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12 नवंबर तक जेल में रहेंगे चैतन्य बघेल, कोर्ट ने बढ़ाई न्यायिक रिमांड
रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड को कोर्ट ने 12 नवंबर तक बढ़ा दिया है। आज रिमांड अवधि समाप्त होने पर चैतन्य को विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
ED ने चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार
ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।
चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले
ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया।
पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे
ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।
बाबा कार्तिक उरांव ने जनजातीय समाज के उत्थान हेतु अपना जीवन किया समर्पित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। जनजातीय समाज के महान शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं राष्ट्रनायक बाबा कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर आज अंबिकापुर में भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा कार्तिक उरांव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा कार्तिक उरांव समाज के गौरव हैं। उन्होंने विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अपनी धर्म, संस्कृति और सभ्यता को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने पुरखों के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए उच्चतम शिक्षा अर्जित की और समाज को दिशा दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का यह कथन-“जितना ज्यादा पढ़ेंगे, उतना ही समाज को गढ़ेंगे”- आज भी हमें प्रेरित करता है। उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक एकता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगर निगम कार्यालय के समीप बनने वाले बाबा कार्तिक उरांव चौक का भूमि पूजन किया तथा मूर्ति एवं चौक निर्माण के लिए ₹40.79 लाख की राशि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह चौक बाबा कार्तिक उरांव के आदर्शों, विचारों और योगदान की स्मृति को सहेजने का प्रतीक बनेगा।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने समाज के उत्थान और विकास के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। हमें उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज की संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और रीति-रिवाजों को सम्मान देते हुए समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने सदैव समाज में एकता, शिक्षा और जागरूकता का संदेश दिया। आज यह आवश्यक है कि हम उनके आदर्शों और बताए मार्ग पर चलकर समाज को संगठित करें और एकता के सूत्र में बांधें, जिससे जनजातीय समाज सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सके।
इस अवसर पर सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कोरबा में फ्लाई ऐश और सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, NTPC–SECL–BALCO को फटकार — दो हफ्ते में स्थायी समाधान की रिपोर्ट मांगी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा जिले में फ्लाई ऐश के प्रदूषण और सड़कों की दयनीय स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने NTPC, SECL और BALCO जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से किए जा रहे अस्थायी उपायों पर नाराजगी जताते हुए पीडब्ल्यूडी सचिव से दो सप्ताह में स्थायी सड़क निर्माण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही BALCO और NTPC के सीएमडी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है। नगर निगम कोरबा को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
कोरबा, जिसे छत्तीसगढ़ का ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, पिछले कई वर्षों से फ्लाई ऐश प्रदूषण और सड़कों की खस्ताहाल स्थिति की समस्या से जूझ रहा है। thermal power plants और कोयला खदानों से निकलने वाली राख (fly ash) के उचित निपटान में लापरवाही के कारण स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। कोरबा की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिनसे आवागमन और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।इस विषय पर जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ (Division Bench) ने सुनवाई की।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि “सिर्फ अस्थायी मरम्मत से जनता को राहत नहीं मिल सकती।” न्यायालय ने कोरबा में सड़कों की दुर्दशा और फ्लाई ऐश के खुले परिवहन पर गंभीर चिंता जताई।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक हित में यह आवश्यक है कि सड़क निर्माण और फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तैयार किया जाए।अदालत ने NTPC, SECL और BALCO से जवाब मांगा कि उन्होंने अब तक कितनी कार्रवाई की है और क्यों अस्थायी उपायों तक ही सीमित रहे हैं।
