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कवर्धा-बलौदाबाजार दौरे पर सीएम साय, खल्लारी हादसे को बताया दुखद
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महासमुंद जिला स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में आज सुबह हुए रोप-वे हादसे को दुखद बताया. उन्होंने कहा कि घटना की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कवर्धा और बलौदाबाजार जिले के दौर पर रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा की. उन्होंने बताया कि कवर्धा में लोधी समाज द्वारा अवंति बाई की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें शामिल होंगे.
इसके अलावा बलौदाबाजार में गोंडवाना समाज की ओर से आयोजित आदर्श विवाह समारोह में शामिल होंगे. वहीं शाम को केरल के दौरे को लेकर कहा कि कल (केरल विधानसभा चुनाव के लिए) बीजेपी प्रत्याशियों का नामांकन है. उसमें शामिल होने जा रहे हैं.
विधानसभा में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर मिल रही लोगों से बधाई पर कहा कि कल हम सरगुजा गए थे, वहां अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने मुलाकात के दौरान विधेयक का स्वागत किया. रायपुर में भी सीएम हाउस पहुंचे लोगों ने धन्यवाद दिया.
सुकमा में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी: तीन शक्तिशाली IED बरामद, नक्सलियों की साजिश नाकाम
सुकमा। सुरक्षाबलों ने सर्चिंग के दौरान तीन शक्तिशाली आईईडी को बरामद कर नक्सलियों की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. बरामद 1 किलो, 2 किलो और 4 किलो वजन के आईईडी को सुरक्षित नष्ट किया गया.
जानकारी के अनुसार, 226 बटालियन सर्चिंग के लिए निकली थी, इस दौरान जगरगुंडा-नरसापुरम मार्ग पर माओवादियों द्वारा लगाए गए तीन शक्तिशाली आईईडी बरामद किए गए. सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के ध्येय से लगाए गए इन आईईडी की वजन 1 किलो, 2 किलो और 4 किलो की पाई गई.
आईईडी की बरामदगी के बाद बम निरोधक दस्ता, डीएसएमडी और डॉग स्क्वायड की मदद से उसे मौके पर ही नष्ट करने के बाद सर्चिंग टीम वापस बटालियन में लौट आई. इसी बरामदगी से अभी भी क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी साबित हो रही है, जिसे 31 मार्च की तय समय तक खत्म करना सुरक्षाबलों का लक्ष्य है.
खल्लारी मंदिर में बड़ा हादसा: रोप-वे केबल टूटा, ट्रॉली गिरने से कई श्रद्धालु घायल
महासमुंद। जिले के खल्लारी स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में आज सुबह बड़ा हादसा हुआ। मंदिर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। घटना के समय ट्रॉली में श्रद्धालु सवार थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे आई और इसमें बैठे कई श्रद्धालु घायल हो गए।
चैत्र नवरात्र के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इस हादसे से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन मंदिर प्रबंधन और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 5 से 6 श्रद्धालु गंभीर और मामूली चोटों के साथ घायल हुए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल, महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।
स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
नक्सली हमले में घायल जवान को फिर नक्सल क्षेत्र भेजने पर हाईकोर्ट सख्त, पदस्थापना पर रोक के निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल जवान की पुनः नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापना पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे जवानों को उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए अनुसूचित एवं अति नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थ नहीं किया जा सकता।
बता दें कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम नागरदा निवासी याचिकाकर्ता दिनेश ओगरे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन, सकरी (जिला बिलासपुर) में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। याचिका में उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में बीजापुर जिले के पामेड़ में पदस्थापना के दौरान नक्सली हमले में उनके सिर में गोली लगी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर भी हुआ था। इन घटनाओं के कारण उन्हें आज भी चलने-फिरने और कार्य करने में दिक्कत होती है।
इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय, रायपुर द्वारा उनकी पदस्थापना पुनः बीजापुर जिले के अति नक्सल प्रभावित अदवाड़ा कैंप में कर दी गई, जिससे आहत होकर उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा 3 सितंबर 2016 और 18 मार्च 2021 को जारी सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश है कि नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही ड्यूटी ली जाए और उन्हें घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थापित न किया जाए। साथ ही उनके स्वास्थ्य का नियमित ध्यान रखा जाए।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए एडीजीपी (प्रशासन) और एडीजीपी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के मैदानी जिले में पदस्थापना संबंधी आवेदन का तत्काल निराकरण करें। कोर्ट के इस फैसले को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत सुरक्षाबलों के जवानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
