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कोरबा में बढ़ते प्रदूषण पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

कोरबा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा जिले में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर में उड़ती राख, कोयले की धूल और ट्रैफिक अव्यवस्था से नागरिकों का जीवन खतरे में है। अदालत ने बाल्को (BALCO) और राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं और सभी पावर प्लांट्स को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने का आदेश दिया है.

धूल और धुएं से भर गया कोरबा

कमिश्नर की रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरबा शहर में 24 घंटे धूल और धुएं का घेरा बना रहता है। पावर प्लांट्स और उद्योगों से निकलने वाली राख और कोयले की धूल ने शहर को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसके अलावा शहर में ट्रैफिक अव्यवस्था और सड़कों पर गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ है।रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि भारी वाहनों की वजह से सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है, जिससे नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति अब असहनीय हो गई है और ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।

बाल्को को भी बनाया पक्षकार

कोर्ट ने बाल्को को प्रदूषण मामले में पक्षकार बनाया है। अदालत ने बाल्को से स्पष्ट रूप से पूछा कि उन्होंने पर्यावरणीय जिम्मेदारी के तहत किन कदमों को लागू किया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह कमिश्नर की रिपोर्ट की कॉपी उद्योगों और संबंधित विभागों को उपलब्ध कराए और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करे।

सख्त निर्देश और नोटिस जारी करने का आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो न्यायालय सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है। अदालत ने राज्य सरकार और उद्योगों को 24 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब देने का आदेश दिया है। इसके अलावा सभी पावर प्लांट्स को निर्देशित किया गया है कि वे पर्यावरणीय नियमों का पालन करें और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस उपाय अपनाएं।

अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2025 के लिए निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई तक सभी पक्षों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।विशेषज्ञों का कहना है कि कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों में अगर समय रहते प्रदूषण नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है, बल्कि शहर की जीवन गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डाल सकता है।हाईकोर्ट का यह कदम नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संदेश है कि प्रदूषण नियंत्रण अब प्राथमिकता है और कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।