प्रदेश
बकाया कर नहीं देने पर परिवहन विभाग की कार्रवाई, 5 बसें जब्त, नीलामी की भी तैयारी
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में परिवहन विभाग ने मोटरयान कराधान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लंबे समय से कर और पैनल्टी बकाया होने के कारण विभाग ने जिले की पांच बड़ी बसों को जब्त कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बकाया राशि एक सप्ताह के भीतर जमा नहीं होने पर इन वाहनों की सार्वजनिक नीलामी की जाएगी।
छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 15 के तहत यह कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि नियमों के अनुसार कर, पैनल्टी या ब्याज का भुगतान नहीं करने वाले वाहनों को कुर्क कर नीलामी के माध्यम से राजस्व की वसूली की जाएगी।
परिवहन विभाग ने यह भी कहा कि समय-सीमा समाप्त होने के बाद किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी और जो भी वाहन बिना वैध कर भुगतान के सड़कों पर पाए जाएंगे, उन पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि समय-सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। निर्धारित अवधि के भीतर कर जमा न करने की स्थिति में कानूनी प्रावधानों के तहत नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की हालत गंभीर, पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन की तबीयत गंभीर बनी हुई है। उन्हें पिछले महीने पटना स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि उन्हें कार्डियक की समस्या हुई थी।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले उनकी हालत में सुधार के बाद उन्हें वेंटिलेटर से हटा लिया गया था, लेकिन मंगलवार को स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने पर दोबारा वेंटिलेटर पर रखा गया है। फिलहाल उनकी स्थिति क्रिटिकल बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे विश्वरंजन
बता दें कि विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी रहे हैं। वर्ष 2007 में ओपी राठौर के असामयिक निधन के बाद तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस का प्रमुख नियुक्त किया था। वे लगभग चार वर्ष तक डीजीपी पद पर रहे।
आईबी में रहा लंबा कार्यकाल
1973 बैच के आईपीएस अधिकारी विश्वरंजन को छत्तीसगढ़ सरकार ने डेपुटेशन से बुलाकर जुलाई 2007 में डीजीपी बनाया था। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला था, हालांकि 2007 से पहले वे कभी छत्तीसगढ़ में पदस्थ नहीं रहे। वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे और एडिशनल डायरेक्टर पद तक पहुंचे थे।
भारत माला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाला: EOW ने डिप्टी कलेक्टर और नायब तहसीलदार को किया गिरफ्तार, 43 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप
रायपुर। बहुचर्चित भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डिप्टी कलेक्टर और एक तत्कालीन नायब तहसीलदार को गिरफ्तार किया है। दोनों पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार करने और शासन को लगभग 43 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारी फरार हो गए थे। विशेष टीम द्वारा लगातार निगरानी और तलाश के बाद 11 फरवरी को दोनों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार अधिकारियों में डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे घटना के समय अभनपुर के तहसीलदार, वहीं लखेश्वर प्रसाद किरण गोबरा नवापारा में नायब तहसीलदार थे।
कूटरचित दस्तावेजों से बढ़ाया गया मुआवजा
ईओडब्ल्यू द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 420, 409, 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7सी और 12 के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध है। जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्नम एवं दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में गंभीर अनियमितताएं की गईं।
आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों, भूमाफिया और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। कूटरचित राजस्व अभिलेख तैयार कर या करवाकर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई गई। इस प्रक्रिया में शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
जमानत याचिका खारिज, कुर्की की कार्रवाई विचाराधीन
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे निरस्त कर दिया गया। इससे पहले विशेष न्यायालय द्वारा इनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की जा चुकी थी। साथ ही, आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी विशेष न्यायालय रायपुर में विचाराधीन है।
ईडी भी कर रही समानांतर जांच
इस बहुचर्चित मामले की जांच केवल ईओडब्ल्यू तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी वित्तीय लेन-देन और कथित मनी ट्रेल की जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान अन्य लोकसेवकों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
भारत माला परियोजना देश की प्रमुख आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल ईओडब्ल्यू की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और वित्तीय प्रवाह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
संसद में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ और देश के विकास का विजन
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर हो रही सामान्य चर्चा में भाग लेते हुए इसे 'आत्मविश्वास का बजट' करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण को समर्पित है।
