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रायपुर समेत इन जिलों में होगी भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
रायपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है। मौसम विभाग ने रविवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ घंटों में दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर संभाग के कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। वहीं कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है.
राजधानी रायपुर में भी शाम या देर रात तक बारिश शुरू हो सकती है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खुले स्थानों में बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है.
कहाँ-कहाँ रहेगा असर:
मौसम विभाग के अनुसार, दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर संभागों के कई जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं बस्तर और सरगुजा संभागों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। इन इलाकों में बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश की संभावना बेहद कम है।
मानसून की स्थिति और सिस्टम का प्रभाव:
मौसम विभाग ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा इस समय वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी, शाहजहांपुर और 30° उत्तर / 81° पूर्व से होकर गुजर रही है। इसके अलावा पूर्वोत्तर बिहार और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय है, जो समुद्र तल से 1.5 से 3.1 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है। इसी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में अगले 24 घंटों तक बारिश की संभावना बनी हुई है।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग के मुताबिक —
7 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी।
8 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है।
9 अक्टूबर को बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश की संभावना नहीं है।
इसके बाद 9 अक्टूबर से उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने लगेगी। कुछ इलाकों में हल्की फुहारें जारी रह सकती हैं, लेकिन गरज-चमक और भारी वर्षा जैसी घटनाएं समाप्त हो जाएंगी।
तापमान में गिरावट का दौर जारी:
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी। शाम और रात के समय हल्की ठंडक महसूस की जा सकेगी, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।
“बस्तर राइजिंग” अभियान 8 अक्टूबर से होगा प्रारंभ:बस्तर की प्रतिभा, संस्कृति और संभावनाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग और बस्तर संभाग के सभी जिलों के जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से “बस्तर राइजिंग” नामक विशेष अभियान 8 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभियान बस्तर संभाग के सातों जिलों में आयोजित किया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य बस्तर की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और उद्यमशील क्षमताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना है। अभियान के दौरान विशेषज्ञों, युवाओं, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन किए जाएंगे।
“बस्तर राइजिंग” का कारवां केशकाल, नारायणपुर, कोण्डागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, चित्रकोट, बारसूर और जगदलपुर का भ्रमण करेगा। इस दौरान बस्तर की कला, हस्तशिल्प, कृषि, पर्यटन, खेल और शिक्षा से जुड़ी संभावनाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।
अभियान का समापन रायपुर में “हार्मोनी फेस्ट 2025” के रूप में होगा, जिसमें बस्तर की प्रेरक कहानियाँ, नवाचार और सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शित की जाएंगी। यह आयोजन “दिल मेला - दिल में ला” थीम पर आधारित होगा।
छत्तीसगढ़ NGO घोटाला: CBI ने तेज की जांच, पूर्व मंत्री और 7 IAS अधिकारी जांच के दायरे में