BALCO और NTPC के खिलाफ सख्त निर्देश
कोर्ट ने BALCO और NTPC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) को व्यक्तिगत हलफनामा (affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया है।
इस हलफनामे में उन्हें बताना होगा कि—
फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए,
सड़कों की मरम्मत और स्थायी निर्माण में अब तक क्या प्रगति हुई,
और आने वाले दिनों में क्या योजना बनाई गई है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
PWD सचिव को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
पीडब्ल्यूडी सचिव को दो सप्ताह के भीतर स्थायी सड़क निर्माण की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट में सड़कों की वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित मरम्मत, निर्माण की लागत और समयसीमा का स्पष्ट विवरण देने को कहा गया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “जनता को हर बार अस्थायी मरम्मत का झांसा नहीं दिया जा सकता।”
नगर निगम को भी बनाया गया पक्षकार
अदालत ने इस मामले में नगर निगम कोरबा को भी पक्षकार (respondent) बनाया है। निर्देश दिया गया है कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर सड़क और जल निकासी की जिम्मेदारी वहन करेगा और अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगा।
अगली सुनवाई 14 नवंबर को
कोर्ट ने सभी पक्षों को 14 नवंबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट और हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने बस्तर अंचल में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप माओवाद की हिंसक विचारधारा में लिप्त युवाओं में विश्वास जागा है और वे मुख्यधारा में लौटकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीजापुर जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्ज़ीवन” अभियान के तहत आज सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से कुल ₹66 लाख के इनामी 51 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि बस्तर भय और हिंसा के अंधकार से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। शासन की संवेदनशील नीतियाँ और मानवीय दृष्टिकोण इस परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि संवाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश अब नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में सहभागी बनें, ताकि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक गाँव शांति, प्रगति और समरसता का प्रतीक बन सके।
छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित करने के विरोध में जोहार पार्टी ने 31 अक्टूबर को रायपुर बंद का किया ऐलान
रायपुर। राजधानी के तेलीबांधा वीआईपी चौक में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की घटना के विरोध में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने राज्योत्सव से एक दिन पहले 31 अक्टूबर को रायपुर महाबंद का ऐलान किया है. जोहार पार्टी ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि विगत दिनों सोची समझी साजिश के तहत एयरपोर्ट मार्ग के पहले वीआईपी चौक में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की विशालकाय मूर्ति को आपराधिक तत्वों ने शत-विक्षत कर दिया था.
जोहार पार्टी ने कहा, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना 23 अक्टूबर के आसपास दिनदहाड़े हुई. प्रशासन द्वारा इस घटना को छुपाकर रखना अनेक संदेहों को जन्म देता है. मूर्तियों के खंडन के जरिए कुछ छत्तीसगढ़िया विरोधी लोगों द्वारा लगातार हमारी आस्था को खंडित करने और स्वाभिमान को ललकारने का काम किया जा रहा है. ऐसा करके वह छत्तीसगढ़ियों की मूल अस्मिता को डरा-धमका कर खत्म कर देने की योजना को अंजाम देना चाहते हैं.
जोहार पार्टी ने कहा, वर्तमान तेलीबांधा की हृदय विदारक घटना से संपूर्ण छत्तीसगढ़ आक्रोशित है. राज्योत्सव से ठीक पहले किया गया यह दुष्कृत्य अक्षम्य है. छत्तीसगढ़ की जनता की आवाज को राज्य शासन एवं केंद्र शासन तक लोकतांत्रिक ढंग से पहुंचाने के लिए जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने 31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार को राजधानी रायपुर महाबंद का आह्वान किया है। राज्य अस्मिता से हो रहे खिलवाड़ों पर भविष्य में विराम लगाने एवं छत्तीसगढ़िया धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक एक दिवसीय रायपुर बंद करना हमारी विवशता है.
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने अपील की है कि कृप्या राजधानी के सभी व्यापारी, आम नागरिक, राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन, कर्मचारी एवं श्रमिक संगठन, उद्योगपति अपने प्रतिष्ठान एवं कार्य एक दिन के लिए बंद रखकर छत्तीसगढ़ राज्य के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन करें एवं वास्तविक अपराधियों को जेल के भीतर पहुंचाने में हमारी सहायता करें.
