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छत्तीसगढ़ में पहली फास्ट मेमू-डेमू ट्रेन सेवा की मांग, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लिखा रेल मंत्री को पत्र
नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आज रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के यात्रियों की सुविधा के लिए फास्ट मेमू/डेमू लोकल ट्रेन सेवा प्रारंभ करने का आग्रह किया है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य इस वर्ष अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ रजत जयंती वर्ष के रूप में मना रहा है। राज्य निर्माण के बाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेल सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का रेल बजट कई गुना बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में तीसरी व चौथी रेल लाइन का निर्माण, अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों का पुनर्विकास, और अन्य अधोसंरचनात्मक कार्य युद्ध स्तर पर हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश से गुजरने वाली मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, वंदे भारत, हमसफर व दुरंतो जैसी ट्रेनों से छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी मजबूत हुई है, जिसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को जाता है।
हालांकि, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस तथ्य पर चिंता जताई कि छत्तीसगढ़ प्रांत में अब तक एक भी फास्ट मेमू/डेमू लोकल ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे आम यात्रियों को सुविधा मिल सके।
इसीलिए उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए रजत जयंती वर्ष के अवसर पर रायपुर से रायगढ़ (243 किमी) और बिलासपुर से डोंगरगढ़ (209 किमी) पर फास्ट मेमू/डेमू लोकल ट्रेन सेवा प्रारंभ करने का अनुरोध किया है।
श्री अग्रवाल ने विश्वास जताया कि रेल मंत्री इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेंगे और शीघ्र ही इन रूटों पर लोकल ट्रेन सेवाएं प्रारंभ होंगी, जिससे प्रदेश के यात्रियों को सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।
मिशन कर्मयोगी: राष्ट्र निर्माण का संकल्प – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष आज नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में भारत सरकार की क्षमता विकास आयोग एवं छत्तीसगढ़ शासन के मध्य एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत हुए इस एमओयू पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सुब्रत साहू तथा क्षमता विकास आयोग की ओर से सदस्य सचिव वी. ललिता लक्ष्मी ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वप्नों को साकार करने वाला एक दूरदर्शी मिशन है। इस मिशन के माध्यम से देश के सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों में कर्मयोगी की भावना विकसित होगी और वे राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में चार लाख शासकीय सेवकों को सतत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब तक लगभग 50 हजार अधिकारी-कर्मचारी इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप कौशल विकास आज की अनिवार्यता बन गया है। इस नए युग के साथ निरंतर कौशल उन्नयन तथा शासन-प्रशासन में उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने में मिशन कर्मयोगी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में जिस सुशासन की स्थापना के उद्देश्य से कार्य किया जा रहा है, उसे नई ऊँचाई प्रदान करने में यह एमओयू एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस साझेदारी के माध्यम से राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन प्रशिक्षण पद्धतियों को अपनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन कर्मयोगी को पूर्ण समर्पण के साथ लागू करने तथा इसके लाभ को प्रशासन के प्रत्येक स्तर तक पहुँचाने हेतु राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। सरकार निरंतर शासन एवं प्रशासनिक स्तर पर नवाचार और अभिनव पहलों के माध्यम से व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यह पहल लोक सेवकों को नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होगी, साथ ही जन-केंद्रित नीतियों और सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहयोग प्रदान करेगी। श्री साय ने कहा कि इन प्रयासों के माध्यम से हम सभी मिलकर कुशल और प्रेरित लोक सेवकों के सहयोग से विकसित छत्तीसगढ़ के स्वप्न को साकार कर पाएँगे।
इस अवसर पर आयोग की सदस्य डॉ. अल्का मित्तल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, मिशन कर्मयोगी योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश वर्मा, प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ग्रीन स्टील और माइनिंग समिट में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देश के विभिन्न स्टील उद्यमियों को छत्तीसगढ़ में उत्पादन यूनिट स्थापित करने का आमंत्रण दिया है। उन्होंने आज स्थानीय होटल में आयोजित ग्रीन स्टील और माइनिंग समिट में सहभागिता कर उद्यमियों को छत्तीसगढ़ में इस उद्योग की भरपूर संभावनाओं और इसके लिए विकसित अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की जानकारी दी। यह समिट कान्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज द्वारा पूर्वी क्षेत्र के सदस्यों के लिए आयोजित की गई थी।
