प्रदेश
रायपुर में 21–22 फरवरी को उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय सम्मेलन, ई-जागृति से एआई तक छह तकनीकी सत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 व 22 फरवरी को रायपुर में किया जा रहा है.
दो दिनों तक आयोजित छह तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा. पहले दिन ई-जागृति, ई-फाइलिंग, ई – हियरिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, शिकायतों की स्वीकृति, क्षेत्राधिकार एवं प्रक्रिया संबंधी प्रावधान, डिजिटल एवं ई-कॉमर्स चुनौतियाँ, डार्क पैटर्न्स एवं भ्रामक विज्ञापन के साथ उपभोक्ता आयोग के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विधिक सुधार पर चर्चा होगी.
अगले दिन 22 फरवरी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में आवश्यक संशोधन के साथ उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता की आवश्यकता पर चर्चा होगी. समापन सत्र में खुला संवाद होगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में वैलेडिक्टरी (विदाई) सत्र आयोजित होगा.
दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, झारखण्ड, गोवा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा एवं उनके जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्यगण, 8 राज्यों के सचिवगण तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि इस कार्यशाला में भाग लेंगे.
छत्तीसगढ़ में निराकरण का प्रतिशत सौ से ज्यादा
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया ने यह बताया कि आगामी सप्ताह में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग में एक अतिरिक्त पीठ एवं बेमेतरा जिले में जिला उपभोक्ता आयोग का शुभारंभ होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ राज्य के जिला उपभोक्ता आयोगों ने 2025 में 160 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण किया है, एवं राज्य उपभोक्ता आयोग के निराकरण का प्रतिशत 101.57 प्रतिशत रहा. प्रदेश के 16 जिला उपभोक्ता आयोगों में ई – हियरिंग की सुविधा भी प्रारंभ कर दी गई है.
असम दौरे से लौटे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, भाजपा की मजबूती और विपक्ष की कमजोरी पर कहा-
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव असम दौरे से लौटे और अपने बयानों में भाजपा की मजबूती और विपक्ष की कमजोरी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने असम और छत्तीसगढ़ की दिशा और दशा बदली, जनता का जीवन आसान हुआ और अधोसंरचना का विकास हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ने एनडीए की सरकार बनाने का मन बना लिया है और इस बार भाजपा पिछले चुनाव से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
कांग्रेस के असम दौरे और जीत के दावों पर कसा तंज
अरुण साव ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है और विपक्ष का कोई दल मैदान में दिखाई नहीं दे रहा। कांग्रेस के असम दौरे और जीत के दावों को लेकर उन्होंने कहा कि यह दावा वैसा ही साबित होगा जैसा छत्तीसगढ़ में 75 बार किया गया था। विपक्ष मैदान में नहीं दिख रहा और पार्टी अपने घर को संभाल नहीं पा रही है। जनता असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार के काम पर भरोसा करती है और पिछले 10 वर्षों के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का निर्णय कर चुकी है।
भूपेश बघेल के राज्यसभा जाने और बलरामपुर घटना पर भी दी प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर अरुण साव ने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले जिन्हें भेजा गया था, उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए क्या किया। इसका जवाब कांग्रेस को जनता के सामने देना चाहिए।
बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक में अवैध बॉक्साइट खनन के विरोध पर SDM द्वारा आदिवासी ग्रामीण की कथित पिटाई और मौत के मामले को लेकर अरुण साव ने कहा कि सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस द्वारा पेसा कानून को लेकर उठाए गए सवाल पर कहा कि विपक्ष का काम केवल सवाल उठाना है। सत्ता से बाहर होने के कारण ही वे बयानबाजी कर रहे हैं।
नक्सलवाद उन्मूलन और बस्तर का विकास
डिप्टी CM ने बताया कि डबल इंजन सरकार के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में काम चल रहा है। पिछले दो वर्षों में नक्सल उन्मूलन की दिशा में तेजी आई है। बस्तर सहित पूरे देश में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। बस्तर के विकास के लिए अलग रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें अधोसंरचना विकास और सरकारी योजनाओं का विस्तार शामिल है।
बस्तर में आदिवासी युवाओं के रोल मॉडल पर सियासी बहस तेज, सांसद महेश कश्यप ने माओवादी महिमामंडन पर उठाए सवाल
जगदलपुर। बस्तर में आदिवासी युवाओं के रोल मॉडल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. बस्तर सांसद महेश कश्यप ने माओवादी विचारधारा के महिमामंडन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से माओवादी लीडर माड़वी हिडमा को युवाओं के लिए आदर्श बताने की कोशिश कर रहे हैं. उनका आरोप है कि पहले “जल-जंगल-ज़मीन” के नाम पर आदिवासियों को भ्रमित किया गया, और अब हिंसा को महिमामंडित किया जा रहा है.