सांसद श्री बृजमोहन ने कहा कि, बीते ग्यारह वर्षों में देश ने गति पाई है, गौरव पाया है, वैश्विक पहचान बनाई है। आज भारत इस बजट के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत बन रहा है। 2026 का बजट आत्मविश्वास का परिणाम है। यह बजट कहता है अब भारत रुकेगा नहीं, अब भारत झुकेगा नहीं, अब भारत थमेगा नहीं।
छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई ऊंचाई
सांसद अग्रवाल ने बजट के प्रावधानों को छत्तीसगढ़ की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि 'भारत विस्तार एआई (AI) मिशन' के तहत अब राज्य के किसानों को छत्तीसगढ़ी भाषा में खेती की उन्नत तकनीक सिखाई जाएगी। उन्होंने धान के समर्थन मूल्य का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस काल के 1310 रुपये के मुकाबले आज मोदी सरकार 2369 रुपये दे रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में 'मोदी की गारंटी' के तहत 3100 रुपये में खरीदी कर किसानों को समृद्ध किया जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव
सदन को संबोधित करते हुए श्री अग्रवाल ने आंकड़ों के जरिए विकास की रफ्तार को रेखांकित किया उन्होंने कहा कि, कांग्रेस शासन के 12 किमी प्रतिदिन के मुकाबले आज 33 किमी प्रतिदिन सड़कें बन रही हैं।
पहले जहाँ 6.4 किमी प्रतिवर्ष रेलवे ट्रैक बिछते थे, आज 100 किमी प्रतिवर्ष का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत दानकुनी से सूरत तक बनने वाला कॉरिडोर छत्तीसगढ़ से गुजरेगा, जिससे राज्य में औद्योगिक क्रांति आएगी।
वहीं भुवनेश्वर से विशाखापट्टनम कॉरिडोर का लाभ भी छत्तीसगढ़ को मिलेगा।
औद्योगिक और शैक्षणिक क्रांति का शंखनाद
सांसद बृजमोहन ने बताया कि बजट में रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर मिशन के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ में मिले लिथियम भंडार का तेजी से विकास होगा और भारत बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा। शिक्षा के क्षेत्र में 42,100 करोड़ के प्रावधान और 15,000 नए स्कूलों व 5,000 कॉलेजों की स्थापना की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये संस्थान अब केवल खेल के मैदान नहीं, बल्कि अनुसंधान की प्रयोगशालाएं बनेंगे।
युवाओं और महिलाओं के लिए विशेष सौगात
श्री अग्रवाल ने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिलने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब छात्रों को शिक्षा और चिकित्सा ऋण पर 5% के बजाय मात्र 2% ब्याज देना होगा। इसके साथ ही, हर जिले में महिलाओं के लिए गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण से महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।
मजबूत अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन
बजट के वित्तीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि, "आज देश का बजट 53.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राजकोषीय घाटा, जो पिछली सरकार में 8.9% था, उसे घटाकर 4.4% पर लाया गया है। जो बैंक कांग्रेस के समय 'बैंक-करप्ट' हो गए थे, वे आज मुनाफे में हैं। यह मोदी जी के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।"
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन का समापन करते हुए विश्वास जताया कि यह बजट 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
राहुल गांधी की राजनीति अतीत की पीली हो चुकी डायरी, पीएम मोदी लिख रहे हैं विकसित भारत का भविष्य: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
बृजमोहन अग्रवाल ने बजट पर चर्चा करते हुए विपक्ष, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने गांधी के बयानों को यथार्थ से परे बताते हुए कहा कि कांग्रेस का शासन विफलताओं का इतिहास रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बजट देश के उज्ज्वल भविष्य का निवेश है।
बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि, "अब राहुल जी की राजनीति, अतीत की डायरी हो गई है जिसके पन्ने पीले पड़ चुके हैं। आज भारत के भविष्य की पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बजट के माध्यम से लिख रहे हैं, जिसके हर पृष्ठ पर देश का विकास अंकित है।"
आजादी के बाद 60 वर्षों तक कांग्रेस ने देश पर शासन किया, लेकिन उन दशकों में देश को संभावनाएं तो मिलीं पर दिशा नहीं मिली
संसाधन थे पर संकल्प की कमी थी। उन्होंने कांग्रेस के शासन की तुलना ऐसे लेखक से की जिसके पास कागज तो बहुत थे, पर कलम में स्याही नहीं थी।
नेता प्रतिपक्ष पर प्रहार करते हुए श्री अग्रवाल ने उन्हें राजनीति का ऐसा कवि बताया जो भावनाओं की कविताएं तो लिखते हैं, पर यथार्थ की गद्य-भाषा नहीं समझते। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी ऐसे यात्री हैं जिन्हें खुद रास्ता नहीं मालूम, पर देश को मंजिल दिखाने चले हैं।
उनके भाषणों में आरोप और नारे तो बहुत हैं, लेकिन नीतियों और आत्मचिंतन का अभाव है।
वे आज गरीबी और बेरोजगारी पर भाषण देते हैं, लेकिन अपने शासनकाल की विफलताओं और घोटालों की 'प्रयोगशाला' पर मौन साध लेते हैं।
सांसद श्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के लिए सत्ता एक 'परिवार की धरोहर' थी, जबकि भाजपा के लिए यह 'जनता की सेवा' का माध्यम है। 60 साल का पिछड़ापन दुर्भाग्य नहीं, बल्कि कांग्रेस के विफल नेतृत्व का प्रमाण है।
बृजमोहन अग्रवाल ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल खर्च का ब्यौरा नहीं, बल्कि देश के भविष्य में किया गया निवेश है। भारत अब निर्भर नहीं, आत्मनिर्भर बन रहा है।
विकासखंड मुख्यालय में स्कूल होने के बावजूद हाथी प्रभावित सुदूर जंगल क्षेत्र में दिया परीक्षा केंद्र! वरिष्ठ मंत्री के निर्देशों की भी हुई अनदेखी!
