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बस्तर ओलंपिक 2025 में प्रतिभा दिखाने के लिए युवाओं को मिलेगा मंच- उपमुख्यमंत्री अरुण साव
रायपुर। बस्तर ओलंपिक – 2025 के आयोजन को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेसवार्ता कर पूरी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक 2025 में हिस्सा लेने बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 297 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है. पिछले साल एक 1 लाख 62 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था. विकासखंड स्तरीय मुकाबले 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होंगे. इसके बाद जिला फिर संभाग स्तरीय खेल होंगे. फिर अलग-अलग खेलों के फाइनल होंगे. बस्तर की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल के तहत यह आयोजन किया जा रहा है.
डिप्टी सीएम साव ने बताया, बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं समय के पहले सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. बस्तर ओलंपिक की ख्याति पूरे देश में है, यह मात्र क्षेत्रीय आयोजन नहीं है. बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों की स्पर्धाएं होंगी. इस आयोजन में आत्मसमर्पित नक्सली भी अपना दमखम दिखाएंगे.
बस्तर ओलंपिक का यह दूसरा साल है. इस बार एथलेटिक्स में 100 मी., 200 मी., 400 मी., लम्बी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस-थ्रो, जैवलिन-थ्रो, 4X100 मी. रिले रेस गेम होंगे. साथ ही तीरंदाजी, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, कराटे, वॉलीबॉल और महिला सीनियर वर्ग के लिए रस्साकसी सहित जिला स्तर पर हॉकी और वेट लिफ्टिंग की स्पर्धाएं होंगी. इसमें न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिलेगा. जूनियर वर्ग में बालक, बालिकाओं व सीनियर वर्ग में महिला और पुरुषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी.
जानिए क्या है इनाम
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में बस्तर ओलंपिक का जिक्र किया था, जो हमारे लिए गौरव की बात है. बस्तर के युवा क्षमता को मंच देने के लिए बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है. विजेताओं को खेल आकादमी में प्रवेश दिया जाता है. विजेताओं को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की जाएगी. नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी. संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा. यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रवास प्रदेश के लिए गौरव का अवसर, प्रत्येक व्यवस्था हो गरिमामय और त्रुटिरहित - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी छत्तीसगढ़ प्रवास के मद्देनज़र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में विभिन्न कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ आगमन राज्य के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस दौरान प्रत्येक व्यवस्था उत्कृष्टता का प्रतीक बने और प्रदेश की संस्कृति, आत्मगौरव एवं प्रगति की झलक हर स्थल पर दृष्टिगोचर हो।


मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री श्री साय ने सबसे पहले नवा रायपुर स्थित श्री सत्य साईं हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, सभागार व्यवस्था, मंच और आमंत्रित अतिथियों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री श्री साय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ध्यान केंद्र पहुँचे, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने ध्यान केंद्र के सभागार, मेडिटेशन रूम एवं बाहरी परिसर का निरीक्षण करते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।


ट्राइबल म्यूज़ियम बनेगा जनजातीय अस्मिता का अमर प्रतीक
मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जनजातीय समाज की वीरता, बलिदान और अस्मिता का अमर प्रतीक बनेगा।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संग्रहालय के प्रत्येक अनुभाग को इस प्रकार तैयार किया जाए कि वह आगंतुकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली अध्याय से गहराई से परिचित करा सके। उन्होंने प्रदर्शनी दीर्घाओं, मल्टीमीडिया गैलरी, स्मृति कक्ष और बाहरी परिसर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

राज्योत्सव स्थल बनेगा छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का दर्पण
मुख्यमंत्री श्री साय ने नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल का भी दौरा किया और तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य मंच, पार्किंग क्षेत्र, विभागीय डोम, प्रदर्शनी दीर्घा, वीआईपी दीर्घा और आमजन के लिए बनाए गए मार्गों का निरीक्षण किया।उन्होंने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, संस्कृति और आत्मविश्वास का उत्सव है, इसलिए यह आयोजन उत्कृष्टता की नई मिसाल बने।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएँ और सुरक्षा, स्वच्छता तथा आमजन की सुविधा से जुड़े सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, सचिव राहुल भगत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