रायपुर। छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग से जुड़ा NGO घोटाला अब गंभीर रूप ले चुका है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने मंगलवार को मना स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में पहुंचकर कई अहम दस्तावेजों की जांच की। CBI अधिकारियों ने डिप्टी डायरेक्टर से स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) से संबंधित फाइलें मांगीं और NGO से जुड़े तीन बंडल दस्तावेजों की फोटोकॉपी लेकर जांच के लिए सुरक्षित किया।
CBI ने कहा है कि दस्तावेजों की गहन जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस मामले में एक तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री और सात IAS अधिकारियों सहित कुल 14 लोगों के नाम सामने आए हैं।
कैसे बना NGO और कौन थे इसके फाउंडर:
साल 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, एम.के. राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बी.एल. अग्रवाल, सतीश पांडे और पी.पी. श्रोती ने मिलकर दो NGO बनाए थे। इन संस्थाओं में राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) के छह अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।
NGO का उद्देश्य दिव्यांगजनों की मदद के लिए योजनाएं चलाना बताया गया था — जैसे सुनने की मशीनें, व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, कैलिपर और कृत्रिम अंग का वितरण। लेकिन जांच में पाया गया कि ये सारी गतिविधियां केवल कागजों पर दर्ज थीं। ज़मीन पर कोई वास्तविक काम नहीं हुआ।
बिना मान्यता और पारदर्शिता के चलता रहा NGO:
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह NGO समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त भी नहीं था, फिर भी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से करोड़ों रुपये इसके खातों में ट्रांसफर होते रहे। यह सिलसिला लगभग 14 वर्षों तक चलता रहा।
नियमों के मुताबिक कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी NGO में सदस्य नहीं हो सकता, लेकिन इस मामले में मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर यह संस्था बनाई और कानून का खुला उल्लंघन किया।
इसके अलावा, NGO के गठन के 45 दिन के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, लेकिन इस संस्था में 17 वर्षों तक कोई चुनाव नहीं हुआ। प्रबंधकारिणी की कोई बैठक नहीं बुलाई गई और न ही किसी वर्ष का ऑडिट रिपोर्ट तैयार किया गया।
CBI की अगली कार्रवाई:
CBI फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किस अवधि में, किन खातों में और किन परियोजनाओं के नाम पर राशि जारी की गई। सूत्रों के मुताबिक, CBI आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों और NGO पदाधिकारियों से पूछताछ भी कर सकती है।यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितताओं का मामला है, बल्कि यह प्रशासनिक स्तर पर हुए सत्ताधारी गठजोड़ और भ्रष्टाचार की एक गहरी परत भी उजागर करता है।
डबरी ने खोले समृद्धि के द्वार, दुलार सिंह का सपना हुआ साकार
रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले की ग्राम पंचायत जाटा के बहेराडीह के दुलार सिंह खेत में एक डबरी बनाने से ही खेती और पशुपालन में होने वाली बढ़ौत्तरी का सजीव उदाहरण बन गए हैं। दुलार सिंह ने यह डबरी भी मनरेगा योजना के माध्यम से बनवाई है। ग्रामीण जीवन का आधार सदैव कृषि और पशुपालन रहा है, परंतु इन दोनों ही कार्यों की आत्मा जल है । यदि जल की व्यवस्था सुदृढ़ हो जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वयं सशक्त हो जाती है। इसी सोच को दुलार सिंह ने साकार रूप दिया है।
डबरी निर्माण होने से पूर्व दुलार सिंह को अपने खेतों की सिंचाई हेतु जल की कमी रहती थी, जिससे सीमित फसल ही ले पाते थे। इसके अलावा बतख पालन, मछली पालन एवं धान की खेती की सिंचाई करने के लिए हमेशा पानी की कमी को महसूस करते आ रहे थे, ऐसे में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से ग्राम पंचायत जाटा में दुलार सिंह के खेत पर डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम जाटा के किसान दुलार सिंह द्वारा अपनी निजी भूमि पर डबरी निर्माण कार्य कराया गया। इस कार्य के लिए 2.14 लाख की प्रशासकीय राशि स्वीकृत की गई इसका कार्य प्रारंभ हुआ और जून 2024 को पूर्ण हुआ। इसमें कुल 380 मानव दिवसों के सृजन से 37 श्रमिक परिवारों को 92,577 की मजदूरी प्राप्त हुई। इससे न केवल रोजगार सृजन हुआ बल्कि जल संरक्षण और कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हुई। अब डबरी में वर्षा जल का संचयन होने से वर्षभर खेतों की सिंचाई सुचारू रूप से हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने मत्स्य पालन एवं पशुपालन शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आमदनी का स्रोत भी बना।
