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तिरुपति जा रही दर्शनार्थियों से भरी बस हुई दुर्घटना का शिकार, एक यात्री की मौत…
जगदलपुर। भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम तारागांव में गुरुवार सुबह एक दर्शनार्थी बस अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई. हादसे में राजनांदगांव निवासी तामेश्वर साहू की मौत हो गई, जबकि बस में सवार अन्य दर्शनार्थी घायल हो गए.
जानकारी के अनुसार, दुर्ग से करीब 30 से अधिक लोगों को लेकर तिरुपति जा रही बस गुरुवार सुबह लगभग 5–6 बजे तारागांव के पास पहुंची थी. इस दौरान चालक को झपकी आने से बस का संतुलन बिगड़ गया और दुर्घटना का शिकार हो गई. घटना की सूचना मिलते ही भानपुरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया. मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज परिजनों को सूचना दे दी गई है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.
मध्याह्न भोजन खाने के बाद फूड प्वाइजनिंग के शिकार हुए 25 बच्चे, उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान
बिलासपुर। जांजगीर जिले के नवागढ़ विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चौरभाठा में मध्याह्न भोजन खाने के बाद 25 बच्चे फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। भोजन करते ही बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हो गई। इस लापरवाही को हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि प्रधानपाठक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही निर्देश जारी किया गया है कि मध्यान्ह भोजन को बिना चखे बच्चों को नहीं परोसा जाएगा।
गौरतलब है कि स्कूल में मध्याह्न भोजन के अंतर्गत राहुल स्वसहायता समूह द्वारा खीर-पूड़ी परोसी गई थी। नियमानुसार भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच शिक्षकों को की जानी थी, लेकिन बिना जांच के भोजन सीधे बच्चों को परोस दिया गया। भोजन करने के कुछ ही समय बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होते देख शिक्षकों एवं पालकों ने बच्चों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां 4 बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है। हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लिया था।
21 जनवरी को अगली सुनवाई
शासन ने जवाब में कहा कि नियम 2015 के तहत दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है। शासन की ओर से कोर्ट काे बताया गया कि मिड-डे मील के वितरण में सावधानी बरती जा रही है, जिससे कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो। कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई से पहले शपथ पत्र दाखिल करने कहा है। इसमें बीमार बच्चों के स्वास्थ्य प्रगति के बारे में बताना होगा। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाला VB–G RAM G बिल 2025: लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल की दमदार पैरवी
नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) बिल, 2025’ पर हुई चर्चा के दौरान रायपुर के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से प्रथम वक्ता के रूप में अपनी ओजस्वी, तथ्यपूर्ण और दूरदर्शी बात रखकर संसद में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस ऐतिहासिक विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्मयोगी नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण बताते हुए कहा कि यह मिशन केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और स्थायी आजीविका की गारंटी देने वाला परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा को नए स्वरूप में ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के रूप में परिवर्तित करना विकसित भारत की नींव को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
श्री अग्रवाल ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय मनरेगा भ्रष्टाचार, अकुशल कार्यों और दिशाहीनता का प्रतीक बन गई थी। गड्ढा खोदने और भरने जैसे कार्यों ने इस योजना की गरिमा को ठेस पहुंचाई। ऐसे में मोदी सरकार द्वारा इस योजना को नए नाम, नई सोच और नई व्यवस्था के साथ लागू करना एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय है।
उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिन के बजाय 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिलेगा। मजदूरी दर बढ़ाकर 240 रुपये प्रतिदिन किया जाना, डिजिटल व बायोमैट्रिक आधारित नया पंजीकरण, केवल वैध भारतीय श्रमिकों को लाभ, तथा राज्यों की सहभागिता से वित्तीय अनुशासन—ये सभी प्रावधान योजना को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाएंगे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी रेखांकित किया कि बुवाई और कटाई के समय रोजगार न दिए जाने का प्रावधान किसानों के हित में एक दूरदर्शी निर्णय है, जिससे कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। संभावित साप्ताहिक भुगतान प्रणाली से श्रमिकों को समय पर मेहनताना मिलेगा और उनकी आर्थिक परेशानियां कम होंगी।
