भोपाल। मध्य प्रदेश में अभी मानसून का और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि प्रदेशभर में प्री मानसून की एक्टिविटी तेज हो गई है। आज 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कई जगहों पर धूप खिली रहेगी। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया गया है।
आज इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, आज बुधवार को 34 जिलों में आंधी-बारिश होने की संभावना है। ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, शिवपुरी, शाजापुर, श्योपुर, सिवनी, सीहोर, छिंदवाड़ा, छतरपुर, अशोकनगर, अनूपपुर, आगर-मालवा, नरसिंहपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम, नीमच, मुरैना, मंदसौर, मंडला, हरदा, खरगोन, खंडवा, बैतूल, बुरहानपुर, बालाघाट, देवास, दतिया, राजगढ़, डिंडौरी, पांढुर्णा, टीकमगढ़, गुना और भिंड में पानी गिरने के आसार है।
यहां खिली रहेगी धूप
वहीं भोपाल, जबलपुर, विदिशा, सतना, सागर, सिंगरौली, सीधी, शहडोल, मैहर, मऊगंज, रीवा, रायसेन, रतलाम, आलीराजपुर, बड़वानी, उमरिया, दमोह, पन्ना, धार और झाबुआ में धूप खिली रहेगी। इन जिलों में गर्मी का असर देखने को मिलेगा।
मानसून की एंट्री में देरी
मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की एंट्री में देरी होगी। 2021 में 9 जून को एंट्री हुई थी। 2018 में 25 जून को मानसून ने दस्तक दी थी। बीते साल 2025 में मानसून 16 जून को मानसून आ गया था। इस बार एक सप्ताह देरी से आएगा।
मानसून में देरी से फसलों को हो सकता है नुकसान
मानसून में देरी हुई तो फसलों को नुकसान हो सकता है। खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। ऐसे में किसानों को बारिश का इंतजार है।
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की चुनाव याचिका को निरस्त करने की मांग को खारिज कर दिया है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर अब हाईकोर्ट में मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी. याचिका में आरोप है कि मुख्यमंत्री रहते भूपेश बघेल ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था, जिसके आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई है. मामले में जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई. मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी.
दरअसल, दुर्ग सांसद व पाटन में भाजपा प्रत्याशी रहे विजय बघेल ने भूपेश बघेल की विधायकी खत्म करने के लिए चुनाव याचिका लगाई है. साल 2024 में लगाई गई इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से ठीक पहले प्रचार बंद होने की अवधि में भूपेश बघेल ने अपने समर्थकों के साथ पाटन क्षेत्र में रैली और रोड शो किया था. इस दौरान उन्होंने चुनावी नारे लगवाए और वोट मांगकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का सीधा उल्लंघन किया, जिसका वीडियो भी बनाया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल की तरफ से 16 बिंदू पेश कर बताया कि याचिका चलने योग्य नहीं है. याचिकाकर्ता ने जो भी आरोप लगाए हैं, उसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है और न ही आचार संहिता उल्लंघन करने का कोई साक्ष्य पेश किया गया है. याचिका खारिज करने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में आवेदन दिया था, कोर्ट ने याचिका चलने के लिए पर्याप्त आधार मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया था.
