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छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ
रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं।
जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
महादेव सट्टा एप्प के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की संपत्ति अटैच
रायपुर। ईडी (ED) ने महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ रुपये की भारतीय और विदेशी संपत्तियां जब्त की है . प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर जोनल कार्यालय ने 24 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत एक अस्थायी जब्ती आदेश (PAO) जारी किया है. इस आदेश के तहत दुबई (UAE) में स्थित 18 अचल संपत्तियां और नई दिल्ली में स्थित 2 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं, जिनका बाजार मूल्य लगभग 1700 करोड़ रुपये है.
जब्त की गई विदेशी संपत्तियां दुबई के प्रमुख स्थानों पर स्थित हैं और इनमें दुबई हिल्स एस्टेट (जिसमें हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी और सिदरा शामिल हैं) में स्थित उच्च-मूल्य वाले लक्जरी विला और अपार्टमेंट शामिल हैं. इसके अलावा, बिजनेस बे और SLS होटल एंड रेजिडेंस में कई हाई-एंड अपार्टमेंट और प्रतिष्ठित बुर्ज खलीफा में भी अपार्टमेंट शामिल हैं. जब्ती के लिए चुनी गई ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी एप्लिकेशन के मुख्य प्रमोटरों में से एक, सौरभ चंद्राकर की हैं. ये संपत्तियां उसके द्वारा नियंत्रित संस्थाओं और उनके सहयोगियों, जिनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन टिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी शामिल हैं, के नाम पर दर्ज हैं. ED द्वारा की गई जांच से पता चला है कि ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफ़ॉर्म और कई अन्य प्लेटफ़ॉर्म के नाम पर चलाए जा रहे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी अभियानों से संबंधित अपराधों से अर्जित आय (Proceeds of Crime) से खरीदी गई थीं.
ED ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी. ये एफआईआर IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफ़ॉर्म—जैसे महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange आदि—से जुड़े व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थीं. ED द्वारा की गई जांच से यह भी पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक एक बड़े पैमाने पर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में काम करता था. यह सिंडिकेट Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और डोमेन नामों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान करता था. इस ऑपरेशन को “पैनलों” या “शाखाओं” के एक फ़्रैंचाइज़ी-आधारित नेटवर्क के ज़रिए चलाया गया, जिनका संचालन पूरे भारत में मौजूद सहयोगियों द्वारा किया जाता था. वहीं, इसके मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्रकार और रवि उप्पल दुबई से इस सट्टेबाजी सिंडिकेट को संचालित और नियंत्रित करते थे.
जांच में आगे पता चला कि प्रमोटरों ने बेटिंग पैनल से होने वाले मुनाफे का लगभग 70-75% हिस्सा अपने पास रख लिया, जबकि बाकी हिस्सा उन पैनल ऑपरेटरों में बांट दिया गया, जो बेटिंग के काम को संभाल रहे थे. तय अपराधों से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ (PoC) को हज़ारों ‘म्यूल्स’ (बिचौलियों) या नकली बैंक खातों के जरिए व्यवस्थित तरीके से घुमाया गया. ये खाते ऐसे लोगों के KYC दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके खोले गए थे, जिन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसके बाद, इस अवैध पैसे को हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और जटिल वित्तीय तरीकों से भारत के बाहर भेजा गया, और आखिरकार UAE और भारत में कीमती चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया.
अब तक, ED ने इस मामले के सिलसिले में पूरे देश में 175 से ज्यादा जगहों पर तलाशी अभियान चलाए हैं. इसके अलावा, इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 74 लोगों को रायपुर की विशेष अदालत (PMLA) में दायर पांच ‘अभियोजन शिकायतों’ में आरोपी बनाया गया है. साथ ही, ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018’ के तहत सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल (उर्फ अतुल अग्रवाल) और शुभम सोनी के खिलाफ आवेदन दायर किए गए हैं, ताकि उन्हें ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जा सके और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त किया जा सके. आज की तारीख तक, चल और अचल संपत्तियों की कुल की लगभग 4336 करोड़ रुपये है. ED अवैध बेटिंग के काम से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ का पता लगाने और उसे ज़ब्त करने के लिए भी लगातार कार्रवाई कर रही है.
