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छत्तीसगढ़ के रसायन उद्योग और एसएमई को मिलेगी नई दिशा, लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट पुनर्चक्रण का मुद्दा

नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में रसायन क्षेत्र में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण के साथ औद्योगिक विकास को संतुलित करने तथा छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्यों की विशेष चुनौतियों को लेकर गंभीरता से मुद्दा उठाया।

सांसद श्री अग्रवाल ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से प्रश्न करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 60 प्रतिशत लघु उद्योग ‘लाल श्रेणी’ में आते हैं, जहां नदी प्रदूषण और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि खतरनाक अपशिष्ट नियम, 2016 के अंतर्गत चक्रीय अर्थव्यवस्था मानकों को पूरा करने के लिए एसएमई को किस प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और राज्यवार कार्यान्वयन की स्थिति क्या है।

उन्होंने एमएसई-स्पाइस और पीएलआई जैसी योजनाओं के एकीकरण, बढ़ती अनुपालन लागत, सीमित अनुसंधान एवं विकास व्यय तथा वर्ष 2030 तक रसायन क्षेत्र को 400-450 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के रोडमैप पर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं सीमा पार संचलन) नियम, 2016 लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत अपशिष्ट की रोकथाम, न्यूनीकरण, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और सह-प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 587 खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयां, 36 पुनर्चक्रणकर्ता, 40 अधिकृत उपयोगकर्ता और 175 आंतरिक उपयोगकर्ता कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य में लगभग 2.12 लाख मीट्रिक टन खतरनाक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण या उपयोग किया गया, जो राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में 127 मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित की गई हैं, जिससे अंतर-उद्योग अपशिष्ट पुनः उपयोग को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है।

एमएसई-स्पाइस योजना से छत्तीसगढ़ के उद्योगों को मिलेगा लाभ

सरकार ने एमएसई-स्पाइस (सर्कुलर इकोनॉमी में प्रोत्साहन एवं निवेश) योजना के तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी लागत पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 12.5 लाख रुपये प्रति इकाई) देने की जानकारी दी। यह योजना प्लास्टिक, रबर और ई-कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के एमएसएमई को नई तकनीक अपनाने और लागत घटाने में मदद करेगी।

छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी पहल

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं से छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और राज्य का रसायन क्षेत्र राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र-राज्य समन्वय और उद्योग-हितैषी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ सर्कुलर इकोनॉमी का मजबूत मॉडल बनकर उभरेगा।