महेश कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई और क्षेत्र का विकास वर्षों तक बाधित रहा. उन्होंने समाज से आह्वान किया कि युवा पीढ़ी को दिशा-विहीन करने वाले प्रयासों को सामूहिक रूप से रोका जाए. दरअसल, जगदलपुर में भूमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान हिडमा से जुड़ा गीत बजने के बाद विवाद भड़क गया. इसी के बाद यह सवाल उठा कि आदिवासी युवाओं का सच्चा रोल मॉडल कौन होना चाहिए.
सांसद ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत स्वतंत्रता संग्राम के नायक हैं, न कि हिंसा के प्रतीक. उन्होंने गुंडाधुर, डेबरीधुर और झाड़ा सिरहा जैसे जननायकों का उदाहरण दिया. महेश कश्यप के मुताबिक, इन्हीं नायकों के संघर्ष से आदिवासी अस्मिता और देश की आज़ादी को दिशा मिली. बस्तर में यह बहस अब केवल राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की दिशा तय करने का सवाल बन गई है.
PM आवास में फर्जी भुगतान और अधूरे घर के आरोप जांच में निकले तथ्यहीन, उपायुक्त ने कहा- भुगतान नियमानुसार, निर्माण कार्य प्रगति पर
रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर आज 18 फरवरी को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय जांच दल से विस्तृत भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई तथ्य भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी पर आधारित पाए गए हैं। उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश मामलों में भुगतान नियमानुसार हुआ है और निर्माण कार्य प्रगति पर है।
महासमुंद - 12 हजार से ज्यादा किश्त अटकी होने का दावा गलत
खबर में बागबाहरा जनपद में 12,366 हितग्राहियों की दूसरी किश्त अटकी होने और केवल 25 हजार रुपए पहली किश्त दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि जांच में सामने आया कि योजना शुरू होने से अब तक जनपद पंचायत बागबाहरा में 22,910 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 19,411 मकान पूर्ण हो चुके हैं। शेष 3,499 आवास निर्माणाधीन हैं। प्रशासन के मुताबिक किश्तों का भुगतान निर्माण कार्य की प्रगति के अनुसार किया जा रहा है।
गरियाबंद - जिन घरों को अधूरा बताया, वे निर्माणाधीन
ग्राम तुहामेटा में झुलवती के नाम पर प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आवास में दो किश्तों में एक लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं। जांच में पाया गया कि छत ढलाई का कार्य पूरा है। हितग्राही श्रीमती झूलबती के निधन के बाद उनके पति श्री पीलाराम को उत्तराधिकारी के रूप में पोर्टल में दर्ज किया गया है, जो कि पीएफएमएस में लंबित है।
इसी तरह राजापड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अडगडी में सुगारो के नाम से वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत है। 40 हजार रुपए की पहली किश्त जारी हो चुकी है। मकान प्लिंथ स्तर पर है और दूसरी किश्त के लिए जियो-टैगिंग पूरी कर ली गई है।
ग्राम पंचायत जाड़ापदर में हिरमनी बंजारा के पिता खेतुराम बंजारा के नाम से वर्ष 2024-25 में आवास स्वीकृत है। दो किश्तों में 95 हजार रुपए जमा किए जा चुके हैं। मकान चौखट स्तर तक बन चुका है। जांच में फर्जी भुगतान का आरोप सही नहीं पाया गया।
जांच रिपोर्ट में इस बात स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि लफंदी में मनरेगा मजदूरी में गड़बड़ी नहीं मिली है। फिंगेश्वर ब्लॉक के लफंदी गांव में मनरेगा मजदूरी में 4 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी की शिकायत की भी गहन जांच की गई। मस्टररोल, मांगपत्र और सहमति पत्रों का परीक्षण किया गया। प्रशासन के अनुसार श्रमिकों को नियमानुसार भुगतान हुआ है और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला है।