इससे पहले हाईकोर्ट से एक अन्य अर्जी खारिज होने के बाद भूपेश बघेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट के सामने दोबारा याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर नए सिरे से आवेदन लगाने की छूट दी थी. इसी निर्देश के तहत उन्होंने हाईकोर्ट में आवेदन लगाया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित धान खरीदी व्यवस्था अब दूसरे राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय बन गई है। महाराष्ट्र सरकार के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल 18 और 19 जून को छत्तीसगढ़ दौरे पर आएगा। प्रतिनिधिमंडल राज्य की धान खरीदी प्रणाली का अध्ययन कर इसकी कार्यप्रणाली को समझेगा।
प्रतिनिधिमंडल में महाराष्ट्र के 9 विधायक, 3 विधान परिषद सदस्य और 2 वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह दल रायपुर पहुंचकर धान उपार्जन केंद्रों, भंडारण व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया तथा MSP आधारित खरीदी प्रणाली का विस्तृत अध्ययन करेगा।प्रतिनिधिमंडल में विधायक विनोद अग्रवाल, संजय पुराम, राजू कारेमोरे, विजय रहांगडाले और नरेंद्र भोंडेकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था देशभर में अपनी पारदर्शिता, समयबद्ध भुगतान और प्रभावी प्रबंधन के लिए पहचान बना चुकी है। इसी मॉडल को समझने और अपने राज्य में लागू करने की संभावनाओं का आकलन करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार का यह अध्ययन दौरा आयोजित किया जा रहा है।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए।
एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए।
आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग
राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।
भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता
छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले बने।
राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री श्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।
कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया। इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।
लरायपुर। DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने करोड़ों के फर्जी जीएसटी क्रेडिट (ITC) मामले में ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को रायपुर से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि कंपनी ने बिना माल खरीदे ही फर्जी बिलों के आधार पर करीब 7 करोड़ का टैक्स लाभ लिया। यह लाभ उन कंपनियों के जरिए लिया गया, जो कागजों में तो मौजूद थी, लेकिन वास्तव में काम नहीं कर रही थी। 5 महीने पहले हरीश के भाई संतोष वाधवानी को भी 14 करोड़ की टैक्स चोरी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, हरीश वाधवानी पिछले 5 महीने से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कई अदालतों में अग्रिम जमानत की कोशिश की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद डीजीजीआई ने उसे रायपुर से गिरफ्तार किया।
DGGI के मुताबिक, जांच में पता चला कि कंपनी ने बिना वास्तविक माल खरीदे फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया और उसका इस्तेमाल भी किया। ओम किरण इस्पात उद्योग ने ऐसे कई कारोबारियों से बिल लिए, जिनके जीएसटी नंबर बाद में रद्द या सस्पेंड कर दिए गए थे। यह कार्रवाई एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं हो सकता। इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
राजनांदगांव। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को राजनांदगांव में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।
इस अवसर पर उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने विश्वास, विकास और जनकल्याण की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। यह कालखंड केवल सरकार के कार्यकाल का नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण, गरीबों के सशक्तिकरण, किसानों के सम्मान, महिलाओं के उत्थान और देश के गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अध्याय है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बने हैं। 10 जून को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं। इस दौरान देश में सुशासन, पारदर्शिता और सेवा भाव पर आधारित शासन व्यवस्था स्थापित हुई है, जिसके कारण जनता का विश्वास लगातार बढ़ा है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने पहली बार योजनाओं को जाति, वर्ग और वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठाकर महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के कल्याण पर केंद्रित किया। योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनका लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा। यही कारण है कि आज देश का प्रत्येक नागरिक सरकार की योजनाओं को अपने जीवन में महसूस कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत जनता का अटूट विश्वास है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यभार संभाला था तब देश के केवल 7 राज्यों में भाजपा-एनडीए की सरकारें थीं, जबकि आज 22 राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। यह जनता के भरोसे और सरकार की जनसेवा का प्रमाण है।
किसानों के हितों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है तथा अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था के माध्यम से भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है तथा लाखों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचे हैं। इसी प्रभावी व्यवस्था के कारण देश के लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल हुए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आज का भारत आतंकवाद और दुश्मनों के सामने झुकने वाला नहीं, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से मुंहतोड़ जवाब देने वाला नया भारत है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा और सम्मान दोनों मजबूत हुए हैं।
