प्रदेश / छत्तीसगढ़

बस्तर क्षेत्र में बढ़ रहा मलेरिया का प्रकोप और CGMSC के वेयर हाऊसों में नहीं है मलेरिया किट।

cgmsc यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के निर्माण का मकसद था कि प्रदेश भर के अस्पतालों में स्वस्थ्य सुविधाए बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जा सके. परतु आज यह संस्था भ्रस्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है. ऐसा कोई दिन नहीं होता जब इस संस्था की गड़बड़िया समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की सुर्ख़ियों में स्थान नहीं आता.  यह संस्था निश्चित रूप से स्वस्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के लिए लाभ का जरिया है परन्तु यह  विष्णुदेव सरकार के लिए बड़ी परेशानी का कारण है. जो भविष्य में सरकार को बड़ी तकलीफ देने जा रहा है.

रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे चल रहा है इस बात का एक और प्रमाण आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा और सुकमा से आई खबर से हो रही है। जानकारी के मुताबिक दंतेवाड़ा के आश्रम और पोटा केबिन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में से 350 विद्यार्थी मलेरिया पॉजीटिव पाए गए हैं। इसी प्रकार सुकमा जिले में भी 468 लोगों में मलेरिया के लक्षण देखे गए हैं। यहां पर सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्मित संस्था सीजीएमएससी के वेयरहाउस में मलेरिया और डेंगू जांच के किट उपलब्ध नहीं है। यह केवल हम नहीं कह रहे इस संस्था की आधिकारिक वेबसाइट में आधिकारिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है। ऐसी स्थिति में स्थानीय डॉक्टर मरीजों की जांच इमरजेंसी फंड से किट खरीद कर जांच करा रहे हैं।

CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों एवं ईलाज हेतु उपकरणों की व्यवस्था खरीदी कर प्रदान करता है। अपनी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनका प्रदेश भर में 16 वेयरहाउस है। अस्पतालों को जिन भी दवाइयां की आवश्यकता होती है वह इन वेयरहाउसों से मंगा लेते हैं। 

परंतु इन दिनों सीजीएमएससी की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। जिस अच्छी सोच के साथ इसका गठन हुआ था उस सोच पर अब पानी फिर चुका है। यह संस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई है। बेईमान अधिकारी डंके की चोट पर सरकारी खजाने में यहां डाका डाल रहे हैं। और जो भी व्यक्ति स्वास्थ्य मंत्री बनकर आता है इस CGMSC कुछ नया कांड कर जाता है। जैसे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज कर रहे हैं। 

चलिए विलंब ना करते हुए छत्तीसगढ़ की आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूं।

आप समझने की कोशिश करिएगा कि कमीशनखोरों की करतूत के चलते आपको स्वास्थ्यगत किन-किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। CGMSC की आधिकारिक वेबसाइट cgmsc.gov.in के अनुसार आज की तारीख में इनके वेयरहाउस में रैपिड डायग्नोस्टिक किट मलेरिया, डेंगू टेस्ट किट की उपलब्धता शून्य है। वेबसाइट में जाकर इस कोड के जरिए यह हर कोई देख सकता है????

D454M repit diagnostic kit [maleriya] 

CN 16. Dengo test kit 

अब आपको बता दें कि ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई और कब तक रहेगी। मेरी जानकारी के अनुसार श्याम बिहारी जयसवाल जी के मंत्री बनने के बाद यह आवश्यक दवाइयां सप्लाई करने वाली कंपनियों में से बहुतों को उनके बकाए का भुगतान नहीं किया गया। दवाई खरीदी या दवा कंपनियों के लिए उपलब्ध राशि घोटाले के आरोपी मोक्षित कॉरपोरेशन आदि की बकाया राशि के भुगतान में कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सीजीएमएससी की एमडी पद्मिनी भोई ने मोक्षित पर इतनी मेहरबानी क्यों जताई यह जांच का विषय है।

आज की स्थिति में भी ज्यादातर दवा कंपनियों का साल भर से भुगतान बाकी है। इस वजह से कई कंपनियां दवाईया सप्लाई करने में कतरा रही है। पहले वे अपना पुराना बकाया भुगतान मांग रही है। अगर दवा कंपनी दवा सप्लाई करने का मन भी बना ले तो प्रक्रिया के अनुसार ऑर्डर के 40 से 50 दिन की भीतर ही माल आता है।

इन हालातो को आप समझ सकते है की किस तरह से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के लोगों के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है। ईश्वर ना करें कहीं कोई महामारी या अपनी स्थिति निर्मित हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी मानी जाएगी? वो अलग बात है कि जिला अधिकारियों के पास इमरजेंसी दवा खरीदी के लिए बजट दिया हुआ रहता है जिससे वो काम चला लेते है। परंतु यहां पर CGMSC संस्था के जिम्मेदारी की बात है। इन हालातों में यह क्यों न माना जाएगा कि सीजीएमएससी में बैठी एमडी पद्मिनी भोई सहित यहां के महाभ्रष्ट्र अधिकारी भी इस बिगड़ी व्यवस्था के गुनहगार है।