भारतमाला मुआवजा राशि घोटाला: एक महिला सहित तीन पटवारियों को एसीबी ने किया गिरफ्तार
रायपुर। भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण से जुड़ा करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में तीन पूर्व पटवारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने शासन की पहले से अर्जित भूमि को दोबारा शासन को ही बेचने की साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि हासिल की। हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद EOW ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
घोटाले का खुलासा और गिरफ्तार अधिकारी
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने तीन पूर्व लोकसेवकों —
दिनेश पटेल (पूर्व पटवारी, नायकबांधा),
लेखराम देवांगन (पूर्व पटवारी, टोकरो), और
बसंती घृतलहरे (पूर्व पटवारी, भेलवाडीह) —
को गिरफ्तार किया है।
इन पर आरोप है कि भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे में भू-अर्जन प्रक्रिया के दौरान शासन की पहले से अधिग्रहीत भूमि को दोबारा शासन को बेचने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, और बैक डेट में खाता विभाजन व नामांतरण कराने जैसी गंभीर अनियमितताएँ की गईं।
कैसे हुआ करोड़ों का घोटाला
EOW की जांच में सामने आया कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच इन अधिकारियों ने भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र रचा।
शासन द्वारा पहले से अधिग्रहीत भूमि को नए स्वामियों के नाम पर दाखिल-खारिज कराया गया।
कूटरचित खाता बंटवारे और नामांतरण के जरिए मुआवजा राशि ऐसे लोगों को दिलाई गई, जो वास्तव में भूमि स्वामी नहीं थे।
कुछ मामलों में निजी भूमि को सरकारी घोषित कर गलत मुआवजा दिलाने की कोशिश की गई।
एक ही भूमि को विभिन्न हिस्सों में बाँटकर कई बार मुआवजा लिया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
कानूनी कार्रवाई और अदालत में पेशी
इन आरोपियों के खिलाफ EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 12 सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। मामला ब्यूरो अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत दर्ज है।हाईकोर्ट से पूर्व में गिरफ्तारी पर लगी रोक 28 अक्टूबर 2025 को हटने के बाद,EOW ने 29 अक्टूबर 2025 को तीनों को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया।अदालत में पेशी के बाद आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
इस घोटाले में पहले भी 13 अक्टूबर 2025 को 10 आरोपियों, जिनमें 2 लोकसेवक शामिल थे, के खिलाफ पहला अभियोग पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया जा चुका है। अब तीन और सरकारी अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि कई अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश और संभावित कुर्की की कार्रवाई की जा रही है।
EOW की सख्त निगरानी में आगे की जांच
EOW अधिकारियों के अनुसार, यह प्रकरण राज्य की सबसे बड़ी भूमि मुआवजा धोखाधड़ी में से एक है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा और कागजातों में हेराफेरी के कई नए पहलू जांच में सामने आ रहे हैं। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि अन्य विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
अमित जोगी ने साय सरकार में PM आवास निर्माण में भ्रष्टाचार के लगाये गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर की सीबीआई जांच की मांग
रायपुर। गुमनामी में चल रहे जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के प्रमुख अमित जोगी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। जोगी ने सूबे की साय सरकार में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। छत्तीसगढ़ स्थापना के रजत जयंती महोत्सव में प्रधानमंत्री मोदी के आने से ठीक पहले अमित जोगी के इस पत्र के वायरल होने से राजनीति गरमा गयी है।
गौरतलब है कि आगामी 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 साल पूरे हो रहे है। राज्य सरकार इसे रजत जयंती महोत्सव के रूप में मना रही है। इस विशेष अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचेगे। जिसे लेकर सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास से ठीक पहले जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर राजनीति गरमा दी है।
अमित जोगी ने केंद्र सरकार से साल 2023-24 में केंद्र सरकार से मिले प्रधानमंत्री आवास के आबंटन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच की मांग कर दी है। जोगी ने कहा कि….केंद्र सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ को ग्रामीण आवासों का सबसे बड़ा आवंटन दिए जाने के बावजूद नकली खातों, रिश्वतखोरी और अवैध निर्माण के चलते योजना का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है। जोगी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि….यह विरोध के लिए विरोध नहीं, बल्कि गरीब और वंचित लोगों की आवाज़ को देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाने का प्रयास है।
