काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारी होंगे सीधे बर्खास्त, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों की अनियमित उपस्थिति को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी NHM कर्मचारी 16 सितंबर तक अपनी ड्यूटी पर लौट आएं, अन्यथा उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी.
नए आदेश के अनुसार, “नो वर्क, नो पे” के सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जाएगा। इसका अर्थ है कि अनुपस्थिति अवधि के दौरान कर्मचारियों को कोई वेतन नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने और जनता को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
गौरतलब है कि विगत 18 अगस्त से प्रदेश भर में NHM के संविदा कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में NHM के तहत लगभग 16 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी लंबे समय से बिना अनुमति के अनुपस्थित चल रहे थे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जो कर्मचारी तय समय सीमा तक रिपोर्टिंग नहीं करेंगे, उनके पदों को रिक्त माना जाएगा और उन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिलेवार ऐसे सभी अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची तैयार की जाए और उनके स्थान पर नई भर्ती की कार्रवाई की जाए। विभाग ने यह भी कहा है कि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कई जिलों में अनुपस्थित कर्मचारी विभाग से संपर्क कर रहे हैं और अपनी ड्यूटी पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं, कुछ कर्मचारी आदेश को लेकर असंतोष भी जता रहे हैं और इसे लेकर यूनियनों की ओर से विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम जरूरी था क्योंकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। राज्य सरकार ने पहले भी अनुपस्थित कर्मचारियों को चेतावनी दी थी, लेकिन सुधार न होने पर अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।आदेश के लागू होने के बाद उम्मीद है कि राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी दूर होगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी संघ के द्वारा प्रस्तुत मांगो के संबंध में 13 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्यकारिणी समिति द्वारा सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सकारात्मक रूप से समाधान किया गया है।
1. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत प्रचलित मानव संसाधन नीति 2018 की कंडिका क्रमांक-35.8 अंतर्गत दुर्घटना अवकाश में प्रावधानित तीस दिन के अवैतनिक अवकाश को दुर्घटना/गंभीर बीमारी की चिकित्सकीय आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए मानवीय आधार पर सवैतनिक अवकाश किया गया है।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत किसी भी संविदा कर्मचारी के वार्षिक कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने हेतु प्रतिकूल टिप्पणी की स्थिति में कार्य सुधार नोटिस/सेवा समाप्ति के पूर्व नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए जाने हेतु समिति द्वारा राज्य, जिला एवं विकासखण्ड कर्मचारियों हेतु स्वीकारकर्ता एवं अपीलीय अधिकारी के संबंध में निर्देश जारी कर दिए गये है तथा इस हेतु ऑनलाइन पोर्टल आधारित व्यवस्था भी की जा रही है।
3. माह जुलाई 2023 की स्थिति में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन वृद्धि प्रदान किये जाने हेतु राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा सैद्धांतिक सहमति दी गई तथा निर्णय लिया गया कि वित्त विभाग, छत्तीसगढ़ शासन से सहमति प्राप्ति उपरांत वेतन वृद्धि प्रदान की जाए जिस सम्बन्ध में कार्यवाही भी प्रचलन में है।
4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत समस्त संविदा मानव संसाधन को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया । इस हेतु HRMIS Portal में Employee Family Details Entry की कार्यवाही पूर्व से ही प्रक्रियाधीन है।
5. ग्रेड पे, अनुकम्पा नियुक्ति इत्यादि जैसे मानव संसाधन नीति से जुड़े अन्य विषयों के सम्बन्ध में संयुक्त संचालक NHM की अध्यक्षता में सात सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति गठित की गयी है जो विभिन्न राज्यों के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न विभागों में इस सम्बन्ध में प्रचलित प्रावधानों, पूर्व में गठित समिति के प्रस्तावों, राज्य में पूर्व से प्रचलित नियमों इत्यादि का अध्ययन कर निश्चित समय सीमा (गठन के तीन माह) के भीतर अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करेगी |
6. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मानव संसाधन नीति-2018 की कंडिका-42 के अंतर्गत स्थानांतरण नीति पहले से प्रावधानित है, जिसमें NHM कर्मियों की मांग अनुसार वांछित बदलाव के सम्बन्ध में भी यह समिति अपनी सुझाव देगी | जिलों से सुझाव आमंत्रित किये जाने हेतु समिति द्वारा पत्र भी प्रेषित किया जा चुका है ।
दुःखद है कि कर्मचारियों के हित में इतने निर्णय लिए जाने के उपरांत भी NHM के कई कर्मचारी आज दिनांक तक अनाधिकृत रूप से अपने कार्य से अनुपस्थित हैं, यह न केवल एक लोक-सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों के प्रति अवहेलना है बल्कि आमजन के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को देखते हुए मानवीय आधार पर भी पूर्णतः अस्वीकार्य है। अतः लोकहितार्थ उक्त सम्बन्ध में आप सभी को निर्देशित किया जाता है कि –
1. दिनांक 18 अगस्त 2025 से जिला के सभी अनुपस्थित अधिकारी कर्मचारियों को प्राकृतिक न्याय के तहत दिनांक 29.08.2025 को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से अपने कार्यालय में उपस्थिति दिये जाने के समबन्ध में सूचित किया गया था कि उपस्थित नहीं होने की स्थिति में उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी तथा उन्हें सेवा से पृथक किया जा सकता है, पुनः निर्देश जारी किया जाए कि जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संपादित किये जाने हेतु दिनांक 16 सितम्बर 2025 तक कार्यालयीन समय के अंतर्गल अपने कार्यालय में उपस्थिति देवें ।
इसके बावजूद भी उपस्थिति नहीं देने वाले सभी अधिकारी/कर्मचारी को राष्ट्रिय स्वास्थ्य मिशन की मानव संसाधन नीति-2018 के खंड 34.2 के अनुसार “एक माह का नोटिस देते हुये सेवा समाप्ति की कार्यवाही करें, तथा इससे होने वाले रिक्तियों पर नियमानुसार नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाए।
2. NHM संविदा कर्मचारियों की अनाधिकृत अनुपस्थिति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 एवं मानव संसाधन नीति-2018 के खंड 34.3 का उल्लंघन है एवं कदाचार की श्रेणी में आता है। अतः पूर्व में प्रेषित निर्देशानुसार “कार्य नहीं वेतन नहीं” के सिद्धांत का पालन करते हुए अनाधिकृत अनुपस्थिति अवधि के वेतन/मानदेय का भुगतान किसी भी कर्मचारी/अधिकारी को नहीं किया जाए।