समिट में उपस्थित उद्यमियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में स्टील सेक्टर को विशेष रूप से प्रोत्साहन दिया गया है। यदि कोई उद्यमी ग्रीन स्टील का उत्पादन कर रहा हो, तो उसे विशेष अनुदान देने का प्रावधान भी छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को स्टील हब बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनके नेतृत्व में देश में स्टील उत्पादन 100 मिलियन टन से बढ़कर 200 मिलियन टन हो गया है, और वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 300 मिलियन टन तक पहुँचाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी स्टील की वर्तमान उत्पादन क्षमता 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।
छत्तीसगढ़: खनिज संसाधनों से समृद्ध, औद्योगिक संभावनाओं से परिपूर्ण राज्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने भरपूर खनिज संसाधनों के कारण समृद्ध है। इनके उचित दोहन से यहाँ औद्योगिक संभावनाओं में अत्यधिक विस्तार संभव है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार की रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना और राज्य सरकार की स्थानीय लोगों को रोजगार देने हेतु अनुदान योजनाओं से इस दिशा में सार्थक कार्य होगा।
‘अंजोर विज़न’ दस्तावेज़ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रमुखता
मुख्यमंत्री ने उपस्थित उद्यमियों को बताया कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की परिकल्पना पर आधारित अंजोर विजन डाक्यूमेंट तैयार कर लिया गया है। इस दस्तावेज़ में चरणबद्ध रूप से विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। उन्होंने बताया कि इस विज़न दस्तावेज़ में सर्वाधिक फोकस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की कोर इंडस्ट्री – जैसे स्टील एवं पावर – को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
लक्ष्य प्राप्ति हेतु अधोसंरचना सहित सभी तैयारियाँ पूर्ण
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अधोसंरचना सहित सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। राज्य में रेलवे अधोसंरचना को सशक्त किया गया है। तेज़ी से रेल नेटवर्क और उससे संबंधित अधोसंरचना का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे स्टील सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 47 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से रेलवे के विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर कार्य हो रहा है। अब रावघाट से जगदलपुर रेलमार्ग पर भी कार्य आरंभ होगा। किरंदुल से तेलंगाना के कोठागुडेम तक नई रेललाइन बिछाई जाएगी, जिसमें 138 किलोमीटर का हिस्सा बस्तर से गुजरेगा। रायगढ़ के खरसिया से राजनांदगांव के परमालकसा तक नया रेल नेटवर्क बनाकर कई प्रमुख औद्योगिक केंद्रों तक कच्चे माल की आपूर्ति एवं तैयार माल की ढुलाई की प्रक्रिया आसान की जाएगी, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी।
इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए 350 से अधिक सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस की प्रक्रिया को लागू किया गया है। साथ ही 350 से अधिक नीतिगत सुधार किए गए हैं, जिनका सीधा लाभ स्टील सेक्टर में किए गए निवेशकों को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीन एनर्जी को अपनाने वाले औद्योगिक संस्थानों को विशेष अनुदान दिया जाएगा। श्री साय ने राज्य में ग्रीन स्टील उत्पादन हेतु हाइड्रोजन जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग पर प्रसन्नता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ माह पूर्व आयोजित एनर्जी समिट में छत्तीसगढ़ में लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 57 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) उत्पादन की दिशा में भी छत्तीसगढ़ तेज़ी से प्रगति कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण पर तीव्र गति से कार्य हो रहा है, और नए औद्योगिक पार्क भी स्थापित किए जा रहे हैं। निजी क्षेत्र को औद्योगिक पार्क स्थापित करने हेतु विशेष अनुदान का प्रावधान किया गया है। उन्होंने समिट में उपस्थित उद्यमियों को छत्तीसगढ़ में निवेश करने और यूनिट स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।
