलकर शासन को 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर मामले में विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कर 04 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
जांच में सामने आया कि राइस मिलरों एवं समिति प्रबंधकों द्वारा जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर, पीडीएस चावल का वितरण नहीं करना, फर्जी वाहनों के नंबरों से धान का परिवहन दिखाना तथा वास्तविक धान की मात्रा से अधिक उठाव दर्शाकर शासन को भारी नुकसान पहुँचाया गया। कुल मिलाकर लगभग 11 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीद एवं परिवहन में घोटाला किए जाने के प्रमाण मिले हैं। नवागांव घुठेरा समिति द्वारा उपलेटा राइस मिल से मिलीभगत कर 74 जीपीएस युक्त एवं 40 से अधिक बिना जीपीएस वाहनों में धान का परिवहन, सिंघनुपरी केंद्र द्वारा एसएस फूड के साथ मिलकर 4 हजार 542 क्विंटल धान का बिना जीपीएस वाहनों में परिवहन, छटन उपार्जन केंद्र द्वारा दीपक राइस मिल व नवकार मिल से मिलकर 3 हजार 589 क्विंटल का अवैध परिवहन तथा झगरहट्टा उपार्जन केंद्र द्वारा वर्धमान राइस मिलर्स से मिलकर गड़बड़ी करने पर कार्रवाई की गई है। इन मामलों में उपलेटा एवं वर्धमान राइस मिल के संचालक, समिति प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कई व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें अब्दुल सत्तार, विकास पांडेय, महावीर जैन, संतोष साहू, श्रीधर परिहार, मोहम्मद यूसुफ, गेंदलाल साहू शामिल हैं। वहीं कुछ आरोपी जैसे अब्दुल समद, ललित जैन, नावेद मेनन, अनिल जांगड़े फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।
अन्य थानों में भी दर्ज हुए मामले
फास्टरपुर थाना में अपराध क्रमांक 12/2026 तथा थाना लालपुर में अपराध क्रमांक 09/2026 के तहत भी धान उपार्जन केंद्रों में फर्जी परिवहन, धोखाधड़ी एवं अनियमितता के मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में भी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी तथा फरार आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
गणेश मिनरल्स राइस मिल सरगांव-पेंड्री को किया गया सील
कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर राज्य स्तर से प्राप्त सूचना के आधार पर सरगांव-पेंड्री स्थित गणेश मिनरल्स राइस मिल में राजस्व विभाग, खाद्य विभाग एवं सहकारिता विभाग के संयुक्त दल द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्वाइंटर के माध्यम से मिल में भंडारित धान की मात्रा का भौतिक सत्यापन कराया गया। पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से संबंधित कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया तथा कैमरे पुनः चालू नहीं किए गए। साथ ही जांच दल के राइस मिल पहुंचते ही मिल के कर्मचारियों द्वारा सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। इस गंभीर लापरवाही और संदेहास्पद स्थिति को देखते हुए मौके पर ही सीसीटीवी डीवीआर जब्त कर लिया गया।
मिल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार गणेश मिनरल्स राइस मिल में कुल 02 लाख 41 हजार 896 कट्टी धान का भंडारण दर्ज था, जबकि संयुक्त दल द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में मिल के गोदामों में मात्र 01 लाख 97 हजार 458 कट्टी धान ही पाया गया। इस प्रकार ऑनलाइन रिपोर्ट की तुलना में 44 हजार 438 कट्टी धान, लगभग 17 हजार 775.2 क्विंटल कम पाया गया। जांच के दौरान मिल के मैनेजर एवं कर्मचारियों से इस बड़े अंतर के संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। किसी भी स्तर पर कमी का स्पष्ट कारण न बता पाने से मिल परिसर में भारी मात्रा में धान की हेराफेरी किए जाने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार कम पाए गए धान की अनुमानित कीमत लगभग 5.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर गणेश मिनरल्स राइस मिल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। साथ ही आगे की विस्तृत जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि धान उपार्जन एवं भंडारण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
SIR में गड़बड़ी का आरोप: रायपुर तहसील कार्यालय में कांग्रेस का हंगामा, कार्यकर्ता हिरासत में, दीपक बैज सेंट्रल जेल में धरने पर
रायपुर। राजधानी रायपुर के तहसील कार्यालय में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देर रात जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी के इशारे पर मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी की और तहसीलदार से फॉर्म दिखाने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस सेंट्रल जेल पहुंची, जिसके बाद मामला और गरमा गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज पदाधिकारियों के साथ जेल परिसर पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। बाद में सभी कांग्रेसियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर निशर्त रिहा कर दिया गया।

