कवर्धा। कवर्धा जिले के झलमला स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आज उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब छात्र-छात्राओं और पालकों ने स्कूल के मेन गेट पर ताला जड़ दिया। गुस्साए पालकों और बच्चों ने स्कूल गेट के बाहर खड़े होकर जमकर नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
विद्यालय में इस समय लगभग 350 से अधिक छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत हैं, लेकिन विषयवार शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों और आवेदन देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे।
प्रदर्शन कर रहे पालकों ने बताया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग और कलेक्टर कार्यालय को ज्ञापन सौंपा, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लगातार उपेक्षा से परेशान होकर आज पालक और बच्चे सड़क पर उतर आए और स्कूल के गेट पर ताला लगाकर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराज़गी जताई।
एक अभिभावक ने कहा, “बच्चों का भविष्य दांव पर है। शिक्षक नहीं होंगे तो पढ़ाई कैसे होगी? सरकार शिक्षा पर जोर देने की बात करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बच्चों को शिक्षक तक उपलब्ध नहीं हो रहे।”
प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने भी नाराज़गी जताई और कहा कि उन्हें नियमित कक्षाएँ नहीं मिल रही हैं। कई विषयों के शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई अधूरी रह जाती है। खासकर गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे विषयों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था चरमराने से पालक बेहद आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि जब तक पर्याप्त शिक्षक नहीं भेजे जाते, तब तक वे इस तरह का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन शीघ्र समाधान नहीं करता तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस बीच, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलने पर स्थिति पर नज़र बनाए रखने की बात कही है। हालांकि अब तक स्पष्ट नहीं है कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कब और क्या कदम उठाए जाएंगे।
यह विरोध केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि समय रहते शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में कोरिया इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन और निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी प्रो-एक्टिव एवं विकासोन्मुख औद्योगिक नीति 2024–30, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और प्रशिक्षित जनशक्ति के बल पर वैश्विक निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरियाई ब्रांड हर भारतीय घर का हिस्सा हैं। एलजी, सैमसंग, हुंडई जैसी कंपनियां गांव-गांव तक पहुंच चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में जल, ऊर्जा, लौह अयस्क व स्टील और बेहतरीन कनेक्टिविटी उपलब्ध है। ये संसाधन दक्षिण कोरियाई निवेशकों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, व्यवसाय सुगमता और उद्योग-अनुकूल नीतियों के माध्यम से प्रत्येक निवेशक को हर स्तर पर सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज खनिज, ऊर्जा, इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी-स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक निवेश का स्वागत कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को रोजगार, महिलाओं को स्वावलंबन और किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण भी हमारी प्राथमिकता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने भारत के राजदूत अमित कुमार से भारतीय दूतावास, सियोल में मुलाक़ात कर छत्तीसगढ़ में निवेश संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने स्टील और खनिज से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स व फूड प्रोसेसिंग तक, मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने दक्षिण कोरिया और छत्तीसगढ़ के बीच सांस्कृतिक एवं कारोबारी रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन साझेदारियों से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं नवाचार और उच्च मूल्य रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। उन्होंने कोरियाई निवेशकों से आग्रह किया कि वे छत्तीसगढ़ को अपने नए औद्योगिक निवेश स्थल के रूप में चुनें और साझा समृद्धि की इस यात्रा का हिस्सा बनें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं निवेश संवर्धन एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कोरबा। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे है, लेकिन कार्रवाई को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी संजिदा नजर नही आ रहे है। जीं हां ताजा मामला कोरबा जिला के आदिवासी विभाग में हुए करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार का है। इस पूरे मामले में कलेक्टर के निर्देश पर सहायक आयुक्त की रिपोर्ट पर पुलिस ने चार फर्मो और विभाग के डाटा एंट्री आपरेटर के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। लेकिन आज 12 दिन बाद भी पुलिस इस मामले के आरोपियोें को गिरफ्तार नही कर सकी है। वहीं इस मामले में आरोपी बने कटघोरा नगर पालिका के अध्यक्ष सहित अन्य दो लोगोें की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद सूबे की साय सरकार लगातार जीरों टाॅलरेंस का दावा करती आ रही है। लेकिन सरकार के इन दावों पर पुलिस और प्रशासनिक अफसर पलीता लगाने से बाज नही आ रहे है। मतलब यदि भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर मामले में यदि आरोपी रसूख और राजनीतिक पहुंच वाले है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस के भी हाथ-पांव फूल जाते है। कुछ ऐसा ही मामला कोरबा जिले का है। यहां आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने सिविल लाइन थाने में एक शिकायत दर्ज करायी थी। छात्रावास मरम्मत के नाम पर हुए करोड़ों रूपये के घोटाले में कलेक्टर अजीत वसंत के FIR दर्ज कराने के सख्त निर्देश दिये थे।
कलेक्टर के निर्देश के बाद सिविल लाइन थाना में पुलिस ने 16 अगस्त को भ्रष्टचार में शामिल चार फर्म में. श्री साई ट्रेडर्स पालीवाल बुक डिपों, में. श्री साई कृपा बिल्डर्स छुरी, में.एस.एस.ए. कंस्ट्रक्शन चैतमा, में.बालाजी इंफ्रास्ट्रक्टर कटघोरा और डाॅटा एंट्री आपरेटर कुश कुमार देवांगन के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था। लेकिन सिविल लाइन थान में अपराध दर्ज होने के आज 12 दिन बाद भी ना तो डाॅटा एंट्री आपरेटर की गिरफ्तार हो सकी और ना ही पुलिस ने करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार को अंजाम देने वाले फर्मो के खिलाफ कोई एक्शन लिया है।
प्रमुख सचिव कार्यालय में ही दब गयी कार्रवाई की फाइल, अफसर निर्देश का कर रहे इंतजार
कोरबा के आदिवासी विभाग में केंद्र सरकार से अनुच्छेद 275(1) के तहत मिले करोड़ों रूपये के फंड में बंदरबांट से जुड़ा ये पूरा मामला है। साल 2023 में तब की तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर ने इस फंड में से छात्रावास मरम्मत और नवीनीकरण के कार्यो के लिए 4 करोड़ रूपये खर्च कर दिये। कागजों में छात्रावास मरम्मत और नवीनीकरण कार्य कराने के बाद अपने चहेते 4 फर्मो को करोड़ों रूपये का फंड आबंटित कर ना केवल भ्रष्टाचार किया गया, बल्कि तबादला होने के बाद तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर ने उक्त कार्यो से संबंधित समस्त फाइले आफिस से गायब करवा दी गयी।
इस मामले की जानकारी के बाद सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने साल 2023 में ही आदिम जाति-अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर समस्त जानकारी दी गयी। साथ ही दोषी अफसर पर कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश मांगे गये। कलेक्टर के निर्देश पर हुए जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद भी प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश मांगे गये। लेकिन प्रमुख सचिव के दफ्तर में इस करोड़ों के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की फाइल ही दब गयी। आलम ये है कि विभाग के पत्र लिखे जाने के सालों बाद भी अफसर आज तक निलंबन या फिर एफआईआर के लिए निर्देश नही सके है। उधर उच्च अधिकारियों से निर्देश नही मिलने पर जिला स्तर पर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे इंतजार कर रहे है।
भ्रष्टाचार में शामिल नगर पालिका अध्यक्ष की जमानत याचिका हुई खारिज
सिविल लाइन थाना में एफआईआर के बाद सबसे पहले डाॅटा एंट्री आपरेटर कुश कुमार देवांगन और साईकृपा बिल्डर्स के प्रोपराइटर आशुतोष मिश्रा ने निचली अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसी तरह में.बालाजी इंफ्रास्ट्रक्टर कटघोरा के संचालक राज जायसवाल जो कि मौजूदा वक्त में कटघोरा नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी से अध्यक्ष है, उन्होने भी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों कोर्ट ने नगर पालिका कटघोरा के अध्यक्ष राज जायसवाल की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है।
फर्जी बिल बनाने वाले सब इंजीनियर और SDO पर भी अफसर है मेहरबान
कोरबा जिले के आदिवासी विभाग में हुए करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार की जांच में अफसरों के साथ ठेकेदार जमकर लाल हुए। इस पूरे मामले की जांच में खुसाला हुआ कि तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर के आदेश पर सब इंजीनियर राकेश वर्मा ने जहां बगैर काम कराये फर्जी बिल बनाये, वहीं इन सारे फर्जी बिलों को विभाग के तत्कालीन एसडीओं अजीत कुमार तिग्गा ने कार्य पूर्णता की प्रमाणिकता दी। जिसके बाद करोड़ों रूपये के बिलों का भुगतान बगैर काम कराये ही ठेका कंपनियों के खाते में अंतरित कर दिये गये।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि यदि जांच में इस बात का खुलासा हो चुका है कि सब इंजीनियर और एसडीओं ने बगैर काम कराये फर्जी बिल बनाकर भुगतान आदेश दिया, तो उनके खिलाफ विभाग के अफसर FIR दर्ज क्यों नही करवा रहे? आखिर जवाबदार अधिकारी विभाग के भ्रष्ट अफसरों पर एक्शन लेने से क्यों कतरा रहे है? सवाल ये भी उठता है कि भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर का दबदबा क्या आज भी राजधानी के अफसरों पर कायम है? जिसके कारण अफसर इस पूरे मामले में हाथ डालने से बच रहे है।