SDM ने रेत परिवहन रोका तो जमकर हुआ हंगामा, ग्रामीणों ने पदयात्रा निकाल कर लगाए होश में आओ के नारे
गरियाबंद। मैनपुर जनपद क्षेत्र के बोईरगांव पंचायत के 60 से 70 ग्रामीण पंचायत प्रतिनिधियों के साथ पदयात्रा निकालकर 10 किमी पैदल चलकर मैनपुर जनपद कार्यालय पहुंचे। बैनर लेकर निकले ग्रामीणों ने मैनपुर एसडीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने एसडीएम होश में आओ के नारे लगाए।
जनपद सदस्य सुख चंद ध्रुव के नेतृत्व में निकाली गई इस पदयात्रा में जनपद पंचायत पहुंचकर ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन पंचायत इंस्पेक्टर राजकुमार ध्रुवा को सौंपा। ध्रुवा ने कहा कि ग्रामीणों की मांग को विधिवत उच्च कार्यालय में अवगत करा दिया जाएगा। दरअसल एक दिन पहले एसडीएम तुलसी दास मरकाम ने बोइरगांव पंचायत के आवास निर्माण के लिए रेत ढुलाई में लगे दो ट्रैक्टर को जब्त किया था। इसी बात से नाराज ग्रामीणों ने पदयात्रा निकालकर रेत की व्यवस्था कर ट्रैक्टर को छोड़ने या फिर आवास निर्माण कर देने की मांग काे लेकर कलेक्टर के नाम जनपद में ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि उनके पंचायत के 7 आश्रित ग्राम में जनमन पीएम आवास योजना के तहत 344 आवास का निर्माण किया जा रहा है। ट्रॉइवल ब्लॉक में रेत का कोई भी वैध खदान नहीं है। ऐसे में ग्रामीण समीपस्थ नदी नाले से रेत की आपूर्ति करते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वाहन छोड़ने के लिए संपर्क करने पर एसडीएम के वाहन चालक ने 10 हजार की मांग की। पैसा नहीं देने पर कार्रवाई कर फाइल खनिज विभाग को भेजने की बात कही। ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा है कि उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत मंजूर आवास निर्माण के लिए या तो रेत दिलाया जाए या आवास पूरा बनाकर दिया जाए।
महादेव घाट में निगम ने चलाया सफाई अभियान, छठ पूजा की तैयारी पूरी हुई
रायपुर। राजधानी रायपुर में 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाले सूर्य उपासना के पवित्र पर्व छठ पूजा (Chhath Puja) की तैयारियों को लेकर नगर निगम रायपुर ने महादेवघाट पर विशेष सफाई अभियान (Special Cleanliness Campaign) शुरू किया है. यह अभियान महापौर मीनल चौबे, स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर और आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जोन क्रमांक 8 के स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है.
पोकलेन मशीन और सफाई गैंग की तैनाती
महादेवघाट छठ पूजा समिति के अनुरोध पर भगवान सूर्यनारायण के भक्तों की सुविधा और Clean Environment सुनिश्चित करने के लिए यह Cleanliness Drive शुरू किया गया है. जोन 8 के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ठाकुर, माधव राव सप्रे वार्ड (क्रमांक 69) के पार्षद महेंद्र औसर, संत रविदास वार्ड (क्रमांक 70) के पार्षद अर्जुन यादव, जोन कमिश्नर राजेश्वरी पटेल और कार्यपालन अभियंता अतुल चोपड़ा के मार्गदर्शन में पोकलेन मशीन (Poclain Machine) और विशेष सफाई गैंग (Cleaning Crew) को तैनात किया गया है.
निरंतर Monitoring और निरीक्षण
इस सफाई अभियान की Continuous Monitoring जोन 8 के स्वास्थ्य अधिकारी गोपीचंद देवांगन और स्वच्छता निरीक्षक रितेश झा द्वारा की जा रही है. जोन 8 के अधिकारियों ने महादेवघाट को छठ पूजा से पहले Top Priority के आधार पर स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भक्तों को पूजा-अर्चना के लिए Hygienic Environment उपलब्ध हो.
रायगढ़ के एनआरवीएस प्लांट में फर्नेस ब्लास्ट, कई मजदूर घायल
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के एनआरवीएस प्लांट में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया. फर्नेस सेक्शन में काम के दौरान भीषण धमाका हुआ, जिससे इलाका दहल गया और धुआं दूर तक दिखाई देता रहा. हादसे में कई मजदूरों के घायल होने की सूचना है. इनमेंं से एक गंभीर रूप से घायल है, जिसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है. प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची गई है.
जानकारी के मुताबिक, लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम तराईमाल स्थित एनआरवीएस प्लांट में हादसा हुआ है. फर्नेस सेक्शन में बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे. सुबह 7 बजे के करीब फर्नेस ब्लास्ट हो गया. हादसे से प्लांट में अफरा-तफरी मच गई. लगभग 4 श्रमिक घायल बताये जा रहे हैं, इनमें से एक की हालत गंभीर है. उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है. घायलों को ओपी जिंदल फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उनका इलाज जारी है. मृतकों और घायलों के आंकड़े बढ़ सकते हैं.