सामूहिक गृह प्रवेश पर भी स्पष्टीकरण
गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद में 3817 घरों को कागजों में पूर्ण दिखाने और सामूहिक गृह प्रवेश कराने के आरोपों की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन आवासों को पूर्ण दर्शाया गया है, वे निर्धारित मानकों के अनुरूप विभिन्न स्तरों पर पूर्ण पाए गए। जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की प्रक्रिया अपनाई गई है।
उपायुक्त प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण छत्तीसगढ़ का कहना है कि योजना में भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है। निर्माण की प्रगति जियो-टैगिंग के जरिए मॉनिटर होती है। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रकाशित समाचार के कई बिंदु अपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं और आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित पक्की छत उपलब्ध कराना है और इसके क्रियान्वयन में हर स्तर पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
छत्तीसगढ़ कैडर के इस अफसर समेत 13 IPS हुए केंद्र में IG इम्पैनल, देखें आदेश
रायपुर। केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने देश भर के विभिन्न कैडरों के आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार में आईजी इम्पैनल किया हैं. देशभर के कुल 13 आईपीएस अधिकारियों को केंद्र में आईजी इम्पैनल किया गया है. इनमें छत्तीसगढ़ कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी ध्रुव गुप्ता समेत 2001 से 2005 बैच के अधिकारी शामिल हैं. ध्रुव गुप्ता वर्तमान में आईजी सीआईडी के पद पर पुलिस मुख्यालय रायपुर में पदस्थ हैं.
जानिए कौन हैं आईपीएस ध्रुव गुप्ता?
बता दें ध्रुव गुप्ता छत्तीसगढ़ कैडर के 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वे मूलतः दिल्ली के रहने वाले हैं. दो मई 1980 को जन्मे ध्रुव गुप्ता ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है. फिर यूपीएससी क्रेक कर आईपीएस बने. अविभाजित बिलासपुर जिले में प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर उन्होंने गौरेला थाना प्रभारी के पद पर कार्य किया. फिर बिलासपुर सिविल लाइन सीएसपी भी रहें. महासमुंद के एसपी भी ध्रुव गुप्ता रहें. सेनानी सातवीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल भिलाई के पद पर पदस्थ रहें. फिर इंटेलिजेंस ब्यूरो में लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर रहें. आईबी में रहते हुए ही उन्हें डीआईजी से आईजी के पद पर प्रोफार्मा प्रमोशन राज्य सरकार ने दिया था. डेपुटेशन से वापस लौटने के बाद पिछले साल मई 2025 से वे आईजी सीआईडी के पद पर पुलिस मुख्यालय रायपुर में पदस्थ हैं. साथ ही सीसीटीएनएस/एससीआरबी और तकनीकी सेवाओं का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें दिया गया है. आईपीएस ध्रुव गुप्ता की गिनती प्रदेश के बेहद ईमानदार आईपीएस अधिकारियों में होती हैं.
क्या लिखा इंपैनलमेंट आदेश में

केंद्र सरकार ने आदेश में लिखा है कि इस संबंध में निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एसीसी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के प्रस्ताव पर लिया गया था. गृह मंत्रालय के पुलिस-I डिवीजन (IPS-IV सेक्शन) द्वारा कर्तव्य भवन से जारी आदेश के अनुसार, पैनल में सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया विभिन्न विचार श्रेणियों के तहत की गई है, जिनमें प्रथम समीक्षा, द्वितीय समीक्षा और प्रारंभिक स्थगन शामिल हैं.
