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DSP Controversy : शादीशुदा बॉयफ्रेंड से करोड़ों ऐंठने के मामले में बड़ा अपडेट! DSP कल्पना वर्मा ने तोड़ी चुप्पी, जानें DSP ने क्या कहा...
व्यावसायिक विवाद को बताया कारण
दीपक टंडन पर ठगी का पुराना मामला भी आया सामने
महादेव ऐप कनेक्शन के आरोपों ने बदली तस्वीर
DSP कल्पना वर्मा करेंगी मानहानि का केस
फर्जी चैट व फोटो के दुरुपयोग पर सख्त कानून
मामले में अभी कई खुलासे बाकी
E-KYC Update : e-KYC नहीं कराने पर 30 लाख से ज्यादा हितग्राही ब्लॉक! राशन वितरण बंद, सरकार ने 1 महीने का अंतिम मौका दिया...
30 लाख से अधिक सदस्यों के नाम ब्लॉक
सरकार ने दिया अंतिम अवसर
खाद्य विभाग चला रहा जागरूकता अभियान
लोगों में चिंता, लंबी कतारें
चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
बिलासपुर। शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। ED की तरफ से चल रही बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई।
ट्रायल में देरी होने और शराब घोटाला में चैतन्य बघेल की कोई भूमिका नहीं होने के आधार पर जमानत दिए जाने की मांग की गई। कोर्ट में कहा गया कि 4 अक्टूबर के एक बयान पर मामला दर्ज किया गया। 2 करोड़ खाते में ट्रांजेक्शन बताया गया लेकिन इसमें कही यह नहीं है कि ट्रांजेक्शन लिकर स्कैम से आया है। बहस के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता व प्रतिवादी को रिटर्न समिसन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अंत में हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
कांकेर में किसानों का चक्काजाम, पानीडोबीर में धान खरीदी केंद्र शुरू करने की मांग
कांकेर। कोयलीबेड़ा क्षेत्र के पानीडोबीर में धान खरीदी केंद्र शुरू करने की मांग को लेकर किसानों ने कोयलीबेड़ा में चक्का जाम कर दिया है। वहीं मौके पर पुलिस बल भी तैनात है।
किसानों का कहना है कि पिछले साल पानीडोबीर में उपकेंद्र के नाम पर धान खरीदी की गई थी, लेकिन इस साल अब तक खरीदी शुरू नहीं हुई है। इस पर नाराज किसानों ने सड़क पर अपनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।
किसानों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, धरना और चक्का जाम जारी रहेगा। मौके पर बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं और वे प्रशासन से जल्द खरीदी शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक चलेगी।
जमीन गाइडलाइन दरों को लेकर कांग्रेस ने किया धरना प्रदर्शन
रायपुर। नई जमीन गाइडलाइन दरों को लेकर राजधानी रायपुर में कांग्रेस सोमवार को धरना प्रदर्शन कर रही है. राजीव गांधी चौक में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता हाथों में तख्ती लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे हैं. उनकी मांग है कि जब तक पूरी तरह से सरकार आदेश नहीं लेगी वापस, तब तक अलग अलग तरीके से करेंगे प्रदर्शन.
विरोध के बाद संशोधन का निर्णय गलत : पूर्व विधायक विकास उपाध्याय

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि जमीन गाइडलाइन की रेट बढ़ाकर सरकार ने आमजनता को परेशान किया है, व्यापारी वर्ग भी इससे बेहद परेशान हैं. इसी वजह से हम लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. गाइडलाइन दरों को लेकर आज एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि लोगों को राहत मिले. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर सरकार के यू टर्न पर कहा कि सरकार ने तीन-चार बिंदुओं पर ही आदेश वापस लिया है. लोगों से शिकायत और सुझाव भी मांगे लेकिन यही चीज उन्होंने पहले क्यों नहीं किया जब रेट अचानक से जारी किए गए. विरोध के बाद उन्होंने पर संशोधन का निर्णय लिया जो गलत है.
