प्राचार्य प्रमोशन विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
बिलासपुर। प्राचार्य प्रमोशन को लेकर उठ रहे विवाद के बीच हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। वरीष्ठता सूची को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 45 दिन के भीतर मामले के निराकरण का आदेश दिया है। दरअसल सरगुजा जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चिरंगा में प्रधान पाठक पद पर पदस्थ मोहम्मद मुस्ताक खान ने प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए अपनी वरिष्ठता के साथ अन्याय किए जाने के खिलाफ न्यायालय की शरण ली थी।
मामले के अनुसार, मोहम्मद मुस्ताक खान की नियुक्ति वर्ष 1983 में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। इसके बाद कलेक्टर सरगुजा के आदेश दिनांक 5 सितंबर 2005 के तहत उन्हें सहायक शिक्षक से अपर डिवीजन टीचर के पद पर पदोन्नत किया गया। बाद में 6 नवंबर 2009 को वे प्रधान पाठक (मिडिल स्कूल) के पद पर पहुंचे।
लोक शिक्षण संचनालय द्वारा 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में जारी की गई राज्य स्तरीय अंतिम वरिष्ठता सूची में मोहम्मद मुस्ताक खान का नाम सीरियल नंबर 901 पर दर्ज किया गया। हालांकि, सूची में उनके प्रमोशन की तिथि 5 सितंबर 2005 की जगह 14 अक्टूबर 2008 अंकित कर दी गई। इसी त्रुटि के चलते उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई।
इस गलती के सुधार हेतु मोहम्मद मुस्ताक खान ने 16 मई 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अंबिकापुर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर विचार करते हुए डीईओ ने 5 नवंबर 2024 को लोक शिक्षण संचनालय को पत्र भेजकर त्रुटि सुधार की अनुशंसा भी की। इसके अलावा, संयुक्त संचालक सरगुजा संभाग ने भी 2 सितंबर 2024 को इस विषय में पत्र जारी किया था।
इसके बावजूद, लोक शिक्षण संचनालय द्वारा सुधार की कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप 30 अप्रैल 2025 को जारी प्राचार्य पदोन्नति सूची में मोहम्मद मुस्ताक खान का नाम शामिल नहीं किया गया। उनकी जगह जूनियर शिक्षकों को प्रमोशन दे दिया गया, जिससे वे वंचित रह गए।
इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद, माननीय न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालक द्वारा पहले से की गई अनुशंसा को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन दिनांक 20 मार्च 2025 का निराकरण 45 दिन के भीतर लोक शिक्षण संचनालय रायपुर द्वारा किया जाए।