बलरामपुर के विकासखंड मुख्यालय रामचंद्रपुर के पीएमश्री आत्मानंद स्कूल को नजर अंदाज करते हुए 14 किलोमीटर दूर जंगली हाथी के प्रभाव और सार्वजनिक परिवहन के अभाव क्षेत्र गांजर स्कूल जहां 4 कमरे है में 10वीं 12वीं का परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। जबकि जिले का शिक्षा विभाग रामचंद्रपुर में ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने पत्र लिखता रहा...स्थानीय विधायक वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम ने भी विकासखंड मुख्यालय में ही परीक्षा केंद्र रखना के निर्देश दिए थे! इस बात की पुष्टि जिला शिक्षा अधिकारी ने की है। बावजूद ऐसा कैसे हो गया? शिक्षा मंडल की यह लापरवाही है या जानबूझकर किसी के द्वारा कराया जा रहा कृत्य? फिलहाल 450 विद्यार्थी, पालक और विद्यार्थी परिषद सड़क पर आकर माध्यमिक शिक्षा मंडल के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
रामानुजगंज/बलरामपुर। शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में प्रशासनिक लापरवाही यदि बच्चों की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगे तो यह केवल एक निर्णय की भूल नहीं, बल्कि व्यवस्था की असंवेदनशीलता का प्रमाण बन जाता है। वर्ष 2026 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए गांजर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाए जाने के निर्णय ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है। लगभग 450 छात्र-छात्राओं को ऐसे क्षेत्र में परीक्षा देने भेजा जा रहा है, जो आदिवासी बाहुल्य, दुर्गम और परिवहन सुविधाओं से लगभग वंचित है। विकासखंड मुख्यालय रामचंद्रपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र तक पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को जंगलों, नदी-नालों और जंगली जानवरों के भय वाले रास्तों से गुजरना पड़ेगा। इस संबंध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उनका सवाल यह है कि क्या परीक्षा देने जा रहे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोई ठोस योजना प्रशासन के पास है, या फिर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?

और भी गंभीर बात यह है कि जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, वहां वर्तमान में केवल चार कक्षाओं में पढ़ाई संचालित हो रही है। इतने सीमित संसाधनों वाले परिसर में 450 परीक्षार्थियों की बोर्ड परीक्षा कराना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बोर्ड परीक्षा कोई साधारण परीक्षा नहीं होती; यह विद्यार्थियों के करियर की दिशा तय करती है। ऐसे में यदि वे असुरक्षित, तनावपूर्ण और अव्यवस्थित माहौल में परीक्षा देंगे तो उसका सीधा असर उनके परिणाम पर पड़ेगा। क्या प्रशासन इस मानसिक और शारीरिक दबाव की जिम्मेदारी लेगा?
हैरानी की बात यह भी है कि पूर्व वर्षों में यही परीक्षा केंद्र रामचंद्रपुर स्थित पी.एम. श्री आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में संचालित होता रहा है, जो विकासखंड मुख्यालय में स्थित, सुविधायुक्त और सुरक्षित परिसर है। बताया जा रहा है कि पूर्व में केवल अस्थायी कारणों से केंद्र को गांजर स्थानांतरित किया गया था और अब उसे पुनः रामचंद्रपुर में स्थापित किया जाना अपेक्षित था। इसके बावजूद वर्तमान निर्णय ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर किस दबाव या लापरवाही में यह कदम उठाया गया?

अभिभावकों में भय और असंतोष साफ झलक रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक फैसले कागजों पर आसान दिखते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और होती है। यदि परीक्षा अवधि में कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या केवल एक आदेश जारी कर देना ही प्रशासन का दायित्व पूरा कर देता है?
