आयोग का कहना है कि सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट यूनिवर्सिटी को अपनी वेबसाइट पर संस्थान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करनी होती हैं, ताकि छात्र, अभिभावक और अन्य हितधारक बिना किसी कठिनाई के सूचनाओं तक पहुंच सकें।
किन जानकारियों को साझा करना है अनिवार्य?
UGC के नियमों के अनुसार, सभी यूनिवर्सिटी को अपनी वेबसाइट पर निम्नलिखित जानकारी सार्वजनिक करनी होगी:
उपलब्ध कोर्स और प्रोग्राम्स
फैकल्टी और उनकी योग्यता
इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं
रिसर्च गतिविधियां और प्रकाशन
छात्र संख्या और प्रवेश से जुड़ी जानकारी
वित्तीय स्थिति और फंडिंग स्रोत
यह जानकारी संस्थान की वेबसाइट के होमपेज से आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। किसी भी यूजर को इसके लिए लॉगिन या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ की 3 यूनिवर्सिटी पर भी नोटिस
इस सूची में छत्तीसगढ़ की तीन यूनिवर्सिटी भी शामिल हैं—
रायपुर की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी
दुर्ग की देव संस्कृति यूनिवर्सिटी
बिलासपुर की महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी
इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने न तो आयोग को निर्धारित जानकारी उपलब्ध कराई और न ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसे सार्वजनिक किया।
UGC की चेतावनी और संभावित कार्रवाई
UGC ने साफ कहा है कि संबंधित विश्वविद्यालयों को कई बार पत्र, ईमेल और ऑनलाइन मीटिंग्स के जरिए चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। आयोग ने धारा 13 के तहत निर्धारित प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि यदि आगे भी गैर-अनुपालन जारी रहा, तो इन संस्थानों के खिलाफ नियामकीय जांच, जुर्माना और मान्यता से संबंधित प्रतिबंध जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे।
पारदर्शिता क्यों है जरूरी?
आयोग का मानना है कि विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बेहद जरूरी है। जब संस्थानों की पूरी जानकारी सार्वजनिक होगी, तब छात्र और पेरेंट्स बेहतर तरीके से यह निर्णय ले पाएंगे कि किस विश्वविद्यालय में दाखिला लेना है। यह कदम शिक्षा संस्थानों को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।