दुलार सिंह बताते हैं कि मनरेगा योजना के अंतर्गत डबरी निर्माण से अब मेरी खेती सिंचित हो रही है। इससे धान के साथ-साथ मेढ़ पर सब्ज़ियाँ भी उगा पा रहा हूँ। डबरी में रोहू एवं पंगास मछली 2 कि.ग्रा. मछली के बीज डाले गये है। आगामी माह में मछली 01 किलो होने के बाद इन्होने बाजार में बिक्री करेंगे, जिससे आमदनी प्राप्त होगी। दुलार सिंह अपने निर्मित डबरी के मेंड़ पार पर हल्दी एवं तिल का फसल लगाया हुआ है, जिसे वह हल्दी एवं तिल को अपने घर के लिये उपयोग करेंगे। मत्स्य पालन और पशुपालन से घर की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्राम पंचायत सरपंच एवं रोजगार सहायक ने बताया कि इस कार्य से गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिली है। ग्रामीण अब अपनी भूमि पर जल संरक्षण संरचनाएँ बनवाने हेतु आगे आ रहे हैं। इस डबरी निर्माण कार्य ने न केवल दुलार सिंह के जीवन में स्थायी आजीविका का आधार तैयार किया है, बल्कि यह मनरेगा के उद्देश्य रोजगार के साथ स्थायी संपत्ति निर्माण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।
किसी भी एजेंसी पर टिप्पणी करना पैशन हो गया है भूपेश बघेल का : अजय चंद्राकर
रायपुर। व्यापारी हेमंत चंद्राकर को लेकर किए गए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पोस्ट पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने हमला बोला है. उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल का किसी भी एजेंसी पर टिप्पणी करना पैशन हो गया है. कहने को वो राजनीतिक नेता है, मगर उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. जनहित के मुद्दों से कांग्रेस वर्षों से कट चुकी है.
बिना लाग-लपेट के तीखी टिप्पणी के लिए जाने जाने वाले भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के पोस्ट पर निशाना तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को पाक-साफ रखने, किसी न किसी को जिम्मेदार बताना पड़ेगा, इसलिए कांग्रेस एजेंसियों को जिम्मेदार बता रही है. गांधी परिवार के कारण हारे, ऐसा कहना कांग्रेसियों के लिए ब्रह्महत्या के बराबर का पाप है. वहीं संगठन सृजन अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में आदमी और कार्यकर्ता बचे नहीं हैं, पार्टी में जितने लोग हैं, सभी दावेदार हैं. कांग्रेस की बदहाली के लिए सहानुभूति व्यक्त की जा सकती है. कांग्रेस की अंत्येष्टि करने छत्तीसगढ़ में उनकी पर्याप्त संख्या है. 12 बिंदु, 24 बिंदु, 36 बिंदु या चाहे जितना लंबा पहाड़ा गिन लें, चेहरों को उबारने का कोई तरीका कांग्रेस के पास है क्या? कांग्रेस में सभी चेहरों पर कालिख लगी हुई है.
बिहार चुनाव के लिए भूपेश बघेल की भूमिका को लेकर विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस में सीनियर ऑब्जर्वर बना दें या कुछ भी बना दें. सवाल यह है कि कितनी सीटें लाएंगे. बड़े भाई की भूमिका निभाएंगे, या छोट भाई की. बीजेपी नेताओं की जहां ड्यूटी लगती है, वहां जाते हैं. वहीं एनएसयूआई के प्रदर्शन पर विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि क्या एनएसयूआई के लोग पढ़ना-लिखना बंद कर चुके हैं? क्या एनएसयूआई के पास शैक्षणिक मामले नहीं है? गृहमंत्री से कहूंगा कि बच्चों पर कार्रवाई ना करे.
ED के अधिकारी पर मारपीट के आरोप मामले में हुई सुनवाई
रायपुर। कारोबारी हेमंत चंद्राकर ने ईडी के अधिकारी पर पूछताछ के नाम पर मानसिक प्रताड़ना और मारपीट करने का आरोप लगाया है. पीड़ित की याचिका पर आज हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष से कहा कि अपना बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराएं. साथ ही ईडी अधिकारी (आरोपी) के खिलाफ एक आवेदन दाखिल करने और मेडिकल जांच के लिए भी एक आवेदन पेश करने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने उच्च न्यायालय का आभार जताया है और भाजपा पर निशाना साधा है.