पहले की तरह गाइडलाइन तय नहीं होने तक करते रहेंगे विरोध : कांग्रेस नेता

कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने कहा कि सरकार हर बार यही करती है बिजली बिल को भी अचानक बढ़ा दिया गया लेकिन विरोध के बाद 200 यूनिट में आधा बिल माफ किया गया. जमीन गाइडलाइन को लेकर भी यही स्थिति देखने को मिली. लोगों के विरोध के बाद सरकार ने यू टर्न लिया. आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा बिना सोचे समझे आदेश जारी करती है और विरोध के बाद पुनरीक्षण करने की जरूरत पड़ी. हम (कांग्रेस) लगातार इस पर आवाज उठाते रहेंगे, और जब तक पहले की तरह गाइडलाइन तय नहीं होंगे तब तक हम विरोध करते रहेंगे.
छत्तीसगढ़ में जमीन गाइडलाइन दरों पर बड़ा फैसला: सरकार ने कई आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की नई गाइडलाइन दरों को लेकर लगातार उठ रही आपत्तियों के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को कहा था कि जरूरत पड़ने पर सरकार इसमें पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। वहीं अब सरकार ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बैठक में हाल ही में जारी की गई बढ़ोतरी से जुड़े कई प्रावधानों को वापस ले लिया गया है। साथ ही पूरे प्रदेश में मूल्यांकन की एक एकरूप व्यवस्था लागू कर दी गई है।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड में लिए गए निर्णय-
1. नगरीय क्षेत्र में 1400 वर्ग मीटर तक भूखंडों के इंक्रीमेंटल आधार पर गणना के प्रावधान को समाप्त करते हुए पूर्व प्रचलित उपबंध अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 50 डेसिमल तक, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल तक, और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन के प्रावधान को यथावत लागू किए जाने का निर्णय लिया गया।
2. बहुमंजिला भवनों में फ्लैट/दुकान/कार्यालय अंतरण होने पर सुपर बिल्ट अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य की गणना के प्रावधान को विलोपित किए जाने का निर्णय लिया गया. अब इनमें बिल्ट अप एरिया के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। यह प्रावधान मध्य प्रदेश के समय से चला आ रहा था और राज्य में वर्टिकल डेवलपमेंट के लिए इसकी मांग लंबे समय से आ रही थी। इससे नगर योजना में भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
3. बहुमंजिला भवन एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट एवं प्रथम तल पर 10% कमी, द्वितीय तल एवं उससे ऊपर के तल पर 20% कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा। इससे मध्यम वर्ग को किफायती दर पर फ्लैट मिल पाएंगे।
4. कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में 20 मीटर पश्चात् स्थित संपत्ति के लिए भूखंड की दर में 25% कमी कर मूल्यांकन किया जाएगा। 20 मीटर दूरी की गणना कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग की ओर से निर्मित भाग से की जाएगी। |
5. जिला मूल्यांकन समिति द्वारा गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण के प्रस्ताव केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजे जाते हैं जिनका विश्लेषण कर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड नवीन गाइडलाइन दरें जारी करता है. ज़िला मूल्यांकन समिति को यह निर्देशित करने का निर्णय लिया गया कि हाल ही में हुई दरों में वृद्धि के पश्चात् प्राप्त ज्ञापनों, आपत्तियों एवं सुझावों का परिशीलन कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण के प्रस्ताव भेजें।
6. उपरोक्त निर्णय तत्काल प्रभावशील होंगे।
जरूरत पड़ी तो करेंगे बदलाव – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गाइडलाइन दरों को लेकर अभी भी विभागीय मंथन जारी है और जरूरत पड़ने पर सरकार इसमें पुनर्विचार करने के लिए तैयार है.