बता दे केंद्र में आईजी इम्पैनलमेंट का मतलब होता है कि अब ये अफसर जब भी केंद्र में डेपुटेशन पर जाएंगे तो आईजी रैंक पर जाएंगे.
प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया तेज, 35 अभ्यर्थियों की जांच के लिए विषय-विशेषज्ञ समिति गठित
रायपुर। राज्य में प्राध्यापक (उच्च शिक्षा) परीक्षा–2021 के अंतर्गत 595 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने उच्च स्तरीय विषय-विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। यह समिति अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों और प्रमाण-पत्रों की गहन जांच कर अंतिम पात्रता निर्धारण करेगी।
ज्ञात हो इससे पहले 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र प्रेषित कर 35 अभ्यर्थियों की शैक्षणिक अर्हताओं की विस्तृत जांच के लिए विषय-विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया था। आयोग ने 4 दिसंबर 2025 को आयोजित बैठक में निर्णय लिया था कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान उत्कृष्ट प्राध्यापक पद के लिए आवेदन करने वाले इन अभ्यर्थियों के अभिलेखों का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण आवश्यक है।
मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार, चयन प्रक्रिया को यूजीसी विनियम 2018 के तहत निर्धारित अर्हताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। विज्ञापन की कंडिका 6 (2) (iv) (ख) के विशेष संदर्भ में विभिन्न विषयों के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। गठित समिति में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्राध्यापकों को शामिल किया गया है। समिति के संयोजक के रूप में निदेशक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर ओम प्रकाश व्यास को नियुक्त किया गया है।
इसी तरह सदस्य के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष जैविक विज्ञान विभाग डॉ.एस.एस.सन्धु, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष वाणिज्य विभाग के डॉ.पवन मिश्रा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष गणित विभाग के डॉ. अवनीश कुमार,अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रींवा के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. एन. पी.पाठक, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान के डॉ. विवेक मिश्रा तथा आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रसायनशास्त्र विभाग के डॉ. नंद किशोर कराडे को शामिल किए गए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समिति द्वारा परीक्षण उपरांत योग्य अभ्यर्थियों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे राज्य के महाविद्यालयों में रिक्त पद शीघ्र भरे जा सकें और शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।
रोमांच और प्रकृति का संगम शिशुपाल पर्वत बना छत्तीसगढ़ का नया एडवेंचर हब, युवाओं में बढ़ी लोकप्रियता
रायपुर। यदि आप प्रकृति, पहाड़ और एडवेंचर के शौकीन हैं, तो महासमुंद जिले के सरायपाली में स्थित शिशुपाल पर्वत आपके लिए एक शानदार पर्यटन स्थल हो सकता है। आजकल शिशुपाल पर्वत ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों के बीच एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। यह स्थान अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। रायपुर से 157 किमी और सरायपाली से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित यह पर्वत पर्यटकों को प्रकृति के करीब जाने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।
रोमांचक ट्रैकिंग का अनुभव
शिशुपाल पर्वत समुद्र तल से 900 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए रोमांचक ट्रैकिंग मार्ग है, जो साहसिक गतिविधियों के प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ट्रैकिंग मार्ग में जंगल, चट्टानें और प्राकृतिक पगडंडियां शामिल हैं। पर्वत के ऊपर एक विशाल मैदान है, जहां से वर्षा ऋतु के दौरान पानी 1100 फीट नीचे गिरता है और भव्य जलप्रपात का निर्माण करता है। यह दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां की हरियाली और शांत वातावरण एक मनमोहक दृश्य का निर्माण करते हैं। पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। यहां पहुंचने वाले सैलानियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया गया।
