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मेडिकल PG प्रवेश पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डोमिसाइल आरक्षण रद्द, 50% संस्थागत और 50% ओपन मेरिट सीटें तय
रायपुर। मेडिकल पीजी में प्रवेश के लिए राज्य में लागू डोमिसाइल आरक्षण को रद्द करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेंट्रल पुल और संस्थागत आरक्षण की स्थिति साफ कर दिया है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य शासन ने राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही मेडिकल पीजी में एडमिशन को लेकर अधिसूचना जारी कर दिया है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अहम फैसले में कहा, संस्थागत आरक्षण हेतु 50 प्रतिशत सीटें तथा ओपन मेरिट हेतु 50 प्रतिशत सीटेंआरक्षित रहेंगी. संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटों में शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेगा, जिन्होंने छत्तीसगढ राज्य में स्थित एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण किया है, अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी है.
इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के मध्य मेरिट के आधार पर दिया जाएगा. गैर संस्थागत आरक्षण शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी. इन सीटों पर प्रवेश सभी पात्र अभ्यर्थियों हेतु राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा. ओपन सीटों पर किसी प्रकार की संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगी. राज्य सरकार ने डॉ. समृद्धि दुबे की याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा 20 नवंबर.2025 को पारित आदेश के पैराग्राफ 21 में निहित निर्देशों के स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आवेदन पेश किया था.

खनन ब्लास्टिंग से त्रस्त ग्रामीणों का लोक सुनवाई में उग्र विरोध, अधिकारियों का घेराव, आंदोलन की चेतावनी
जगदलपुर। बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड क्षेत्र में संचालित 14 खदानों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा लोक सुनवाई में फूट पड़ा, लगातार हो रही ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, छतों का टूटना, खेती प्रभावित होना और पेयजल के स्रोतों के दूषित होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव किया. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि स्थाई समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे.
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. लोकसुनवाई में पहुंचे अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और खनिज अधिकारियों पर बात अनसुनी करने से नाराज ग्रामीणों ने उनका घेराव किया. हालात बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.
ग्रामीणों ने खनन नियमों के उल्लंघन और प्रशासन–उद्योगपति की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस खसरा नंबर में खदानें चल रही हैं, वहीं उनके घर बने हैं. खदानों की स्थापना और सहमति को लेकर भी ग्रामीणों और प्रशासन के दावे आमने-सामने हैं. फिलहाल, पिपलावंड में खदानों को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है.
ST महिला को पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं, परंपरागत उत्तराधिकार त्याग का प्रमाण जरूरी: हाईकोर्ट का अहम फैसला
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकती, जब तक यह सिद्ध न किया जाए कि संबंधित जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार व्यवस्था त्याग दी है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने (आशावती बनाम रुखमणी व अन्य) में 41 साल पुराने नामांतरण (म्यूटेशन) और बंटवारे को चुनौती देने वाली अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
अपीलकर्ता आशावती पिता धरमसिंह ने सिविल कोर्ट में दावा किया था कि उनके पिता स्व. धरमसिंह बरीहा की दो पत्नियां थीं और वे दूसरी पत्नी हरसोवती की पुत्री हैं। उनका कहना था कि 83 एकड़ से अधिक की पैतृक कृषि भूमि में उन्हें बराबर हिस्सा मिलना चाहिए था, लेकिन वर्ष 1971-72 में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उनका नाम रिकॉर्ड से हटा दिया गया। आशावती ने आरोप लगाया कि उस समय वे नाबालिग थीं, न तो उन्हें नोटिस दिया गया और न ही सहमति ली गई, इसलिए नामांतरण और बंटवारा अवैध व शून्य है।
