रायपुर। छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत राजधानी रायपुर में 21 अगस्त को खनिज संसाधन विभाग द्वारा राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मण्डल की 25वीं बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता खनिज संसाधन विभाग तथा मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद करेंगे। बैठक का आयोजन नवीन विश्राम भवन के कान्वेन्शन हॉल, सिविल लाइन रायपुर में प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होगा। इस अवसर पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, तकनीकी संस्थानों तथा निजी संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
खनिज संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य समन्वय स्थापित करते हुए खनिज नीतियों को नई दिशा प्रदान करना है, जिससे खनिजों का सतत और व्यवस्थित अन्वेषण किया जा सके। इससे निजी संस्थानों की भागीदारी से सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय और शोध को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस बैठक में प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान खनिजों की खोज हेतु किए गए कार्यों पर चर्चा की जाएगी तथा वर्ष 2025-26 में खनिजों की खोज से संबंधित कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नए संसाधनों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म द्वारा वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित कुल 11 अन्वेषण परियोजनाओं तथा भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की 29 अन्वेषण परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इन परियोजनाओं के अंतर्गत मुख्य रूप से लिथियम, गोल्ड, ग्लूकोनाइट, लेपिडोलाइट, स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल्स, फॉस्फोराइट, फ्लोराइट, बॉक्साइट, चूना पत्थर तथा लौह अयस्क जैसे खनिजों के अन्वेषण कार्य शामिल हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पेश प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 को सदन की मंजूरी मिल गई है। इस अवसर पर रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बिल का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए एक गेम चेंजर कानून बताया।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह बिल देश के युवाओं, उनके परिवारों और समाज के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करेगा। आज ऑनलाइन गेमिंग की लत ने हजारों परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुँचा दिया है। कई युवा इस जाल में फंसकर आत्महत्या तक कर रहे हैं। ऐसे में यह बिल समय की मांग था।
उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से एक प्राधिकरण का गठन कर ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। अवैध और हानिकारक गेम्स पर रोक लगेगी तथा बच्चों और युवाओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
सांसद अग्रवाल ने यह भी कहा कि इस बिल के अंतर्गत पढ़ाई और खेलों से संबंधित सकारात्मक व शैक्षणिक गेमिंग ऐप्स को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगे और वे डिजिटल युग में भी स्वस्थ, सशक्त और सुरक्षित रह सकें।व
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ में NHM संविदा कर्मचारी संघ विगत 3 दिनों से नियमितीकरण और संविलियन समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसी दौरान धरना प्रदर्शन के तीसरे दिन आज जब प्रदर्शनकारियों ने संविदा को कूप्रथा बताते हुए इसका पुतला दहन करने लगे, तो प्रशासननिक अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया. इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि शासन को पुतले की चिंता है, लेकिन अपने कर्मचारियों और उनके भविष्य की चिंता नहीं है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संविदा जैसी कुप्रथा से संबंधित पुतले का दहन करने से रोकना यह दर्शाता है कि शासन हमारी नहीं पुतले की ज्यादा चिंता करती है. इसके साथ ही उन्होंने पुतले की प्रशासनिक अधिकारी के सामने डंडे से पिटाई कर अपना आक्रोश प्रकट किया.
संघ के अध्यक्ष कौशलेश तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत प्रदेश के 16 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी इस समय अनिश्चितकालीन आंदोलन पर हैं जिसमें बलौदा बाजार जिले में काम करने वाले 500 कर्मचारी भी स्थानीय दशहरा मैदान में आंदोलन के दौरान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान विविध प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से सरकार की नीतियों का विरोध किया जा रहा है. इस कड़ी में आज संविदा कुप्रथा का पुतला दहन करने का प्रयास किया गया जिसे प्रशासन ने रोक दिया तथा पुतला को पुलिस उठा कर ले गई. जाते-जाते कर्मचारियों ने इस संविदा कुप्रथा के पुतले की लाठी डंडों से पिटाई करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन किया.