इन बिंदुओं पर लगाये भ्रष्टाचार के आरोप
अमित जोगी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि आवास मित्र और अधिकारी पुराने या दूसरों के घरों को नया पीएमएवाई घर दिखाने के लिए रिश्वत ले रहे हैं। कई स्थानों पर पुराने घरों की दूसरी मंजिल बनवाकर उसे नया आवास दिखाया जा रहा है। जो कि अवैध निर्माण हैं। गरीबों की जगह गैर-पात्र लोगों को फंड जारी किया जा रहा है। श्रम भुगतान के लिए बनाए गए फर्जी बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
पार्टी के प्रवक्ता भगवानू नायक ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले का काफी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार की एजेंसी से जांच कराकर सच्चाई सामने नही लाया जा सकता। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्टाचार का उजागर तभी संभव है, जब इसकी जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से करायी जाये। इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी सीबीआई जांच ही एकमात्र समाधान है।


66 लाख के इनामी 51 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
बीजापुर। जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सरकार की महत्वपूर्ण ‘पूना नारगेम’ योजना और नक्सली पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कंपनी नंबर 01 के पीपीसीएम और 8 लाख के इनामी सहित कुल 51 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 20 नक्सली ऐसे हैं जिन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी विभिन्न फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बीजापुर पुलिस लाइन में किया गया, जहां सीआरपीएफ डीआईजी बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की और उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक कुल 461 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 485 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 138 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा मामले हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान, कलेक्टर से मांगा जवाब
बिलासपुर। दयालबंद क्षेत्र में लोगों के आने-जाने के रास्ते को बंद करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन के जवाब पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत हलफनामे से यह स्पष्ट है कि प्रशासन ने कार्रवाई केवल शिकायत मिलने के बाद ही की, जबकि यह मामला समय रहते रोकथाम और सुपरविजन की कमी को दर्शाता है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. डी. गुरू की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक रास्तों पर इस तरह के कब्ज़े बार-बार हो रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे एक नया शपथपत्र दाखिल करें, जिसमें पब्लिक रास्तों और पगडंडियों पर अवरोध रोकने के लिए स्थायी समाधान के कदमों का उल्लेख हो। इस शपथपत्र में इन रास्तों की पहचान, रखरखाव और सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों का भी ब्यौरा देना होगा। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 18 नवंबर तय की है।
मामला दयालबंद पुल के नीचे रहने वाले 15 परिवारों का है, जिनका आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया था। इस समस्या को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। शासन की ओर से दिए गए शपथपत्र में बताया गया कि शिकायत सही पाई गई, और संजय छपारिया द्वारा बनाई गई दीवार हटा दी गई है। पटवारी और तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, रास्ता साफ कराने के लिए मेमो जारी किया गया था, और दीवार निर्माण के लिए जिम्मेदार संजय छपारिया और उनके बेटे गोपाल राम छपारिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 और 135(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने शासन के जवाब को अस्थायी समाधान माना और कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए नीतिगत और स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
CRPF के डॉग की मौत, जवानों को बचाया था IED की चपेट में आने से
सुकमा। सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के वीर K-9 डॉग “EGO” को आज दोरनपाल मुख्यालय में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। 28 अक्टूबर 2025 को अपने सेवा काल के दौरान देश की सुरक्षा में अद्वितीय योगदान देने और कई जवानों की जान बचाने वाले “EGO” का निधन हो गया। उसकी विदाई के समय जवानों और अधिकारियों की आँखें नम थीं, हर कोई अपने साथी को भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा था।
IED की खोज और ट्रैकिंग में दिखाया अदम्य साहस
“EGO” 74 बटालियन, सीआरपीएफ का एक अत्यंत दक्ष और साहसी के-9 था। अपने कार्यकाल में उसने कई महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया और विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की खोज और ट्रैकिंग में असाधारण भूमिका निभाई। उसकी सूझबूझ और सतर्कता से कई बार बड़े हादसे टले और दर्जनों जवानों की जानें बचीं।
