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अमीरजादों पर पुलिस ने नहीं लिया एक्शन, हाईकोर्ट की फटकार, कहा - सड़कें किसी की निजी संपत्ति नहीं
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने हाल ही में वायरल हुई तीन घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है. कोर्ट ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए पूछा कि इन तीनों मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में हल्की कार्रवाई से कानून व्यवस्था पर गलत असर पड़ता है और यह समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. डी. गुरु की डीबी में हुई.
दरअसल, 20 जुलाई 2025 को रील्स बनाने नेशनल हाईवे किया जाम शीर्षक से प्रकाशित खबर में सामने आया था कि छह लग्जरी कार सवार युवक रतनपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्टंट कर रहे थे. इन युवकों ने एक के बाद एक कारें बीच सड़क पर खड़ी कर दीं, वीडियोग्राफर और तेज लाइटिंग का भी इंतजाम किया गया. इस वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया. बाद में इन युवकों में से एक वेदांत शर्मा ने यह वीडियो अपनी इंस्टाग्राम आइडी पर पोस्ट कर दिया, जो तेजी से वायरल हुआ. मामले में पुलिस ने पहले तो केवल दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन जब वीडियो वायरल हुआ और मामला अदालत तक पहुंचा, तब एफआइआर दर्ज की गई. आरोपियों के ड्राइविंग लाइसेंस भी तीन महीने के लिए निलंबित किए गए.
दूसरा मामला बिलासपुर के रिवर व्यू क्षेत्र का है, जहां युवक चलती कार के सनरूफ से बाहर निकलकर सेल्फी और वीडियो बनाते नजर आए. यह दृश्य भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ. कोर्ट ने इस पर भी नाराजगी जताते हुए पूछा कि इस गैरजिम्मेदाराना हरकत पर पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं. तीसरे मामले में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा एक अभिनेता का जन्मदिन मनाने सड़क के बीचों-बीच दोस्तों के साथ केक काटा और डीजे की तेज आवाज में डांस किया. यह भीड़भाड़ वाला इलाका था और कई मिनटों तक यातायात बाधित रहा. यह पूरा वाकया भी इंटरनेट मीडिया पर ट्रेंड करता रहा.
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि, सड़कें किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं. इस तरह की हरकतें न सिर्फ इन युवाओं की बल्कि आम नागरिकों की जान के लिए खतरा हैं. पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई ऐसे अमीरजादों को कानून से ऊपर मानने की छूट देती है. 2000 रुपये का जुर्माना कोई सजा नहीं, यह तो एक मजाक है. कोर्ट ने कहा कि, जब कानून का भय खत्म हो जाता है और पुलिस सिर्फ जुर्माने से काम चलाती है, तो राज्य में अराजकता फैलने का खतरा रहता है. यह अदालत इसे सहन नहीं करेगी.
बिलासपुर उच्च न्यायालय के 3 वकील बने सीनियर एडवोकेट, अधिसूचना जारी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के तीन वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं को “सीनियर एडवोकेट” की उपाधि से अलंकृत किया है। यह नामांकन एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 16 तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (सीनियर एडवोकेट्स का नामांकन) नियम, 2018 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस निर्णय को उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ (Full Court) ने दिनांक 7 अगस्त 2025 को पारित किया।
इन अधिवक्ताओं को उनकी दीर्घकालिक विधिक सेवा, न्यायिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, उच्चतम स्तर की पेशेवर नैतिकता और विधि के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया है। यह चयन प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई, जो वर्ष 2017 में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट याचिका (सिविल) संख्या 454/2015 – इंदिरा जयसिंह बनाम सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में पारित आदेश के माध्यम से निर्धारित किए गए थे।
सीनियर एडवोकेट का दर्जा भारतीय न्यायिक प्रणाली में विशेष महत्व रखता है। यह न केवल अधिवक्ता की विधिक विशेषज्ञता और अनुभव का प्रतीक होता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। सीनियर एडवोकेट्स को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जैसे कि कोर्ट में विशेष पहनावा, और जूनियर वकीलों की सहायता से प्रस्तुतिकरण करने का अधिकार। इस संबंध में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल मनीष कुमार ठाकुर ने विधिवत अधिसूचना जारी की है।
देखें अधिसूचना

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण संपर्क सुदृढ़ करने छत्तीसगढ़ को केंद्र से मिली ₹195 करोड़ की स्वीकृति
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दुर्गम और वनवासी अंचलों में ग्रामीण संपर्क और आधारभूत संरचना को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत सरकार ने सड़क संपर्क परियोजना "RCPLWEA (Road Connectivity Project for Left Wing Extremism Affected Areas)" के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए छत्तीसगढ़ को ₹195 करोड़ की केंद्रीय सहायता राशि स्वीकृत की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्वीकृति छत्तीसगढ़ के उन सुदूर अंचलों में विकास का नया प्रकाश लेकर आएगी, जो दशकों से नक्सल हिंसा और भौगोलिक दुर्गमता से जूझते रहे हैं। यह राशि वहां के लोगों के लिए विकास, विश्वास और स्थायी शांति की सशक्त आधारशिला सिद्ध होगी। हमारी सरकार इस निधि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ करेगी।
यह स्वीकृति वित्त मंत्रालय की “जस्ट-इन-टाइम” फंड रिलीज़ प्रणाली के अंतर्गत सिंगल नोडल एजेंसी स्पर्श मॉडल के माध्यम से दी गई है। मदर सैंक्शन सक्षम प्राधिकरण की अनुमति से तैयार किया गया है और यह PFMS (Public Financial Management System) पर अपलोड किया गया है।
