रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विद्या भारती संस्था भारत की संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने में विशिष्ट योगदान दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र गौरव निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।
मुख्यमंत्री श्री साय आज बिलासपुर के कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में नव-निर्मित सरस्वती महाविद्यालय भवन का लोकार्पण करने पहुँचे। इस अवसर पर विद्या भारती द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में प्रदेश के 33 जिलों के सरस्वती स्कूलों से चयनित 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को तथा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों एवं महोत्सवों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा तथा स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव उपस्थित रहे। इस अवसर पर बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक और तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह भी विशेष रूप से शामिल हुए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित सभी अतिथियों ने सरस्वती स्कूल परिसर, कोनी में नव-निर्मित महाविद्यालय भवन का विधिवत पूजा-अर्चना कर लोकार्पण किया। तत्पश्चात सरस्वती स्कूल परिसर स्थित लखीराम सभा भवन में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएँ अपनी मेहनत, अनुशासन और संस्कारों से प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। विद्यालय का यह नया भवन शिक्षा और ज्ञान के विस्तार का प्रतीक है, जो समाज को नई दिशा देगा।
उन्होंने कहा कि सरस्वती महाविद्यालय के द्वारा गुरु घासीदास विश्वविद्यालय तथा इसरो, बेंगलुरु के साथ एमओयू किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्र में अधिक अवसर मिलेंगे। साथ ही पं. सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय का स्टडी सेंटर भी यहाँ प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, हाइटेक लाइब्रेरी, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सुविधाएँ विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे दृढ़ संकल्प और परिश्रम के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें।
विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि विद्या भारती शिक्षा के साथ संस्कार देने का कार्य कर रही है। उन्होंने संस्था द्वारा ज्ञान परंपरा और भारतीय संस्कृति को सहेजने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
विद्या भारती के प्रांतीय संगठन मंत्री देव नारायण ने संस्था के सिद्धांतों, विचारधारा और कार्य-प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरस्वती संस्थान द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ में तीन महाविद्यालयों की स्थापना की गई है और सात प्रकल्प संचालित हैं। ग्राम भारती के अंतर्गत 1,100 से अधिक विद्यालय कार्यरत हैं। इन संस्थानों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे योग्य और राष्ट्र के प्रति समर्पित विद्यार्थियों का निर्माण हो रहा है। कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर नगर निगम महापौर पूजा विधानी, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष राम भरोसा सोनी, सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष रतन चंद्राकर, सरस्वती शिशु मंदिर कोनी के अध्यक्ष मुनेश्वर कौशिक, सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के सचिव संतोष तिवारी, बृजेंद्र शुक्ला, पुरनंदन कश्यप, रामपाल, सुजीत मित्रा, सुदामा राम साहू, प्रांत प्रमुख दिव्या चंदेल, संचालकगण, प्राचार्य/आचार्यगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव की विशेष पहल पर केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य के नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र खोलने के लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। पहले चरण में सभी 14 नगर निगमों और सभी 55 नगर पालिकाओं में ये केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। ये सुविधा केंद्र नागरिकों को विभिन्न तरह के प्रमाण पत्र और लाइसेंस प्राप्त करने तथा पंजीयन व शिकायत निवारण जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत केंद्र की तरह काम करेंगे। भारत सरकार ने नगरीय निकायों से जुड़ी सभी तरह की सेवाओं पर आधारित आदर्श सुविधा केन्द्र खोलेने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर (Municipal Shared Services Centre) के अंतर्गत सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर (Citizen Experience Centre) के लिए यह राशि मंजूर की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र स्थापित किए जाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारी सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत हम प्रदेश के नागरिकों को पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएँ और जीवन स्तर प्राप्त हो, यह हमारी सरकार का लक्ष्य है। आदर्श सुविधा केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नगरीय प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन की सरकार नगरीय निकायों के नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर कार्य कर रही है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के माध्यम से केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रदेश में सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर स्थापित करने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर के अंतर्गत प्रस्ताव प्रेषित किया गया था। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के इस प्रस्ताव को स्वीकृति एवं अनुशंसा प्रदान करते हुए इसके लिए 50 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। ये सिटीजन एक्सपीरियंस सेंटर नगरीय निकायों से संबंधित सेवाओं (म्यूनिसिपल सर्विसेस) के लिए वन-स्टॉप हब के रूप में काम करेंगे। श्री साव ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करने के लिए केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रदेश के नागरिकों को बधाई दी है।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि आदर्श सुविधा केंद्रों (Citizen Experience Centers) के माध्यम से ‘‘वन स्टेट - वन पोर्टल‘‘ सिंगल प्लेटफार्म की तर्ज पर नागरिकों को जन्म, मृत्यु, विवाह जैसे आवश्यक प्रमाण पत्र, व्यापार, वेंडिंग, विज्ञापन के लिए लाइसेंस सेवाएं, संपत्ति कर, जल/सीवरेज, ठोस अपशिष्ट सेवाएँ, नगर निगम संपत्ति बुकिंग के लिए पंजीकरण, शिकायत निवारण की सुविधा तथा डिजिटल समावेशन सेवाओं का लाभ सुलभ और समयबद्ध रूप से प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि ये केन्द्र नागरिक सेवाओं को सरल और मानकीकृत करने के साथ ही प्रशासनिक बाधाओं को भी दूर करेगी, जिससे लोगों और नगरीय निकायों के अधिकारियों के मध्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इसके साथ ही यह पहल पूरे राज्य में समावेशिता को बढ़ावा देगी तथा इज ऑफ लिविंग (Ease of Living) में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित करेगी।
