प्रदेश / छत्तीसगढ़

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच पर उठाये सवाल

रायपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निखिल चंद्राकर के बयान और वकील द्वारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के मामले में गंभीर आरोप लगाए। बघेल ने वसीम बरेलवी के शेर से अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा, “फैसला लिखा हुआ रखा है पहले से खिलाफ, आप क्या खाक अदालत को सफाई देंगे।”

कलमबंद बयान और मीडिया में लीक

भूपेश बघेल ने बताया कि आम तौर पर आरोपी के बयान की व्यवस्था कलमबंद होती है और इसे सिर्फ कोर्ट में ही प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन इस मामले में आरोपी का बयान लिखकर हस्ताक्षर लिया गया और फिर मीडिया हाउस के पास पहुंच गया। उन्होंने कहा, “कलमबंद बयान को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकील ने पेश किया, जो कि 164 के बयान की प्रक्रिया के अनुसार उचित नहीं है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पेन ड्राइव का इस्तेमाल कर 30 सितंबर को 11 आरोपियों के बयान पढ़वाए जा रहे थे।

चार वकीलों ने इस अनियमित प्रक्रिया की शिकायत डी.जे. से की, जिसके बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई। बघेल ने कहा कि इससे एसीबी/ईओडब्ल्यू की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और उनका षड्यंत्र उजागर हो रहा है।

न्यायालय ने एसीबी/ईओडब्ल्यू के अधिकारियों को नोटिस जारी किया

भूपेश बघेल ने कहा कि न्यायालय ने इस मामले में एसीबी/ईओडब्ल्यू के तीन अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उनका आरोप है कि एजेंसियां और आयोग विपक्ष के नेताओं को प्रताड़ित करने के लिए सांठगांठ कर रहे हैं। बघेल ने कहा, “अदालत को प्रभावित करने और उसके साथ सांठगांठ करने का षड्यंत्र इस प्रकरण के साथ स्पष्ट रूप से उजागर हो रहा है। यदि ऐसे संस्थान विश्वसनीय नहीं रहेंगे, तो लोग न्याय के लिए कहां जाएंगे।”

भूपेश बघेल की मांगें

भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि इस मामले का संज्ञान लिया जाए और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि सम्बंधित अधिकारी को तत्काल हटाया जाए और ऐसा फैसला आए कि भविष्य में कोई भी अधिकारी या संस्था इस तरह के दुस्साहस को दोहराने का प्रयास न करे।भूपेश बघेल ने जोर देकर कहा कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि न्याय प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है।