अपने वक्तव्य में श्री अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक गांवों में अवसर, युवाओं को कौशल, किसानों को मजबूती और परिवारों को स्थायी आय का भरोसा देता है। यह योजना ‘गांव सशक्त, किसान सशक्त, युवा सशक्त, भारत विकसित’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर निर्णय गरीब, किसान, मजदूर और गांव के कल्याण के लिए होता है। यह विधेयक ग्रामीण भारत को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ देश के समग्र विकास को नई गति देगा।
अंत में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पूरे विश्वास और दृढ़ता के साथ ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ का समर्थन करते हुए कहा—“मोदी है तो मुमकिन है”, और यह विधेयक आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत के जीवन में सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव लाएगा।
सिम्स की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, CGMSC ने दी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी, अगली सुनवाई में दस्तावेज पेश करने के निर्देश
बिलासपुर। न्यायधानी स्थित मेडिकल कॉलेज सिम्स की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। इस मामले में आज डिवीजन बेंच के समक्ष छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) की ओर से जानकारी दी गई कि आवश्यक मशीनों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और दावा–आपत्ति भी आमंत्रित की गई है, जिसका निराकरण किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान सीजीएमएससी के प्रबंध निदेशक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बताया कि टेंडर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके बाद मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि टेंडर प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर संबंधित दस्तावेजों के साथ अदालत में प्रस्तुत किया जाए। मामले की अगली सुनवाई जनवरी के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि सिम्स में चिकित्सा उपकरणों की अव्यवस्था और मरीजों के उपचार में हो रही परेशानियों से संबंधित समाचारों को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी, जिस पर लगातार सुनवाई जारी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाबा गुरु घासीदास जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया। उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा जी का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है। उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
रिश्वतखोर सहकारिता निरीक्षक गिरफ्तार, ACB ने नौकरी लगाने के नाम पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार एसीबी की कार्रवाई जारी है। आज सूरजपुर के उप आयुक्त सहकारिता कार्यालय में ACB अंबिकापुर की टीम ने छापा मारा और सहकारिता निरीक्षक अभिषेक सोनी को 40 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
प्रार्थी से लेखपाल के पद पर नियुक्ति करने सहकारिता निरीक्षक ने 1 लाख 50 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत प्रार्थी ने एसीबी से की थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीबी की टीम ने टैक जाल बिछाया और रिश्वतरखोर अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ा। कार्यालय के बंद कमरे में ACB अंबिकापुर की कार्रवाई जारी है।
छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति से लौटी उम्मीदें : आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला सम्मानजनक नया जीवन, 75 को 5G स्मार्टफोन, 25 को मेसन किट का वितरण
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन, 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को दिए अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन
कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित
जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है।
पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव
पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। पूवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।
मोबाइल और मेसन किट मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास
डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।
सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान : सीएम साय ने सभी जनप्रतिनिधियों-शिक्षाविदों को पत्र लिखकर की सहभागिता की अपील
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस संबंध में सभी जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और सेवानिवृत्त शैक्षणिक विशेषज्ञों को पत्र लिखकर सहभागिता की अपील की है।