प्रशिक्षित जनशक्ति एवं लॉजिस्टिक नीति का लाभ उठाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के सभी विकासखंडों में स्किल इंडिया के सेंटर प्रारंभ कर दिए गए हैं, जिससे उद्योगों को प्रशिक्षित जनशक्ति की कोई कमी नहीं होगी। साथ ही उन्होंने बताया कि निवेशकों को नई लॉजिस्टिक नीति का भी लाभ मिलेगा। इस नीति के अंतर्गत ड्राय पोर्ट, इनलैंड कंटेनर डिपो आदि की स्थापना पर भी अनुदान प्रदान किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की सेंट्रल इंडिया में स्थिति होने के कारण लॉजिस्टिक के क्षेत्र में असीम संभावनाएँ हैं। एक्सप्रेसवे, रेलवे और राजमार्गों के माध्यम से देश के चारों दिशाओं में बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ स्टील सेक्टर को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने रायपुर-दुर्ग-भिलाई जैसे शहरों को शामिल कर स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में एक बड़े स्टील क्लस्टर के विकास की योजना की जानकारी भी दी।
250 से अधिक औद्योगिक संस्थान हुए समिट में शामिल
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित इस ग्रीन स्टील और माइनिंग समिट में पूर्वी भारत के पांच राज्यों – पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ – के 250 से अधिक स्टील और पावर सेक्टर से जुड़े औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उद्योगों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सीआईआई द्वारा आयोजित औद्योगिक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
समिट में सीआईआई छत्तीसगढ़ के चेयरमैन संजय जैन, को-चेयरमैन सिद्धार्थ अग्रवाल, वाइस चेयरमैन बजरंग गोयल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत एवं सचिव उद्योग रजत कुमार उपस्थित थे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय खाद्य मंत्री से की छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स को राहत देने की मांग
रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के लगभग 200 राइस मिलर्स को चावल जमा करने की अनुमति देने का आग्रह किया है।
सांसद ने पत्र में उल्लेख किया है कि देरी होने के कारण इन राइस मिलर्स का चावल संबंधित एजेंसियों द्वारा जमा नहीं किया गया और उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी मिलर्स चावल जमा करने के लिए तैयार हैं। यदि एक माह का समय देकर अनुमति दी जाए तो चावल जमा किया जा सकता है और मिलर्स को पुनः मिलिंग कार्य की अनुमति दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और यहां के मिलर्स से बैंक गारंटी ली जाती है, जिससे सरकार को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा। इन राइस मिलर्स को लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य का चावल जमा करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है कि मिलर्स को चावल जमा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ओडिशा सरकार को दी गई अनुमति की तर्ज पर छत्तीसगढ़ को भी अनुमति प्रदान की जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि इस निर्णय से 200 से अधिक राइस मिल पुनः प्रारंभ हो सकेंगे, 20,000 से अधिक लोगों का रोजगार सुरक्षित होगा और सरकार को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।


मुख्यमंत्री ने नारायणपुर की बेटियों से जुड़ी घटना पर जताई गंभीर चिंता, कहा- “महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि, कानून करेगा निष्पक्ष कार्यवाही”
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर की तीन बेटियों से संबंधित घटना पर गंभीर चिंता प्रकट की है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब इन बेटियों को नर्सिंग ट्रेनिंग और जॉब दिलाने का प्रलोभन देकर दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो ननों के माध्यम से आगरा ले जाया जा रहा था।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मतांतरण की आशंका व्यक्त की जा रही है, जो महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है और यह न्यायालयीन प्रक्रिया में है। सरकार पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है, तथा कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ एक शांतिप्रिय और समावेशी प्रदेश है जहाँ सभी धर्म और समुदाय के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। हमारी बस्तर की बेटियों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रूप देना दुर्भाग्यजनक है। उन्होंने कहा की कि इस प्रकार की घटनाओं को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए, विशेषकर जब बात हमारी बस्तर की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ी हो।
बीजेपी ने राज्य के 3 जिलों में नई कार्यकारिणी का किया ऐलान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने प्रदेश के 3 जिलों- बालोद, गरियाबंद और दंतेवाड़ा में नई कार्यकारिणी का ऐलान किया है। यह नियुक्तियां प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव, प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय और संबंधित जिलाध्यक्षों के अनुमोदन के पश्चात की गई हैं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य जिला स्तर पर संगठन को अधिक सक्रिय, उत्तरदायी और जनसेवी स्वरूप में सशक्त करना है।
जानिए किसे मिली कहां की कमान
गरियाबंद

बालोद

दंतेवाड़ा़

