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कई जिलों के कलेक्टरों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट
रायपुर। राज्य शासन ने 11 आईएएस अफसरों के तबादले किए हैं. कई जिलों के कलेक्टर इधर से उधर किए गए हैं. कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत को सरगुजा का कलेक्टर बनाया गया है. वहीं दंतेवाड़ा कलेक्टर की ज़िम्मेदारी संभाल रहे कुणाल दुदावत को कोरबा कलेक्टर की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव को दंतेवाड़ा और नारायणपुर कलेक्टर रही प्रतिष्ठा ममगाई को बेमेतरा का कलेक्टर बनाया गया है. नम्रता जैन को नारायणपुर की जिम्मेदारी दी गई है.
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विधानसभा में अनुपूरक बजट मांग पर चर्चा : विधायक अजय चंद्राकर बोले – छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति को देना चाहिए बढ़ावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन आज अनुपूरक बजट मांग पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट आया है. राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत भूपेश बघेल सरकार ने की. कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बनाया. छत्तीसगढ़ में नए क्षेत्रों में रोजागर का सृजन हो, इस दिशा में काम करना होगा. ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता देना है, जिसमें छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का हित हो.
अजय चंद्राकर ने कहा, छत्तीसगढ़ की संस्कृति दुनियाभर में सबसे समृद्ध संस्कृति है. इसे दुनियाभर के लोगों तक लेकर जाना चाहिए. छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने दिल्ली तक लेकर जाएं. अलग-अलग दुनिया के दूतावास के अधिकारियों को दिखाया जाए. इस दिशा में प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा, बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास को लेकर जल्द से जल्द काम होना चाहिए.
चंद्राकर ने कहा, कृषि क्षेत्र आज भी रोजगार का सबसे मजबूत क्षेत्र है. राज्य की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्रों को पैसा नहीं मिल रहा है. इसकी चिंता की जाए. महिला स्व-सहायता समूह की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की थी, जिससे आज कुटीर और पारंपरिक उद्योगों के साथ रोजगार के साधन बने. महिलाएं मजबूत हुई है. उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में 42 प्रतिशत से आबादी एससी-एसटी की है. उनके हित के बारे में हमारी सरकार बेहतर काम कर रही है.
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र बोले – सरकार का विजन स्पष्ट नहीं
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा, छत्तीसगढ़ आज कर्ज में डूबते जा रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम अनुपूरक बजट की मांग क्यों की जा रही है. वह भी वित्तीय वर्ष के ठीक 3 महीने पहले. मुझे इस अनुपूरक बजट में ऐसी कोई बात दिख नहीं रही है.
उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है ? महतारी वंदन के नाम पर 1 हजार दिया जा रहा है, लेकिन बिजली बिल पर उससे ज्यादा लिया जा रहा है. सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस है. सरकार कार्यक्रम ज्यादा आयोजित कर रही है, काम कम हो रहा है. उत्सव जनता को मनाने दिया जा रहा है. सरकार उत्सव मनाने के लिए बजट खर्च कर रही है. दरअसल सरकार का विजन क्या है, यह स्पष्ट नहीं है. इस अनुपूरक बजट में भी कोई विजन नहीं है.
विधायक राघवेंद्र ने कहा, नए पदों पर भर्ती की बात की थी, इसमें कुछ नहीं है. अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी, अब तक नहीं की गई है. धान बेचने के लिए 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया. किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है. गिरदावरी का काम नए लड़कों से करा लिया गया. सड़क, धान, आदिवासी, किसान, युवा, महिलाओं के विकास पर लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा.
छत्तीसगढ़ में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र प्रक्रिया अब पूरी तरह हुई ऑनलाइन
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुगम बनाते हुए इसे पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। राज्य में अब जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। भारत सरकार के महापंजीयक कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में संशोधित ऑनलाइन पोर्टल के सफल क्रियान्वयन से यह व्यवस्था प्रभावी हुई है।
संशोधित जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्म लेने वाले सभी बच्चों के लिए जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध दस्तावेज होगा। इससे पहचान से जुड़ी प्रक्रियाओं में स्पष्टता और एकरूपता आई है। अक्टूबर 2023 से पहले जन्मे बच्चों के मामलों में पूर्व की तरह अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी मान्य रहेंगे। साथ ही, पहले जारी किए गए ऑफलाइन प्रमाण पत्रों को भी अब पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
राज्य में अक्टूबर 2023 के बाद से सभी जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। प्रारंभिक चरण में आई तकनीकी चुनौतियों का समाधान समयबद्ध तरीके से किया गया, जिससे वर्तमान में पोर्टल पूरी तरह सुचारु और तकनीकी रूप से सक्षम हो गया है। भारत सरकार के महापंजीयक कार्यालय द्वारा समय-समय पर आवश्यक तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राज्य के सभी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को पोर्टल संचालन संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिकों को प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राज्य सरकार ने आधार कार्ड निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं में भी एकरूपता लाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। इससे नागरिकों को समय पर और सही दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे।
यह पहल राज्य में डिजिटल सेवाओं के विस्तार, प्रशासनिक दक्षता और नागरिक सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आमजन को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवाएं मिल रही हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा शीतकालीन सत्र: वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पेश किया 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया. वित्तीय वर्ष समाप्त होने से महज तीन महीने पहले भारी-भरकम अनुपूरक बजट पर कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सवाल उठाते हुए इसमें विजन नहीं होने की बात कही, वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया.