धर्म स्वातंत्र्य सहित तीन अहम विधेयक पारित, मुख्यमंत्री साय से प्रतिनिधिमंडल ने जताया आभार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधायक पुरंदर मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की और बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य, छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के पारित होने पर उनका सम्मान कर आभार जताया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026,छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक 2026 एवं छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 का विधानसभा में पारित होना पूरे प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित होगा। इनमें धर्म स्वातंत्र्य विधेयक हमारी महान परंपराओं और मूल्यों को सुरक्षित रखने का एक स्पष्ट संकल्प है। इसी तरह अन्य दो विधेयक भी पारदर्शिता के साथ भर्ती के लिए अहम साबित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के अनुरूप हमने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किया है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था पर यह कानून उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे। प्रदेश में धर्मांतरण के कारण कुछ क्षेत्रों में सामाजिक तानाबाना भी बिगड़ रहा था, जिससे प्रदेश की छवि धूमिल हो रही थी। इस बिल के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को पारित कर पूर्व राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जूदेव जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ प्रखर मुहिम छेड़ कर "घर वापसी" अभियान चलाया था।
इसी तरह हमारी सरकार की पहल पर प्रदेश के लाखों युवाओं की आवाज को सुनते हुए सरल एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया हेतु छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक पारित किया गया है। इसी तरह परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने एवं नकल जैसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 पारित किया गया है। यह दोनों सर्वसम्मति से पारित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।व
विकास के पर्याय बने सांसद बृजमोहन अग्रवाल, लाखों के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
रायपुर। राजधानी के चहुंमुखी विकास और जन-सुविधाओं के विस्तार हेतु संकल्पित वरिष्ठ भाजपा नेता एवं लोकप्रिय सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शनिवार को रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 02 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 13 एवं 28 में सांसद निधि से होने वाले ₹35 लाख की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया।
देवेंद्र नगर स्थित श्री गुजराती ब्रह्म समाज 'दयाभवन' में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में श्री अग्रवाल ने शिलापट्ट का अनावरण कर कार्यों की आधारशिला रखी। इन विकास कार्यों के तहत प्रमुख रूप से दयाभवन में द्वितीय तल पर अतिरिक्त भवन निर्माण, श्री बालाजी विद्या मंदिर स्कूल परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु आधुनिक भवन का निर्माण और मंडी कॉलोनी, लोधी पारा स्थित लोधी भवन में सामाजिक कार्यक्रमों हेतु अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने अपने चार दशकों के जनसेवा के सफर को याद किया।
उन्होंने कहा "पिछले करीब 40 वर्षों में रायपुर में हमने 1000 से अधिक सामुदायिक भवनों का जाल बिछाया है। मेरा लक्ष्य केवल ईंट-गारे की दीवारें खड़ा करना नहीं, बल्कि इन भवनों को जीवंत बनाना है। अब समय आ गया है कि इन भवनों का उपयोग सिलाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के लिए हो, ताकि हमारी माताएं-बहनें और युवा आत्मनिर्भर बन सकें।" उन्होंने यहां कंप्यूटर क्लास शुरू करने के लिए 5 लाख रुपए अतिरिक्त देने की घोषणा की।
कार्यक्रम में विधायक, रायपुर उत्तर पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, सभापति नगर निगम सूर्यकांत राठौर, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, पार्षदगण महेंद्र खोडियाड एवं अवतार बादल, गुजराती ब्रह्म समाज अध्यक्ष कीर्ति भाई व्यास सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
उपस्थित जनसमूह ने सांसद श्री अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें "विकास पुरुष" के रूप में सराहा, जिन्होंने निरंतर रायपुर की अधोसंरचना को नई ऊंचाई प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन
सूरजपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर सूरजपुर जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी आस्था के केंद्र कुदरगढ़ धाम का भव्य विकास होगा। माता के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री ने माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व है और मैं आज माँ कुदरगढ़ी के दरबार में आया हूँ। सूरजपुर वासियों ने मुझे यह सौभाग्य दिया, इसके लिए मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश के कोने-कोने से मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तजनों को भी मैं सादर प्रणाम करता हूँ। जब चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों का उत्साह देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। हमारे देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीक तो हैं ही, वे हमारे जीवन में उत्सव का रंग भी भरते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस शुभ दिन सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। सूरजपुरवासियों को इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इन कार्यों में 20 करोड़ रुपए के 52 कार्यों के लोकार्पण तथा 164 करोड़ रुपए