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विकासखंड मुख्यालय में स्कूल होने के बावजूद हाथी प्रभावित सुदूर जंगल क्षेत्र में दिया परीक्षा केंद्र! वरिष्ठ मंत्री के निर्देशों की भी हुई अनदेखी!

बलरामपुर के विकासखंड मुख्यालय रामचंद्रपुर के पीएमश्री आत्मानंद स्कूल को नजर अंदाज करते हुए 14 किलोमीटर दूर जंगली हाथी के प्रभाव और सार्वजनिक परिवहन के अभाव क्षेत्र गांजर स्कूल जहां 4 कमरे है में 10वीं 12वीं का परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। जबकि जिले का शिक्षा विभाग रामचंद्रपुर में ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने पत्र लिखता रहा...स्थानीय विधायक वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम ने भी विकासखंड मुख्यालय में ही परीक्षा केंद्र रखना के निर्देश दिए थे! इस बात की पुष्टि जिला शिक्षा अधिकारी ने की है।  बावजूद ऐसा कैसे हो गया? शिक्षा मंडल की यह लापरवाही है या जानबूझकर किसी के द्वारा कराया जा रहा कृत्य? फिलहाल 450 विद्यार्थी, पालक और विद्यार्थी परिषद सड़क पर आकर माध्यमिक शिक्षा मंडल के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

रामानुजगंज/बलरामपुर। शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में प्रशासनिक लापरवाही यदि बच्चों की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगे तो यह केवल एक निर्णय की भूल नहीं, बल्कि व्यवस्था की असंवेदनशीलता का प्रमाण बन जाता है। वर्ष 2026 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए गांजर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाए जाने के निर्णय ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है। लगभग 450 छात्र-छात्राओं को ऐसे क्षेत्र में परीक्षा देने भेजा जा रहा है, जो आदिवासी बाहुल्य, दुर्गम और परिवहन सुविधाओं से लगभग वंचित है। विकासखंड मुख्यालय रामचंद्रपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र तक पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को जंगलों, नदी-नालों और जंगली जानवरों के भय वाले रास्तों से गुजरना पड़ेगा। इस संबंध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उनका सवाल यह है कि क्या परीक्षा देने जा रहे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोई ठोस योजना प्रशासन के पास है, या फिर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?

और भी गंभीर बात यह है कि जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, वहां वर्तमान में केवल चार कक्षाओं में पढ़ाई संचालित हो रही है। इतने सीमित संसाधनों वाले परिसर में 450 परीक्षार्थियों की बोर्ड परीक्षा कराना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बोर्ड परीक्षा कोई साधारण परीक्षा नहीं होती; यह विद्यार्थियों के करियर की दिशा तय करती है। ऐसे में यदि वे असुरक्षित, तनावपूर्ण और अव्यवस्थित माहौल में परीक्षा देंगे तो उसका सीधा असर उनके परिणाम पर पड़ेगा। क्या प्रशासन इस मानसिक और शारीरिक दबाव की जिम्मेदारी लेगा?

हैरानी की बात यह भी है कि पूर्व वर्षों में यही परीक्षा केंद्र रामचंद्रपुर स्थित पी.एम. श्री आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में संचालित होता रहा है, जो विकासखंड मुख्यालय में स्थित, सुविधायुक्त और सुरक्षित परिसर है। बताया जा रहा है कि पूर्व में केवल अस्थायी कारणों से केंद्र को गांजर स्थानांतरित किया गया था और अब उसे पुनः रामचंद्रपुर में स्थापित किया जाना अपेक्षित था। इसके बावजूद वर्तमान निर्णय ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर किस दबाव या लापरवाही में यह कदम उठाया गया?

अभिभावकों में भय और असंतोष साफ झलक रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक फैसले कागजों पर आसान दिखते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और होती है। यदि परीक्षा अवधि में कोई अप्रिय घटना घटती है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या केवल एक आदेश जारी कर देना ही प्रशासन का दायित्व पूरा कर देता है?

अब जिला प्रशासन के सामने यह अग्निपरीक्षा है कि वह बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देता है या फिर एक गलत निर्णय पर अड़ा रहता है। क्योंकि यह मामला केवल परीक्षा केंद्र बदलने का नहीं है, बल्कि यह तय करने का है कि व्यवस्था बच्चों के साथ खड़ी है या उनके भविष्य के साथ जोखिम भरा प्रयोग कर रही है।