पुतला दहन करने जा रहे कर्मचारियों ने बताया कि, कानून का सम्मान करते हुए उन्होंने पुतला दहन के संबंध में फोन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया था जिस पर प्रशासन ने इसे रोक दिया. कर्मचारियों ने इस बात से दुःख और आक्रोश जताया कि प्रशासन को जिंदा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी के दुख दर्द की चिंता से अधिक बेजान पुतले की परवाह ज्यादा है.
संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हेमंत सिन्हा ने बताया कि आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पताल की भी स्वास्थ्य व्यवस्था डगमगा रही है. आने वाले मरीजों को भी इलाज उपचार तथा जांच के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है या फिर परेशान होकर वह वापस लौट जा रहे हैं. और यह सरकार जो कहती है वह कर नहीं रही मोदी की गारंटी की घोषणा आज तक अमल में नहीं लाई है इनके कहने और करने में अंतर नजर आ रहा है.
ये हैं 10 सूत्री मांग-
संविलियन एवं स्थाईकरण
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
ग्रेड पे निर्धारण
लंबित 27% वेतन वृद्धि कार्य
मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता
नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
अनुकंपा नियुक्ति
मेडिकल एवं अन्य अवकाश की सुविधा
स्थानांतरण नीति
न्यूनतम 10 लाख तक कैशलेश चिकित्सा बीमा सुविधा
प्रदर्शन में यशवंत पटेल, विनोद देवांगन, आलोक दुबे, फ्रैंकलिन रात्रे, विनोद साहू, मोहिंदर कुमार संगीता, खोगेश्वर पटेल ,राजेश डहरिया, विकास जायसवाल डोमन कुमार, हेमंत सिन्हा, गौतम साहू , दिनेश कुमार, नरेंद्र वर्मा, गंगाराम धीवर, मंजू साहू सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए अब स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से कैशलेश कर्मचारी कल्याण संघ राज्य सरकार से कैशलेश और निःशुल्क चिकित्सा सेवा की मांग करता आ रहा है। प्रदेश के लगभग 5 लाख कर्मचारी और उनके परिजन इस सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। अब स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की सकारात्मक प्रतिक्रिया से इस दिशा में रास्ता साफ होता दिख रहा है।
इलाज का बढ़ता खर्च बना बड़ी चुनौती
कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा समय में इलाज पर होने वाला खर्च दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर गंभीर इलाज तक के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां भारी रकम चुकानी पड़ती है। कई बार कर्मचारियों को इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है। ऐसे में यदि सरकार कैशलेश और निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है, तो यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
स्वास्थ्य सचिव से मिला संघ का प्रतिनिधिमंडल
इसी मांग को लेकर कैशलेश कर्मचारी कल्याण संघ का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष उषा चंद्राकर के नेतृत्व में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से मिला। बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और चिकित्सा खर्च के बोझ पर विस्तार से चर्चा हुई। संघ ने सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए मांग रखी कि सभी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेश आधार पर मुफ्त इलाज की सुविधा मिले, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ और किफायती हो सकें।
सचिव ने दिए सकारात्मक संकेत
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया और शुभ संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की इस समस्या को समझती है और जल्द ही ठोस कदम उठाने पर विचार कर रही है। सचिव के इस रुख से कर्मचारियों और संगठन में खुशी और उम्मीद का माहौल है।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे शामिल
इस प्रतिनिधिमंडल में संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। इनमें विशेष रूप से विजय कोचेद्र, आजूराम सिंह, लिखेश कुमार वर्मा, विनोद सिंह, मिर्ज़ा बेग, कासिम, दिलेश्वर साव, मंजुलता सोरी, पीयूष कुमार गुप्ता, रमेश नेगी, देव कुमार साहू (रायपुर संभाग अध्यक्ष), पंकज कुमार राठौर (दुर्ग संभाग अध्यक्ष), विनोद सोनी (सरगुजा संभाग अध्यक्ष), प्रहलाद साहू (बिलासपुर संभाग अध्यक्ष) सहित आईटी सेल प्रभारी धीरज तिवारी और अन्य कई जिलों से आए प्रतिनिधि शामिल रहे।
28 अगस्त को होगा बड़ा सम्मेलन
