रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान उपार्जन को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया तुंहर टोकन मोबाइल ऐप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। धान खरीदी तिहार के बीच इस डिजिटल नवाचार ने उपार्जन केंद्रों में लगने वाली भीड़, समय की बर्बादी और पारंपरिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में लागू की गई इस व्यवस्था से किसान अब अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में धान विक्रय हेतु टोकन निकाल पा रहे हैं और निर्धारित समय पर आसानी से केंद्र पहुंचकर धान बेच रहे हैं।
शुक्रवार को 52 किसानों ने मोबाइल से काटा टोकन
अम्बिकापुर जिले के उपार्जन केंद्रों में शुक्रवार को 52 किसानों ने तुंहर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे धान का टोकन काटा। बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि डिजिटल सुविधा ने किसानों का विश्वास तेजी से जीता है।
अम्बिकापुर विकासखंड के आदिमजाति सेवा सहकारी समिति मेड्राकला में पहुंचने वाले ग्राम भिट्ठीकला के कृषक श्याम राजवाड़े और मिलन राम ने बताया कि मोबाइल ऐप से टोकन काटने के बाद केंद्र में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
श्याम राजवाड़े ने कहा कि उन्होंने 26 क्विंटल धान का टोकन कुछ ही मिनटों में घर बैठे निकाल लिया। पूर्व में केंद्र में जाकर टोकन लेने में समय और श्रम दोनों लगते थे, पर अब आते ही बारदाना मिला और धान की तौल भी तत्काल हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने के निर्णय की सराहना की।
इसी तरह किसान मिलन राम ने बताया कि उन्होंने 62 क्विंटल धान का टोकन मोबाइल ऐप से काटा। बार-बार केंद्र नहीं आना पड़ा और पहुंचते ही बारदाना व तौल की प्रक्रिया बिना किसी बाधा पूरी हुई। उन्होंने कहा कि इस बार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह किसान-मित्र साबित हो रही है।
डिजिटल नवाचार से बढ़ी पारदर्शिता और सुविधा
तुंहर टोकन ऐप के जरिए किसानों को अब लंबी लाइनों से मुक्ति, समय और श्रम की बचत,टोकन प्रक्रिया में पारदर्शिता,भीड़-भाड़ और अव्यवस्था में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। किसानों की संतुष्टि यह साबित करती है कि राज्य सरकार की यह डिजिटल पहल सफल रही है और धान विक्रय को अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद बनाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।
गरियाबंद। नगर पालिका गरियाबंद में पदस्थ इंजीनियर संजय मोटवानी को एसीबी की टीम ने 30 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। ठेकेदार अजय गायकवाड़ ने रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी से की थी, जिस पर एसबी की टीम ने ट्रैप प्लान किया और रिश्वत लेते इंजीनियर को रंगे हाथों धर दबोचा। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
ठेकदार ने शिकायत में बताया था कि उसके निर्माण कार्य के बिल पास करने के एवज में इंजीनियर संजय मोटवानी ने एक लाख रुपए की मांग की थी। तय समय में इंजीनियर ने आज ठेकेदार को रकम लेने साईं गार्डन के पास बुलाया था। अपने कार के डेस्क बोर्ड में आरोपी इंजीनियर ने जैसे ही रकम रखवाया। पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। फिलहाल टीम उसे पालिका लेकर गई है। एसबी की टीम पड़ताल कर रही है कि आखिर किन-किन काम के एवज में रिश्वत ली गई थी।
जगदलपुर। बस्तर के सबसे चर्चित नक्सली कमांडर मांडवी हिड़मा की मौत अब एक नए विवाद में बदल गई है। नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने प्रेस नोट जारी कर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को ‘फर्जी मुठभेड़’ बताते हुए 23 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है।
अभय का दावा है कि हिड़मा इलाज के लिए विजयवाड़ा गया था, जहां उसे पकड़कर सरेंडर कराने की कोशिश की गई। सुरक्षा बल हिड़मा को जीवित सरेंडर कराना चाहते थे, लेकिन असफल होने पर उसे और उसके साथ मौजूद 6 अन्य नक्सलियों को मार दिया गया। नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी का कहना है कि हिड़मा की मौत सिर्फ एक ऑपरेशन का हिस्सा नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की एक बड़ी रणनीति है। प्रेस नोट में नक्सलियों ने पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगाए हैं और जनता से ‘विरोध दिवस’ में शामिल होने की अपील की है।
आरोप पूरी तरह राजनीतिक और भ्रम फैलाने वाला : सुरक्षा एजेंसी
दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक और भ्रम फैलाने वाला बता रही है। हिड़मा की मौत के बाद बस्तर में पहले ही सुरक्षा हाई अलर्ट पर है। अब प्रतिरोध दिवस की घोषणा के बाद संवेदनशील जिलों सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। नक्सली नेतृत्व इस घटना को संगठन के विरुद्ध ‘हमला’ बताते हुए अपनी रणनीति को नए सिरे से गढ़ने की बात कह रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि जिस ऑपरेशन में हिड़मा ढेर हुआ, वह पूरी तरह वैधानिक और प्रमाणिक कार्रवाई थी।
रायपुर। शासन ने अस्पताल में इलाज के दौरान एचआईवी मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए गाइडलाइन जारी की है. यह गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दी गई है. अब एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर या नियंत्रण अधिकारी के पास ही रहेगी. यही नहीं फाइल, रजिस्टर, कंप्यूटर रिकार्ड लेवल पर अलग से कोई चिह्न नहीं बनाया जाएगा.
भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की 2018 में जारी अधिसूचना के अनुसार एचआईवी, एड्स से ग्रसित लोगों की चिकित्सीय, व्यक्तिगत एवं पहचान संबंधी सभी जानकारी पूर्णत: गोपनीय रखी जानी है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया ने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को गाइडलाइन जारी कर पालन करने को कहा है.