सूचना के बाद मौके पर प्रशासनिक और पुलिस टीम पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि प्लांट को हादसे के बाद सील कर दिया गया है. इसके अलावा मृतकों और घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है. पूंजी पथरा थाने के थाना प्रभारी राकेश मिश्रा का कहना है कि उसे गंभीर हालत के कारण रायपुर रेफर किया गया है. मौत की खबर महज अफवाह है.
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बारिश के संकेत, मौसम में लौटेगी ठंडक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। बस्तर समेत दक्षिणी जिलों में फुहारें शुरू होने की संभावना है, जबकि रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में भी बूंदाबांदी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 26 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां और बढ़ेंगी।
बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, मौसम में बदलाव के संकेत:
मौसम विभाग ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से मंगलवार तक दक्षिण-पूर्व और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना जताई गई है। यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ेगा और अगले 24 घंटों में और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।
इस सिस्टम के असर से दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ — यानी रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर और कोरबा जिलों में भी बूंदाबांदी के आसार हैं।
धान की फसलों पर असर का खतरा:
इस समय प्रदेश के कई हिस्सों में धान की कटाई का काम चल रहा है। ऐसे में अचानक आई बारिश किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी फसल या पहले से काटकर रखे गए धान के ढेर बारिश से भीग सकते हैं, जिससे अनाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। कृषि विभाग ने किसानों को सावधानी बरतने और फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी है।
तापमान में हल्की वृद्धि, लेकिन लौटेगी ठंडक:
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से क्रमशः 1.9 और 2.4 डिग्री अधिक रहा। अधिकतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी के कारण दिन में गर्मी का अहसास रहा, जबकि रात में उमस बनी रही।हवा की औसत गति 2 किलोमीटर प्रति घंटा रही, नमी का स्तर सुबह 76 प्रतिशत और शाम को 58 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि, जैसे-जैसे बारिश का असर बढ़ेगा, वैसे-वैसे तापमान में गिरावट आएगी और प्रदेश में हल्की ठंडक लौटने की उम्मीद है।
26 अक्टूबर से बढ़ेगी बारिश की गतिविधि:
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 26 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें भी पड़ सकती हैं। इससे हवा में नमी बढ़ेगी और तापमान में गिरावट आएगी। रायपुर मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह सिस्टम धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ेगा और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक इसका असर बना रहेगा।
रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक 29 अक्टूबर को
रायपुर। रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक 29 अक्टूबर को होने वाली है। इस बैठक में 16 एजेंडों पर चर्चा के बाद अंतिम मुहर लगाई जाएगी। बताया जा रहा है इस बार सबसे ज्यादा सवाल पार्षदों ने लगाए है। वहीं, बैठक में गौरवपथ-2 के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।
बता दें कि यह महापौर मीनल चौबे के कार्यकाल की बजट के बाद दूसरी सामान्य सभा होगी। सामान्य सभा की बैठक के पहले 27 और 28 अक्टूबर को दोनों दलों के पार्षदों के साथ भी बैठक रखी गई है।निगम के सदन में भाजपा पार्षदों का बहुमत होने से बड़े हंगामे की संभावना कम मानी जा रही है, हालांकि पार्षद अपने-अपने वार्डों से जुड़ी पेयजल, सफाई, बिजली, रोड और नाली जैसी स्थानीय समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाएंगे।
सभापति राठौर ने बताया कि सामान्य सभा की शुरुआत एक घंटे के प्रश्नकाल से होगी। इस बार 14 से 15 पार्षदों ने अपने सवाल लगाए हैं। यह अब तक की सबसे अधिक संख्या है। मुख्य प्रस्तावों में पचपेड़ीनाका से सीएसईबी चौक बूढ़ापारा तक गौरवपथ-2 का निर्माण शामिल है। यह सड़क 37.61 करोड़ रुपए की लागत से चौड़ी और आधुनिक डिजाइन में विकसित की जाएगी। इससे शहर को नया स्वरूप और सुगम यातायात मिलेगा।
अमेरिकी कंपनी ने NIT रायपुर के छात्र को दिया बड़ा ऑफर
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के छात्र चित्रांश अग्रवाल ने इस सत्र का अभी तक का सबसे बड़ा पैकेज हासिल किया है. उन्हें वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनी डॉक्यूसाइन ने 76 लाख रुपए प्रति वर्ष के पैकेज की पेशकश की है. चित्रांश को यह प्रतिष्ठित पीपीओ 26 मई से 1 अगस्त 2024 तक डॉक्यूसाइन में 2.5 महीने की ऑफ-कैंपस इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद मिला.
डॉक्यूसाइन एक अमेरिकी कंपनी है जो इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इंटेलिजेंट एग्रीमेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी है. यह विश्वभर में 1.7 मिलियन से अधिक ग्राहकों, जिनमें फॉच्यून 500 की 95% कंपनियां शामिल हैं, द्वारा विश्वसनीय मानी जाती है.