मुख्यमंत्री साय ने पत्र में लिखा है कि यह सूचित करते हुए मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है कि छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है और इस दिशा में राज्य शासन पूरी प्रतिबद्धता से प्रयासरत है। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी अब दिखाई देने लगे हैं। इसी क्रम में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ प्रारंभ किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत चयनित स्कूलों को गोद लेकर उनमें न्यूनतम दो बार भ्रमण और निरीक्षण करने का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, नगर निगम महापौर, नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष, सभी जनप्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के प्राध्यापक तथा इच्छुक सेवानिवृत्त शैक्षणिक विशेषज्ञों से इस सामाजिक दायित्व को स्वेच्छा से स्वीकार करने की अपील की है।

उन्होंने अपेक्षा जताई है कि सभी सहभागी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करेंगे तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अपने अनुभव और संसाधनों का समुचित उपयोग करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करें।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मिले सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाने, बिलासपुर एयरपोर्ट अपग्रेडेशन की मांग की
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के समग्र विकास और राज्य को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में रायपुर के लोकसभा सांसद एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से भेंट कर छत्तीसगढ़ की हवाई कनेक्टिविटी से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा की तथा अहम मांग-पत्र सौंपे।
सांसद श्री अग्रवाल ने रायपुर एयरपोर्ट के विस्तार, क्षमता वृद्धि एवं उसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित किए जाने, रायपुर से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन, तथा बिलासपुर एयरपोर्ट के उन्नयन कर शीघ्र पूर्ण रूप से चालू कर नियमित विमान सेवाएँ प्रारंभ करने की ठोस और तार्किक माँग रखी। उन्होंने बताया कि रायपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे मौजूदा अवसंरचना पर अत्यधिक दबाव है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और मेडिकल सुविधाओं की अपार संभावनाओं वाला राज्य है, किंतु सीमित हवाई कनेक्टिविटी के कारण विकास की गति बाधित हो रही है। रायपुर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जाने से राज्य में निवेश, उद्योग, व्यापार और मेडिकल टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने बिलासपुर जैसे प्रमुख संभागीय मुख्यालय में एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन न होने को क्षेत्रीय असंतुलन का प्रतीक बताते हुए इसे शीघ्र चालू करने की आवश्यकता पर बल दिया। बिलासपुर एयरपोर्ट के संचालन से उत्तरी छत्तीसगढ़ के लाखों नागरिकों को सीधी हवाई सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को अभूतपूर्व गति प्राप्त होगी।
इसके साथ ही सांसद श्री अग्रवाल ने बिलासा देवी केवट हवाई अड्डा, बिलासपुर (PAB) को 3C से उन्नत कर 4C श्रेणी में विकसित करने हेतु 300 करोड़ रुपए के विशेष केंद्रीय अनुदान की मांग की।
सांसद ने बताया कि, वर्तमान रनवे को 1,500 मीटर से बढ़ाकर 2,885 मीटर तक विस्तारित करना पूरी तरह संभव है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा 290 एकड़ भूमि लौटाने की सहमति भी है।
यहां बड़े विमानों के संचालन हेतु नए एटीसी टावर, रनवे विस्तार और आधुनिक टर्मिनल भवन के निर्माण के लिए ₹300 करोड़ के विशेष केंद्रीय अनुदान प्रदान किया जाए।
सांसद अग्रवाल का कहना है कि, बिलासपुर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जहाँ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, SECR और SECL जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान स्थित हैं। यह हवाई अड्डा छत्तीसगढ़ के 14 जिलों एवं मध्यप्रदेश के 3 जिलों की बड़ी आबादी के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा उठाए गए सभी विषयों को गंभीरता से सुना, उनके दूरदर्शी सुझावों की सराहना की और आवश्यक कार्यवाही का सकारात्मक आश्वासन दिया।
इस अवसर पर बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि “छत्तीसगढ़ को बेहतर और सशक्त हवाई कनेक्टिविटी दिलाना मेरी प्राथमिकताओं में है। राज्य के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय करते हुए मैं छत्तीसगढ़ की आवाज़ को मजबूती से उठाता रहूँगा।”
छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की यह सक्रियता, दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता यह सिद्ध करती है कि वे न केवल रायपुर बल्कि पूरे प्रदेश के हितों के लिए निरंतर, प्रभावी और परिणामोन्मुखी प्रयास कर रहे हैं।


11 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, 37 लाख का घोषित था इनाम
नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। नारायणपुर में ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत 11 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। सरेंडर माओवादियों में 6 पुरुष और 5 महिला माओवादी शामिल हैं। इन पर 37 लाख का इनाम घोषित था।

नारायणपुर एसपी रॉबिनसन गुड़िया के समक्ष सभी नक्सलियों ने सरेंडर किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 3 मिलिट्री कम्पनी सदस्य, एक एसीएम और 7 पीएम शामिल हैं। बता दें कि वर्ष 2025 में नारायणपुर जिले में कुल 298 माओवादी कैडर सरेंडर कर चुके हैं। आत्मसमर्पित माओवादियों को 50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि का चेक दिया गया।
दो वर्ष की निरंतर सेवा, निरंतर विकास की दिशा में एक और पहल: मुख्यमंत्री साय ने कॉफी टेबल बुक्स का किया विमोचन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवीन विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में “दो साल निरंतर सेवा,निरंतर विकास” की भावना को समर्पित छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाने वाली जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित आठ कॉफी टेबल बुक्स का विमोचन किया गया।
इनमें बस्तर दशहरा (हिन्दी), बस्तर दशहरा (अंग्रेजी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (हिन्दी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (अंग्रेजी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (हिन्दी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (अंग्रेजी),बैगा टैटू (हिन्दी) और बैगा टैटू (अंग्रेजी) शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये कॉफी टेबल बुक्स छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, ऐतिहासिक परंपराओं, आदिवासी कला और प्राकृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे राज्य की पहचान को सशक्त करने वाला सार्थक प्रयास बताया।
इस अवसर पर जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव , महासमुन्द विधायक योगेश्वर सिन्हा, जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव, जनसंपर्क आयुक्त रवि मित्तल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह, पूर्व विधायक खिलावन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
साय सरकार के दो साल : जल संसाधन विभाग ने सिंचाई क्षमता में की 25 हजार हेक्टेयर की वृद्धि, 14 नई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को मिली स्वीकृति…
रायपुर। विष्णु देव साय सरकार का बीते दो साल का कार्यकाल जल संसाधन विभाग के लिए उपलब्धियों से भरा रहा. इस अवधि में जहां सिंचाई क्षमता में 25,000 हेक्टेयर की वृद्धि के साथ कुल सिंचाई क्षमता 21.76 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. यही नहीं 14 नई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे 1 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षमता में वृद्धि होगी. इस तरह से 2047 तक जल भंडारण क्षमता 7,900 MCM से बढ़ाकर 16,000 MCM करने का लक्ष्य रखा गया है.
जल संसाधन विभाग के दो साल की उपलब्धियों की सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विभाग का मूल दायित्व केवल प्रदेश में सिंचाई क्षमता का विकास करना ही नहीं, बल्कि बहुमूल्य जल संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन एवं नवीन योजनाओं का सर्वेक्षण, निर्माण एवं निर्मित संसाधनों का रख-रखाव करना भी है. इसके साथ बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं बनाना एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न परिस्थितियों का आकलन कर जल संवर्धन योजनाएं प्रस्तावित करना भी शामिल है.
दो साल की बड़ी उपलब्धियां
सिंचाई क्षमता में वृद्धि: छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग ने पिछले दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में 25,000 हेक्टेयर की वृद्धि हासिल की है, जिससे कुल विकसित सिंचाई क्षमता 21,76,000 हेक्टेयर हो गई है.
जल संचयन और संरक्षण: जल शक्ति अभियान “कैच द रेन” के तहत केंद्र शासन द्वारा जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार शुरू किए गए हैं, जो समुदाय संचालित जल संरक्षण प्रयासों को सम्मानित करते हैं.
जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर छठे राष्ट्रीय जल संचय जन भागीदारी श्रेणी में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट राज्य शासन द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है. वहीं नगरीय निकाय श्रेणी में रायपुर नगर निगम को प्रथम स्थान मिला. इसके अलावा पूर्व जोन के जिलों में विभिन्न श्रेणियों में बालोद, राजनांदगांव, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बिलासपुर एवं रायगढ़ को भी जल संचय जन भागीदारी अवार्ड से सम्मानित किया गया.
प्रतियोगिताएं: जल संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए जल संरक्षण 2.0 पर सफलता की महाती जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं.