‘नक्सलवाद अंतिम चरण में’: पापाराव के सरेंडर पर सीएम साय का बड़ा बयान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की धरती पर हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भय और हिंसा का वातावरण बनाने वाली माओवादी विचारधारा अब समाप्ति की ओर है और बस्तर तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और रणनीतिक कार्रवाई की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ देश के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।
नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: पापाराव समेत 18 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
जगदलपुर। बस्तर में नक्सली लीडर पापाराव समेत 18 नक्सलियों ने ऑफिशियली सरेंडर कर दिया है। पापाराव बस्तर का आखिरी बड़ा कमांडर था। बताया जाता है कि इसके सरेंडर के बाद कोई बड़ा नक्सली लीडर अब संगठन में नहीं बचा है। एक दिन पहले पापाराव अपने साथियों के साथ जंगल से निकलकर कुटरू थाने पहुंचा था, जहां पुलिस को हथियार सौंपे गए। सरेंडर नक्सलियों में 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं। जो अपने साथ 8 AK-47, 1 SLR, 1 INSAS सहित अन्य हथियार लाए थे।
बुधवार (25 मार्च) को जगदलपुर के शौर्य भवन में DGP अरुण देव गौतम, बस्तर IG सुंदरराज समेत अन्य पुलिस के अधिकारियों की मौजूदगी में सभी नक्सलियों को सरेंडर कराया गया। इसी दिन ओडिशा में 55 लाख के इनामी सुकरू ने भी अपने साथियों के साथ हथियार डाले हैं।
पापाराव के सरेंडर वाले दिन ही ओडिशा में 5 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें 55 लाख का इनामी सुकरू भी शामिल है। ओडिशा के कंधमाल में केंद्रीय समिति का सदस्य गणेश उइके के एनकाउंटर के बाद सुकरू ने भी आत्मसमर्पण का फैसला लिया।
छत्तीसगढ़ में रेल बुनियादी ढांचे के विकास में अभूतपूर्व बजट वृद्धि: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
नई दिल्ली। कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ाने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, रेल मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ भर में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धियों की घोषणा की है। आज लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने चल रही रेल परियोजनाओं की व्यापक प्रगति को रेखांकित किया, जिसमें राज्य के बजट आवंटन और परियोजना निष्पादन में रिकॉर्ड-तोड़ वृद्धि का खुलासा किया गया है।
महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना (ABSS) के तहत, मंत्रालय ने व्यापक और दीर्घकालिक पुनर्विकास के लिए छत्तीसगढ़ में 32 रेलवे स्टेशनों की पहचान की है । ये आधुनिकीकरण कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें पांच प्रमुख स्टेशनों—अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई, डोंगरगढ़ और उरकुरा—का विकास कार्य पहले ही पूरा हो चुका है । इन अपग्रेड्स का मुख्य ध्यान स्टेशन तक पहुंच में सुधार करने , वेटिंग हॉल को बेहतर बनाने , मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन (बहुविध एकीकरण) सुनिश्चित करने और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करने पर है।
*बृजमोहन अग्रवाल ने कहा:*
"मैं छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे में क्रांति लाने में उनके निरंतर और समर्पित प्रयासों के लिए रेल मंत्री, अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। हमारे रेलवे बजट में ऐतिहासिक 22 गुना वृद्धि और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हमारे स्टेशनों का तेजी से आधुनिकीकरण हमारे नागरिकों के प्रति केंद्र सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। महत्वपूर्ण नई लाइनों और माल ढुलाई गलियारों (फ्रेट कॉरिडोर) सहित ये विशाल कनेक्टिविटी अपग्रेड, हमारे मौजूदा नेटवर्क की भीड़भाड़ को स्थायी रूप से खत्म करेंगे और छत्तीसगढ़ की आर्थिक समृद्धि के लिए एक शक्तिशाली इंजन के रूप में कार्य करेंगे।"
वर्तमान में, पूरे राज्य में ₹31,619 करोड़ की अनुमानित लागत पर कुल 1,932 किमी की लंबाई को कवर करने वाली 26 प्रमुख स्वीकृत परियोजनाएं हैं—जिनमें 6 नई लाइनें और 20 दोहरीकरण/मल्टीट्रैकिंग पहल शामिल हैं । एक उल्लेखनीय केंद्र बिंदु दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर नई लाइन परियोजना है , जहां 77 किमी लंबे दल्लीराजहरा-तारोकी खंड को पहले ही चालू कर दिया गया है, और 18 किमी लंबे तारोकी-रावघाट हिस्से पर काम अब पूरा हो गया है । इसके अतिरिक्त, डानकुनी और सूरत को जोड़ने वाले नए घोषित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से छत्तीसगढ़ के माल ढुलाई लॉजिस्टिक्स को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा, जो सीधे राज्य से होकर गुजरेगा ।
रेल मंत्रालय लगातार ट्रेन कनेक्टिविटी बढ़ाने का प्रयास करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को सुरक्षित, आधुनिक और उच्च क्षमता वाले परिवहन नेटवर्क का लाभ मिले ।
मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत, प्रदेश के 4.95 लाख से अधिक भूमिहीन कृषकों के खातों में 495 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित
रायपुर। किसानों की खुशियों भरी होली के बाद अब भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए भी यह नवरात्रि समृद्धि और आत्मविश्वास का संदेश लेकर आई है। छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की योजनाएं अब सीधे जनजीवन में परिवर्तन का आधार बनती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार जिले में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलौदा बाजार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 4 लाख 95 हजार 965 भूमिहीन कृषि मजदूरों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि अंतरित की। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि श्रम और सम्मान को सशक्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को सरकार द्वारा तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि धान खरीदी में अंतर की राशि मिलने से किसानों ने इस वर्ष उत्साह और संतोष के साथ होली मनाई, वहीं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को मिली राशि ने उनके आत्मनिर्भरता के संकल्प को और मजबूत किया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश कराते हुए मकानों की चाबियां भी सौंपीं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 18 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा का नया अध्याय जुड़ा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बलौदाबाजार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का स्मरण करते हुए बाबा गुरु घासीदास, संत कबीर और शहीद वीर नारायण सिंह को नमन किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि भूमिहीन कृषि मजदूरों को दी जा रही है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा और छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार हेतु 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः संचालन तथा रामलला दर्शन एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक और आध्यात्मिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरोना काल में लंबित बिलों के निपटान हेतु विशेष छूट एवं आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह योजना जून तक संचालित होगी और प्रदेशभर में इसके लिए समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रदेश के समग्र विकास पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संपदा, कृषि और वन उत्पादों के बेहतर उपयोग से छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के संकल्प और सुरक्षाबलों के साहस से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा पांच जिलों के हितग्राहियों से वर्चुअल संवाद कर योजनाओं के प्रभाव की जानकारी ली।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को कम समय में पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता का प्रमाण है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, धान खरीदी के अंतर की राशि तथा प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 18 लाख गरीब परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। आज योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रही है, जिससे व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता दोनों मजबूत हुए हैं। उन्होंने सभी भूमिहीन कृषि मजदूरों, विशेषकर बैगा-गुनिया परिवारों को इस योजना के लाभ के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
बस्तर में शांति की नई शुरुआत: गृह मंत्री विजय शर्मा बोले– तय समय में खत्म होगा नक्सलवाद
रायपुर। राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा. यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के सामाजिक, आर्थिक और मानवीय पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है. यह बात जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कही.
नारायणपुर विधायक एवं मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंहदेव, डीजीपी अरुण देव गौतम, पुलिस महानिदेशक एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद, नक्सल उन्मूलन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, एडीजी सीआरपीएफ, बस्तर कमिश्नर, आईजी सुंदरराज पी., बीजापुर के पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के अधिकारियों की मौजूदगी में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा मीडिया से रू-ब-रू हुए.
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित समय-सीमा के अनुरूप राज्य सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्य किया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है. इसी क्रम में हाल ही में डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव ने अपने साथियों एवं हथियारों सहित पुनर्वास कर मुख्यधारा में वापसी की है. यह घटना न केवल सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा भी कमजोर पड़ चुका है. उन्होंने कहा कि बस्तर के समाज ने भी खुले मन से इन पुनर्वासित लोगों को स्वीकार कर सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है.
उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास किया है, जिसमें सीसी मेंबर से लेकर विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 2 हजार से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है तथा लगभग 500 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) किए गए हैं. इस प्रकार कुल मिलाकर 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर में कमी आई है, जो नक्सल संगठन की रीढ़ को कमजोर करने वाला निर्णायक कारक सिद्ध हुआ है. वर्तमान स्थिति में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है और केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली उत्तर एवं दक्षिण के दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके भी शीघ्र पुनर्वास करने की संभावना व्यक्त की गई है. उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और पुनर्वास नीति की सफलता का भी परिचायक है.
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बस्तर संभाग सहित कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले, जो कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे थे, अब पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुके हैं. बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के अद्वितीय साहस, रणनीतिक दक्षता और कठिन परिस्थितियों में निरंतर किए गए प्रयासों का परिणाम है. केंद्रीय और राज्य के सुरक्षा बलों के जवानों ने विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया है, जिसके लिए पूरा प्रदेश उनका ऋणी है.