हाईकोर्ट ने माना कि,पक्षकार बिंझवार अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। उन पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होता। अपीलकर्ता यह सिद्ध करने में विफल रहीं कि जनजाति ने अपनी परंपरागत उत्तराधिकार प्रणाली छोड़ी है। कोर्ट ने बुटाकी बाई बनाम सुखबती बाई (2014) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी बेटी केवल हिंदू कानून के आधार पर पैतृक संपत्ति का दावा नहीं कर सकती।
कोर्ट ने यह भी अहम टिप्पणी की कि, वर्ष 1972 में प्रमाणित नामांतरण आदेश को 2013 में चुनौती देना कानूनन अस्वीकार्य है। इतने लंबे समय तक चुप्पी, दावे को समय-सीमा के बाहर ले जाती है। राजस्व रिकॉर्ड दशकों तक लागू रहे हों, तो उन्हें हल्के में खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक लागू रहे नामांतरण आदेश वैध माने जाते हैं, जब तक धोखाधड़ी का ठोस प्रमाण न हो।
रायपुर के मैदान में आज भारत-न्यूजीलैंड के टी-20 सीरीज का दूसरा मुकाबला, इस रूट से स्टेडियम पहुंचेंगे दर्शक
रायपुर। भारत और न्यूजीलैंड की टी-20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज यानी 23 जनवरी को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। फरवरी में होने वाले आईसीसी मेंस टी-20 वर्ल्ड कप से पहले जारी सीरीज में भारत का दमदार प्रदर्शन देखने को मिला। पहले मैच में 238 रन ठोकने वाली टीम इंडिया ने अपने फैंस की उम्मीदें दोगुनी कर दी है. रायपुर में भी आज चौकों-छक्कों की बरसात होने के पूरे आसार हैं। वहीं मैच देखने के लिए राज्य के अलग-अलग जिलो से आने वाले दर्शकों के अलावा खिलाड़ियों के लिए सुगम आवागमन के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा मार्ग एवं पार्किंग व्यवस्था निर्धारित किया गया है।
दर्शकों के लिए यातायात मार्ग और पार्किंग व्यवस्था

रायपुर शहर से होकर क्रिकेट स्टेडियम जाने के लिए मार्ग
रायपुर शहर से होकर क्रिकेट स्टेडियम जाने के लिए तेलीबांधा थाना तिराहा, नेशनल हाईवे क्रमांक-53 होकर सेरीखेड़ी ओवरब्रिज से नया रायपुर मार्ग होकर चीचा स्टेडियम तिराहा से साईं अस्पताल रोड होकर साईं अस्पताल पार्किंग व सेंध तालाब पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर स्टेडियम पैदल पहुंचेंगे।
बिलासपुर की ओर से स्टेडियम आने वाले दर्शकों के लिए मार्ग व्यवस्था
बिलासपुर की ओर से होकर क्रिकेट स्टेडियम आने वाले दर्शकगण बिलासपुर–रायपुर मार्ग से होकर धनेली नाला से रिंग रोड नंबर-03 होकर विधानसभा चौक, राजू ढाबा रिंग रोड नंबर-03 जंक्शन होकर नेशनल हाईवे क्रमांक-53 से मंदिर हसौद होकर नवागांव से स्टेडियम टर्निंग होकर स्टेडियम के पूर्व दिशा स्थित परसदा पार्किंग एवं कोसा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर पैदल स्टेडियम पहुंचेंगे।
बलौदाबाजार–खरोरा की ओर से स्टेडियम आने वाले दर्शकों के लिए मार्ग व्यवस्था
बलौदाबाजार–रायपुर मार्ग में विधानसभा ओवरब्रिज चौक से रिंग रोड नंबर-03 होकर विधानसभा चौक, राजू ढाबा रिंग रोड नंबर-03 जंक्शन होकर नेशनल हाईवे क्रमांक-53 से मंदिर हसौद होकर नवागांव से स्टेडियम टर्निंग होकर स्टेडियम के पूर्व दिशा स्थित परसदा पार्किंग एवं कोसा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर पैदल स्टेडियम पहुंचेंगे।
जगदलपुर–धमतरी मार्ग से आने वाले दर्शकों के लिए मार्ग व्यवस्था
धमतरी–जगदलपुर की ओर से आने वाले दर्शक अभनपुर से केन्द्री, उपरवारा, मंत्रालय (डीडीयू) चौक, कोटराभाठा चौक, सेंध तालाब होकर साईं अस्पताल पार्किंग व सेंध तालाब पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर स्टेडियम पैदल पहुंचेंगे।
दुर्ग–भिलाई की ओर से आने वाले दर्शकों के लिए मार्ग व्यवस्था
दुर्ग–भिलाई की ओर से आने वाले दर्शक टाटीबंध से रिंग रोड नंबर-01 होकर पचपेढ़ीनाका, तेलीबांधा थाना तिराहा, नेशनल हाईवे क्रमांक-53 होकर सेरीखेड़ी ओवरब्रिज से नया रायपुर मार्ग होकर स्टेडियम तिराहा से साईं अस्पताल रोड होकर साईं अस्पताल पार्किंग व सेंध तालाब पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर स्टेडियम पैदल पहुंचेंगे।
