सीएम साय की अध्यक्षता में होगा कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस, सभी सचिवों से मांगा गया एजेंडा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा आने वाले महीनों में सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से राज्य सरकार ने तीन दिवसीय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 12 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक लगातार तीन दिनों तक कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला वन अधिकारी (डीएफओ) सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन समीक्षा करेंगे।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य की योजनाओं, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और आम जनता से जुड़े मुद्दों की बारीकी से समीक्षा करना है। 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली पहली बैठक में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विकास कार्यों की प्रगति, विभिन्न विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और जिले स्तर पर आ रही चुनौतियों की जानकारी लेंगे।
13 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कलेक्टरों के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक और जिला वन अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। इस दिन कानून-व्यवस्था, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियान, पर्यावरण संरक्षण और वनाधिकार से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। बैठक का तीसरा दिन 14 अक्टूबर को होगा, जिसमें अब तक हुई बैठकों से निकले बिंदुओं का समेकित मूल्यांकन और आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस बैठक को लेकर कहा कि यह बैठक नियमित है और समय-समय पर इस तरह की समीक्षा बेहद आवश्यक होती है। उनके अनुसार, “यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे आने वाले सभी कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। प्रशासनिक कसावट और पारदर्शिता लाने में इस प्रकार की बैठकों की अहम भूमिका होती है।”
जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान मुख्यमंत्री अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देंगे कि वे जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करें। खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल, रोजगार और किसानों से जुड़े विषयों पर त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जाएगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम न केवल प्रशासनिक कसावट लाने की दिशा में अहम साबित होगा, बल्कि इससे जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति भी तेज होगी। इसके अलावा, नक्सल प्रभावित जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री अधिकारियों से ठोस रिपोर्ट लेंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे।
तीन दिवसीय इस कांफ्रेंस से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में और अधिक मजबूती आएगी। इससे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने में तेजी आएगी और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।