भूपेश बघेल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि ED के अधिकारियों द्वारा व्यापारी हेमंत चंद्राकर की बेरहमी से की गई पिटाई और अत्याचार पर पीड़ित की दायर याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सक्षम मजिस्ट्रेट की अदालत में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए. साथ ही अदालत के माध्यम से हेमंत चंद्राकर का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए. इससे प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि ईडी जैसी एजेंसी गलत तरह से काम कर रही है. ED के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस के उन “कमल छाप” जिम्मेदारों को भी संभल जाना चाहिए, जो कानून के खिलाफ जाकर षड्यंत्र का हिस्सा बन रहे हैं. समय बीतेगा. सवेरा होगा.
ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और सौरभ पांडे ने पक्ष रखा, जबकि हेमंत चंद्राकर (याचिकाकर्ता) की तरफ से पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा और गगन तिवारी ने पैरवी की. हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. हेमंत के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ मारपीट की गई है. वहीं ईडी की तरफ से कहा गया कि कोई थर्ड डिग्री टॉर्चर नहीं किया गया है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ED के वकील का बयान रिकॉर्ड कराया.
जानिए पूरा मामला
दरअसल, कांग्रेस नेता हेमंत चंद्राकर को 29 सितंबर को सुबह 10:30 बजे पूछताछ के लिए रायपुर स्थित ED कार्यालय बुलाया गया था. पूछताछ रात 8:30 बजे तक चली. चंद्राकर का आरोप है कि सभी को जाने दिया, लेकिन मुझे रोक लिया गया. प्रताड़ित करने के बाद अगले दिन फिर से आने को कहा गया. हेमंत चंद्राकर ने यह भी आरोप गया है कि ED के अधिकारी ने मुझसे जबरन पूर्व सीएम भूपेश बघेल, विजय भाटिया, रामगोपाल वर्मा, आशीष वर्मा, मंदीप चावला और उनके एजेंट आदित्य अग्रवाल, शास्वत जैन, किशोर चंद्राकर, सतपाल सिं छाबड़ा का नाम लेकर स्वीकार करने बोला गया कि ये लोग 60 प्रतिशत कमीशन के जरिए काम कर रहे हैं.
हेमंत ने यह भी कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है. शिकायत में लिखा गया है कि अधिकारी अवैध तरीके से बयान लेने का प्रयास कर रहे हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है. पीड़ित हेमंत ने सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी.
नारायणपुर फेक एनकाउंटर मामले में रामचंद्र रेड्डी के बेटे की याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
बिलासपुर। अबूझमाड़, नारायणपुर जिले में 23 सितंबर को हुई कथित फेक एनकाउंटर में मारे गए माओवादी कमांडर रामचंद्र रेड्डी के बेटे ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पिता की मौत वास्तविक एनकाउंटर में नहीं हुई, बल्कि पुलिस कस्टडी में हुई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि मामले की जांच राज्य के बाहर के किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए। याचिका में बताया गया है कि मृतक पर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन उसे कथित एनकाउंटर के नाम पर मार दिया गया।
मामले की सुनवाई आज हाईकोर्ट में हुई। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीरता दिखाई और राज्य शासन से जवाब मांगा। इसके अलावा, न्यायालय ने मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में होने वाली है। इस मामले की संवेदनशीलता के कारण सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया था। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को नारायणपुर जिले में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए रामचंद्र रेड्डी के शव को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा था कि जब तक हाईकोर्ट इस याचिका पर फैसला नहीं करता, तब तक शव का दाह संस्कार या अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