महासमुंद–सरायपाली की ओर से आने वाले दर्शकों के लिए मार्ग व्यवस्था
महासमुंद–सरायपाली की ओर से आने वाले दर्शकों के लिए आरंग से सीधे स्टेडियम टर्निंग होकर स्टेडियम के पूर्व दिशा स्थित परसदा पार्किंग एवं कोसा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर पैदल स्टेडियम पहुंचेंगे।
पासधारी वाहनों के लिए मार्ग एवं पार्किंग
पासधारी वाहन जिन्हें पार्किंग पास A, B, C, D, E, F, G जारी हुआ है, वे सेरीखेड़ी ओवरब्रिज होकर नया रायपुर प्रवेश मार्ग से स्टेडियम टर्निंग, डॉ. खूबचंद बघेल चौक, कयाबांधा चौक (सेक्टर 15/21), कोटराभाठा चौक (सेक्टर 17/20) से ग्राम सेंध, सेक्टर 04/10 होकर स्टेडियम पार्किंग A, B, C, D, E, F, G में अपना वाहन पार्क कर सकेंगे।
खाने-पीने के तय रेट, ओवररेटिंग पर सख्त निगरानी
दर्शकों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्टेडियम के भीतर मिलने वाली सभी खाने-पीने की वस्तुओं के दाम पहले से निर्धारित कर दिए गए हैं। आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित रेट से अधिक कीमत वसूलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्टेडियम में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के निर्धारित रेट इस प्रकार हैं—
- समोसा (100 ग्राम) – ₹50
- सैंडविच (1 पीस) – ₹60
- बर्गर – ₹80
- पिज़्ज़ा हट पिज़्ज़ा – ₹250
- पॉपकॉर्न (कोन) – ₹60
- पॉपकॉर्न (टब) – ₹100
- स्टीम वेज मोमो – ₹150
- चिकन मोमो – ₹200
- फ्राई मोमो (वेज) – ₹200
- चिकन फ्राई मोमो – ₹250
- वेफर्स और आइसक्रीम – एमआरपी रेट पर
- 250 एमएल पानी की बोतल – ₹10
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फूड स्टॉल कर्मचारियों की टी-शर्ट पर रेट अंकित किए जाएंगे और स्टेडियम परिसर में मेन्यू बोर्ड भी लगाए जाएंगे, ताकि दर्शकों को किसी तरह की असुविधा न हो।चारियों की टी-शर्ट पर रेट लिखे जाएंगे और पूरे स्टेडियम में मेन्यू बोर्ड लगाए जाएंगे।
पहली पारी के बाद नो एंट्री
CSCS के अनुसार, मुकाबला शाम 7 बजे शुरू होगा और दर्शकों के लिए गेट दोपहर 4 बजे खोल दिए जाएंगे। पहली पारी समाप्त होने के बाद स्टेडियम में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
प्रतिबंधित वस्तुओं की लंबी सूची
सुरक्षा कारणों से स्टेडियम में बोतल, टिन, कैन, लाइटर, सिगरेट, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, ज्वलनशील या खतरनाक पदार्थ, मेटल कंटेनर, छतरी, धारदार वस्तुएं, कैमरा, हेलमेट, पावर बैंक, सेल्फी स्टिक, बैकपैक, सिक्के, पटाखे और किसी भी प्रकार के हथियार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। बाहर से कोई भोजन या मादक पेय ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की सिविल लाइन जमीन मामले में राजस्व मंडल का बड़ा आदेश, एक माह तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
रायपुर। पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की सिविल लाइन स्थित जमीनों की खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में राजस्व मंडल ने अहम आदेश पारित किया है. मंडल ने अगले एक महीने तक संबंधित भूमि और उससे जुड़े सभी राजस्व अभिलेखों को यथावत रखने के निर्देश दिए हैं.
इस मामले में आवेदक नारायण लाल शर्मा ने राजस्व मंडल में याचिका दायर कर पूर्व सीएस विवेक ढांड और उनके परिवार को सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है. प्रकरण की सुनवाई फिलहाल राजस्व मंडल में जारी है.
आवेदक की शिकायत के अनुसार, सिविल लाइन के मुख्य मार्ग पर स्थित करीब 1 लाख 53 हजार वर्ग फीट नजूल भूमि वर्ष 1964 में विवेक ढांड के परिवार को आवासीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी, जिसकी रजिस्ट्री लगभग 1 लाख 23 हजार रुपये में होना बताया गया है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि उक्त भूमि को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर 58 हजार, 37 हजार, 23 हजार वर्ग फीट सहित शेष भूमि को ढांड परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम हस्तांतरित किया गया, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है.