क्या है आदर्श सुविधा केन्द्र
आदर्श सुविधा केन्द्र नगरीय निकायों में जनसुविधाओं से संबंधित समस्त सेवाओं के लिए एकीकृत केन्द्र की तरह कार्य करेगी। इस केन्द्र के माध्यम से नगरीय निकायों में नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज व सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य नागरिक सुविधा पोर्टल जैसे निदान-1100, मोर संगवारी, संपत्ति कर तथा नगरीय प्रशासन से संबंधित अन्य सेवाओं व सुविधाओं को भी आदर्श सुविधा केन्द्र के साथ जोड़ा जाएगा।
कैसे मिलेगी नागरिकों को सुविधाएं
आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से सेवाएं प्राप्त करने के लिए नागरिकों को अपनी इच्छित सेवाओं से संबंधित आवेदन सुविधा केन्द्र में जाकर दर्ज/जमा करानी होगी। नागरिकों से प्राप्त आवेदन की प्रकृति एवं गुण-दोष के आधार पर नगरीय निकाय द्वारा आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी होगी और इसकी मॉनिटरिंग राज्य शहरी विकास अभिकरण में स्थापित राज्य स्तरीय कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी।
रायपुर। भारत के हीरा और वस्त्र केंद्र के रूप में प्रसिद्ध सूरत यात्री और माल यातायात में तीव्र वृद्धि का साक्षी बन रहा है । गुजरात की भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए, भारतीय रेल व्यापक कदम उठा रही है । इसमें सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और नई सेवाओं की शुरुआत शामिल है।
ओडिशा और गुजरात के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस
आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रह्मपुर (ओडिशा) और उधना (गुजरात) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह एक नई पीढ़ी की ट्रेन है जिसे किफायती, सुरक्षित और लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिज़ाइन किया गया है।
अमृत भारत एक्सप्रेस की विशेषताएँ:
आधुनिक एर्गोनोमिक सीटिंग बेहतर डिज़ाइन के साथ
पूरी तरह से जुड़ी हुई कोच जिससे निर्बाध आवाजाही संभव हो
दोहरे इंजन का विन्यास, जो उच्च संरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है।
जैसे वंदे भारत ने मध्यम वर्ग की यात्रा को नई परिभाषा दी है, वैसे ही अमृत भारत एक्सप्रेस किफायती किराए पर समान सुविधाएँ प्रदान करेगी । आज हरी झंडी दिखाई गई रेल सेवा का किराया प्रति यात्रा ₹495 (सामान्य श्रेणी) और ₹795 (नॉन-एसी स्लीपर श्रेणी) होगा ।
यह ट्रेन 1700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करेगी, जो 5 राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा) के 22 जिलों में फैली हुई है ।
इस नई कनेक्टिविटी के माध्यम से उद्यमियों और व्यवसायियों, विशेष रूप से युवाओं को वस्त्र, हीरे और संबंधित क्षेत्रों में अधिक अवसर प्राप्त होंगे । यह ट्रेन माँ तारा तारिणी शक्तिपीठ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी लाभदायक होगी।
गुजरात में स्टेशन पुनर्विकास कार्य
गुजरात के स्टेशनों का विकास मास्टर डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसमें अगले 50 वर्षों को ध्यान में रखा गया है । भारतीय रेल उधना, सूरत, बिलीमोरा, साचिन आदि रेलवे स्टेशनों का व्यापक पुनर्विकास कर रही है ।
केंद्रीय मंत्री ने आज उधना स्टेशन के पुनर्विकास कार्य की समीक्षा की । उन्होंने बताया कि स्टेशन को आधुनिक ढंग से डिज़ाइन किया जा रहा है । विशेष जोर प्लेटफ़ॉर्म और पिट लाइनों की क्षमता बढ़ाने पर दिया गया है ।
आज सुबह, केंद्रीय मंत्री ने सूरत हाई स्पीड रेल स्टेशन का भी दौरा किया ताकि निर्माण कार्य की समीक्षा की जा सके । सूरत–बिलीमोरा के बीच का कार्य तीव्र गति से प्रगति कर रहा है। स्टेशन का सिविल कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में फिनिशिंग और यूटिलिटी कार्य चल रहा है ।
आज के निरीक्षण के दौरान, मंत्री ने बताया कि इस परियोजना में आधुनिक और नवीन प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है ।
पटरियों पर कार्य उल्लेखनीय गति से प्रगति कर रहा है । उन्होंने बताया कि सूरत स्टेशन पर पहला टर्नआउट सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है । टर्नआउट रेलवे पटरियों का एक महत्वपूर्ण जंक्शन होता है । यह सुविधा हाई-स्पीड ट्रेनों के लचीलेपन और सुचारू संचालन को सक्षम करेगी ।
पटरियों में रोलर बेयरिंग्स भी लगाए गए हैं, जिससे बुलेट ट्रेन के तेज गति से चलने पर उनकी आवाजाही और अधिक सहज एवं सुरक्षित होगी । इसके अतिरिक्त, पटरियों पर कंक्रीट की जगह कंपोजिट सामग्री से बने स्लीपर लगाए गए हैं । इससे अधिक टिकाऊपन, कम रखरखाव और उच्च गति पर बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा ।
यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और पर्यावरण में शोर को कम करने के लिए, कंपन अवशोषण तंत्र (डैम्पर्स) को जोड़ा गया है । ये शोर और झटकों को अवशोषित करेंगे ।
केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि इस परियोजना के माध्यम से हम सूरत से मुंबई केवल एक घंटे में पहुँच पाएंगे ।स्टेशन पुनर्विकास और पटरियों का बिछाना स्थिर गति से प्रगति कर रहा है । हाई-स्पीड रेल परियोजना अंततः कनेक्टिविटी को बदल देगी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी । अहमदाबाद और मुंबई का पूरा खंड एक आर्थिक कॉरिडोर बन जाएगा ।यह परियोजना रेलवे प्रौद्योगिकी और यात्री अनुभव में नए मानदंड भी स्थापित करेगी ।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अंचलों के विकास की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले के दुलदुला क्षेत्र के लिए दो महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है।पहला मार्ग छेरडांड से टुकुटोली पहुँच मार्ग है, जिसकी लागत 5 करोड़ 48 लाख रुपए स्वीकृत हुई है।