ग्रीन उद्यम की परिकल्पना को साकार करने साय सरकार दे रही विशेष पैकेज, CII द्वारा आयोजित ग्रीन स्टील व माइनिंग समिट में देशभर से आए उद्योगपतियों से हुआ संवाद
रायपुर। सीआईआई (Confederation of Indian Industry) द्वारा आयोजित “ग्रीन स्टील व माइनिंग समिट 2025” प्रदेश के वाणिज्य व उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सम्मिलित हुए। देश भर से आए उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में 1 नवंबर, 2024 से राज्य एवं देश की श्रेष्ठ “औद्योगिक विकास नीति 2024-30” को लागू किया गया है। खनिज संसाधन के उत्पादन में देश के सर्वोत्तम राज्य, विद्युत उत्पादन में नंबर एक, एवं प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में हर सेक्टर के उद्योग निवेश करने रुचि ले रहे।
मंत्री देवांगन ने कहा कि पारंपरिक स्टील के निर्माण में में बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन होता है, जो कि जलवायु के लिए हानिकारक है। इसलिए यह आवश्यक है कि इसके उत्सर्जन को कम करने के उपायों पर गंभीरता से विचार किया जाकर उत्सर्जन कम किया जावे ताकि आने वाली पीढ़ी को हम एक स्वच्छ और सुंदर रहने योग्य घरती सौंपें। हमारी नवीन औद्योगिक नीति में पहली बार “ग्रीन उद्यम” की परिकल्पना को साकार करने के लिए पर्यावरण संरक्षण उपायों को अपनाने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन इनवायरमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान), जल एवं उर्जा दक्षता (एनर्जी ऑडिट) व्यय प्रतिपूर्ति, गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं ग्रीन हाइड्रोजन / कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य की नयी “औद्यागिक विकास नीति 2024-30” में उद्योगों की नवीन तकनीक को अपनाने हेतु प्रोत्साहित कियाजा रहा है। यदि स्टील उद्योगों द्वारा इस दिशा में कार्य किया जाता है तो राज्य शासन की ओर से मदद की जाएगी। श्री देवांगन ने कहा की राज्य के आयरन ओर भंडार बस्तर क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन के द्वारा कोर-सेक्टर के स्टील इकाईयों तथा अन्य कोर सेक्टर की इकाईयों को पात्रतानुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त 50 प्रतिशत तक आयरन ओर रायल्टी तथा 100 प्रतिशत कोल पर रायल्टी एवं राज्य को प्राप्त होने वाले सेस की प्रतिपूर्ति 150 प्रतिशत तक वर्ष तक किये जाने का प्रावधान भी किया गया है।
इसके अलावा राज्य की नीति में नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति ,विद्युत शुल्क छूट, स्टॉम्प शुल्क छूट, पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति, डायर्वशन शुल्क छूट, जल व्यय प्रतिपूर्ति, रॉयल्टी प्रतिपूर्ति, रोजगार व्यय अनुदान, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रशिक्षण व्यय प्रतिपूर्ति एवं 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाले / 1000 व्यक्तियों को रोजगार देने वालों के लिए बी-स्पोक योजना का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम में सचिव उद्योग रजत कुमार, सीआईआई के ईस्टन रीजन के चेयरमैन शास्वत गोयेंका, सिद्धार्थ अग्रवाल, समेत अन्य प्रमुख उद्योगपति उपस्थित रहे।
राज्य सरकार ने 2023 बैच के इन अफसरों का पदस्थापना आदेश किया जारी
रायपुर। राज्य सरकार ने 2023 बैच के ट्रेनी IAS अफसरों को पोस्टिंग दी है। 2023 बैच के इन अफसरों को छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में एसडीएम बनाया गया है।
देखिये लिस्ट-
ट्रेलर ने बाइक सवार 3 दोस्तों को कुचला, 2 की मौत 1 घायल
रायगढ़। रायगढ़ जिले में तेज रफ्तार ट्रेलर ने बाइक सवार तीन दोस्तों को कुचल दिया। इस हादस में दो युवकों की जहां मौके पर ही मौत हो गयी, वहीं एक युवक घायल है। बताया जा रहा है हादसे के शिकार तीनों युवक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से कोसमनारा स्थित बाबाधाम दर्शन के लिए निकले थे, तभी हादसे का शिकार हो गये। उधर इस दुर्घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया।
सड़क दुर्घटना का ये मामला रायगढ़ के जूटमिल थाना क्षेत्र का है। यह भीषण सड़क हादसा रविवार की देर रात घटित हुआ। बताया जा रहा है जनक साहू, भरत यादव और तोषन चौहान बाइक से कोसमनारा स्थित बाबाधाम दर्शन के लिए बाइक से निकले थे। तीनों दोस्त एक ही बाइक पर सवार होकर अमलीभौना बाईपास रोड पहुंचे थे।
इसी दौरान सामने से आ रही तेज रफ्तार ट्रेलर के चालक ने बाइक को चपेट में लेकर टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार जनक और भरत ट्रेलर के पिछले पहिये के नीचे आ गए। जिससे भरत की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि जनक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं तीसरा साथी तोषन गंभीर रूप से घायल हो गया। इस दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायल और शवों को जिला अस्पताल भिजवाया गया। उधर इस घटना को अंजाम देने वाला ट्रेलर का चालक मौके से फरार हो गया। जूटमिल पुलिस ने ट्रेलर के चालक के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है, जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा पत्र