आवेदक का आरोप है कि आवासीय पट्टे पर दी गई जमीन का किसी अन्य प्रयोजन, विशेषकर व्यावसायिक उपयोग, के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जबकि पूर्व सीएस द्वारा इसका व्यावसायिक उपयोग किया गया. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछली भूपेश सरकार की फ्रीहोल्ड नीति का लाभ उठाकर उक्त जमीन को फ्रीहोल्ड कराया गया, जिसमें गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं.
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की फ्रीहोल्ड नीति को निरस्त कर दिया है और उससे जुड़ी अनियमितताओं की जांच चल रही है. उन्हें जानकारी मिली है कि पूर्व सीएस द्वारा जमीन बेचने की कोशिश की जा रही है, इसलिए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी.
मामले में सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद राजस्व मंडल अध्यक्ष ने जमीन और उससे जुड़े सभी अभिलेखों को फिलहाल यथावत रखने का आदेश दिया है.
आदेश की कॉपी:

भारत निर्वाचन आयोग ने ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म किया लॉन्च, IICDEM–2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लोकतांत्रिक नवाचारों पर मंथन
रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन पर आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM)–2026 के अवसर पर आज ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया। यह निर्वाचन से संबंधित समस्त जानकारियों और सेवाओं के लिए आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 21 से 23 जनवरी, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
ECINET की परिकल्पना भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर की थी। इसके विकास की घोषणा मई, 2025 में की गई थी।
शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ECINET का विकास विधि के कठोर अनुपालन में किया गया है और यह 22 अनुसूचित भाषाओं तथा अंग्रेज़ी में उपलब्ध है। उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) को अपने-अपने कानूनों और भाषाओं के अनुरूप ऐसे ही डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने हेतु भारत के साथ सहयोग का आमंत्रण भी दिया।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि ECINET निर्वाचन प्रबंधन निकायों में जनविश्वास को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम है। यह अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, सभी कार्यों की निगरानी में सहायक है तथा त्वरित निर्णय एवं सूचना प्रसार को संभव बनाता है।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि IICDEM–2026 सम्मेलन विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों को प्रौद्योगिकी के उपयोग और डिजिटल नवाचारों से जुड़े वैश्विक अनुभवों से सीखने और प्रेरणा लेने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
अपनी प्रस्तुति के दौरान महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) डॉ. सीमा खन्ना ने बताया कि साइबर सुरक्षा ECINET के प्रमुख स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एक रणनीतिक सक्षमकर्ता के रूप में उभर चुकी है। ECINET पारदर्शिता, दक्षता, विश्वसनीयता तथा निर्वाचन प्रक्रिया में जनविश्वास को और अधिक मजबूत करता है।
ECINET विश्व का सबसे बड़ा निर्वाचन सेवा प्लेटफॉर्म है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सभी निर्वाचन सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक सहज डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। इसके अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग के 40 से अधिक ऐप्स और पोर्टलों को एक ही मंच पर समाहित किया गया है।
यह प्लेटफॉर्म भारत के संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 एवं 1951, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 तथा निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के पूर्ण अनुपालन में विकसित किया गया है।
ECINET नागरिकों, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों तथा निर्वाचन अधिकारियों को एक साझा मंच पर जोड़ता है। इसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली खोज, Track Your Application, Know Your Candidate, निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क, Book-a-call with BLO, ई-ईपीआईसी डाउनलोड, मतदान प्रवृत्तियां, शिकायत निवारण सहित अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ECINET के बीटा संस्करण का 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों तथा विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इससे निर्वाचन आयोग को नागरिक-केंद्रित सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान करने तथा एक क्लिक पर निर्वाचन से संबंधित समस्त जानकारियां उपलब्ध कराने में सहायता मिली। अंतिम रूप दिए जाने से पूर्व नागरिकों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए थे।