प्राकृतिक सुंदरता और शांति
शिशुपाल पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं। यहां का वातावरण, हरियाली और झरने पर्यटकों को मानसिक शांति और सुकून का अनुभव कराते हैं। यह स्थान फोटोग्राफी और प्रकृति के अद्भुत दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। शिशुपाल पर्वत न केवल रोमांचक ट्रैकिंग स्थल है, बल्कि इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम भी है। यहां ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। अपने ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक आकर्षण के कारण शिशुपाल पर्वत आज के दौर में पर्यटन का नया केंद्र बनता जा रहा है।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
शिशुपाल पर्वत (बड़ा डोंगर) का नाम स्थानीय लोककथाओं से जुड़ा हुआ है। किंवदंती है कि इस पहाड़ पर कभी राजा शिशुपाल का महल हुआ करता था। यहां का गौरवशाली इतिहास रहा है। पर्वत पर ही जर्जर दुर्ग, प्राचीन मंदिर और तालाब के अवशेष आज भी अतीत की गाथा सुनाते हैं। जिनके अनुसार जब अंग्रेजों ने राजा को घेर लिया, तो उन्होंने वीरता का प्रदर्शन करते हुए अपने घोड़े के साथ पहाड़ी से छलांग लगा दी। इस घटना के कारण इस पर्वत का नाम शिशुपाल पर्वत और यहां स्थित झरने का नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा। यह जलप्रपात अत्यधिक ऊंचाई से गिरने के कारण अद्भुत सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है।
रोजगार के नए अवसर
शिशुपाल पर्वत पर हर वर्ष मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए आते हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले की चहल-पहल का आनंद लोग उठाते हैं। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अद्भुत अनुभव इसे एक संपूर्ण पर्यटन स्थल बनाता है। यह मेला न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
पर्यटन विकास की संभावनाएं
इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने की पहल शासन द्वारा की जा रही है। वहीं आसपास के क्षेत्रों में बांस से बनी हस्तशिल्प वस्तुएं भी पाई जाती हैं, जो स्थानीय लोगों की आय का प्रमुख जरिया बन सकती हैं। इसे एक पर्यटन परिपथ के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। यहां से चंद्रहासिनी देवी मंदिर, गोर्मदा अभ्यारणय, सिंघोड़ा मंदिर, देवदरहा जलप्रपात एवं नरसिंहनाथ जैसे पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा सकता है।
‘महानगर के दावे, पर पानी भी नहीं’ — स्वास्तिक नगर में जल संकट पर प्रदर्शन
रायपुर। कचना क्षेत्र के स्वास्तिक नगर में पीएम आवास के परिवारों ने पानी की समस्या को लेकर निगम मुख्यालय के सामने बुधवार को मटकी फोड़कर विरोध प्रदर्शन किया गया. निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के नेतृत्व में स्थानीयों ने विरोध जताते हुए उपायुक्त विनोद पांडेय को पत्र सौंपा. उन्होंने बोरिंग कार्य पूरा कराने की मांग की है.
जानकारी के मुताबिक, 20 जनवरी को नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से स्थानियों की मुलाकात के बाद टैंकरों की संख्या बढ़ाई गई थी. 3 फरवरी को आकाश ने स्वास्तिक नगर का दौरा कर बोरिंग के निर्देश दिए थे, लेकिन आश्वासन के बावजूद टैंकरों से सप्लाई जारी है. मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान लोगों ने निगम की अनदेखी के खिलाफ बुधवार को मोर्चा खोल दिया.
मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप
निवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कॉलोनी बनाकर गरीब परिवारों को यहां विस्थापित तो कर दिया, लेकिन पीने का पानी, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं आज तक नहीं दी गईं. पिछले एक साल से अधिक समय से लोग टैंकरों से की जा रही है, जबकि स्थायी समाधान के रूप में बोरिंग की मांग लंबित है.