अब जिला प्रशासन के सामने यह अग्निपरीक्षा है कि वह बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देता है या फिर एक गलत निर्णय पर अड़ा रहता है। क्योंकि यह मामला केवल परीक्षा केंद्र बदलने का नहीं है, बल्कि यह तय करने का है कि व्यवस्था बच्चों के साथ खड़ी है या उनके भविष्य के साथ जोखिम भरा प्रयोग कर रही है।
बीएसपी टाउनशिप की समस्याओं पर केंद्रीय इस्पात मंत्री से मिले पूर्व विस अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय और सांसद विजय बघेल
भिलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय और दुर्ग सांसद विजय बघेल ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से मुलाकात कर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) टाउनशिप से जुड़े गंभीर मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में टाउनशिप के कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को प्रभावित करने वाली नीतिगत समस्याओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जिस पर इस्पात मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिये।
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल औद्योगिक उत्पादन की इकाई नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित टाउनशिप भी है, जहाँ लाखों लोग रहते हैं। वर्षों से यहाँ कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी, व्यापारी और विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोग अपने परिवारों के साथ निवास करते आए हैं। लेकिन हाल के समय में संयंत्र प्रबंधन द्वारा किराए, लीज प्रीमियम और आवासीय नीतियों में की गई अचानक और अत्यधिक वृद्धि ने नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 से लागू रिटेंशन स्कीम योजना के अंतर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूर्व निर्धारित दरों पर आवास उपलब्ध कराया जाता था। यदि निर्धारित अवधि के बाद आवास खाली नहीं किया जाता, तो 32 गुना किराया वसूला जाता था। लेकिन नवंबर 2025 से इस व्यवस्था को समाप्त कर सीधे ₹24 प्रति वर्गफुट की दर लागू कर दी गई। इसके चलते 700 वर्गफुट के क्वार्टर में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब ₹15,000 से ₹17,000 तक मासिक किराया देना पड़ रहा है। उन्होंने इसे अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण बताते हुए पूर्व व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त टाउनशिप में बैंक, डाक विभाग, पुलिस और शिक्षा विभाग जैसे संस्थानों के कर्मचारियों को भी बीएसपी द्वारा आवास किराए पर दिए जाते रहे हैं। पहले इनका किराया ₹5 प्रति वर्गफुट था, लेकिन नवंबर में एकाएक 60 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई। इससे इन संस्थानों के कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ आ गया है। उन्होंने कहा कि सामान्य किराया अधिनियमों के अनुसार प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि उचित नहीं मानी जाती, लेकिन बीएसपी प्रबंधन ने सार्वजनिक परिसंपत्ति अधिनियम का सहारा लेकर मनमानी वृद्धि की है। उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि कर्मचारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्षों पहले दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराए पर दिया गया था। 1991 में इन्हें लीज पर देते समय स्पष्ट किया गया था कि लीज प्रीमियम एक बार तय होगा और केवल लीज रेंट में प्रतिवर्ष वृद्धि होगी। लेकिन अब नवीनीकरण से पूर्व ही लीज प्रीमियम में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े संस्थानों तक पर भारी बोझ पड़ा है।
ज्ञापन में इस व्यवस्था को अनुचित बताते हुए प्रीमियम और किराए का पुनर्निर्धारण करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में मकान तोड़ दिए गए हैं और भूमि खाली पड़ी है। कैंप और खुर्सीपार जैसे क्षेत्रों में भी अनेक भू-खंड रिक्त हैं। इन भूमियों का उपयोग नगर निगम या राज्य शासन द्वारा जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है। वर्ष 2017 में इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा गया था। उन्होंने मांग कि है कि इन भूमियों को सार्वजनिक उपयोग के लिए राज्य शासन को सौंपा जाए।
ज्ञापन में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को क्वार्टर उपलब्ध कराने से संबंधित विषय की जानकारी देते हुए श्री पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान में उन्हें अधिकतम 450 वर्गफुट तक के क्वार्टर ही लाइसेंस पर दिए जा रहे हैं, जबकि अन्य इस्पात संयंत्रों में 650 वर्गफुट तक के क्वार्टर उपलब्ध कराए जाते हैं। ज्ञापन में भिलाई में भी यही सुविधा देने की मांग की है। वहीं पहले ट्यूबलर शेड और 24 यूनिट जैसे छोटे क्वार्टर मात्र ₹5,000 की राशि पर लाइसेंस पर दिए जाते थे। अब इनका नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इन क्वार्टरों के लिए लाइसेंस योजना पुनः लागू की जाए।
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों, नागरिकों और व्यापारियों में असंतोष बढ़ेगा। इसलिए तत्काल हस्तक्षेप कर स्थानीय प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दें, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके और टाउनशिप में शांति और विश्वास कायम रहे। जिस पर इस्पातमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिये हैं।
UCC पर वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम ने कहा- संविधान से चलेगा देश… BJP का मिला समर्थन तो कांग्रेस ने बताया राजनीति चमकाने वाला बयान
रायपुर। एक देश, एक विधान, एक संविधान के लिए लाए जा रहे यूनिफॉर्म सिविल कोड का वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सलीम राज ने समर्थन किया है. भाजपा के द्वारा लाए जा रहे यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉक्टर सलीम राज ने कहा है कि एक देश के लिए एक संविधान,एक कानून का पालन होना चाहिए. डॉ सलीम राज के बयान का भाजपा ने समर्थन किया. वहीं कांग्रेस ने इस पर हल्ला बोलते हुए कहा कि डॉक्टर सलीम राज का मुसलमानों में कोई जनाधार नहीं हैं. सिर्फ भाजपा नेता होने के नाते वे वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं. संसद को ही यह तय करने का अधिकार है कि यूसीसी की जरूरत हैं या नहीं.
संविधान से चलेगा देश : डॉ. सलीम
डॉक्टर सलीम राज ने कहा कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष होने के नाते मैं कहना चाहूंगा कि पूरे देश में एक संविधान एक कानून का पालन होना चाहिए. यह देश मुस्लिम रीति रिवाज से या ईसाई रीति रिवाज से नहीं चलेगा. यह देश संविधान से चलेगा. जाति धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, पर कानून एक होना चाहिए. दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए. सनातनियों को एक कानून का लाभ मिलता है. वही मुसलमानों को दो कानून का. मुस्लिमों के हिसाब से देश नहीं चलना चाहिए. कानून के हिसाब से चलना चाहिए. यूसीसी देश में तत्काल लागू होना चाहिए.