बीटा संस्करण के जारी होने के बाद अब तक ECINET के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक पंजीकरण प्रपत्रों का निपटान किया जा चुका है, जो औसतन 2.7 लाख प्रपत्र प्रतिदिन है। इस प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) पंजीकृत हैं। विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 150 करोड़ से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त, ECINET जमीनी स्तर पर कार्यरत निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी के लिए भी एक सुसंगत एवं प्रभावी तंत्र प्रदान करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से इस सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी भोसकर विलास संदिपान, सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रूपेश वर्मा तथा सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी तरुणा साहू ने सहभागिता की। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से क्रोएशिया और आयरलैंड के प्रतिनिधियों के साथ “कैंपेन फाइनेंस एवं मैनेजमेंट” विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें चुनावी व्यय प्रबंधन, पारदर्शिता तथा सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं पर उपयोगी अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।
रायपुर में पुलिस आयुक्त प्रणाली के पहले राज्य पुलिस सेवा के 24 अधिकारियों की मिली नई पदस्थापना, आदेश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की तैयारी के तहत पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा ने राज्य पुलिस सेवा संवर्ग 24 अधिकारियों की नई पदस्थापना आदेश जारी की है।
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बलौदाबाजार में औद्योगिक हादसे पर सख्त कार्रवाई : रियल इस्पात एंड एनर्जी का किल्न-01 सील, संचालन-मेंटेनेंस पर प्रतिबंध, 6 मजदूरों की हुई थी मौत
रायपुर। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत ग्राम धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. के कारखाना परिसर में घटित भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया है। दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कारखाना अधिनियम के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं मेंटेनेंस सहित समस्त कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है।
कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार 22 जनवरी 2026 को प्रातः लगभग 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट एवं गर्म ऐश की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जब कि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार द्वारा उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की गई ।इस दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा एसओपी का पालन नहीं किया गया। किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया। डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा तथा श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।
किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे। जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए।
सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का कहना है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू, IPS संजीव शुक्ला बनाए गए पहले पुलिस आयुक्त, 16 आईपीएस अधिकारियों का तबादला आदेश जारी
रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के साथ ही 2004 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी संजीव शुक्ला को शहर का पहला पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। अब तक वे पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज के पद पर पदस्थ थे। इसी आदेश के तहत रामगोपाल गर्ग (IPS-2007) को पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज से हटाकर पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज बनाया गया है। अभिषेक शांडिल्य (IPS-2007) को राजनांदगांव रेंज से पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज पदस्थ किया गया है। वहीं बालाजी राव सोमावर (IPS-2007), जो पुलिस मुख्यालय रायपुर में कानून व्यवस्था देख रहे थे, उन्हें पुलिस महानिरीक्षक, राजनांदगांव रेंज नियुक्त किया गया है।
अमित तुकाराम कांबले (IPS-2009) को कांकेर से अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, रायपुर नगरीय बनाया गया है। लाल उमेद सिंह (IPS-2011) को रायपुर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर पदस्थ किया गया है। शशि मोहन सिंह (IPS-2012) को जशपुर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, रायगढ़ नियुक्त किया गया है। दिव्यांग पटेल (IPS-2014) को रायगढ़ से पुलिस अधीक्षक, रेल रायपुर बनाया गया है।
रायपुर कमिश्नरी में डीसीपी की तैनाती
कमिश्नरी प्रणाली के तहत रायपुर नगरीय क्षेत्र में पुलिस उपायुक्तों की नियुक्ति भी की गई है।
उमेश प्रसाद गुप्ता (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (मध्य), रायपुर नगरीय, संदीप पटेल (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (पश्चिम), रायपुर नगरीय और मयंक गुर्जर (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (उत्तर), रायपुर नगरीय बनाया गया है।
इसके अलावा विकास कुमार (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल), रायपुर नगरीय और राजनाला स्मृतिक (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर), रायपुर नगरीय नियुक्त किया गया है।
