प्रदेश / छत्तीसगढ़

नक्सल सामिग्रियों का जखीरा जवानों ने किया बरामद

गरियाबंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। एक ओर जहां 210 नक्सलियों ने सरेंडर किया, तो वहीं दूसरी तरफ नक्सलियों के हथियारों का जखीरा मिलाहै। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के भालूडिग्गी जंगल में सुरक्षा बलों ने संयुक्त सर्चिंग अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा डम्प की गई कई सामग्रियाँ बरामद की हैं। घटनास्थल Kulhadighat के पास हुई कार्यवाही में CRPF की 65(एफ) बटालियन, 65(जी) बटालियन और जिला पुलिस की टीमों ने हिस्सेदारी की। बरामदगी में मैग्जीन-पोच, मेडिकल टैबलेट और अन्य आपूर्ति शामिल हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब गढ़चिरौली और बस्तर में हालिया आत्मसमर्पणों के बाद नक्सलियों का मुख्य धारा की ओर लौटना जारी है।

मैनपुर के भालूडिग्गी व आसपास के कुल्हाडीघाट इलाके में सूचना के आधार पर निकाली गई खोज के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। संयुक्त सर्चिंग ऑपरेशन में CRPF की 65(एफ) बटालियन, 65(जी) और जिला पुलिस की टीमों ने इलाके को कड़ी नजर में रखा और निशानदेही के चलते नक्सलियों द्वारा छोडे गए डम्पिंग पॉइंट से कई सामग्रियाँ बरामद कीं। मौके से मैग्जीन-पोच, मेडिकल टैबलेट के पैकेट और अन्य आपूर्ति मिली है, जिनसे जांच चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री से यह प्रतीत होता है कि इलाके में कई नक्सली मौजूद थे और उन्हें हटते समय अपना सामान वहीं फेंकना पड़ा।

पुलिस और सुरक्षाबलों ने घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भी बुलाकर सबूत एकत्र करने शुरू कर दिए हैं। बरामद सामग्री का फोरेंसिक विश्लेषण व लुब्रिकेशन/प्रिंटिंग का मिलान किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामान किस समूह से जुड़ा था। अधिकारीयों ने कहा है कि अभी किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है, पर इलाके में दबिशें तेज़ कर दी गई हैं और संदिग्धों की तलाश जारी है। (स्थानीय पुलिस बयानों के अनुसार कार्रवाई उसी दिशा में जारी है)।

सफलता उस परिप्रेक्ष्य में अहम है जब हाल के दिनों में नक्सली गतिविधियों में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं — महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में लंबे समय से इनामी रहे कमांडर ‘भूपति’ सहित दर्जनों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और बस्तर में भी सैकड़ों नक्सलियों के लौटने की खबरें आईं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गढ़चिरौली में बड़े इनामी कमांडर के साथ कई कैडर ने हथियार डाल दिए, और बस्तर में एक बड़े पैमाने पर 210 नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएँ भी दर्ज हुईं। राज्य में ऐसी हार-जीत की घटनाओं के बीच सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई मायने रखती है।

इसी कड़ी में सोशल और संगठनात्मक संकेत भी मिल रहे हैं — कुछ एरिया कमेटियों की ओर से सक्रिय कैडरों को मुख्यधारा में लौटने का सन्देश और अपीलें भी सार्वजनिक हुई हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ स्थानीय नेताओं ने अपने साथियों से हथियार डालकर जनता के बीच काम करने की सलाह दी है और सशस्त्र आंदोलन की परिस्थितियाँ अब अनुकूल नहीं रहीं, इसलिए जनसंघर्ष को नए, शांतिपूर्ण रूप में आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया है। यह सिलसिला इलाके में शांति और पुनर्संयोजन संबंधी तैयारियों को भी प्रभावित कर सकता है।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अफवाहों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को देने का आग्रह किया है। सुरक्षा बलों ने भी कहा है कि नक्सल-निरोधी अभियान अभी जारी रहेगा और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सतर्कता बरती जा रही है। आगे की जांच और बरामद वस्तुओं के विश्लेषण के बाद ही नक्सली समुदाय के किसी विशेष घटक से जुड़ाव का निश्चित खुलासा होगा — तब तक प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की तह तक जाने के लिए काम कर रही हैं।