कुल ₹195 करोड़ में से ₹190.6125 करोड़ कार्यक्रम निधि और ₹4.3875 करोड़ प्रशासनिक निधि के रूप में स्वीकृत किए गए हैं, जो भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से राज्य को प्राप्त होंगे। स्पर्श दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी समय केवल एक सक्रिय मदर सैंक्शन मान्य रहेगा, और पूर्व शेष राशि को इसी में समाहित किया जाएगा।
यह निधि विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों—दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, बस्तर, राजनांदगांव, बलरामपुर, कोंडागांव और जशपुर—के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन ऑल-वेदर सड़कों, मौजूदा मार्गों के सुदृढ़ीकरण, सेतु निर्माण और क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं के विकास के लिए दी गई है।
इन संरचनाओं के माध्यम से बस्तियों को ब्लॉक व जिला मुख्यालयों, बाजारों, विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ा जाएगा, जिससे शासन की पहुंच और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार होगा। विशेषकर बाढ़ग्रस्त और वर्षा ऋतु में अवरुद्ध हो जाने वाले क्षेत्रों में यह संपर्क संरचना जीवनरेखा का कार्य करेगी।
₹4.3875 करोड़ की प्रशासनिक निधि का उपयोग मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन (M&E), तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण, एवं MIS प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा प्रबंधन हेतु किया जाएगा।
यह स्वीकृति पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं के अंतर्गत समायोजित की गई है: बैच-I (2019-20) के तहत ₹56.82 करोड़, बैच-I (2022-23) के तहत ₹133.79 करोड़ समायोजित किए गए हैं।
इस समायोजन के पश्चात बैच-I (2022-23) के लिए ₹217.39 करोड़ की राशि आगामी रिलीज़ हेतु शेष रहेगी। इस प्रक्रिया में पूर्व में जारी राशि और अर्जित ब्याज को सम्मिलित किया गया है, तथा ई-बिल क्लियरेंस, संशोधित मदर सैंक्शन और सिंगल नोडल एजेंसी – स्पर्श प्रणाली के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि निधियों का उपयोग योजना दिशा-निर्देशों के अनुसार त्वरित और प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, वित्त मंत्रालय के 13 जुलाई 2023 के कार्यालय ज्ञापन (पैरा 3(v)) के अनुसार यह भी स्पष्ट किया गया है कि योजना पूर्ण होने के पश्चात सभी सिंगल नोडल एजेंसी खातों को बंद कर अपरीक्षित केंद्रीय अंश को भारत की समेकित निधि (CFI) में वापस करना आवश्यक होगा। राज्य अंश की अपरीक्षित राशि को राज्य की समेकित निधि में एवं राज्य कोष में रखे किसी भी केंद्रीय अंश को भी CFI में लौटाया जाना अनिवार्य होगा।
यह स्वीकृति ग्रामीण विकास मंत्रालय को प्रदत्त अधिकारों के अंतर्गत तथा संविलियन वित्त प्रभाग (Integrated Finance Division) से परामर्श के उपरांत जारी की गई है।
यह निर्णय न केवल छत्तीसगढ़ के दुर्गम अंचलों में संपर्क सुविधाओं के विस्तार को बल देगा, बल्कि सामाजिक समरसता, सुशासन, सेवा-सुलभता और स्थायी शांति की दिशा में एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा।
छत्तीसगढ़ को पीएम जनमन योजना के तहत मिली 375 करोड़ से अधिक के लागत की 100 पुलों की स्वीकृति
रायपुर। प्रधानमंत्री जनमन योजना (PM-JANMAN) के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 375.71 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 6,569.56 मीटर लम्बाई के कुल 100 पुलों की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति 2025–26 बैच–II के अंतर्गत दी गई है। इस ताज़ा स्वीकृति के साथ अब तक राज्य को कुल 715 सड़कें (2,449.108 किलोमीटर) और 100 पुल प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए जा चुके हैं।इस स्वीकृति पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जन-मन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को सशक्त बनाने की जो दूरदर्शी पहल केंद्र सरकार द्वारा की गई है, वह छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। हम इस स्वीकृति को केवल पुलों और सड़कों की स्वीकृति नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और समावेश की नई राह के रूप में देखते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की भावना के अनुरूप इन सभी स्वीकृत कार्यों को फास्ट ट्रैक मोड पर, पूर्ण गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी, ताकि इसका प्रत्यक्ष लाभ पीवीटीजी आबादी को शीघ्र मिल सके। इन सड़कों और पुलों के निर्माण से न केवल इन दुर्गम क्षेत्रों में जीवन सुगम होगा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और शासन से जुड़ाव भी सुनिश्चित हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी नागरिक, चाहे वह देश के कितने ही सुदूर या वंचित क्षेत्र में क्यों न हो, विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे स्वीकृत पुलों और सड़कों का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र प्रारंभ करें और सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, स्थानीय जनसुनवाई, एवं समयबद्ध प्रगति रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के पीवीटीजी समुदायों के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।
दो से अधिक बार शराब तस्करी पर होगी संपत्ति जब्ती की कार्रवाई, डिप्टी सीएम ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा
रायपुर। उपमुख्यमंत्री एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज जगदलपुर स्थित जिला कार्यालय के प्रेरणा सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा जिले में किए जा रहे नवाचारों और योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि कोई व्यक्ति दो से अधिक बार शराब या अन्य नशे की तस्करी में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति जब्त करने की कानूनी कार्यवाही तत्काल आरंभ की जाए। उन्होंने नशा उन्मूलन के लिए पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों और दवा व्यापारियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जगदलपुर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शीघ्र ओपीडी सेवा प्रारंभ करने को कहा, ताकि आम जनता को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हो सकें।