जवानों ने दी अंतिम सलामी
आज श्रद्धांजलि समारोह में कमांडेंट हिमांशु पांडे समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान उपस्थित रहे। सभी ने “EGO” के पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर उसे अंतिम सलामी दी। वातावरण में भावनात्मक मौन छा गया जब बटालियन के जवानों ने अपनी ड्यूटी के साथी को सैल्यूट किया।
कमांडेंट बोले – “EGO केवल ड्यूटी डॉग नहीं, परिवार का सदस्य था”
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा, “EGO केवल एक ड्यूटी डॉग नहीं था, बल्कि हमारे बटालियन परिवार का हिस्सा था। उसने हमेशा अपनी सेवा, निष्ठा और बहादुरी से हम सबका सिर गर्व से ऊँचा किया। उसका योगदान और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।”

सीआरपीएफ परिवार ने दी श्रद्धांजलि
सीआरपीएफ परिवार ने “EGO” की निष्ठा, वीरता और सेवाभाव को नमन करते हुए कहा कि ऐसे योद्धा सदैव स्मरणीय रहेंगे। उसकी स्मृति आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का संदेश देती रहेगी।

“EGO” ने भले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उसकी बहादुरी और योगदान हमेशा सीआरपीएफ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
21 नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
कांकेर। जिले में सक्रिय रहे 21 नक्सलियों ने आज पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। जंगलवार कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत किया गया। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संविधान की प्रति भेंट कर मुख्यधारा में उनका स्वागत किया।
नक्सलवाद के खात्मे को लेकर जारी अभियान के बीच पुलिस ने हाल ही में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब मुठभेड़ की जगह आत्मसमर्पण को प्राथमिकता दी जा रही है। पुलिस ने नक्सलियों को साफ संदेश दिया था कि यदि वे आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनका स्वागत होगा अन्यथा फोर्स कार्रवाई के लिए तैयार है।

नक्सलियों से अपील – आत्मसमर्पण कर शांति का रास्ता अपनाएं
इस नई रणनीति का असर भी दिखने लगा है। इसी माह जगदलपुर में 208 नक्सलियों ने 109 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। अब कांकेर जिले के दो एरिया कमेटियों के 21 नक्सलियों ने 18 हथियार पुलिस को सौंपे हैं। आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि एक समय था जब नक्सल संगठन के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी में 45 सदस्य थे, जो अब घटकर केवल 6 से 7 रह गए हैं। उन्होंने दक्षिण बस्तर के जंगलों में छिपे नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि वे आत्मसमर्पण कर शांति का रास्ता अपनाएं अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
नगरपालिका में जमकर फर्जीवाड़े के विरोध में कांग्रेस ने खोला मोर्चा, विधायक के नेतृत्व में निकाली जनाक्रोश रैली
जांजगीर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-नैला नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप के नेतृत्व में निकाली गई जन आक्रोश रैली ने नगर में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका अध्यक्ष रेखा गढ़वाल और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी ने पेवर ब्लॉक निर्माण, सोलर लाइट, वाहन खरीदी और भुगतान में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस की जन आक्रोश रैली में उमड़ा जनसैलाब
सुबह से ही जांजगीर नगर के मुख्य मार्गों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। विधायक ब्यास कश्यप के नेतृत्व में पार्टी ने नगर पालिका तक रैली निकाली। सैकड़ों कार्यकर्ता भ्रष्टाचार बंद करो, नगर पालिका मुर्दाबाद, जनता के पैसे की लूट बंद करो जैसे नारों के साथ सड़कों पर उतर आए।रैली में नगर परिषद के कई पार्षद, युवा कांग्रेस और महिला कांग्रेस की पदाधिकारी भी शामिल थीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका कार्यालय के बाहर घेराव किया और बैरिकेड तोड़कर अंदर प्रवेश कर गए। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी अपने नारेबाजी और विरोध जारी रखे हुए थे।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप — आठ महीने से चल रही अनियमितताएं
कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपते हुए नगर पालिका में चल रहे भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान के कई उदाहरण गिनाए। पार्टी का आरोप है कि पिछले आठ महीनों से विकास कार्यों में घोटाले हो रहे हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पेवर ब्लॉक निर्माण, सोलर लाइट खरीदी, और वाहन क्रय प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गई हैं।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 40 लाख रुपये की विकास योजना में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई है, जबकि 15 से 20 लाख रुपये की वाहन खरीदी में फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान किया गया है।
