CSMCL ओवरटाइम भुगतान मामला : ACB-EOW ने मैनपावर स्कैम में 7 आरोपियों को किया गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
गिरफ्तार आरोपियों में हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कई कारोबारी और एजेंसी संचालक शामिल हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं—
नीरज कुमार चौधरी (फरीदाबाद, हरियाणा)
अजय लोहिया (गुरुग्राम, हरियाणा)
अजीत दारंडले (पुणे, महाराष्ट्र)
अमीत प्रभाकर सालुंके (पुणे, महाराष्ट्र)
अमित मित्तल (गुरुग्राम, हरियाणा)
राजीव द्विवेदी (भोपाल, मध्यप्रदेश)
संजीव जैन (भोपाल, मध्यप्रदेश)
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में ओवरटाइम भुगतान के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया था। इस मामले में ACB-EOW ने पहले ही FIR दर्ज की थी। जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच CSMCL में मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से ओवरटाइम भत्ते के नाम पर बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया। आरोप है कि इस दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गबन किया गया।
बताया जा रहा है कि CSMCL के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से संबंधित मैनपावर एजेंसियों को साजिश के तहत अवैध भुगतान किया गया। मामले में ACB-EOW की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
ईडी की सूचना के बाद खुला मामला
मामले की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन व्यक्तियों से 28.80 लाख रुपये नगद जब्त किए थे। इस संबंध में ईडी ने छत्तीसगढ़ शासन को सूचना भेजी थी, जिसके आधार पर EOW/ACB ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
ओवरटाइम के नाम पर करोड़ों का भुगतान
विवेचना में सामने आया कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कथित रूप से षड्यंत्र के तहत मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से ओवरटाइम/अधिसमय भत्ते के नाम पर बड़े पैमाने पर भुगतान कराया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच इस मद में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। नियमानुसार यह राशि शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को दी जानी थी, लेकिन व्यवहार में भुगतान एजेंसियों के जरिए किया गया।
कर्मचारियों तक नहीं पहुंची राशि
आरोप है कि एजेंसियों को भुगतान किए गए बिलों में दर्शाए गए अधिसमय भत्ते का वास्तविक भुगतान कर्मचारियों को नहीं किया गया। इसके बजाय इस राशि को कथित रूप से कमीशन के रूप में निकालकर अवैध रूप से वितरित किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए शासन के आबकारी राजस्व से बड़ी रकम निकाली गई और कर्मचारियों को देने के बजाय उसे अनधिकृत लाभ के रूप में बांटा गया, जिससे राज्य को आर्थिक क्षति हुई।
आरोपी तक पहुंचता था कमीशन, मामले की जांच जारी
EOW/ACB के अनुसार जांच में यह स्थापित हुआ है कि एजेंसियों के माध्यम से निकाली गई कमीशन की राशि अंततः आरोपी अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। फिलहाल मामले में अन्य लोगों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। ब्यूरो ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती है।