पिछले दो वर्षों में जल संसाधन विभाग की उपलब्धियों में सिंचाई क्षमता में 25,000 हेक्टेयर की वृद्धि और राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण के लिए विभिन्न अभियान और पुरस्कार शामिल हैं. ये उपलब्धियां जल संरक्षण, संचयन और बेहतर जल प्रबंधन के प्रति सरकार के प्रयासों को दर्शाती हैं.
अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां
राज्य में 73,601 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार/पुनर्स्थापन हेतु 477 योजनाओं के लिए ₹1874.87 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई. विशेष केंद्रीय सहायता के तहत राज्य गठन (2000) के बाद प्रथम बार विगत वर्ष ₹896 करोड़ की केंद्रीय सहायता प्राप्त कर कार्य कराया गया. आवर्धन जल प्रदाय योजना/जल जीवन मिशन/अमृत मिशन के अंतर्गत 18 औद्योगिक संस्थानों को 12.80 मिलियन घन मीटर एवं पेयजल हेतु 43.30 मिलियन घन मीटर वार्षिक जल आवंटित किया गया.
यही नहीं वर्ष 2024–25 में खरीफ एवं रबी सिंचाई हेतु 16,53,933 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 14,52,477 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की गई, जो लक्ष्य का 87.82% है. वित्तीय वर्ष 2024–25 में सिंचाई योजनाओं हेतु अधिग्रहित भूमि के वर्षों से लंबित मुआवजा भुगतान के लिए ₹400 करोड़ से अधिक तथा वन भूमि मुआवजा भुगतान हेतु ₹100 करोड़ से अधिक राशि का भुगतान किया गया, जिससे वन प्रभावित सिंचाई योजनाओं के निर्माण में गति आई है.
बस्तर अंचल में सिंचाई संसाधनों के विकास हेतु जगदलपुर में मुख्य अभियंता कार्यालय के लिए 36 पदों की स्वीकृति प्राप्त कर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 15.04.2025 को कार्यालय का शुभारंभ किया गया. विभाग में 83 सहायक अभियंताओं की नियुक्ति की गई. इसके अलावा बांध सुरक्षा पुनर्वास परियोजना (DRIP-3) के अंतर्गत 3 वर्षों से लंबित 9 बांधों के सुदृढ़ीकरण हेतु ₹536 करोड़ के कार्यों की सहमति प्रदान की गई.
कुनकुरी में जल संसाधन विभाग के नए अनुविभागीय कार्यालय (विद्युत/यांत्रिकी) की स्थापना की गई, जिससे लघु सिंचाई योजनाओं के संचालन एवं संधारण में सुविधा होगी. जशपुर जिले में आदिवासी बहुल क्षेत्र में सिंचाई संसाधनों को गति देने हेतु 22.10.2024 को कुनकुरी में पृथक कार्यपालन अभियंता कार्यालय प्रारंभ किया गया. विभाग के अंतर्गत वर्षों से लंबित 115 सिंचाई योजनाओं (76,094 हेक्टेयर क्षमता) को अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जा रहा है.
मयाली बांध (जशपुर) में 22.10.2024 को पर्यटन एवं नौकायन सुविधाओं का लोकार्पण किया गया. गंगरेल बांध (धमतरी) में 05–06 अक्टूबर 2024 को “जल जागर महोत्सव” का आयोजन किया गया. जिला बेमेतरा को जल निकायों के पुनरोद्धार श्रेणी में जल परिवर्तनशीलता वैश्विक पुरस्कार 2024 प्राप्त हुआ. उदयपुर (राजस्थान) में आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय राज्य जल मंत्री सम्मेलन 2025 में छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित जल संचयन प्रयासों की सराहना हुई.
आगामी 3 वर्षों की संभावित कार्य योजना
आने वाले समय में राज्य की बढ़ती पेयजल एवं सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई परियोजनाओं का सर्वेक्षण, रूपांकन एवं क्रियान्वयन किया जा रहा है. व्यर्थ बह जाने वाले वर्षा जल का उपयोग जल-अभाव वाले क्षेत्रों में करने तथा नदियों को जोड़ने की योजनाएं प्रस्तावित हैं.
