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स्कूली बच्चों पर गिरी बिजली, छुट्टी के बाद स्कूल से लौटते वक्त हुआ हादसा, एक बच्चे की गयी जान, दो की हालत गंभीर
सूरजपुर। वज्रपात में स्कूली बच्चे की जान चली गयी। हादसा उस वक्त हुआ, जब स्कूली बच्चा छुट्टी के बाद अपने घर लौट रहा था। ये हादसा सूरजपुर जिले के बिहारपुर विकासखंड के थाड़पाथर गांव में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। स्कूल से घर लौट रहे तीन छात्रों पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस घटना में 9वीं कक्षा के एक छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य साथी छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। घायल छात्रों का इलाज बिहारपुर स्वास्थ्य केंद्र में जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों छात्र स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। इस दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए वे पास के एक बड़े पेड़ के नीचे खड़े हो गए। तभी अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और तीनों उसकी चपेट में आ गए।
स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर छात्रों को बाहर निकाला। एक छात्र की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। बाकी दो को गंभीर हालत में तत्काल बिहारपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने बताया कि दोनों छात्रों की स्थिति नाजुक है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफ़र किया जा सकता है।
घटना की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। मृत छात्र के घर में कोहराम मचा हुआ है। ग्रामीण बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। गांव के स्कूल में भी गमगीन माहौल है और साथी छात्र-छात्राओं के चेहरों पर दुख साफ झलक रहा है।
स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर पंचनामा और मर्ग कायम करने की प्रक्रिया में जुटी है। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मृतक छात्र के परिजनों को सरकारी मुआवजा और घायलों के उपचार की पूरी व्यवस्था कराई जाएगी।
मौसम विभाग ने पहले ही छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े होना खतरनाक हो सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर लोगों को सचेत कर दिया है कि मानसून के मौसम में सुरक्षा के नियमों का पालन जरूरी है। प्रशासन ने अपील की है कि तेज गर्जना और बिजली चमकने पर लोग खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों और सुरक्षित जगह पर शरण लें।
रायपुर लोकसभा क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव के ऐतिहासिक एवं भव्य आयोजन की तैयारी, पंजीयन के लिए QR code किया जारी
रायपुर। सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि रायपुर लोकसभा क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव का आयोजन भव्य रूप से करने की तैयारी जोरों पर हैं। रायपुर जिले के पांच विकासखंड एवं बलौदा बाजार जिले के तीन विकासखंड, इस प्रकार आठ विकासखंडों में यह ग्राम पंचायत एवं स्कूल स्तर से खेल का आयोजन किया जाएगा। जिसमें 19 वर्ष से कम और 19 वर्ष से ज्यादा, महिला एवं पुरुष दोनों वर्गों का मैच होगा। फाइनल मैच लोक सभा स्तर का राजधानी रायपुर में नवंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित होगा। जिसके लिए केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडावीया को आमंत्रित किया गया है।
सांसद श्री अग्रवाल ने बताया कि खेल महोत्सव के तहत खो खो, कुश्ती, बॉलीबॉल, बास्केटबॉल, भारोत्तोलन, तैराकी, शरीर शौष्ठव, शतरंज, कबड्डी, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, रस्साकसी, रस्सी कूद का आयोजन किया जाएगा।

सिमगा, भाटापारा और बलौदा बाजार विकासखंड में 7 से 11 अक्टूबर तक खेलों का आयोजन किया जाएगा। अभनपुर, आरंग, तिल्दा, धरसींवा विकास खंड में 13 से 17 अक्टूबर तक खेल का आयोजन किया जाएगा।
रायपुर नगर निगम क्षेत्र में 15 नवंबर से 19 नवंबर तक खेलों का आयोजन किया जाएगा। विकासखंड स्तर पर विजेता टीमों का अंतिम फाइनल मैच रायपुर में होने वाली प्रतिस्पर्धा जो नवंबर के अंतिम सप्ताह में संभावित है आयोजित होगी जिसमें शामिल होने के लिए केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री मनसुख मंडावीया को आमंत्रित किया गया है।
खेलों का पंजीयन प्रारंभ कर दिया गया है जिसके लिए QR कोड जारी किया गया है, रायपुर लोकसभा क्षेत्र के कोई भी खिलाड़ी QR कोड अथवा ऑफलाइन फॉर्म भरकर भी प्रतियोगिता में शामिल हो सकता है। समस्त विजेताओं, उपविजेताओं और खिलाड़ियों को समापन अवसर पर आकर्षक पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत स्वस्थ भारत के संकल्पों को पूरा करने के लिए रायपुर लोकसभा में यह भव्य आयोजन किया जा रहा है। क्यूआर कोड जारी होते ही अब तक 11704 खिलाड़ियों ने इन खेलों में भाग लेने के लिए अपना पंजीयन कर लिया है। सभी खिलाड़ी बंधुओ से अनुरोध है कि QR कोड के माध्यम से अधिकाधिक संख्या में पंजीयन करा कर खेल गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।
रोड पर स्टंटबाजी, पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
बिलासपुर। मस्तूरी रोड पर कार चालकों के खतरनाक स्टंट मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए मौजूदा कार्रवाई को नाकाफी बताया. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट की अनुमति के बिना अब जब्त गाड़ियां नहीं छूटेगी.
