प्रदेश
शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण पर सरकार का फोकस, मंत्री रामविचार नेताम ने गिनाईं आदिम जाति विकास विभाग की उपलब्धियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम ने प्रेस कांफ्रेंस में अपने विभाग की उपलब्धियां बताई। मंत्री नेताम ने कहा, विभाग प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक तथा आर्थिक उन्नति के साथ-साथ उनके सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन एवं सामाजिक न्याय प्रदान करने प्रतिबद्ध है। इसके अलावा विभाग इनकी शैक्षिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए योजनाबद्ध तरीकों से अनेक योजनाओं का सतत् क्रियान्वयन कर रहा है। परिणामस्वरुप अनेक क्षेत्रों में आशातीत सफलताएं मिली है।
मंत्री नेताम ने कहा, प्रदेश में निवासरत 43 विभिन्न अनुसूचित जनजातियों एवं उनके उपसमूहों, जो कुल जनसंख्या का 30.62 प्रतिशत है, के लिए आदिम जाति विकास विभाग द्वारा अनेक अभिनव योजनाएं संचालित की जा रही है। प्रदेश में अनुसूचित क्षेत्र 60 प्रतिशत से अधिक है तथा आदिवासी उपयोजना क्षेत्र 65 प्रतिशत से अधिक है। इन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। अतः जनजाति समुदायों के शैक्षणिक उत्थान के साथ ही कौशल विकास, आजीविका स्वरोजगारमूलक योजनाओं तथा अधोसंरचना विकास के माध्यम से शैक्षणिक उन्नयन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक प्रोत्साहन तथा समावेशी विकास के साथ सामाजिक समरसता स्थापित करना विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य के आदिवासी अंचलों के शैक्षिक विकास, आर्थिक उत्थान एवं सांस्कृतिक प्रोत्साहन की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं।
जनजातीय प्रतिभाओं ने शिक्षा, खेल एवं आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों के विकास को नई दिशा प्रदान की है। आदिवासी उपयोजना के माध्यम से भी विभाग आदिवासी क्षेत्रों का विकास के लिए कटिबद्ध है। आदिवासी उपयोजना क्षेत्रों तथा आदिवासी बाहुल्य जनसंख्या वाले क्षेत्रों में स्थानीय विकास व अधोसंरचना निर्माण के कार्यों को गतिशील करने के लिए राज्य में बस्तर विकास प्राधिकरण एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण के साथ-साथ नवगठित मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के माध्यम से अनुकरणीय प्रयास हुए हैं।
उन्होंने कहा, अनुसूचित वर्गो की अस्मिता तथा सम्मान के प्रति विभाग प्रारंभ से ही सजग रहा है। इसी के फलस्वरुप नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम में प्रदेश से अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी वीरनारायण सिंह की पावन स्मृति में प्रदेश के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को दर्शाने स्मारक सह संग्रहालय की स्थापना की गई है। आदिवासी विकास परियोजनाओं, माडा तथा अभिकरणों की स्वशासी समितियों तथा जनजातीय सलाहकार परिषद के मार्गदर्शन में अभिनव योजनाओं का निर्माण एवं संचालन इस विभाग द्वारा कियेए गए नवाचार के प्रमाण हैं।
कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: धमतरी में विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह शुरू
रायपुर। धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।
यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा
अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।
बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है। सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।
लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी, 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 1835 करोड़ रुपये
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भिंड जिले के लहार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में 1835 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। इस दौरान उन्होंने भिंड जिले को 322 करोड़ रुपये की लागत वाले 56 विकास कार्यों की सौगात भी दी, जिनमें चार सांदीपनि विद्यालयों के नए भवनों का लोकार्पण शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं परिवार की रीढ़ हैं और उनके सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को सशक्त बनाना अपनी प्राथमिकता मानते हैं और मध्यप्रदेश सरकार भी इसी दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की क्रांतिकारी पहल बताया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने लहार में महाविद्यालय स्तर पर पीजी कक्षाओं के विस्तार की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीबों के कल्याण के लिए लगातार योजनाएं चला रही है तथा युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाने का लक्ष्य है।
डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू की जाएगी, जिससे आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भिंड और चंबल क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। शिवपुरी में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी आधुनिक मिसाइल इकाई की पहल और अन्य विकास परियोजनाएं इस क्षेत्र को नई पहचान देंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे इसी माह लागू करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए गठित समिति ने विभिन्न वर्गों और संगठनों से सुझाव प्राप्त किए हैं।