सर्जरी या डिलीवरी के समय ऑपरेशन करने वाली टीम को सुरक्षा के बतौर नाम उजागर किए बिना मरीज की जानकारी दी जा सकती है. यही नहीं, मरीज की स्थिति की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर व जरूरी स्टाफ तक सीमित रहेगी. किसी भी परिस्थिति में मरीज की स्थिति को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित, चर्चा या प्रचारित नहीं किया जाएगा. एचआईवी-एड्स मरीजों से संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर व रिपोर्ट सुरक्षित स्थान पर रखे जाएंगे. सिर्फ अधिकृत अधिकारी की अनुमति से ही उपलब्ध कराए जाएंगे.
गोपनीयता का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. संक्रमण से बचाव के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मी यूनिवर्सल प्रकाशन का पालन करेंगे. रक्त, सुई, ब्लेड या किसी भी शारीरिक द्रव के संपर्क से बचाव के लिए डिस्पोजेबल दस्ताने, मॉस्क, एप्रन, सेफ्टी गॉगल्स आदि का इस्तेमाल किया जाए. इस्तेमाल के बाद सुइयों को निडिल डेस्ट्रोयर या शॉर्प कंटेनर में ही नष्ट किया जाए. सभी को सुई या ब्लेड का दोबारा उपयोग नहीं करने को कहा गया है. ताकि संभावित संक्रमण से बचा जा सके.
बायो मेडिकल वेस्ट नियम का पालन जरूरी
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों में सभी उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन किया जाए. साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम का पालन किया जाए. ब्लड ट्रांसफ्यूजन केवल स्क्रीन किए गए रक्त से किया जाएगा. ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम एवं ड्रेसिंग रूम में संक्रमण नियंत्रण के सभी प्रोटोकॉल लागू करें. यही नहीं इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी हर माह निरीक्षण कर जरूरी रिपोर्ट तैयार करें.
एचआईवी मदर, 2 लाख का मुआवजा
आंबेडकर अस्पताल में हाल ही में एक शिशु के बेड के सामने एचआईवी मदर का बोर्ड टांग दिया गया था. मीडिया में मामला आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अस्पताल को पीड़ित महिला को दो लाख का मुआवजा देने को कहा. कॉलेज प्रबंधन ने बिना देरी करते हुए अगले ही दिन महिला को दो लाख रुपए का चेक भी दे दिया.
रायपुर। मंत्रालय के सभी विभागों में अब आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है. प्रशासनिक कार्यकुशलता और समय की पाबंदी को मद्देनजर रखते हुए राज्य सरकार ने यह घोषणा की है. महानदी भवन के अलावा यह फैसला इंद्रावती भवन में सभी विभागों के लिए भी लागू होगा. मुख्य सचिव विकास शील की मौजूदगी में आला अफसरों के साथ हुई बैठक में नए सिस्टम का लाइव प्रदर्शन किया गया. जिसमें फेशियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली और दीवार पर लगाए गए आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का डेमो प्रस्तुतिकरण हुआ. इस प्रणाली का परीक्षण 20 नवंबर से शुरू होगा. वहीं 1 दिसंबर से मंत्रालय में इस सिस्टम के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य होगी.
मुख्य सचिव विकास शील ने 1 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि समय का पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को कड़ाई से इसका पालन करना होगा. इधर कर्मचारियों के लिए उपस्थिति दर्ज करने के दो विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं. इनमें मोबाइल एप के माध्यम से फेशियल ऑथेंटिकेशन के अलावा प्रवेश द्वारों पर लगे आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण के जरिए उपस्थिति दर्ज कराना शामिल है. दोनों प्रणालियां समानांतर रूप से संचालित होंगी. सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं. वहीं नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है. सभी कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने निर्देश दिए गए हैं कि उनके आधार और सेवा संबंधी विवरण उपस्थिति पोर्टल में सही ढंग से अपडेट हों. नई उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा.
जवाबदेह शासन व्यवस्था में अग्रसर साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का क्रियान्वयन पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. मैं अपेक्षा करता हूँ कि सभी अधिकारी और कर्मचारी पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे. ताकि हम आधुनिक, तकनीक-आधारित और जवाबदेह शासन व्यवस्था की ओर अग्रसर हो सकें.