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में परियोजना मंडल की 33वीं बैठक में 14 नई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है, जिनसे प्रदेश में लगभग 1,00,000 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी.
प्रस्तावित 14 परियोजनाएं
बस्तर – देऊरगांव बैराज सह उठाव सिंचाई परियोजना
दुर्ग – सहगांव उठाव सिंचाई परियोजना
बस्तर – मटनार बैराज सह उठाव सिंचाई परियोजना
खैरागढ़–छुईखदान–गंडई – लमती फीडर जलाशय
रायपुर – महानदी पर मोहमला–सिरपुर बैराज
राजनांदगांव – चैकी एनीकट से मोहारा एनीकट पाइपलाइन
रायपुर – समोदा बैराज से कुंभारिया जलाशय तक पाइपलाइन
जशपुर – मनी नदी पर बगिया बैराज
बिलासपुर – अहरन से गाजरी नाला जल संवर्धन कार्य
जांजगीर–चांपा – परसाही उठाव सिंचाई परियोजना
बिलासपुर – छपराटोला फीडर जलाशय
कोरबा – मड़वारानी बैराज
बिलासपुर – खारंग जलाशय दायां तट नहर आवर्धन
गरियाबंद – सिकासार से कोडार जलाशय लिंक नहर
इसके अतिरिक्त बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना एवं कोवई–हसदेव नदी लिंक परियोजना का सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है.
नई नीतियां:
गाद प्रबंधन (Sediment Management)
बांध परिसर में पर्यटन
जल विजन दस्तावेज 2047
वर्तमान जल भंडारण क्षमता 7,900 MCM है, जिसे वर्ष 2047 तक 16,000 MCM करने का लक्ष्य है तथा भूजल संकटग्रस्त विकासखंडों की संख्या शून्य करने का भी लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन का आमंत्रण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में विधायक मोतीलाल साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बलौदाबाजार जिले के ग्राम खरतोरा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया तथा आयोजन की प्रतीकात्मक टी-शर्ट भेंट की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना, पुलिस तथा सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सम्मानित किया जाएगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में सतत रूप से समर्पित जवानों का सम्मान करना पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति जैसे मूल्यों को एक मंच पर जोड़ने वाले ऐसे आयोजन स्वस्थ, सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ACB की बड़ी कार्रवाई : नगर पंचायत की CMO और बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में ACB की टीम ने बिलासपुर जिले के बोदरी नगर पंचायत में बड़ी कार्रवाई करते हुए CMO भारती साहू और उनके बाबू सुरेश सीहोरे को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया है। यह रिश्वत मकान का नक्शा पास करने के एवज में मांगी गई थी।
एसीबी सूत्रों के अनुसार, 12 दिसंबर 2025 को नूतन चौक, सरकंडा निवासी वेदराम निर्मलकर ने ACB इकाई बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि बोदरी स्थित उनकी जमीन पर मकान निर्माण के लिए दिए गए नक्शे को पास करने के बदले नगर पंचायत कार्यालय के बाबू सुरेश सीहोरे ने 20 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट 47,257 रुपये की वैधानिक फीस के अलावा 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के सत्यापन के दौरान प्रार्थी द्वारा बाबू सुरेश सीहोरे और सीएमओ भारती साहू से बातचीत करने पर रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद मोलभाव के दौरान 15,000 रुपये की जगह 12,000 रुपये लेने पर आरोपियों की सहमति मिलने पर ट्रैप की योजना तैयार की गई। इसके बाद आज प्रार्थी द्वारा व्यवस्था की गई 12,000 रुपये की रिश्वत की राशि आरोपियों को देने के लिए भेजी गई, जिसे बाबू सुरेश सीहोरे द्वारा स्वीकार किया गया।
इसी दौरान आसपास तैनात एसीबी बिलासपुर की टीम ने नगर पंचायत कार्यालय बोदरी में बाबू सुरेश सीहोरे और सीएमओ भारती साहू को पकड़ लिया। साथ ही रिश्वत की रकम 12,000 रुपये आरोपी सुरेश सीहोरे से बरामद कर ली गई।