उपमुख्यमंत्री ने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित ग्राम पंचायतों में कॉम्प्लेक्स निर्माण कर पंचायतों को स्वावलंबी बनाने का सुझाव दिया, जिससे पंचायतों को स्थायी राजस्व प्राप्त हो सके। उन्होंने पंचायत सचिवों को अविवादित बंटवारे के मामलों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने हेतु ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण देने और जनजागरूकता हेतु मुनादी एवं होर्डिंग लगाने के निर्देश भी दिए। मिलेट्स उत्पादन करने वाले किसानों के उत्पाद को बाजार तक पहुँचाने की ठोस व्यवस्था बनाने तथा मक्का उत्पादक किसानों को स्प्रिंकलर एवं विभागीय योजनाओं से जोड़ने की बात भी कही। बैठक में पंचायत विभाग द्वारा किए गए नवाचारों, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, महतारी सदन, दीनदयाल अंत्योदय योजना, बिहान, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), आत्मसमर्पित नक्सली एवं नक्सल पीड़ित हितग्राहियों को प्रथम किश्त के उपरांत आवास की प्रगति, ग्राम पंचायतों में पंजी संधारण की स्थिति, डीपीआरसी ट्रेनिंग सेंटर, स्वच्छ भारत मिशन तथा आगामी तीन माह की कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई।
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने गृह विभाग के अंतर्गत अवैध शराब, सट्टा, जुआ, गोधन तस्करी, यातायात नियंत्रण, हिट एंड रन, मोटरयान अधिनियम की धाराओं पर की गई कार्रवाई, ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन, गुम इंसानों के प्रकरण और एनडीपीएस एक्ट के मामलों की स्थिति की जानकारी ली गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए नवाचारों, आयुष्मान कार्ड वितरण, मोबाइल हेल्थ वैन संचालन, जनऔषधि केंद्रों की उपलब्धता, सिकलसेल डायग्नोसिस, डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की स्थिति तथा आगामी तीन माह के लिए निर्धारित कार्ययोजना की समीक्षा की गई। वन विभाग द्वारा किए गए लाख उत्पादन, तेंदूपत्ता बोनस वितरण, चरण पादुका वितरण और निर्माण कार्यों की स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ कैंपा मद में दो वर्षों के आवंटन और व्यय की जानकारी भी ली गई। महिला एवं बाल विकास विभाग की महतारी वंदन योजना, मातृ वंदन योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, स्वस्थ लइका अभियान और नीति आयोग के सहयोग से चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अद्यतन स्थिति की जानकारी भी बैठक में दी गई। राजस्व विभाग द्वारा किए गए नवाचार, प्रकरणों की स्थिति, शिविरों की प्रगति और भू-अर्जन से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई। कृषि विभाग द्वारा रकबा, बीज एवं उर्वरक वितरण, आत्मा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, खरीफ की तैयारी, चैम्प्स योजना से यंत्र वितरण आदि की अद्यतन जानकारी ली गई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरेलू नल कनेक्शन, पूर्णता प्रमाण पत्र और हर घर जल प्रमाणीकरण की स्थिति पर चर्चा हुई।
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जल संसाधन विभाग के तहत प्रमुख बांध, नहर और जलाशयों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की गई। विद्युत विभाग की प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, ट्रांसफार्मर की उपलब्धता, आरडीएसएस योजना के तहत क्रियान्वयन की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा तथा राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों और आगामी तीन माह के कार्यों की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
शिक्षा विभाग द्वारा ज्ञानगुड़ी योजना के तहत नि:शुल्क कोचिंग, आईसीटी आधारित प्रशिक्षण, बहुभाषी शिक्षा, पीएम श्री स्कूलों के निर्माण, शिक्षा गुणवत्ता कार्यक्रम, मिशन 200, जीरो ड्रॉपआउट अभियान और सम्पर्क फाउंडेशन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा छात्रावासों और छात्रवृत्तियों की स्थिति प्रस्तुत की गई। खाद्य विभाग द्वारा पीडीएस प्रणाली, धान भंडारण एवं उठाव की स्थिति की जानकारी दी गई। नगर निगम द्वारा स्वच्छ भारत मिशन शहरी, पीएम आवास योजना शहरी, भवन अनुज्ञा एवं अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की गई। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और पीएमईजीपी की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त सहकारिता, समाज कल्याण और श्रम विभाग की गतिविधियों की भी समग्र समीक्षा की गई।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए तथा यह ध्यान रखा जाए कि इन योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास के कार्यों में शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।बैठक में चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, महापौर संजय पांडेय, सचिव पंचायत भीम सिंह, कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
बिना लाइसेंस के खाद्यान्न गोदाम संचालन करने वाले किराना व्यापारी पर कार्रवाई
सारंगढ़-बिलाईगढ़। खाद्य सुरक्षा विभाग की रायगढ़ टीम द्वारा सारंगढ़ के मनोज किराना स्टोर्स का निरीक्षण किया गया। टीम ने मनोज किराना स्टोर्स के द्वारा बिना लाइसेंस के संचालित खाद्यान्न गोदाम पर कार्रवाई करते हुए वहां विक्रय करने के उद्देश्य से संग्रहित करके रखे हुए फर्म जय लहरी ट्रेडर्स गोंदवारा रायपुर द्वारा विनिर्मित, अपूर्ण व त्रुटियुक्त लेवल डिस्प्ले (मिथ्या छाप) खाद्य पदार्थ "सूरजमुखी फ़रसान फ्लोर (आटा)" लगभग 450 किलोग्राम मात्रा (15 बोरा) को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 व विनियम 2011 के प्रावधानों के अंतर्गत अधिग्रहण (जब्ती) कर संबंधित खाद्य कारोबारी की ही अभिरक्षा में रुपए 27000 के प्रतिभू-बंध का निष्पादित करते हुए रखा गया है।