5 मार्च तक मांग पूरी करने का आश्वासन
निगम आयुक्त के प्रतिनिधि उपायुक्त विनोद पांडेय को आकाश तिवारी ने उन्हें बोरिंग की मांग को लेकर पत्र सौंपा. उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि 5 मार्च तक बोरिंग का कार्य पूरा कर दिया जाएगा और तब तक टैंकरों की संख्या बढ़ा दी जाएगी. नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि 5 मार्च तक बोर नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा.
महानगर के दावे, लेकिन पीने का पानी भी नहीं : आकाश तिवारी
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि रायपुर को महानगर बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन आम जनता को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा. उन्होंने महापौर और निगम अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाया और कहा कि क्या वे केवल कुछ लोगों के लिए महापौर हैं या पूरे रायपुर के लिए.
कोयला घोटाला में ‘टाइप्ड बयान’ विवाद : कोर्ट ने ACB-EOW चीफ समेत 3 अफसरों के खिलाफ दायर याचिका की खारिज
रायपुर। छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) के चीफ अमरेश मिश्रा, एडिशनल एसपी चंद्रेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के विरुद्ध दायर परिवाद को खारिज कर दिया है. रायपुर की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट आकांक्षा बेक की अदालत ने यह फैसला क्षेत्राधिकार (ज्यूरिडिक्शन) के अभाव में सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले पर विचारण करने का अधिकार उसके पास नहीं है.
क्या था कोर्ट का मुख्य आधार?
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज बयानों के संबंध में सुनवाई का अधिकार उसी न्यायालय को है, जहाँ वे बयान साक्ष्य के रूप में पेश किए गए हों. वर्तमान परिवाद में कोर्ट को विचारण की अधिकारिता प्राप्त नहीं थी, इसलिए इसे निरस्त किया गया. अदालत ने यह भी साफ किया कि परिवाद प्रचलनशील न होने के कारण प्रारंभिक साक्ष्य और धारा 94 BNSS से संबंधित आवेदनों पर भी विचार नहीं किया जा सकता.
अधिकारियों पर क्या थे आरोप?
परिवादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि एसीबी के इन वरिष्ठ अधिकारियों ने कूट रचना (Forging) कर धारा 164 के तहत कथन दर्ज कराए थे. परिवादी ने इसे आपराधिक कृत्य बताते हुए अदालत से अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.
अदालत में हुई तीखी बहस
परिवाद की स्वीकार्यता को लेकर राज्य सरकार और परिवादी पक्ष के बीच जोरदार बहस हुई:
बचाव पक्ष (राज्य सरकार): अधिवक्ता रवि शर्मा ने तर्क दिया कि यह मामला कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर है. साथ ही उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी अपने शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे, इसलिए उन्हें वैधानिक संरक्षण प्राप्त है.
परिवादी पक्ष: अधिवक्ता फैजल रिजवी ने दलील दी कि किसी भी अपराध की सूचना देना एक संवैधानिक अधिकार है और अदालत को इस पर विचार करना चाहिए.
अदालत के फैसले के बाद परिवादी पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने स्पष्ट किया है कि वे इस आदेश के खिलाफ रिवीजन पेश करेंगे. उन्होंने कहा कि परिवाद में लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित हैं और उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.