संघ ने घोषणा की है कि 28 अगस्त 2025 को जिला दुर्ग में कर्मचारियों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। संगठन ने कहा कि यदि सरकार इस मांग को लागू करती है, तो यह प्रदेश के कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक निर्णय होगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री साय के मंत्रिमंडल का विस्तार आखिरकार हो गया है, लेकिन 14 मंत्रियों की नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताया है और सवाल उठाया है कि क्या सरकार को इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद बनाने की अनुमति मिली थी। इसको लेकर भूपेश बघेल ने सीएम साय से जवाब भी मांगा है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार में 14 मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2003 में बने कानून के मुताबिक विधानसभा सदस्यों की संख्या में 15% तक ही मंत्री बन सकते हैं। जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो मैंने भारत सरकार को पत्र लिखा था। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20% तक करने की मांग की गई थी। इसके पीछे छत्तीसगढ़ का भौगोलिक रूप से बड़ा होना और विधानसभा परिषद न होने का तर्क दिया था। लेकिन पत्र का कोई जवाब नहीं आया और न ही अनुमति मिली। ऐसे में अब सवाल उठ रहा साय सरकार को अनुमति कब मिली ? बिना अनुमति अगर 14 मंत्री बनाए गए तो यह अवैधानिक है। मुख्यमंत्री साय को इसका जवाब देना चाहिए।
हरियाणा की तर्ज पर हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार
हरियाणा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इस लिहाज से हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से 13 मंत्री ही बनते आ रहे थे। नियमों के तहत विधायकों की संख्या के आधार पर 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते हैं, इसलिए 90 विधायकों में 13.5 मंत्री के तहत मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए गए हैं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर जिले के तिलसिवां में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया और 211 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने सूरजपुर के नए बस स्टैंड स्थित अटल परिसर में भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया तथा किसान मेला सह जैविक मेला का वर्चुअली शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। यह अवसर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। बीते 25 वर्षों में राज्य ने विकास के अनेक आयामों को स्पर्श किया है और अब हमें नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर प्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटल जी को नमन करता हूँ। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर यहां के लोगों को नई पहचान दी। वे देश और प्रदेश के युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। मुख्यमंत्री ने वाजपेयी जी के राजनीतिक जीवन, काव्य प्रतिभा और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों का भी स्मरण किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में मोदी की गारंटी के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस, 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद, श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना, बुजुर्गों के लिए 19 तीर्थ स्थलों की यात्रा और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना शामिल है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल उन्मूलन पर बोलते हुए कहा कि देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त करने के प्रयास तेज गति से चल रहे हैं और मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि कुख्यात नक्सली बसवराजू का सफाया किया गया है तथा बड़ी संख्या में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य ने स्थापना के 25 वर्षों में विकास की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के अनावरण पर उपस्थित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की ही देन है। उन्हीं के द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई, जिससे गांव-गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ा गया और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निरंतर जनहित एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पुल-पुलियों, पेयजल आपूर्ति और शहरी विकास के क्षेत्र में हुए कार्यों से न केवल ग्रामीण अंचलों में कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि नगरीय निकायों में भी आधारभूत संरचना का तेजी से विस्तार हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सूरजपुर जिले को 211 करोड़ 33 लाख रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 78 करोड़ 78 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 37 कार्यों का लोकार्पण किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 04, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 03, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 20, नगरीय निकाय विभाग के 04, आदिवासी विकास विभाग के 03 तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 03 कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही 132 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से होने वाले 55 कार्यों का भूमि पूजन किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 14, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 04, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 22, जल संसाधन विभाग सूरजपुर के 07, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 04, पुलिस विभाग का 01 तथा आदिवासी विकास विभाग के 03 कार्य सम्मिलित हैं।
समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने किसान मेला सह जैविक मेला सह प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण का भी शुभारंभ किया। आयोजित मेले में कृषि यंत्रों, जैविक खाद, कीटनाशक एवं बीज की नवीनतम किस्मों के साथ-साथ विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को फसल चक्र परिवर्तन, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने रोजगार से जुड़े ऐसे आयोजनों को युवाओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए सभी हितग्राहियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों की योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। मछली पालन विभाग से आइस बॉक्स व नाव-जाल, समाज कल्याण विभाग से मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, स्वास्थ्य विभाग से वयवंदन, आयुष्मान एवं सिकल सेल कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी और चेक, महिला एवं बाल विकास विभाग से एलआईसी बॉण्ड, महिला समूहों को ऋण चेक व बकरी पालन हेतु ऋण, कृषि विभाग से सिंचाई पंप, रामतिल बीज और नलकूप-पंप अनुदान प्रदान किए गए। साथ ही एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के 25 हितग्राहियों को रोजगार स्वीकृति आदेश भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष चन्द्रमणी पैकरा, रेखा राजवाड़े, लवकेश पैकरा, सूरजपुर जिले के रेडक्रॉस सोसाइटी अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
कोरबा। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे एनएचएम कर्मियों ने आज खून से खत लिखकर अपना विरोध जताया। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर हड़तालियों ने अपनी मांगों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है।
एनएचएम कर्मचारियों ने संविलियन, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, लंबित वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। खास बात यह है कि इस बार आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहेंगी।प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
हड़ताल की वजह से राज्यभर के अस्पतालों में न केवल नियमित सेवाएं बाधित है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही है। इस हड़ताल का सबसे गंभीर असर विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) पर पड़ेगा। संघ ने साफ किया है कि इस बार न तो आपातकालीन सेवाएं दी जाएंगी और न ही कलम उठाई जाएगी। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जिन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम में मंगलवार को राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब कांग्रेस पार्षद और ब्लॉक अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। वार्ड क्रमांक 5 की कांग्रेस पार्षद गायत्री साहू और उनके पति लक्ष्मीनाथ साहू, जो ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हैं, पर आरोप है कि उन्होंने निगम कार्यालय में घेराव के दौरान तोड़फोड़ की और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की।
जानकारी के अनुसार, शहर में लगातार पानी और बिजली की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश था। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्षद गायत्री साहू, उनके पति और बड़ी संख्या में महिलाएं निगम कार्यालय पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने अफसरशाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
महापौर कक्ष के बाहर मटका फोड़कर किया विरोध
प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित कांग्रेस पार्षद और उनके समर्थकों ने महापौर के चैंबर के बाहर मटका फोड़कर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि पानी-बिजली की किल्लत से लोग परेशान हैं, लेकिन निगम प्रशासन समाधान की बजाय चुप्पी साधे हुए है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जोन स्तर पर अफसरशाही हावी हो चुकी है और आम जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