इसके अलावा विक्रय करने हेतु संग्रहित "सूरजमुखी फ़रसान फ्लोर (आटा)" गुणवत्ता एवं मिलावट होने की शंका पर जप्त किए गए खाद्य पदार्थ का नमूना संकलन कर जांच एवं विश्लेषण हेतु खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा "सूरजमुखी फ़रसान फ्लोर (आटा)" विनिर्माता और स्थानीय विक्रेता दोनों से ही इस संबंध में नोटिस देकर विवेचना शुरू कर दिया गया है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद विधि अनुसार कार्रवाई किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग जिले में लोक स्वास्थ्य के लिए गुणवत्तापूर्ण मानक व स्वच्छता से विनिर्मित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता के लिए प्रतिबद्ध है एवं इस प्रकार की कार्रवाई एवं अभियान जिले में सतत जारी रहेगा।
अनुसूचित जाति वर्ग के लिए बड़ी सौगात : समाज के 5 युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में 'नालंदा परिसर' के निर्माण की भी बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है।
बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया।
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया।
बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, दिलीप लहरिया, शेषराज हरवंश, उतरी गणपत जांगड़े, कविता प्राण लहरे, हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है।
बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं बसव राजू, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव शहला निगार, रोहित यादव, कमलप्रीत सिंह, रीना बाबा साहेब कंगाले, आर. प्रसन्ना, शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मेयर इन काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक हुई समाप्त
रायपुर। नगर निगम की महापौर परिषद (एमआईसी) की बैठक गुरुवार को समाप्त हुई। बैठक के बाद महापौर मीनल चौबे ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि कुल 42 विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। महापौर के अनुसार, पेंशन योजनाओं के तहत 428 हितग्राहियों से जुड़े मामलों पर विचार किया गया है। वहीं, शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल महादेव घाट के सौंदर्यीकरण के लिए 20 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है।
नगर निगम की अधोसंरचना मद से “गौरव पथ” निर्माण का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसके साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 18 प्रमुख चौक-चौराहों की पहचान की गई है, जहां सुधार कार्य किए जाएंगे।
तेलीबांधा क्षेत्र में 4 करोड़ रुपये की लागत से एक टेक्निकल टावर बनाने की योजना है। शहीद स्मारक भवन के रखरखाव के लिए भी विस्तृत योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, 5 करोड़ रुपये की लागत से एक महिला शांति गृह की स्थापना की जाएगी, जिससे महिलाओं को संकट की स्थिति में सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा।
शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार से फंड प्राप्त हुआ है। इस विषय पर भी बैठक में चर्चा हुई और आगामी कार्ययोजना बनाई गई।
महापौर मीनल चौबे ने यह भी बताया कि ‘वुमन फॉर ट्री’ योजना के तहत महिलाओं के समूहों को पेड़ों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, तीन स्थानों पर वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाए जाने की योजना भी तय की गई है, जिससे नौकरीपेशा महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल सकेगा।
विकास और पुनर्वास की नीति पर कर रही है कार्य: सरकार सभी पात्र हितग्राहियों को पक्का घर देने के लिए संकल्पित - मुख्यमंत्री साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के हर परिवार को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने सरकार लगातार पहल कर रही है। राज्य में नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष परियोजना के तहत करीब तीन हजार आवास बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए विशेष परियोजना के तहत 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है।
विशेष परियोजना के तहत राज्य में अब तक पात्र पाए गए पांच हजार परिवारों में से तीन हजार परिवारों के लिए आवास स्वीकृत कर 2111 परिवारों को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त और 128 परिवारों को दूसरी किस्त भी जारी की जा चुकी है। सुदूर वनांचलों में रहने वाले इन परिवारों के आवास तेजी से बन रहे हैं। नक्सल हिंसा से प्रभावित सुकमा की सोडी हुंगी और कांकेर की दशरी बाई का विशेष परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत पीएम आवास दुर्गम क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मात्र तीन महीनों में ही बनकर तैयार हो गया है। इस साल मार्च में स्वीकृति के बाद मई में इनके आवासों का निर्माण प्रारंभ हुआ था।
बस्तर में नक्सल हिंसा से प्रभावित और आत्मसमर्पित नक्सलियों के परिवारों में खुशियों ने फिर से दस्तक देना शुरू कर दिया है। विशेष परियोजना के तहत स्वीकृत उनके पक्के आवास तेजी से आकार ले रहे हैं। दूरस्थ और कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के बावजूद इन परिवारों के हौसले और शासन-प्रशासन की मदद से उनके सपनों के आशियाने मूर्त रूप ले रहे हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में यह विशेष परियोजना न केवल एक ठोस कदम है, बल्कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में मील का पत्थर भी है।
दुर्गम क्षेत्र और विपरीत हालातों के बीच भी तीन महीने में निर्माण पूरा
कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 200 किलोमीटर दूर कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के उलिया ग्राम पंचायत में रहने वाली दसरी बाई नुरूटी के पति दोगे नुरूटी की विधानसभा चुनाव के दौरान माओवादी घटना में मृत्यु हो गई थी। पीएम आवास योजना में नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए विशेष परियोजना के तहत इस साल मार्च में उसका आवास स्वीकृत किया गया था। मई में उसके आवास का निर्माण शुरू हुआ था। अब मात्र तीन महीनों की अल्प अवधि में ही उसके आवास का निर्माण पूर्ण हो गया है। दसरी बाई के हौसले के कारण कठिन परिस्थितियों के बावजूद बहुत कम समय में आवास तैयार हुआ और उसके परिवार को पक्का मकान मिला।