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज कर्ज में डूबते जा रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि 35 हजार करोड़ का भारी-भरकम अनुपूरक बजट की मांग क्यों की जा रही है. वह भी वित्तीय वर्ष के ठीक 3 महीने पहले. मुझे इस अनुपूरक बजट में ऐसी कोई बात दिख नहीं रही है.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज महिलाओं के साथ क्या हो रहा है ? महतारी वंदन के नाम पर 1 हजार दिया जा रहा है, लेकिन बिजली बिल पर उससे ज्यादा लिया जा रहा है. सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस है. सरकार कार्यक्रम ज्यादा आयोजित कर रही है, काम कम हो रहा है. उत्सव जनता को मनाने दिया जा रहा है. सरकार उत्सव मनाने के लिए बजट खर्च कर रही है. दरअसल, सरकार का विजन क्या है यह स्पष्ट नहीं है. इस अनुपूरक बजट में भी कोई विजन नहीं है.
कांग्रेस विधायक ने कहा कि नए पदों पर भर्ती की बात की थी, इसमें कुछ नहीं है. अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी, नहीं है. 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया. किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है. गिरदावरी का काम नए लड़कों से करा लिया गया. सड़क, धान, आदिवासी, किसान, युवा, महिलाओं के विकास पर लक्ष्य निर्धारित कर काम करना होगा.
रोजगार मूलक उद्योगों को देना होगा बढ़ावा
अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट आया है. राजस्व व्यय को बढ़ाने की शुरुआत भूपेश बघेल सरकार ने की. कांग्रेस सरकार ने धान खरीदी को राजनीतिक विषय बनाया. छत्तीसगढ़ में नए क्षेत्रों में रोजगार का सृजन हो, इस दिशा में काम करना होगा. ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता देना है, जिसमें छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का हित हो. कृषि क्षेत्र आज भी रोजगार का सबसे मजबूत क्षेत्र है. राज्य की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्रों को पैसा नहीं मिल रहा है. इसकी चिंता की जाए.
भाजपा विधायक ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की थी. जिससे आज कुटीर और पारंपरिक उद्योगों के साथ रोजगार के साधन बने. महिलाएं मजबूत हुईं हैं. छत्तीसगढ़ में 42 प्रतिशत से आबादी एससी-एसटी की है. उनके हित के बारे में हमारी सरकार बेहतर काम कर रही है.
विधानसभा में हंगामा, नारेबाजी के करते हुए गर्भगृह में घुसा विपक्ष, कांग्रेस विधायक हुए सस्पेंड…
रायपुर। विधानसभा में आज की कार्यवाही के दौरान विपक्ष हसदेव अरण्य इलाके में खनन के मामले में स्थगन लेकर आया. विपक्ष ने विषय पर चर्चा की मांग रखी थी, लेकिन स्थगन पर सरकार के जवाब के बाद चर्चा अस्वीकार हुई, जिस पर गर्भ गृह में घुसकर विपक्ष ने हंगामा किया. इसके साथ गर्भ गृह में घुसने वाले विधायक स्वमेव निलंबित हुए.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन को लेकर कहा कि अशासकीय संकल्प पारित किया गया था कि कोई खदान नहीं खुलेगा. इसके बावजूद भी ज्यादा से ज्यादा जंगल कांटे जा रहे हैं. सरगुजा से बस्तर तक सभी जगह कटाई जोरों पर है. इसके खिलाफ स्थगन लाया गया. मंत्री के द्वारा गलत जानकारी दी गई. गंभीर प्रश्न के उत्तर में बस्तर ओलंपिक की बात कर रहे हैं, गुरु घासीदास अभ्यारण की बात कर रहे हैं. गंभीर विषय को सरकार कितनी संवेदनशील दिखाई दे रहा है. इसके खिलाफ हम गर्भ गृह गए, और स्वयं निलंबित हुए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में फ्लाइट कैंसिल करना पड़ा है. छत्तीसगढ़ इस मामले में समृद्धशाली है, जिसे बिगाड़ने का काम किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में सोलर व्यवस्था है, तो कोयला उत्खनन क्यों किया जा रहा है. मानव-हाथी द्वन्द अलग हो रहा है. छत्तीसगढ़ को केवल प्रदूषण मिल रहा है. पूरे छत्तीसगढ़ के लिए त्रासदी होने वाला है.
उन्होंने कहा कि सरकार केवल दो उद्योगपति के लिए 50 काम कर रही है. जहां खदान खुला है, वहां ग्राम सभा नहीं किया गया. वहां से दूर ग्राम सभा कर 15 मिनट में खत्म कर दिया. मुख्यमंत्री आदिवासी है, और आदिवासी क्षेत्र को खनने का काम चल रहा है. खनिज संपदा को लूटने का काम हो रहा है.
वन मंत्री ने दिया जवाब
वहीं विपक्ष के अभयारण्य क्षेत्र में खनन को लेकर उठाए गए सवाल पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि साय सरकार वन, वन्य जीव, आदिवासी, पर्यावरण-सभी के लिए संवेदनशील है, और इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तत्परता पूर्वक कार्यरत् है. बस्तर में नक्सलवाद पर निर्णायक चोट पहुचाते हुए सरकार ने बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया है, जिसमें रिकार्ड 3 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है.
राज्य शासन द्वारा गुरू घासीदास तमोर पिंगला टाईगर रिजर्व स्थापित किया गया है जो देश का तीसरा सबसे बड़ा टाईगर रिजर्व है. बिलासपुर के समीप कोपरा जलाशय को रामसर साईट घोषित किया गया है . यह प्रदेश की पहली रामसर साईट है. बेमेतरा जिला के गिधवा परसदा में पक्षी विहार की स्थापना की गयी है. हाथियों, बाघों तथा महत्वपूर्ण वन्यजीवों की संख्या में भी विगत 2 वर्षों में भी वृद्धि रिकार्ड की गई है.
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में वन आवरण में 94.75 वर्ग किमी. की वृद्धि हुई है साथ ही वन क्षेत्रों के बाहर वृक्षों वाले क्षेत्र (Tree outside forest) में 702 वर्ग किमी. की वृद्धि हुई है जो देश में प्रथम स्थान पर है.