श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को पुलिस अधीक्षक रेल रायपुर से हटाकर पुलिस अधीक्षक, रायपुर ग्रामीण बनाया गया है। वहीं इंदु अग्रवाल (IPS-2022), नगर पुलिस अधीक्षक आजाद चौक रायपुर को पुलिस सहायक आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय पदस्थ किया गया है।
देखिये आदेश की कॉपी-


रायपुर साहित्य उत्सव का भव्य शुभारंभ कल : राज्यसभा उपसभापति हरिवंश होंगे मुख्य अतिथि, पुरखौती मुक्तांगन में 3 दिनों तक होगी साहित्यिक चर्चा और गोष्ठियां
रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव का भव्य शुभारंभ राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में 23 जनवरी को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। शुभारंभ समारोह विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सुबह 10.30 बजे से होगा। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे। उपमुख्यमंत्री द्वय अरूण साव और विजय शर्मा एवं महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा और रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
रायपुर साहित्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ और देश के जाने-माने साहित्यकार, पत्रकार, कवि हिस्सा लेंगे। साहित्य महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय पुस्तक मेला, इंगेजमेंट जोन, ओपन टैलेंट मंच, पेंटिंग कार्यशाला एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। महोत्सव में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए फूड जोन भी बनाया गया है। मुख्य मंडप विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में तैयार किया गया है, जहां महत्वपूर्ण मंचीय कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा साहित्यिक परिचर्चा एवं गोष्ठी के आयोजनों के लिए लाला जगदलपुरी मंडप, श्याम लाल चतुर्वेदी मंडप, अनिरूद्ध नीरव मंडप तैयार किए गए है। साहित्य उत्सव में प्रतिदिन चार सत्रों का आयोजन होगा। प्रथम सत्र 12.30 बजे से, द्वितीय सत्र 2.15. बजे से, तृतीय सत्र 3.45 बजे से तथा चतुर्थ सत्र 5.15 बजे से 6.30 बजे तक होगा। 23 एवं 24 जनवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा।
23 जनवरी को प्रथम सत्र - लाला जगदलपुरी मंडप में समकालीन महिला लेखन, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में संवाद वन्देमातरम के अंतर्गत भारत के स्व जागरण का प्रवाह, अनिरूद्ध नीरव मंडप में डिजिटल साहित्य पर परिचर्चा के अंतर्गत प्रकाशकों के लिए चुनौती विषय पर परिचर्चा होगी।
द्वितीय सत्र - लाला जगदलपुरी मंडप में वाचिक परम्परा में साहित्य, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में कविता की नई चाल पर परिचर्चा, अनिरूद्ध नीरव मंडप में संवाद का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल होंगे।
तृतीय सत्र - लाला जगदलपुरी मंडप में काला पादरी में जनजाति विमर्श और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में छत्तीसगढ़ का साहित्य अवदान विषय पर परिचर्चा होगी। अनिरूद्ध नीरव मंडप में स्मृति शेष स्व. विनोद कुमार शुक्ल साहित्य की खिड़कियां पर परिचर्चा होगी।
चतुर्थ सत्र- लाला जगदलपुरी मंडप में पुरातत्व: मौन साहित्य पर परिचर्चा और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में समय की समस्या: सेक्युलरिज्म पर संवाद होगा। अनिरूद्ध नीरव मंडप में काव्य पाठ राष्ट्रीय कवि संगम का आयोजन होगा। सांस्कृतिक संध्या के अंतर्गत विनोद कुमार शुक्ल मंडप में शाम 7 बजे से मनोज जोशी के चाणक्य नाटक का मंचन होगा।
24 जनवरी को प्रथम सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में राष्ट्र सेवा के सौ वर्ष पर संवाद और लाला जगदलपुरी मंडप में छत्तीसगढ़ के लोक गीत पर परिचर्चा आयोजित होगी।
द्वितीय सत्र - धार्मिक फिल्में और टेली धारावाहिकों का दौर पर संवाद और श्यामलाल चतुर्वेदी एकात्म मानवदर्शन समाज परिवर्तन का सूत्रधार पर परिचर्चा होगी।
तृतीय सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारत का बौद्धिक विमर्श पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया और अनिरूद्ध नीरव मंडप पर साहित्य: उपनिषद से एआई तक पर परिचर्चा होगी।
चतुर्थ सत्र- विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारतीय ज्ञान परंपरा पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में 'डिजिटल युग के लेखक और पाठक' और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में 'साहित्य के झरोखे से इतिहास' पर परिचर्चा होगी।
पंचम सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में 'माओवादी आतंक और लोकतंत्र', लाला जगदलपुर मंडप में 'डॉ. अंबेडकर - विचारपुंज की आभा', श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर और अनिरूद्ध नीरव मंडप में लुप्त होता बाल साहित्य पर चर्चा होगी। विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सांस्कृतिक कार्यक्रम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य पाठ होगा।