दसरी बाई बताती हैं कि वनांचल और दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण आवास के निर्माण में कई व्यावहारिक दिक्कतें आईं। विकासखंड मुख्यालय से बहुत दूर होने के कारण चारपहिया वाहनों के लिए कोई मार्ग नहीं है। इस कारण से निर्माण सामग्री लाने में बहुत कठिनाइयां आईं। बारिश होने पर दोपहिया वाहन से भी पहुंचना अत्यंत मुश्किल होता था, जिसके चलते राजमिस्त्री और श्रमिक समय पर पहुंचने से मना कर देते थे। अंदरूनी क्षेत्र होने से निर्माण सामग्रियों को लाना सामान्य क्षेत्र के मुकाबले महंगा पड़ता था।
दसरी बाई कहती हैं कि आवास का काम तेजी से पूरा करने में कांकेर जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत और प्रधानमंत्री आवास योजना के अधिकारियों का बहुत सहयोग मिला। निर्माण सामग्रियां पहुंचाने तथा राजमिस्त्रियों और श्रमिकों की व्यवस्था में ग्राम पंचायत एवं आवास टोली ने बहुत सहायता की। वह कहती हैं कि नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने संवेदनशील और प्रभावी नीति बनाई है। शासन-प्रशासन के लगातार सहयोग से बहुत कम समय में उसका पक्का आवास बन गया है।
*बरसों टपकती छत वाले कच्चे मकान में रहने वाली सोडी हुंगी अब परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में
सुकमा जिले के गादीरास ग्राम पंचायत के आश्रित गांव ओईरास की सोडी हुंगी ने भी अपना पक्का आवास तीन महीने में बना लिया है। वर्ष 2005 में उसके पति मासा सोडी की नक्सलियों ने मुखबिरी के संदेह में हत्या कर दी थी। उसका परिवार गरीबी में वर्षों तक कच्चे घर में रहने को मजबूर था, जहां बरसात में टपकती छत और जहरीले कीड़े-मकोड़ों से जान का खतरा बना रहता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में विशेष परियोजना के तहत आवास स्वीकृत होने पर सोडी हुंगी को चरणबद्ध रूप से तीन किस्तों में कुल एक लाख 35 हजार रुपए मिले। ग्राम पंचायत के तकनीकी मार्गदर्शन और समय-समय पर निगरानी के चलते इस साल जुलाई में उसके आवास का निर्माण पूरा हुआ। अब वह परिवार के साथ अपने पक्के नए घर में रहती है।
विशेष परियोजना में सुकमा में सर्वाधिक 984 परिवारों को आवास स्वीकृत, बीजापुर के 761 और नारायणपुर के 376 परिवार शामिल
प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत अब तक करीब तीन हजार आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 984 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले में ऐसे 761 परिवारों, नारायणपुर में 376, दंतेवाड़ा में 251, बस्तर में 214, कोंडागांव में 166, कांकेर में 146, गरियाबंद में 27, बलरामपुर-रामानुजगंज में 25 और मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी में 23 परिवारों के आवास मंजूर किए गए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और पुनर्वास की रणनीति पर कार्य कर रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने हेतु राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विशेष परियोजना के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध कर 15 हजार आवास स्वीकृत कराए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिर्फ ईंट और सीमेंट का निर्माण नहीं, बल्कि नए विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व की नींव है। दुर्गम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मात्र तीन महीनों में आवास पूर्ण होना यह दर्शाता है कि शासन और जनता मिलकर असंभव को भी संभव बना सकते हैं। सरकार सभी पात्र परिवारों को पक्का घर देने के लिए कटिबद्ध है।
उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मान की नीति पर कार्य किया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और हिंसा से पीड़ित परिवारों के लिए विशेष परियोजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जो पहल की गई है, वह सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि सोडी हुंगी और दशरी बाई जैसे उदाहरण यह सिद्ध करते हैं कि यदि सरकार संवेदनशील हो और प्रशासन सक्रिय, तो दूरस्थ वनांचलों में भी विकास की रोशनी पहुँचाई जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि हर पीड़ित परिवार को छत और सम्मान दोनों मिले। यह मिशन पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ाया जा रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में उठाया हवाई यात्रियों की सुविधा का मुद्दा
नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने गुरुवार को लोकसभा में "एयर सेवा पोर्टल" और उसमें दर्ज यात्रियों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाया। इस पर जवाब देते हुए नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि 25 नवंबर 2016 से 31 जुलाई 2025 तक एयर सेवा पोर्टल पर कुल 1,09,834 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 1,09,664 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पोर्टल नागर विमानन मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है, जो हवाई यात्रियों की समस्याओं को एक मंच पर लाकर उनका शीघ्र और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करता है। यात्रियों की शिकायतों को सेवा स्तर समझौते और यात्री चार्टर के अनुसार संबंधित एयरलाइनों, हवाई अड्डा प्रचालकों और अन्य हितधारकों के नोडल अधिकारियों को भेजा जाता है। मंत्रालय समाधान की प्रगति, समय सीमा और उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया की डैशबोर्ड प्रणाली के माध्यम से निगरानी करता है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "एयर सेवा पोर्टल केंद्र सरकार की डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यात्रियों की शिकायतों का 99.84% समाधान अपने आप में एक मिसाल है। मेरा प्रयास है कि रायपुर सहित देशभर के हवाई यात्रियों को बेहतर सेवाएं और उत्तरदायी व्यवस्था मिले।"