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर यह भी पूछा कि अब तक मोटर व्हीकल एक्ट के तहत क्या-क्या कार्रवाई की गई है. शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा गया है. मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को तय की गई है.
जानिए पूरा मामला
ग्राम लावर स्थित एक फार्म हाउस में जन्मदिन मनाने जा रहे कुछ युवक मस्तूरी रोड पर अपनी चलती कारों में स्टंटबाजी कर रहे थे. लापरवाही से कार चलाकर राहगीरों की जान जोखिम में डाल रहे थे. इन लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 49 पर यातायात जाम की स्थिति भी पैदा कर दी थी. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 18 कारों को जब्त किया था. कारों में पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है.
24 सितंबर से दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस ट्रेन रद्द
रायपुर। उत्तर पूर्व रेलवे के गोरखपुर-डोमिंगढ़ स्टेशन पर तीसरी लाइन कमीशनिंग के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से संचालित होने वाली या गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होगा.
जानकारी के मुताबिक 4 नौतनवा एक्सप्रेस को रद्द किया गया है. जिसमें गाड़ी संख्या 18201 (दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस) 24 सितंबर 2025 को दुर्ग से रवाना होने वाली ट्रेन गाड़ी संख्या 18202 (नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस) 26 सितंबर 2025 को नौतनवा से रवाना होने वाली ट्रेन, गाड़ी संख्या 18205 (दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस) 25 सितंबर 2025 को दुर्ग से रवाना होने वाली ट्रेन, गाड़ी संख्या 18206 (नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस) 27 सितंबर 2025 को नौतनवा से रवाना होने वाली यह ट्रेन रद्द रहेगी.
यूथ कांग्रेस और NSUI नेताओं पर FIR, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने SSP से की मुलाकात
रायपुर। राजधानी रायपुर में यूथ कांग्रेस और NSUI के नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। रायपुर पुलिस ने हाल ही में हुए अलग-अलग प्रदर्शनों को लेकर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसमें यूथ कांग्रेस नेता भावेश शुक्ला, NSUI नेता प्रशांत गोस्वामी और अन्य कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन प्रदर्शनों के दौरान सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और धारा-144 का उल्लंघन करने जैसी घटनाएं हुई थीं।
यूथ कांग्रेस ने कुछ दिनों पहले खेल संचालनालय (Sports Directorate) में कथित घोटालों के आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने खेल विभाग के कामकाज में अनियमितताओं की जांच की मांग की थी। पुलिस ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती मानते हुए मामला दर्ज कर लिया।
इसी मुद्दे को लेकर आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल SSP कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने FIR को वापस लेने और पुलिस कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष की भूमिका निभाना लोकतांत्रिक अधिकार है और इस तरह की पुलिस कार्रवाई आंदोलन की आवाज दबाने की कोशिश है।
प्रतिनिधिमंडल में कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शामिल रहे। उन्होंने SSP से मुलाकात के दौरान कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया था, ऐसे में नेताओं और कार्यकर्ताओं पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करना उचित नहीं है। कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर FIR वापस नहीं ली गई, तो पार्टी राज्यभर में आंदोलन को तेज करेगी।
यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “खेल संचालनालय में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करना हमारा कर्तव्य था। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने पर FIR दर्ज करना लोकतंत्र के खिलाफ है। हम इस लड़ाई को सड़कों से विधानसभा तक ले जाएंगे।”
दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजनों का प्रदर्शन अल्टीमेटम के साथ हुआ खत्म
रायपुर। छत्तीसगढ़ दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकंपा संघ का संघर्ष फिलहाल थम गया है। रायपुर एसडीएम द्वारा मुख्यमंत्री से तीन दिन के भीतर समस्या का समाधान करने का आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने अपना आंदोलन अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।