अकबर या बाबर नहीं यह राम राज्य का शासन : वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष
वहीं वंदे मातरम गीत को 65 सेकंड से बढ़ाकर तीन मिनट दस सेकेंड करने और गान के दौरान खड़े होने के केंद्र सरकार के फैसले का भी डॉक्टर सलीम राज ने समर्थन किया है. डॉक्टर सलीम राज ने कहा कि यह मुगल राज, अकबर या बाबर का शासन नहीं है. यह राम राज्य का शासन है. वंदे मातरम राष्ट्र गीत है. इसके लिए सरकार ने जो भी फैसला लिया है वह स्वागत योग्य है.
कांग्रेस का निशाना, कहा- मुस्लिमों में डॉ. सलीम का कोई जनाधार नहीं
डॉक्टर सलीम राज का बयान सामने आते ही कांग्रेस ने इस पर हमला बोला हैं. कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बयानबाजी कर रहें हैं. मुस्लिमों में डॉक्टर सलीम राज का कोई जनाधार नहीं हैं. वे केवल भाजपा नेता होने के चलते वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने हैं और मुझे नहीं लगता कि वक्फ बोर्ड सारे मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करते हैं. मुस्लिम समाज में उनकी कोई पकड़ नहीं है. अपनी राजनीति चमकाने के लिए डॉक्टर सलीम राज इस तरह का बयान देते हैं. मुस्लिम लॉ की आवश्यकता है या नहीं यह अधिकार उन्हें नहीं है. इसकी समीक्षा और रिव्यू करने का अधिकार संसद को है.
भाजपा ने बताया डॉ. सलीम को सक्षम
वहीं वक्फ़ बोर्ड अध्यक्ष डॉक्टर सलीम राज के बयान का भाजपा ने समर्थन किया है. भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने कहा कि डॉक्टर सलीम राज ने सही कहा है, वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष होने के नाते वह खुद सक्षम हैं.
हाईकोर्ट के नियुक्ति निरस्त करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 66 उप अभियंताओं को मिली राहत
रायपुर। ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा की वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध बताते हुए रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने निरस्त की थी 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां
दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 3 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने भर्ती को अवैध करार देते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था, जबकि कई चयनित अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा बाद में प्राप्त किया। ऐसे में उनकी नियुक्तियां प्रारंभ से ही अवैध मानी गईं। कोर्ट ने यह भी पाया कि 275 पदों के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जो सेवा कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान नियुक्त उप अभियंताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे करीब 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती। इसके बाद कोर्ट ने क्वो वारंटो का रिट जारी करते हुए नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली का रुख किया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य को नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश पारित किया है।
यह प्रकरण लगभग 60 शासकीय कर्मचारियों की सामूहिक सेवा-समाप्ति से संबंधित है, जिन्हें प्रारंभिक रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में उप अभियंता (सिविल) के पद पर नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया था कि संबंधित अभ्यर्थियों के पास भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक अर्हता उपलब्ध नहीं थी।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता अब सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
मामले में याचिकाकर्ताओं एवं निजी प्रत्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमेश्वर के. तथा गौरव अग्रवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा, चंद्रशेखर ए. चकलाब्बी (AOR) और सुधांशु प्रकाश (AOR) भी उपस्थित रहे।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को सशक्त करेगा शिक्षा विधेयक, JPC में बृजमोहन अग्रवाल की नियुक्ति
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल को एक महत्वपूर्ण विधायी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर गठित संसदीय संयुक्त समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है।
यह समिति देश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त, आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से गठित की गई है। समिति का प्रमुख लक्ष्य शिक्षा क्षेत्र में संस्थागत सुधार, गुणवत्ता उन्नयन, नवाचार को बढ़ावा, समावेशी शिक्षा, शोध एवं कौशल विकास को मजबूती प्रदान करना है, ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
बृजमोहन अग्रवाल के पास लगभग चार दशकों का समृद्ध विधायी एवं प्रशासनिक अनुभव है। छत्तीसगढ़ सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया। उनके इस व्यापक अनुभव का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर इस ऐतिहासिक विधेयक को दिशा देने में मिलेगा।
इस मनोनयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति आभार प्रकट किया।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में शिक्षा की भूमिका सबसे निर्णायक है। ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ देश की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, समावेशी, नवाचार-आधारित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। यह संसदीय संयुक्त समिति देश के भविष्य की शैक्षणिक नींव को और अधिक मजबूत करेगी।”