उन्होंने इस अभियान में समाज की सहभागिता को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमारे बस्तर के पत्रकार साथियों द्वारा किए गए प्रयास, पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका तथा बस्तर के स्थानीय मुरिया, मारिया, गोंड और हलबा समाज के प्रमुखों का सहयोग इस अभियान की सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं. इसके साथ ही पत्रकारों ने भी जनजागरण, संवाद और विश्वास निर्माण में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के कारण बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया, जिससे अनेक जिंदगियां बच सकीं और बस्तर को भय और रक्तपात के वातावरण से बाहर निकालने में सफलता मिली.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल नक्सलवाद के उन्मूलन तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर युवाओं को खेल के क्षेत्र में अवसर प्रदान किया गया, जिससे उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिली. इसी प्रकार बस्तर पंडुम के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा आने वाले समय में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित लगभग 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा. भविष्य में ये कैंप थाना, स्कूल, अस्पताल तथा लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा क्षेत्र में स्थायी विकास की आधारशिला मजबूत होगी.
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लाल आतंक से मुक्ति’ के संकल्प, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यह अभियान निरंतर सफलता की ओर अग्रसर है. उन्होंने इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं द्वारा प्राप्त तकनीकी सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया, जिसने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया.
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय और हिंसा के अतीत से बाहर निकलकर शांति, विकास और संभावनाओं की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार से बचें और विकास की इस यात्रा में सहभागी बनें. उन्होंने दोहराया कि जल, जंगल और जमीन बस्तर के लोगों का है और उसके संरक्षण एवं विकास में स्थानीय समुदाय की ही प्रमुख भूमिका होगी. उपमुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि निर्धारित समय-सीमा तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त होकर देश के लिए शांति, विकास और सुशासन का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा.
खल्लारी रोपवे हादसा : कांग्रेस की जांच टीम ने घटनास्थल का किया निरीक्षण
महासमुंद। खल्लारी माता मंदिर में हुए रोपवे हादसे मामले में कांग्रेस की 6 सदस्यीय जांच दल ने बुधवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया. हादसे की वास्तविक वजहों की गहराई से जांच की गई. कांग्रेस के जांच टीम ने हादसे की वजह रोपवे संचालन में अनेक खामियां को चलते होना पाया है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित इस जांच दल का नेतृत्व खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव कर रहे थे. टीम में उनके साथ सरायपाली विधायक चातुरी नंद, पूर्व प्रभारी महामंत्री अमरजीत चावला, प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के अध्यक्ष केशव चंद्राकर ने इस हादसे में जान गंवा चुके श्रद्धालुओं के प्रति संवेदना व्यक्त की. गठित जांच समिति के दो सदस्य पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर और पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर नदारद रहे. जांच दल आज साढ़े 11 बजे खल्लारी मंदिर के घटना स्थल पहुंचे, जहां टीम ने रोपवे स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.
कांग्रेस का दावा : रोपवे केबल की गुणवक्ता में कमी

इस दौरान जांच टीम ने पहाड़ी पर जिस जगह पर रोपवे का ट्राॅली दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उस स्थल का जायजा लिया. जांच टीम ने रोपवे के टूटे केबल को देखा, जिसमें केबल के बहारी हिस्से में स्टील का तार और अंदर नाइलोन की रस्सी पाया गया. जांच टीम का कहना था कि रोपवे में पूरी तरह स्टील से बने केबल का उपयोग किया जाना था. इसके बिना रोपवे केबल की मजबूती पर कैसे भरोसा किया जा सकता है. चूंकि केबल पर हजारों लोगों की जान टिकी होती है. ऐसे में केबल की गुणवत्ता को लेकर समझौता साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही टीम रोपवे ऑपरेटरों, प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर प्रबंधन से बातचीत कर घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाई.
बिना विशेषज्ञ मेंटेनेंस, बदला गया चक्का और जनरेटर से संचालन
जांच टीम के नेतृत्व कर रहे खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने मीडिया के सामने रोपवे हादसे से जुड़ी 4 मुख्य बिंदुओं पर कहा कि, कंपनी ने नवरात्रि पर्व के तीन दिन पूर्व मेंटेनेंस कार्य कराया गया था, इस दौरान कोई तकनीकी इंजीनियर विशेषज्ञ मौजूद नहीं था. मेंटेनेंस के दौरान अपर स्टेशन के मुख्य चक्का (व्हील) को बदल गया था, वह पूर्व में लगे चक्के से भिन्न पाया गया. रोपवे संचालन के लिए पिछले दो-तीन महीना से पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण रोपवे का संचालन जनरेटर के माध्यम से किया जा रहा था.