दोहरे फोकस वाली तैयारी से सफलता
चित्रांश ने अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित, दोहरे फोकस वाली तैयारी को दिया. उन्होंने कहा, ‘मैंने लीट कोड पर डाटा स्ट्रक्चर और अल्गोरिथम का अभ्यास किया और साथ ही प्रतिस्पर्धी प्रोग्रामिंग कोडफोर्सेस और कोडसेफ पर अपनी एल्गोरिथम प्रतिभा को निखारा. इसके साथ ही, ओएस, ओओपी, डीबीएमएस और सीएन जैसे कोर कंप्यूटर साइंस फंडामेंटल्स में महारत हासिल करना भी महत्वपूर्ण रहा. ये अवधारणाएं ही उनकी सफलता की नींव रहीं.’
कई बार हताश हुआ, लेकिन कभी हार नहीं मानी: चित्रांश
जेईई मेंस में अच्छी जेईई रैंक के आधार पर एनआईटी रायपुर में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग को चुनने वाले चित्रांश ने अपने माता-पिता और सीनियर्स के मार्गदर्शन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया और कहा कि संगत और अनुशासित रहना आवश्यक है. असफलताएं जीवन का हिस्सा हैं. मैं कई बार हताश हुआ, लेकिन कभी हार न मानने की जिद और सीनियर्स के समर्थन ने मुझे यहां पहुंचाया. हैकाथॉन में भाग लेना भी अनुभव के लिए महत्वपूर्ण है.
गायों की मौत पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, राज्य प्रशासन और पशुपालन विभाग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेलतरा और सुकलकारी क्षेत्र में लगातार हो रही गायों की मौतों के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए राज्य प्रशासन और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि समाचार रिपोर्ट में वर्णित स्थिति “प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण” है और इसे तत्काल राज्य प्रशासन के संज्ञान में लाना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार गौ संरक्षण की योजनाएं चला रही है, ऐसी परिस्थितियों में गायों की मौत “मानवीय संवेदनाओं पर प्रहार” है।
अदालत ने पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2025 को होगी।
नक्सलियों के लगातार आत्मसमर्पण पर CM साय का बयान, कहा – हमने कहा था गोलीबारी से कुछ नहीं होगा, नक्सलियों को अब आ रही है सद्बुद्धि
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में नक्सलियों की विचारधारा से मोहभंग हो रहा है और अब वे मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने कांकेर जिले में जल्द ही और भी कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना जताई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह बात रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शुरू से ही नक्सलियों से संवाद और सुधार की नीति अपनाई है। हमने नक्सलियों से कहा था कि गोलीबारी से कुछ हासिल नहीं होगा। हिंसा छोड़कर अगर वे विकास और शांति की राह पर चलें, तो सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी। साय ने आगे कहा कि अब नक्सलियों को सद्बुद्धि आ रही है। राज्य सरकार नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दे रही है। इसी का परिणाम है कि आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बता दें कि सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त किया जाए और विकास की धारा हर गांव तक पहुंचे।
बिहार चुनाव पर बोले CM विष्णुदेव साय – एनडीए के पक्ष में बन रहा मजबूत माहौल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब पूरी तरह से एनडीए के पक्ष में है। बिहार में एनडीए के लिए अनुकूल वातावरण बना हुआ है। जनता ने कांग्रेस और राजद के शासन का दौर देखा है और अब बदलाव चाहती है।
CM साय ने आगे कहा कि राजद के शासनकाल में हुए चारा घोटाले जैसे भ्रष्टाचार को बिहार की जनता अभी तक नहीं भूली है। राजद ने बिहार की छवि को नुकसान पहुंचाया, जबकि एनडीए ने वहां विकास की दिशा में ठोस काम किए हैं। हमें पूरा विश्वास है कि इस बार भी बिहार में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलेगा।
खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण दोहन – आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम
रायपुर। छत्तीसगढ़ यह नाम अब केवल हरियाली और संस्कृति का पर्याय नहीं रहा, बल्कि भारत की खनिज राजधानी के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। देश के कुल खनिज भंडार का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ की धरती में छिपा है। यही कारण है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिजों का योगदान लगातार बढ़ रहा है और प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद जीएसडीपी में खनिज क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। राज्य गठन के समय खनिज राजस्व 429 करोड़ रूपए था, जो अब बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ हो गया है। 