रायपुर। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और कथित उत्पीड़न को लेकर मामला गरमाता जा रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में केसी वेणुगोपाल ने लिखा है कि यह घटना अत्यंत चौंकाने वाली और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजरंग दल के सदस्यों ने दुर्ग स्टेशन पर दो ननों और एक युवक को अवैध रूप से रोका, झूठे आरोप लगाए और उन्हें हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई की।
वेणुगोपाल के मुताबिक, तीन लड़कियों को लेकर युवक कानूनी रूप से वैध रोजगार के उद्देश्य से यात्रा कर रहा था। बावजूद इसके, उन्हें जबरन रोका गया और पूछताछ के नाम पर उत्पीड़न हुआ, जो कि देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने और नागरिक अधिकारों पर हमला है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस मामले में शामिल बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और अन्य जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भीड़ द्वारा न्याय, धमकी और सांप्रदायिक निशाना बनाने जैसी घटनाओं को कोई समर्थन नहीं मिलेगा।
यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है, जिस पर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस पत्र और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।


मुख्यमंत्री ने किया ‘गौ विज्ञान परीक्षा अभियान 2025’ का शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित ‘गौ विज्ञान परीक्षा अभियान 2025’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अभियान के पोस्टर का अनावरण किया और समिति के सदस्यों को इस पुण्य कार्य के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो न केवल आध्यात्मिक लाभ प्रदान करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे अभियान में गौसेवा के साथ-साथ घर-घर किचन गार्डन निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है, जो जनस्वास्थ्य सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
इस अवसर पर समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी ने मुख्यमंत्री को अभियान की रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा आगामी 4 नवम्बर 2025 को प्रदेशभर में गौ विज्ञान परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा का उद्देश्य जनसामान्य में गौवंश के महत्व, पारिस्थितिक तंत्र में उसकी भूमिका, ग्लोबल वार्मिंग की रोकथाम में योगदान तथा पंचगव्य के वैज्ञानिक पक्षों के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।
श्री राठी ने बताया कि यह परीक्षा माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक एवं महाविद्यालय—इन तीन श्रेणियों में आयोजित की जाएगी। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को ₹51,000 नगद, द्वितीय स्थान हेतु ₹31,000 तथा तृतीय स्थान हेतु ₹21,000 नगद पुरस्कार एवं गौमय उत्पादों का किट प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार जिला स्तरीय परीक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः ₹3,100, ₹2,100 एवं ₹1,100 नगद पुरस्कार के साथ गौ उत्पाद किट प्रदान किए जाएँगे।
परीक्षा में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को गौ विज्ञान ग्रंथ एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी अपनी संस्था के प्राचार्य अथवा गौ विज्ञान प्रभारी से संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष इस परीक्षा में प्रदेशभर से एक लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था। इस वर्ष समिति ने एक लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस अवसर पर प्रांत संयोजक अन्ना सफारे, प्रांत उप प्रमुख मनोज पांडेय, गौ ग्रंथ संपादक डॉ. अमित पांडेय सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
महादेव की शरण में विष्णु सरकार
हर-हर महादेव से गूंज उठा भोरमदेव: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर हजारों कांवड़ियों का किया भव्य स्वागत।
रायपुर। सावन मास के तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ के प्राचीन, धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के तीर्थ स्थल बाबा भोरमदेव मंदिर में भक्ति और श्रद्धा की गूंज उस समय चरम पर पहुँच गई जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हजारों कांवड़ियों और शिवभक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस शुभ अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्रीद्वय विजय शर्मा और अरुण साव उपस्थित थे।