नए विधानसभा भवन में शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से, मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा- सरकार विपक्ष के सवालों के लिए तैयार
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है, जो 17 दिसंबर तक यानी 4 दिनों तक नए विधानसभा भवन में चलेगा। शीतकालीन सत्र को लेकर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि विजन 2047 के अनुसार सरकार काम कर रही है। सरकार सत्र के लिए पूरी तरह से तैयार है। विपक्ष के सवालों के जवाब देने के लिए सरकार तैयार है। हमारी सरकार सोने वाली नहीं, काम करने वाली सरकार है। इसके अलावा उन्होंने अन्य मुद्दों पर भी बयान दिया।
छत्तीसगढ़ सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं। इस पर कैबिनेट मंत्री वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के दो साल उपलब्धियों से भरे रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कम समय में मोदी गारंटी को पूरा किया और सभी विभागों को पर्याप्त बजट मिल रहा है। दो साल में छत्तीसगढ़ काफी बदल चुका है।
SIR को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि SIR सभी के लिए जरूरी है, यह समाज के हित में है। कांग्रेस के पास कोई कार्य योजना नहीं है। अपनी अस्तित्व की लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है।
सीमावर्ती इलाके में धान तस्करी पर शिकंजा, 1370 क्विंटल अवैध धान और 28 वाहन जब्त
गरियाबंद। छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमावर्ती क्षेत्रों में धान तस्करी पर लगातार चल रही कार्रवाई है. सीमा का आड़ लेकर धान को एक राज्य से दूसरे राज्य में खपाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लगभग एक महीने में पुलिस की मुस्तैद कार्रवाई ने तस्करों की कमर तोड़ दी है.
मगररोडा जांच नाका से महज 500 मीटर दूर पर स्थित ओडिसा चंदाहांडी थाना क्षेत्र के जामलीपारा में ट्रक से धान लाकर डंप किया गया, जिसे पिकअप के जरिए देवभोग इलाके में लाने की तैयारी थी. देवभोग पुलिस ने पुख्ता सूचना पर मौके पर पहुंची तो ट्रक डंप कर भाग चुका था.
थाना प्रभारी फैजुल शाह हुदा ने बताया कि किसी भी स्थानीय ने इस धान को अपना नहीं होना बताया. जिसके बाद चंदाहांडी पुलिस और वहां के फूड इंस्पेक्टर पृथ्वी राज मेहर को सूचना कर पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त कर लिया गया. पुलिस के इस संयुक्त कार्रवाई के बाद तस्करों का सीमापार डंपिंगयार्ड बनाने की रणनीति भी ध्वस्त पड़ गई. थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि गैर कानूनी कार्य में सीमाएं बाधा नहीं बनेंगे. कानून अपना काम करना जानती है, पुलिस कप्तान के दिशा निर्देश में सीमावर्ती पुलिस थानों में समन्वय बना कर आगे भी इसी तरह कार्रवाई किया जाएगा.
इधर अमलीपदर में भी बीती रात तीन बड़ी कार्रवाई ने बिचौलियों के नींद उड़ा दिया है. थाना प्रभारी दिलीप मेश्राम ने बताया कि अवैध तस्करी रोकने बनाई टीम को दो ट्रेक्टर और एक मेटाडोर में ओडिसा के रास्ते अवैध धान आने की सूचना मिली थी. सीमा पार के चुके वाहन चालक को भनक लगी तो वापस जाने की आपाधापी में लगा रहा, लेकिन मुस्तैद टिम ने पकड़ लिया. मेश्राम ने बताया कि रात को ही कार्रवाई में 314 पेकेट धान जब्त किया गया है, दो ट्रेक्टर में कूल 110 पैकट शेष मात्रा मेटाडोर में जब्त हुआ है.
पुलिस ने 25 तो राजस्व अमला ने 6 वाहन किए जब्त
पिछले 27 दिनों में देवभोग पुलिस ने 17 वाहन और डंप मिलाकर 670 क्विंटल धान जब्त किया है.जबकि राजस्व अमला ने 6 वाहनों के साथ 200 क्विंटल धान जब्त किया. अमलीपदर पुलिस ने भी 8 वाहनों में 500 क्विंटल जप्त किया है. इस तरह अब तक 28 वाहन और 1370 क्विंटल धान जप्त किया गया. ओडिसा के इस अवैध धान के एवज में सरकार को लगभग 45 लाख का भुगतान करना पड़ता.