के भूमिपूजन के कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना से जुड़े निर्माण शामिल हैं। साथ ही कुदरगढ़ में सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित विश्रामगृह भवन का लोकार्पण भी किया गया है। लगभग 3 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक भवन में अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता के आशीर्वाद से बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है । कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही रोपवे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे दर्शन करना और अधिक सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि क्षेत्र में डोम, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कुदरगढ़ धाम का समग्र और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए सुपोषण रथ, आपराधिक जागरूकता रथ और यातायात जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए जनजागरूकता बेहद आवश्यक है। स्वस्थ महिला और बच्चों से परिवार की खुशियां मजबूत होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों के प्रति सभी को सजग होना चाहिए जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सूरजपुर जिले में रेडी टू ईट निर्माण कार्य के माध्यम से पोषण कार्यक्रम का संचालन बेहतर ढंग से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस पहल को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल का नया अवसर मिला है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर माता रानी का आशीर्वाद सभी जिले वासियों पर बना रहे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करते हुए महिलाओं और बच्चो को बेहतर पोषण प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में आपके क्षेत्रों के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष राम सेवक पैंकरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कुदरगढ़ी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। श्री साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश-ओलावृष्टि, दो दिन का अलर्ट जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक हुई बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने लोगों को गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन किसानों और आम जनजीवन के लिए नई चिंता भी खड़ी कर दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान बलरामपुर और रायगढ़ समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान सामान्य से नीचे चला गया है।
मौसम के इस बदले मिजाज का असर बिलासपुर, भिलाई और रायगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में भी साफ देखा जा रहा है। कई जगहों पर आंधी के साथ ओले गिरने की भी खबर है, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। अचानक आए इस परिवर्तन से जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम वैज्ञानिक एस.के. गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरिया, पेंड्रा, सरगुजा, रायगढ़, मुंगेली, रायपुर, बिलासपुर, गरियाबंद, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर और जांजगीर-चांपा जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं का प्रभाव भी देखने को मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसमी बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय सिस्टम के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। हालांकि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के बाद प्रदेश के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ेगा।
प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और विशेष रूप से आकाशीय बिजली के समय सुरक्षित स्थानों पर रहें। किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है।
बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।
मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।
‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।
मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ
रायपुर। नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी। श्री साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के खिलाफ मसीही समाज का विरोध, न्यायालय जाने की दी चेतावनी
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा शुक्रवार को पारित ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ का संयुक्त मसीही समाज ने विरोध किया है. समाज के प्रतिनिधियों ने इस विधेयक को संविधान की उद्देशिका के विपरीत और धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करने वाला बताते हुए इसके खिलाफ मशाल यात्रा निकालने के साथ न्यायालय में जाने की बात कही है.
संयुक्त मसीही समाज के प्रमुख एड्वोकेट डेरेश्वर बंजारे और प्रभाकर सोनी ने रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विधेयक को लेकर समाज की आपत्तियों को बताया. उन्होंने कहा कि संविधान के प्रस्तावना में धर्म की स्वतंत्रता का उल्लेख है, लेकिन उसी के खिलाफ कानून (विधेयक) लाया गया है. इससे न केवल मसीही बल्कि अन्य दूसरा कोई भी समाज आहत हो सकता है.
विधेयक में इस्तेमाल किए गए प्रलोभन शब्द को लेकर पदाधिकारियों ने कहा कि इसका स्पष्टीकरण होना चाहिए. इसके अलावा इसमें कहा गया है कि धर्म का प्रचार-प्रसार न करें. आप मेरे स्वत:करण को कैसे रोक सकते हैं. परंपराओं को मानना पड़ेगा. यही नहीं अगर किसी का धर्मांतरण कराते हैं, तो उसके ब्लड डोनेशन को लेकर लोग आपत्ति करेंगे.