शिक्षा को आधुनिक और समावेशी बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका अहम: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर/नई दिल्ली। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल बुधवार को नई दिल्ली में “शिक्षा में एआई का परिचय” विषय पर आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए।
बैठक में श्री अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि एआई न केवल शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक बनाएगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग भारतीय शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।
बैठक के दौरान कोलंबिया यूनिवर्सिटी, अमेरिका के वाइस डीन डॉ. विशाल मिश्रा ने शिक्षा के क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव, इसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एआई व्यक्तिगत शिक्षण, मूल्यांकन प्रणाली और शिक्षकों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए एआई आधारित शिक्षा नवाचार का माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसे समावेशी, नैतिक और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल और तकनीकी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में और मजबूत करेगी।
बैठक में उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों एवं संसदीय सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए।
VSK ऐप विवाद: हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर कार्रवाई पर रोक लगाई
बिलासपुर। VSK ऐप को लेकर प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने VSK ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा और याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी। मामले की सुनवाई जस्टिस एन के चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई।
दरअसल, शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया, कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। उन्होंने इसे शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से नहीं कराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने कहा है। हालांकि ये आदेश कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में ही जारी किया है, इसका लाभ अन्य शिक्षकों को भी मिलेगा या नहीं, ये अभी साफ नहीं है। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक राज्य सरकार शिक्षकों को VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं करेगी। साथ ही, इस मुद्दे को लेकर किसी भी शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मामले में याचिकाकर्ता कमलेश सिंह बिसेन ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिका में दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है। पहला, शिक्षकों की निजता का प्रश्न और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का विषय। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
मवेशी परिवहन मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, जब्त मिनी ट्रक सुपुर्दगी पर छोड़ने के निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मवेशी परिवहन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए जब्त मिनी ट्रक को वाहन मालिक को अंतरिम सुपुर्दगी (सुपुर्दनामा) पर देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल मवेशियों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवहन, जब तक वह वध (स्लॉटर) के उद्देश्य से न हो, तब तक अपराध नहीं माना जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने पारित किया।
क्या था मामला?
मामले के अनुसार 20 अक्टूबर 2025 की रात थाना नांदघाट, जिला बेमेतरा पुलिस ने एक टाटा आइशर मिनी ट्रक (सीजी 15 डीजेड 8001) को जब्त किया था। आरोप था कि ट्रक में 16 मवेशियों को रस्सियों से बांधकर, अत्यधिक भीड़ और अमानवीय स्थिति में ले जाया जा रहा था। इस पर छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया। वाहन के पंजीकृत मालिक शिवेंद्र यादव ने सुपुर्दनामा के लिए आवेदन किया था, जिसे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और फिर सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह वाहन का वैध मालिक है, उसके पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं और वह स्वयं आरोपी भी नहीं है। उसने वाहन चालक को ट्रक दिया था और उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि मवेशियों का कथित रूप से गलत तरीके से परिवहन किया जा रहा है। चार महीने से अधिक समय से वाहन खुले में खड़ा है, जिससे उसके खराब होने की आशंका है। यह भी तर्क दिया गया कि मवेशियों को पहले ही अंतरिम सुपुर्दगी पर छोड़ा जा चुका है और अब तक वाहन की जब्ती या कुर्की की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि मवेशियों के परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं थे, इसलिए वाहन छोड़ना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 6 का विस्तार से विश्लेषण करते हुए कहा कि कानून का प्रतिबंध केवल तब लागू होता है, जब मवेशियों का परिवहन वध के उद्देश्य से किया जा रहा हो। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई प्रथम दृष्टया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि मवेशियों को स्लॉटर हाउस ले जाया जा रहा था।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब्त वाहन को लंबे समय तक खुले में पुलिस थाने में रखना उचित नहीं है, क्योंकि इससे वाहन के खराब होने की संभावना रहती है। हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के आदेश निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह उचित शर्तों के साथ सात दिनों के भीतर वाहन को मालिक को अंतरिम सुपुर्दगी पर सौंपे।
ऋषभ पराशर और तरुण कुमार किरण बने IAS, केंद्र सरकार का आदेश जारी
रायपुर। केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) ने अधिसूचना जारी कर छत्तीसगढ़ के दो अलाइड सर्विस अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में नियुक्त किया है. यह नियुक्ति वर्ष 2024 की चयन सूची (नॉन-एससीएस) के अंतर्गत की गई है.
जारी आदेश के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच उत्पन्न रिक्तियों के विरुद्ध चयन करते हुए ऋषभ कुमार पराशर और तरुण कुमार किरण को आईएएस में पदोन्नत किया गया है. यह नियुक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियम, 1954 तथा संबंधित विनियमों के तहत की गई है. ऋषभ पराशर राज्य वित्त सेवा और तरुण कुमार किरण जीएसटी विभाग के अधिकारी हैं.