यह लगातार दूसरा वर्ष है जब मुख्यमंत्री स्वयं श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पुष्पवर्षा कर रहे हैं। पुष्पवर्षा के पश्चात् मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा भोरमदेव मंदिर पहुंचकर मंत्रोच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया तथा प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर परिसर में उपस्थित कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका हालचाल जाना और पूरे आत्मीय भाव से अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सावन मास के तीसरे सोमवार को बाबा भोरमदेव की पावन धरती पर शिवभक्तों के साथ जुड़ना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है। हजारों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु यहां पहुंचे हैं—यह हमारी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अमरकंटक से 151 किलोमीटर पदयात्रा कर भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाली पंडरिया विधायक भावना बोहरा को भगवा वस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत भोरमदेव कॉरिडोर विकास के लिए 146 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना न केवल मंदिर परिसर का कायाकल्प करेगी, बल्कि मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा से लेकर सरोदा जलाशय तक एक समग्र धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश के अनूपपुर में 5 एकड़ भूमि आबंटन की प्रक्रिया जारी है, जहाँ एक भव्य श्रद्धालु भवन का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं को सावन मास की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा इस पुण्य अवसर की महत्ता को और भी अभूतपूर्व बना गई है।
पौराणिक परंपरा का गौरव: भक्ति से सराबोर हुआ बाबा भोरमदेव परिसर
सावन मास में भगवान शिव—देवों के देव—के जलाभिषेक की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर ग्राम चौरा में स्थित 11वीं शताब्दी का यह भोरमदेव मंदिर ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। श्रावण मास में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, मुंगेली, बेमेतरा, खैरागढ़, राजनांदगांव सहित मध्यप्रदेश के अमरकंटक से हजारों श्रद्धालु पदयात्रा कर बाबा भोरमदेव, बूढ़ा महादेव और डोंगरिया के प्राचीन जलेश्वर शिवलिंग में जलाभिषेक करने आते हैं। श्रद्धालु माँ नर्मदा से जल भरकर नंगे पाँव और भगवा वस्त्रों में 150 किलोमीटर से अधिक की दुर्गम यात्रा कर “बोल बम” के जयघोष और भजनों के साथ भोरमदेव, जलेश्वर महादेव और पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर पहुँचते हैं।
दहेज प्रताड़ना मामले में उच्च न्यायालय का बड़ा निर्णय, 11 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR किया रद्द, पति के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के 12 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 11 आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और न्यायालयीन कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोप सामान्य, अस्पष्ट और ठोस साक्ष्यों से रहित है, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। हालांकि पीड़िता के पति के खिलाफ प्रकरण जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
दरअसल, महाराष्ट्र वर्धा में रहने वाले निलीमा कवड़े की शादी वर्ष 2010 में अमोद आनंद सोनवाने से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद घरेलू हिंसा के कारण निलीमा अपने मायके लौट गई थी और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्रवाई कर भरण-पोषण का आदेश भी प्राप्त कर चुकी थी। करीब 12 साल बाद वर्ष 2019 में निलीमा ने दुर्ग के नंदिनी नगर थाना में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें अपने पति सहित 11 परिजनों पर दहेज प्रताड़ना, अश्लीलता और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि एफआईआर में लगाए गए आरोप बेहद सामान्य है। किसी भी आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य या घटना की तारीख और स्थान का उल्लेख नहीं है। आरोप लगाए गए कई व्यक्ति न केवल पीड़िता के दूर के रिश्तेदार हैं बल्कि उन्होंने कभी उसके साथ रहन-सहन भी नहीं किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि भजनलाल केस समेत सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसलों में इस प्रकार के झूठे मामलों को रद्द करने के स्पष्ट निर्देश हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने आदेश में कहा कि 11 आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है। एफआईआर, चालान और न्यायालयीन कार्रवाई का जारी रहना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने कहा कि केवल पति अमोद आनंद सोनवाने के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में बड़े एक्शन की तैयारी, 21 अधिकारी-कर्मचारी जांच में गैरहाजिर, प्रशासन ने भेजा विभागीय कार्रवाई का पत्र
मुंगेली। छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवा प्राप्त करने वाले 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देश पर चल रही जांच में अब तक 21 कर्मचारी निर्धारित मेडिकल जांच में गैरहाजिर रहे हैं। इसके चलते प्रशासन ने उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ और अन्य स्रोतों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह उजागर हुआ कि कुछ सरकारी कर्मचारी फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी में शामिल हुए हैं। इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर कुंदन कुमार ने 27 संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की पुनः चिकित्सकीय जांच के आदेश दिए थे।