कम अनुभवी टीम को संचालन की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि रोपवे का प्रारंभिक संचालन अनुभवी टीम द्वारा किया जा रहा था, लरकिन बिना किसी पूर्व सूचना और अज्ञात कारणों से उसे टीम को बदलकर स्थानीय और कम अनुभव भी टीम से संचालन कराया जा रहा था. उन्होंने आगे कहा कि, रोपवे संचालन में मेंटेनेंस और चेकलिस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण, अनिवार्य प्रक्रिया है, लेकिन अनुभवहीन टीम के कारण नियमित मेंटेनेंस और आवश्यक चेक लिस्ट का संधारण नहीं किया गया था.
विधायक द्वारिकाधीश यादव ने एक सवाल पर कहा कि, जब खल्लारी मंदिर में रोपवे का काम चल रहा था, तब कंपनी ब्लैक लिस्ट नही था. काम के बाद ही कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की जानकारी मिली है. मंदिर ट्रस्ट को इससे जुड़ी कोई भी जानकारी नहीं थी. विधायक द्वारिकाधीश यादव ने मृतकों और घायलों के लिए जारी मुआवजा राशि को नाकाफी बताया. उन्होंने कहा कि 50-50 लाख मुआवजा और घायलों के ठीक होने तक पूरी तरह से मुफ्त इलाज होना चाहिए. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पीसीसी अध्यक्ष को सौंपी जाएगी.
छत्तीसगढ़ चेम्बर का बड़ा कदम, व्यापारियों के लिए नियुक्त किए विशेषज्ञ सलाहकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने व्यापारिक हितों के संरक्षण और व्यापारियों को तकनीकी व कानूनी अड़चनों से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. चेम्बर द्वारा प्रदेश भर के विषय विशेषज्ञों को विभिन्न विभागों के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है.
यह विशेषज्ञ टीम व्यापारियों को जीएसटी, आयकर, बैंकिंग और श्रम कानून जैसे जटिल विषयों पर आ रही परेशानियों का निराकरण करने और उन्हें सही मार्गदर्शन देने के लिए सीधे संपर्क में रहेगी.
जीएसटी एवं अप्रत्यक्ष कर (GST & Indirect Tax litigation) विभाग में चेतन तारवानी, भावेश मित्तल, जितेन्द्र खनूजा, नितिन गोयल और रश्मि वर्मा सहित 20 अनुभवी विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. ये विशेषज्ञ रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, भिलाई और अन्य शहरों के व्यापारियों को जीएसटी संबंधी कानूनी पेचीदगियों पर सलाह देंगे.
आयकर एवं मुकदमेबाजी (IncomeTax & litigation) से संबंधित व्यापारियों को आयकर से संबंधित नोटिस और अन्य विधिक कार्यों में सहयोग के लिए हार्दिक पाटनी, मुकुल चोरड़िया, डिंपल वल्र्यानी और रितेश जायसवाल सहित 9 विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है.
MSME सब्सिडी, बैंकिंग एवं वित्त (MSME Subsidy, Banking Finance) जैसे विषय पर छोटे और मध्यम उद्योगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और बैंकिंग संबंधी सहायता के लिए अरिहंत जैन, दाहवाल शाह और विक्रम देवनानी सहित 9 सलाहकार नियुक्त किए गए हैं.
साथ ही श्रम कानून और रेरा से संबंधित विषयों के लिए हिमांशु लालवानी और सीए टुटेजा जी को विशेषज्ञ नियुक्त किया गया है.
चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि छत्तीसगढ़ का व्यापारी वर्ग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अक्सर जीएसटी, आयकर और बैंकिंग जैसे जटिल तकनीकी विषयों के कारण व्यापारियों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है. हमारा लक्ष्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि ”व्यापार सुगमता” को धरातल पर उतारना है.
इसी उद्देश्य के साथ हमने प्रदेश के चोटी के विशेषज्ञों की एक ”एडवाइजरी टीम” तैयार की है. ये सलाहकार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सीधे फील्ड में उतरकर व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करेंगे. अब किसी भी व्यापारी को नोटिस या कानूनी पेचीदगियों से घबराने की जरूरत नहीं है. हमारी टीम उनके साथ खड़ी है. हम एक ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां छत्तीसगढ़ का हर व्यापारी निडर होकर अपने व्यापार का विस्तार कर सके और प्रदेश की उन्नति में सहभागी बने.