उन्होंने आगे बताया कि पोर्टल पर पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और दर्ज शिकायतों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है, जो इसके व्यापक उपयोग और भरोसे को दर्शाता है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, सरकार द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी यह दर्शाती है कि भारत की नागर विमानन प्रणाली अब तकनीक और जवाबदेही की दिशा में सशक्त रूप से अग्रसर है।
नन्ही सृष्टि को गोद में उठाकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रच दिया अपनत्व और स्नेह का अविस्मरणीय पल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व केवल जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की दिशा में सशक्त पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सहजता, आत्मीयता और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यवहार ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशेष स्थान दिलाया है। आज जांजगीर चांपा जिले में आगमन के दौरान हेलीपेड पर ऐसा ही एक क्षण सामने आया, जब मुख्यमंत्री ने नन्ही बच्ची सृष्टि को गोद में उठाकर स्नेह से दुलारा।
किसान योगेंद्र पांडेय अपनी तीन वर्षीय पुत्री सृष्टि पांडेय को लेकर ग्राम भणेसर से विशेष रूप से मुख्यमंत्री श्री साय से मिलने पहुंचे थे। जब मुख्यमंत्री श्री साय की दृष्टि मासूम बच्ची सृष्टि पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत आत्मीय मुस्कान के साथ निहारा और उसे स्नेह से अपनी गोद में उठा लिया। मुख्यमंत्री से मिलकर नन्ही सृष्टि की आँखों में जो चमक थी, वह पूरे वातावरण को आत्मीयता से भर गई।
सृष्टि के पिता योगेंद्र पांडेय ने भावुक होकर बताया कि मुख्यमंत्री के आने की खबर सुनकर मैंने तय किया कि अपनी बेटी को उनसे मिलवाऊँगा। जब मुख्यमंत्री ने उसे गोद में उठाया, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मेरी बेटी और हम दोनों के लिए यह पल हमारे जीवन की सबसे अनमोल स्मृति बन गई है जो जीवन भर याद रहेगी।
सुश्री सृष्टि, जो वर्तमान में नर्सरी कक्षा की छात्रा हैं, अपने पिता के साथ मुख्यमंत्री श्री साय को देखने के लिए अत्यंत उत्साह के साथ पहुंची थीं। उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार है, जिसमें माता-पिता, दादा-दादी और सृष्टि स्वयं शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खेल अवसंरचना के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की "खेलो इंडिया योजना" के अंतर्गत सहायता की मांग
रायपुर/नई दिल्ली। अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुके छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ऐसे में यहां राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने के लिए विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित करने की आवश्यता है यह कहना है सांसद एवं वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल का।
जिसको लेकर बृजमोहन अग्रवाल ने माननीय केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से खेलो इंडिया योजना" के अंतर्गत रायपुर में विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना के निर्माण हेतु सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में खेलों की संभावनाएं अत्यंत व्यापक हैं, लेकिन उपयुक्त अवसंरचना के अभाव में खिलाड़ियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में रायपुर जैसे उभरते खेल हब में उच्च स्तरीय संसाधनों की आवश्यकता है।
इस दिशा में उन्होंने निम्नलिखित खेल सुविधाओं के निर्माण के लिए केंद्रीय सहायता का आग्रह करते हुए राजधानी रायपुर में करीब 19.5 करोड़ रुपए की सहायता से
- मल्टीपरपज़ हॉल जिसमें बैडमिंटन, वॉलीबॉल, जुडो, कुश्ती, हैंडबॉल, कबड्डी आदि खेलों के लिए सुविधाएं हों।
- ऑल वेदर स्विमिंग पूल जो वर्षभर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण हेतु उपयोगी हो।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तीरंदाजी रेंज
- आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्क्वैश कोर्ट बनाने की मांग की है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि "खेलो इंडिया योजना" के तहत यदि इन सुविधाओं की स्थापना होती है, तो इससे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य और देश का नाम रोशन करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की इस मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए जल्द आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।


दूरस्थ नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की नई अलख, अब बच्चों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण नीति के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश के सबसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगे हैं। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कमकासुर की प्राथमिक शाला, जो एक वर्ष से शिक्षक विहीन थी, अब वहां फिर से ‘क, ख, ग’ की गूंज सुनाई दे रही है।
मोहला जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित कमकासुर गांव एक घना वनाच्छादित आदिवासी क्षेत्र है, जहां नक्सली गतिविधियों की लगातार उपस्थिति के कारण शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होती रही है। गांव की शासकीय प्राथमिक शाला में 14 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन विगत एक वर्ष से शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई थी। इससे पालकों की चिंता गहराने लगी थी और बच्चों का मनोबल भी टूटने लगा था। ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से शिक्षक नियुक्ति की मांग की जा रही थी। शासन द्वारा युक्तियुक्तकरण की पहल के अंतर्गत इस विद्यालय को अंततः एक प्रधान पाठक प्रदान किया गया, जिससे गांव में फिर से शिक्षा की रौशनी लौट आई है। शिक्षक की नियुक्ति से न केवल विद्यालय की गतिविधियाँ पुनः आरंभ हुई हैं, बल्कि बच्चों में भी शिक्षा के प्रति उत्साह लौट आया है।