संगठन की प्रांताध्यक्ष अश्विनी सोनवानी ने कहा कि संघ लंबे समय से प्रदेशभर के मृत पंचायत शिक्षकों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए आंदोलनरत है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, कई बार धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन समस्या का समाधान संतोषजनक रूप से नहीं किया गया।
अश्विनी सोनवानी ने बताया कि 6 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री ने 1200 लंबित प्रकरणों में से केवल 27 परिजनों को नियुक्ति पत्र जारी किए। शेष परिजनों में इसे लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने कहा,
“यह न्याय नहीं बल्कि छलावा है। यदि सरकार हमारी मांगों को तय समय में पूरा नहीं करती है तो हम मजबूरन पहले से भी ज्यादा उग्र आंदोलन करेंगे।”
इसी सिलसिले में संगठन ने 19 सितंबर 2025 को रायपुर के जय स्तंभ चौक में दोपहर 3 बजे से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान रायपुर एसडीएम मौके पर पहुंचे और मुख्यमंत्री से चर्चा कर तीन दिन में समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में दिवंगत पंचायत शिक्षकों के परिजन और संगठन के सदस्य शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से प्रीति रामटेके, डीलेश्वरी ध्रुव, पूर्णिमा श्रीवास, सदीप कुमार साय, चंद्रावती, रोहित साहू, राकेश बुमार रात्रे, चंद्रकांत नुरेटी, दीपक कुमार सिदार, मुकेश कुमार राजवाड़े, प्रियंका कुर्रे, चंद्रिका साहू, सिद्धार्थ सिंह परिहार, प्रदीप कुमार, राजेश महिलांग, सुमन यादव, बलेश्वरी भास्कर, रेखा नायक, भगवती कश्यप, घनश्याम, चन्द्रकला ठाकुर, रूखमणी डहरिया, अजनी देवहारी, दुर्गेश कुमार साहू, चित्ररेखा साहू, मायावती बंजारे, कुंती कोठारी, मीना ठाकुर, नवनीत कुमार देवांगन, देवेंद्र कुमार पटेल, रितेश कुमार धनकर, नंदकुमारी निषाद, सजय प्रताप सिंह, पुलेश्वरी ठाकुर, राजेंद्र कुमार साहू, सगीता साहू, कमलेश्वरी खन्ना, रमेश साहू, निर्मला बंजारे, मिथलेश कौशिक आदि शामिल रहे।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित थीं, जिन्होंने शासन से जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन सभी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह आंदोलन केवल स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। अब सभी की निगाहें अगले तीन दिनों पर टिकी हैं। यदि मुख्यमंत्री स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।
छत्तीसगढ़ का लाल मणिपुर में हुआ शहीद, मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
रायपुर/इम्फाल। देश की एकता और सुरक्षा की रक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ का एक और वीर सपूत सर्वोच्च बलिदान दे गया। मणिपुर के विष्णुपुर जिले के नाम्बोल सबाल लेइकाई क्षेत्र में शुक्रवार शाम असम राइफल्स के जवानों पर उग्रवादियों ने हमला कर दिया। हमला उस समय हुआ जब जवानों का टाटा 407 वाहन इम्फाल से विष्णुपुर की ओर जा रहा था।
इस हमले में दो जवान शहीद हो गए। इनमें छत्तीसगढ़ के 29 वर्षीय राइफलमैन जीडी कशव और नेपाल के 58 वर्षीय नायब सूबेदार श्याम गुरुङ शामिल थे। इसके अलावा पांच अन्य जवान घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS), इम्फाल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मणिपुर पुलिस ने घटना की कड़ी निंदा की और तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा बल घटनास्थल पर भेजे गए। पूरे क्षेत्र में सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि हमलावरों का पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि हमला उग्रवादी संगठनों द्वारा पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया है।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर निवासी जीडी कशव के शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदना जताई।
राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा,
“छत्तीसगढ़ के वीर सपूत राइफलमैन जीडी कशव का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। शहीदों का त्याग हमें राष्ट्र की रक्षा और एकता के मार्ग पर और अधिक दृढ़ करेगा।”