रामचंद्र रेड्डी को राज्य सरकार ने माओवादी कमांडर बताया था, जिस पर सात राज्यों में लगभग 2 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। 22 सितंबर को नक्सल विरोधी अभियान के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस ने एनकाउंटर में उन्हें ढेर कर दिया। इसी मुठभेड़ में एक अन्य माओवादी कादरी सत्यनारायण रेड्डी को भी मार दिया गया। रामचंद्र रेड्डी के बेटे ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और शव को सुरक्षित रखने की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर हाईकोर्ट से विचार करने का निर्देश दिया और कहा कि दशहरा की छुट्टियों के बाद इसे शीघ्र निपटाया जाए।
आज हुई हाईकोर्ट सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता को पुलिस कस्टडी में हिरासत में लेकर मारा गया और एनकाउंटर की घटना केवल दिखावे के लिए पेश की गई। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच राज्य के बाहर किसी स्वतंत्र अधिकारी या संस्था से कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्यों का खुलासा हो सके। हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शासन से त्वरित जवाब मांगा और कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दस्तावेज जल्द प्रस्तुत किए जाएँ। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि शव को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है और किसी भी तरह का अंतिम संस्कार तब तक नहीं होगा जब तक न्यायालय इस याचिका पर निर्णय नहीं करता।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला राज्य में माओवादी विरोधी अभियान और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर सकता है। राज्य पुलिस का दावा है कि यह एनकाउंटर वास्तविक था और आतंकवाद और नक्सली गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का हिस्सा था। वहीं याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि वास्तविक तथ्यों को छुपाया गया और उनके पिता की हत्या पुलिस हिरासत में हुई। रामचंद्र रेड्डी का एनकाउंटर, जिसे पुलिस ने मुठभेड़ के रूप में प्रस्तुत किया, इस मामले में पूरे राज्य और केंद्र में चर्चा का विषय बन गया। हाईकोर्ट की सुनवाई और स्वतंत्र जांच की मांग के बाद अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और वास्तविक घटनाक्रम उजागर होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच, राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग को भी हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने और सभी आवश्यक दस्तावेज पेश करने के लिए निर्देशित किया गया है। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने वाली है, जिसमें चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच इस याचिका पर अपना निर्णय सुनाएगी।
भारत के पैरा-एथलीट्स ने रचा नया इतिहास – वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में जीते 22 पदक, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं
रायपुर। नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत के पैरा-एथलीट्स ने अदम्य जज़्बे और अथक परिश्रम के बल पर विश्व पटल पर नया इतिहास रच दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय दल ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 6 स्वर्ण, 9 रजत और 7 कांस्य सहित कुल 22 पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय पैरा-एथलीट्स के इस गौरवपूर्ण प्रदर्शन पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि हमारे पैरा-एथलीट्स ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब संकल्प अडिग हो और मेहनत निरंतर, तब कोई भी मंज़िल असंभव नहीं होती। यह प्रदर्शन न केवल खेल जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी विजेता खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता “नए भारत की नई उड़ान” का सजीव उदाहरण है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को अपने पैरा-एथलीट्स पर गर्व है, जिन्होंने दुनिया के सामने भारतीय जज़्बे की नई परिभाषा लिखी है।
प्रदेश के स्कूलों में होगा सामाजिक अंकेक्षण, सभी DEO को निर्देश जारी…
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत प्रदेश भर के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में सामाजिक अंकेक्षण कराने के निर्देश जारी किए हैं। यह अंकेक्षण 6 से 8 अक्टूबर 2025 के बीच किसी भी उपयुक्त तिथि को किया जाएगा।
