प्रदेश / छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड खत्म करने की मांग, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने CM साय को लिखा पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड को खत्म कर उसकी जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित करने की मांग की गई है। इसको लेकर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने और उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की मांग की है।

मदरसा शिक्षा में बदलाव की मांग

डॉ. सलीम राज ने अपने पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित मदरसा बोर्ड के अंतर्गत आने वाले मदरसों में वर्तमान शिक्षा प्रणाली के अनुरूप दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा नहीं दी जाती है। मदरसा बोर्ड के अंतर्गत आने वाले मदरसों को राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष अनुदान भी प्रदान किया जाता है, परंतु इसका समुचित लाभ अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को नहीं प्राप्त हो रहा है। छ.ग. राज्य में मदरसों से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी वर्तमान में केवल मौलाना या मौलवी ही बन रहे हैं। मदरसों की शिक्षा प्रणाली में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप बदलाव किया जाना अति आवश्यक हो गया है।

उत्तराखंड मॉडल लागू करने का सुझाव

उन्होंने पत्र में आगे कहा, “आपको अवगत कराना चाहूंगा कि उत्तराखंड राज्य द्वारा मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। इसमें यह फैसला लिया गया कि 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ना है। चूंकि केंद्र शासन एवं राज्य शासन का उद्देश्य है कि मदरसों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के एक हाथ में कुरआन और एक हाथ में कंप्यूटर हो, जिससे मदरसों से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आगे जाकर केवल मौलाना या मौलवी ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक आदि बनकर मुख्यधारा से जुड़ सकें तथा राष्ट्र निर्माण एवं राष्ट्रहित की भावना भी उनके अंदर भी जागरूक हो।

डॉ. सलीम राज ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में संचालित मदरसा बोर्ड को समाप्त कर इसके स्थान पर वर्तमान शिक्षा प्रणाली के अनुरूप छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाना आवश्यक है, जिससे छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित मदरसों में भी आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा एवं दीनी तालीम अल्पसंख्यक मुस्लिम विद्यार्थियों को प्राप्त हो।

प्रदेश के 418 मदरसों का किया जिक्र

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि राज्य में लगभग 418 मदरसे संचालित हैं, जिनमें से कुछ मदरसे पूरी तरह छात्रविहीन हैं तथा कुछ ही मदरसों को प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा तक की मान्यता प्राप्त है, जिनमें आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं है। शेष मदरसों में मुख्य रूप से दीनी शिक्षा ही प्रदान की जा रही है, जिससे मदरसों में शिक्षारत विद्यार्थियों के भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो गया है। राज्य शासन की समस्त योजनाओं का लाभ राज्य के मदरसे लेते हैं, परंतु आधुनिक शिक्षा के नाम पर स्थिति शून्य है।

विद्यालयी शिक्षा परिषद से मदरसे को जोड़ने का सुझाव

डॉ. सलीम राज ने सुझाव दिया कि प्रदेश में संचालित मदरसों की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए यह आवश्यक होगा कि मदरसों को अब विद्यालयी शिक्षा परिषद से जोड़ा जाए। साथ ही, मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर भी एक समिति गठित की जाए, जो यह तय करे कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों का कितना समावेश किया जाए। इससे मदरसों के छात्र भी अन्य विद्यालयों के छात्रों की तरह प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और उन्हें उच्च शिक्षा तथा रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। साथ ही, मदरसों के छात्रों का स्किल डेवलपमेंट भी हो सकेगा।

मुख्यमंत्री से की प्राधिकरण गठन की मांग

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वर्तमान उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में संचालित मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाए, जिससे अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के विद्यार्थी, जो मदरसों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वे आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर मुख्यधारा से जुड़ सकें।