जल आवर्धन योजना ठप, नागरिकों को परेशानी
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि नगर में जल आवर्धन योजना वर्षों से ठप पड़ी है, जिसके चलते शहरवासियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, स्वच्छता व्यवस्था, नालियों की सफाई, सड़क मरम्मत और जल निकासी की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए।इसके अलावा पार्टी ने हाईस्कूल मैदान के विकास, फ्लाईओवर निर्माण, सब स्टेशन की स्थापना और नगर में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग की है।
पार्षदों की भी नाराजगी, जांच की मांग पर एकजुटता
कई पार्षदों ने भी नगर पालिका में चल रही अनियमितताओं को लेकर असंतोष जताया और ज्ञापन पर सामूहिक हस्ताक्षर किए। पार्षदों ने कहा कि यदि जल्द जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में पूरे नगर में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पुलिस रही नाकाम, प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा बैरिकेड
नगर पालिका कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात था, लेकिन भारी भीड़ के आगे पुलिसकर्मी बेबस दिखे। प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर भीतर घुस गए और अंदर नारेबाजी करने लगे। हालांकि स्थिति पर बाद में नियंत्रण पा लिया गया।
छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘मोन्था’ का असर: 27 जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
रायपुर। अरब सागर में बने चक्रवात ‘मोन्था’ का असर अब छत्तीसगढ़ में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश के उत्तरी इलाकों में सुबह से ही बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। विशेष रूप से सरगुजा संभाग में तीन दिनों तक लगातार बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 17 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जगहों पर गरज-चमक के साथ भारी वर्षा और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
सुबह से सरगुजा में बारिश, रायपुर में तेज हवाएं चलीं
बुधवार सुबह से ही सरगुजा, अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। वहीं रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे मैदानी जिलों में सुबह तेज हवाएं चलीं। मौसम में अचानक आए इस बदलाव के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बीते 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 30.2°C (दुर्ग) और न्यूनतम तापमान 19.2°C (पेंड्रा) रिकॉर्ड किया गया।मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 48 घंटे राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना बनी रहेगी।
10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 17 जिलों में यलो अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक निम्नलिखित जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है —
बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कबीरधाम और मुंगेली।
इन जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर भारी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।
वहीं, यलो अलर्ट जिन जिलों के लिए जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं —
रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलौदा बाजार, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा।
यहां बिजली गिरने, गरज-चमक और मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है।
बस्तर में 50–60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बस्तर संभाग में चक्रवात ‘मोन्था’ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। यहां 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। विशेष रूप से बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।वहीं 30 अक्टूबर को बिलासपुर और सरगुजा संभाग के कुछ जिलों में भी भारी वर्षा होने की आशंका है। मौसम विभाग ने रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के जिलों में भी तेज हवा चलने की चेतावनी दी है।
धान की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता
इस बेमौसम बारिश से धान की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। खेतों में कटाई का दौर शुरू हो चुका है, ऐसे में भारी वर्षा और तेज हवाएं फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई जगहों पर धान की बालियां गिरने और कटे हुए फसल के भीगने की आशंका जताई जा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटाई और मड़ाई के कार्य स्थगित करें और धान को सुरक्षित स्थान पर रखे ताकि नुकसान से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट से CGPSC घोटाले के 4 आरोपियों को मिली जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कई आरोपियों को जमानत दे दी है। जमानत पाने वालों में टामन सोनवानी के बेटे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, बजरंग स्पात के डायरेक्टर के पुत्र, शशांक गोयल और भूमिका कटियार शामिल हैं। इस मामले में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, सिद्धार्थ अग्रवाल और शशांक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।
