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वेटलैंड अथॉरिटी ने कर्बला तालाब में नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने कर्बला तालाब में चल रहे नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। अथॉरिटी ने कलेक्टर रायपुर को आदेशित किया है कि वह आयुक्त, नगर निगम रायपुर को पत्र जारी कर तालाब में हो रहे अवैध निर्माण कार्यों को रोकने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस आदेश की प्रति आयुक्त नगर निगम रायपुर को भी भेजी गई है।

दरअसल, रायपुर शहर के प्रमुख जलाशयों — कर्बला तालाब, बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा तालाब, महाराजबंध तालाब आदि में वेटलैंड नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे निर्माणों को लेकर बीते दो वर्षों से शिकायतें उठती रही हैं। मई 2023 में छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने इन सभी तालाबों की जांच के निर्देश कलेक्टर रायपुर को दिए थे। कलेक्टर ने केवल कर्बला तालाब के लिए जांच समिति गठित की, जिसकी अध्यक्षता वन मंडल अधिकारी रायपुर को सौंपी गई थी।

जुलाई 2023 में वन मंडल अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी, लेकिन यह रिपोर्ट आज तक वेटलैंड अथॉरिटी को प्रेषित नहीं की गई।

इसी बीच रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत यह रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त की। रिपोर्ट में यह पाया गया कि कर्बला तालाब पर रु. 1.13 करोड़ की लागत से प्रस्तावित निर्माण कार्य वेटलैंड (एडेंटिफिकेशन, कंज़र्वेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स 2017 के विरुद्ध हैं।

डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत और कार्रवाई

सितंबर 2025 में डॉ. गुप्ता ने यह रिपोर्ट संलग्न कर अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को शिकायती पत्र भेजा। उन्होंने बताया कि जांच दल ने जिन कार्यों को “न करने योग्य” बताया था, वही कार्य फरवरी–मार्च 2024 में कराए गए — जैसे कि हाईएस्ट फ्लड लेवल (HFL) से 50 मीटर के भीतर पेवर ब्लॉक लगाना, रिटेनिंग वॉल निर्माण इत्यादि।

डॉ. गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि अब तालाब में डेढ़ करोड़ रुपए की नई रिटेनिंग वॉल और अन्य निर्माण कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

इसी शिकायत के आधार पर वेटलैंड अथॉरिटी ने कलेक्टर रायपुर को आदेशित किया है कि—

1. 2023 की जांच रिपोर्ट तत्काल वेटलैंड प्राधिकरण को भेजी जाए।

2. तालाब में चल रहे या प्रस्तावित सभी नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों को तत्काल रोका जाए।

क्या कहते हैं वेटलैंड के नियम

वेटलैंड रूल्स, 2017 के अनुसार,

“किसी भी जलाशय के 2007 से अब तक के औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल (HFL) से 50 मीटर के अंदर कोई भी स्थाई निर्माण कार्य — जैसे रिटेनिंग वॉल, सड़क, भवन, पाथवे या पेवर — नहीं कराया जा सकता।”

डॉ. गुप्ता के अनुसार, रायपुर के बड़े तालाब — जैसे कर्बला, बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध — सभी का क्षेत्रफल 2.25 हेक्टेयर से अधिक है, इसलिए इन पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार पुराने वेटलैंड नियम (2010 के नियम) लागू होते हैं।
इस स्थिति में HFL का औसत वर्ष 2000 से निकालना अनिवार्य है, न कि 2007 से।

2023 की जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया था

वन मंडल अधिकारी रायपुर द्वारा प्रस्तुत जुलाई 2023 की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है —

“कर्बला जलाशय में सौंदर्यीकरण हेतु प्रस्तावित कार्यों जैसे पार्किंग, सीसी रोड, रेलिंग मरम्मत, रिटेनिंग वॉल, प्रसाधन भवन आदि से जलाशय की जलधारण क्षमता कम होगी, जल क्षेत्रफल घटेगा और जीव-जंतुओं के आवास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह ‘आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017’ का उल्लंघन होगा।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन कार्यों के परिणामस्वरूप जल क्षेत्र का कुछ हिस्सा गैर-आर्द्र भूमि उपयोग में परिवर्तित हो सकता है।

डॉ. गुप्ता की वेटलैंड अथॉरिटी को सलाह

डॉ. राकेश गुप्ता ने प्राधिकरण को सुझाव दिया कि —

कलेक्टर रायपुर ने अब तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है, जबकि अन्य व्यक्तियों को आरटीआई के तहत रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई है।

ऐसे में वेटलैंड अथॉरिटी स्वयं सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर यह रिपोर्ट प्राप्त करे।

साथ ही यह भी जांच कराई जाए कि मई 2023 के आदेश और बार-बार रिमाइंडर के बावजूद अन्य प्रमुख तालाबों — बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध — की जांच रिपोर्ट क्यों नहीं तैयार की गई।