प्रदेश के वन क्षेत्र में विगत 2 वर्षो में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम अंतर्गत कुल 05 खनन प्रकरण हेतु 1300.869 हे वन भूमि नियमानुसार व्यपवर्तित की गई है. यह सही नहीं है कि सरगुजा, हसदेव अरण्य कोल फील्ड, तमनार, बस्तर आदि क्षेत्र में फर्जी जनसुनवाई जन आंदोलन, लाठी चार्ज, धरना प्रदर्शन, चक्का जाम का नजारा देखने में आ रहा है.
राज्य सरकार द्वारा नियमों के अधीन भारत सरकार की स्वीकृति उपरांत ही वन भूमि व्यपवर्तित की गई है एवं व्यपवर्तन की शर्तों के तहत आवेदक संस्थान के आवेदन अनुसार न्यूनतम वृक्षों की कटाई की गई है. यहां यह उल्लेखनीय है कि वन भूमि व्यपवर्तन प्रकरणों में व्यपवर्तित वन भूमि के एवज में समतुल्य गैर वन भूमि अथवा दुगुने बिगड़े वन क्षेत्र में वैकल्पिक वृक्षारोपण किया जाता है.
विगत 02 वर्षों में व्यपवर्तित वन क्षेत्र के एवज में 1780.109 हेक्टेयर क्षेत्र में 1000 पौधे प्रति हे. के मान से 17,80,000 पौधे रोपित किये जायेंगे. इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्रकरण में वन्यप्राणी संरक्षण योजना पृथक से तैयार की जाती है, जिसके तहत खनन से प्रभावित क्षेत्र के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यप्राणी संरक्षण हेतु कार्य किए जाते हैं.
यह भी सही नहीं है कि जिला रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में वन भूमि तथा राजस्व भूमि पर बड़े पैमाने पर हरे भरे वृक्षों की कटाई की जा रही है. बल्कि सही यह है कि जिला रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम अंतर्गत स्वीकृत 02 प्रकरणों में 6650 वृक्षों की कटाई नियमानुसार की गई है. रायगढ़ जिले में खनन के प्रकरणों में तमनार क्षेत्र में ग्रामसभा का आयोजन नियमानुसार किया गया है.
उन्होंने कहा कि तमनार क्षेत्र में स्वीकृत 02 प्रकरणों में 18 ग्रांव प्रभावित है जिसमें महाराष्ट्र स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को वन (संरक्षण एवं संवर्धन ) अधिनियम, 1980 अंतर्गत गारेपेलमा सेक्टर-2 कोल माईन्स हेतु कुल क्षेत्र 214.869 हे. वन भूमि व्यपवर्तन की स्वीकृति भारत सरकार द्वारा दिनांक 27.01.2023 को दी गई, वन भूमि व्यपवर्तन स्वीकृति के उपरांत नियमानुसार आवेदक संस्थान द्वारा आवेदन दिए जाने पर कुल 3684 नग वृक्षों के विदोहन की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) 19 फरवरी 2025 को दी गई थी, जिसमें से सिर्फ 1124 वृक्षों की कटाई की गई है, तथा गारे पेलमा कोल ब्लाक 4/1 जेएसपीएल को स्वीकृत वन भूमि 91.179 हेक्टेयर में 5526 वृक्षों की कटाई हुई है.
मंत्री ने कहा कि यह सही नहीं है कि सरकार का यह कृत्य वन अधिकार अधिनियम (FRA) जन सुनवाई और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के आदेशों का भी उल्लंघन है. कलेक्टर द्वारा एफ. आर. ए. अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के पश्चात ही वन भूमि व्यपवर्तन की कार्यवाही की गई है, एवं नियमानुसार वृक्ष कटाई की अनुमति दी गई है.
विरोध करने वाले जन प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों पर पुलिस एवं उद्योगपत्तियों के नुमाइन्दों पर कोई भी बल पूर्वक अवैधानिक कार्यवाही नहीं की गयी है. यह सहीं नहीं है कि आज भी हजारों की तादाद में ग्रामीण सरकार के इस कृत्य के खिलाफ धरने पर बैठे हुए हैं, बल्कि सही यह है कि मौके पर सम्पूर्ण कार्यवाही संबंधित विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में नियमों का पालन करते हुए किया गया.
उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है कि छत्तीसगढ़ का फेफड़ा कहे जाने वाले हसदेव क्षेत्र को उजाड़ा जा रहा है. अब तक लाखों वृक्ष रिकार्ड पर तथा लाखों वृक्ष रिकार्ड के बाहर काट डाले गये हैं. यह सही नहीं है कि इस सरकार को वन पर्यावरण, जैवविविधता, जलवायु, वन्य प्राणी रहवास से कोई सरोकार नहीं है.
सही यह है कि हसदेव अरण्य कोल फील्ड के लिए NGT और उच्चतम न्यायालय के निर्णय अनुसार भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (ICFRE) तथा भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के द्वारा सम्पूर्ण जैव विविधता का अध्ययन करके प्रस्तुत रिपोर्ट में परसा ईस्ट के बासेन एवं परसा कोल ब्लाक को विचार किया जा सकता है (Can be considered) की श्रेणी में रखा गया है.
वन मंत्री ने कहा कि यह सही नहीं है कि रिपोर्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाकर कार्यवाही की गयी है. यह सत्य नहीं है कि बस्तर के भानुप्रतापपुर में आरीडोंगरी क्षेत्र में अनेक ‘घने वृक्षों को काट दिया गया. बल्कि सही यह है कि वन ( संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम अंतर्गत 138.960 हे. वन भूमि व्यपवर्तन गोदावी पावर एण्ड इस्पात के पक्ष में 2008 एवं 2015 में स्वीकृति पश्चात अधिनियम के निहित प्रावधानों एवं स्वीकृत माईनिंग प्लान अनुसार आवेदक संस्थान से प्राप्त आवेदन के आधार पर 28,922 वृक्ष नियमानुसार काटे गये हैं.