विद्यालय में पढ़ाई शुरू होते ही बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और अब अभिभावकों का विश्वास भी दृढ़ हुआ है कि उनके बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बदलाव शासन की दूरदर्शी नीति का परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। इसका उद्देश्य प्रदेशभर में शिक्षकों का समान और प्रभावी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि हर बच्चे को समान अवसर मिल सके।
इस दूरस्थ और नक्सल प्रभावित अंचल में शिक्षक की नियुक्ति केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि यह शिक्षा को सशक्त बनाने और सामाजिक समरसता की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम है। कमकासुर जैसे क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलने से स्पष्ट है कि अब प्रदेश का कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
छत्तीसगढ़ बना रोल मॉडल: छत्तीसगढ़ संवाद व जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को किया प्रभावित
रायपुर। महाराष्ट्र सरकार के जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक अध्ययन दल 5 से 7 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ में प्रवास पर रहा। इस दौरे का उद्देश्य छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सूचना, जनसंपर्क और शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में किए जा रहे नवीनतम नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों का प्रत्यक्ष अवलोकन एवं अध्ययन करना था।

अध्ययन दल में महाराष्ट्र शासन की उप सचिव समृद्धि अंगोलकर, निदेशक किशोर गंगरडे सहित कुल छह वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दल ने छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग एवं उसकी सहायक संस्था छत्तीसगढ़ संवाद की संपूर्ण कार्यप्रणाली का अध्ययन किया।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ई-न्यूज़ क्लिपिंग, ई-आरओ सिस्टम, ई-पब्लिकेशन, पत्रकार अधिमान्यता प्रणाली, तथा पत्रकारों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं का गहन अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद की संगठनात्मक संरचना, संचालन तंत्र तथा तकनीकी नवाचारों के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की।
इस अवसर पर अध्ययन दल ने जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल से सौजन्य मुलाकात की। जनसंपर्क आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग का यह सतत प्रयास रहा है कि शासकीय योजनाओं और जनहितकारी नीतियों की जानकारी आम जनता तक त्वरित, पारदर्शी और प्रभावशाली ढंग से पहुँचे। सूचना के क्षेत्र में तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलित समावेशन ने हमारी कार्यप्रणाली को विशिष्ट बनाया है। यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि अन्य राज्य भी हमारे नवाचारों में रुचि ले रहे हैं। यह अनुभव-साझाकरण एक सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में उठाया गया कदम है।
अध्ययन दल ने इंद्रावती भवन स्थित जनसंपर्क संचालनालय एवं छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय का भ्रमण कर विभिन्न शाखाओं के संचालन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और विभाग की प्रमुख गतिविधियों को निकट से जाना।
अपर संचालक जे.एल. दरियो, उमेश मिश्रा एवं संजीव तिवारी ने अध्ययन दल को विभाग की प्रमुख गतिविधियों, कार्यप्रणाली और तकनीकी अनुप्रयोगों की जानकारी विस्तार से प्रदान की।महाराष्ट्र से आए अध्ययन दल के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए उन्हें अपने राज्य में भी लागू करने की संभावनाओं में गहरी रुचि जताई।
इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग और छत्तीसगढ़ संवाद के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं और ‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ की कमांडो बांधेंगी राखी
सुकमा। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला आयोजन इस रक्षाबंधन के दिन 9 अगस्त को आयोजित किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा इस दिन दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों के दौरे पर रहेंगे, जहां आत्मसमर्पण कर चुकी नक्सली महिलाएं और दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला कमांडो उन्हें राखी बांधेंगी। रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर गृहमंत्री शर्मा सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र का भ्रमण करेंगे जहां आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं राखी बांधेंगी।
यह आयोजन राज्य सरकार की पुनर्वास नीति की दिशा में एक संवेदनशील पहल है, जिसके माध्यम से नक्सलवाद छोड़ चुकी महिलाओं को समाज में पुनः सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर किया जा रहा है।सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित जिलों में पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को न केवल सुरक्षा प्रदान की जा रही है, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक पुनःस्थापना का अवसर भी दिया जा रहा है। रक्षाबंधन पर यह आयोजन इसी प्रक्रिया की एक अभिव्यक्ति है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि शासन की मंशा है कि जो लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं, उन्हें हरसंभव सहायता और मार्गदर्शन दिया जाए। रक्षाबंधन जैसे सामाजिक पर्वों के माध्यम से यह संदेश भी देना आवश्यक है कि शासन और प्रशासन ऐसे लोगों को स्वीकार करता है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देता है।
जेल में बंद चैतन्य बघेल और पूर्व मंत्री लखमा से विधायक देवेंद्र यादव ने की मुलाकात
रायपुर। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने आज जेल में बंद चैतन्य बघेल और कवासी लखमा से मुलाकात की. मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया.