हंगामे और घेराव के दौरान स्थिति बिगड़ने पर निगम प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद सिविल लाइन थाने की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गायत्री साहू और उनके पति लक्ष्मीनाथ साहू पर तोड़फोड़ और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर लिया।
कांग्रेस का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं ने निगम प्रशासन पर ही सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जनता की समस्याओं को उठाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्ता सिर्फ हंगामा करने में विश्वास रखते हैं और जनता की समस्याओं को मुद्दा बनाकर राजनीति कर रहे हैं।घटनास्थल पर मौजूद कई स्थानीय नागरिकों ने भी बताया कि शहर में पानी और बिजली की आपूर्ति की स्थिति वाकई गंभीर है। उनका कहना है कि पार्षद और ब्लॉक अध्यक्ष ने जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए था।
नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, ऊर्जा महत्त्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता और राज्य के औद्योगिक भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनके सवाल का उत्तर देते हुए केंद्रीय खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद में छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज संपदा का विस्तार से उल्लेख किया।
श्री अग्रवाल ने कहा कि कटघोरा का लिथियम खनन भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह खनन न केवल ईवी सेक्टर बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखला को भी सुरक्षित बनाएगा। साथ ही, इस ब्लॉक में उपलब्ध दुर्लभ मृदा तत्त्व (आरईई) इसे और भी सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि, "नई औद्योगिक क्रांति की रीढ़ ऊर्जा-महत्त्वपूर्ण खनिज हैं। छत्तीसगढ़ के लिथियम, टिन और ग्रेफाइट उत्पादन को देखते हुए राज्य में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना आवश्यक है। यह न केवल उत्पादन और दक्षता बढ़ाने का कार्य करेगा, बल्कि स्वच्छ निष्कर्षण, अपशिष्ट न्यूनीकरण और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण पर भी केंद्रित होगा।"
सांसद अग्रवाल ने इस दौरान विशेष आग्रह किया कि राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के अंतर्गत NIT रायपुर और IIT रायपुर जैसे संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि खनिजों के सबसे बड़े भंडार वाले राज्य छत्तीसगढ़ को अब तक इस मिशन में स्थान नहीं मिला है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने 2022-23 से 2025-26 तक आरईई/आरएम अन्वेषण परियोजनाओं की संख्या 49 से बढ़ाकर 94 की है, जो भारत की तैयारी को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ के खनिज उत्पादन में अग्रणी भूमिका
- टिन सांद्र (Tin concentrate) का उत्पादन 2020-21 में 16,865 किलोग्राम से बढ़कर 2022-23 में 45,448 किलोग्राम हो गया।
- सरगुजा जिले की सक्रिय ग्रेफाइट खदान ने देश की जरूरतों की पूर्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
- देश की 14 टिन खदानों में से 6 केवल छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं।
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ भारत की ऊर्जा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार बन रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की दूरदृष्टि
सांसद अग्रवाल ने कहा कि, "भारत के औद्योगिक भविष्य में छत्तीसगढ़ निर्णायक भूमिका निभाएगा। हमें केवल खनन तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास के साथ आगे बढ़ना है। आने वाला समय छत्तीसगढ़ को देश का ईवी और भारी उद्योगों का हब बनाएगा।"
उनके सतत प्रयास और दूरदर्शिता ने एक बार फिर साबित किया कि वे न केवल जनता के प्रतिनिधि हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर प्रतिष्ठित स्थान दिलाने वाले सच्चे प्रहरी भी हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (सीजी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए वॉलन्टरी कॉम्प्लायंस स्कीम लागू की है। यह योजना सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगी। इस योजना के अंतर्गत 31 मार्च 2024 तक पंजीकृत सभी प्रोजेक्ट्स को लंबित तिमाही प्रगति रिपोर्ट और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट एक साथ जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। लंबित रिपोर्ट जमा करने पर विलंब शुल्क में 70 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। वहीं जिन प्रोजेक्ट्स के पास मान्य कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र है, उन्हें 90 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी।