रायपुर। आवासीय योजनाओं की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल राज्य स्तरीय आवास मेला आयोजित कर रहा है। यह मेला 23, 24 और 25 नवंबर को राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड में होगा। मेले को लेकर आज वित्त मंत्री ओपी चौधरी और हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में हाउसिंग बोर्ड सचिव अवनीश शरण भी मौजूद रहे।
आवास मेला में हाउसिंग लोन के लिए सभी प्रमुख बैंकों के स्टॉल होंगे। लोग साइट विजिट का लाभ ले सकेंगे। वास्तु शास्त्र से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी भी दी जाएगी। साथ ही नई आधुनिक तकनीक को शामिल किया गया है। मेले में कई गिफ्ट वाउचर और गिफ्ट हैम्पर भी रखे गए हैं।
हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि हमारी सरकार ने हाउसिंग बोर्ड को कर्जमुक्त किया है। पहले लोन और ब्याज को लेकर लगातार चिंताएं थीं, लेकिन अब नई पॉलिसी के माध्यम से व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा है। आवास परियोजनाएं कितनी जरूरी हैं और सरकार इस विषय को लेकर कितनी संजीदा है, यह इसी से समझा जा सकता है। मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में तेजी से काम हो रहा है। पहले आवास योजनाओं के क्राइटेरिया पूरे नहीं हो पाते थे, लेकिन अब हाउसिंग बोर्ड की योजनाओं और कार्यों की गति में स्पष्ट तेजी आई है। उन्होंने बताया कि आवास मेले का आयोजन 23, 24 और 25 नवंबर को बीटीआई ग्राउंड, शंकर नगर में आवास मेला आयोजित किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री साय करेंगे।
अनुराग सिंहदेव ने बताया कि 2 हजार 60 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना शुरू की जा रही है, जो 22 जिलों में चलेगी। हाउसिंग बोर्ड के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी परियोजना एक साथ शुरू होगी। वर्ष 2024 तक पिछले पांच सालों में हाउसिंग बोर्ड ने केवल 250 करोड़ का बिजनेस किया था, जबकि एक वर्ष हमने 600 करोड़ का बिजनेस किया है। यह सफलता इसलिए मिली है क्योंकि सरकार ने पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग की है। पहले भी मेला आयोजित होता था, लेकिन इस बार 2 हजार करोड़ की वैकेंसी के लिए भी रहेगा। लोग राशि जमा कर अपना मकान वहीं चुन सकेंगे। हाउसिंग बोर्ड के जितने भी ब्रांड पार्टनर्स हैं, उनके सभी मटेरियल और तकनीकी स्टॉल भी मेले में शामिल होंगे।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड मृतप्राय स्थिति पर था, जिसे बीजेपी सरकार ने ठीक किया। हाउसिंग बोर्ड पर 700 करोड़ रुपये का लोन पटाने का काम किया गया। जनवरी 2025 में OTS-2 लॉन्च किया गया, जिसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हमारी सरकार में अब परियोजना के लिए पहले 30 फ़ीसदी बुकिंग होना अनिवार्य किया गया है, जिसके बाद ही अब टेंडर प्रक्रिया और निर्माण का काम किया जाएगा। जहां डिमांड होगी, वहीं पर काम किया जाएगा।
रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कोपरा जलाशय को राज्य सरकार ने प्रस्तावित रामसर स्थल घोषित करने की दिशा में बड़ी पहल की है। प्राकृतिक और मानव निर्मित विशेषताओं से युक्त यह जलाशय पूरे क्षेत्र के लिए जलसंसाधन, सिंचाई और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान
वन मंत्री श्री कश्यप ने उम्मीद जताई है कि कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। गौरतलब है कि कोपरा जलाशय मुख्य रूप से वर्षा जल और आसपास के छोटे नालों से भरता है। यह जलाशय स्थानीय ग्रामीणों की जल आवश्यकताओं को पूरा करता है और किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। जलाशय के आसपास की भूमि अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है, जिससे क्षेत्र के कई गाँवों और छोटे कस्बों की कृषि पूरी तरह इस जलाशय पर निर्भर है।
जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है यहाँ की
इसके अलावा यह क्षेत्र वर्षभर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों, जलचर जीवों और वनस्पतियों का सुरक्षित आवास बना रहता है। खासकर प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या यहाँ हर वर्ष दर्ज की जाती है। जलाशय में मछलियाँ, जलीय पौधे, उभयचर, सरीसृप और अनेक प्रकार के कीट-पतंगे बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इसकी जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है।
दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए उपयुक्त स्थल
राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के अनुसार कोपरा जलाशय रिवर टर्न, कॉमन पोचार्ड और इजिप्शियन वल्चर जैसे दुर्लभ व महत्वपूर्ण पक्षियों के संरक्षण के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह जलाशय रामसर मानदंड संख्या 02, 03 और 05 की पूर्णता करता है, जो इसे एक उत्कृष्ट वेटलैंड इकोसिस्टम का उदाहरण साबित करता है।
स्वीकृति मिलने पर पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा
इसी महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे रामसर स्थल घोषित करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण मिलेगा और इसका वैज्ञानिक, पर्यावरणीय तथा पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा।
ग्रामीण आजीविका के विकास को मजबूत करने की तैयारी
सरकारी योजनाओं के तहत इस क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका विकास से जुड़ी गतिविधियों को और मजबूत करने की तैयारी है, ताकि स्थानीय आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक भर्ती घोटाले में ACB-EOW की टीम ने दो अफसरों को अरेस्ट किया है। आपको बता दे एसीबी-ईओडब्लू की टीम ने छत्तीसगढ़ में दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में 19 ठिकानों में छापामार कार्रवाई की थी। पटवारी से आरआई बने अधिकारियों के ठिकानों पर की गयी इस छापेमारी के बाद टीम ने दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर पेपर लीक कराकर अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्न पत्र दे दिये थे।
जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार अधिकारियों में रायपुर के आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय के सहायक सांख्यिकी अधिकारी वीरेंद्र जाटव और उप आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय के सहायक सांख्यिकी अधिकारी हेमंत कौशिक शामिल है। आपको बता दें कि 19 नवंबर की तड़के ACB-EOWकी संयुक्त टीम ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत 7 जिलों में एक साथ 19 ठिकानों पर छापा मारा था। पटवारी से आरआई भर्ती में अनियमित चयन और अवैध संपत्ति अर्जित करने की शिकायतों पर टीम ने अपराध दर्ज कर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के घर पर रेड कर अहम साक्ष्य जुटाये थे।