उन्होंने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, गौशालाओं के विस्तार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, उद्योगों के विकास और प्रदेश में कम बेरोजगारी दर का भी उल्लेख किया। साथ ही नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन और ग्रामीण क्षेत्रों में वृंदावन ग्राम की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, विधायक अंबरीश शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए, योजनाओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और लाड़ली बहनों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
भिंड प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेहगांव तहसील स्थित दंदरौआ सरकार धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के महंत श्री 1008 रामदास जी महाराज से भेंट भी की।
24 घंटे में मिली ट्राइसाइकिल, मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव के जीवन को मिली नई रफ्तार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।
उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।
ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गणेश राम यादव की भाभी चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।
अपोलो अस्पताल की बढ़ीं मुश्किलें, तोखन साहू ने नियम उल्लंघन और योजनाओं का लाभ नहीं देने की शिकायत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से की
लोरमी। बिलासपुर के प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल की मुश्किलें बढ़ते जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की अस्पताल में छापेमार कार्रवाई के बाद अब केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में अपोलो अस्पताल की नियमों के उल्लंघन और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं देने की शिकायत की है.
दरअसल, लोरमी प्रवास के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि शासन की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना ही उनका प्रयास है. उन्होंने बताया कि अपोलो अस्पताल द्वारा किए जा रहे नियमों के उल्लंघन और मनमानी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा गया है.
तोखन साहू ने पत्र में जिक्र किया कि छत्तीसगढ़ और देश के विभिन्न राज्यों से मरीज अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं. यहां आयुष्मान और खूबचंद बघेल स्कीम जैसी विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ न मिलने से गरीब परिवारों को भारी मानसिक के साथ-साथ आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से कड़े निर्देश जारी करने की मांग की है.
दो दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने मारा था छापा
रायपुर और बिलासपुर से स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने 11 जुलाई को बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में जांच के लिए पहुंची थी. कार्रवाई के दौरान अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज, भर्ती और उपचार की प्रक्रिया, चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ-साथ अस्पताल के आय-व्यय का भी बारीकी से परीक्षण किया गया.
एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए नहीं दी अस्पताल की एंबुलेंस
अपोलो अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को हैदराबाद रेफर करने की प्रक्रिया के दौरान अस्पताल प्रबंधन पर कथित लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं. मरीज के परिजनों का दावा है कि समय पर समुचित चिकित्सा समन्वय नहीं होने के कारण एयर एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को उसी दिन हैदराबाद नहीं भेजा जा सका. इससे मरीज की हालत और गंभीर हुई.
पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल लगभग 12 दिन पहले दोस्तों के साथ कोलकाता घूमने गए थे. यात्रा के दौरान उनकी तबीयत खराब होने लगी. बिलासपुर लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. बुधवार दोपहर डाक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी. इसके बाद स्वजन ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर हैदराबाद के लिए एयर एंबुलेंस बुक की, जो बुधवार शाम करीब सात बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई.
आरोप है कि मरीज को एयरपोर्ट ले जाने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. अस्पताल परिसर में एंबुलेंस होने के बावजूद उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा गया. साथ ही मरीज के साथ अस्पताल की ओर से न तो कोई डाक्टर भेजा गया और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था. एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की तबीयत बिगड़ गई, डाॅक्टरों की टीम ने हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया. इस वजह से मरीज को वापस अपोलो लाना पड़ा.
