छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में नहीं चल रहा विष्णु का सुशासन
छत्तीसगढ़ |
02-Jul-2025
आर्थिक अनियमितता सहित कई गंभीर आरोपों से घिरे है फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर। पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर मुख्यमंत्री साय से कर चुके है इन पर अपराध दर्ज करने की मांग।
रायपुर/ छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार अश्वनी गुर्देकर की कारगुज़ारियों को लेकर फार्मासिस्टों में बेहद नाराजगी है। प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर द्वारा पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन पर कठोर कार्रवाई और अपराध दर्ज करने की मांग की जा चुकी है। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने भी लंबे समय से उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है बावजूद प्रदेश की सरकार किसी तरह की कोई भी कार्रवाई करने से कतरा रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भी फार्मासिस्टों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात करके छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में हो रहे भ्रष्टाचार के बारे में मय दस्तावेज सबूत प्रस्तुत किए थे।
अश्वनी गुर्देकर पर आरोप है कि उनके रजिस्ट्रार रहते काउंसिल में फार्मासिस्टों से केवल वसूली चल रही है। रजिस्ट्रेशन और रिनिवल की आड़ में उगाही हो रही हैं। काउंसिल में जमा करोड़ों रुपयों का भरपूर दुरुपयोग हो रहा है। उन पर काउंसिल की राशि को निजी रूप से खर्च करने के आरोप भी लगाए गए है।
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के राहुल वर्मा ने बताया कि बीते 1 साल में कई बार ऐसी शिकायतें प्रदेश के मुखिया, स्वास्थ्य मंत्री, सचिव सहित सभी जिम्मेदारों को दी जा चुकी है। बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना कई तरह के संदेहों को जन्म देता है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के ऊपर है या तो वे गुर्देकर की कुर्सी बचा ले या फिर इस मामले पर एक्शन लेकर वे अपनी प्रतिष्ठा बचा ले।
कई फार्मासिस्ट सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य मंत्री भी फार्मेसी काउंसिल में हो रहे भ्रष्टाचार में हिस्सेदार हैं? अगर हिस्सेदारी नहीं है तो एक अपात्र कर्मचारी जो फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार बने बैठे है उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करते? इस मामले में पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने बाकायदा पत्र लिखकर अश्विनी गुर्देकर पर अपराध दर्ज करने की मांग मुख्यमंत्री से की है। काउंसिल के निर्वाचित सदस्य भगतराम शर्मा और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से पदेन सदस्य डॉ.राकेश गुप्ता ने भी स्वास्थ्य मंत्री,स्वास्थ्य सचिव और संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को रजिस्ट्रार द्वारा लिए जा रहे अवैध भत्ते की लिखित शिकायत की है।
प्रदेश भर में 15 हजार के आसपास फार्मासिस्ट हैं। अगर उनसे जुड़ी संस्था में कहीं कोई गड़बड़ी नजर आ रही है तो शासन को तुरंत संज्ञान में लेकर जांच करानी चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए। फार्मेसी काउंसिल में अनियमितताओं के बावजूद सरकार का उदासीन रवैया उचित नहीं है। अगर सरकार को लगता है कि प्रदेश में सुशासन है तो विष्णु का सुशासन फार्मेसी काउंसिल में भी दिखना चाहिए।