कार्रवाई से खरीदी आधी हो गई
अंतिम खरीदी तारीख तक देवभोग ब्लॉक के 12 खरीदी केंद्र में 8 हजार क्विंटल की खरीदी हुई थी.जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16 हजार पार कर गया था. ऐसा ही परिवर्तन गोहरापदर ब्रांच के अधीन आने वाले 9 से ज्यादा सीमावर्ती खरीदी केंद्रों में देखने को मिला है. लगातार वाहनों के धर पकड़ के चलते इस बार कोचियों और सप्लायर में हड़कंप मचा हुआ है. प्रशासन का दबाव आगे भी इसी तरह बना रहा तो सरकार को बोगस खरीदी में होने वाले प्रति वर्ष के करोड़ों का नुकसान, इस बार नहीं होगा.
ओडिसा से धान आवक की दो बड़ी वजह
1. स्थानीय उत्पादन तय मात्रा से कम
देवभोग तहसील क्षेत्र की औसतन पैदावारी प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल है.अमलीपदर तहसील क्षेत्र में भी लगभग यही स्थिति.सरकार समर्थन मूल्य में प्रति एकड़ रकबे में 21 क्विंटल खरीदी करती है. ऐसे में खरीदी के लिए प्रावधिक मात्रा और उत्पादन मात्रा के अंतर के लिए किसान ओडिसा की पैदावारी पर निर्भर है.पिछले पांच सालों से ओडिसा के धान पर निर्भरता बढ़ गई है.
2. उड़ीसा की धान खरीदी नीति में झोल झाल
दो साल पहले तक ओडिसा में 2300 प्रति क्विंटल में धान खरीदी होती थी.सत्र 2024 से बोनस 800 देना शुरू कर 3100 में खरीदी तय तो किया पर,खरीदी प्रक्रिया मिलर के सहूलियत पर निर्भर होती है.इस साल 28 नवंबर से समर्थन मूल्य खरीदी शुरू कर दिया गया,लेकिन मिलर से अनुबंध नहीं होने के कारण ,धान खरीदी बंद है.कब शुरू होगा,आगे क्या होगा यह बताने वाले भी नहीं.ऐसे में बिचौलिए ओडिसा के किसान के घर घर पहुंच कर 2000 में धान नगद खरीद रही,जिसे 2300 से 2500 रुपए तक में सीजी सीमावर्ती किसान ओडिसा का धान खरीदी करने तैयार हैं.
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CC मेंबर रामधेर ने 11 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण
खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता दर्ज करते हुए CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता और केंद्रीय समिति सदस्य रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. यह सरेंडर आज सुबह गांव कुम्ही, थाना बकर कट्टा में किया गया, जहां सभी कैडरों ने हथियार नीचे रखकर पुलिस के सामने खुद को समर्पित किया. इस कदम को सुरक्षा एजेंसियां नक्सली ढांचे पर निर्णायक प्रहार मान रही हैं, क्योंकि यह पूरा समूह MMC— महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़— स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय हिस्सा था, जो तीन राज्यों के छह जिलों में अपनी पैठ बनाए हुए था.
रामधेर मज्जी द्वारा AK-47 के साथ आत्मसमर्पण किए जाने को नक्सली संगठन की सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है. उसके साथ DVCM रैंक के चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम ने भी सरेंडर किया, जिनमें से दो के पास AK-47 और इंसास जैसे हथियार मौजूद थे. इनके अलावा ACM स्तर के नक्सली रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम ने भी हथियार डाले, जबकि क्षेत्रीय महिला मिलिशिया (PM) की लक्ष्मी, शीला, योगिता, कविता और सागर ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया. समूह के पास AK-47, इंसास, SLR, 303 और 30 कार्बाइन जैसे हथियार बरामद हुए हैं.
इस सरेंडर ने MMC स्पेशल जोन को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है. इससे पहले MMC जोन के प्रवक्ता अनंत गोंदिया में आत्मसमर्पण कर चुका था, जबकि बीते एक दिन में ही बालाघाट में सुरेंद्र सहित नौ अन्य माओवादी हथियार डाल चुके हैं. लगातार हो रही ये सरेंडर श्रृंखलाएं बताती हैं कि नक्सल संगठन की जमीनी पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है और सुरक्षा बलों की रणनीति कारगर साबित हो रही है.