इस संबंध में राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और जिला मिशन समन्वयकों को निर्देश दिए गए हैं।
जारी निर्देश में कहा गया है कि राज्य के सभी शासकीय स्कूलों में निकट के स्कूल से चयनित टीम लीडर के माध्यम से एक टीम बनाकर समुदाय के सामने स्कूलों में बेहतर शिक्षा के लिए सामाजिक अंकेक्षण आयोजित किया जाए। प्रत्येक स्तर के लिए 20-20 प्रश्नों की प्रश्नावली सभी जिलों के माध्यम से स्कूलों तक उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सामाजिक अंकेक्षण टीम का प्रशिक्षण शाला संकुल प्राचार्य के माध्यम से पहले ही आयोजित किया जा चुका है। इसके अलावा, प्रत्येक स्तर के टूल और अंकेक्षण प्रक्रिया को समझने के लिए वीडियो गाइड भी सभी जिलों को उपलब्ध करवा दी गई है, जिसे अच्छी तरह से समझ कर ही सामाजिक अंकेक्षण का आयोजन करना होगा।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि सामाजिक अंकेषण के दौरान दिए गए बिंदुओं का पालन सभी स्कूलों में सुनिश्चित किया जाए, ताकि इस पूरी प्रक्रिया के बेहतर परिणाम आ सके।
छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा का परिणाम घोषित
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल द्वारा आयोजित हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा (अगस्त 2025) का परिणाम आज दिनांक 06 अक्टूबर 2025 को घोषित किया गया। छात्र अपने परीक्षा परिणाम आधिकारिक वेबसाइट https://www.sos.cg.nic.in पर देख सकते हैं।
हाई स्कूल परीक्षा में कुल 19,249 छात्रों का पंजीयन हुआ, जिसमें से 17,834 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। 13 परीक्षार्थियों का परीक्षाफल विभिन्न कारणों से रोका गया है। इस प्रकार 17,821 परीक्षार्थियों का परिणाम जारी किया गया।
हायर सेकेंडरी परीक्षा में कुल 15,036 छात्रों का पंजीयन हुआ, जिनमें से 14,269 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। इनमें से 2,540 छात्र RTD योजना के अंतर्गत सम्मिलित हुए। 11 परीक्षार्थियों का परीक्षाफल विभिन्न कारणों से रोका गया है, जबकि 11,718 परीक्षार्थियों का परिणाम जारी किया गया।
हाई स्कूल परीक्षा में 30.02 प्रतिशत तथा हायर सेकेंडरी परीक्षा में 46.28 प्रतिशत छात्र सफल घोषित किए गए हैं।
“प्रोजेक्ट दक्षः हम होंगे स्मार्ट”- कर्मचारियों को मिल रहा डिजिटल दक्षता का प्रशिक्षण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप “प्रोजेक्ट दक्ष“ जिले के शासकीय कार्यों को नई दिशा और गति प्रदान कर रहा है। इस पहल से अधिकारी-कर्मचारी डिजिटल सशक्तिकरण की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
आज कलेक्टोरेट स्थित बीपीओ मल्टीलेवल पार्किंग में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में धरसीवां ब्लॉक के सहायक शिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कंप्यूटर और मोबाइल के मूल उपयोग, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डिजिटल डॉक्यूमेंट प्रबंधन, ईमेल तथा अन्य आवश्यक ऑनलाइन टूल्स की जानकारी दी गई।
“प्रोजेक्ट दक्ष” का उद्देश्य कर्मचारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति और प्रभावशीलता लाना है। इस प्रयास से शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और अधिक सरल, पारदर्शी एवं स्मार्ट बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।
कांग्रेस का कोई भी घोड़ा टिकने वाला नहीं है - मंत्री रामविचार नेताम
रायपुर। कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की दावेदारी को लेकर मंत्री रामविचार नेताम ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि सब घोड़े एक जगह जमा हो गए हैं. सभी घोड़े की स्थिति खराब है. कांग्रेस का कोई भी घोड़ा टिकने वाला नहीं है. भाजपा का रथ बहुत तेजी के आगे बढ़ रहा. जिसे रोकने का किसी में ना ही दुस्साहस है और ना ही क्षमता.
धान खरीदी को लेकर मंत्री नेताम का बड़ा बयान
छत्तीसगढ़ में जल्द ही धान खरीदी की शुरुआत होने वाली है. कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत होगी. सरकार किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी करेगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में लगातार बारिश हो रही है. इसके बाद धान खरीदी की शुरुआत करेंगे.
बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सहयोग केंद्र की शुरूआत
मंत्री रामविचार नेताम ने आज फिर से ठाकरे परिसर में सहयोग केंद्र की शुरूआत को लेकर कहा कि पहले की सरकार में भी सहयोग केंद्र खोले गए थे. यहां बारी-बारी से मंत्रियों की ड्यूटी लगती है. कार्यकर्ता अपनी समस्याओं को रखते हैं. सहयोग के माध्यम से निराकरण किया जाता है.
अशोका हॉस्पिटल पर निगम ने लगाया 50 हज़ार का जुर्माना
रायपुर। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने पर नगर निगम ने पंडरी रायपुर स्थित अशोका हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई की है. मेडिकल वेस्ट को बाहर फेंकने पर अस्पताल पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है.
नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर प्रीति पाणिग्रही ने बताया कि आयुक्त के आदेश एवं प्राप्त जनशिकायत पर अशोका हॉस्पिटल पंडरी का निरीक्षण किया गया. जांच में शिकायत सही पाई गई. अशोका हॉस्पिटल पंडरी परिसर के सामने वेस्ट पाइप लाइन टूटा पाया गया, जिसमें अस्पताल का दूषित जल का रिसाव हो रहा है.

स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन पर 50000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. साथ ही व्यवस्था नहीं सुधारने पर सीलबंद की कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है.
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा – बेवजह पति से अलग रह रही महिला को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, जानिए पूरा मामला
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अगर पत्नी बिना वजह अपने पति से अलग रह रही है तो वो भरण-पोषण के लिए हकदार नहीं है। पति से अलग रहने के लिए पत्नी के पास पर्याप्त और ठोस आधार होना जरूरी है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने रायगढ़ की एक महिला की गुजारा भत्ता मांगने की मांग की अपील को खारिज करते हुए सुनाया। उन्होंने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
बता दें कि रायगढ़ की महिला ने अपने पति से भरण पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था, जिसमें बताया गया कि उनकी शादी 21 जून 2009 में हुई। 26 फरवरी 2011 को उनके जुड़वां बेटे हुए। पत्नी का आरोप है कि पति और उसके परिजन दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। बाद में पति ने उसे मायके में छोड़ दिया।
पति ने कहा – बिना किसी वजह के अलग रह रही पत्नी
महिला ने आर्थिक संकट के चलते पति से भरण-पोषण दिलाने की मांग की। साथ ही कहा कि पति भिलाई में कपड़े का व्यवसाय करता है और हर माह करीब 70 हजार रुपए कमाई है। इस आधार पर पति उसे हर माह 20 हजार रुपए गुजारा भत्ता दे। वहीं पति ने पत्नी के आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि पत्नी बिना किसी वजह के अलग रह रही है। उसे और उसके माता-पिता को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद रायगढ़ की फैमिली कोर्ट ने 27 सितंबर 2021 को महिला की अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि महिला के पास अलग रहने का कोई उचित कारण नहीं है।
महिला ने पति पर घरेलू हिंसा का लगाया था आरोप
महिला ने पति और उसके परिजनों पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। इस मामले में रायगढ़ के जेएमएफसी कोर्ट ने पति और उसके परिजनों को बरी कर दिया था। फैमिली कोर्ट के आदेश में इसका भी उल्लेख किया गया था। हालांकि महिला ने जेएमएफसी कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जो मामला अभी लंबित है।
चीफ जस्टिस ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
महिला की याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि सबूतों से साफ है कि महिला अपनी इच्छा से अलग रह रही है और जब तक वह अलग रहने का उचित कारण साबित नहीं करती, तब तक वह भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से की मुलाकात
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से सौजन्य भेंट की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के रजत जयंती वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर 5 नवम्बर को नया रायपुर में आयोजित राज्योत्सव के समापन समारोह में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्नेहपूर्वक छत्तीसगढ़ आगमन की सहमति प्रदान की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव, सम्मान और अपार हर्ष का विषय है कि देश के उपराष्ट्रपति अपनी गरिमामयी उपस्थिति से राज्योत्सव के समापन समारोह को अविस्मरणीय बनाएंगे।
इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह उपस्थित थे।
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप देना पूर्णतः प्रतिबंधित