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदेश न मानने पर IAS सहित 4 अधिकारियों को सजा
भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने पूर्व एसीएस मोहम्मद सुलेमान, IAS अधिकारी तारो राठी, स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. डी.के. तिवारी और मंदसौर के सीएमएचओ डॉ. गोविंद चौहान को दो-दो महीने की कैद की सजा सुनाई है।
क्या है मामला ?
यह पूरा मामला मंदसौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 को स्पष्ट आदेश दिया था कि 2004 से 7 अप्रैल 2016 तक के कर्मचारियों को नियमित किया जाए। विभाग को इस आदेश को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में 9 अवमानना याचिकाएं दायर कीं।न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद सभी चार अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने आदेश के पालन का अंतिम अवसर देते हुए सजा को तीन हफ्ते के लिए स्थगित रखा है।
पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा का बयान
कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “जब न्यायालय के आदेश का पालन वरिष्ठतम अधिकारी नहीं करते, तो विधानसभा के निर्देशों और आदेशों का क्या हाल होगा? यह बहुत गंभीर मामला है। सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और अपने स्तर पर भी ऐसे अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”
एमपी बोर्ड 5वीं-8वीं का रिजल्ट जारी: 5वीं में 95.14% और 8वीं में 93.83% स्टूडेंट्स पास
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र ने कक्षा 5वीं और 8वीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भोपाल में औपचारिक रूप से रिजल्ट घोषित किया। इस बार कुल 24 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। इस साल 5वीं का कुल पास प्रतिशत 95.14% और 8वीं का 93.83% रहा है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार परिणाम लगभग 3 प्रतिशत बेहतर रहा है। मंत्री महोदय ने कहा कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहा है। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
टॉप जिलों का प्रदर्शन:
कक्षा 5वीं में:
- नरसिंहपुर — 99.70%
- बालाघाट — 99.30%
- डिंडोरी — 99.29%
कक्षा 8वीं में:
- नरसिंहपुर — 99.38%
- डिंडोरी — 98.74%
- बालाघाट — 98.71%
छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट www.rskmp.in/result.aspx पर रोल नंबर या समग्र आईडी डालकर आसानी से देख सकते हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इस बार रिजल्ट पिछले साल से 3 दिन पहले जारी किया गया है, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई की तैयारी के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
बोर्ड पैटर्न में हुआ था एग्जाम
इस बार प्रदेश के सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों के करीब 23.68 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा दी थी। फरवरी में आयोजित इन परीक्षाओं के लिए प्रदेश भर में मूल्यांकन का विशाल कार्य किया गया। 322 केंद्रों पर 1.10 लाख से अधिक शिक्षकों ने कॉपियों की जांच की, जिसके बाद अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई।
बड़ा फैसला: CGPSC चयनितों को जॉइनिंग मिलेगी, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका ठुकराई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने CGPSC 2021 के चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग देने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। इसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका खारिज कर दी है और हाईकोर्ट के पूर्व के आदेश के अनुसार चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग देने का निर्देश दिया है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पेशल पिटिशन लीव (SLP) के जरिए CGPSC में डिप्टी कलेक्टर व डीएसपी के पद पर चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग देने के हाईकोर्ट के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप व अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच चल रही है। जांच पूरी होने तक नियुक्तियों को स्थगित रखा जाना चाहिए। नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है।
राज्य सरकार के तर्कों का विरोध करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल एवं अधिवक्ता अभ्युदय सिंह ने कहा, सीबीआई पहले ही अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें 171 चयनित अभ्यर्थियों में से केवल 5 के नाम ही शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 125 अभ्यर्थियों को पहले ही जॉइनिंग दी जा चुकी है। शेष अभ्यर्थियों को तीन वर्षों से अधिक समय तक जॉइनिंग से वंचित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में राज्य सरकार को सीबीआई जांच के परिणाम के अधीन रहते हुए चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग देने का निर्देश दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील पेश की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया था। डिवीजन बेंच से अपील खारिज होने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए इसे बरकरार रखा है।