उन्होंने बताया कि जनधन योजना के माध्यम से 58 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें 32 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के हैं। इससे आर्थिक समावेशन को नई गति मिली है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 60 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है। अब 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को भी निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
आवास, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 4 करोड़ से अधिक प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, 11 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिए गए तथा 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कर स्वच्छ भारत अभियान को जन आंदोलन बनाया गया।
जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 16 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का कार्य किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन और स्वास्थ्य दोनों में व्यापक सुधार आया है।
उन्होंने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से लाखों रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को सहायता मिली है, जबकि मुद्रा योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को नई ताकत मिली है।
जनजातीय समाज के उत्थान को मोदी सरकार की ऐतिहासिक प्राथमिकता बताते हुए सांसद ने कहा कि पहली बार विशेष रूप से जनजातीय समुदायों, विशेषकर अत्यंत पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।
विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। जहां पहले प्रतिदिन लगभग 11 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनते थे, वहीं आज यह गति 34 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है। रेलवे के आधुनिकीकरण, विद्युतीकरण और अमृत भारत स्टेशन योजना के माध्यम से देशभर के रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पहले रेलवे के लिए वार्षिक बजट कुछ सौ करोड़ रुपये तक सीमित रहता था, वहीं आज राज्य में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है और प्रतिवर्ष लगभग 7 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं संचालित हैं। रायपुर-विशाखापट्टनम और रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारों जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 24 लाख से अधिक आवासों का निर्माण हुआ है। विष्णुदेव साय सरकार के गठन के बाद 18 लाख नए आवासों की स्वीकृति दी गई है, जो राज्य के इतिहास में सबसे बड़ा आवास अभियान है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में 2902 किलोमीटर सड़कों के निर्माण सहित लगभग 2700 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने दुनिया को अपनी क्षमता दिखाई। देश ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान की बल्कि वैक्सीन मैत्री अभियान के माध्यम से अनेक देशों की भी सहायता की।
योग दिवस का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज योग को विश्व के 177 से अधिक देशों ने स्वीकार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों द्वारा प्रदान किए गए सर्वोच्च सम्मान भारत की 140 करोड़ जनता के सम्मान का प्रतीक हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मोदी केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि विश्वास, विकास, निर्णायक नेतृत्व, आत्मनिर्भर भारत, वैश्विक सम्मान, गरीब कल्याण और नए भारत के संकल्प का प्रतीक हैं। आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
पत्रकार वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेता खूबचंद पारख, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव, जिला भाजपा अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।
जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी की नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि सुंदरराज पी को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का प्रमुख चेहरा रहे सुंदरराज पी
वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी लंबे समय तक बस्तर रेंज के आईजी रहे हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चलाए, जिससे माओवादी संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा।
सुंदरराज पी की रणनीति केवल सशस्त्र कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने खुफिया तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय युवाओं को सुरक्षा अभियानों से जोड़ने, नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने और सड़क व विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। अबूझमाड़ जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
रायपुर। लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।
प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI (Artificial Intelligence) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। सत्र में एआई के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की
कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों- कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा। इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव निधि साहू, सुधीर सुलतानिया, लक्षित त्रिलोक सेठिया, अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
रायपुर। भारत सरकार की डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट हब पहल के तहत जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, रायपुर द्वारा जिला निर्यात संवर्धन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर गौरव सिंह ने की तथा सह-अध्यक्षता संयुक्त महानिदेशक विदेश व्यापार, नागपुर डॉ. प्रवीण कुमार ने की।