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि सरकार शहीद के परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहीद के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके गृह जिले तक पहुंचाया जाए।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में हाल के दिनों में बढ़ती हिंसक घटनाएं चिंता का विषय हैं। असम राइफल्स पूर्वोत्तर राज्यों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस तरह के हमले न केवल सुरक्षा बलों को चुनौती देते हैं, बल्कि क्षेत्र की स्थिरता को भी प्रभावित करते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश के सीमांत इलाकों में तैनात हमारे जवान हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा कर रहे हैं। जीडी कशव का बलिदान छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, लेकिन साथ ही यह हमें याद दिलाता है कि शांति की कीमत कितनी बड़ी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश में प्रोजेक्ट उद्यमी : आरंग क्रेडिट कैंप से 405 हितग्राहियों को 9.59 करोड़ का ऋण वितरण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश में जिला प्रशासन द्वारा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अभिनव पहल ‘प्रोजेक्ट उद्यमी’ शुरू की गई है। इसी कड़ी में आज जनपद पंचायत आरंग में भव्य क्रेडिट कैंप का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई और पात्र हितग्राहियों को सीधा लाभ वितरित किया गया।


मुख्य अतिथि जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल ने हितग्राहियों को चेक और स्वीकृति-पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि “ऐसे शिविर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ ही योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुँचाते हैं। जिला प्रशासन का नवाचार ‘प्रोजेक्ट उद्यमी’ आने वाले समय में युवाओं और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त साधन बनेगा।”
प्रोजेक्ट उद्यमी : जिला प्रशासन का नवाचार
क्रेडिट कैंप की सबसे बड़ी उपलब्धि रही प्रोजेक्ट उद्यमी, जिसके अंतर्गत 405 हितग्राहियों को 9.59 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
विभिन्न विभागों की उपलब्धियां
कैंप में राजस्व विभाग ने 7 हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए और 1 हितग्राही का एग्रीमेंट पंजीकृत किया। कृषि विभाग ने 22 हितग्राहियों को केसीसी प्रदान किया।
कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में एनआरएलएम के अंतर्गत 8 महिला स्व-सहायता समूहों को 12.62 लाख रुपये स्वीकृत तथा 37 समूहों को 132.12 लाख रुपये का ऋण वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त इंटरप्राइज फाइनेंस योजना के तहत 2 समूह सदस्यों के ऋण स्वीकृत एवं 45 सदस्यों को 41 लाख रुपए का ऋण उपलब्ध कराया गया। रेशम विभाग ने 35 हितग्राहियों को 5 लाख रुपये का अनुदान प्रस्तावित किया और 50 व्यक्तियों को रेशम उत्पादन की जानकारी दी। पशु विभाग ने 35 हितग्राहियों को केसीसी का लाभ दिया तथा 70 लोगों को पशुपालन की जानकारी प्रदान की।
उद्यानिकी विभाग ने 29 किसानों को ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर के पौधे वितरित किए, 10 हेक्टेयर क्षेत्र में केला लगाने की योजना स्वीकृत की और 200 किसानों को करेला, लौकी व भिंडी के बीज उपलब्ध कराए। स्वास्थ्य विभाग ने 10 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए और 15 व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच की। खेल विभाग ने 20 युवाओं का खेल पंजीयन किया।
ग्रामीण विकास की नई दिशा
यह क्रेडिट कैंप साबित करता है कि जिला प्रशासन रायपुर का नवाचार ‘प्रोजेक्ट उद्यमी’ केवल योजनाओं का लाभ पहुँचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की ठोस पहल है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे।
अच्छे अफसरों को तत्कालीन भूपेश सरकार ने घोटालों में फंसाया- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
रायपुर। नक्सली संगठन के शांति वार्ता के पत्र पर गृहमंत्री विजय शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है. गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सली आम लोगों की हत्या करना बंद करें और प्लांट किए गए आईडी को भी हटा लें. उन्होंने बताया कि नक्सलियों की ओर से मिला पहला पत्र पोलित ब्यूरो मेंबर का है, जबकि दूसरा पत्र ज्यूनियर कैडर का है, जो तेलंगाना से है.