यह सड़क बनने से ग्रामीण अंचल के लोगों को आने-जाने में बड़ी सुविधा होगी और क्षेत्र के कृषि एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। वहीं दूसरा मार्ग टुटिअम्बा से कादोपानी, झारखंड पहुँच मार्ग तक का निर्माण है, जिसके लिए 5 करोड़ 96 लाख रुपए की मंजूरी दी गई है। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों को सुविधा प्रदान करेगी बल्कि सीधे झारखंड राज्य को भी जोड़ेगी, जिससे दोनों राज्यों के बीच आवागमन, व्यापार और सामाजिक संपर्क और सुदृढ़ होगा।ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस सौगात के लिए आभार जताया और कहा कि सड़कों का जाल बिछने से क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
जिले में बिछ रहा है सड़कों का जाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले को एक के बाद एक सौगातें मिल रही हैं,सड़क निर्माण के लिए मिली नई मंजूरियों से अब गांव–गांव तक आवागमन सुगम होगा। ग्रामीणों को कीचड़ और धूल से निजात मिलेगी, वहीं मुख्य मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी मिलने से लोगों की यात्रा आसान होगी।जिले में बिछने वाले सड़कों का यह जाल आने वाले समय में विकास की नई तस्वीर गढ़ेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना का रजत जयंती समारोह’ का आयोजन महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत एवं अभिनंदन किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधि मंत्री गजेन्द्र यादव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस भी इस अवसर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में रजत जयंती समारोह पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन भी किया।
मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि इस गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की रजत जयंती समारोह में आप सभी को संबोधित करना मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गर्व का विषय है। 1 नवम्बर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई, तब शासन के साथ-साथ न्याय के क्षेत्र में भी एक नई शुरुआत हुई। इस राज्य के जन्म के साथ ही इस महान संस्था छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की स्थापना हुई। तभी से यह न्यायालय संविधान का व्याख्याकार, नागरिक अधिकारों का संरक्षक और न्याय का प्रहरी बनकर खड़ा है। राज्यपाल रमेन डेका ने लोक अदालत के अंतर्गत लंबित मामलों के हो रहे त्वरित निराकरण के लिए न्यायपालिका की सराहना की। उन्होंने न्यायपालिका में नैतिकता, सुदृढ़ीकरण और न्यायपालिका के लंबित मामलों को कम कर आम जनों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि न्याय केवल सामर्थ्यवान लोगों के लिए ही उपलब्ध नहीं हो बल्कि गांव गरीब एवं आमजनों के लिए भी सर्व सुलभ न्याय उपलब्ध हो तभी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की भूमिका सार्थक बनेगी।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि हम उन दूरदर्शी व्यक्तित्वों और संस्थापकों को कृतज्ञतापूर्वक नमन करते हैं, जिन्होंने इस न्यायालय की नींव रखी। प्रथम मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति डब्ल्यू.ए. शिशक और उनके उत्तराधिकारियों ने इस नवगठित न्यायालय को गरिमा, विश्वसनीयता और सशक्त न्यायिक परंपरा प्रदान की। इसी प्रकार अधिवक्ताओं, न्यायालय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्ठा और परिश्रम ने इस संस्था को पच्चीस वर्षों तक सुदृढ़ बनाए रखा। इन वर्षों में न्यायालय ने संवैधानिक नैतिकता, नागरिक स्वतंत्रता, आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और सामाजिक न्याय जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय दिए। इसने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचानदृउसके जंगल, खनिज, संस्कृति और वंचित समुदायों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया। विकास और अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए इसने यह सुनिश्चित किया कि प्रगति कभी भी न्याय की कीमत पर न हो।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि हमारा प्रदेश छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। यह शुभ अवसर हमारे हाईकोर्ट की रजत जयंती का भी है। यह वर्ष हमारी विधानसभा का रजत जयंती वर्ष भी है। इन सभी शुभ अवसरों पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूँ।. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर की नगरी को एक नई पहचान दी है। इस शुभ अवसर पर हम भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री एवं हमारे राज्य के निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनकी दूरदर्षिता से छत्तीसगढ़ राज्य एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना संभव हो सकी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही हम किसी भी हालत में समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। इसी क्रम में हमने वर्ष 2023-24 की तुलना में विधि एवं विधायी विभाग के बजट में पिछले साल 25 प्रतिशत और इस वर्ष 29 प्रतिशत बढ़ोतरी की है। यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि इस पीठ के न्यायाधीश जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस भूपेश गुप्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा जैसे न्यायाधीश देश की सर्वाेच्च अदालत तक पहुँचे। न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्चुअल कोर्ट और लाइव स्ट्रीमिंग जैसे डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा दिया है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड रूम, आधार आधारित सर्च और न्यायिक प्रशिक्षण के नए माड्यूल भी अपनाये जा रहे हैं। अपने 25 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐसे उल्लेखनीय फैसले दिये हैं जो देश भर में नजीर के रूप में प्रस्तुत किये जाते हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ के युवाओं में लॉ प्रोफेशन की ओर भी रुझान बढ़ा है। इससे उन्हें करियर के नये अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंग्रेजों के समय की दंड संहिता को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता को लागू किया। अंग्रेजों के समय भारतीय दंड संहिता का जोर दंड पर था। भारतीय न्याय संहिता का जोर न्याय पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रयास है कि लोगों को आधुनिक समय के अनुरूप आये नये तकनीकी बदलावों को भी शामिल किया गया है। इसमें फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी पहलुओं का काफी महत्व है। लोगों को त्वरित और सुगम न्याय मिल सके, इसके लिए न्यायपालिका को मजबूत करने समय-समय पर जो अनुशंसाएँ की गईं, उनका बीते एक