बैठक में रायपुर जिले से निर्यात बढ़ाने, नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने तथा निर्यात क्षमता का अधिकतम उपयोग करने पर व्यापक चर्चा हुई। बताया गया कि डीजीएफटी के अंतर्गत रायपुर जिले में 2,800 से अधिक निर्यातक पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 1,200 निर्यातक वर्तमान में सक्रिय हैं। समिति ने आगामी वर्षों में सक्रिय निर्यातकों की संख्या बढ़ाने और एमएसएमई इकाइयों, एफपीओ तथा कृषि आधारित उद्यमों को निर्यात से जोड़ने की रणनीति पर विचार किया।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि रायपुर जिले में निर्यात वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर किसानों, उद्यमियों एवं उद्योगों की आय में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने सभी विभागों से निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं देने और नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।
बैठक में जानकारी दी गई कि रायपुर जिला छत्तीसगढ़ का प्रमुख निर्यात केंद्र है। यहां से मुख्य रूप से चावल, इस्पात एवं इस्पात उत्पाद, कृषि एवं कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद, वन उत्पाद तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों का निर्यात विभिन्न देशों को किया जाता है।
इस दौरान निर्यातकों ने लॉजिस्टिक्स, दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता प्रमाणीकरण एवं बाजार पहुंच से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा की। डॉ. प्रवीण कुमार ने आश्वासन दिया कि निर्यातकों के सुझावों को संबंधित मंत्रालयों के समक्ष रखकर नीतिगत सरलीकरण की पहल की जाएगी।
बैठक में उद्योग संचालनालय, एमएसएमई मंत्रालय, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, एपीडा, नाबार्ड, ईसीजीसी, इंडिया एक्जिम बैंक, सीमा शुल्क विभाग, लीड बैंक, भारतीय डाक विभाग, राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, पीएचडी चैंबर एवं छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी विभागों ने निर्यात संवर्धन योजनाओं, वित्तीय सहायता एवं विपणन सहायता की जानकारी साझा की।
समिति ने निर्यातकों के लिए उपलब्ध योजनाओं का प्रभावी अभिसरण सुनिश्चित करने तथा नियमित समन्वय तंत्र विकसित करने पर सहमति दी। अंत में सभी हितधारकों ने रायपुर को देश के अग्रणी निर्यात जिलों में शामिल करने का संकल्प लिया।
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की सुशासन और अन्य अभूतपूर्व उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन कलेक्ट्रेट परिसर स्थित टाऊन हॉल में 17 जून से 19 जून 2026 तक किया जा रहा है।
प्रदर्शनी का शुभारंभ बुधवार 17 जून को वन एवं परिवहन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप करेंगे। इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राजेश मूणत, विधायक सुनील सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे एवं सभापति सूर्यकांत राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं एवं ऐतिहासिक निर्णयों को चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आमजन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकेंगे।
रायपुर। भारतमाला परियोजना में कथित अनियमितताओं का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब धमतरी जिले के सिवनीकला गांव में भी जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत एसीबी/ईओडब्ल्यू से की है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण बयान दर्ज कराने एसीबी/ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीनों में फर्जी नामांतरण और अवैध बंटवारा कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि गांव के 17 से 18 खसरों को करीब 90 टुकड़ों में विभाजित कर फर्जी तरीके से रिकॉर्ड तैयार किए गए, जिससे पात्रता से अधिक लोगों को मुआवजे का लाभ दिलाया गया।
अफसरों पर मिलीभगत के आरोप
शिकायत में पटवारी, जांच दल और डायवर्सन से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना प्रशासनिक सहयोग के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं था। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
रिकॉर्ड में फेरबदल का दावा
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पूरे मामले में पूर्व मंत्री, भूमाफियाओं का संरक्षण है। पटवारी, जांच दल और डायवर्सन से जुड़े अधिकारियों ने मिलकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2019 में प्रकाशित रिकॉर्ड के बाद दस्तावेजों में बदलाव कर फर्जी नामांतरण और बंटवारा किया गया। इसके आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित जमीनों का करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कराया गया।
जांच में जुटी एसीबी/ईओडब्ल्यू
ग्रामीणों की शिकायत के बाद एसीबी/ईओडब्ल्यू मामले की जांच कर रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में
मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है।
PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी
बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ।
पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति
भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।
इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है।
उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है।
राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र को शामिल किए जाने के निर्णय पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं। इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया जा रहा है। ऐसे लोगों के विचारों से मै असहमत हूं। मुझे लगता है यह निर्णय धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का प्रयास है।