शराब घोटाला मामले को लेकर ईडी द्वारा पैसे कार्टून में भरकर कांग्रेस भवन पहुंचने के खुलासा को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया. उन्होने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में प्रशासन को झोंका गया था. अभी रोज नई-नई कथाएं आएगी. कांग्रेस सरकार के दबाव में अच्छे अधिकारी भी फंसे. यह सच्चाई है, तभी जांच में बातें आ रही है. शराब व्यापार के लिए बाहरी को प्रश्रय दिया गया.
मवेशियों की मौत पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा….सिर्फ योजनाएं बना रहे, जमीन पर नहीं दिख रहा बदलाव, सरकारी दावों को बताया दिखावा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आये दिन सड़क दुर्घटना में हो रही मवेशियों की मौत पर तल्ख टिप्पणी की है। 16 सितंबर को 3 अलग-अलग हादसों में 17 गायों की मौत हो गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में काफी अंतर होने की बात कही। हाईकोर्ट के सरकार के उस दावे को दिखावा बताया जिसमें सरकार ने 2 हजार गायों को सड़क से हटाने की बात कही थी।
छत्तीसगढ़ में गौमाता के नाम पर राजनीतिक दल और राजनेता राजनीति करने से बाज नही आते। गौमाता के संरक्षण को लेकर पिछली सरकार ने गौठानों का निर्माण कराया था। कांग्रेस सरकार की यह योजना जहां भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गयी। वहीं सूबे में सरकार बदलने के बाद भी मवेशियों के रख रखाव को लेकर कोई सुधार नही देखा जा रहा है। आलम ये है कि हर दिन प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाएं हो रही है और मवेशियों के साथ ही आम लोगों की जाने जा रही है। पिछले दिनों 16 सितंबर को तीन अलग-अलग दुर्घटनाओं में 16 मवेशियों की मौत हो गयी थी।
जिसमें रतनपुर रोड पर ट्रक ने मवेशियों के झुंड को कुचल दिया था। इस दुर्घटना में 8 गायों की मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना दुर्ग जिले में हुई, यहां बाफना टोल प्लाजा के पास सड़क पर बैठी 8 गायों को कंटेनर ने रौंद दिया था। सड़कों पर हो रही मवेशियों की मौत हाईकोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जतायी है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन सिर्फ योजनाएं बनाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकते। जमीन पर उसका असर भी दिखना चाहिए।
यदि सरकार और समाज मिलकर समाधान नहीं करेंगे, तो सड़कें हादसों का जाल बनी रहेंगी और लोगों व मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी रहेगा। सड़कों पर मवेशी न हों, इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर मिलकर काम करें। सड़क पर मवेशियों की मौतों को लेकर नाराज चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि आप वेलफेयर स्टेट हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि पंचायत से लेकर नगर निगम और प्रशासन तक सभी मिलकर समाधान निकालें। योजनाएं और एसओपी बनाने से कुछ नहीं होगा। जब तक उनका क्रियान्वयन सख्ती से न किया जाये।
भोपाल-रायपुर फ्लाइट अब सातों दिन भरेगी उड़ान
रायपुर। भोपाल से रायपुर के बीच संचालित होने वाली फ्लाइट शनिवार से नियमित रूप से उड़ान भरेगी. अभी सप्ताह में तीन दिन इसके संचालित होने की वजह से यात्रियों को अपना सफर पूरा करने के लिए इंतजार करना पड़ता है. सातों दिन उड़ान होने के बाद यात्रा आसान हो जाएगी. यह फ्लाइट डेढ़ घंटे की यात्रा में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की राजधानी को जोड़ती है. फ्लाइट के नियमित होने के बाद यात्रियों को किराए में भी थोड़ी राहत मिल सकती है.
विमानन सूत्रों के अनुसार, त्योहारी सीजन की शुरुआत होने से पहले सर्वाधिक घरेलू उड़ान का संचालन करने वाली विमानन कंपनी इंडिगो अपनी फ्लाइट्स की संचालन अवधि, गंतव्य बढ़ाने के साथ नए सेक्टरों में फ्लाइट संचालन करने की तैयारी में है. इसी कड़ी में भोपाल के बीच रविवार, गुरुवार और शनिवार को संचालित होने वाली फ्लाइट को नियमित किया जाएगा. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ वासियों के बीच काफी पुराने पारिवारिक संबंध हैं.