सीजी-रेरा ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का उद्देश्य प्रमोटरों को नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत हो सके। प्राधिकरण ने सभी प्रमोटरों से अपील की है कि वे योजना अवधि में अनुपालन सुनिश्चित करें और निर्धारित समय-सीमा में अपनी रिपोर्ट्स प्रस्तुत करें।
विस्तृत जानकारी सीजी-रेरा की आधिकारिक वेबसाइट https://rera.cgstate.gov.in/ तथा परिपत्र संख्या 115, 116 और 119 में उपलब्ध है। यह योजना रियल एस्टेट सेक्टर में अनुपालन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कैबिनेट विस्तार के बाद अब मंत्रियों के विभागों का नया बंटवारा कर दिया गया है। इस फेरबदल में कई पुराने मंत्रियों से उनके अहम विभाग वापस ले लिए गए हैं और नए मंत्रियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं।अनुसार, डिप्टी सीएम अरुण साव के पास से विधि एवं विधायी विभाग हटा लिया गया है। वहीं, डिप्टी सीएम विजय शर्मा से तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी ले ली गई है। मंत्री टंकराम वर्मा से खेल एवं युवा कल्याण विभाग लिया गया है।
लखनलाल देवांगन बने आबकारी मंत्री
अब तक आबकारी विभाग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास था। लेकिन इस फेरबदल के बाद मंत्री लखनलाल देवांगन को आबकारी विभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
अन्य प्रमुख बदलाव
परिवहन विभाग की जिम्मेदारी अब मंत्री केदार कश्यप को सौंपी गई है।
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन का कार्यभार दिया गया है।
वरिष्ठ नेता रामविचार नेताम को मछली पालन और पशुधन विकास विभाग का प्रभारी बनाया गया है।
टंकराम वर्मा को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है।
नए मंत्रियों को मिला विभाग
साय कैबिनेट के हालिया विस्तार में तीन नए विधायकों को मंत्री बनाया गया है। मंगलवार को राज्यपाल ने राजभवन में इन तीनों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण करने वाले मंत्री हैं—
गजेंद्र यादव – स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि एवं विधायी कार्य विभाग संभालेंगे।
राजेश अग्रवाल – पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
खुशवंत साहेब – कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, रोजगार और अनुसूचित जाति विकास विभाग देखेंगे।
गौरतलब है कि इन तीन मंत्रियों में राजेश अग्रवाल और खुशवंत साहेब पूर्व में कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद अब उन्हें साय मंत्रिमंडल में मंत्री पद मिला है।
राजनीतिक मायने
इस फेरबदल को आगामी चुनावों और संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी भाजपा संगठन की रणनीति का हिस्सा है। वहीं वरिष्ठ मंत्रियों से कुछ अहम विभाग लेकर नए चेहरों को देने को संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख श्री वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।
एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। श्री शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।
रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़कों पर गणेश पंडाल लगाने और यातायात बाधित होने पर जिला प्रशासन सख्ती करेगा। साथ ही पंडाल सड़क पर लगाने के पूर्व अनुमति भी लेनी होगी। वहीं रात 10 बजे के बाद ध्वनि विस्तारक यंत्र को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। प्रत्येक पंडाल में सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए गए है।
दरअसल आगामी गणेशोत्सव को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा आज रेडक्रॉस सभाकक्ष में गणेश पंडाल समितियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में एडीएम श्री उमाशंकर बन्दे एवं एएसपी श्री लखन पटले सहित नगर निगम के जोन आयुक्त उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि पंडाल निर्माण एवं मूर्ति स्थापना के दौरान एनजीटी भोपाल एवं छत्तीसगढ़ शासन के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। आयोजन समितियां स्वयंसेवक तैनात करेंगे तथा रात्रिकालीन विशेष निगरानी सुनिश्चित करेंगे। उल्लेखनीय है कि ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग धीमी ध्वनि में ही किया जाए। उल्लंघन पर कोलाहल अधिनियम एवं मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्यवाही होगी।
गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन नगर निगम द्वारा निर्धारित महादेवघाट के विसर्जन कुंड में ही किया जाएगा। झांकियों में अग्निशमन यंत्र, फायर फाइटर एवं प्रशिक्षित स्वयंसेवक अनिवार्य रूप से रहें। झांकी/विसर्जन के दौरान अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन प्रतिबंधित रहेगा। शास्त्री चौक से जयस्तंभ चौक तक झांकी निकालना प्रतिबंधित है। विसर्जन उपरांत पूजा सामग्री, फूल, प्लास्टिक आदि को नगर निगम द्वारा निर्धारित स्थल पर ही संग्रहित किया जाए। झांकियों की ऊँचाई विद्युत तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखे, जनरेटर एवं वायरिंग सुरक्षित स्थिति में हो। समितियां अपने सभी सदस्यों एवं स्वयंसेवकों की सूची, पता व मोबाइल नंबर संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध कराएं। विसर्जन के समय छोटे बच्चों एवं वृद्धजनों को साथ लाने से बचें। इस अवसर पर एसडीम नंदकुमार चौबे, निगम उपायुक्त यू एस अग्रवाल, एएसपी ट्रैफिक डॉ. प्रशांत शुक्ला सहित अन्य अधिकारी व समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
रायपुर। मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हो गया है। शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी गजेंद्र यादव को दी गयी है। वहीं गुरु खुशवंत को कौशल विकास, रोजगार और अनुसूचित जाति विभाग दिया गया है, जबकि राजेश अग्रवाल को प्रर्यटन और संस्कृति विभाग दिया गया है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज से राजधानी रायपुर स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्यालय परिसर, शंकर नगर में पदोन्नत प्राचार्यों के लिए ऑनलाइन ओपन काउंसिलिंग की शुरुआत हो गई है। इस प्रक्रिया में कुल 845 नव पदोन्नत प्राचार्य शामिल होंगे।
संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में काउंसिलिंग 20 अगस्त से 23 अगस्त 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में क्रमशः 150-150 प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा। पदोन्नति आदेश एवं रिक्त पदों की सूची पूर्व में ही स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुगम हो।
सरकार द्वारा तय नियमावली एवं वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद महिला और फिर पुरुष अभ्यर्थियों को वरिष्ठता क्रम से संस्था चयन का अवसर मिलेगा। एक वर्ष से कम अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्यों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।
काउंसिलिंग हेतु वेटिंग हॉल और काउंसिलिंग कक्ष निर्धारित कर दिए गए हैं, जहाँ केवल अभ्यर्थियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। सभी पदोन्नत प्राचार्यों को अपने सेवा प्रमाण पत्र और मान्य फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे।
काउंसिलिंग में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दिन 23 अगस्त को अवसर दिया जाएगा। काउंसिलिंग पूर्ण होने के पश्चात् शासन द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे तथा सभी को आदेश प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर पदग्रहण करना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सरलता लाने का संकल्प लिया है। इस पहल से अब प्राचार्यों की पदस्थापना की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। पहले से ही रिक्त पदों का स्थान सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे सभी को अपने अधिकार और विकल्प स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।
बिलासपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और आवारा मवेशियों की समस्या पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर मवेशियों की आवाजाही आमजन की जान के लिए बड़ा खतरा है और इस पर तुरंत ठोस कार्रवाई आवश्यक है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पेंड्रीडीह बायपास पर ढाबों के सामने ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग से न केवल व्यवस्था बिगड़ रही है बल्कि गंदगी भी फैल रही है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिनकी यह जमीन है, वे वहीं घर बनाकर रहें तब समझ आएगा। पेंड्रीडीह बाईपास पर फैली अव्यवस्था से मेडिकल इमरजेंसी व अन्य जरूरी काम में आने-जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसमें जल्द से जल्द सुधार कराएं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी में हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि संबंधित जमीन प्राइवेट लैंड है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अगर प्राइवेट लैंड है तो क्या उसका मनमाना इस्तेमाल किया जाएगा। जमीन किस प्रयोजन से दी गई थी और उसका व्यावसायिक उपयोग कैसे हो रहा है, इसकी जांच जरूरी है। शासन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि संबंधित व्यक्तियों को बुलाकर समझाइश दी गई है और उनसे यह जानकारी भी ली जाएगी कि प्राइवेट लैंड का उपयोग किस आधार पर व्यावसायिक रूप में किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने 15 दिन का समय मांगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पेंड्रीडीह बायपास पर बेतरतीब गाड़ियों की पार्किंग, घटनाएं, गंदगी और लापरवाह पुलिस पेट्रोलिंग व्यवस्था को और खराब कर रही हैं। आरटीओ भी ध्यान नहीं दे रहा। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इसकी गंभीरता को समझिए। कोई व्यक्ति मेडिकल इमरजेंसी में जा रहा हो या अन्य कार्य से, वहां की अव्यवस्था से भारी दिक्कतें आती हैं। एनएचएआइ को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।