दशक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यह धान्य पूर्णता की ओर ली जाती है। जहां धर्म है वहां विजय है। हमार सच्चा कर्म और विचार ही धर्म है। चेतना ही सहज धर्म से जोड़ती है। अगले 25 साल में हम न्यायपालिका को कहां रखना चाहते है इस पर विचार और योजना बनाने का समय है। आम आदमी कोर्ट के दरवाजे पर एक विश्वास के साथ आता है उस मूल भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने न्याय व्यवस्था से जुड़े बेंच, बार और लॉयर को विजन के साथ आगे बढ़ने प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी समेकित विजन बनाएं ताकि न्यायपालिका अपने जनकल्याण के अंतिम उद्वेश्य तक पहुंच सके। न्यायाधीश श्री माहेश्वरी ने कहा कि भारत के संविधान में रूल ऑफ लॉ की भावना पूरी हो इसके लिए सभी कार्य करें और अंतिम पायदान तक खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचे इस सोच के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आमजनों का विश्वास प्राप्त करना न्यायपालिका का सर्वाेत्तम उद्देश्य है। हाईकोर्ट की स्थापना के साक्षी रहे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजत जयंती कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी और न्यायालय से जुड़े अपने संस्मरण साझा किया।
रजत जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि आज केवल न्यायपालिका के 25 वर्षों की यात्रा का उत्सव नहीं है बल्कि न्यायपालिका की उस सुदृढ़ परंपरा का सम्मान है जिसने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा में अपना निरंतर योगदान दिया है। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने न्याय की पहुंच को आम जनता तक सरल बनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तकनीकी को क्रांति की तरह अपनाने में अभूतपूर्व कार्य किए हैं।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने स्वागत भाषण दिया। न्यायालय की स्थापना के रजत जयंती अवसर पर सभी अतिथियों और उपस्थित जनों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रजत जयंती कार्यक्रम निश्चित रूप से हम सभी के लिए गौरवशाली क्षण है। पिछले 25 वर्षों में न्यायालय ने विधि के शासन को स्थापित करने बेहतर कार्य किया है। उन्होंने न्यायालय की स्थापना से लेकर अब तक उपलब्धि एवं कामकाज में आए सकरात्मक बदलाव से सभा को अवगत कराया।
समारोह के अंत में न्यायाधीश संजय के अग्रवाल ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरूण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव, तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सैम कोसी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यतीन्द्र सिंह, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी अरूणदेव गौतम, महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत, विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष चंदेल सहित अन्य न्यायाधीश, अधिवक्ता, जन प्रतिनिधिगण तथा न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन रायपुर द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चलाई जा रही योजना “प्रोजेक्ट धड़कन“ के अंतर्गत ज़िले भर में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य है - बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन तथा श्री सत्य साई हॉस्पिटल के सहयोग से आज प्राथमिक अभ्यास शाला बीटीआई में 175 बच्चों की जांच की गई, जिसमें 95 छात्र एवं 80 छात्राएं शामिल रही, जिसमें 01 बच्चा सस्पेक्टेड मिला। माध्यमिक शाला बीटीआई शंकर नगर में 151 बच्चों की स्क्रीनिंग किया गया जिसमें 83 छात्र एवं 68 छात्राएं शामिल रहे तथा 01 बच्चा सस्पेक्टेड मिला।
शिविर के दौरान बच्चों की जांच तेज धड़कन, वजन न बढ़ना, शरीर में नीलापन, बार-बार सर्दी-खांसी, सांस लेने में तकलीफ, तथा स्तनपान के समय पसीना आने जैसे लक्षणों के आधार पर की गई।
कोंडागांव। कोंडागांव में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश से बाजार पारा स्थित प्राथमिक उच्चतर माध्यमिक स्कूल में नाले का पानी भर गया। बच्चे गंदगी के बीच पढ़ने को मजबूर हैं।
शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले विभाग ने सभी स्कूलों को दुरुस्त करने का दावा किया था, लेकिन यह तस्वीरें उन दावों की पोल खोल रही हैं। नगर पालिका की सफाई और जल निकासी व्यवस्था भी फेल साबित हुई है। अब तक न कोई अफसर हालात देखने पहुंचा और न ही कोई कार्रवाई की गई है।
वहीं बलरामपुर के बनापति गांव में शुक्रवार शाम बिजली गिरने से 3 मवेशियों की मौत हो गई और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। वहीं लुरगी मोड़ के पास पेड़ गिरने से सड़क जाम हो गया। खंभा टूटने से वहां भी बिजली बाधित रही। घंटों बाद रास्ता साफ कराया गया। इस बीच छत्तीसगढ़ में आज 18 जिलों में यलो अलर्ट जारी है। रायपुर में रातभर बारिश हुई और सुबह से रुक-रुक कर बौछारें पड़ीं। पिछले 24 घंटे में राज्य के अधिकांश संभागों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिसमें बीजापुर में सबसे ज्यादा 56 मिमी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन के कारण अगले दो दिन तक ऐसा ही मौसम रहेगा।
दुर्ग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज झारसुगुड़ा उड़ीसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के 8 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में विभिन्न अधोसंचरना विकास कार्यों का वर्चुअल शिलान्यास किया। जिसमें आईआईटी भिलाई के फेस-2 परियोजना के कार्य भी शामिल है।
इसके अलावा अन्य सात आईआईटी, आईआईटी पटना, आईआईटी इंदौर, आईआईटी जोधपुर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी पलक्कड़, आईआईटी धारवाड़ और आईआईटी जम्मू के फेस-2 का उद्घाटन शामिल है। समारोह का सीधा प्रसारण नालंदा व्याख्यान कक्ष, आईआईटी भिलाई परिसर में आयोजित किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसुचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और अहिवारा के विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा भी उपस्थित थे। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के लिए यह गौरव की बात है कि देश के 8 आईआईटी में विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास देश के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि देश के साथ प्रदेश में भी तकनीकी शिक्षा का विस्तार होगा जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में तकनीकी ज्ञान को प्राथमिकता देते हुए इसके विस्तार हेतु पहल कर रही है। आईआईटी भिलाई में फेस-2 परियोजना पूर्ण होने पर यहां शोधार्थी छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने शिलान्यास के अवसर पर सभी को अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं दी। आईआईटी भिलाई के निर्देशक प्रो. डॉ. राजीव प्रकाश ने आईआईटी की उपलब्धियों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला।