मसीही समाज की प्रेस विज्ञप्ति
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ विधान सभा के फरवरी-मार्च 2026 सत्र में “छत्तीसगढ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पारित किया गया है। छत्तीसगढ विधान सभा में पारित किए जाने के पश्चात् विधेयक पर अनुमति हेतु माननीय महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया जावेगा। इस विधेयक के संबंध में संवैधानिक और न्यायालयीन तथ्य निम्नानुसार है –
- यह संविधान की उद्देशिका के विपरीत और धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करने वाला विधेयक है.
भारत के संविधान की आत्मा उसकी उद्देशिका है। उद्देशिका में विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता का उल्लेख है। यह विधेयक संविधान की उद्देशिका में वर्णित इस स्वतंत्रता के विपरीत है और उसका हनन करने वाला है।
भारत का संविधान अनुच्छेद 25 में अतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है। भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न न्यायिक निर्णयों के माध्यम से अनुच्छेद 25 के तहत् संवैधानिक गारंटी को मान्यता दी है कि, प्रत्येक व्यक्ति को धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
यदि कानून बनाया जाए तो अनुच्छेद 25 के तहत् प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की गारंटी देने के लिए बनाया जाना चाहिए, किन्तु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करने वाला विधेयक है। यह धर्म के आचरण और प्रचार को भी धर्म संपरिवर्तन कहकर प्रतिबंधित करता है। - राज्य विधान सभा ऐसे विधेयक को पारित करने में असमर्थ है.
संविधान के अनुच्छेद 246 में संसद द्वारा और राज्य विधान-मण्डलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु वर्णित है। संसद को संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची । में (जिसे संविधान में “संघ सूची” कहा गया है) प्रगणित विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति है। संसद को और किसी राज्य के विधान-मण्डल को भी सूची | में (जिसे संविधान में “समवर्ती सूची” कहा गया है) प्रगणित विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है। किसी राज्य के विधान-मण्डल को सूची III में (जिसे संविधान में “राज्य सूची” कहा गया है) प्रगणित विषय के संबंध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है।
इस विधेयक के प्रावधान मूलतः धर्म की स्वतंत्रता से संबंधित हैं, जिसका संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची ।। “समवर्ती सूची”) या III (“राज्य सूची”) की किसी भी प्रविष्टि से कोई संबंध नहीं है। यह केवल संविधान की सातवी अनुसूची की सूची। “सघ सूची”) की प्रविष्टि 97 (कोई अन्य विषय जो सूची || या III में प्रगणित नही है) के दायरे में ही आ सकता है। अत केवल संसद ही इस विषय पर कोई कानून बनाने के लिए सक्षम है और छत्तीसगढ़ राज्य विधान सभा ऐसे विधेयक को पारित करने में असमर्थ है। - “प्रलोभन” आदि शब्दों का प्रयोग अस्पष्ट एवं भ्रामक है-
इस विधेयक के प्रावधान मे “प्रलोभन”, “बल”, “कपटपूर्ण साधन” और “असम्यक असर” आदि शब्दों का प्रयोग काफी अस्पष्ट और भ्रामक है।
“प्रलोभन” की परिभाषा में सम्मिलित किया गया है नगद अथवा वस्तु के रूप में कोई दान या परितोषण, चाहे वह नगदी में हो या वस्तु के रूप में हो, या भौतिक लाभ या रोजगार, किसी धार्मिक निकाय द्वारा संचालित विद्यालय में शिक्षा, बेहतर जीवन शैली (better lifestyle), दैवीय प्रसाद (divine pleasure) या उसका वचन या अन्यथा के रूप में किसी प्रलोभन देने का कोई कार्य।
इस परिभाषा के अनुसार अनाथालयो, वृद्धाश्रमो, स्वास्थ्य केन्द्रों, शैक्षणिक संस्थानों और ऐसी अन्य मानवीय सेवाओं के सचालन या सामाजिक सेवा के कार्यों को भी प्रलोभन या जबरदस्ती के रूप में गलत समझा जा सकता है।
बेहतर जीवन शैली (better lifestyle), दैवीय प्रसाद (divine pleasure) या उसका वचन को भी यदि प्रलोभन माना जाएगा तो सवाल उठता है कि, लोग कोई भी धर्म क्यों मानते है, ईश्वर की आराधना क्यों करते है?
