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रईसजादों के हाईवे जाम मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा– महंगी गाड़ियां जब्त क्यों नहीं की?

बिलासपुर।  लग्जरी कारों के काफिले के साथ नेशनल हाईवे को जाम कर रील बनाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा ने इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य शासन और पुलिस से सवाल पूछा है कि इन युवकों की महंगी गाड़ियां जब्त क्यों नहीं की गईं, और अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने मामले में शपथपत्र सहित जवाब तलब किया है।

दरअसल NH-130 पर रईसजादों की मनमानी का मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। कुछ दिन पूर्व, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक लग्जरी कारों के काफिले के साथ हाईवे को जाम कर रील बना रहे थे। यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कई महंगी गाड़ियों जैसे BMW, Audi, Mercedes को देखा गया।

इस वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJ) रमेश कुमार सिन्हा ने स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने कोर्ट में राज्य शासन और पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है कि इस मामले में सिर्फ ट्रैफिक चालान क्यों किया गया, एफआईआर और वाहन जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा:

“अगर आम नागरिक ट्रैफिक नियम तोड़े तो कार्रवाई होती है, फिर इन रसूखदार युवकों को क्यों बख्शा गया? सिर्फ जुर्माना काफी नहीं, यह कानून व्यवस्था की खुली अवहेलना है।”

नाम और नंबर छिपाने पर नाराजगी:

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस ने इस मामले में दोषी युवकों के नाम और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह सीधा-सीधा रसूखदारों को बचाने की कोशिश है। पुलिस रिकॉर्ड में जिन युवकों के नाम सामने आए हैं, उनमें वेदांश, सिद्धार्थ, यशवंत, दुर्गेश, विपिन और अभिनव शामिल हैं।हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस और राज्य शासन को शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि इन युवकों के खिलाफ अब तक क्या आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई की गई है?