दोनों अफसरों के खिलाफ अहम सबूत मिलने का दावा
ACB-EOW की ओर से बताया गया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं। 2024 में पटवारी से आरआई बनने के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें दोनों ने खुद और अपने सीनियर अधिकारियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह धोखाधड़ी की। इस भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत सरकार को मिली थी। इसके बाद से ही ACB-EOW की टीम जानकारी जुटा रही थी। इस मामले में जांच एजेंसी ने अपराध दर्ज किया है।
परीक्षा संचालन समिति से जुड़े प्रश्न पत्र छपाई और वितरण में लगे अधिकारी-कर्मचारी और प्रमोशन दिलाने के लिए लाइजनिंग करने वाले राजस्व अधिकारियों के घरों में छापामार कार्रवाई कर जांच की गई। इस जांच में टीम ने डिजिटल साक्ष्य, लेन-देन से जुड़े एग्रीमेंट और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किये हैं। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी जब्त किये गये इन सारे दस्तावेजों की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण द्वारा राज्य में वेटलैंड संरक्षण के लिए “वेटलैंड मित्र” बनाने का अभियान शुरू किया गया है। वेटलैंड मित्र स्थानीय आद्रभूमियों के संरक्षण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पंजीकृत वेटलैंड मित्रों को वेटलैंड संरक्षण की मिलेगी जानकारी
वेटलैंड मित्र बनने के लिए इच्छुक व्यक्ति QR कोड स्कैन करके निर्धारित फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरकर अपने निकटतम आद्रभूमि क्षेत्र से जुड़ सकते हैं। पंजीकृत वेटलैंड मित्रों को वेटलैंड संरक्षण से संबंधित जानकारी, प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे वेटलैंड क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों की पहचान, अवैध गतिविधियों की सूचना देने तथा स्थानीय समुदाय तक आवश्यक जानकारी पहुँचाने में सहयोग करेंगे।
500 से अधिक वेटलैंड मित्र पंजीकृत
उल्लेखनीय है कि इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पूरे राज्य में अब तक 500 से अधिक वेटलैंड मित्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। यह संख्या न केवल जन-जागरूकता के बढ़ते स्तर को दर्शाती है, बल्कि आद्रभूमि संरक्षण के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करती है। वेटलैंड मित्र स्थानीय स्तर पर आद्रभूमि के स्वास्थ्य, संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी तथा वैज्ञानिक जानकारी के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कोरबा जिले में लगभग 200 वेटलैंड मित्र अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रूप से संरक्षण कार्यों में सहयोग कर रहे हैं।
वेटलैंड मित्र आम जनता के बीच एक प्रभावी सेतु का कर रहे हैं कार्य
राज्य में जागरूक और समर्पित वेटलैंड मित्रों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया गया है, जो विभाग और आम जनता के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है। इनके सहयोग से आद्रभूमि के जैव-विविधता मूल्य, पारिस्थितिक महत्व और सतत उपयोग की अवधारणाओं का व्यापक प्रसार हो रहा है।
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की हो रही है रक्षा
वेटलैंड मित्र अभियान ने समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देते हुए राज्य की दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान किया है। यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की रक्षा कर रही है, बल्कि जनता और प्रशासन को वेटलैंड संरक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जनहितकारी सोच एवं मंशानुरूप परिवहन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर ब्लॉक में ग्रामीण बस सेवा के तहत नई बसों का शुभारंभ किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है कराना
उल्लेखनीय है कि परिवहन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर, सुगम और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का लक्ष्य लगातार साकार हो रहा है। उनकी प्राथमिकता हमेशा से अंतिम व्यक्ति तक शासकीय सुविधाएं पहुँचाना रही है। ग्रामीण बस सेवा इसी संकल्प का प्रभावी उदाहरण है, जिसने गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है।
विद्यार्थियों, महिलाओं और आमजनों को बड़ी सुविधा
नई बस सेवा शुरू होने से भरतपुर एवं आसपास के गांवों के विद्यार्थियों, महिलाओं, मजदूरों तथा आम लोगों को अब नियमित और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सकेगी। अब विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज पहुँचने में आसानी होगी, महिलाएं बिना परेशानी अस्पताल, बाज़ार और आवश्यक कामों के लिए अपने गंतव्य तक सुगमता से यात्रा कर सकेंगी, वहीं मजदूर वर्ग को रोजगार स्थलों तक पहुंचने में समय और सुविधा दोनों मिलेंगी।
इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में बसों को हरी झंडी दिखाकर उनके निर्धारित मार्गों पर रवाना किया गया। बसों के प्रस्थान के साथ ही ग्रामीणों में उत्साह और प्रसन्नता का माहौल रहा। लोगों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सेवा उनकी वास्तविक जरूरतों को पूरा करती है।
ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
यह बस सेवा केवल परिवहन व्यवस्था का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, गांव और शहर के बीच संपर्क बढ़ेगा तथा विकास की गति और तेज होगी। मुख्यमंत्री श्री साय की प्रतिबद्धता और प्रशासनिक टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि ग्रामीण क्षेत्र अब सुविधाओं और विकास के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।
इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष माया प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष हीरालाल मौर्य, जनपद सदस्य सुखलाल मरावी, नगर पंचायत अध्यक्ष कौशल पटेल, उपाध्यक्ष निलेश मिश्रा, जनपद सीईओ, परिवहन अधिकारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