देर रात अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज के लिए विशेष फेफड़ा (लंग्स) सपोर्ट सिस्टम और नई विशेषज्ञ मेडिकल टीम की आवश्यकता बताई. गुरुवार को सुबह हैदराबाद से तीन सदस्यीय टीम अपोलो पहुंची. पूरे दिन मरीज को स्थिर करने के बाद शाम करीब सात बजे उसे दोबारा एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया. हालांकि इस बार भी निजी एंबुलेंस का इस्तेमाल किया गया, लेकिन हैदराबाद से आई टीम ने पहले एंबुलेंस और उसकी चिकित्सा व्यवस्था की जांच की, उसके बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी.

राम मंदिर चंदा विवाद पर विधानसभा में सियासी संग्राम, चर्चा की मांग पर गरमाया सदन, कल तक के लिए स्थगित
रायपुर। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ विधानसभा पक्ष और विपक्ष के बीच नोंक-झोक हुई. मुद्दे पर भारी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कल तक लिए स्थगित कर दी गई. सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने आज के दिन को छत्तीसगढ़ के इतिहास का काला दिन बताते हुए राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच सीबीआई से कराने की मांग की.
स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य होने के बाद विपक्ष के हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू होते ही फिर से सत्तापक्ष और विपक्ष ने तीखी नोक-जोख होने लगी. सदन में दोनों तरफ से जय श्री राम के नारे लगे. एक तरफ जहां कांग्रेस विधायकों ‘पाकिट मारना बंद करो’ नारे लगा रहे थे, तो वहीं दूसरे ओर सत्ता पक्ष के विधायक ‘पाप धोने अगोध्या जाओ’ कहकर विपक्ष पर तंज कस रहे थे. स्थिति को देखते हुए स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी.
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि आज छत्तीसगढ विधानसभा में जो हुआ, वह करोड़ों राम भक्त के लिए काला दिन है. हमने राम मंदिर में हुई लूट पर चर्चा की मांग की थी. हम विपक्ष के साथी भक्तों की बात रखना चाहते थे, लेकिन हमें चर्चा की अनुमति नहीं दी गई. हर छत्तीसगढ़िया व्यक्ति का चंदा गया है. 1 रुपये लेकर लाखों रुपये का चंदा दिया गया. हम इस पर जाँच की मांग करते हैं. चंदा चोरी की जांच सीबीआई से होनी चाहिए.
छत्तीसगढ़ में इसी सत्र से खुलेंगे 5 नए मेडिकल कॉलेज, NMC ने दी मंजूरी
रायपुर। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।
मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र: लता उसेंडी ने उठाया महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड-डीएड और भर्ती का मुद्दा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र की शुरुआत आज से हो गई है। पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने, विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर भर्ती और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से सवाल किए।
महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जवाब
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में भर्ती से संबंधित वर्तमान में किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
इस पर विधायक लता उसेंडी ने पूछा कि जब उत्तर में मामले के निराकरण की बात कही गई है, तो विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड की कक्षाएं क्यों संचालित नहीं हो रही हैं। जवाब में मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अभी बीएड और डीएड के नए पाठ्यक्रम शुरू नहीं किए गए हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत इन पाठ्यक्रमों को चार वर्षीय स्वरूप में संचालित किया जाएगा।
नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सवाल-जवाब
लता उसेंडी ने आगे पूछा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रदेश के किन-किन विश्वविद्यालयों में लागू की गई है और क्या महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भी इसे लागू किया गया है। इस पर मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में लागू है और महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय भी इससे अछूता नहीं है।
हालांकि, विधायक उसेंडी ने दावा किया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय प्रदेश का एक महत्वपूर्ण विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं को देखते हुए नया सांख्यिकी विभाग खोला जा रहा है तथा संस्थान ने आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू भी किया है।
रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
विश्वविद्यालय में रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए लता उसेंडी ने कहा कि विश्वविद्यालय में कुल 265 पद स्वीकृत हैं, लेकिन नियुक्तियां बहुत कम हुई हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया और उसकी जांच कराने वाली एजेंसी के संबंध में भी जानकारी मांगी।
मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुल 31 विभागों में से अभी पांच विभाग प्रारंभ नहीं हुए हैं। 146 पदों के विरुद्ध 113 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतें वर्तमान भर्ती से संबंधित नहीं, बल्कि पूर्व अवधि की थीं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी गई थी और शिकायतें निराधार पाए जाने पर उनका निराकरण कर दिया गया।
चार वर्षीय बीएड-डीएड पाठ्यक्रम पर सरकार की तैयारी
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी प्रदेश में चार वर्षीय बीएड और डीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में सरकार की तैयारी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह सही है कि प्रदेश के कई महाविद्यालय आवश्यक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियम अलग हैं। राज्य में नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया तय करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो इस संबंध में आवश्यक सुझाव देगी।
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में तबादला: तारकेश्वर पटेल बनाए गए DCP सेंट्रल, दीपमाला को मिली उत्तर की कमान, चार थाना प्रभारी भी हुए इधर से उधर
रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्तों का तबादला हुआ है। तारकेश्वर पटेल को DCP सेंट्रल जोन कमिश्नरेट बनाया गया है। दीपमाला कश्यप को नार्थ जोन डीसीपी कमिश्नरेट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अर्चना झा डीसीपी ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल कमिश्नरेट बनाई गई है, जिसका आदेश रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने जारी कर दिया है।
इसके साथ ही थाना प्रभारियों का भी तबादला किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, निरीक्षक सतीश सिंह गहरवार को थाना प्रभारी कोतवाली के साथ एसीसीयू प्रभारी (क्राईम ब्रांच) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। राजेश सिंह आजाद चौक थाना प्रभारी बनाए गए, पारसराम पटेल को सरस्वती नगर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई और नरेंद्र साहू को गुढ़ियारी थाना प्रभारी बनाया गया है।


छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र: प्रदेश के 746 गांवों का अब तक नहीं हुआ सर्वेक्षण
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत गांवों के बंदोबस्त का मामला उठा. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव के सवाल के जवाब में बताया कि प्रदेश में 746 ग्राम असर्वेक्षित है, जिसमें से 371 ग्राम में सर्वेक्षण प्रक्रियाधीन है. वहीं 375 ग्राम में सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है.
सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने राजस्व मंत्री से पूछा कि छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत किसी भी गाँव का बंदोबस्त हर कितने साल में होना होता है? राज्य में ऐसे कितने गाँव हैं, जिनका बंदोबस्त राज्य गठन सन् 2000 के बाद से अब तक नहीं हुआ है? जिलेवार जानकारी दें? ऐसे गाँवों का बंदोबस्त नहीं होने के लिए कौन जिम्मेदार है, और इन गाँवों के बंदोबस्त कब तक कर लिए जाएंगे?
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत किसी भी गाँव का सर्वेक्षण एवं भू-राजस्व का निर्धारण सामान्यत 30 साल में होना होता है. राज्य में कुल 20551 राजस्व ग्राम हैं जिसमें से 19805 ग्राम सर्वेक्षित है. 746 ग्राम असर्वेक्षित है, जिसमें से 371 ग्राम में सर्वेक्षण प्रक्रियाधीन है, एवं 375 ग्राम में सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है.
उन्होंने सर्वेक्षण का कार्य चरणबद्ध रूप से स्वीकृत योजना, वित्तीय प्रावधान, तकनीकी संसाधन की उपलब्धता के आधार पर संपादित किया जाता है. अतः ऐसे गावों का सर्वेक्षण नहीं होने के लिये किसी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता. शेष गांवों के सर्वेक्षण की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है.
छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र: डॉ. तीजन बाई को दी गई श्रद्धांजलि, सीएम साय ने पंडवानी गायिका को बताया छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
महतारी वंदन योजना: बालोद जिले की महिलाओं को मिली 29वीं किस्त की सौगात, मुख्यमंत्री साय का महिलाओं ने जताया आभार
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना की 29वीं किस्त की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की। राशि प्राप्त होने के बाद बालोद जिले की लाभार्थी महिलाओं में खुशी का माहौल है। महिलाओं ने योजना को आर्थिक संबल देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
बालोद जिले के विभिन्न ग्रामों की महिलाओं ने बताया कि योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे स्वरोजगार संबंधी कार्यों में आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया है।
दवाइयों, स्कूल फीस, दैनिक खर्च में बनी मददगार
ग्राम बघमरा की देवकी विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें 29वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है। वे इस राशि का उपयोग घर के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं। ग्राम जगन्नाथपुर की जामवंती विश्वकर्मा ने कहा कि हर महीने मिलने वाली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। वहीं ग्राम ओरमा की राधिका सोनवानी ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है।
विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन का बनी मजबूत आधार
लाभार्थी महिलाओं ने अपने मोबाइल पर प्राप्त राशि का संदेश दिखाते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम, आज से तेज होगी बारिश की गतिविधियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल रहा है। प्रदेश के मध्य क्षेत्रों में गर्मी और उमस बढ़ गई है, जबकि सरगुजा और बस्तर संभाग के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। राजधानी रायपुर में रविवार को बारिश नहीं होने से लोगों को दिनभर उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। हालांकि मौसम विभाग ने 13 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई है। अगले पांच दिनों तक उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
रायपुर का मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, रायपुर में 13 जुलाई को आसमान सामान्यतः बादलों से ढका रहेगा। गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। शहर का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
प्रदेश में मौसम की स्थिति
रविवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं पेंड्रा रोड में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून द्रोणिका श्रीगंगानगर, हिसार, मेरठ, शाहजहांपुर, गोरखपुर और मुजफ्फरपुर होते हुए दक्षिण असम तक सक्रिय है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व बिहार और आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।
डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु
सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।
सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ
राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'सेवा सेतु' को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।
औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण
राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।
पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव
संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा 'सुगम' एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।
भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा
भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।
शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।
विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण एवं ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।
‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा VB-G RAM-G के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।
केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री ओ.पी. चौधरी
रायपुर। राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक "बर्ड आइलैंड" (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।
सचिव श्री आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।
बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
संपत्ति में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, सशक्त हो रही नारी शक्ति, पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का दिख रहा सकारात्मक प्रभाव
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट की पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
विभाग द्वारा 06 मई 2026 से 30 जून 2026 की अवधि का पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलनात्मक विश्लेषण करने पर पाया गया कि वर्ष 2025 में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर तथा कांकेर सहित अनेक जिलों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है।
महिलाओं को प्रदान की गई पंजीयन शुल्क में छूट के परिणामस्वरूप इस अवधि में नागरिकों को लगभग 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे न केवल महिलाओं के नाम पर संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिला है, बल्कि परिवारों को भी आर्थिक राहत मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। संपत्ति पर महिलाओं का स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ परिवार और समाज में अधिक सम्मान एवं निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में परिवार लाभान्वित हुए हैं और महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारी सरकार ऐसी नीतियों को लगातार बढ़ावा दे रही है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकास यात्रा की समान भागीदार बनाएं।
वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। जब किसी महिला के नाम संपत्ति होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार में उसकी निर्णयात्मक भूमिका सुदृढ़ होती है और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि महिलाओं को संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर उन्हें वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना है। प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि यह पहल अपने उद्देश्य की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी एवं समावेशी पंजीयन व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर सुधार कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों एवं प्रोत्साहनात्मक उपायों का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