ऐसी परिभाषा से न केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी हो सकती है बल्कि उससे भेदभाव और भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकाचार के द्वास की आशका भी बढ़ सकती है। लोगों या सस्थाओं द्वारा सामाजिक सेवाओं, मानवीय सहायता या दानशील दृष्टिकोण के माध्यम से लोगों की मदद करना भी धर्मातरण के प्रयास के रूप में गलत समझा जा सकता है। प्रस्तावित अधिनियम में यदि परिभाषाएँ अस्पष्ट हो तो वह तुच्छ मुकदमेबाजी को जन्म दे सकता है, जिससे राज्य के माननीय न्यायालयों में प्रकरणो की संख्या में अवांछित वृद्धि हो सकती है। - मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय संविदा का उल्लंघन
मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) के अनुच्छेद 18 और नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय संविदा (ICCPR) के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करना भी उतना ही प्रासंगिक है, जो विचार, विवेक और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं। जबकि यह विधेयक स्पष्ट रूप से इन अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के भी विपरीत है। - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का भी उल्लंघन
इसके प्रावधान अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की सवैधानिक गारंटी के साथ-साथ अनुच्छेद 19 के तहत् भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 14 और 19 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन कर सकते हैं। यह प्रस्तावित अधिनियम, वास्तव में, सद्भावनापूर्ण किये गए धर्मार्थ, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों को आपराधिक बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय को असमान रूप से लक्षित करता है। - पूर्व में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006” राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित-
पूर्व मे छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ विधान सभा में “छत्तीसगढ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक 2006” पारित कर माननीय राज्यपाल के समक्ष विधेयक पर अनुमति हेतु प्रस्तुत किया गया था। तब तत्कालीन माननीय राज्यपाल द्वारा उस विधेयक के सबंध में निहित न्यायालयीन तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखते हुए माननीय राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया था, जिसपर माननीय राष्ट्रपति द्वारा अनुमति नहीं दी गई। - इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है-
माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता National Council of Churches in India द्वारा दायर केस नम्बर 98 of 2026 National Council of Churches in India Versus State of Rajasthan and Ors. में 2 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केन्द्र सरकार और 12 राज्यों (जैसे राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, खंड, कर्नाटक, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश) को नोटिस जारी किया गया। मामले को अन्य समान याचिकाओं के साथ क्लब किया गया और तीन जजों की बेच को रेफर कर दिया गया है।
इस याचिका में मुख्य चुनौतियां कानूनों को अस्पष्ट, भेदभावपूर्ण, निजता और धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 14, 21, 25) का उल्लंघन बताते हुए याचिका में दावा है कि ये कानून अल्पसख्यकों (विशेषकर ईसाइयों) के खिलाफ दुरुपयोग हो रहे है, फर्जी शिकायतो से गिरफ्तारियां हो रही है.