अवैध अफीम पर सख्ती, विदेश नीति का बचाव और नक्सली सरेंडर पर बोले सीएम साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अफीम की अवैध खेती, विदेश नीति और नक्सलियों के आत्मसमर्पण जैसे मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कहीं भी अफीम की खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सीएम साय ने कहा कि जब दुर्ग जिले में अफीम की खेती का मामला सामने आया था, तभी सभी कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए थे। कई जगहों पर पुलिस ने कार्रवाई कर खेती को चिन्हांकित भी किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि चाहे कितने भी बड़े रसूखदार क्यों न हों, सरकार कार्रवाई जरूर करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर कलेक्टरों की बैठक भी ली गई थी और उनसे जांच रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
विदेश नीति पर विपक्ष को जवाब
विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार की विदेश नीति को कमजोर बताने पर सीएम साय ने पलटवार करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी देश के मजबूत नेता हैं और उनकी विदेश नीति प्रभावी है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए रास्ते खुले हैं और गैस व तेल की आपूर्ति भी सुगम हुई है।
बड़े नक्सलियों का सरेंडर होना सकारात्मक संकेत
नक्सलियों के सरेंडर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का स्पष्ट संकल्प है कि देश से नक्सलवाद खत्म किया जाएगा। 31 मार्च की समय सीमा के बीच लगातार नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं और पापाराव जैसे बड़े नक्सलियों का सरेंडर होना सकारात्मक संकेत है। सीएम साय ने इसे राज्य और देश के लिए अच्छी खबर बताते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
पापाराव करेगा आत्मसमर्पण, विजय शर्मा का दावा—छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद अंतिम दौर में
रायपुर। डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर रवाना हुए, जहां उनके सामने कुख्यात नक्सली लीडर अपने साथियों के साथ सरेंडर करेंगे। रवानगी से पहले विजय शर्मा ने कहा, 8 एके 47 और अन्य हथियारों और साथियों के साथ आज पापाराव का पुनर्वास है। समाज के सामने आत्मसमर्पण होगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करूंगा। नियत समय 31 मार्च तक समूचे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म होगा। 30-35 जो छिटपुट नक्सली बचे हैं उनका भी पुर्नवास होगा। नक्सल लीडर गणपति अभी कहां है पता नहीं, मिशीर भी अभी बचा है। 31 मार्च की रात कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं है। 31 मार्च के बाद भी एहतियात तो बरतना ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट के धर्मांतरण को लेकर दिए आदेश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया मगर यह प्रक्रिया पुरानी है। अगर कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई समाज में जाएगा तो उनको SC समाज के मिलने वाले बेनिफिट नहीं मिलेंगे इसलिए संस्कृति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गांव-गांव में विभेद उत्पन्न हो गए हैं। माओवाद पहले वर्ग संघर्ष प्रारंभ करना चाहता था, मगर नहीं कर पाया, वहीं धर्मांतरण ने यह वर्ग संघर्ष खड़ा कर दिया। वर्ग संघर्ष के चलते आदिवासी समाज के बड़े तपके की मांग है कि डीलिस्टिंग होनी चाहिए। अब निर्णय क्या होता है संविधान के आधार पर यह न्यायालय बताएगा।
अफीम मामले में बोले – व्यक्ति का नहीं कानून का होता है राज
अफीम की खेती पर कलेक्टरों की रिपोर्ट को लेकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कबसे यह चल रहा है इसको निकालना है।व्यक्ति का राज नहीं होता, कानून का राज होता है। दुर्ग के बाद बलरामपुर और रायगढ़ में भी कार्रवाई हुई। सीएम साय ने कलेक्टरों को आदेश किया था कि जहां भी गड़बड़ी हुई हो वहां कार्रवाई करें। जल्द इसको इंटीग्रेटेड कर सोचा जाएगा कि यह कैसे हो रहा है। अगर कोई गैंग इसके पीछे है तो उसे नेस्तानाबूत किया जाएगा।
आयुष्मान भारत योजना में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग तेज, छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने सौंपा ज्ञापन
रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग को लेकर राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा है. फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में गंभीर मरीजों के उपचार हेतु आवश्यक विशेषज्ञता को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
CGDF के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने कहा कि क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ ICU में जीवनरक्षक उपचार के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं. इन्हें PM-JAY के ढांचे में शामिल करना समय की आवश्यकता है, ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके.
उपाध्यक्ष डॉ. ए. प्रसांत ने बताया कि विशेषज्ञों की भागीदारी से मरीजों की रिकवरी दर बेहतर होती है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम होती है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर भार कम पड़ता है.
जूडो अध्यक्ष डॉ रेशम के अनुसार, वर्तमान PM-JAY योजना में कई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं को शामिल किया गया है, लेकिन क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी गई है. इससे ICU प्रबंधन में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आती हैं, खासकर जटिल एवं आपातकालीन मामलों में.
टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलेगा लाभ
फेडरेशन का मानना है कि यदि इन विशेषज्ञों को योजना में शामिल किया जाता है, तो छोटे शहरों और जिला अस्पतालों में भी उच्च स्तरीय ICU सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी. इससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
क्या हैं मुख्य मांगें
• ICU एवं क्रिटिकल केयर पैकेज में विशेषज्ञों को शामिल किया जाए
• एम्पैनलमेंट और प्रतिपूर्ति (reimbursement) नीति में संशोधन किया जाए
• अस्पतालों में फुल-टाइम इंटेंसिविस्ट की नियुक्ति को बढ़ावा दिया जाए
फेडरेशन ने शासन से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है, ताकि आयुष्मान भारत योजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और मजबूत किया जा सके.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 5 एडिशनल जज बनेंगे परमानेंट जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने दी सहमति
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर कार्यरत 5 जजों को परमानेंट जस्टिस बनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आज हुई मीटिंग में इन्हें परमानेंट जस्टिस बनाने के लिए अपनी सहमति दी. परमानेंट किए गए 5 जजों में दो बेंच और तीन जस्टिस बार कोटे से हाईकोर्ट पहुंचे हैं.
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की आज 24 मार्च को बैठक हुई थी. जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कार्यरत पांच एडिशनल जजों को परमानेंट जस्टिस बनाने की सहमति दी गई. इनमें जस्टिस सचिन सिंह राजपूत, जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल, जस्टिस संजय कुमार जायसवाल, जस्टिस बिभु दत्त गुरु और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद शामिल हैं. ये अब तक अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर कार्य कर रहे थे, अब ये स्थायी न्यायाधीश हो गए हैं.
जिन पांच जजों को स्थायी किया गया है, उनमें जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल बेंच कोटे से प्रमोशन होकर जिला न्यायालय से हाई कोर्ट पहुंचे हैं. जबकि जस्टिस सचिन सिंह राजपूत, बिभु दत्त गुरु और अमितेंद्र किशोर प्रसाद बार कोटे से अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करते हुए सीधे जस्टिस अपाइंट हुए हैं.

पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति : अब 27 मार्च तक कर सकेंगे आवेदन, तारीख बढ़ने से छात्रों को मिली राहत
रायपुर। जिले के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (कॉलेज स्तर) के आवेदन हेतु ऑनलाइन पंजीयन की तिथि में वृद्धि की गई है।
जिले के समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित वेबसाइट http://postmatric-scholarship.cg.nic.in/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
विद्यार्थियों द्वारा ऑनलाइन आवेदन/पंजीयन (नवीन/नवीनीकरण) की अंतिम तिथि 23 मार्च 2026 से बढ़ाकर 27 मार्च 2026 तक कर दी गई है। वहीं संस्थाओं द्वारा प्रस्ताव लॉक करने की अंतिम तिथि 29 मार्च 2026, तथा शासकीय संस्थाओं/जिला कार्यालय द्वारा सैंक्शन ऑर्डर लॉक करने की अंतिम तिथि 30 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। जिला कार्यालय द्वारा भुगतान प्रस्ताव राज्य कार्यालय को 31 मार्च 2026 तक भेजा जाएगा।
छात्रवृत्ति हेतु अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के पालक की आय-सीमा 2.50 लाख रुपये प्रतिवर्ष, अन्य पिछडा वर्ग हेतु आय-सीमा 1.00 लाख रुपये प्रतिवर्ष, सक्षम अधिकारी द्वारा स्थाई जाति प्रमाणपत्र, छत्तीसगढ़ का मूल निवास प्रमाण पत्र एवं विद्यार्थी के अध्ययनरत पाठ्यक्रम के विगत वर्ष का परीक्षा परिणाम इत्यादि दस्तावेज अनिवार्य है |
निर्धारित तिथि के पश्चात ऑनलाइन आवेदन पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। वर्ष 2025-26 से संस्थानों के लिए जियो-टैगिंग अनिवार्य कर दी गई है। जियो-टैगिंग नहीं करने पर संबंधित संस्था के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही विद्यार्थियों को NSP पोर्टल के माध्यम से वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) करना भी अनिवार्य होगा। साथ ही नई संस्थाओं के संस्था प्रमुख एवं संस्था के छात्रवृत्ति प्रभारी का बायोमेट्रिक ऑथेन्टिकेशन किया जाना अनिवार्य है।