25 साल में राज्य का खनिज राजस्व में 34 गुना बढ़ गया है। वन एवं पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य की यह उपलब्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 1980 से अब तक वनसंरक्षण अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में केवल 28 हजार 700 हेक्टेयर भूमि ही खनन के लिए दी गई है, जो कि राज्य के वन क्षेत्र 59.82 लाख हेक्टेयर का 0.47 प्रतिशत और राज्य के कुल भू-भाग 135 लाख हेक्टेयर का 0.21 प्रतिशत है। खनन क्षेत्र में कटाई के साथ 5 से 10 गुना वृक्षारोपण को अनिवार्य किए जाने से राज्य के वन क्षेत्र में 68 हजार 362 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जो इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार देश में सर्वाधिक है।
खनिज राजस्व से न केवल प्रदेश को आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खनिज संपदा के दोहन को पर्यावरणीय संतुलन और जनहित से जोड़कर “खनिज से विकास” की नई परिभाषा गढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख खनिजों में से महत्वपूर्ण कोयला, ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। छत्तीसगढ़ देश का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। राज्य में कोयले का भंडारण 74,192 मिलियन टन है, जो देश के कोयल भण्डार का लगभग 20.53 प्रतिशत है। कोयला उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य की देश में 20.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है। देश के कोयला उत्पादक राज्यों में छत्तीसगढ़ का दूसरा स्थान है। प्रदेश के कोयले का उपयोग ताप विद्युत संयंत्रों, सीमेंट, इस्पात और कोयला आधारित मध्यम व लघु उद्योगों में किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता में छत्तीसगढ़ का योगदान पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
लौह अयस्क देश के इस्पात उद्योग की रीढ़ है, जो छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कबीरधाम से लेकर दल्लीराजहरा से होते हुए दंतेवाड़ा बैलाडीला तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं में 4,592 मिलियन टन लौह अयस्क भंडार मौजूद है, जो राष्ट्रीय भंडार का 19.09 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 16.64 प्रतिशत है। एनएमडीसी की बैलाडीला खदानें (दंतेवाड़ा) और दल्ली-राजहरा खदानें (बालोद) देश के इस्पात उद्योगों की जीवनरेखा हैं। यहां से भिलाई इस्पात संयंत्र और देशभर के उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क मिलता है। लौह अयस्क उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में द्वितीय स्थान है।
छत्तीसगढ़ में 992 मिलियन टन बाक्साइट भंडार है, जो देश का 20 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 4.3 प्रतिशत है। सरगुजा, बलरामपुर और कबीरधाम जिलों में हिन्डाल्को, वेदांता और सीएमडीसी जैसी कंपनियाँ सक्रिय हैं। बाक्साइट से निर्मित एल्युमिनियम ऊर्जा, निर्माण और रक्षा उद्योग के लिए अहम है।
चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का मेरुदंड है। राज्य में 13,211 मिलियन टन चूना पत्थर का भंडार है, जो देश के कुल भंडार का 5.8 प्रतिशत है। राष्ट्रीय उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान 11 प्रतिशत है। बलौदाबाजार, रायपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिलों में अल्ट्राटेक, एसीसी, अम्बुजा, श्री सीमेंट, ग्रासिम जैसे संयंत्र कार्यरत हैं। बलौदाबाजार को अब ‘सीमेंट हब’ कहा जाता है।
देश का 100 प्रतिशत टिन उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। सामरिक महत्व के टिन अयस्क का यहां 30 मिलियन टन का भंडार उपलब्ध है। दंतेवाड़ा और सुकमा में मिलने वाला यह खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसे अनुसूचित जनजाति की सहकारी समितियों के माध्यम से क्रय करने का प्रावधान राज्य सरकार ने लागू किया है।
राज्य में 992 मिलियन टन डोलोमाइट भंडार मौजूद है, जो राष्ट्रीय भंडार का 20 प्रतिशत है। मुख्यतः रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जिलों में पाया जाता है। यह खनिज इस्पात उद्योग में फ्लक्स मटेरियल के रूप में उपयोगी है। गरियाबंद जिले के बेहराडीह और पायलीखंड क्षेत्रों में हीरा का प्रमाणित भंडार है। बलौदाबाजार जिले के सोनाखान क्षेत्र में 2780 किलोग्राम स्वर्ण भंडार के अतिरिक्त जशपुर, महासमुंद और कांकेर जिलों में भी स्वर्ण और हीरा खनिज की संभावनाएं पाई गई हैं।