उल्लेखनीय है कि फेस-2 निर्माण की आधारशिला रखने के साथ, आईआईटी भिलाई बुनियादी ढांचे के विकास के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है। भारत सरकार ने 29 मई 2025 को फेस-2 के लिए 2,257.55 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिसमें से 1092 करोड़ रुपये परिसर निर्माण के लिए हैं। इस परिसर के साथ निर्मित क्षेत्र को अतिरिक्त 1,51,343 वर्ग मीटर तक बढ़ाया जाएगा। यह नए इंजीनियरिंग और विज्ञान विभागों, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, आईसीटी सक्षम व्याख्यान कक्षों और उपकरण और प्रोटोटाइप सुविधाओं को जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। फेस-2 के दायरे में भवन और सुविधाओं में छात्रावास, मेस हॉल, इनडोर खेल परिसर, ओपन एयर थिएटर, कैंटीन, क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी मैदान, टेनिस कोर्ट, आवासीय भवन और स्वास्थ्य केंद्र और खरीदारी परिसर का विस्तार भी शामिल है। छात्रों की संख्या भी 1500 से बढ़कर 3000 हो जाएगी। फेस-2 के प्रमुख विकासों में से एक परिसर में 96 करोड़ रुपये की लागत से एक अनुसंधान पार्क की स्थापना होगी, जो छत्तीसगढ़ राज्य में पहला होगा। अनुसंधान पार्क का उद्देश्य अकादमिक उद्योग के सहयोग का महत्वपूर्ण लाभ उठाना और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। इस परियोजना को अक्टूबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
2016 में स्थापित, आईआईटी भिलाई को भारत सरकार द्वारा फेस-2 निर्माण के लिए 1090.17 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इस चरण के तहत, आईआईटी भिलाई परिसर की स्थापना कुटेलभाटा, दुर्ग जिले में 1,34,450 वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र के साथ की गई थी। आईआईटी भिलाई ने अकादमिक कठोरता, व्यक्तिगत विकास और एक स्थायी जीवन शैली के लिए डिज़ाइन किया गया एक स्मार्ट, छात्र-केंद्रित परिसर विकसित किया। इस संस्थान को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 20 फरवरी 2024 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। आईआईटी भिलाई परिसर स्मार्ट बिल्डिंग सिस्टम, पूरी तरह से वाई-फाई सक्षम परिसर जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन को एकीकृत करता है। परिसर को भविष्य की पीढ़ियों को प्रकृति के साथ रहने के आनंद की सराहना करने के लिए प्रेरित करने, युवा स्नातकों को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ-साथ प्रौद्योगिकी में उन्नति की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करने के लिए एक दृष्टि के साथ डिजाइन किया गया है। पर्यावरण की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, आईआईटी भिलाई का मास्टर प्लान अधिकांश पेड़ों और जल निकायों को बनाए रखते हुए मौजूदा प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल के साथ तैयार किया गया है।
आईआईटी भिलाई के मास्टर प्लान को कई अनुकरणीय प्रदर्शन पुरस्कारों के साथ-साथ लार्ज डेवलपमेंट (एलडी) खंड में पांच सितारा रेटिंग के साथ सर्वाेच्च जीआरआईएचए पुरस्कार मिला है। आईआईटी भिलाई ने जीआरआईएचए एलडी रेटिंग और एनएससीआई सुरक्षा पुरस्कार 2021 के तहत पैसिव आर्किटेक्चर डिजाइन और ऊर्जा प्रबंधन जैसे कई अन्य पुरस्कार जीते हैं। गोंड आदिवासी कला से प्रेरित, प्रवेश गलियारों में सांस्कृतिक रूप से निहित प्रतिष्ठान हैं जो छत्तीसगढ़ की विरासत का जश्न मनाते हैं। वर्तमान में आईआईटी भिलाई लगभग 185 करोड़ रुपये की 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहा है और 30 पेटेंट दायर किए गए हैं। आई.आई.टी. भिलाई विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों (एन.एम.आई.सी.पी.एस.) पर राष्ट्रीय मिशन के तहत स्थापित एक सेक्शन 8 कंपनी, आई. आई. टी. भिलाई नवाचार और प्रौद्योगिकी फाउंडेशन (आई. बी. आई. टी. एफ.) की भी मेजबानी करता है। अपने उत्कृष्ट कार्य की मान्यता में, आईबीआईटीएफ को हाल ही में ष्वित्तीय क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी (फिनटेक)-प्रौद्योगिकी-संचालित नवाचार के माध्यम से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सशक्त बनानाष् शीर्षक के तहत श्रेणी ए हब के रूप में नामित किया गया है। आईआईटी भिलाई की सबसे उल्लेखनीय पहलों में से एक विद्या समीक्षा केंद्र, छत्तीसगढ़ है, जो राज्य भर के स्कूलों, शिक्षकों, छात्रों और वितरण प्रणाली के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय डिजिटल निगरानी प्रणाली है। छात्रों और पाठ्यपुस्तक डेटा को मानकीकृत और प्रमाणित करके, मंच ने 10 लाख गैर-मौजूद छात्र रिकॉर्ड की पहचान की और उन्हें समाप्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप रु 40 करोड़ की 60 लाख पाठ्यपुस्तकों की बचत हुई। इसके अलावा, गहन तकनीक समाधानों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता में, आईआईटी भिलाई द्वारा देश भर में कुल 54 जनजातीय विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनका कुल परिव्यय 19 करोड़ रुपये है। वर्तमान में आईआईटी भिलाई में बीटेक, एमटेक, एमएससी और पीएचडी कार्यक्रमों के तहत 1525 छात्र नामांकित हैं। फेस-2 के विकास के पूरा होने के साथ, संस्थान न केवल अपने शिक्षण और अनुसंधान विकास कार्यक्षेत्रों में अपने दायरे और भूमिका का विस्तार करेगा, बल्कि सहयोगी परियोजनाओं में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में और राज्य के तकनीकी रूप से सहायता प्राप्त विकास को बढ़ावा देगा।
सुकमा। जिले से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। यहां सूरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जवानों ने नक्सलियों की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को ध्वस्त कर दिया है। जवानों ने फैक्ट्री से हथियार बनाने, विस्फोटक तैयार करने की मशीन भी बरामद की है।
मिली जानकारी के अनुसार, सुकमा के कैंप मेट्टुगुड़ा में स्थित नक्सलियों की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री सुरक्षाबलों ने ध्वस्त कर दिया है। इस कार्रवाई के दौरान जवानो ने हथियार बनाने और विस्फोटक तैयार करने की मशीन भी बरामद की है।