सबसे पहले यह समझना होगा कि विद्यालय केवल परीक्षा पास करने की फैक्ट्री नहीं होते। उनका उद्देश्य अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक तैयार करना भी होता है। दुनिया की हर विकसित सभ्यता अपने बच्चों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं देती, बल्कि अपने इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से भी परिचित कराती है। भारत यदि अपने बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना चाहता है तो इसमें गलत क्या है?
कुछ लोग पूछ रहे हैं कि स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए या प्रार्थना? यह सवाल ही अधूरा है। क्योंकि भारत की शिक्षा परंपरा में ज्ञान और संस्कार दोनों साथ-साथ चलते रहे हैं। सरस्वती वंदना का अर्थ किसी एक धर्म की पूजा नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रति सम्मान है। गुरु मंत्र शिक्षक और ज्ञान परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। भोजन मंत्र भोजन के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाता है। गायत्री मंत्र मन की एकाग्रता और सकारात्मक चिंतन का संदेश देता है, जबकि शांति मंत्र समाज और विश्व कल्याण की कामना करता है। इनमें कहीं भी किसी दूसरे धर्म के प्रति विरोध, घृणा या असहिष्णुता का भाव नहीं है।
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ अपनी संस्कृति से घृणा करना नहीं होता। भारतीय संविधान ने कभी यह नहीं कहा कि भारत अपनी सभ्यता, अपनी परंपराओं और अपने सांस्कृतिक प्रतीकों को भूल जाए। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है सभी आस्थाओं का सम्मान।
एक और तर्क दिया जा रहा है कि इससे वैज्ञानिक सोच प्रभावित होगी। यह तर्क भी तथ्यों से परे है। दुनिया को शून्य देने वाला भारत, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान और दर्शन की महान परंपरा वाला भारत, उसी संस्कृति से निकला है जिसे आज कुछ लोग पिछड़ा साबित करने में लगे हैं। आर्यभट्ट और भास्कराचार्य की भूमि पर विज्ञान और संस्कृति कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं रहे। जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश आधुनिक तकनीक में अग्रणी हैं, लेकिन अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को भी उतना ही महत्व देते हैं। आधुनिकता और सांस्कृतिक चेतना साथ-साथ चल सकती हैं।
आदिवासी समाज और अन्य समुदायों को लेकर भी भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। जबकि भारत की संस्कृति का मूल भाव ही विविधता में एकता है। आदिवासी परंपराओं में भी प्रकृति, धरती, जल, वन और पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव है। सनातन संस्कृति भी यही सिखाती है कि मातृभूमि, प्रकृति और ज्ञान का सम्मान किया जाए। इसलिए इसे किसी समुदाय के खिलाफ खड़ा करना केवल राजनीतिक दृष्टिकोण हो सकता है, सामाजिक या सांस्कृतिक नहीं।
सच्चाई यह है कि आज पूरी दुनिया अपनी जड़ों की ओर लौट रही है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है, लेकिन रामायण वहां की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। मलेशिया और थाईलैंड में भी भारतीय सभ्यता के अनेक प्रतीकों का सम्मान किया जाता है। जब दूसरे देश अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व कर सकते हैं, तो भारत अपनी हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा पर गर्व क्यों न करे?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन यह भी सच है कि संघ ने हमेशा भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की बात की है। अपनी संस्कृति का संरक्षण करना किसी के खिलाफ होना नहीं है। अपने पूर्वजों, अपने ज्ञान और अपनी मातृभूमि का सम्मान करना सांप्रदायिकता नहीं, बल्कि सभ्य समाज की पहचान है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बच्चों में अनुशासन, कृतज्ञता, राष्ट्रभक्ति, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का प्रयास करता है। शिक्षा केवल दिमाग को प्रशिक्षित करने का नाम नहीं है, बल्कि मन और चरित्र को भी गढ़ने की प्रक्रिया है। जो समाज अपनी जड़ों से कट जाता है, वह भविष्य में अपनी पहचान भी खो देता है।
इसलिए इस निर्णय को राजनीति और वैचारिक पूर्वाग्रह के चश्मे से देखने के बजाय भारतीय शिक्षा और संस्कृति के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। विज्ञान हमें आगे बढ़ने की शक्ति देता है, जबकि संस्कृति हमें यह याद दिलाती है कि हम कौन हैं। दोनों का संतुलन ही एक सशक्त, आत्मविश्वासी और विकसित भारत की नींव बन सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इसी दिशा में एक सार्थक कदम उठाया है, जिसका स्वागत होना चाहिए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 24 जून 2026 को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम सभाओं में जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा एवं निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची (PWL) का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। ग्राम सभा द्वारा शासन की मार्गदर्शिका एवं SOP के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर निराकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा।
इसके अलावा ग्राम सभा में पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति, तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
ग्राम सभाओं में विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी तथा इसके क्रियान्वयन पर चर्चा होगी।
प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा ग्राम विकास से जुड़े निर्णयों में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी 21 जून को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” निर्धारित की गई है। आयोजन को व्यापक और सफल बनाने के लिए राज्य के मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली और तैयारियों की समीक्षा की।
सरगुजा में होगा राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का संभावित राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम सरगुजा जिले में आयोजित होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसके लिए सभी आवश्यक और पुख्ता तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जन-भागीदारी
