छत्तीसगढ़ का लाल मणिपुर में हुआ शहीद, मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
रायपुर/इम्फाल। देश की एकता और सुरक्षा की रक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ का एक और वीर सपूत सर्वोच्च बलिदान दे गया। मणिपुर के विष्णुपुर जिले के नाम्बोल सबाल लेइकाई क्षेत्र में शुक्रवार शाम असम राइफल्स के जवानों पर उग्रवादियों ने हमला कर दिया। हमला उस समय हुआ जब जवानों का टाटा 407 वाहन इम्फाल से विष्णुपुर की ओर जा रहा था।
इस हमले में दो जवान शहीद हो गए। इनमें छत्तीसगढ़ के 29 वर्षीय राइफलमैन जीडी कशव और नेपाल के 58 वर्षीय नायब सूबेदार श्याम गुरुङ शामिल थे। इसके अलावा पांच अन्य जवान घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS), इम्फाल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मणिपुर पुलिस ने घटना की कड़ी निंदा की और तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा बल घटनास्थल पर भेजे गए। पूरे क्षेत्र में सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि हमलावरों का पता लगाया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि हमला उग्रवादी संगठनों द्वारा पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया गया है।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर निवासी जीडी कशव के शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदना जताई।
राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा,
“छत्तीसगढ़ के वीर सपूत राइफलमैन जीडी कशव का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। शहीदों का त्याग हमें राष्ट्र की रक्षा और एकता के मार्ग पर और अधिक दृढ़ करेगा।”
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि सरकार शहीद के परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहीद के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके गृह जिले तक पहुंचाया जाए।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में हाल के दिनों में बढ़ती हिंसक घटनाएं चिंता का विषय हैं। असम राइफल्स पूर्वोत्तर राज्यों में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस तरह के हमले न केवल सुरक्षा बलों को चुनौती देते हैं, बल्कि क्षेत्र की स्थिरता को भी प्रभावित करते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश के सीमांत इलाकों में तैनात हमारे जवान हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा कर रहे हैं। जीडी कशव का बलिदान छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, लेकिन साथ ही यह हमें याद दिलाता है कि शांति की कीमत कितनी बड़ी है।