2021 में जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन
सीजीपीएससी की ओर से भर्ती के लिए 2021 में विज्ञापन जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में 171 पदों के लिए 2,565 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। 26 से 29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा में 509 उम्मीदवार सफल रहे। साक्षात्कार के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई थी।
भर्ती में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप
भर्ती में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक और एफआइआर दर्ज की गई थी। वर्तमान विष्णु देव साय सरकार के अनुरोध पर इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई।
एसीबी–ईओडब्ल्यू की 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, ठेकेदारों और व्यापारियों के घरों में हड़कंप
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की संयुक्त टीमों ने बुधवार सुबह डीएमएफ (जिला खनिज निधि) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में राज्य के चार जिलों में 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और धमतरी (कुरूद) जिलों में की जा रही है। रायपुर में 5, दुर्ग में 2, राजनांदगांव में 4 और कुरूद में 1 ठिकाने पर छापे डाले गए हैं। कार्रवाई बुधवार सुबह से ही शुरू हुई, जिससे संबंधित क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है।
ठेकेदारों और व्यापारियों के ठिकानों पर छापे
एसीबी–ईओडब्ल्यू की टीम जिन लोगों के ठिकानों पर पहुंची है, वे अधिकतर ठेकेदार और व्यापारी हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने डीएमएफ फंड के माध्यम से किए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएं की हैं। लंबे समय से इन परियोजनाओं में गंभीर गड़बड़ियों और फर्जी बिलिंग की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके आधार पर आज यह संयुक्त छापामार कार्रवाई की गई है।
दस्तावेज जब्त और पूछताछ जारी
टीमों ने संबंधित ठिकानों पर पहुंचकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कुछ जगहों पर डिजिटल डाटा, फाइलें और ठेके से संबंधित रसीदें भी जब्त की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल छापेमारी जारी है और पूरे दिनभर जांच की कार्रवाई चलने की संभावना है।
बड़े खुलासों की संभावना
अब तक की जांच में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई में कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह घोटाला करोड़ों रुपये के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है।
क्या है DMF फंड?
डीएमएफ यानी District Mineral Foundation Fund खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत बनाया गया है। इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारना है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस फंड के दुरुपयोग और फर्जी खर्च दिखाने के आरोप बार-बार सामने आते रहे हैं।
महाराजा अग्रसेन पर विवादित टिप्पणी के बाद अग्रवाल समाज ने थाने का किया घेराव
रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल द्वारा महाराजा अग्रसेन, भगवान झूलेलाल और राष्ट्रनायकों के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर प्रदेशभर में अग्रवाल समाज में भारी आक्रोश है। समाज की आस्था और श्रद्धा को ठेस पहुँचाने वाले इस बयान के विरोध में रायपुर में आज अग्रवाल समाज के सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे और कोतवाली थाना का घेराव कर पुलिस अधिकारियों से कठोर कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर अमित बघेल के खिलाफ धारा 299 बीएनएस 2023 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
अग्रवाल सभा अध्यक्ष विजय अग्रवाल जी ने बताया कि अमित बघेल के इस अमर्यादित बयान से केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी तीव्र विरोध हो रहा है। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा सुबह से लगातार टेलीफ़ोनिक माध्यम से विरोध दर्ज करवाया जा रहा है और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