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समिति शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधारों को सुनिश्चित करते हुए युवाओं को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाएगी और भारत को ज्ञान-आधारित महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 
लोकसभा में रेलगाड़ी प्रबंधकों की आवाज़ बने सांसद बृजमोहन अग्रवाल, वर्षों पुरानी वेतन विसंगतियों और कैरियर प्रगति का मुद्दा उठाया
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को लोकसभा में रेलगाड़ी प्रबंधकों (पूर्व में गार्ड) की कैरियर प्रगति, वेतन विसंगतियों और पदोन्नति से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाकर एक बार फिर कर्मचारियों के हितों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता सिद्ध की।
श्री अग्रवाल ने छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग से उत्पन्न वेतन विसंगतियों, रेलगाड़ी प्रबंधकों की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका, भारतीय रेल स्थापना नियमावली के अनुरूप कैरियर प्रगति तथा आगामी आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में प्रवेश स्तर के वेतन एवं पदोन्नति वेतनमानों के उन्नयन जैसे विषयों पर तथ्यपूर्ण और दूरदर्शी प्रश्न रखे।
सांसद बृजमोहन के प्रश्नों के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेल, रेलगाड़ी प्रबंधकों को एक महत्वपूर्ण संरक्षा श्रेणी के रूप में मान्यता देती है, जिनकी भूमिका सुरक्षित, सुचारु और कुशल रेल परिचालन में केन्द्रीय है। मंत्री ने यह भी बताया कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जा चुका है, अतिरिक्त भत्ते स्वीकृत किए गए हैं, पदोन्नति से जुड़े अवरोधों को दूर करने हेतु हालिया प्रशासनिक आदेश जारी किए गए हैं तथा कैरियर प्रगति के अवसरों का विस्तार किया गया है।
भारतीय रेलवे के लगभग 30,000 ट्रेन मैनेजरों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रेल मंत्रालय ने औपचारिक रूप से उनके परिचालन महत्व को स्वीकार किया है और करियर में प्रगति के लिए नए उपायों की रूपरेखा तैयार की है। यह कदम रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के औपचारिक प्रतिवेदन के बाद उठाया गया है.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन मैनेजर (जिन्हें पहले 'गार्ड' के नाम से जाना जाता था) एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'सेफ्टी-क्रिटिकल' श्रेणी हैं। उनकी जिम्मेदारियों में ट्रेन की अखंडता सुनिश्चित करना, लोको पायलट और स्टेशन कर्मचारियों के साथ समन्वय करना और आपातकालीन स्थितियों को संभालना शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा कि ये कार्य पूरी तरह से परिचालन (Operational) से जुड़े हैं और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) जैसे सुरक्षा कर्मियों द्वारा निभाए जाने वाले कानून-व्यवस्था के कर्तव्यों से बिल्कुल अलग हैं। यह स्पष्टीकरण AIGC की उस मुख्य शिकायत का समाधान करता है, जिसमें तर्क दिया गया था कि "गार्ड" पदनाम के कारण इस भूमिका को गलती से सुरक्षा गार्डों के बराबर मान लिया गया था।
बता दें कि 11 जनवरी 2026 को ऑल इंडिया गाईस काउंसिल (AIGC) के प्रतिनिधि मंडल ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर ट्रेन मैनेजरों (गार्डों) के संबंध में छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) से उत्पन्न वेतन विसंगतियों के निवारण की मांग की थी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस विषय को सदन में उठाकर यह सुनिश्चित किया कि देशभर के हजारों रेलगाड़ी प्रबंधकों की जायज़ मांगें नीति-निर्माण के केंद्र में आएं। यह पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा और परिचालन दक्षता को भी सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, "राष्ट्रीय गतिशीलता और सुरक्षा में इन पेशेवरों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, ट्रेन मैनेजर रेलवे की रीढ़ की हड्डी हैं।"
रेल कर्मचारियों और यूनियनों ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के इस प्रयास का स्वागत करते हुए कहा कि वे लगातार जमीनी मुद्दों को संसद तक पहुंचाने वाले जनप्रतिनिधि हैं। यह प्रश्नोत्तर उनकी कर्मचारी-हितैषी सोच, गहन अध्ययन और प्रभावी संसदीय हस्तक्षेप का सशक्त उदाहरण है।
दुर्ग-मधुबनी के बीच चलेगी होली स्पेशल ट्रेन, देखें पूरा शेड्यूल
रायपुर। मार्च महीने में होली के महापर्व पर घर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने एक बड़ी राहत दी है। रेलवे प्रशासन ने दुर्ग से बिहार के मधुबनी के बीच ‘होली स्पेशल ट्रेन’ चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्टेशनों जैसे रायपुर, बिलासपुर, चांपा और रायगढ़ से होते हुए झारखंड और बंगाल के रास्ते बिहार पहुंचेगी।
होली के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे विशेष पहल
बता दें कि अक्सर होली के दौरान नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती है, जिससे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को सुलझाने और यात्रियों को सुगम सफर प्रदान करने के लिए रेलवे द्वारा गाड़ी संख्या 08753/08754 का परिचालन किया जा रहा है।
ट्रेन की समय-सारणी और रूट (Schedule)
1. दुर्ग-मधुबनी होली स्पेशल (08753): यह ट्रेन 1 मार्च 2026 को दुर्ग से रवाना होगी।