अचानक हुई इस कार्रवाई से आसपास हड़कंप मच गया। आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
विधानसभा में वंदे मातरम पर चर्चा : सीएम साय ने कहा – सार्वजनिक रूप से जोड़ता है वंदे मातरम
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वंदे मातरम पर चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, जो समाज इतिहास से समझ नहीं लेता उसका भविष्य बर्बाद हो जाता है। आज इस अवसर पर सभी महापुरुष को याद करता हूं। वंदे मातरम चेतना से जोड़ता है, सार्वजनिक रूप से जोड़ता है।
राष्ट्रगीत की 150वीं जयंती पर विशेष चर्चा के लिए धन्यवाद देते हुए सीएम ने कहा, गौरवगाथा का वर्णन करने हर देशवासी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसद में इस विषय पर चर्चा कराने के लिए पीएम मोदी का आभार जताया।
सीएम साय ने कहा, शहीद इस गीत के साथ फांसी को स्वीकार कर लेते थे। कांग्रेस को तुष्टिकरण करना था। तत्कालीन सरकार ने इस गीत का तुष्टिकरण कर तोड़ मरोड़ कर इस्तेमाल किया। जन्मभूमि की प्रशंसा के लिए राष्ट्रगीत के कुछ अंश ही लिए गए, क्योंकि कुछ मुस्लिम लोग को इस बात से दिक्कत थी।
नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा कार्यालय पहुंचने से पहले पुलिस ने रोका, जमकर हुई झूमाझटकी
रायपुर। नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर कांग्रेस ने आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर में भी कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय की ओर कूच करने लगे, लेकिन बड़ी मौके पर तैनात पुलिस बल ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया।
कांग्रेस का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड मामले में भाजपा का षड्यंत्र अब बेनकाब हो चुका है, इसी के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान पुलिस बल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झूमाझटकी हुई।
शराब घोटाला: पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को स्पेशल कोर्ट में किया पेश, कहा- जेल में अच्छा नहीं लगता, तबीयत भी ठीक नहीं…
रायपुर। शराब घोटाले मामले में जेल में कैद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को आज ईडी के स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान लखमा ने मीडिया से चर्चा में जेल में ठीक नहीं लगने के साथ तबीयत खराब होने का भी हवाला दिया.
बता दें कि इस साल के शुरुआत में शराब घोटाला मामले में ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था. तब से वे जेल में हैं. हाल ही में ईडी ने कवासी लखमा के खिलाफ चार्जशीट भी पेश किया था. इसी कड़ी में आज कवासी लखमा को ईडी के स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश किया गया.
मीडिया से चर्चा में कवासी लखमा ने कहा कि जनवरी में जेल जाने के बाद पहली बार आज बाहर आया हूं. कितने बार बोलने के बाद आज बाहर आया हूं. मुझे हार्ट के साथ-साथ शुगर और आंख की बीमारी है. वहीं विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के सवाल पर लखमा ने कहा – क्या करें? मैने विधानसभा में बस्तर की बात उठाई थी, इसलिए ही तो जेल में रखा है.
विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के सवाल पर कवासी लखमा ने कहा कि इस संबंध में मैने राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था. राजकुमार कॉलेज में हुए विधानसभा के पहले सत्र में शामिल हुआ था. पुराने विधानसभा के सत्र में शामिल नहीं हो पाने का मुझे अफसोस है. वहीं विधानसभा में बस्तर के मुद्दों को नहीं उठा पाने पर अफसोस जताया.
हर महीने दो करोड़ कमीशन लेने का आरोप
शराब घोटाला की जांच न केवल ईडी बल्कि ईओडब्ल्यू भी कर रही है. आरोप है कि भूपेश बघेल की सरकार के दौरान आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा ने शराब माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को शिथिल किया. इसके साथ ही उन्हें इस सिंडिकेट से हर महीने 2 करोड़ रुपए का कमीशन मिलता था.