सभी 12 माओवादी अब पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर पूरे ऑपरेशन और नक्सली नेटवर्क से संबंधित विस्तृत खुलासा करने वाली है.
IAS अधिकारियों को कैडर आवंटित, छत्तीसगढ़ को मिले 3 आईएएस
रायपुर। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC-CSE 2024) के परिणामों के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने गए उम्मीदवारों को कैडर आवंटित कर दिया है. ऑल इंडिया टॉपर शक्ति दुबे को होम स्टेट कैडर उत्तर प्रदेश मिला है. वहीं छत्तीसगढ़ को इस बार 3 नए आईएएस मिले हैं. वहीं यूपीएससी 2024 में 65 वीं रैंक हासिल करने वाली छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस पूर्वा अग्रवाल को झारखंड कैडर मिला है.
किसे मिला छत्तीसगढ़ कैडर ?
कैंडिडेट
होम स्टेट
अलॉट हुआ कैडर
गोकुल आरके
तमिलनाडू
छत्तीसगढ़
वाध्यता यशवनाथ
तेलंगाना
छत्तीसगढ़
इशांत जैसवाल
यूपी
छत्तीसगढ़
देखिए कैडर आवंटन लिस्ट









मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मध्यप्रदेश में नई सिंचाई तकनीक 'प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क' की प्रस्तुति का किया अवलोकन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने आज भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है।

अपर मुख्य सचिव श्री राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहाँ पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती है।
प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर PIN (Pressure Irrigation Network) प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।
सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में हुए शामिल राज्यपाल रमेन डेका
रायपुर। सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में गौरवपूर्ण समारोह आयोजित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि सैनिक निस्वार्थ भाव से हमेशा देश की रक्षा के लिए तैयार रहते है और अपना जीवन देश सेवा के लिए लगाते है। उनके कारण ही हमारा जीवन और संपत्ति सुरक्षित है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सशस्त्र झण्डा दिवस निधि के लिए 2 लाख रूपए की सहयोग राशि राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड को प्रदान की।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने सभी शहीदों की वीर नारियों एवं माताओं, आश्रितों को सम्मान राशि और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। वीरता अलंकरण प्राप्त सैनिकों और झण्डा दिवस के अवसर पर विशेष योगदान देने वाले दानदाताओं का सम्मान भी किया।
राज्यपाल श्री डेका ने अपने उद्बोधन के दौरान इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि झण्डा दिवस निधि से लगभग 27 महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है जिनके माध्यम से पूर्व सैनिकों और आश्रित परिवारों को निरंतर सहायता मिल रही है। छत्तीसगढ़ सैनिक कल्याण बोर्ड और गृह विभाग के सहयोग से हमारे वेटरन्स की उत्कृष्ट देखभाग सुनिश्चित की जा रही है।
श्री डेका ने कहा कि हमारे सैनिक कठिन परिस्थितियों में अपना कार्य करते हैं। माइनस डिग्री के तापमान में भी अपनी जिम्मेदारी कुशलता से निभाते है। उन्होंने शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को नमन किया और कहा कि आप लोगों का त्याग अमूल्य है। लोकभवन और छत्तीसगढ़ सरकार आपके साथ मजबूती से खड़े हैं। सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हम निरंतर प्रतिबद्ध है।
समारोह की शुरूआत में शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की गई और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। सशस्त्र सेना झण्डा दिवस का प्रतीक बैज लगाकर श्री डेका को सम्मानित किया गया। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कैप्टन अनिल कुमार शर्मा ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के संदेश का वाचन किया। राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के संचालक ब्रिगेडियर विवेक शर्मा ने झण्डा दिवस निधि के महत्व पर एवं इस निधि से भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्याे की जानकारी दी।