मुख्यमंत्री साय से छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज महानदी भवन में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।
इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने 21 व 22 फरवरी 2026 को बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम चाँपा (सैंहा)में आयोजित हो रहे 80 वॉ छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज महा-अधिवेशन के लिए निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, केन्द्रीय महामंत्री यशवंत सिंह वर्मा, कोषाध्यक्ष जागेश्वर बघेल, राज प्रधान बलौदाबाजार सुनीता वर्मा, चन्दखुरी चिन्ता राम वर्मा, रायपुर जगेश्वर प्रसाद वर्मा अर्जुन राज हरी राम वर्मा, हरिश्चंद्र वर्मा, रघुनंदन वर्मा सहित समाज के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सुप्रिया से प्रेरणा लेकर युवाओं को अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित अपने कार्यालय में सीडीएस परीक्षा में ऑल इंडिया चौथा रैंक प्राप्त करने वाली मुंगेली की सुश्री सुप्रिया को सम्मानित किया। उन्होंने सुप्रिया और उनके परिजनों को पुष्पगुच्छ भेंटकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी और मुँह मीठा कराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुप्रिया की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला युवा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रिया का अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को सुप्रिया से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य पाने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर मुंगेली कलेक्टर कुन्दन कुमार भी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि जिले के ग्राम टेढ़ाधौंरा की 23 वर्षीय सुप्रिया ठाकुर ने सीडीएस परीक्षा में ऑल इंडिया चौथी रैंक प्राप्त कर मुंगेली जिला सहित राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। अपनी प्रतिभा, अनुशासन और देशसेवा के अटूट संकल्प के बल पर वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुई हैं। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर उन्हें मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं दी है।
साधारण परिवेश से असाधारण उपलब्धि तक
ग्राम टेढ़ाधौंरा निवासी सुप्रिया सिंह श्रीनेत एक किसान परिवार से आती हैं। उनकी माता संतोषी सिंह श्रीनेत और पिता वैदेही शरण सिंह, जो पेशे से किसान हैं, ने सदैव उन्हें शिक्षा और संस्कारों का मजबूत आधार दिया। परिवार के स्नेहिल और अनुशासित वातावरण में पली-बढ़ी सुप्रिया ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की। उन्होंने कक्षा 10वीं में 71 प्रतिशत और 12वीं में 58 प्रतिशत अंक अर्जित किए। इसके बाद उन्होंने बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन) में स्नातक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग अध्ययन के दौरान ही उन्होंने एनसीसी को अपनाया और अपने नेतृत्व कौशल के बल पर जूनियर अंडर ऑफिसर के पद तक पहुंचीं। एनसीसी के प्रशिक्षण ने उनके भीतर अनुशासन, साहस और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ किया। यहीं से भारतीय सेना में अधिकारी बनने का उनका संकल्प आकार लेने लगा।
दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम का परिणाम
वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग पूर्ण करने के बाद सुप्रिया ने पूरी एकाग्रता के साथ सीडीएस परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की। कठोर परिश्रम, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमिशन के अंतर्गत आयोजित एसएसबी साक्षात्कार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया चौथी रैंक हासिल की। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली प्रेरक कहानी है। शैक्षणिक और सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ सुप्रिया सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। नृत्य उनकी प्रमुख रुचि है, जो उनके व्यक्तित्व को ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। सुप्रिया सिंह श्रीनेत की यह सफलता न केवल मुंगेली, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का किया आह्वान
रायपुर। भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।
उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है। यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा।
प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो।
उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने वर्ष 2001 के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे।
इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्यों के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का किया शुभारंभ, गुरु घासीदास के अनुयायियों का दल पावन गिरौदपुरी धाम के लिए हुआ रवाना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी। श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी।
कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब, विधायक ललित चंद्राकर, विधायक मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित “विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा” का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए।