रायपुर। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में एक प्रेरक एवं गरिमामय क्षण देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर आर्ट में निर्मित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह प्रतिमा जनजातीय विरासत, शौर्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक मानी जाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा भेंट की गई यह मूर्ति भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान और जनजातीय समाज की गौरवपूर्ण परंपराओं को सम्मानपूर्वक स्मरण कराने वाला एक सशक्त प्रतीक है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दर्शकों ने इस भावनात्मक क्षण का गर्मजोशी से स्वागत किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, कला, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की विरासत, संस्कृति और अमूल्य योगदान को संजोने, संरक्षित करने और सशक्त रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा संकल्प है कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया जाए, ताकि उनकी गौरवशाली पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बने।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक बार पुनः धर्मनगरी चंद्रखुरी से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर माँ कौशल्या की पावन जन्मभूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की गरिमा एवं पारंपरिक स्वरूपानुकूल भव्य मूर्ति की स्थापना की मांग की है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में लगाई गई मूर्ति का स्वरूप प्रभु श्री राम की पारंपरिक छवि से मेल नहीं खाता था, जिसके कारण व्यापक जन-विरोध उत्पन्न हुआ। श्री अग्रवाल ने न केवल इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर बार-बार उठाया, बल्कि विधानसभा में भी दृढ़ता के साथ आवाज बुलंद करते हुए प्रभु श्री राम की गरिमा संगत नई मूर्ति स्थापना की मांग को मजबूती से रखा था।
सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद भी यह मांग लगातार उठती रही, किंतु लगभग दो वर्षों के बाद भी मूर्ति परिवर्तन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने से जनता में निराशा व्याप्त है। उनके संज्ञान में आया कि छत्तीसगढ़ के लिए निर्मित नई मूर्ति ग्वालियर में तैयार होने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण उसे किसी अन्य राज्य में स्थापित किए जाने की स्थिति बन रही है—जो अत्यंत चिंतनीय है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अगले तीन महीनों के भीतर चंद्रखुरी में प्रभु श्री राम की पारंपरिक स्वरूपानुकूल भव्य मूर्ति की स्थापना सुनिश्चित की जाए तथा माँ कौशल्या की जन्मभूमि के समग्र विकास हेतु एक विस्तृत मास्टर प्लान बनाकर प्राथमिकता से कार्य आरंभ किया जाए।
श्री अग्रवाल ने सदैव जन-आस्था, सांस्कृतिक धरोहरों और छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को सर्वोच्च महत्व दिया है। चंद्रखुरी के विकास को लेकर उनका सतत संघर्ष और प्रतिबद्धता इस बात का प्रमाण है कि वे न केवल क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा को संजोने वाले सच्चे प्रहरी भी हैं।
प्रदेशवासियों को पूर्ण विश्वास है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल की इस सार्थक पहल पर राज्य सरकार शीघ्र निर्णय लेकर माँ कौशल्या की पावन नगरी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की गरिमा अनुरूप भव्य मूर्ति की स्थापना कर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करेगी।
रायपुर। एक समय था जब कहा जाता था— “खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब”, लेकिन आज का भारत बदल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी ‘खेलो इंडिया’ पहल ने इस सोच को बदलकर नया संदेश दिया है, “खेलोगे कूदोगे तो होगे कामयाब।” यह बात सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने अभनपुर में सांसद खेल महोत्सव में कही।
रायपुर लोकसभा क्षेत्र में गुरुवार को सांसद खेल महोत्सव के दूसरे चरण का भव्य आयोजन अभनपुर विकासखंड के गातापारा स्थित जीवोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया गया। खेल और संस्कृति से भरे इस शानदार महोत्सव में स्थानीय खिलाड़ियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन पर पूरे आयोजन स्थल का माहौल जोश, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव से भर गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एनसीसी, स्काउट्स एंड गाइड्स के कैडेट्स द्वारा आकर्षक मार्च पास्ट से हुई, जिसने मैदान में अनुशासन और ऊर्जा का संदेश दिया। स्वागत-सम्मान के क्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत, पारंपरिक कर्मा नृत्य, तथा सेजस अभनपुर के छात्रों द्वारा ‘खेलो इंडिया’ थीम पर प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी और पूरा परिसर उत्साह से भर गया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “सांसद खेल महोत्सव सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान देने का एक राष्ट्रीय अभियान है। गांवों में छिपी अनगिनत प्रतिभाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने के लिए यह महोत्सव ऐतिहासिक अवसर प्रदान कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेलो इंडिया मिशन ने खेलों के प्रति नई सोच और ऊर्जा दी है। आज खिलाड़ी सिर्फ मैदान के सितारे नहीं, बल्कि देश के रोल मॉडल और ब्रांड एम्बेसडर बन रहे हैं।
अभनपुर में आयोजित यह विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता महोत्सव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई, जहां विभिन्न आयु वर्गों के करीब एक हजार प्रतिभावान खिलाड़ियों ने 13 पारंपरिक व आधुनिक खेलों में भाग लेते हुए अपना कौशल प्रदर्शित किया। यहां के विजेता रायपुर में दिसंबर में होने वाले तीसरे और फाइनल आयोजन में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। अभनपुर से 14862 खिलाड़ियों ने सांसद खेल महोत्सव में पंजीयन कराया है।
सांसद अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों, विद्यालय परिवार, प्रशिक्षकों, आयोजन समिति और क्षेत्रवासियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा—“युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन और प्रतिभा ही नए भारत की असली ताकत है। सांसद खेल महोत्सव इन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प है।”
सांसद अग्रवाल ने गातापारा खेल मैदान में बाउंड्री वॉल और कमरा निर्माण के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की साथ ही अभनपुर में स्विमिंग पूल निर्माण का भी बात कही है।
कार्यकम में विधायक इंद्र कुमार साहू, अध्यक्ष जनपद पंचायत अभनपुर चन्द्रिका बंजारे, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत खेलूराम साहू, जिला पंचायत सदस्य अन्नू तारक, चन्द्रकला ध्रुव, पूजा लोकमणी कोशले, यशवंत साहू, जनपद पंचायत सदस्य राजेश्वरी ध्रुव, सरपंच, ग्रा. पं. गातापार सावित्री वसंत कोसरे, अतुल शुक्ला, संजय शर्मा, एस डी एम रवि सिंह, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी, खेल अधिकारी, समेत बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
रायपुर। दुकानदारों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी पर आखिरकार रायपुर नगर निगम की सख्ती नजर आनी शुरू हो गई है. ताजा कड़ी में नगर निगम स्वास्थ्य विभाग जोन की टीमों ने गंदगी के साथ डस्टबीन नहीं रखने पर दुकानदारों पर जुर्माना लगाया है.
रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त विश्वदीप के निर्देशानुसार आज नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ तृप्ति पाणीग्रही के नेतृत्व एवं सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में नगर निगम स्वास्थ्य विभाग जोनों की टीमों ने जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से सघन अभियान चलाते हुए विभिन्न जोनों में 63 स्थानों पर गंदगी पाए जाने पर व्यक्तियों, संस्थाओं से 36200 रुपए का जुर्माना वसूला वहीं समझाईश देने के बाद भी दुकान में डस्टबीन नहीं रखने पर दुकानदारों पर 1300 रुपए का जुर्माना किया.
रात्रिकालीन गीले एवं सूखे कचरे का उचित निस्तारण के लिए टीम गठित
रायपुर नगर निगम स्वास्थ्य विभाग ने व्यवसायिक क्षेत्रो प्रतिष्ठानों से निकलने वाले रात्रिकालीन गीले व सूखे कचरों का उचित निस्तारण किए जाने के साथ नाईट स्वीपिंग मशीन के सतत निरीक्षण और आ रही शिकायतों का निराकरण करने विशेष निरीक्षण दल गठित कर दिया गया है. इसमें प्रभारी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों को नोडल अधिकारी और प्रभारी स्वच्छता निरीक्षकों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.
सभी नोडल और सहायक नोडल अधिकारी अपने अपने जोन क्षेत्र में रात्रि 10 बजे के बाद लगाई गई ड्यूटी अनुसार रात्रिकालीन दुकानो, ठेलो के कबरे का उचित निष्पादन करने हेतु निर्देश और गहन निरीक्षण कार्य करेगे. जोन अंतर्गत किया भी प्रकार से निरीक्षण में दोषी पाये गये दुकानदारों की सूची बनाकर आवश्यक कार्यवाही करेंगे. जिन जोनो में नाईट स्वीपिंग मशीन संलग्न है उन जोनो में निरीक्षण निर्धारित रूटचार्ट अनुसार किया जाएगा.
सड़क में बाधा पैदा करने वालों पर लगा जुर्माना
रायपुर नगर निगम मुख्यालय नगर निवेश उडनदस्ता टीम एव सभी जोनों की नगर निवेश विभाग टीमों ने नगर निवेशक आभास मिश्रा के नेतृत्व में जोनों के नगर निवेश उपअभियंताओ की उपस्थिति में निगम क्षेत्र के मुख्य मार्गों में आमजनों को सुगम आवागमन उपलब्ध करवाने सभी जोनो में अभियान चलाया. टीमों ने 238 स्थानों पर सड़क बाधा शुल्क और सीएण्डडी वेस्ट शुल्क के तौर पर कुल 172900 रुपए का जुर्माना संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों से उन्हें भविष्य के लिए नगर हित में समझाईश देकर वसूला.
राजनांदगांव। धान की अवैध बिक्री रोकने प्रशासन लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई कर रहे। कलेक्टर के निर्देश पर राजनांदगांव जिले में राजस्व, खाद्य, मंडी विभाग के संयुक्त दल ने आज एक ही दिन में 25,42,000 रुपए के 820 क्विंटल (2050 कट्टा) धान जब्त किया है।
धान उपार्जन केन्द्र खुर्सीपार में ग्राम सेम्हरा के कोचिया/बिचौलिया स्वयं की फसल कटाई किए बिना ग्रीष्मकालीन धान को खरीफ फसल के साथ मिलाकर खपाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डोंगरगढ़ ने जब्त कर प्रकरण बनाया। बता दें कि अब तक जिले में कोचिये और बिचौलियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए 55,92,400 रुपए के 1804 क्विंटल (4510 बोरी) धान एवं 2 वाहन की जब्ती की जा चुकी है। जब्त धान एवं वाहन को धान खरीदी अवधि के बाद ही मुक्त किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनांदगांव जिले के 1500 छोटे एवं बड़े मंडी अनुज्ञप्तिधारियों को सूचीबद्ध कर अनुविभागीय अधिकारी / तहसीलदार एवं खाद्य / मंडी के अधिकारियों को जांच कर अवैध रूप से भंडारित धान जब्त करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं। जिले में अंतर्राज्यीय अवैध धान आवक की रोकथाम के लिए कुल 3 अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट क्रमशः बोरतलाब, पाटेकोहरा एवं कल्लूबंजारी स्थापित किए गए हैं, जहां मंडी/नगर सेना / वन विभाग एवं राजस्व के अधिकारियों की तीन पालियों में 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है।
रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा आयोजित दो दिवसीय MSME Conclave 2025 के दूसरे दिन उद्योग जगत, MSME प्रतिनिधियों और सरकार के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक भविष्य पर विस्तृत चर्चा की. रायपुर के विमतारा हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन मौजूद रहे.
विशेष अतिथि के रूप में भारत सरकार की ओर से MSME डायरेक्टर अंकिता पाण्डेय इस आयोजन में शामिल रही, CII के चेयरमैन संजय जैन, सीएसआईडीसी अध्यक्ष राजीव अग्रवाल समेत कई प्रमुख ट्रेनर्स, विशेषज्ञों और MSME प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक में बेहतर व्यवसाय, नई तकनीक और संसाधन प्रबंधन पर गहन चर्चा हुई.
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों की प्राथमिकता है कि अधिक से अधिक लोग उद्योग स्थापित करें, स्वरोजगार बढ़े और MSME मजबूत हों. प्रदेश को पौने 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. राज्य में 1,800 लघु और मध्य उद्योग स्थापित हो चुके हैं. इनसे 35,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है. दिल्ली, अहमदाबाद सहित अन्य राज्यों के निवेशक भी लगातार छत्तीसगढ़ में रुचि दिखा रहे हैं.