25 जनवरी को प्रथम सत्र - विनोद कुमार शुक्ल मंडप में संविधान और भारतीय मूल्य पर संवाद, लाला जगदलपुरी मंडप में ट्रेवल ब्लॉग:पर्यटन के प्रेरक और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप पर नवयुग में भारत बोध पर परिचर्चा होगी।
द्वितीय सत्र- लाला जगदलपुरी मंडप में पत्रकारिता और साहित्य पर परिचर्चा, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में नाट्यशास्त्र और कला परंपरा पर संवाद किया जाएगा।
तृतीय सत्र- विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सिनेमा और समाज तथा लाला जगदलपुरी मंडप में शासन और साहित्य पर परिचर्चा और श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ का आयोजन होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज साधन विभाग के कामकाज की समीक्षा की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में खनिज साधन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभाग की आगामी कार्ययोजना, खनिज अन्वेषण, खनिज ब्लॉक नीलामी, जिला खनिज न्यास (DMF), तकनीकी नवाचार तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय कार्यों में हो रही प्रगति की सराहना करते हुए टिन पोर्टल के माध्यम से समय पर एवं नियमित भुगतान की व्यवस्था की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस पहल से विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और हितग्राहियों के बीच विश्वास सुदृढ़ हुआ है। मुख्यमंत्री ने कोरंडम उत्खनन के माध्यम से स्थानीय लोगों को कटिंग एवं पॉलिशिंग जैसे कार्यों से अधिकाधिक रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खनन क्षेत्रों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को विश्वास में लेकर परियोजनाओं के लाभों का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर खनन कार्य प्रारंभ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में जिला खनिज न्यास (DMF) से विकास कार्यों की स्वीकृति नियमानुसार शीघ्र कराने के भी निर्देश दिए, ताकि स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का त्वरित विकास हो सके।
बैठक में अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि विभागीय कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “खनिज ऑनलाइन 2.0” प्रणाली विकसित की गई है। खनिज ब्लॉक नीलामी से पूर्व लैंड शेड्यूलिंग तथा बंद एवं उपेक्षित खदानों के निस्तारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है। इसी क्रम में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 14,592 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले दिसंबर माह तक 10,345 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि टिन कलेक्शन मॉडल से जुड़े परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इसे आजीविका संवर्धन का एक सफल उदाहरण बताते हुए इस मॉडल को और अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सह खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, संचालक रजत बंसल सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
5000 पदों पर जल्द होगी शिक्षकों की भर्ती: सीएम साय ने समीक्षा बैठक में तत्काल प्रक्रिया प्रारंभ करने के दिए निर्देश
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।
बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।
नगरीय प्रशासन संचालक पर अमर्यादित टिप्पणी का आरोप, कर्मचारी संघ ने की मुख्य सचिव से शिकायत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कथित तौर पर अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का मामला सुर्खियों में आ गया है. इस संबंध में नव नियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है.
संघ ने मुख्य सचिव को संबोधित किए गए पत्र में बताया है कि 21 जनवरी को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक की अध्यक्षता में निकायों के विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई थी. इस बैठक में कई संभागों के अंतर्गत आने वाले नगरीय निकायों के अधिकारी शामिल हुए थे. संघ ने मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायती पत्र में कहा है कि बैठक के दौरान संचालक द्वारा “नालायक, हरामखोर, बुड़बक, चोर” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया. संघ ने इसे पद की गरिमा और प्रशासनिक मर्यादा के विपरीत बताते हुए कहा है कि इस प्रकार की भाषा न केवल अधिकारियों का अपमान है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को गंभीर ठेस पहुंचाने वाली है.
कर्मचारी संघ ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यरत किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा इस तरह के अमर्यादित शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है. इससे न सिर्फ विभागीय वातावरण दूषित होता है, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.
माफी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
नव नियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ ने पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीर बताते हुए संचालक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है. साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि संचालक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.