त्योहार में अभी समय है, मगर कुछ शहरों से रायपुर पहुंचने का फ्लाइट किराया आसमान छूने लगा है. बेंगलुरु से रायपुर का फेयर 24 घंटे में 13 से 18 हजार तक पहुंच गया है. कोलकाता से रायपुर के सफर के लिए 11 हजार से 18 हजार तक खर्च करना पड़ रहा है. आने वाले दिनों में अन्य शहरों से रायपुर आने वाले यात्रियों को भी टिकट में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
एनएचएम कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त करने का निर्णय स्वागतयोग्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगें पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री श्री साय का आभार जताते हुए प्रदेशव्यापी हड़ताल वापस लिए जाने के निर्णय से उन्हें अवगत कराया। मुख्यमंत्री श्री साय को प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कल से प्रदेशभर में एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सराहनीय और राज्यहित में उठाया गया कदम बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर कर्मचारी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है और उनकी जायज़ मांगों के प्रति सदैव संवेदनशील रही है। उन्होंने कहा कि जनता का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार ने सदैव इस दिशा में ठोस पहल की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों के इस निर्णय से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ और मज़बूत होंगी तथा जनता को उत्कृष्ट और सुलभ चिकित्सा सुविधाएँ मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ एक और बेहतर, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होगा।
उल्लेखनीय है कि एनएचएम कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे। राज्य सरकार ने इनमें से चार मांगों को पूरा कर दिया है। तीन अन्य मांगों पर समिति गठित कर कार्यवाही प्रारंभ की गई है, जबकि संविलयन, पब्लिक हेल्थ केडर और आरक्षण संबंधी मांगों पर भारत सरकार से निर्णय लिया जाना है।
इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर हड़ताल समाप्त होने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रत्येक कर्मचारी परिवार का सदस्य है और एनएचएम कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर राज्यहित में सराहनीय निर्णय लिया है।
इस अवसर पर विधायक किरण देव, छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ से डॉ अमित मिरी, डॉ रविशंकर दीक्षित, पूरन दास, कौशलेश तिवारी, हेमंत सिन्हा, दिनेश चंद्र, संतोष चंदेल, प्रफुल्ल पाल, डॉ देवकांत चतुर्वेदी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्ग बन रहे ग्रीन कॉरिडोर: एनएचएआई ने इस साल लगाए 2.71 लाख पौधे
रायपुर। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) जहां एक ओर देश में सड़कों का जाल बिछा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजमार्गों के किनारों और डिवाइडर्स पर पौधे लगाकर ग्रीन कॉरिडोर भी तैयार कर रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' अभियान के तहत इस साल छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर दो लाख 71 हजार से ज्यादा पौधे लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के साथ-साथ प्राधिकरण उन्हें 'ग्रीन कॉरिडोर' में भी बदल रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ अभियान छत्तीसगढ़ में हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दो लाख 71 हजार से अधिक पौधे रोपित होना इस बात का प्रमाण है कि सड़क निर्माण केवल विकास की आधारशिला नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु और हरित जीवन का भी संकल्प है। राष्ट्रीय राजमार्ग से छत्तीसगढ़ में नागरिकों को तरक्की की राह के साथ ही हरियाली की छांव भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर का यह प्रयास छत्तीसगढ़ को न केवल यातायात सुविधा में बल्कि पर्यावरणीय संतुलन में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।
उल्लखेनीय है कि छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' अभियान के अंतर्गत इस साल निर्धारित लक्ष्य से अधिक वृक्षारोपण किया है। रायपुर-विशाखापट्टनम (NH-130CD) परियोजना में सर्वाधिक 97 हजार 145 पौधे लगाए गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र सीमा-दुर्ग-रायपुर-ओडिशा सीमा (NH-53) पर 46 हजार 141 पौधे, चांपा-कोरबा-कटघोरा (NH-149B) मार्ग पर 23 हजार 020 पौधे, बिलासपुर-कटघोरा (NH-130) मार्ग पर 16 हजार 847 पौधे, बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव (NH-130A) मार्ग पर 14 हजार 400 पौधे तथा सिमगा-रायपुर-धमतरी (NH-30) परियोजना में 5406 पौधे रोपे गए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों के डिवाइडर्स पर मीडियन प्लांटेशन के रूप में पौधे लगाए गए हैं, जबकि किनारों पर एवेन्यू प्लांटेशन के रूप में पौधरोपण किया गया है। इनमें काफी संख्या में बड़े फलदार और छायादार वृक्ष भी शामिल हैं। नए इलाकों में पौधरोपण के साथ ही पिछले वर्षों में क्षतिग्रस्त हुए पौधों को बदलने के लिए 68 हजार 297 जगहों पर रिप्लांटेशन भी किया गया है। इस तरह चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक (15 सितम्बर 2025 तक) कुल दो लाख 71 हजार 253 पौधे राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रायपुर के क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Officer) प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ सिर्फ एक वृक्षारोपण अभियान नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी के लिए एक निवेश है। हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़कों का निर्माण करना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सुन्दर पर्यावरण का भी निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों में इस साल दो लाख दो हजार 959 नए पौधे लगाए गए हैं, जबकि 68 हजार 297 जगहों पर रिप्लांटेशन किया गया है। इस तरह छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस साल (2025-26 में) अब तक कुल दो लाख 71 हजार 253 पौधे लगाए जा चुके हैं।
NHM कर्मियों की हड़ताल खत्म, सरकार ने मानी चार मांगे
रायपुर। छत्तीसगढ़ से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मियों की हड़ताल खत्म हो गई है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत NHM कर्मियों की शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ बैठक हुई, जिसमें चार प्रमुख मांगों को मान लिया गया।
बैठक में तय हुआ कि NHM कर्मियों को जुलाई 2023 से 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। इसके अलावा कर्मियों को अब 30 दिनों का वैतनिक अवकाश (Paid Leave) मिलेगा। वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग पूरी कर दी गई है। साथ ही, राज्य सरकार ने कर्मियों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
शेष मांगों पर बनेगी कमेटी
बैठक में यह भी तय हुआ कि तीन अन्य लंबित मांगों – ग्रेड पे निर्धारण, अनुकंपा नियुक्ति और स्थानांतरण नीति – पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार आगे का निर्णय लेगी।
NHM कर्मियों का बड़ा आंदोलन
गौरतलब है कि NHM कर्मी कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। हड़ताल के कारण प्रदेशभर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा था। मरीजों को इलाज के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ रही थीं। सरकार पर भी स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने का दबाव बढ़ रहा था।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बैठक के बाद कहा कि सरकार हमेशा से स्वास्थ्यकर्मियों के हितों के लिए प्रतिबद्ध रही है। उनकी अधिकांश जायज मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और बाकी पर कमेटी के माध्यम से जल्द निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने उम्मीद जताई कि हड़ताल खत्म होने से स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो जाएंगी और मरीजों को राहत मिलेगी।
कर्मियों में संतोष, काम पर लौटे
NHM कर्मियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें मानकर सकारात्मक पहल की है। शनिवार से सभी NHM कर्मी अपने-अपने कार्यस्थलों पर लौटेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बहाल हो जाएंगी।
शराब घोटाला : चैतन्य बघेल केस में ED ने हाईकोर्ट में जवाब किया पेश
बिलासपुर। बहुचर्चित चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग केस में शुक्रवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अदालत में जवाब दायर कर दिया गया है। हाईकोर्ट में जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में इस मामले की सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब दोनों पक्षों की ओर से लिखित आर्ग्युमेंट पेश किए जाएंगे, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
चैतन्य बघेल को हाल ही में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हिरासत में लिया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से अवैध लेन-देन और आर्थिक गड़बड़ियों में अहम भूमिका निभाई। ईडी का दावा है कि चैतन्य बघेल के खिलाफ ठोस सबूत मौजूद हैं, जिनके आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया है। हालांकि, चैतन्य बघेल की ओर से उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क है कि ED द्वारा की गई कार्रवाई गैरकानूनी है और सभी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि चैतन्य बघेल के खिलाफ जिस आधार पर कार्रवाई की गई है, वह पर्याप्त नहीं है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं, ईडी की ओर से पेश किए गए जवाब में कहा गया है कि चैतन्य बघेल के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में उनका सहयोग आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी दलीलों को लिखित रूप में प्रस्तुत करें। इसके बाद मामले पर अगली सुनवाई में विस्तृत बहस होगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अगली सुनवाई में इस पर अंतरिम आदेश भी पारित किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रदेश में आर्थिक अपराधों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण है। अगर हाईकोर्ट चैतन्य बघेल की हिरासत को रद्द करता है, तो यह ईडी की जांच प्रक्रिया पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं, अगर अदालत ईडी की कार्रवाई को सही ठहराती है, तो चैतन्य बघेल को लंबे समय तक हिरासत में रहना पड़ सकता है।फिलहाल, अगली सुनवाई का इंतजार है। 23 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि चैतन्य बघेल की हिरासत जारी रहेगी या उन्हें राहत मिलेगी।