प्रस्थान: दुर्ग से रात 00:30 बजे।
प्रमुख स्टॉपेज: रायपुर (01:20), बिलासपुर (03:30), रायगढ़ (05:28), झारसुगुड़ा (07:15), हटिया (12:10), रांची (12:30), धनबाद (17:00), जसीडीह (20:25), बरौनी (00:40) और दरभंगा (03:15)।
आगमन: मधुबनी स्टेशन पर 2 मार्च को सुबह 04:45 बजे।
2. मधुबनी-दुर्ग होली स्पेशल (08754): वापसी में यह ट्रेन 2 मार्च 2026 को मधुबनी से प्रस्थान करेगी।
प्रस्थान: मधुबनी से सुबह 06:15 बजे।
वापसी का मार्ग: समस्तीपुर (08:40), क्यूल (12:00), चितरंजन (16:05), बोकारो स्टील सिटी (21:35), राउरकेला (03:18) और बिलासपुर (09:50)।
आगमन: रायपुर (11:40) और दुर्ग दोपहर 12:45 बजे (3 मार्च)।
कोच संरचना (Coach Composition)
यात्रियों की सुविधा के लिए इस स्पेशल ट्रेन में कुल 18 कोच लगाए गए हैं, जिसका विवरण निम्नानुसार है:
एसी थ्री टायर: 02 कोच
स्लीपर क्लास: 09 कोच
जनरल (सामान्य): 05 कोच
एसटीआरडी (गार्ड एवं दिव्यांग): 02 कोच
यात्रियों के लिए सलाह: रेलवे ने अपील की है कि यात्री अपनी टिकट रेलवे काउंटर या आधिकारिक वेबसाइट www.indianrail.gov.in के माध्यम से समय रहते बुक करा लें ताकि अंतिम समय की अफरा-तफरी से बचा जा सके।
साय कैबिनेट का बड़ा फैसला, होली से पहले किसानों के खाते में एकमुश्त आएगी अंतर की राशि, जाने अन्य निर्णय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में किसानों के हित समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय
1. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 हेतु माननीय राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।
2. मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन हेतु छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
3. मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षाें में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी।
GAD में उप सचिव बनाए गए पुलक भट्टाचार्य, iGOT मिशन के लिए समन्वयक भी किए गए नियुक्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पुलक भट्टाचार्य को सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय में उप सचिव के पद पर तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया है। इसके साथ ही उन्हें iGOT मिशन कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन का समन्वयक भी बनाया गया है। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है।
भट्टाचार्य वर्तमान में अपर संचालक, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर में पदस्थ थे। उप सचिव के साथ-साथ पुलक भट्टाचार्य को iGOT मिशन कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन के लिए समन्वयक भी नियुक्त किया गया है। वे राज्य में इस महत्वाकांक्षी क्षमता विकास कार्यक्रम के प्रभावी संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
देखिये आदेश की कॉपी-

अंकित आनंद को राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त प्रभार
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी (आईएएस) अंकित आनंद को छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एससीआर) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। अंकित आनंद वर्तमान में सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग, अतिरिक्त प्रभार सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, तथा सचिव, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के पद पर पदस्थ हैं। इसके अतिरिक्त वे अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के दायित्वों का भी निर्वहन कर रहे हैं।
राज्य शासन ने उनके वर्तमान दायित्वों के साथ एससीआर के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्णय लिया है।

गौरेला में सीएम साय ने किया मीसाबंदियों का सम्मान, कहा – लोकतंत्र के सच्चे रक्षक हैं मीसाबंदी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास के दौरान गौरेला के मंगली बाजार में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जिले के मीसाबंदियों एवं उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने मीसाबंदी कोमलचन्द जैन एवं शिव कुमार सोनी के निवास पहुंचकर शाल एवं श्रीफल भेंटकर उन्हें नमन किया और विनम्र भाव से कहा, “हम आपका आशीर्वाद लेने आए हैं।”
मुख्यमंत्री साय ने आपातकाल के दौरान मीसाबंदियों द्वारा झेली गई पीड़ा और संघर्ष की दास्तां को गंभीरता से सुना और उनके साहस व त्याग को नमन किया। उन्होंने कहा कि मीसाबंदी लोकतंत्र के सच्चे रक्षक हैं, जिन्होंने देश में आपातकाल के कठिन दौर में अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने मीसाबंदियों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सम्मान राशि एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मीसाबंदियों के सम्मान और कल्याण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उनके योगदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा। मीसाबंदियों ने भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा दिया जा रहा सम्मान और सहयोग उनके संघर्ष की सच्ची मान्यता है। इस अवसर पर मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मरवाही विधायक प्रणव मरपच्ची, विधायक धरसींवा अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार खिलारी सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जिला प्रवास के दौरान गौरेला स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान हनुमान के समक्ष प्रदेश की जनता की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर विकास के लिए प्रार्थना की।मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में आयोजित हवन कार्यक्रम में भी भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका कुशल-क्षेम भी जाना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्धि और सर्वांगीण विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है और सभी वर्गों के कल्याण के लिए विभिन्न जनहितकारी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक प्रणव मरपच्ची, विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी, एसपी मनोज कुमार खिलारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। मंदिर समिति ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक रूप से स्वागत किया।
वैलेंटाइन डे को लेकर बजरंग दल सख्त, प्रेमी जोड़ों के लिए जारी की चेतावनी
रायपुर। वैलेंटाइन सप्ताह की शुरुआत हो चुकी है। प्रेमी जोड़े अपने प्रेम की अभिव्यक्ति करने के लिए तरह-तरह से तैयारी कर रहे हैं। इस बीच उनके लिए एक टेंशन भरी खबर भी राजधानी रायपुर से सामने आई है, जहां बजरंग दल ने प्रेमी युगलों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है।
मंगलवार को तेलीबांधा स्थित बजरंगबली के मंदिर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा के पाठ के साथ पूजा-अर्चना की। शस्त्र पूजन के साथ बजरंग दल ने प्रेमी युगलों को चेतावनी देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में वैलेंटाइन डे का कोई स्थान नहीं है। 14 फरवरी को वैलेंनटाइन की जगह मातृ– पितृ दिवस मनाएं। यदि युवा इस दिन वैलेंटाइन डे मनाते हैं और भारतीय संस्कृति के मूल्यों के खिलाफ जाकर अश्लीलता फैलाते हैं तो बजरंग दल इसका कड़ा प्रतिकार करेगा और ऐसे युवाओं को सबक भी सिखाएगा।
शस्त्र पूजन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं है, परंतु भारतीय संस्कृति के पारिवारिक मूल्यों के उल्लंघन को भी वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रेम सार्वजनिक प्रदर्शन की चीज नहीं हो सकती। पार्कों, होटलों, सार्वजनिक स्थानों में प्रेम की अभिव्यक्ति के नाम पर फूहड़ता करने वालों के खिलाफ वह कड़ी कार्रवाई कर उन्हें भारतीय संस्कृति से परिचित करवाएंगे।
अवैध नियुक्ति और नियम विरुद्ध भुगतान के आरोप, युवा कांग्रेस ने DEO से की निष्पक्ष जांच की मांग
मुंगेली। जिले में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स संगठन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर मामला सामने आया है। नगर पालिका परिषद मुंगेली के कबीर वार्ड क्रमांक 16 के पार्षद एवं युवा कांग्रेस के जिला महासचिव अजय साहू के नेतृत्व में युवा कांग्रेस के सदस्यों नें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए संगठन में वित्तीय अनियमितताओं, अवैध नियुक्तियों और नियमों के विरुद्ध किए गए भुगतानों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में उल्लेख किया है कि वर्ष 2022 से 2025 के मध्य जिला स्काउट्स एवं गाइड्स मुंगेली के संचालन में कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई। शिकायत के अनुसार संगठन के महत्वपूर्ण पदों अध्यक्ष एवं सचिव के चयन में न तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया और न ही किसी प्रकार की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई।
वित्तीय गबन की आशंका
शिकायत पत्र में पूनम शर्मा एवं मोरध्वज सप्रे पर संगठन की राशि के मनमाने उपयोग का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि बिना विधिवत ऑडिट और सक्षम स्वीकृति के बिल-वाउचर्स के माध्यम से भारी राशि का आहरण किया गया, जो शासकीय संगठनात्मक धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
तीन वर्षों से ऑडिट रिपोर्ट नहीं
शिकायत का एक अहम बिंदु यह भी है कि पिछले तीन वर्षों से संगठन की आय-व्यय विवरण एवं ऑडिट रिपोर्ट न तो प्रस्तुत की गई है और न ही सार्वजनिक की गई है। इससे संगठन की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच समिति गठित करने की मांग
युवा कांग्रेस पदाधिकारी एवं पार्षद अजय साहू ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए। साथ ही कलेक्टर दर कर्मचारी पूनम शर्मा एवं तत्कालीन डीओसी स्काउट मोरध्वज सप्रे द्वारा किए गए सभी भुगतानों के मूल बिल-वाउचर, चेक बुक और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए। दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधितों पर दंडात्मक कार्रवाई और गबन की गई राशि की वसूली की मांग भी की गई है।
पहले भी आ चुका है मामला
गौरतलब है कि मुंगेली में स्काउट-गाइड संगठन से जुड़ा मामला पूर्व में भी सामने आ चुका है, लेकिन उस समय ठोस कार्रवाई न होने के कारण प्रकरण ठंडे बस्ते में चला गया था। ऐसे में एक बार फिर सामने आई शिकायत को लेकर अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या इस बार स्काउट-गाइड संगठन से जुड़ी अनियमितताओं की वास्तविक और निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।
DEO ने कही यह बात
वहीं इस मामले में पर जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे नें कहा कि इस मामले कि जांच के लिए एक जांच कमेटी बनाई जा रही है, जांच उपरांत जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई कि जाएगी।