छत्तीसगढ़ में गौण खनिजों की भी बड़ी भूमिका है। राज्य में 37 प्रकार के गौण खनिज जैसे-रेत, मुरम, ईमारती पत्थर, साधारण मिट्टी, निम्न श्रेणी चूना पत्थर, डोलोमाइट और ग्रेनाइट की खुदाई लगभग हर जिले में होती है। रेत और मिट्टी का उपयोग सड़क, भवन और पुल निर्माण में व्यापक रूप से किया जा रहा है। गौण खनिजों से राज्य को स्थानीय राजस्व, रोजगार और पंचायत निधि का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। जिला पंचायतों और नगर निकायों को इन खनिजों से प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिलती है। खनिज विकास के साथ-साथ राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और खनन प्रभावित इलाकों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया है। डीएमएफ के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़कों जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
खनिज विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का जो उदाहरण छत्तीसगढ़ ने प्रस्तुत किया है, वह आज पूरे देश के लिए एक सस्टेनेबल ग्रोथ मॉडल बन गया है। यहां विकास और हरियाली विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नीति में दूरदृष्टि और क्रियान्वयन में संवेदनशीलता हो, तो खनिज संपदा केवल भूमि की गहराई में नहीं, बल्कि जनजीवन की समृद्धि में भी झलक सकती है।
6 से 9 नवम्बर तक जशपुर में होगा ‘जशपुर जम्बूरी 2025' का आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ का पर्वतीय और हरियाली से आच्छादित जिला जशपुर एक बार फिर उत्सव, संस्कृति और रोमांच का केंद्र बनने जा रहा है। यहाँ आगामी 6 से 9 नवम्बर 2025 तक आयोजित होने वाले ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ में प्रदेश और देशभर से पर्यटक प्रकृति की गोद में रोमांचक अनुभवों, जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक उत्सव के रंगों का आनंद लेंगे। यह आयोजन प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय परंपराओं और आधुनिक रोमांच का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।


प्रकृति की गोद में चार दिन का उत्सव
जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झरनों, पहाड़ियों और हरे-भरे जंगलों के कारण पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इन चार दिनों में यह जिला उत्साह, उमंग और अनूठे अनुभवों का जीवंत मंच बन जाएगा। देशभर से आने वाले सैलानी यहां रोमांचक खेलों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जनजातीय लोकपर्वों की रंगीन झलक का आनंद लेंगे।

हॉट एयर बलून और पैरामोटरिंग का रोमांच
इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा हॉट एयर बलून और पैरामोटरिंग शो, जिसमें प्रतिभागी मधेश्वर पहाड़ियों के ऊपर से उड़ान भरकर जशपुर की भव्यता को नई ऊँचाई से देख सकेंगे। नीले आसमान और हरी वादियों का यह संगम एक अविस्मरणीय अनुभव बनेगा।

कयाकिंग, एटीवी और मोटर बोटिंग से मिलेगा एडवेंचर का आनंद
फेस्टिवल में कयाकिंग, मोटर बोटिंग और एटीवी राइड्स जैसी गतिविधियाँ रोमांच प्रेमियों को अपनी सीमाओं को परखने का अवसर देंगी। झरनों की धारा में कयाकिंग और जंगलों के बीच मिट्टी के रास्तों पर एटीवी चलाने का रोमांच हर आगंतुक के लिए यादगार रहेगा।
फॉरेस्ट ट्रेकिंग और प्राकृतिक अनुभ
प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष फॉरेस्ट ट्रेकिंग ट्रेल्स तैयार की गई हैं। घने पेड़ों के बीच, फूलों की महक और पक्षियों की चहचहाहट में चलना जशपुर की जैव विविधता से गहरा जुड़ाव कराएगा। यह पर्यावरण और पर्यटन के बीच सामंजस्य का प्रतीक है।
खुले आसमान तले स्टार गेज़िंग सेशन्स
रात्रिकालीन आयोजनों में स्टार गेज़िंग सेशन्स विशेष आकर्षण होंगे। तारों से सजे जशपुर के निर्मल आसमान में सैकड़ों नक्षत्रों को निहारने का अनुभव आगंतुकों को अद्भुत शांति और विस्मय का एहसास कराएगा।
लोककला, संगीत और बोनफायर नाइट्स से सजेगा हर शाम का माहौल
हर शाम बोनफायर नाइट्स में जनजातीय लोकनृत्य, संगीत और हँसी से भरी संध्याएँ होंगी। पारंपरिक गीतों की धुन और आग की लपटों के बीच साझा होती मुस्कानें इस आयोजन को आत्मीयता का नया अर्थ देंगी।
फेस्टिवल में स्थानीय व्यंजनों का विशेष स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहेगा। स्थानीय पारंपरिक पकवानों के स्वाद से पर्यटक छत्तीसगढ़ की मिट्टी की असली महक महसूस करेंगे।
‘जशपुर जम्बूरी’ केवल एक पर्यटन आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक आत्मसम्मान का उत्सव भी है। पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला प्रदर्शनी और आदिवासी परिधानों की झलक इस आयोजन को विशिष्ट बनाएगी।
जशपुर प्रशासन और पर्यटन विभाग ने पर्यटकों की सुविधा के लिए ठहरने, खानपान, सुरक्षा और स्वच्छता की संपूर्ण व्यवस्था की है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ेगी पहचान
इस आयोजन में देशभर से एडवेंचर प्रेमी, फोटोग्राफर, ट्रैवल ब्लॉगर और इनफ्लुएंसर भाग लेंगे, जिससे जशपुर की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल माध्यमों से और सशक्त होगी।