फैक्ट्री को ध्वस्त करने के बाद जवानों ने इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन भी चलाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, जिला बल सुकमा और कोबरा 203 वाहिनी ने संयुक्त रूप से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।
रायपुर। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में मातृत्व सुरक्षा को लेकर विशेष स्वास्थ्य सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत 24 और 25 सितंबर को प्रदेश के 843 शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित इन सत्रों में 40 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया। उन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
"छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी" की थीम पर आधारित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को घटाना तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें समुचित उपचार उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस अभियान ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को और सुदृढ़ किया, बल्कि जनसहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए मातृत्व सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता भी बढ़ाई है।
इन सत्रों में हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, वजन, रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड एवं पोषण परामर्श जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। इस दौरान लगभग 10 हज़ार से अधिक महिलाओं को ‘उच्च जोखिम गर्भावस्था’ (High-Risk Pregnancy) की श्रेणी में चिन्हित कर विशेषज्ञ चिकित्सकों के परामर्श और सतत निगरानी में लाया गया, जिससे संभावित जटिलताओं का समय रहते उपचार संभव हो सका।
अभियान अंतर्गत 6 हज़ार से अधिक महिलाओं की अल्ट्रासोनोग्राफी भी की गई। इससे जटिलताओं की समय पर पहचान और इलाज की दिशा में ठोस कार्रवाई संभव हुई। खासकर दूरस्थ अंचलों की महिलाओं के लिए यह सेवाएं विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हुईं।
कार्यक्रम की निगरानी हेतु राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 187 सत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। सेवाओं की गुणवत्ता, प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और हितग्राहियों तक सेवा की वास्तविक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह निरीक्षण अहम रहा।
बिलासपुर जिले में हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं पहुंची
इसी अभियान के अंतर्गत बिलासपुर जिले ने मातृत्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्ट्रेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से जिले के हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं पहुंचाई गईं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी के संकल्प के साथ हमारी सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत दो दिनों में 40 हज़ार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच और 10 हज़ार से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान इस बात का प्रमाण है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाएं दूरस्थ अंचलों तक भी प्रभावी रूप से पहुँच रही हैं। मातृ मृत्यु दर में कमी लाना और हर बहन को सुरक्षित मातृत्व उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है, तथा यह केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं बल्कि सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की मजबूत नींव है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में जिस व्यापक स्तर पर गर्भवती महिलाओं की जांच, परामर्श और उपचार की सुविधा सुनिश्चित की गई है, वह मातृ स्वास्थ्य को लेकर हमारी सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। दो दिनों में 40 हज़ार से अधिक महिलाओं की जांच और 10 हज़ार से अधिक उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान यह साबित करती है कि समय पर जांच और विशेषज्ञ सेवाओं से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य
गर्भवती महिलाओं को समय पर संपूर्ण जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा देना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इसके अंतर्गत स्थानीय चिकित्सकों के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों ने महिलाओं की एनीमिया, रक्तचाप, शुगर स्तर, भ्रूण की स्थिति, वजन आदि की जांच की। साथ ही प्रसव पूर्व देखभाल, पोषण, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल संबंधी जानकारी भी प्रदान की गई। इस पहल से न केवल मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को पहली बार विशेषज्ञ सेवाएं सुलभ रूप से उपलब्ध कराई जा सकीं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रत्येक माह की 9 और 24 तारीख को आयोजित किया जाता है, लेकिन विभाग द्वारा “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान को देखते हुए सितंबर माह में इसका दायरा तीन अतिरिक्त दिनों के लिए बढ़ाया गया है, ताकि एक भी गर्भवती महिला आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रह जाए।
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने 2,621 बर्खास्त बीएड योग्य सहायक शिक्षकों को सहायक शिक्षक (विज्ञान/लैबोरेटरी) पद पर समायोजित करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है. मामले में जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा, कि यह निर्णय न तो अवैध है और न ही मनमाना.
बता दें कि जांजगीर चांपा निवासी संजय कुमार और मुंगेली निवासी विजय कश्यप ने अप्रैल 2025 में लिए गए सरकार के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी . याचिका में कहा था कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत सहायक शिक्षक के पूरे पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं,लेकिन सरकार ने इन पदों पर बर्खास्त शिक्षकों को समायोजित कर नियमों का उल्लंघन किया है. सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 4422 रिक्त पदों में से 2621 बर्खास्त शिक्षकों को समायोजित किया,जो अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट के आदेश से बर्खास्त हुए थे . ये तमाम शिक्षक बीएड धारक थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीएड योग्यता जरूरी होने से उनकी सेवाएं समाप्त हुई .
सभी दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि सरकार का यह कदम नियमों के अनुरूप है और इसमें कोई मनमानी नहीं है. इसलिए याचिका को खारिज कर राज्य सरकार के समायोजन फैसले को बरकरार रखा गया.