दावा-आपत्ति फॉर्म नियमों के विपरीत स्वीकार किए गए – कांग्रेस
कांग्रेस का आरोप है कि रायपुर तहसील कार्यालय में जमा 400 दावा-आपत्ति फॉर्म नियमों के विपरीत स्वीकार किए गए हैं, जबकि नियम 30-50 तक ही फॉर्म स्वीकार करने का प्रावधान है। लेकिन बीजेपी के इशारे पर अधिक फॉर्म स्वीकार किए गए और कुछ नाम काटे जा रहे हैं। इसको लेकर कांग्रेस ने तहसील ऑफिस में जमा हुए 400 फॉर्म दिखाए जाने की मांग की। जिसपर तहसीलदार ने कहा कि जिस बाबू ने फॉर्म स्वीकार किए हैं, वह फोन नहीं उठा रहे हैं।
पुलिस और कांग्रेसियों के बीच झूमाझटकी
इसके बाद कांग्रेसियों ने तहसील ऑफिस में प्रदर्शन शुरू किया और केबिन में बैठकर भी जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और कांग्रेसियों को सेंट्रल जेल लेकर पहुंची। इस बीच पुलिस प्रशासन और कांग्रेसियों के बीच जमकर झूमाझटकी भी हुई। मामले की सूचना मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी सेंट्रल जेल परिसर पहुंचे। इसके बाद SIR में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाकर धरने पर बैठकर जमकर नारेबाजी करने लगे। मामला बढ़ता देख मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और सभी कांग्रेसियों को तुरंत रिहा कर दिया गया।

कार्यकर्ताओं को शांति भंग करने के झूठे आरोप में डाला गया जेल – PCC चीफ
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि हम लोग जेल परिसर में हैं। हमारे कांग्रेस के साथी SIR की गड़बड़ी को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच पुलिस अधिकारियों ने हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को शांति भंग करने के झूठे आरोप में जेल में डाल दिया। भाजपा के कार्यकर्ता तहसील ऑफिस में बाबुओं के माध्यम से बल्क में फॉर्म जमा कर रहे हैं। बीजेपी के इशारे पर एसआईआर के नाम पर पूरे देश में नाम काटने का खेल किया जा रहा है। इसे लेकर हम लगातार सतर्कता बरत रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे नेता नाम काटने का विरोध कर रहे थे। हमारे कांग्रेस के विशेष रूप से समर्थन करने वाले मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, लेकिन जब फॉर्म दिखाने की मांग की गई तो अफसर फॉर्म दिखाने को तैयार नहीं हैं। इस देश में कैसा लोकतंत्र है? क्या विपक्ष सवाल नहीं उठा सकता? क्या चुनाव आयोग अपने मन से काम करता रहेगा? चुनाव आयोग और सरकार दोनों मिलकर विशेष राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के नाम काटने की साजिश कर रहे हैं।
सरकार और चुनाव आयोग क्या चाहती है – दीपक बैज
दीपक बैज ने कहा कि SIR को पारदर्शिता के साथ किया जाए, यही हमारी बस मांग है। आखिर सरकार और चुनाव आयोग क्या चाहती है? उन्होंने बताया कि हमें जेल लाया गया, मजिस्ट्रेट के सामने हमारे पक्ष को रखा गया है। अभी हमें निशर्त रिहा करने की घोषणा की गई है।
हसदेव अरण्य में नेताओं का विरोध: आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व एसटी आयोग अध्यक्ष को ग्रामीणों ने रोका
अंबिकापुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र में आज उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और पूर्व छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह को स्थानीय ग्रामीणों ने क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया।
जानकारी के अनुसार दोनों नेता उदयपुर के हसदेव अरण्य इलाके में पहुंचे थे, लेकिन पहले से मौजूद ग्रामीणों ने उनका विरोध करते हुए साफ कहा कि क्षेत्र में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने नेताओं से कहा कि यहां राजनीति करने मत आइए, हमारे मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल बंद कीजिए।
ग्रामीणों का कहना था कि हसदेव अरण्य संवेदनशील वन क्षेत्र है और यहां के आदिवासी लंबे समय से अपने जल, जंगल और जमीन को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के नेताओं का आना केवल माहौल बिगाड़ने का काम करता है।विरोध के दौरान मौके पर नारेबाजी भी की गई, जिसके बाद दोनों नेताओं को बिना क्षेत्र में प्रवेश किए ही वापस लौटना पड़ा।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस सतर्क रही, लेकिन स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम ने हसदेव अरण्य में चल रहे जनआंदोलन और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