सरकार का फोकस लोगों को जागरूक कर कम खर्च में अधिक उत्पादन सिखाना है, ताकि स्थानीय उत्पाद देश ही नहीं, विदेशों में भी पहुंच सके…हम चाहते हैं कि हर घर से एक उद्यमी निकले, छोटे उद्योग स्थापित हों और बड़े स्तर पर रोजगार सृजित हो.
CII के चेयरमैन संजय जैन ने कहा कि CII लगातार MSME सेक्टर में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, ताकि छोटे व्यापारियों को नई नीतियों, नई तकनीक और मार्केट तक पहुंच की जानकारी मिल सके. इस कॉन्क्लेव में 150 डेलीगेट्स को 5S जापानी ट्रेनिंग दी गई. व्यवसायियों को सिखाया गया कि नए मार्केट कैसे खोजें, निवेश कहां करें, कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे करें.
उन्होंने कहा कि हम सरकार और व्यापारियों के बीच पुल की तरह काम करते हैं, ताकि MSME को पता चले कि उनके लिए क्या योजनाएं उपलब्ध हैं, और सरकार किन नीतियों पर ध्यान दे. भारत के GDP का 30% योगदान MSME सेक्टर का है, इसलिए यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है.
संजय जैन ने कहा कि समुद्री राज्यों को एक्सपोर्ट में आसानी होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ को 600 किलोमीटर दूर होने के कारण बाधाएं आती हैं. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दे रही है. CII ने सरकार को ट्रांसपोर्ट सब्सिडी और अन्य रियायतों पर सुझाव दिए हैं. इस कार्यशाला का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का MSME भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंच सके.
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जन गौरव दिवस 2025 के अवसर पर सरगुजा जिले में 20 नवंबर को पीया कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। गवर्नर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कोलोराडो जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार दुर्गा दास उइके, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास विभाग मंत्री रामविचार परिवार नेताम, किसान मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्रालय पत्रिका, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग राजेश चौधरी, वन एवं प्लास्टिक एवं सुपरमार्केट मंत्रालय महिला एवं बाल विकास समाज विभाग की कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा के मिनियन चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर के नेता पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर के अध्यक्ष किरण सिंह देव, अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत भी शामिल रहीं।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने जनजातीय समाज प्रमुखों, पीवीटीजी समुदाय के समाज प्रमुखों, जनजातीय समाज के उत्थान में विशेष योगदान देने वालों, जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों के परिजनों से भेंट की। श्रीमती मुर्मू ने इन सभी के साथ समूह फोटो खिंचवाई।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने देश की स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय जननायकों और सेनानियों के अंतिम संस्कार का सम्मान किया। राष्ट्रपति ने सोनाखान क्रांति के जननायक शहीद वीर नारायण सिंह एवं शहीद वीर नारायण सिंह के सेनापति, परलकोट क्रांति के जननायक शहीद गेंदसिंह, झंडा आंदोलन के जननायक सुकदेव पात्र, भूमकाल क्रांति के जननायक बंटू धुरवा, जंगल क्रांति के जननायक शहीद रामाधीन गोड़ स्वतंत्रता संग्राम, बोट सेनानी राजनाथ भगत एवं माझी राम गोंडा के संस्थापक से क्रांति के जननायक की।
राष्ट्रपति ने बिरहोर जनजाति के राजेश बिरहोर, अबुझमाड़िया जनजाति के रामजी ध्रुव, बागा जनजाति के एतवारी राम माछिया एवं पहाड़ी कोरवा जनजाति के जोगीराम से सौजन्य मित्र और हाल चाल पूछे। राष्ट्रपति ने इसी तरह की जनजाति जनजाति के मंगल मंदिर, नगेशिया जनजाति के धन्नाराम नागेश, खैरवार जनजाति के वीर सिंह खैरवार, कंवर जनजाति के संजय सिंह, नाग वंश जनजाति के लक्कू राम नाग वंश, मुरिया जनजाति के धनीराम शोरी, गोंड जनजाति के मोहन सिंह, पांडो जनजाति के विनोद कुमार पांडो और चेरवा जनजाति के डी.एन. चेरवा से भी उद्योगपति की।
पण्डो जनजाति के बसंत पण्डो से मिलकर जाना कुशलक्षेम, शॉल उद्योग कर दिया सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कार्यक्रम के दौरान पंडो जनजाति के बसंत पंडो से मिलें। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने अपने कुशल क्षेम जाना और उन्हें स्थापित करना शुरू कर दिया। बसंत पांडो ने बताया कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद जब वर्ष 1952 में अंबिकापुर आए थे, तब वे 08 वर्ष के थे। राष्ट्रपति ने बसंत पांडो को गोद लिया और उनका नामकरण किया। बसंत पांडो को गोद लेने के बाद, पांडो जनजाति को 'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' का दर्जा प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने बसंत पांडो से कहा कि आप मेरे भी बेटे की तरह हैं।
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल में जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं शिल्प, आभूषण एवं वस्त्र, पूजा-पाठ, संस्कार, व्यंजन, वाद्ययंत्रों, जड़ी-बूटियों आदि को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शनियां लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
पारम्परिक अखरा स्थल एवं जनजातियों के धार्मिक आस्था के केंद्र देवगुड़ी में देवताओं की आराधना की
कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बनाए गए जनजातियों के पारंपरिक अखरा स्थल एवं जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी के मॉडल का अवलोकन कर यहां देवताओं की आराधना की।