रायपुर। छत्तीसगढ़ समेत आस-पास के प्रदेशो में मानसून अपनी विदाई के लिए तैयार है। जाते-जाते मानसून जमकर तांडव मचा रहा है। राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई अलग-अलग जिलों शुक्रवार रात से जमकर बारिश हो रही है। लगातार हो रही बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं रात भर बारिश होने के चलते राजधानी के कई इलाकों में पानी भर गया है। वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ मौसम विभाग ने रायपुर और दुर्ग संभाग समेत प्रदेश के अन्य कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, रायगढ़, सारंगढ़, बिलाईगढ़, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर में हल्की से भारी बारिश होगी।
मौसम विभाग ने इन सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने गरज-चमक की भी आशंका जताई है। साथ ही जनता से बेवजह घर से निकलने से बचने की सलाह दी है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने बारिश के दौरान खुले में ना रहने की सलाह भी लोगों को दी है।
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी के सीनियर आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग को लेकर उन्होने मुख्यमंत्री निवास के सामने समर्थकों के साथ धरने पर बैठने का ऐलान किया है। रायपुर कलेक्टर को लिखे पत्र में उन्होने आरोप लगाया है कि कोरबा कलेक्टर को तीन दिन के भीतर हटाने की मांग की थी। लेकिन इस अल्टीमेटम के बाद भी उनकी शिकायत पर कोई संज्ञान नही लिया गया, जिससे क्षुब्द्ध होकर अब वे मुख्यमंत्री निवास के सामने धरने पर बैठेंगे।
छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रहे ननकीराम कंवर ने कोरबा कलेक्टर को लेकर मोर्चा खोल दिया है। 22 सितंबर को उन्होने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर कलेक्टर अजीत वसंत को 3 दिन के भीतर हटाने की मांग की थी। चार पन्नों के इस पत्र में 14 बिंदुओं पर शिकायत करते हुए ननकीराम कंवर ने कलेक्टर अजीत वसंत को हिटलर तक बता दिया था। ननकीराम कंवर का पत्र वायरल होेने के बाद राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच ये उम्मींद जतायी जा रही थी कि पार्टी के नेता ननकीराम कंवर को शांत करा लेेंगे। लेकिन ऐसा नही हो सका, लिहाजा 3 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद ननकीराम कंवर ने एक और लेटर बम फोड़ दिया है।
इस बार उन्होने रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर धरने पर बैठने की जानकारी से अवगत कराया है। ननकीराम कंवर द्वारा लिखे गये पत्र में उन्होने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में हुए शराब, कोयला, सीजीएमएससी में दवा की खरीदी और पीएससी भर्ती घोटाले का खुलासा किया गया। इस मामले में शिकायत के बाद इस भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी आईएएस अफसर व नेताओं की गिरफ्तारी की गयी। लेकिन कोरबा कलेक्टर को लेकर किये जा रहे शिकायतों पर अब तक किसी भी तरह से संज्ञान नही लिया जाना, स्पष्ट प्रमाण है कि मुख्यमंत्री जी को अधिकारी कब्जे में रखकर गुमराह करके रखे हुए है।
यहीं वजह है कि शिकायतों पर संज्ञान नही लिये जाने से क्षुब्द्ध होकर अब ननकीराम कंवर ने मुख्यमंत्री निवास के सामने ही धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया है। ननकीराम कंवर के इस लेटर बम के बाद एक बार फिर सूबे की राजनीति गरमाने के साथ ही ब्यूरोक्रेसी में चर्चाओं का दौर जारी है। ऐसे में अब ये देखने वाली बात होगी इस पूरे मसले पर समय रहते पार्टी स्तर पर डैमेज कंट्रोल कर लिया जाता है या फिर ननकीराम कंवर अपनी जिद्द पर अड़े रहते है, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।
रायपुर। राजधानी रायपुर के सिलतरा स्थित फैक्ट्री में आज हुए दर्दनाक हादसे में 6 श्रमिकों की मृत्यु हो गई तथा कई श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्य में जुट गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला प्रशासन को घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक घटना है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जीएसटी बचत उत्सव के बीच औचक निरीक्षण पर देवपुरी स्थित ट्रैक्टर शोरूम पहुंचे। श्री साय ने यहां किसानों से आत्मीय संवाद कर जीएसटी कटौती पर उनकी प्रतिक्रिया और खरीदी में हुई बचत की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने शोरूम में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर खरीदने आए किसानों को चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अभनपुर के बिरोदा निवासी रवि कुमार साहू को उनके नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी। इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए रवि साहू ने कहा, "मैने सपने में भी नहीं सोच था कि मैं नया हार्वेस्टर खरीदूंगा। मैं सेकेंड हैंड हार्वेस्टर खरीदने के बारे में सोच रहा था। जीएसटी उत्सव में नए हार्वेस्टर खरीद पर मुझे पूरे 2 लाख रुपए की बचत हुई है। किसानों की चिंता का समाधान हमारे संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी जी और किसान हितैषी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ही कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं मुझे मेरे नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी और मुझसे बेहद आत्मीयता से संवाद किया। मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास दो एकड़ खेत है और अब हार्वेस्टर आने से मैं गांव में साझेदारी से और अधिक खेती कर पाऊंगा।” श्री रवि ने जीएसटी में कटौती के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अभनपुर कोलर से आए वरिष्ठ किसान ज्ञानिक राम साहू को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए श्री साहू ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद नए ट्रैक्टर की खरीदी पर उन्हें पूरे 60 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस बचत से उनका परिवार त्योहार को और अच्छे से मना सकेगा।
ट्रैक्टर शो रूम के प्रोप्राइटर अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से संवाद में बताया कि जीएसटी में कटौती के कारण बिक्री में इज़ाफ़ा हो रहा है और ग्राहकों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा, “पहले जो ट्रैक्टर 10.25 लाख रुपए का आता था, वह अब 9.75 लाख रुपए में उपलब्ध है, जिससे किसानों को 50 हजार रुपए की बचत हो रही है। इसी तरह 7.62 लाख का ट्रैक्टर अब 7.21 लाख और 6.51 लाख का ट्रैक्टर अब 6.11 लाख रुपए में मिल रहा है। कीमतों में कटौती और फेस्टिवल डिस्काउंट से किसानों की बड़ी बचत हो रही है। जीएसटी दर घटने के बाद हार्वेस्टर भी सस्ते हो गए हैं।”
जीएसटी कटौती से बाइक खरीदी में 7 हजार की बचत