“हमारा प्रयास है कि जशपुर की प्रकृति और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिले। जशपुर जम्बूरी 2025’ न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रखर करेगा, बल्कि पर्यटन, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता को नई ऊर्जा देगा। यह आयोजन राज्य के लिए गौरव और विकास दोनों का प्रतीक बनेगा। ऐसे आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी पैदा करते हैं। जशपुर के लोग जितने सादगीपूर्ण हैं, उतने ही उत्साही और साहसी भी हैं।
‘जशपुर जम्बूरी’ जैसे आयोजन इस क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर रहे हैं। यह फेस्टिवल छत्तीसगढ़ को ‘एडवेंचर टूरिज्म हब’ के रूप में आगे बढ़ाएगा।”
– मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिवंगत चन्दन बाई को दी श्रद्धांजलि: शोक संतप्त परिवार से मिलकर व्यक्त की संवेदना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज विधायक एवं मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव कुमार मरपच्ची की माताजी स्वर्गीय चन्दन बाई की तेरहवीं एवं श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत आत्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर श्री मरपच्ची सहित शोक संतप्त परिवार के सदस्यों से मिलकर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे स्वर्गीय चन्दन बाई की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
जमीन पर दशकों से काबिज लोगों को वक्फ बोर्ड ने भेजा नोटिस, स्थानीय लोगों में रोष…
रायपुर। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने रायपुर के पुरानी बस्ती इलाके में रहने वाले तीन परिवारों को नोटिस जारी किया है. बोर्ड का दावा है कि ये परिवार दशकों से वक्फ की जमीन पर रह रहे हैं.
वक्क बोर्ड की नोटिस में कहा गया है कि परिवार दो दिन के भीतर कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर जवाब दें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. दीपावली से एक दिन पहले थमाए एक नोटिस से लोगों में गहरी नाराजगी है. प्रभावित परिवारों ने बताया कि वे पिछले 60 से 70 सालों से यहां रह रहे हैं, और उनके पास 1948 व 1965 के रजिस्ट्री दस्तावेज मौजूद हैं.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने कभी भी जमीन पर कब्जा होने दावा नहीं किया, लेकिन अब अचानक दिवाली के दौरान नोटिस देकर लोगों को भयभीत किया जा रहा है. लोगों ने इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं. वहीं वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि तीन घर वालों को नोटिस गया है.
अवैध धान परिवहन और बिचौलिए पर रहेगी प्रशासन की पैनी नजर
बलौदाबाजार। खरीफ विपणन वर्ष 2025 -26 में समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का खरीदी की तैयारी जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में गुरुवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में नोडल अधिकारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर दीपक सोनी ने नोडल अधिकारियो के कार्यों और दायित्वों की जानकारी देते हुए अवैध धान परिवहन एवं बिचौलिए पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिये।
कलेक्टर ने कहा क़ि धान खरीदी में नोडल अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी। किसी भी समिति में अवैध धान खपाने का प्रयास करने वाले बिचौलिए एवं अवैध धान परिवहन करते पाए जाने पर तत्काल इसकी सूचना तहसीलदार एवं समिति प्रबंधक को देना है। अपने -अपने कार्य क्षेत्र समिति अंतर्गत आने वाले गांव के संदिग्ध व्यक्ति एवं बिचौलिओं की सूची तैयार कर लें। धान खरीदी के समय क़ानून व्यवस्था बनाए रखने में भी आवश्यक समन्वय करना होगा। उन्होंने कहा क़ि जिले में लगभग 12 स्थानों पर जांच नाका स्थापित हैं जिन्हे शीघ्र सक्रिय करें और वहां कर्मचारियों की नये सिरे से ड्यूटी लगवाएं। जांच नाका में पंजी संधारित कर प्रतिदिन की कार्यवाही की रिपोर्ट देनी होगी। धान खरीदी के लिए बरदाने गुणवत्तापूर्ण होने चाहिए तथा स्टैंकिंग भी उपयुक्त तरीके से कराना है। उन्होंने धान खरीदी के लिए जिला कंट्रोल रूम हेतु संपर्क केन्द्र को सक्रिय करने के निर्देश दिये।