अखरा छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा अंचल में निवासरत जनजातियों का सांस्कृतिक स्थल है, जो गाँवों के मध्य या चौराहे में स्थित होते हैं, जहाँ छायादार पेड़ों के झुण्ड भी होते हैं। ग्रामीणजन विभिन्न लोक पर्वों जैसे करमा, महादेव बायर, तीजा आठे, जीवतिया, सोहराई, दसई, फगवा के अवसरों में महिला एवं पुरूष सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर लोकगीत गाकर पारम्परिक वाद्ययंत्रों की थाप में लोकनृत्य करके उत्साह मनाते हैं। प्रदर्शनी में जनजातीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया। जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी को राज्य में क्षेत्रवार विभिन्न नामों जैसे देवाला देववल्ला, मन्दर, शीतला, सरना आदि नामों से भी जानते हैं। देवगुड़ी में ग्रामीण देवी-देवता जैसे बुढ़ादेव, बुढ़ीदाई, शीतला, सरनादेव, डीहवारीन, महादेव आदि विराजमान होते हैं। जनजातीय विभिन्न लोकपर्वों के अवसरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर ग्रामीण बैगा की अगुवाई में पूजा-पाठ कर ग्राम की सुख, शांति, समृद्धि हेतु कामना करते हैं।
मिट्टी, लकड़ी से बने आवास मॉडल का किया अवलोकन
कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों के पारंपरिक आवास का मॉडल बनाया गया था। राष्ट्रपति ने आवास मॉडल का भी अवलोकन किया। जनजातियों का आवास मिट्टी, लकड़ी से निर्मित होते हैं, जिसमें एक या दो कमरे व मुख्य कमरे के सामने की ओर परछी (बराम्दा) बने होते हैं। घर के छप्पर में ढालनुमा खपरैल लगे होते हैं। एक कमरे को रसोई कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं, जिसमें रसोई उपकरण व घरेलू सामान रखते हैं, दूसरे कक्ष को शयन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। परछी (बराम्दा) में अन्य घरेलू सामान जैसे ढ़ेकी, मूसल, सील-बट्टा, जांता आदि उपकरण होते हैं।
जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वों एवं आयोजनों में पहने जाने वाले आभूषणों की लगी प्रदर्शनी, कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट
इस दौरान राज्य के पारंपरिक आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आभूषणों के संबंध में जानकारी ली। कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा भेंट किया, जिसे राष्ट्रपति ने आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को बताया कि पारम्परिक आभूषण गिलट, तांबे, चांदी, सोना आदि धातु से निर्मित हैं, जिसे विभिन्न लोकपर्वों के अवसर में धारण करते हैं। इस दौरान गले में पहने जाने वाले हसुली, बांह में बहुटा, कलाई में ऐंठी, गले में रूपया वाला चंदवा, कमर में कमरबंध, पैर में पैरी एवं पैर की अंगुलियों में बिछिया, कान में ठोठा तथा नाक में पहने जाने वाले छुछिया (फूली) का प्रदर्शन किया गया।
वाद्ययंत्रों की लगी प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में जनजातियों द्वारा लोकपर्वों में मनोरंजन के लिए बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने इन वाद्ययंत्रों को देखा। राज्य में निवासरत जनजातियां उत्साह के लिए तत, अवनद्ध, घन और सुषिर वाद्ययंत्रों का वादन करते हैं, जिनकी मधुर ध्वनियाँ उत्सव के अवसर में देखते ही बनते हैं। कई ऐसे वाद्ययंत्र है, जिनकी आवाजें मीलों दूर तक गुंजती है और लोगों को स्वतः नृत्य करने हेतु प्रेरित करती है। सरगुजा व बस्तर अंचल में तो कई महिनों तक निरंतर वाद्ययंत्र की आवाजें सुनाई पड़ती है। इन वाद्ययंत्रों के कारण ही जनजातियों के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। सरगुजा अंचल के जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वां में वादन किया जाने वाले वाद्ययंत्र मांदर, ढोल, झांझ, मजीरा, तम्बूरा, सरंगी, खंजरी, बांसुरी, चौरासी, एवं पैजन आदि का प्रदर्शन किया गया है।
जनजातीय समुदायों द्वारा इलाज में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां की गई प्रदर्शित
कार्यक्रम स्थल में आयोजित प्रदर्शनी में राज्य में निवासरत जनजातियों द्वारा शारीरिक विकार के उपचार हेतु प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियां प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में अष्वगंधा, कुलंजन, मुलेठी, सफेद मूसली, गिलोय, लाल झीमटी, अर्जून छाल, पिसीया, भुईचम्पा, गोखरू, कुटज की छाल, गुडमान की पत्ति, विरैता, रोहिने की छाल, बालमखिरा, हर्रा एवं बेहड़ा बड़ी ईमली की बीज, हड़सिंगार, अकरकरा, चिरईगोड़ी, शिलाजीत एवं बलराज आदि रखे गए हैं। वनांचल, पहाड़ी, घाटी, तराई में निवास करती हैं। इनके निवास क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के औषधियाँ पेड़-पौधे कन्दमूल बेल, आदि पाए जाते हैं। जनजाति समाज के लोग शारीरिक विकार होने पर इन्हीं जंगली-जडी बूटियों से अपना उपचार कराते हैं। जनजाति समाज के वैद्य, बैगा, गुनिया, हथजोड़ वंशानुगत रूप से लोगों का उपचार करते हैं।
पारम्परिक व्यंजन एवं कंदमूल
तीज-त्यौहारों, अन्य अवसरों में जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए जाने वाले व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। यहां विभिन्न प्रकार के रोटी, चटनी, कोहरी (बरी), लड्डू आदि रखे गए हैं। जनजातीय महिलाएं प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से व्यंजन तैयार करते हैं तथा जंगलों से विभिन्न प्रकार के कंदमूल, फल-फूल आदि एकत्र कर खाद्य के रूप में उपयोग करते हैं। इस दौरान कांदा-पीठारू कांदा, डांग कांदा, नकवा (चूरका) कांदा, सखईन कांदा आदि प्रदर्शित किए गए हैं।