हिन्द कोल ग्रुप के ठिकानों पर GST का छापा, दस्तावेजों की जांच कर रही टीम
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से कोल कारोबार से जुड़े मामलों में GST की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। इसी कड़ी में आज GST विभाग ने बिलासपुर में हिन्द कोल ग्रुप के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। टीम ने ग्रुप की कोलवॉशरी और कार्यालयों में एक साथ दबिश दी है और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई हिन्द कोल ग्रुप क्लीन कोल बेनिफिकेशन, रेडिएंट कोल बेनिफिकेशन और हिन्द कोल बेनिफिकेशन यूनिट के नाम से संचालित इकाइयों पर की गई है। बताया जा रहा है कि इस ग्रुप का संचालन राजेश अग्रवाल और संजय अग्रवाल करते हैं। ग्रुप की यूनिट गतौरा, बलौदा और हिंडाडीह में स्थित हैं। फिलहाल, GST की टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा: विधायक किरण सिंह देव ने सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल के निर्माण का उठाया मुद्दा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल और महारानी अस्पताल में कैंसर क्लिनिक के निर्माण का मुद्दा उठाया. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आश्वस्त किया कि जनवरी में ही इसका कार्य प्रारंभ हो जाएगा.
जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने प्रश्नकाल के दौरान जगदलपुर में स्थित महारानी अस्पताल के निर्माण कार्योंं की स्वीकृति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कैंसर क्लिनिक का निर्माण किया जाना है. इसमें स्वीकृति कब प्रदान हुई. मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल 12 जून 2025 को स्वीकृति प्रदान की गई. इस पर विधायक ने कहा कि 6 माह के बाद यह प्रक्रिया किस-किस तरीके से होकर गुजरी है, क्योंकि अब तक केवल टेंडर का काम ही चल रहा है. इसमें क्या स्थिति है?
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि पिछले 7 महीना पहले हम प्रवास पर गए थे. इसमें माताओं के लिए एमआरटी भवन बनाए जाने की मांग की गई थी. इसे ध्यान में रखते हुए एमआरडी भवन की स्वीकृति की घोषणा की गई थी. इसका टेक्निकल अनुरूप होता है, जो प्राइवेट एजेंसी हायर करके इसका डीपीआर बनाते हैं. ईएनसी के माध्यम से इसकी स्वीकृति प्रक्रिया जारी होती है, जल्द ही इसका निर्माण ही जाएगा.
इस पर किरण सिंह देव ने कहा कि जब 6 महीना तक टेंडर की प्रक्रिया ही शुरू नहीं होगी तो आखिरकार निर्माण कब होगा? सुपर स्पेश्यालिटी हॉस्पिटल बनना है, उसका भी निर्माण कार्य आखिर कब से शुरू होगा दोनों का कार्य कब तक शुरू हो जाएगा? मंत्री ने कहा कि मैं यह आश्वस्त करता हूं कि अगले महीने जनवरी में ही इसका कार्य प्रारंभ हो जाएगा.
सदन में उठा एपीएल राशन कार्ड से बीपीएल राशन कार्ड में परिवर्तन का मामला, भाजपा विधायक ने सरकार को घेरा…
रायपुर। सदन में एपीएल राशन कार्ड से बीपीएल राशन कार्ड में परिवर्तन का मामला उठा. बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने मुद्दा उठाते हुए अपनी ही सरकार को घेरते हुए मंत्री पर गलत जानकारी देने की बात कही. मामले में अन्य भाजपा विधायकों ने कमेटी बनाकर जांच करने की मांग की.
विधायक सुशांत शुक्ला ने राशन कार्ड को सवाल पूछा था कि क्या बिलासपुर जिला अंतर्गत वर्ष 2023 से नवम्बर, 2025 की अवधि तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु एपीएल राशनकार्डधारियों को परिवर्तित कर बीपीएल राशनकार्ड जारी किया गया है? यदि हां तो कितने राशनकार्ड परिवर्तित किए गए हैं? विकासखण्डवार वर्षवार जानकारी उपलब्ध कराएं?
विधायक ने यह भी पूछा कि क्या एपीएल राशन कार्ड से बीपीएल राशन कार्ड परिवर्तित करने के लिए हितग्राहियों से सहमति ली गई? यदि नहीं तो कारण बताएं? इस हेतु दोषी अधिकारियों पर क्या-क्या कार्यवाही की गई? क्या उक्त कार्य में गड़बड़ी की शिकायत प्राप्त हुई? यदि हां तो क्या कार्यवाही की गई? खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जब दिया तो विधायक ने मंत्री के जवाब को नकारते हुए कहा कि मंत्री का जवाब तथ्यात्मक रूप से गलत है. जिला प्रशासन ने फर्जी राशन कार्ड के मामले में चार एफआईआर कराया है. विधायक ने मंत्री से फिर पूछा कि क्या जिला प्रशासन ने एफआईआर गलत कराया है. विधायक के तीखे सवालों का मंत्री के पास जवाब ही नहीं था. मंत्री की चुप्पी के बीच विधायक सुशांत ने कहा कि खाद्य विभाग के अफसर मंत्री को धोखे में रख रहे हैं. गड़बड़ी करने वालों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है.
