दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजनों का प्रदर्शन अल्टीमेटम के साथ हुआ खत्म
रायपुर। छत्तीसगढ़ दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकंपा संघ का संघर्ष फिलहाल थम गया है। रायपुर एसडीएम द्वारा मुख्यमंत्री से तीन दिन के भीतर समस्या का समाधान करने का आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने अपना आंदोलन अस्थायी रूप से वापस ले लिया है।
संगठन की प्रांताध्यक्ष अश्विनी सोनवानी ने कहा कि संघ लंबे समय से प्रदेशभर के मृत पंचायत शिक्षकों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए आंदोलनरत है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, कई बार धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन समस्या का समाधान संतोषजनक रूप से नहीं किया गया।
अश्विनी सोनवानी ने बताया कि 6 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री ने 1200 लंबित प्रकरणों में से केवल 27 परिजनों को नियुक्ति पत्र जारी किए। शेष परिजनों में इसे लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने कहा,
“यह न्याय नहीं बल्कि छलावा है। यदि सरकार हमारी मांगों को तय समय में पूरा नहीं करती है तो हम मजबूरन पहले से भी ज्यादा उग्र आंदोलन करेंगे।”
इसी सिलसिले में संगठन ने 19 सितंबर 2025 को रायपुर के जय स्तंभ चौक में दोपहर 3 बजे से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान रायपुर एसडीएम मौके पर पहुंचे और मुख्यमंत्री से चर्चा कर तीन दिन में समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में दिवंगत पंचायत शिक्षकों के परिजन और संगठन के सदस्य शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से प्रीति रामटेके, डीलेश्वरी ध्रुव, पूर्णिमा श्रीवास, सदीप कुमार साय, चंद्रावती, रोहित साहू, राकेश बुमार रात्रे, चंद्रकांत नुरेटी, दीपक कुमार सिदार, मुकेश कुमार राजवाड़े, प्रियंका कुर्रे, चंद्रिका साहू, सिद्धार्थ सिंह परिहार, प्रदीप कुमार, राजेश महिलांग, सुमन यादव, बलेश्वरी भास्कर, रेखा नायक, भगवती कश्यप, घनश्याम, चन्द्रकला ठाकुर, रूखमणी डहरिया, अजनी देवहारी, दुर्गेश कुमार साहू, चित्ररेखा साहू, मायावती बंजारे, कुंती कोठारी, मीना ठाकुर, नवनीत कुमार देवांगन, देवेंद्र कुमार पटेल, रितेश कुमार धनकर, नंदकुमारी निषाद, सजय प्रताप सिंह, पुलेश्वरी ठाकुर, राजेंद्र कुमार साहू, सगीता साहू, कमलेश्वरी खन्ना, रमेश साहू, निर्मला बंजारे, मिथलेश कौशिक आदि शामिल रहे।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित थीं, जिन्होंने शासन से जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन सभी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह आंदोलन केवल स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। अब सभी की निगाहें अगले तीन दिनों पर टिकी हैं। यदि मुख्यमंत्री स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।