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि जेल में चैतन्य बघेल और कवासी लखमा को लगातार परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि “जेल प्रशासन नए-नए तरीके से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है. कवासी लखमा की आंखों में सूजन और पानी की समस्या है, लेकिन उन्हें इलाज नहीं दिया जा रहा है.”
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि “भाजपा सरकार ने देश में अघोषित आपातकाल लागू कर दिया है. जो सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है.” उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूंजीपतियों के खिलाफ प्रदेश हित में लड़ाई लड़ रहे हैं, और चैतन्य बघेल को उसी लड़ाई की सजा दी जा रही है. देवेंद्र यादव ने कहा कि “आज चैतन्य बघेल से मुलाकात कर गर्व हुआ कि वे जेल के अंदर भी पूरे हौसले के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं. पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ है.” इस दौरान उनके साथ विधायक राम कुमार यादव भी मौजूद थे.
रायपुर पुलिस परेड ग्राउंड में मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
रायपुर। राजधानी के पुलिस परेड ग्राउंड, सिविल लाइन में हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन द्वारा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक विशेष कार्यक्रम राखी विद रक्षक, डोरी प्रेम का आयोजन किया गया. इस आयोजन में बीएसएफ, आईटीबीपी, छत्तीसगढ़ पुलिस, सेंट्रल फोर्स और ओडिशा के जवानों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में बहनों ने जवानों को राखी बांधकर उनकी कलाई सजाई और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त किया.
जब आप जागते हैं, तभी हम सो पाते हैं
कार्यक्रम में उपस्थित बहनों ने भावुक होकर कहा, “जब आप जागते हैं, तभी हम चैन से सो पाते हैं. आपकी ड्यूटी के कारण हम सुरक्षित रहते हैं.
हर त्योहार में घर से दूर रखते हैं जवान
हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन के आयोजक डॉ. लाल उमेद ने कहा हमारे जवान अपनी ड्यूटी के कारण परिवार से दूर रहते हैं. जब वे देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, तब हम सभी सुरक्षित त्योहार मना पाते हैं. जवानों के मन में घर की याद जरूर आती है, और इस भावना को हम सभी समझ सकते हैं. उन्होंने साइबर अपराध और नशे जैसी बढ़ती समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, सतर्कता और सावधानी ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है.
कार्यक्रम में शामिल आईपीएस राजेश कुकरेजा ने कहा, “हेल्पिंग हैंड्स ने जवानों को राखी बांधकर पूरे भारत के पुलिस परिवार को सम्मानित किया है. हमारी जिम्मेदारी है कि हम हर बहन की सुरक्षा सुनिश्चित करें. मैं वचन देता हूं कि हम सभी बहनों की रक्षा करेंगे. उन्होंने हेल्पिंग हैंड्स की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह उन जवानों के लिए विशेष है जिनके पास अपनी बहनें नहीं हैं और यह आयोजन उनकी इस कमी को पूरा करता है.
हेल्पिंग हैंड्स का मिशन मानव सेवा ही माधव सेवा
हेल्पिंग हैंड्स के संरक्षक मनोज गोयल ने कहा, हमारा उद्देश्य है कि हमारे जवान भाई, जो हमारी सुरक्षा के लिए घर से दूर रहते हैं, उनके साथ रक्षाबंधन का यह पर्व मनाया जाए. पिछले साल भी हमने यह आयोजन किया था और इस साल भी हम इसे और भव्यता के साथ मना रहे हैं. हमारा मकसद है मानव सेवा ही माधव सेवा.
महिला विंग की भावनाएं
महिला विंग की अध्यक्ष बबीता अग्रवाल ने कहा जब हम जवानों को राखी बांधते हैं, तो उनके चेहरे पर जो मुस्कान आती है, वह हमें बहुत सुकून देती है. हम कोशिश करते हैं कि जवानों को उनकी बहनों की कमी न खले और उन्हें घर की याद न आए.
सुरक्षा और जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम में साइबर अपराध और नशे जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. डॉ. लाल उमेद ने विशेष रूप से बहनों से आग्रह किया कि वे वास्तविक दुनिया में सतर्क रहें और सावधानी बरतें. यह आयोजन न केवल रक्षाबंधन का उत्सव था, बल्कि समाज में सुरक्षा और जागरूकता के प्रति एक संदेश भी दे गया.