विधायक के तीखे तेवर और सवाल के बीच मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान भी यह सवाल आया था. कलेक्टर कीअध्यक्षता में जांच के लिए समिति बनी थी. पूरे मामले की जांच कराई गई है. जांच के बाद जानकारी मिली कि 19 राशन कार्ड को एपीएल से बीपीएल में परिवर्तित किया गया है. 15 कार्ड सहमति से एपीएल से बीपीएल में बदला गया. चार कार्ड बिना जानकारी के बीपीएल में बदले गए. पूरा मामला बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक चार का है. जोन कमिश्नर के अनुशंसा के आधार पर बनाया गया है. मंत्री ने बताया कि जोन कमिश्नर और कार्ड प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मंत्री का जवाब पूरी तरह गलत
मंत्री द्वारा सदन में जवाब पेश करने के बाद विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि मंत्री सदन में जो जवाब दे रहे हैं वह पूरी तरह झूठ है. भ्रष्टाचारियों को खुलेतौर पर संरक्षण दिया जा रहा है. हाथों में दस्तावेज लहराते हुए कहा कि मेरे पास पूरे दस्तावेज हैं. विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आपकी अनुमति हो तो दस्तावेज सदन के पटल पर रख देता हूं. विधायक सुशांत ने कहा कि 250 ऐसे राशन कार्ड है जो पूरी तरह फर्जी है. इनके दस्तावेज मेरे पर अभी उपलब्ध है. भ्रष्टाचारियों को अफसर लगातार संरक्षण दे रहे हैं. गरीबों के राशन पर ऐसे लोग डाका डाल रहे हैं.
समिति ने तथ्य ही नहीं लिया
मंत्री ने जब सदन में बताया कि कलेक्टर की अध्यक्षता में मामले की जांच की गई है. विधायक सुशांत ने कहा कि अध्यक्ष महोदय ये कैसी जांच हो गई है और कौन सी समिति ने जांच किया है, हमें तो पता ही नहीं चला. जांच के दौरान जब हमने सवाल उठाया है और जांच की मांग की है,तब समिति ने हमसे संपर्क क्यों नहीं किया, दस्तावेज क्यों नहीं मांगे. तथ्य क्यों नहीं लिए गए. जांच के नाम पर खानापूर्ति कर भ्रष्टाचारियों को खुलेतौर पर संरक्षण देने काम विभाग के अफसर कर रहे हैं.
धर्मजीत ने किया समर्थन
विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए गए फर्जी राशन कार्ड के मुद्दे पर जांच और चर्चा के लिए अतिरिक्त समय की मांग करते हुए विधायक धर्मजीत सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि अध्यक्ष महोदय विधायक सुशांत ने गंभीर मामला उठाया है, उनके संज्ञान में जांच होनी थी, विधायक से जांच समिति को तथ्य मांगे जाने थे. समिति ने ऐसा नहीं किया. यह मामला गंभीर है, चर्चा आधे घंटे बाद करा लीजिए या सदन के हाईपावर कमेटी से जांच करा लीजिए या फिर विधायक की समिति से जांच करा लीजिए. इस पर विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की प्रक्रिया के तहत आधा घंटा का चर्चा करा लीजिए, तथ्य मैं रख रहा हूं. विधानसभा अध्यक्ष ने लिखित में आवेदन पेश करने की सलाह दी.
विधायक धरमलाल कौशिक ने खाद्य मंत्री से कहा कि जो अधिकारी गलत जवाब दे रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी. अफसरों ने सदन में भद्द करा दी है. गलत जानकारी देने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
छत्तीसगढ़ विधानसभा: सड़क मरम्मत को लेकर मंत्री की जानकारी को कांग्रेस विधायक ने बताया गलत, आसंदी ने किया हस्ताक्षेप…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल में सड़क निर्माण का मुद्दा उठा. कांग्रेस विधायक हर्षिता बघेल ने डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की मरम्मत योग्य सड़कों की जानकारी मांगी. इस पर विभागीय अरुण साव द्वारा दिए गए जवाब को विधायक ने गलत बताया. इस पर आसंदी ने कहा, मंत्री द्वारा पूरी जानकारी दी जा रही है.
कांग्रेस विधायक हर्षिता बघेल ने सवाल किया कि राजनांदगांव व खैरागढ़ जिले के PWD की कितनी सड़कें मरम्मत योग्य है? इस पर विभागीय मंत्री अरुण साव ने बताया कि 48 सड़के मरम्मत योग्य हैं. इनमें में 39 सड़कों का टेंडर हो गया है. 4 सड़कें पूर्ण है, 5 सड़कों का काम अभी प्रारंभ नहीं हुआ.
इस पर कांग्रेस विधायक हर्षिता बघेल ने कहा कि 48 सड़कों में एक भी जगह मरमत का कार्य नहीं हुआ. यह गलत जानकारी है. मंत्री अरुण साव ने कहा कि पूरी जानकारी परिशिष्ट में दी गई. इस पर विधायक ने गलत जानकारी देने की बात कही. इस पर आसंदी ने कहा कि पूरी मंत्री जी द्वारा जानकारी दी जा रही है.
EOW ने सौम्या के PA जयचंद के खिलाफ 1000 पन्नों का चालान किया पेश, 7-8 करोड़ वसूली का दावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित अवैध कोल वसूली मामले में जेल में बंद जयचंद कोशले के विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने सोमवार को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में करीब एक हजार पन्नों का चालान पत्र पेश किया है. ईओडब्ल्यू ने जयचंद के विरुद्ध धारा 120बी, 420, 384, 467, 468, 471 एवं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7, 7ए एवं 12 के तहत यह चालान पेश किया है. पेश किए गए चालान में जयचंद पर आरोप लगाया गया है कि वह सौम्या चौरसिया के निर्देश पर अवैध कोल लेवी की वसूली की राशि को कलेक्ट करने तथा पहुंचाने का काम करता था.
7-8 करोड़ रुपए सौम्या के लिए रिसीव करने का दावा
चालान में ईओडब्ल्यू ने यह भी दावा किया है कि जयचंद सौम्या के निर्देश पर सूर्यकांत तिवारी के निवास स्थान एवं अन्य जगहों से रकम रिसीव करने के बाद मनीष उपाध्याय या सौम्या के बताये गये व्यक्ति को दिया करता था. इस तरह जयचंद ने अवैध कोल लेवी वसूली से लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये सौम्या के लिये प्राप्त किए हैं.