अन्य याचिकाएं
Citizens for Justice and Peace द्वारा WP (Crl) No 428/2020Catholic Bishops’ Conference of India (CBCI) द्वारा W.P. (C) No. 1187/2025
पूर्व में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण) संशोधन विधेयक 2022, दिसम्बर 2022 में विधान सभा में पारित कराया था। तत्कालीन माननीय राज्यपाल अनुसुईया उईके जी के द्वारा यह कहकर उस विधेयक पर अनुमति नहीं दी गई कि, इस विषय पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 को माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसका केस नम्बर 98 of 2026 National Council of Churches in India Versus State of Rajasthan and Ors. है और वर्तमान में प्रकरण माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी की गई है। ऐसे में इसी विषय पर नया अधिनियम लाने के लिए छत्तीसगढ़ विधान सभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर अनुमति दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 200 के प्रावधानों के विपरीत होगा।
अतः, उपरोक्त आधार पर हम विनम्रतापूर्वक माननीय महोदय से अनुरोध करते हैं कि, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026″ नामक इस असंवैधानिक विधेयक पर अनुमति नहीं दी जावे।
भवदीय
सयुक्त मसीह समाज
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर में 23 मार्च को प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन, 100 से अधिक पदों पर होगी भर्ती
रायपुर। जिले के स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, रायपुर द्वारा 23 मार्च 2026 को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया जाएगा।
इस प्लेसमेंट कैम्प में निजी क्षेत्र के दो नियोजक शामिल होंगे। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड रायपुर द्वारा अर्बन प्रमोटर (महिला/पुरुष) के 100 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं, 12वीं एवं स्नातक/स्नातकोत्तर निर्धारित है। चयनित अभ्यर्थियों को 10,000 रुपये से 20,000 रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त पेस्ट कंट्रोल टेक्नीशियन के 05 पदों पर भी भर्ती की जाएगी, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता 8वीं पास निर्धारित है। इन पदों के लिए 10,000 रुपये से 14,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।
इच्छुक अभ्यर्थी अपने बायोडाटा, आधार कार्ड तथा शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता के प्रमाण पत्रों की छायाप्रति के साथ निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित हो सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिला रोजगार कार्यालय, रायपुर से संपर्क कर सकते हैं। इस प्लेसमेंट कैम्प में भाग लेने हेतु अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ ई-रोजगार पोर्टल e-rojgar.cg.gov.in पर पंजीयन करना अनिवार्य है। पंजीयन के पश्चात ही अभ्यर्थी कैम्प में शामिल हो सकेंगे।
फायर NOC निजी हाथों में: ऑडिट के नाम पर लाखों की वसूली, अस्पताल-स्कूलों पर बढ़ा बोझ
रायपुर। प्रदेश में अब तक सरकारी स्तर पर निःशुल्क होने वाली फायर एनओसी प्रक्रिया को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है. नई व्यवस्था के तहत निजी एजेंसियां फायर ऑडिट के लिए 10 रुपए प्रति वर्गफीट तक शुल्क ले रही हैं. इसका सीधा असर स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर पड़ेगा, जिससे शिक्षा और इलाज महंगी होने की आशंका है.
मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी अस्पताल या भवन का क्षेत्रफल 50 हजार वर्गफीट है, तो उसे सिर्फ फायर ऑडिट के लिए हर साल करीब 5 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं. छोटे संस्थानों के लिए भी यह राशि हजारों से लेकर लाखों रुपए तक पहुंच रही है. अंबिकापुर के निजी अस्पताल संचालकों ने इस शुल्क पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इतनी अधिक राशि देना छोटे अस्पतालों के लिए मुश्किल होगा.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अग्निशमन विभाग के पास प्रशिक्षित अधिकारी और तकनीकी स्टाफ मौजूद होने के बावजूद ऑडिट की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को क्यों सौंपी गई. पहले ऑनलाइन आवेदन के बाद जिला कमांडेंट की टीम मौके पर निरीक्षण करती थी और मुख्यालय से फायर एनओसी जारी होती थी. यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निःशुल्क थी. अब वही प्रक्रिया निजी एजेंसियों से कराई जा रही है और ऑडिट के नाम पर बड़ी राशि वसूली जा रही है.
10 रु. वर्ग फीट के हिसाब से फीस
सरगुजा में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित 18 निजी अस्पताल, 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 193 उप स्वास्थ्य केंद्र, करीब 2365 स्कूल, 15 कॉलेज और अन्य निजी संस्थान हैं, जिन पर फायर ऑडिट के नाम पर लाखों रुपए का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा. इसका असर भी दिखने लगा है. ओजस हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नवीन द्विवेदी ने बताया कि कंपनी द्वारा 10 रुपए वर्गफीट शुल्क मांगे जाने से उन्होंने ऑडिट नहीं कराया.
हॉस्पिटल को 70 हजार का थमाया बिल
फायर ऑडिट के लिए बिलासपुर की कंपनी ने राजधानी के एक हॉस्पिटल को 70,800 रुपए का बिल थमाया है, जिसमें 10,800 रुपए जीएसटी है. हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि कंपनी की ओर से लिया जा रहा शुल्क बहुत ज्यादा है. जिसे हम देना नहीं चाहते. भले ही ऑडिट न हो. दूसरे अस्पताल के संचालक भी ऑडिट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इतनी अधिक फीस अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर आर्थिक बोझ है.