मुख्य सचिव विकासशील ने निर्देश दिए कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य के सभी जिलों में योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत के प्रमुख स्थलों पर अनिवार्य रूप से योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आयुष विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। जिला स्तर पर अधिक से अधिक जन-सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
NEET परीक्षार्थियों का रखा जाएगा विशेष ध्यान
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि 21 जून को ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट (NEET) की पुनः परीक्षा भी आयोजित की जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि योग दिवस के आयोजनों के कारण नीट परीक्षा केंद्रों और परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा या तकलीफ न हो।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी और डिजिटल पंजीयन
आयुष विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा इस बार व्यापक जनभागीदारी के निर्देश हैं। 14 जून 2026 से सुबह 6.15 बजे से 7.35 बजे तक ऑनलाइन योग अभ्यास सत्र के माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 जारी किया गया है, जिस पर मिस्ड कॉल देकर आसानी से पंजीयन कराया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि आयुष मंत्रालय द्वारा योग संगम पोर्टल-2026 प्रारंभ किया गया है। जिसके माध्यम से विभिन्न संस्थाएं, विभाग, शैक्षणिक संस्थान, स्थानीय निकाय, स्वायत्तशासी संस्थाएं, सार्वजनिक उपक्रम योग संस्थान एवं सामुदायिक संगठन दिनांक 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों के लिए पंजीयन एवं कार्यक्रम के उपरांत विवरण एवं फोटोग्राफ अपलोड किये जा सकते है। शासन के समस्त विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त एवं कलेक्टरों को अधीनस्थ संस्थाओं, कार्यालयों को उक्त पोर्टल पर पंजीयन कराने एवं आयोजन उपरांत कार्यक्रम की जानकारी पोर्टल में अपलोड करने हेतु निर्देशित करने कहा गया है। पंजीयन हेतु वेब पोर्टल https//:yoga.ayush.gov.in/yoga-sangam है।
मंत्रालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद समेत नगरीय प्रशासन, वाणिज्यिक कर, कृषि, श्रम और आयुष विभाग के सचिव एवं योग आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने ‘श्री रविशंकर जी महाराज’ बनाम ‘सीबीआई’ मामले में फोन इंटरसेप्शन (कॉल रिकॉर्डिंग, टैपिंग) के कानूनी पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें नए दूरसंचार नियमों के तहत फोन टेपिंग से जुटाए गए सबूतों की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर और सीबीआई को 24 जून 2026 तक सक्षम अधिकारी के माध्यम से कोर्ट में जवाब दाखिल करने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनु शर्मा (सहयोगी अधिवक्ता पंकज पांडेय, राहुल अंबस्ट, गिरीश त्रिपाठी और कार्तिक खन्ना) ने पैरवी करते हुए ‘दूरसंचार नियम, 2024’ के नियम 3 (3) (b) का हवाला दिया और एक बड़ा कानूनी मुद्दा उठाते हुए कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 जून 2025 को जारी फोन इंटरसेप्शन (टैपिंग) आदेश को नियमानुसार 7 कार्य दिवसों के भीतर रिव्यू कमेटी के समक्ष पुष्टि के लिए रखा जाना अनिवार्य है। यदि समिति निर्धारित समय में इसकी पुष्टि नहीं करती है, तो वह आदेश स्वतः प्रभावहीन हो जाता है। ऐसी स्थिति में उस अवधि के बाद सीबीआई द्वारा टैपिंग से जुटाए गए किसी भी साक्ष्य को ट्रायल कोर्ट द्वारा विचार में नहीं लिया जा सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डीबी ने पाया, याचिकाकर्ता ने मुख्य याचिका में 28 जून 2025 के इंटरसेप्शन आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी थी, बल्कि इसके लिए बाद में एक अंतरिम आवेदन पेश कर अतिरिक्त आधार जोड़ने की अनुमति मांगी थी। इसमें मद्रास हाई कोर्ट के एक चर्चित फैसले (द डायरेक्टर, सीबीआई बनाम पी. किशोर) का हवाला भी दिया है, लेकिन नए नियमों के उल्लंघन की बात स्पष्ट रूप से लिखित में दर्ज नहीं थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि कोर्ट में मौखिक रूप से रखी गई इन सभी दलीलों को शामिल करते हुए 24 घंटे के भीतर एक नया और स्पष्ट शपथ पत्र दाखिल करें और उसकी कॉपी सीबीआई के अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन को सौंपें।
सीबीआई के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी FIR से जुड़े एक अन्य सह-आरोपी की याचिका भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जिसे कोर्ट ने पहले ही 24 जून को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को इस तकनीकी मुद्दे पर केंद्र सरकार, जांच एजेंसी के सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करें और 24 जून 2026 तक हर हाल में अपना जवाबी हलफनामा कोर्ट में पेश करने कहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में आज से ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो रही है. साथ ही 16 से 27 जून तक शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा. विद्यार्थियों का तिलक लगाकर और किताबें भेंट कर स्वागत किया जाएगा.
शाला प्रवेश उत्सव का 30 जून को मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल होंगे. संभाग स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गणवेश, पाठ्यपुस्तकें और साइकिलों का वितरण किया जाएगा.
छात्रों का तिलक लगाकर हुआ स्वागत
राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर के स्कूलों में आज फिर रौनक लौटी है. गर्मी छुट्टियों के बाद पहले दिन विद्यालय पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं का शिक्षकों द्वारा तिलक लगाकर स्वागत किया गया. साथ ही उन्हें किताबें भी भेंट की गई. पहली बार स्कूल पहुंचे नौनिहालों के लिए यह दिन ख़ास तौर पर यादगार रहा.