इसके बाद मुख्यमंत्री श्री साय देवपुरी के बजाज बाइक शोरूम पहुंचे और यहां मौजूद ग्राहकों से जीएसटी कटौती पर आत्मीय चर्चा की। उन्होंने बाइक खरीदने आए संतोषी नगर निवासी एम.डी. गुलाब को उनकी नई बाइक की चाबी सौंपी। श्री गुलाब ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद बाइक खरीदने पर उन्हें 7 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा, “मैंने बजाज प्लेटिना 110 सीसी बाइक खरीदी है, जिसकी पहले कीमत 89,000 रुपए थी, जो अब मुझे 82,000 रुपए में मिली।”
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने आम जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत दी है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों की कीमतों में आई कमी से किसानों को सीधा लाभ हो रहा है, जिससे उनकी खेती-किसानी और जीवनयापन और सुगम होगा। उन्होंने कहा कि इस जीएसटी बचत उत्सव से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम हुआ है और त्यौहारी सीजन में परिवारों की खुशियाँ बढ़ी हैं। यह सुधार न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहा है बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उत्साह और समृद्धि का नया वातावरण भी बना रहा है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान बैठक में वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट का अनुमोदन, वर्ष 2025-26 का वार्षिक बजट प्रस्तुतिकरण एवं अनुमोदन, वर्ष 2025-26 हेतु ऑडिटर की नियुक्ति सहित अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा पर चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ से ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को 21 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और निखारने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है। हमने पूर्व में बंद हुए खेल अलंकरण समारोह को पुनः प्रारंभ किया है और जल्द ही उत्कृष्ट खिलाड़ी सम्मान समारोह भी प्रारंभ किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया के नए परिसरों की शुरुआत की गई है। कुछ महीने पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया का भी छत्तीसगढ़ आगमन हुआ था, जहां हमने उनसे खेल अधोसंरचना के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की। विशेषकर ओलंपिक खेलों को लेकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हेतु हमने विशेष तैयारी की है। ओलंपिक खेलों में प्रदेश के स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को दो करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक विजेताओं को एक करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया है। स्वाभाविक रूप से इससे खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि खेलों का बजट बढ़ाया जाए और कॉरपोरेट क्षेत्र की सहभागिता को भी प्रेरित किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2036 में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक खेलों के लिए भारत की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है और अहमदाबाद शहर को इसके लिए प्रस्तावित किया गया है। स्वाभाविक रूप से केंद्र सरकार का पूरा ध्यान देश में खेलों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर है, ताकि एक दशक के भीतर हम खेलों के क्षेत्र में महाशक्ति के रूप में उभर सकें। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी हमें राष्ट्रीय स्तर के खेलों के आयोजन हेतु सामूहिक प्रयास करने होंगे।
कैबिनेट मंत्री एवं संघ के उपाध्यक्ष केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर ओलंपिक जैसी खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत हुई है, जिससे सुदूर वनांचल की खेल प्रतिभाओं को एक सुनहरा मंच मिला है।
इस अवसर पर सचिवीय प्रतिवेदन का वाचन महासचिव विक्रम सिसोदिया ने किया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष हिमांशु द्विवेदी, गजराज पगारिया एवं कोषाध्यक्ष संजय मिश्रा सहित खेल संघ से जुड़े पदाधिकारी एवं सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
रायपुर। राजधानी रायपुर में शुक्रवार को एक निजी स्टील फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री के निर्माणाधीन प्लांट में काम चल रहा था। इसी दौरान भारी मशीनरी का एक बड़ा टुकड़ा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। उसी समय वहां काम कर रहे दर्जनभर से अधिक मजदूर इसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 6 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
घायलों को तत्काल देवेंद्र नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने 2 मजदूरों की हालत नाजुक बताई है। हादसे के बाद मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा होने की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि मलबे में अभी भी मजदूरों के दबे होने की आशंका है।
फैक्ट्री में अफरा-तफरी, रेस्क्यू जारी
हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। साथी मजदूर चीख-पुकार करते हुए मदद के लिए दौड़े। हादसे की सूचना मिलते ही धरसींवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। बचाव दल मलबे में दबे अन्य मजदूरों को निकालने में जुटा हुआ है। वहीं, स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहा है।
फैक्ट्री प्रबंधन चुप, जांच की मांग
घटना को लेकर अभी तक फैक्ट्री प्रबंधन या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मजदूरों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी और इसी लापरवाही के चलते इतना बड़ा हादसा हुआ।
श्रमिक संगठनों ने हादसे पर नाराजगी जताते हुए पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
मृतकों की पहचान जारी
मृत मजदूरों की पहचान अभी पूरी तरह नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन मृतकों की शिनाख्त कर उनके परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। वहीं, अस्पताल में भर्ती घायलों का उपचार जारी है।
गंभीर सवाल
यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़े करता है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर कितनी गंभीरता बरती जाती है। मजदूरों का कहना है कि निर्माणाधीन प्लांट में सुरक्षा उपकरणों और एहतियाती उपायों की भारी कमी थी।
रायपुर। विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक 30 सितंबर को होगी। ये बैठक मुद्दों से ज्यादा प्रशासनिक वजहों से महत्वपूर्ण है। दरअसल 30 सितंबर को मौजूदा मुख्य सचिव अमिताभ जैन का अंतिम कार्यकाल दिवस है, वहीं 30 सितंबर को ही अपराह्ण में मुख्य सचिव के तौर पर विकास शील पदभार ग्रहण करेंगे। लिहाजा कैबिनेट में जहां अमिताभ जैन को विदाई दी जायेगी, वहीं नये मुख्य सचिव का स्वागत किया जायेगा।
जहां तक मुद्दों का सवाल है, तो कई मुद्दों पर कैबिनेट में चर्चा होगी। बारिश की वजह से कई जगहों पर काफी नुकसान हुआ है, बैठक में उस पर भी चर्चा की जा सकती है। वहीं अन्य कई मुद्दों पर भी कैबिनेट की बैठक में मुहर लगेगी।