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अरुण साव: संघर्ष की तपिश से निकला नेतृत्व, छत्तीसगढ़ की अपेक्षाओं का नया केंद्र।

 : जन्मदिन विशेष :

छत्तीसगढ़ की राजनीति आज एक दिलचस्प मोड़ पर है। लंबे समय बाद राज्य की प्रथम पंक्ति में एक ऐसा नेतृत्व खड़ा है जो जमीन से जुड़ा भी है, संगठन में तपकर निकला भी है और प्रशासनिक जिम्मेदारी को संवेदनशीलता के साथ निभाने में सक्षम भी है। उपमुख्यमंत्री और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव इस नई राजनीतिक ऊर्जा के प्रतिनिधि बनकर उभरे हैं। ऐसे में आज उनका जन्मदिन केवल शुभकामनाओं का क्षण नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक सफर की उस सार्थक यात्रा का स्मरण है, जिसमें संघर्ष, सिद्धांत और समर्पण तीनों साथ चलते हैं।

अरुण साव उस पीढ़ी के नेता हैं जिन्होंने राजनीति को “करियर” नहीं, बल्कि “कर्तव्य” के रूप में देखा। जो साधारण पृष्ठभूमि से आकर असाधारण जिम्मेदारियां निभाई है।विद्यार्थी परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उनकी शुरुआत ने उनमें अनुशासन, संगठनात्मक कौशल और राष्ट्रहित की प्राथमिकता पैदा की। बाद में वकालत के पेशे ने उनकी सोच को तार्किक, संवेदनशील और न्यायपूर्ण बनाया। यही दो धाराएँ मिलकर उनके नेतृत्व का ढांचा बनीं। आज भी लोगों में यह विश्वास इसलिए है, क्योंकि वे जानते हैं कि अरुण साव ने किसी शॉर्टकट से राजनीति नहीं पाई उन्होंने इसे साधा है।

भाजपा एक कार्यकर्ता-आधारित दल है, और ऐसे दल में नेतृत्व पाने के लिए सिर्फ क्षमता नहीं, बल्कि निष्ठा भी जरूरी होती है। इसी निष्ठा की बदौलत अरुण साव आज भाजपा संगठन की भरोसेमंद चेहरे है। उन्होंने वर्षों तक संगठन की पंक्ति में चलकर, हर स्तर पर काम करके, कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास हासिल किया। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका निर्णायक थी बूथ से लेकर मंडल और जिले तक संगठन की ऊर्जा को पुनर्गठित करना,कार्यकर्ताओं को नेतृत्व से जोड़नाचुनावी रणनीतियों में स्थिरता और स्पष्टता लाने का श्रेष्ठ कार्य उन्होंने किया। वरिष्ठ नेताओं का स्नेह और मार्गदर्शन उनके लिए हमेशा शक्ति रहा है। यह दुर्लभ है कि संगठन और सरकार—दोनों में कोई नेता समान सम्मान पाता हो, और साव इस कसौटी पर खरे उतरते हैं।

बतौर उपमुख्यमंत्री अरुण साव की कार्यशैली में दो मूल तत्व साफ दिखते हैं—जिम्मेदारी और जवाबदेही।जनता के बीच लगातार उपस्थिति, समस्याओं का प्रत्यक्ष समाधान और योजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन—इन सिद्धांतों ने उन्हें एक प्रभावी प्रशासक के रूप में स्थापित किया है।उनकी विकास प्राथमिकताएँ स्पष्ट हैं: गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए अवसर,जन-कल्याण में पारदर्शिता तथा सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा—इन चार स्तंभों को मजबूत करना। वे विकास को केवल सरकारी दस्तावेज़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में उतरते हुए देखना चाहते हैं।

वे एक ऐसे संवेदनशील नेतृत्व है जिसने भरोसा जीता है। छत्तीसगढ़ की राजनीति अक्सर तीखे बयानों और विवादों में उलझती रही है। ऐसे समय में अरुण साव का शांत, संयत और संवेदनशील स्वभाव उन्हें अलग खड़ा करता है। वे कठिन स्थितियों में भी भावनात्मक नहीं, तर्कपूर्ण दृष्टिकोण रखते हैं। उनकी खासियत है कि प्रशासनिक फैसलों में मानवीय पहलू को महत्व देते हैं।आमजन के साथ बैठकर उनकी बात सुनने का सरल स्वभाव उन्हें जन-नेता बनाता है। आज उनकी लोकप्रियता किसी आक्रामक प्रचार का परिणाम नहीं, बल्कि व्यवहार और उपलब्धता का परिणाम है।

आज छत्तीसगढ़ की जनता अरुण साव  में एक भरोसा देखती है कि वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ मिलकर न केवल विकास को दिशा देंगे, बल्कि शासन को गति भी देंगे। वे अवसरों से भरे नए छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। वे युवा, किसान, महिला और मजदूर—हर वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। और सबसे महत्वपूर्ण, कि वे उस कार्यकर्ता-भाव को कभी नहीं छोड़ेंगे जिसने उन्हें नेतृत्व तक पहुँचाया।छत्तीसगढ़ में आज संतुलित, स्थिर और जमीन से जुड़े  नेता की बात होती है अरुण साव अग्रिम पंक्ति में नजर आते हैं। आज अरुण साव जी के जन्म दिवस पर हम उनके सदैव स्वस्थ, ऊर्जावान रहते हुए छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देते रहने की अपेक्षा करते है। 

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।