उन्होंने आगे बताया कि इस बयान का विरोध रायगढ़, अंबिकापुर, सरगुजा, सराईपाली सहित प्रदेश के सभी जिलों में किया जा रहा है, जहां समाजजन स्थानीय थानों का घेराव कर FIR दर्ज करवाने और न्यायिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वहीं योगी अग्रवाल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन केवल अग्रवाल समाज के ही नहीं, बल्कि समस्त भारतीय समाज में त्याग, सेवा और समानता के प्रतीक हैं। उनके साथ-साथ भगवान झूलेलाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे राष्ट्रपुरुषों के प्रति इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी प्रकार से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मीडिया प्रभारी उदित अग्रवाल ने बताया कि ज्ञापन कार्यक्रम में समाज के प्रमुख पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें महामंत्री मनमोहन अग्रवाल, उपाध्यक्ष रिवल्लभ अग्रवाल, सभा संगठन मंत्री योगी अग्रवाल, सलाहकार सतपाल जैन, कैलाश मुरारका, सुभाष अग्रवाल, युवा मंडल अध्यक्ष सी.एस. सौरभ अग्रवाल, संगठन मंत्री सौरभ अग्रवाल, सलाहकार नितिन अग्रवाल, पार्षद आनंद अग्रवाल, एडवोकेट विपिन अग्रवाल, रमेश अग्रवाल, सतपाल जैन, प्रदीप अग्रवाल, प्रेमचंद अग्रवाल, अविचल अग्रवाल, अजय अग्रवाल, कमल गुप्ता, विनोद अग्रवाल, पवन अग्रवाल, महेश अग्रवाल विकास सिंघल आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
प्रदेश अध्यक्ष किशन अग्रवाल ने कहा कि समाज का यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की गरिमा और परंपरा की रक्षा के लिए है। अग्रवाल समाज सदा से राष्ट्र निर्माण, सेवा कार्य और सामाजिक सद्भाव के लिए समर्पित रहा है। यदि भविष्य में इस प्रकार के अमर्यादित बयान पुनः दिए जाते हैं, तो समाज प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार रहेगा।
गिधवा–परसदा आर्द्रभूमि को प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और इको-पर्यटन केंद्र बनाने की मांग
रायपुर। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री और लोकसभा सांसद तोखन साहू ने गिधवा–परसदा आर्द्रभूमि क्षेत्र को प्रवासी पक्षियों के संरक्षण एवं इको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक विस्तृत परियोजना प्रस्ताव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को सौंपा।
इस परियोजना का उद्देश्य मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग (सेंट्रल एशियन फ्लाईवे – CAF) पर स्थित इस आर्द्रभूमि को एक संरक्षित, वैज्ञानिक रूप से प्रबंधित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित करना है। यह क्षेत्र प्रवासी जलपक्षियों के लिए एक प्रमुख विश्राम एवं प्रजनन स्थल है, जहां अब तक 143 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला यह स्थल रायपुर से 15 किलोमीटर तथा नंदघाट से 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से यहां पक्षी संरक्षण एवं जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास प्रारंभ हो चुके हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि विश्व स्तर पर प्रवासी पक्षियों के लिए नौ प्रमुख मार्गों (फ्लाईवे) की पहचान की गई है, जिनमें से तीन — पूर्व एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई, पूर्व अफ्रीकी-पश्चिम एशियाई और मध्य एशियाई मार्ग — भारत से होकर गुजरते हैं। इनमें मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग (CAF) भारत में प्रवासी पक्षियों की लगभग 90 प्रतिशत प्रजातियों को सुरक्षित ठिकाना प्रदान करता है। गिधवा–परसदा क्षेत्र इसी मार्ग पर स्थित एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थल है, जो छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है।
प्रस्तावित परियोजना में लगभग ₹220 करोड़ की वित्तीय योजना सम्मिलित है, जिसमें संरक्षण अवसंरचना, जल प्रबंधन, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, इको-पर्यटन सुविधाएँ, स्थानीय उद्यमिता विकास तथा ‘सीएएफ सचिवालय’ की स्थापना जैसे घटक शामिल हैं। यह परियोजना न केवल प्रवासी पक्षियों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि जलवायु अनुकूलन, ग्रामीण आजीविका, पर्यावरण शिक्षा और सतत विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अपने पत्र के साथ भारत सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत “प्रवासी पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (2018–2023)” तथा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न क्रमांक 3340 (दिनांक 16 दिसम्बर 2024) के उत्तर की प्रति भी संलग्न की है, जिसमें प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु उठाए गए कदमों और राज्यों को दी गई वित्तीय सहायता का विवरण सम्मिलित है।
उन्होंने कहा कि गिधवा–परसदा आर्द्रभूमि छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि पर्यावरणीय समृद्धि, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकती है। आपके मार्गदर्शन और सहयोग से इसे एक वैश्विक स्तर के इको-पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।”
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से अनुरोध किया है कि इस परियोजना प्रस्ताव पर आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश प्रदान करें, ताकि इस महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल को शीघ्रता से क्रियान्वित किया जा सके।