सरकार को भी मिलेगा एनओसी फीस का हिस्सा
गृह विभाग में प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने चर्चा में बताया कि एनओसी पहले निशुल्क थी, इससे सरकार को कुछ आय नहीं होती थी. अब कंपनियां यह काम करेंगी, जिससे सरकार को एनओसी फीस का कुछ हिस्सा मिलेगा. राशि कितनी है, अभी ये नहीं बता पाऊंगा. वहीं फीस के संबंध में उन्होंने बताया कि कुछ शिकायतें आ रही हैं. एजेंसी मनमानी करेगी, तो कार्रवाई करेंगे. वहीं एनओसी मिलने के बाद फायर सेफ्टी की कमी से हादसे पर जिम्मेदारी किसकी होगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कंपनियों का काम सिर्फ ऑडिट करना है. समय- समय पर मॉनिटरिंग होगी.
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना हमारी प्राथमिकता – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 को पारित किया गया। इस कानून के माध्यम से राज्य में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की स्थापना की जाएगी।
विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य के युवाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुव्यवस्थित भर्ती प्रणाली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को सरल और विश्वसनीय बनाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न विभागों में 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और इसे अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत भर्ती परीक्षाओं को नियमित रूप से आयोजित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल के गठन के बाद राज्य में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों के लिए नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को समयबद्ध तैयारी में सुविधा होगी। साथ ही, सभी प्रमुख परीक्षाओं को निर्धारित समय सीमा में संपन्न कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग समय पर भर्तियां निकालने से अभ्यर्थियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समान योग्यता वाले पदों के लिए अलग-अलग आवेदन और चयन प्रक्रियाओं के कारण समय, संसाधन और प्रयास की अधिक आवश्यकता होती है। नई व्यवस्था से इन समस्याओं का समाधान होगा और प्रक्रिया अधिक सरल व सुव्यवस्थित बनेगी।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल विभिन्न विभागों, वैधानिक निकायों, मंडलों, प्राधिकरणों एवं अन्य संस्थानों के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया आयोजित करेगा। साथ ही, आवश्यकता अनुसार संयुक्त चयन परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान भी रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडल के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अभ्यर्थियों को एक समान चयन प्रणाली के आधार पर तैयारी करने का अवसर मिलेगा। इससे परीक्षा प्रबंधन में भी दक्षता बढ़ेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
मंडल में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी नियुक्त किए जाएंगे। मंडल को यह अधिकार होगा कि वह चयन प्रक्रिया के संचालन के लिए आवश्यकतानुसार एजेंसियों की सेवाएं ले सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और भरोसेमंद बनेगी तथा योग्य अभ्यर्थियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में एक सुदृढ़ और प्रभावी भर्ती प्रणाली स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
बीजापुर CRPF कैंप हमले में NIA की सप्लिमेंट्री चार्जशीट, 6 माओवादी नामजद
जगदलपुर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने वर्ष 2024 में सीआरपीएफ कैंप पर हुए माओवादी हमले के मामले में सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट बीजापुर जिले के धर्मावरम क्षेत्र में स्थापित नए कैंप पर हुए हमले से जुड़ी है, जिसमें सीआरपीएफ के करीब एक दर्जन जवान घायल हुए थे।
जानकारी के अनुसार, 16 जनवरी 2024 को माओवादियों ने एक साथ बीजापुर के धर्मावरम, चिंतावागु और पामेड स्थित सीआरपीएफ कैंपों पर समन्वित हमला किया था। इस बड़े हमले में लगभग 300 माओवादी शामिल थे, जिन्होंने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया।
NIA द्वारा दाखिल सप्लिमेंट्री चार्जशीट में तीन गिरफ्तार माओवादियों अवलम भीमा, मदकम नंदा और मदकम देवा उर्फ रतनके साथ ही तीन फरार आरोपियों को भी नामजद किया गया है। इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता (IPC), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बताया गया है कि इससे पहले भी NIA इस मामले में 17 माओवादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ताजा सप्लिमेंट्री चार्जशीट के साथ जांच एजेंसी ने हमले से जुड़े अन्य अहम सबूत और आरोपों को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया है। इस कार्रवाई को सुरक्षा बलों के खिलाफ माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।