सभी को 18 जुलाई 2025 को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में संभागीय राज्य मेडिकल बोर्ड के समक्ष भेषज (मेडिकल) जांच के लिए उपस्थित होना था, लेकिन कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।
अब तक की स्थिति:
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4 अधिकारी-कर्मचारी जांच प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं।
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2 का स्थानांतरण अन्य जिलों में हो चुका है।
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20 कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका दायर की है।
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21 कर्मचारी-अधिकारी अब तक जांच में अनुपस्थित हैं।
प्रशासन ने दिखाई सख्ती
अपर कलेक्टर जी.एल. यादव ने जानकारी दी कि अनुपस्थित रहने वालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि “जांच निष्पक्ष, विधिसम्मत और संवेदनशील ढंग से की जा रही है। दिव्यांग सेवा संघ से भी इस संबंध में चर्चा की जा रही है, ताकि किसी वास्तविक दिव्यांग के साथ अन्याय न हो।”
खाद की किल्लत से परेशान 14 गांवों के किसानों ने NH-930 पर किया चक्का जाम
बालोद। बालोद जिले में खाद की किल्लत से परेशान किसानों का गुस्सा अब सड़क पर नजर आने लगा है। जिले के 14 गांवों के सैकड़ों किसान और ग्रामीण सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर कुसुमकसा गांव के पास धरने पर बैठ गए और चक्का जाम कर दिया। आंदोलन के चलते राजनांदगांव-बालोद-भानुप्रतापपुर मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है।
खेत सूने, गोदाम खाली – किसानों की पीड़ा
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वे लगातार प्रशासन से खाद की उपलब्धता की मांग कर रहे थे, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब धान की बोवाई का समय निकलता जा रहा है, और खाद नहीं मिलने से फसल बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में मजबूर होकर किसानों ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।
नारों से गूंजा हाईवे
किसानों ने धरना स्थल पर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। “खाद दो, वरना रास्ता बंद रहेगा” जैसे नारों से हाईवे गूंज उठा। आंदोलन की वजह से NH-930 पर दोनों ओर सैकड़ों गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन मौके पर, समाधान की कोशिश
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। किसानों को शांत करने और समस्या के समाधान का आश्वासन देने की कोशिश की जा रही है। अधिकारी किसानों से संवाद कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द रास्ता खुलवाया जा सके और स्थिति सामान्य हो।
राजधानी रायपुर में 1 साल में बनेंगे 7 नए ओवरब्रिज : ट्रैफिक समस्या-हादसों में आएगी कमी, मंत्री अरुण साव ने कहा- विकास की रेखा और दिशा हैं सड़कें…
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को 7 नए ओवरब्रिज की सौगात मिलने जा रही है. 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में एक साल के भीतर लोक निर्माण विभाग इन ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा. इन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट भी मंजूर कर दिया है. ओवरब्रिज बनाने के लिए उन सड़कों की पहचान की गई है, जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम और हादसे होते हैं. पीडब्ल्यूडी ने इसी सर्वे के आधार पर तय किया गया कि किस सड़क पर नया ओवरब्रिज बनना है. नए ओवरब्रिज के निर्माण से ट्रैफिक जाम-हादसों में कमी आएगी और हर सड़क पर जनता के 20 मिनट बचेंगे.
लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुताबिक, राजधानी में सबसे पहले ओवरब्रिज कालीबाड़ी चौक से पुलिस लाइन गेट और अमलीडीह चौक, केनाल लिंकिंग रोड पर द्रोणाचार्य स्कूल के पास बनेगा. अधिकारियों की योजना है कि इस ब्रिज के साथ ही गुढ़ियारी स्थित शुक्रवारी बाजार से स्टेशन की तरफ आने वाली सड़क पर भी ओवरब्रिज बनाने पर काम किया जा रहा है. इसके कारण इस इलाके को सीधे एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जा सकेगा. लोक निर्माण के अफसरों का दावा है कि नए ओवरब्रिज के लिए मुख्यालय से भी सहमति बन गई है. इस वजह से इन सभी ओवरब्रिज का निर्माण होना तय है.
7 ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि हमारी सरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लगातार विकास के कार्य कर रही है. इस वर्ष को हमने अटल निर्माण वर्ष घोषित किया है. निर्माण के माध्यम से विकास और विकास के माध्यम से लोगों के आवागमन को सुगम और सरल बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सड़के केवल आवागमन का साधन नहीं होती हैं. यह विकास की रेखा और दिशा बनती है.
