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दंतेवाड़ा में अधीक्षिका के दुर्व्यवहार से छात्रांए त्रस्त, शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्रांए, लगाये गंभीर आरोप

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की अधीक्षिका पर छात्राओं ने दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाये है। कलेक्टर कार्यालय शिकायत करने पहुंची छात्राओं ने आरोप लगाया कि हमारी अधीक्षिका सही नहीं है। हमें गालियां देती हैं, जब परिजन मिलने आते हैं तो परिजनों के साथ भी दुर्व्यवहार करती हैं। हमें न तो कपड़े देती हैं और न ही जूते। हर दिन सिर्फ पत्ता गोभी और लौकी की सब्जी खिलाती हैं।

छत्तीसगढ़ में एक तरफ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकार के इन सारे दावों और जवाबदार अधिकारियों की लापरवाही की पोल छात्रांए खोल रही है। जीं हां कुछ ऐसा ही मामला नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिला में सामने आया है। यहां कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रांए अपनी अधीक्षिका की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची थीं। छात्राओं ने छात्रावास अधीक्षिका पर तानाशाही करने के साथ ही दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है।

छात्राओं ने बताया कि अधीक्षिका छोटी-छोटी बातों पर उन्हे गालियां देती हैं। जब परिजन मिलने आते हैं, तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार करती हैं। हमें न तो कपड़े देती हैं और न ही जूते। हर दिन सिर्फ पत्ता गोभी और लौकी की सब्जी खिलाती हैं। अधीक्षिका का विरोध करने वाली ये छात्राएं 6वींए 7वीं और 8वीं में पढ़ने वाली हैं। जो कि हाथों में तख्ती लेकर अधीक्षिका को हटाने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची थी। छात्राओं ने आरोप लगाया कि इन्हें पहले वाली अधीक्षिका चाहिए और न ही अब जिनकी पोस्टिंग हुई है वो चाहिए।

इनके बदले स्कूल के ही किसी स्टाफ को यहां का जिम्मा दिया जाए। गौरतलब है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पहले सुमित्रा सोरी अधीक्षिका थीं। लेकिन चुनाव लड़ने के लिए सुमित्रा ने रिजाइन कर दिया था। इसके बाद इनकी जगह उमा सिन्हा को जिम्मेदारी दी गई। वहीं पिछले कुछ दिनों से छात्राएं इनका लगातार विरोध कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ उमा सिन्हा ने भी रिजाइन कर दिया है।

जिसके बाद विभाग ने सविता सुन्नम को यहां अधीक्षिका पद की जिम्मेदारी दी है। अब छात्राएं स्कूल से सीधे कलेक्टर से मिलने पहुंच गईं। हालांकि उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। जिला पंचायत सदस्य तूलिका कर्मा ने छात्राओं से मिलकर उन्हे समझाईश देकर वापस लौटाया। उन्होने छात्राओं की समस्या को सुनन के बाद कहा कि…बच्चों को सुविधाएं न देना ये गलत है। यहीं वजह है कि आज छात्रांओं को अपनी समस्या को लेकर सड़क पर उतरना पड़ रहा है।