रायपुर। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, यह दवाएं सामान्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी अनुशंसित नहीं हैं। यह कदम शिशुओं को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एडवाइजरी जारी होते ही छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) तथा सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि भारत सरकार की इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
साथ ही आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि खांसी या सर्दी की दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर आधारित होना चाहिए, तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में बच्चों में खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाती हैं और इसके लिए दवा देना आवश्यक नहीं होता। इसलिए आम जनता को भी डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवाएं न देने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
कड़ी निगरानी में है औषधि आपूर्ति प्रणाली
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई की गई है, उनकी राज्य में किसी भी प्रकार की सरकारी आपूर्ति नहीं रही है। ये कंपनियाँ सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत भी नहीं हैं। यह तथ्य राज्य में सरकारी स्तर पर आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता और सतर्कता की पुष्टि करता है।
निर्माण इकाइयों और निजी औषधालयों का निरीक्षण तेज
भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव द्वारा 5 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के पश्चात, छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। राज्यभर में औषध निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection) करने हेतु औषधि निरीक्षकों के दल गठित किए गए हैं।
प्रदेश के सभी सहायक औषधि नियंत्रकों और औषधि निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे सभी औषधि विक्रय संस्थानों का तत्काल निरीक्षण करें, ताकि एडवाइजरी के उल्लंघन की कोई संभावना न रहे। इसके साथ ही निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जा रहा है। इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की दवाओं का अनुचित या असावधानीपूर्वक उपयोग पूर्णतः बंद हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपने बच्चों को कोई भी दवा न दें।
CBI ने समाज कल्याण विभाग से फर्जी NGO की फाइल को कब्जे में लिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद आज CBI की टीम ने समाज कल्याण विभाग के माना स्थित दफ्तर पहुंची। इस दौरान टीम ने विभाग के उप संचालक से मुलाकात की और घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर अपने साथ ले गई। यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान (SRC) से जुड़े करीब 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश के बाद की गई। यह NGO आईएएस अधिकारियों द्वारा बनाया गया था।
बता दें कि 24 सितंबर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच (जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल) ने इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए कहा था कि यह मामला स्थानीय एजेंसियों या पुलिस जांच के लायक नहीं है। कोर्ट ने इसे संगठित और सुनियोजित अपराध मानते हुए सीबीआई को 15 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया था।
इन अधिकारियों पर लगे आरोप
इस घोटाले में 6 IAS अधिकारियों विवेक ढांड (पूर्व मुख्य सचिव), आलोक शुक्ला, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल और पीपी सोती के अलावा कई राज्य सेवा अधिकारियों पर भी आरोप लगे हैं। इनके नाम में सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा शामिल हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला
यह घोटाला एक जनहित याचिका (PIL) 2017 के माध्यम से सामने आया, जिसे रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने दायर किया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान नाम की संस्था केवल कागजों में ही मौजूद थी और इसके माध्यम से 2004 से 2018 तक राज्य को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
याचिका में यह भी बताया गया कि खुद याचिकाकर्ता को एक शासकीय अस्पताल में कर्मचारी बताया गया, लेकिन आरटीआई के माध्यम से जानकारी लेने पर पता चला कि रायपुर स्थित यह कथित अस्पताल एक एनजीओ द्वारा संचालित किया जा रहा था।
जांच में सामने आए घोटाले के तरीके
स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) के बैंक खाते से Bank of India और SBI मोतीबाग शाखा – के माध्यम से फर्जी आधार कार्ड बनाकर करोड़ों रुपये निकाले गए।
अस्पताल के लिए खरीदी गई मेडिकल मशीनरी और रखरखाव में करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
तात्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने शपथ-पत्र में 150-200 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का खुलासा किया।