एनएचएआइ ने हादसों को रोकने के उनके प्रयासों के संबंध में अदालत को बताया कि अतिरिक्त रूट पेट्रोलिंग वाहन तैनात किए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है। पेंड्रीडीह गांव में कैटल प्लेटफार्म बनाने का काम शुरू हो गया है, वहीं रतनपुर और बेलमुंडी में शेल्टर बनाए जाएंगे। 7.35 किलोमीटर तक बांस की बाड़ (सुरक्षा कवच) लगाने का टेंडर जारी किया गया है। टोल प्लाजा पर पर्चे बांटकर और उद्घोषणा कर यात्रियों को सावधान किया जा रहा है। प्रतिबिंबित गले के पट्टे (रेफ्लेक्टिव नेक बेल्ट) मवेशियों को पहनाए जा रहे हैं ताकि रात में भी उन्हें देखा जा सके। हाईवे के संवेदनशील हिस्सों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम भी शुरू हो गया है।
कलेक्टर बिलासपुर ने हलफनामा देकर बताया कि पेंड्रीडीह बायपास क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया है। सभी स्ट्रीट लाइटें चालू की गई हैं। म्युनिसिपल कार्पोरेशन और नगर पंचायत बोदरी ने नियमित रूप से मवेशी हटाने के लिए कर्मचारी तैनात किए हैं। गाय-शिकारी (कैटल कैचर) वाहन लगातार चल रहे हैं।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को फटकार लगाई कि सात मवेशियों की मौत वाले हादसे पर अब तक कोई व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने संज्ञान में लाया गया है कि 16 जुलाई 2025 के न्यायालय के आदेश में राज्य के मुख्य सचिव को राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना के संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सात मवेशियों की जान चली गई थी। मुख्य सचिव द्वारा उपरोक्त आदेश के अनुपालन में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है. इसके मद्देनजर, मुख्य सचिव अगली सुनवाई तक अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने आदेश दिया है।
कोर्ट ने पाया कि एनएचएआइ की कार्रवाई केवल बिलासपुर-सरगांव बायपास तक सीमित रही है, जबकि बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे (रतनपुर मार्ग) पर हालात बेहद खराब हैं। इस पर एनएचएआइ प्रोजेक्ट डायरेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नगर पंचायत रतनपुर को भी पक्षकार बनाकर अगली सुनवाई में जवाब तलब किया गया है। अदालत ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी ताकि परस्पर विरोधी आदेश न हों। मामले की अगली सुनवाई 19 सितम्बर को होगी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शपथ ग्रहण करने वाले कैबिनेट के नए सदस्य गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब तथा राजेश अग्रवाल को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त मंत्रीगण अपनी समर्पित निष्ठा और कार्यकुशलता के साथ जनसेवा के लिए पूर्ण तत्परता से कार्य करेंगे तथा छत्तीसगढ़ राज्य को विकास और सुशासन की दिशा में नए आयाम प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी मंत्रियों के उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलकामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार सामूहिक सहयोग और प्रतिबद्धता के बल पर जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।
रायपुर। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप (सीएमजीजीएफ) योजना के तहत चयनित योग्य युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त किया है। इस संबंध में मंत्रालय से आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के अनुसार, कुल 36 युवाओं को विभिन्न विभागों में पोस्टिंग दी गई है। बता दें कि राज्य में सुशासन संबंधित कार्यों को सुदृढ़ करने के प्रयास के तहत मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप योजना की शुरूआत की गई है।
जानकारी के अनुसार, इस योजना का 2 वर्ष का पाठ्यक्रम 8 चरणों में विभाजित है। योजना के पहले चरण में आईआईएम रायपुर द्वारा चयनित युवाओं का पब्लिक पॉलिसी पर एक माह का शैक्षणिक सत्र आयोजित किया गया था। इस योजना का 2 वर्ष का पाठ्यक्रम 8 चरणों में विभाजित है। इसके बाद योजना के दूसरे चरण के तहत 18 अगस्त 2025 से फेलो को विभागों में पोस्ट किया गया है, जहां वे न केवल शासकीय कार्यों के बारे में गहरी समझ प्राप्त केरेंगे, बल्कि विकासात्मक नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भी योगदान देंगे। सुशासन एवं अभिसरण विभाग इस योजना का नोडल विभाग है।