परिवार के सदस्यों के नाम ले रखी है संपत्ति
ईओडब्ल्यू ने चालान शीट में यह भी दावा किया है कि जयचंद ने भी इस अवैध कोल लेवी वसूली की रकम का बड़ा हिस्सा प्राप्त किया है. इस रकम से उसने अपने परिवार के सदस्यों के नाम से भी संपत्ति क्रय की है, जिसकी जांच की जा रही है.
अवैध कोल लेवी वसूली में जयचंद की अहम भूमिका
ईओडब्ल्यू ने अपनी डायरी में जयचंद कोशले उर्फ जय की अवैध कोल लेवी वसूली में महत्वपूर्ण भूमिका होना बताया है. इस डायरी में आरोप लगाया है कि सौम्या चैरसिया के अधीनस्थ रहकर अवैध कोल लेवी वसूली से प्राप्त भारी-भरकम नकद राशि का वास्तविक रिसीवर एवं मध्यस्थ था. अवैध वसूली में जय के नाम से अंकित सभी एंट्रियां जय, सौम्या चौरसिया से संबंधित हैं. डायरी में उल्लेखित प्रविष्टियों के माध्यम से संचालित अवैध लेन-देन की पुष्टि हुई है. इस तरह जयचंद को इस अपराध की पूरी श्रृंखला में एक अनिवार्य कड़ी माना गया है, जिसने न केवल अवैध धनराशि को भौतिक रूप से प्राप्त किया, बल्कि उसे आगे सौम्या तक पहुंचाने का काम भी किया. इस प्रकार इस अवैध वसूली में अर्जित धन की रिसीविंग, कस्टडी और ट्रांसफर की प्रक्रिया में उसने सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अब तक 20 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश
ईओडब्ल्यू जयचंद के पहले इस प्रकरण में जुलाई 2024 में 15 आरोपियों के खिलाफ जिसमें सौम्या, रानू साहू, समीर विश्नोई, शिवशंकर नाग, संदीप कुमार नायक, सूर्यकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, लक्ष्मीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, चंद्रप्रकाश जायसवाल, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, पारेख कुरें, राहुल सिंह, रोशन कुमार सिंह एवं वीरेन्द्र जायसवाल के खिलाफ प्रथम चालान प्रस्तुत कर चुका है. वहीं अक्टूबर 2024 में 2 आरोपी मनीष उपाध्याय, रजनीकांत तिवारी और अक्टूबर 2025 में 2 आरोपी देवेंद्र डडसेना एवं नवनीत तिवारी के विरूद्ध पूरक चालान प्रस्तुत कर चुका है.
सफाई में लापरवाही पर एक्शन, एजेंसी का ठेका निरस्त
रायपुर। नगर निगम जोन-9 कमिश्नरी के पंडित मोतीलाल नेहरू वार्ड क्षेत्र अंतर्गत कचना स्थित बीएसयूपी कॉलोनी की लचर सफाई व्यवस्था के कारण सफाई एजेंसी का ठेका निरस्त कर दिया गया. जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा ने बताया कि यहां पिछले एक महीने से सफाई का बुरा हाल था, शिकायत और निरीक्षण के बाद अनुबंधित एजेंसी स्वच्छ संकल्प की संचालक वीणा सेंद्रे को तीन बार नोटिस देकर व्यवस्था सुधारने अल्टीमेटम दिया गया. इस कॉलोनी में लगभग 1500 परिवार निवास करते हैं. इनके द्वारा निकाला गया कचरा और यहां तक कि नालियों की सफाई का कचरा भी महीनों नहीं उठाया जाता था. वस्तुस्थिति से निगम आयुक्त विश्वदीप को अवगत कराया गया.
जोन कमिश्नर शर्मा ने बताया कि 15 दिसंबर को आयुक्त ने स्वयं अधिकारियों के साथ जाकर कचना बीएसयूपी कॉलोनी की दशा देखी, तदुपरांत उन्होंने एजेंसी का ठेका निरस्त कर उसकी अमानती राशि राजसात करने का आदेश दिया.
इसी के साथ उन्होंने सोकरा नाला के आसपास हुए कब्जे को देखकर इस पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश जोन कमिश्नर को दिया. उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लोक लेखा समिति द्वारा कुछ साल पहले इसी बीएसयूपी कॉलोनी का दौरा करके यहां की व्यवस्था पर कलेक्टर और निगम आयुक्त को निर्देश जारी किया गया था. इसके बाद यहां की सफाई के लिए निगम की ओर से अतिरिक्त सफाई कामगारों का ठेका भी किया गया. इसके बावजूद यहां की व्यवस्था नहीं सुधरने पर अब सफाई एजेंसी पर कार्रवाई की गई.
15 की जगह कभी 5 या 8 कर्मचारी
जोन कमिश्नर शर्मा ने बताया कि पिछले एक महीने से लगातार नोटिस के बावजूद सफाई एजेंसी ने यहां अनुबंधित 15 सफाई कामगारों की ड्यूटी नहीं लगाई. जोन के सफाई अधिकारी ने औचक निरीक्षण में भी यहां कभी 5 तो कभी 8 कर्मचारी ही सफाई करते पाये. इसकी रिपोर्ट तैयार करके आयुक्त को भेजने के बाद ठेका निरस्त करने की कार्रवाई की गई.
मोवा-सड्डू क्षेत्र में भी जांच-पड़ताल होगी
जोन कमिश्नर ने कहा कि मोवा और सड्डू क्षेत्र के वार्डों में भी बीएसयूपी कॉलोनियां हैं. यहां के लिए भी जोन के सफाई अधिकारी को औचक निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है. सड्डू एरिया में खालबाड़ा एवं अन्य झुग्गी बस्तियों के परिवारों को बीएसयूपी मकानों में विस्थापित किया गया है. यहां भी सफाई को लेकर शिकायतें अब आने लगी हैं.
