प्रधान पाठक की याचिका पर क्रमोन्नति वेतनमान वसूली पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक
बिलासपुर। शासकीय प्राथमिक शाला गिरधारीकापा, पंडरिया में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ संजय कुमार चंद्रवंशी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने क्रमोन्नति वेतनमान की वसूली पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है मामला?
संजय कुमार चंद्रवंशी की पहली नियुक्ति वर्ष 1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के पद पर हुई थी। वर्ष 2018 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया और 2022 में वे प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नत हुए।राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 10 मार्च 2017 को जारी आदेश के अनुसार, सहायक शिक्षकों को पहली क्रमोन्नति 10 वर्षों के बाद और दूसरी 20 वर्षों के बाद दी जाती है। चंद्रवंशी को 10 वर्षों की सेवा के बाद भी क्रमोन्नति वेतनमान नहीं मिला, जिस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
जनवरी 2021 में कोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश पारित किया और जनपद पंचायत पंडरिया ने 8 अक्टूबर 2020 को उन्हें क्रमोन्नति वेतनमान स्वीकृत किया। इसके तहत उन्हें जनवरी 2021 से अप्रैल 2025 तक नियमित रूप से उच्च वेतनमान प्राप्त होता रहा।
अचानक आया वसूली आदेश
हालांकि, 14 मई 2025 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी, पंडरिया ने आदेश जारी कर मई 2025 से न्यूनतम वेतन निर्धारण करते हुए वेतन अंतर की वसूली करने के निर्देश दिए। इस आदेश के खिलाफ संजय चंद्रवंशी ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाईकोर्ट में फिर से याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जनवरी 2021 से लगातार वेतनमान दिया गया, और अब बिना किसी पूर्व सूचना या वैध प्रक्रिया के वेतन कटौती और वसूली की कार्रवाई पूरी तरह कानून विरुद्ध है। इस पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने वेतन वसूली आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही जिला पंचायत कबीरधाम और जनपद पंचायत पंडरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।