45 साल बाद नगरीय निकायों का आय-आधारित वर्गीकरण तय, वेतन नियमों में संशोधन, अधिसूचना जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगभग 45 साल बाद नगर पालिक परिषदों एवं नगर पंचायतों का आय-आधारित वर्गीकरण किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन करते हुए नियम–3 को प्रतिस्थापित कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगरीय निकायों का वर्गीकरण अब उनकी वार्षिक आय के आधार पर निर्धारित किया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले इस तरह का वर्गीकरण सन 1980 में किया गया था। अब 45 वर्षों के अंतराल के बाद राज्य सरकार ने नगर निकायों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप नई श्रेणियां तय की हैं।
नई श्रेणियां इस प्रकार निर्धारित की गई हैं—
श्रेणी “क”
वे नगर पालिक परिषदें/नगर पंचायतें, जिनकी वार्षिक आय 4.00 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो।
श्रेणी “ख”
वे नगर पालिक परिषदें/नगर पंचायतें, जिनकी वार्षिक आय 2.00 करोड़ रुपये या उससे अधिक लेकिन 4.00 करोड़ रुपये से कम हो।
श्रेणी “ग”
वे नगर पालिक परिषदें/नगर पंचायतें, जिनकी वार्षिक आय 90.00 लाख रुपये या उससे अधिक लेकिन 2.00 करोड़ रुपये से कम हो।
श्रेणी “घ”
वे नगर पालिक परिषदें/नगर पंचायतें, जिनकी वार्षिक आय 90.00 लाख रुपये से कम हो।
वार्षिक आय की परिभाषा
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों के प्रयोजन के लिए किसी भी नगर पालिक परिषद या नगर पंचायत की वार्षिक आय उसकी समस्त वार्षिक आय मानी जाएगी। हालांकि, कुछ विशिष्ट प्रयोजनों के लिए प्राप्त सहायता अनुदान को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले से नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप उनका वर्गीकरण अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक हो जाएगा। माना जा रहा है कि इससे अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में एकरूपता आएगी। साथ ही नगर निकायों के वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर उन्हें बेहतर ढंग से श्रेणीकृत किया जा सकेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय नगरीय निकायों के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और उनकी वित्तीय क्षमता के अनुरूप व्यवस्था तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे राज्य के शहरी स्थानीय निकायों के संचालन में अधिक स्पष्टता और अनुशासन आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं।
इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा।
बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
CGMSC घोटाला: EOW ने डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को किया गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) घोटाला प्रकरण में ACB और EOW ने बड़ी कार्रवाई की है. मामले में डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है. कुंजल शर्मा को विशेष न्यायालय रायपुर में पेश किया गया, जहां से उसे 27 जनवरी 2026 तक EOW की रिमांड पर भेज दिया गया है.
कुंजल शर्मा पर आरोप है कि डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की सप्लाई के लिए CGMSC के साथ मिलीभगत कर फर्जी एमआरपी तय की गई. आरोपी कुंजल शर्मा ने कंपनी की नीतियों की अनदेखी करते हुए षड्यंत्रपूर्वक रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की एमआरपी में भारी अंतर दर्शाया और CGMSC को प्रभावित कर मनमाने दरों पर खरीद के लिए सहमत कराया. इसके चलते CGMSC को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई. EOW के अनुसार, शशांक चोपड़ा को लाभ पहुंचाने के लिए कुंजल शर्मा ने MRP से कई गुना अधिक रेट में मेडिकल उपकरणों को बेचा गया.
ACB/EOW इस मामले से जुड़ी “हमर लैब” योजना में शासकीय निधि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की गहन जांच कर है. साक्ष्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भी कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। नवा रायपुर को देश के प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में देश के प्रतिष्ठित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के मध्य 15 एकड़ भूमि के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी के विकास को नई गति देगा।
यह परियोजना न केवल राज्य के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी, बल्कि निवेश के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की तेज़ और भरोसेमंद प्रशासनिक कार्यप्रणाली का भी उदाहरण बनेगी। राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर 2025 को निवेश आमंत्रण जारी किए जाने के बाद मात्र चार माह के भीतर भूमि चिन्हांकन, आवश्यक स्वीकृतियां और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जो अपने आप में एक नया बेंचमार्क है।
नवा रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आबंटित 15 एकड़ भूमि पर बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा लगभग ₹680 करोड़ की लागत से 300 बिस्तरों का अत्याधुनिक मल्टी सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थापित किया जाएगा। यह अस्पताल ट्रस्ट का देश में चौथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होगा। इससे पूर्व मुंबई, इंदौर और जयपुर में ट्रस्ट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
बॉम्बे हॉस्पिटल के माध्यम से कार्डियक साइंसेज, कैंसर उपचार, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, क्रिटिकल केयर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित कई उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
इस परियोजना से 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें डॉक्टर, सर्जन, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन शामिल होंगे। इसके साथ ही हेल्थकेयर सप्लाई चेन, सेवाओं और सहयोगी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की स्थापना से नवा रायपुर में मेडिसिटी का सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के नागरिकों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के निरंतर विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। बॉम्बे हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नवा रायपुर में निवेश करना राज्य की नीतिगत स्थिरता, तेज़ निर्णय क्षमता और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर विश्वास का प्रमाण है।
यह परियोजना छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत स्वास्थ्य जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहनों और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इससे नवा रायपुर को सेंट्रल इंडिया के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं चेयरमैन भरत तापड़िया, सचिव श्याम सहित ट्रस्ट एवं शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।