कोरबा और रायपुर में स्टेट GST का छापा, कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर चल रही जांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ में टैक्स चोरी के मामले में स्टेट जीएसटी टीम की कार्रवाई लगातार जारी है। हाल ही में बिलासपुर में तीन बड़े कोयला कारोबारी के यहां छापेमार कार्रवाई के बाद टीम ने आज कोरबा में दो और रायपुर में एक बड़े कोयला कारोबारी के यहां दबिश दी है। कारोबारियों के ठिकानों पर जांच चल रही है। स्टेट जीएसटी की टीम का अनुमान है कि इन कारोबारियों ने भी बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की है।
बता दें कि हाल ही में स्टेट GST की टीम ने बिलासपुर में 3 बड़े कोल कारोबारी महावीर कोल वाशरी, फिल कोल, पारस कोल एंड बेनिफिकेशन के ठिकानों पर छापा मारा था। जांच के बाद कारोबारियों ने 27 करोड़ 61 लाख रुपए जीएसटी टीम को सरेंडर किए थे। इसमें महावीर कोलवाशरी ग्रुप ने 10 करोड़, फील ग्रुप ने 11 करोड़ और पारस कोल वाशरी ने 6.50 करोड़ रुपये सरेंडर किया था। टैक्स चोरी के मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। बता दें कि महावीर कोलवाशरी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे के ससुराल से जुड़ा है।
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन का 11 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन जारी, 29 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
रायपुर। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ का 11 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन लगातार जारी है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत ने बताया कि संघ की मांगें पिछले 10 वर्षों से लंबित हैं। विभागीय मंत्री द्वारा 4 जुलाई 2024 को आश्वस्त किया गया था कि 6 माह के भीतर कैबिनेट में मुख्य मांगों को रखकर निर्णय लिया जाएगा, लेकिन 1 वर्ष 5 माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से संघ सदस्यों में नाराजगी है। इसलिए चरणबद्ध आंदोलन जारी है।
डॉ. रीना राजपूत ने कहा कि आंदोलन के तहत आज अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया गया। प्रथम चरण में 11 दिसंबर को ज्ञापन सौंपा गया था। द्वितीय चरण में 12, 13 और 14 दिसंबर 2025 को नर्सिंग कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया। तृतीय चरण के अंतर्गत 15, 16 और 17 दिसंबर को अस्पताल परिसर में सुबह 11 से 12 बजे तक एक घंटे का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं चतुर्थ चरण में 29, 30 और 31 दिसंबर को अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
एसोसिएशन की मुख्य मांग
स्टाफ नर्स का ग्रेड पे 4800, नर्सिंग सिस्टर का ग्रेड पे 5400, सहाय नर्सिंग अधीक्षक का ग्रेड पे 6600, उपनर्सिंग अधीक्षक का ग्रेड पे 7600 1 नर्सिंग अधीक्षक का ग्रेड पे 8600 किया जाए अथवा शासन द्वारा गठित 20 की कमेटी की अनुशंसाओं के आंशिक संशोधन कर लागू किया जाए।
अन्य मांगें
सभी चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्टाफ नर्सेस बहुत से नियमित पद रिक्त है। रिक्त नियमित पदों पर पूर्व से कार्य संविदा एवं कलेक्टर दर पर कार्यरत् स्टाफ नर्सेस को रखा जाए अथ मध्यप्रदेश राज्य की तरह समान काम समान वेतन का आदेश जारी कि जाए।
कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्स को उच्च कुशल श्रेणी के कर्मचारी वेतन लगभग 14000 प्रतिमाह प्रदाय किया जाए।
सत्र 2025-26 के लिए रायपुर बिलासपुर एवं अंबिकापुर चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालयों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को अध्ययन अवकाश के लिए अनुमति प्रदान की जाए। अध्ययन अवकाश के दौरान वेतन नियमित रूप से प्रदाय की जाए।
समयमान वेतनमान शासन के नियमानुसार 10 वर्ष, 20 वर्ष एवं 30 वर्ष बीत जाने पर प्रदान किया जाता है लेकिन 7 से 8 वर्ष अतिरिक्त हो जाने के बाद भी आदेश लंबित है। इसलिए इतनी वर्षों की ब्याज राशि के साथ आदेश जारी करवाया जाए।
स्टाफ नर्स का पदनाम नर्सिंग ऑफिसर एवं नर्सिंग सिस्टर का पदनाम सीनियर नर्सिंग ऑफिसर किये जाने के लिए आदेश जारी करवाया जाए।
सहायक नर्सिंग अधीक्षक, नर्सिंग प्रदर्शक एवं नर्सिंग सिस्टर के पदों पर पदोन्नति दी जाए।
नर्सिंग एलाऊंस एवं वाशिंग एलाऊंस पर हुई अनुशंसाओं को लागू किया जाए।
सभी चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालय में नर्सिंग संवर्ग के बच्चों के लिए झूला घर बनवाया जाए।
सभी नर्सिंग संवर्ग के स्वयं एवं उनके परिवार के इलाज के लिए कैशलेश सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सभी मेडिकल कॉलेज के परिसर में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए रूकने वाले रिस्तेदारों के लिए रूकने की व्यवस्था करवाई जाए और आपात चिकित्सा में इलाज के लिए मरीज को लाए रिश्तेदारों के लिए सुलभ शौचालयों का निर्माण परिसर में करवाया जाए।
मदिरा प्रेमियों के लिए बुरी खबर, छत्तीसगढ़ में इस दिन बंद रहेगी सभी शराब दुकानें
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मदिरा प्रेमियों के लिए बुरी खबर है। एक दिन के लिए सभी शराब दुकानें बंद रहेगी। गुरु घासीदास जयंती पर 18 दिसंबर को सभी देशी-विदेशी मदिरा दुकानें बंद रहेगी। इस दौरान अगर कोई शराब पीते या पिलाते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर रणबीर शर्मा के निर्देशानुसार शासन की आबकारी नीति के अंतर्गत व्यवस्थापन नियमों एवं शासन निर्देश के बिंदु क्रमांक 22 (22.1) के अनुसार गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर 18 दिसंबर गुरुवार को जिला बेमेतरा में शुष्क दिवस घोषित किया गया है। शुष्क दिवस के अवसर पर जिले में संचालित सभी देशी मदिरा दुकानें सी.एस.-2 (घघ), विदेशी/प्रीमियम मदिरा दुकानें एफ.एल.-1 (घघ), देशी/विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकानें सी.एस.-2 (घघ-कम्पोजिट) एवं एफ.एल.-1 (घघ-कम्पोजिट) तथा सभी मदिरा दुकानों से संलग्न अहाते सी.एस.-2 (ग-अहाता), सी.एस.-2 (ग-कम्पोजिट अहाता) एवं एफ.एल.-1 (ख-अहाता) को 18 दिसंबर 2025 को पूर्णतः बंद रखा जाएगा।
उक्त अवधि में मदिरा का क्रय-विक्रय एवं संव्यवहार पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित विभागों एवं मदिरा दुकान संचालकों को दिए गए हैं।
भिलाई, कोरबा और रायपुर को लेकर संसद में गूंजा छत्तीसगढ़, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया वायु प्रदूषण का मामला