सशस्त्र सेना झण्डा दिवस में सबसे ज्यादा राशि एकत्रित करने के लिए कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह एवं जिला सैनिक कल्याण अधिकारी रायपुर कैप्टन अनिल कुमार शर्मा को प्रथम पुरूस्कार एवं कलेक्टर दुर्ग अभिजीत सिंह एवं सैनिक कल्याण अधिकारी दुर्ग को द्वितीय पुरूस्कार एवं राज्यपाल ट्राफी प्रदान की गई।
इस अवसर पर राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के ब्रोशर संक्षेपिका-2025 का भी विमोचन किया गया। एन.सी.सी. कैडेटों ने ओजपूर्ण देश भक्ति गीत प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम में गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) संजय शर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, सेवारत् तथा भूतपूर्व सैनिक एवं उनके परिजन उपस्थित थे।
10 दिसंबर को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई अहम मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 10 दिसंबर को मंत्रालय महानदी भवन में सुबह 11 बजे से आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभिन्न विभाग अपने-अपने प्रस्ताव लेकर बैठक में शामिल होंगे, जिन पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले 3 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने जनहित से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए थे, जिन्हें आगे अमल में लाने की प्रक्रिया पर भी इस बैठक में विचार हो सकता है।
प्रदेश में अवैध भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय करते हुए लगभग 1 लाख 52 हजार क्विंटल धान जब्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध धान के भण्डारण एवं परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से एक लाख 51 हजार 809 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है।
मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 6 दिसम्बर के अवधि में मण्डी अधिनियम 1972 के तहत सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान पर कार्यवाही की जा रही है। इनमें सर्वाधिक महासमुंद जिले में 25,718 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार धमतरी में 23,859 क्विंटल रायगढ़ जिले में 21,331 क्विंटल, राजनांदगांव 14,977 क्विंटल, बलरामपुर जिले में 9771 क्विंटल, बेमेतरा में 6490 क्विंटल, कवर्धा में 5734 क्विंटल, बालोद में 4595 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3770 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 2868 क्विंटल, जशपुर जिले में 2771 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 2650 क्विंटल, दुर्ग में 2350 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 2014 क्विंटल, बलौदाबाजार में 1855 क्विंटल, बीजापुर जिले में 1842 क्विंटल, रायपुर में 1679 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 1583 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1500 क्विंटल, बस्तर जिले में 1560 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 1402 क्विंटल, गरियाबंद में 1393 क्विंटल, कोरबा में 1346 क्विंटल, सरगुजा में 1282 क्विंटल, कोरिया में 1237 क्विंटल, सक्ती में 1201 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 1148 क्विंटल, बिलासपुर में 1060 क्विंटल, कांकेर जिले में 1012 क्विंटल, मुंगेली में 917 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 445 क्विंटल, नारायणपुर में 323 क्विंटल, सुकमा में 216 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।
सचिव की नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग को लगाई फटकार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सचिव की नियुक्ति में देरी करने पर राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को फटकार लगाई है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने विभाग के निदेशक प्रियंका थवाईत को कल 8 दिसंबर को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