कहां-कहां बनाए जाएंगे नए ओवरब्रिज
कालीबाड़ी से पुलिस लाइन गेट तक
कालीबाड़ी चौक से पुलिस लाइन गेट तक 50 करोड़ रुपये की लागत से डेढ़ किलोमीटर लंबा ओवरब्रिज बनाया जाएगा. इस परियोजना को बजट में स्वीकृति मिल चुकी है. इस मार्ग पर सुबह 9:30 से 11:30 और शाम 5:30 से 7:30 बजे तक भारी ट्रैफिक जाम रहता है. यहां से प्रतिदिन 35 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं. सर्वेक्षण कार्य पूर्ण हो चुका है और जल्द ही बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा.
फुंडहर चौक से टेमरी तक
फुंडहर चौक पर ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए 30 करोड़ रुपये की लागत से एक फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है. यह फ्लाईओवर लगभग 700 मीटर लंबा और 17 मीटर चौड़ा होगा. इसके बन जाने से एयरपोर्ट की ओर जाने वाले यात्रियों को फुंडहर चौक पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी, और उनका सफर लगभग 10 मिनट कम हो सकेगा. यहां प्रतिदिन 25 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं. इस परियोजना के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा चुका है.
अमलीडीह चौक से द्रोणाचार्य स्कूल तक
केनाल लिंकिंग रोड के ऊपर अमलीडीह चौक से द्रोणाचार्य स्कूल तक 40 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज का निर्माण होगा. एमएमआई चौक से द्रोणाचार्य चौक तक इसका निर्माण किया जाएगा. यहां सुबह-शाम जाम लग रहा है. लगभग 25 हजार गाड़ियां रोजाना गुजरती हैं. प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया गया है. बजट के लिए डीपीआर बना है.
गुढ़ियारी-एक्सप्रेस-वे को जोड़ने फ्लाईओवर
गुढ़ियारी स्थित शुक्रवारी बाजार से एक्सप्रेस-वे को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. पीडब्ल्यूडी यहां एक फ्लाईओवर के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है, जो सीधे एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इस परियोजना से ट्रैफिक की भीड़भाड़ से राहत मिलेगी, क्योंकि यहां से प्रतिदिन लगभग 30 हजार वाहन गुजरते हैं. फिलहाल फ्लाईओवर के लिए प्रारंभिक योजना तैयार की जा रही है.
इन क्षेत्रों में भी होगा ओवरब्रिज का निर्माण
मोवा : खालसा स्कूल से मोवा रिलायंस मार्ट तक ओवरब्रिज बनाने पर काम चल रहा है. इसकी अनुमानित लागत करीब 135 करोड़ है. अभी ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा है.
भनपुरी चौक : भनपुरी चौक पर ओवरब्रिज बनेगा. इस पर करीब 40 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. रोजाना 50 हजार से ज्यादा वाहनों को यहां रुकना नहीं पड़ेगा.
खारुन नदी : यह ओवरब्रिज रायपुर और पाटन को जोड़ेगा. इसकी मंजूरी के लिए प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया है. इसकी लागत करीब 60 करोड़ है. इससे रोजाना औसतन 80 हजार वाहनों का सफर आसान होगा.
प्रार्थना की आड़ में चल रहा था धर्म परिवर्तन का खेल, आरोपी के खिलाफ सिटी कोतवाली में FIR दर्ज
मुंगेली। जिले के मंजगांव पारा तिलक वार्ड क्रमांक 17 में धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भजन-कीर्तन के बहाने लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया जा रहा था। पुलिस ने पूरे मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, बद्री साहू, निवासी सारंगपुर, जिला कबीरधाम, स्थानीय निवासी सुनील कुमार लाल के घर में हिंदू समाज के लोगों को इकट्ठा कर प्रार्थना का आयोजन कर रहा था। लेकिन यह आयोजन महज दिखावा था। दरअसल, बद्री साहू प्रार्थना की आड़ में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार और धर्म परिवर्तन की कोशिश कर रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, बद्री साहू बार-बार यह कहता सुना गया—
“तुम्हारे देवी-देवता कुछ नहीं कर सकते, सब बेकार हैं। यीशु के नाम में शक्ति है, चंगाई मिलेगी, कोई दिक्कत नहीं होगी। प्रभु यीशु ही कल्याण का मार्ग है।”