नई दिल्ली/रायपुर। पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और सतत विकास के मुद्दों पर संसद में सारगर्भित एवं दूरदर्शी हस्तक्षेप करते हुए सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने देश के गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों, विशेषकर नॉन-अटेनमेंट सिटीज़ (NAC) का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, उच्च प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित बच्चों, बुजुर्गों, श्रमिकों और कमजोर वर्गों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय किए जाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि, वायु प्रदूषण जैसी जटिल समस्या का समाधान केवल “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” नीति से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थान-विशिष्ट, विज्ञान-आधारित और डेटा-संचालित रणनीति की आवश्यकता है। उन्होंने सीएसआईआर-नीरी जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित मॉडलों को नियामक तंत्र में प्रभावी रूप से एकीकृत करने, स्रोत निर्धारण (SA) अध्ययनों के आधार पर शहर कार्य योजनाओं को लागू करने तथा सड़क धूल जैसे प्रत्यक्ष प्रदूषण स्रोतों पर ठोस हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई, कोरबा और रायपुर जैसे नॉन-अटेनमेंट शहरों का उल्लेख कर सांसद अग्रवाल ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य के औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों में रहने वाली जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बने।
केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत शहर-विशिष्ट कार्य योजनाएँ, वैज्ञानिक अध्ययन, रियल-टाइम निगरानी और सड़क धूल नियंत्रण जैसे उपायों के माध्यम से देशभर में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जिसका उद्देश्य 122 अवमानक और 8 अन्य मिलियन प्लस जनसंख्या वाले शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है जिसमें छत्तीसगढ़ के कोरबा, भिलाई और रायपुर भी शामिल हैं।
130 शहरों में से 103 में पीएम10 सांद्रता में कमी, 64 में 20% से अधिक तथा 25 में 40% से अधिक की उल्लेखनीय गिरावट—यह केंद्र सरकार की विज्ञान-संचालित, स्थान-विशिष्ट रणनीति का जीता-जागता प्रमाण है। कुल 22 शहर एनएएक्यूएस मानकों को प्राप्त कर चुके हैं, जहां पीएम10 का स्तर 60 माइक्रोग्राम/मीटर से कम है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि “स्वच्छ हवा केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का प्रश्न है। संसद के माध्यम से यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है कि नीतियाँ ज़मीन पर प्रभावी रूप से लागू हों और हर नागरिक को स्वच्छ पर्यावरण मिले।”
उनकी यह पहल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए स्वच्छ वायु, स्वस्थ जीवन और वैज्ञानिक नीति निर्माण की दिशा में एक मजबूत संदेश है।
CBI में प्रतिनियुक्ति के लिए रिलीव हुए IPS आशुतोष सिंह, प्रभात कुमार बनाए गए महासमुंद SP, आदेश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने महासमुंद एसपी IPS आशुतोष सिंह को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए रिलीव कर दिया है। उन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में एसपी बनाया गया है। वहीं आईपीएस प्रभात कुमार को महासमुंद एसपी नियुक्त किया गया है। इसका आदेश आज गृह विभाग, छग शासन के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने जारी किया है।
आदेश जारी –


दो वर्षों में आवास-पर्यावरण विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: छत्तीसगढ़ बना ऋणमुक्त, निवेश-अनुकूल और भविष्य-तैयार राज्य
रायपुर। प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रूपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।
श्री चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।
श्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।
उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।
नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा। नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
श्री चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।
120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।
नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटलबॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कालोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।
इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफार्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये है। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुँच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतुरियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है। कॉमन हज़ार्डस, अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा विकसित की गई है, यह औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान है। नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। इससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगेतथा उद्योगों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा। कॉमन हजारडस वेस्ट अप्रैल 2025 से पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगी। इसकी लैंडफिल क्षमता 60,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। जिससे दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।
उन्होंने बताया कि आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए सुधार वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं। ऋण मुक्त संस्थान इसकी स्पष्ट मिसाल हैं। विकास को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हुआ है। नागरिक केंद्रित सुधारों को सभी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल सेवाओं से सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। सेवा वितरण में समय और लागत दोनों की बचत हुई है। नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। नवा रायपुर विकास का केंद्र बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न अंग बनाया गया है। तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। प्राकृ तिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। नवा रायपुर अटल नगर इन सभी प्रयासों का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। ऋण मुक्त, निवेश अनुकूल और भविष्य तैयार शहर के रूप में इसकी पहचान बनी है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियाँ छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।