मामला आसिफ रजा की याचिका का है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 22 फरवरी 2024 को रिट अपील में आदेश दिया था कि आसिफ रजा की ग्राम पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति पर विचार किया जाए, बिना यह प्रभावित किए कि पहले से नियुक्त और जॉइन कर चुके उम्मीदवारों की नौकरी पर कोई असर न पड़े। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुशोभित सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य सरकार वित्त विभाग की स्वीकृति का इंतजार कर रही है और बार-बार आसिफ रजा को रायपुर से बैकुंठपुर दौड़ाया जा रहा है।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट का आदेश मौजूद है, तो वित्त विभाग की स्वीकृति की जरूरत क्यों है? और अगर जरूरत है भी तो 22 फरवरी 2024 के आदेश के बाद अब तक क्यों नहीं ली गई? कोर्ट ने मामले को कल 8 दिसंबर के लिए लिस्ट किया है और आदेश की प्रति सूचना के लिए मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भी भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे देख सकें कि सिस्टम कैसे काम कर रहा है।
नक्सल संगठन को बड़ा झटका : खूंखार इनामी नक्सल दंपति ने किया सरेंडर
सुकमा। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को लगातार कामयाबी मिल रही है। इसी कड़ी में आज एक और बड़ी सफलता मिली है, जहां दरभा डिवीजन के शीर्ष इनामी माओवादी नेता जयलाल उर्फ़ दिरदो विज्जा और उसकी पत्नी विमला ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। दोनों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था और ये कई बड़े नक्सली हमलों में वांछित थे।
40 साल से सक्रिय था जयलाल, कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड जयलाल उर्फ़ दिरदो विज्जा पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह माओवादी संगठन के स्पेशल ज़ोनल कमेटी मेंबर (SZCM) और दरभा डिवीजन इंचार्ज रहा है। मूल रूप से बोडेगुब्बाल, गगनपल्ली पंचायत (थाना एर्राबोरे, जिला सुकमा) का निवासी जयलाल पिछले 40 वर्षों से संगठन में सक्रिय था और इस दौरान उसने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। उसने 1994 में बाल संगठन सदस्य के रूप में शुरुआत की और बाद में दक्षिण बस्तर में CNM सदस्य, वेस्ट बस्तर दलम सदस्य, नेशनल पार्क क्षेत्र में एरिया कमेटी सदस्य (ACM/PPCM), LOS कमांडर और सेक्शन कमांडर जैसे पदों की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वह दरभा डिवीजन के कंपनी कमांडर, दक्षिण उप-जोनल कमेटी के मिलिट्री प्रभारी और अंत में स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) के रूप में सक्रिय रहा।
जयलाल कई बड़े हमलों में था शामिल
2010 – ताड़मेटला हमला, 76 जवान शहीद
2013 – झीरम घाटी हमला, कांग्रेस नेताओं पर हमला
2020 – मिनपा हमला, 17 जवान शहीद
2021 – टेकलगुडेम मुठभेड़, 22 जवान शहीद
2024 – टेकलगुड़ा कैंप अटैक
2024 – धर्माराम कैंप अटैक
तथा कई अन्य घटनाएं
विमला पर था 8 लाख का इनाम, 20 वर्षों से थी सक्रिय
जयलाल की पत्नी माड़वी गंगी उर्फ़ विमला (इनाम 8 लाख) दो दशक से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय थी। उसने LOS, ACS, एरिया कमेटी सेकरेटरी और अंततः मलंगेर एरिया कमेटी इंचार्ज के रूप में काम किया। वह मूल रूप से फूलबगड़ी, जिला सुकमा की निवासी है।
विमला इन घटनाओं में रही शामिल
2021 – टेकलगुडेम मुठभेड़
2024 – टेकलगुड़ा कैंप हमला
अन्य कई हिंसक गतिविधियां
माओवादी विचारधारा की खोखली सच्चाई को समझते हुए छोड़ा हिंसा का रास्ता
DRG, STF, CRPF और COBRA द्वारा चलाए जा रहे लगातार एंटी-नक्सल ऑपरेशनों से संगठन पर दबाव बढ़ा है। माओवादी विचारधारा से मोहभंग, लगातार नेतृत्व की मौतें, अंदरूनी असंतोष और सरकार की पुनर्वास नीति ने इन दोनों को मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा दी। सुकमा पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ये दोनों माओवादी कई गंभीर आपराधिक वारदातों में वांछित थे। उनका आत्मसमर्पण क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने में निर्णायक साबित होगा।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल लाभ प्रदान किया जाएगा, जिसमें उन्हें नगद प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास के लिए सहायता शामिल है। पुलिस प्रशासन उन्हें एक सम्मानजनक और स्थिर जीवन जीने में हर संभव मदद करेगा।
अन्य माओवादी कैडरों से भी आत्मसमर्पण की अपील
पुलिस प्रशासन ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा की गारंटी और रोजगार अवसरों की जानकारी मिलने से कई माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुलिस ने बाकी माओवादी कैडरों से भी हिंसा छोड़कर समाज में लौटने की अपील की।