कलेक्टर ने कहा क़ि इस बार धान खरीदी एग्रस्टेक पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फिजिकल वेरिफिकेशन के आधार पर होग़ा। अब तक लगभग 1लाख 55 हजार किसानों का पंजीयन हुआ हैं एवं करीब 2372 किसानों का एग्रीस्टेक में पंजीयन शेष हैं। इन छूटे हुए किसानों का पंजीयन अगले दो दिन में पूरा कराने सभी भरसक प्रयास करें। पंजीयन के लिए छूटे हुए किसानों की सूची समितिवार तैयार किया गया हैं। इस सूची को सभी समिति प्रबंधकों, एससडीएम, तहसीलदार, पटवारी, सचिव एवं सरपंच को उपलब्ध कराएं ताकि जल्द पंजीयन पूर्ण हो सके। उन्होंने ग्रामसभा के दौरान ग्रामीणों से प्राप्त दावा आपत्ति का निराकरण करते समय पहले फिजिकल वेरिफिकेशन एप्प से सत्यापन एवं ऑनलाइन एंट्री के बाद निराकरण की सूची ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थल पर चस्पा करने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर जिला खाद्य अधिकारी पुनीत वर्मा, उप पंजीयक सहकारिता उमेश गुप्ता सहित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी एवं नोडल अधिकारी उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री व मंत्रियों ने की राज्योत्सव व प्रधानमंत्री के रायपुर दौरे की तैयारियों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के साथ राज्योत्सव तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नवा रायपुर प्रवास की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्योत्सव की तैयारियों में जुटे अधिकारियों के साथ विभिन्न व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने अधिकारियों को संपूर्ण आयोजन में किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए पूरी क्षमता और योग्यता से समय पूर्व सभी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में राज्योत्सव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन को ऐतिहासिक और यादगार बनाना है। इसके लिए तैयारियों में कोई कोर-कसर न छोड़ें। प्रधानमंत्री के प्रवास के दौरान सभी कार्यक्रमों के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए तेजी से कार्य करते हुए सभी व्यवस्थाओं को मूर्त रूप दें।
उप मुख्यमंत्री श्री साव तथा मंत्रीद्वय केदार कश्यप और ओ.पी. चौधरी ने राज्योत्सव के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम स्थल पर सेक्टर्स की स्थिति, बैठक क्षमता, परिक्रमा पथ के लोकेशन एवं सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था व पेयजल व्यवस्था के साथ ही वीवीआईपी सेक्टर की क्षमता, सुव्यवस्थित पहुंच मार्ग तथा सभी कार्यक्रमों के व्यवस्थित आयोजन की रुपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, रायपुर नगर निगम के आयुक्त विश्वदीप और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने किया गजमार पहाड़ के सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण
रायगढ़। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ के गजमार पहाड़ स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में जारी सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर कलेक्टर रायगढ एवं डीएफओ रायगढ़ उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि शासन की योजनाओं का केवल निर्माण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन ही असली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य जनसामान्य को वास्तविक लाभ पहुंचाना है और इसके लिए योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि हनुमान मंदिर परिसर में हो रहे सौंदर्यीकरण कार्यों से न केवल धार्मिक पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि गजमार पहाड़ी रायगढ़ की शान है। ऐसा स्थल शहर के बीच इतनी ऊँचाई और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है।
गजमार पहाड़ी इको टूरिज्म स्थल के रूप में होगा विकसित
वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर रायगढ़ जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र गजमार पहाड़ी स्थित हनुमान धाम अब आधुनिक स्वरूप में इको पार्क और इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित होगा। बीते दिवस वित्त मंत्री श्री चौधरी ने 08 करोड़ रुपए की लागत से यहां होने वाले विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमि पूजन किया था। गजमार पहाड़ी मंदिर विकास योजना की जानकारी देते हुए डीएफओ ने कहा कि विभागीय मार्गदर्शन और सुव्यवस्थित योजना के तहत पहाड़ मंदिर को नया स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालु एवं पर्यटक आसानी से ऊपर तक पहुंच सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत स्वीकृत सीढ़ियों का विकास कार्य, अवेयरनेस एक्टिविटी के लिए ओपन प्लेटफार्म का निर्माण किया जा रहा है।
साथ ही वाच टॉवर, चिल्ड्रन एक्टिविटी एरिया, कैन्टीन, पैगोड़ा, पब्लिक वाशरुम, वाश एरिया निर्माण, यूटिलिटी एरिया, पार्किंग एवं प्रवेश स्थल का विकास कार्य, पाथ-वे निर्माण एवं प्रवेश द्वार निर्माण कार्य हो रहा है। इन सभी सुविधाओं के विकसित हो जाने पर गजमार पहाड़ी न केवल धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि पर्यटन और स्वास्थ्य गतिविधियों के दृष्टिकोण से भी एक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।