नान घोटाला: पूर्व प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला का सरेंडर स्वीकार नहीं, सोमवार को होगी अगली सुनवाई
रायपुर। नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले के बहुचर्चित मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले में आरोपी पूर्व प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आलोक शुक्ला का सरेंडर अदालत ने फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। अदालत में इस प्रकरण पर अगली सुनवाई सोमवार, 22 सितंबर को होगी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में कहा कि केस की डायरी दिल्ली में है और फिलहाल उनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इस समय आलोक शुक्ला को कस्टडी में लेने में असमर्थता जताई गई। अदालत ने इस पर सहमति जताते हुए 22 सितंबर तक आलोक शुक्ला को किसी भी कस्टडी में न रखने का आदेश दिया।
ईडी ने की थी गिरफ्तारी की तैयारी
आपको बता दें कि नान घोटाले में आलोक शुक्ला और पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी। हालांकि, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच – जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपितों ने 2015 में दर्ज मामले और ईडी की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारियों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी और फिर दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा, उसके बाद ही उन्हें नियमित जमानत दी जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दूसरे ही दिन, यानी 18 सितंबर को ईडी की टीम ने डॉ. आलोक शुक्ला के भिलाई स्थित तालपुरी कॉलोनी के आवास पर दबिश दी थी। हालांकि, उस समय उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।
घोटाले में रहा है प्रमुख किरदार
गौरतलब है कि नान घोटाले का खुलासा वर्ष 2015 में हुआ था, जब आलोक शुक्ला खाद्य विभाग के सचिव थे। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने दिसंबर 2018 में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 2019 में हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद उन्हें तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार में एक बार फिर अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस पूरे मामले ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर ईडी लगातार कार्रवाई की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि आलोक शुक्ला को ईडी की कस्टडी में भेजा जाएगा या नहीं।
शराब घोटाला: गिरिराज होटल संचालक नितेश और यश पुरोहित गिरफ्तार, 25 सितंबर तक रिमांड
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला प्रकरण में कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित गिरिराज होटल के संचालक नितेश पुरोहित और उनके पुत्र यश पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए 25 सितंबर 2025 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
मामला अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत दर्ज है, जिसमें धारा 7, 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के साथ-साथ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। ब्यूरो का कहना है कि आरोपी पिता-पुत्र शराब घोटाले के सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य थे। इनके माध्यम से अवैध रूप से अर्जित घोटाले की राशि का संग्रहण, भंडारण और उसे विभिन्न लोकसेवकों एवं निजी व्यक्तियों तक पहुंचाने का काम किया जाता था।
गौरतलब है कि इन दोनों आरोपियों के साथ आबकारी विभाग के तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास भी इस प्रकरण में आरोपी हैं, जिन्हें कल ही गिरफ्तार किया गया था। तीनों आरोपी मार्च 2024 से फरार चल रहे थे। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने सितम्बर 2024 और दिसम्बर 2024 में क्रमशः “No Coercive Action” का आदेश पारित किया था। इसके बाद आरोपीगण ब्यूरो के नोटिस पर उपस्थित तो हुए, लेकिन जांच में कोई सहयोग नहीं किया।
17 सितम्बर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “No Coercive Action” आदेश की रोक हटाए जाने के बाद, EOW-ACB की टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों होटल संचालकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
ब्यूरो अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े नाम भी बेनकाब हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।
इस गिरफ्तारी के बाद से शराब घोटाले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है और राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि रिमांड अवधि के दौरान कई नए नाम सामने आ सकते हैं, जिससे घोटाले की सच्चाई और स्पष्ट हो जाएगी।