रायपुर। राजधानी रायपुर में इस वर्ष सांसद खेल महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह खेल महोत्सव 21 सितंबर से 25 दिसंबर 2025 तक रायपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर और बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के 9 विधानसभा क्षेत्रों और 21 विकासखंडों में आयोजित होगा।
कार्यक्रम ब्लॉक लेवल और जिला लेवल पर होगा, जिसमें 12 खेल विधाओं खो-खो, फुबड़ी, गेड़ी, रस्सी कूद, वॉलीबॉल, कबड्डी, बास्केटबॉल, कुश्ती, टेबल टेनिस, बैडमिंटन और शतरंज को शामिल किया गया है। प्रतियोगिताएँ अंडर-19 और ओपन कैटेगरी में होंगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि “खेल केवल शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ाते हैं। ‘सांसद खेल महोत्सव’ का उद्देश्य गांव-गांव और ब्लॉक स्तर पर छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के अवसर प्रदान करना है।”
उन्होंने आगे बताया कि इस महोत्सव की औपचारिक घोषणा 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर की जाएगी।
बैठक में खेल विशेषज्ञ अतुल शुक्ला, संजय शर्मा, मो. अकरम, मुश्ताक अली, सेवराम साहू, अनुजा दुबे, देवेंद्र सिंह, आलोक गुप्ता, उमेश सिंह ठाकुर, नितिन पांडे, मानिक ताम्रकार, पीतांबर पटेल, खेल अधिकारी रूपेंद्र सिंह चौहान, संजय जोशी, दान सिंह देवांगन, जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर हिमांशु भारती, डीईओ बलौदा बाजार संजय गुहे समेत खेल जगत से जुड़े कई अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पीड़ा को शीघ्र कम करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व वरिष्ठ अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि प्रभावित परिवारों को राहत राशि बिना विलंब के उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त आवासों के सुधार हेतु तिरपाल, बाँस-बल्ली और राहत राशि का वितरण प्राथमिकता से किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का भ्रमण करें और राहत कार्यों का सतत पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों से सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली राहत कार्यों की सफलता की कुंजी है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव श्री जैन ने कलेक्टरों से कहा कि यदि उन्हें शासन स्तर से अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो तो वे तुरंत प्रस्ताव भेजें, ताकि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, कपड़े और सूखा राशन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में स्वास्थ्य शिविर और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
बैठक के प्रारंभ में राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने मुख्यमंत्री को बस्तर में बाढ़ की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों को अतिरिक्त राशन का आबंटन भी कर दिया गया है और सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जा रही है।
इसके उपरान्त मुख्यमंत्री श्री साय ने चारों जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद कर उनके-अपने जिलों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि अब अधिकांश बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी उतरने लगा है और स्थिति नियंत्रण में है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज उपस्थित थे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में जांच एजेंसियों ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और ACB की संयुक्त टीम ने झारखंड की जेल में बंद शराब घोटाले के दो आरोपियों—अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा—को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी की टीम दोनों आरोपियों को लेकर रायपुर के लिए रवाना हो चुकी है, जहां शुक्रवार को उन्हें विशेष अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।
गौरतलब है कि अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा, “ॐ साईं बेवरेज” नामक शराब आपूर्ति कंपनी के डायरेक्टर हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य में शराब बिक्री और सप्लाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया है।
इस मामले में मंगलवार को रायपुर कोर्ट में EOW ने छठा आरोप पत्र दाखिल किया। यह चार्जशीट विशेष रूप से विदेशी शराब की सप्लाई पर लिए गए अवैध कमीशन पर आधारित है। आरोप पत्र में पहली बार छत्तीसगढ़ की तत्कालीन राज्य कैबिनेट का भी उल्लेख किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि शराब सिंडिकेट ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कैबिनेट से नई आबकारी नीति को मंजूरी दिलवाई थी, जिससे घोटाले का रास्ता साफ हुआ।
चार्जशीट में इस बात का खुलासा किया गया है कि उस समय आबकारी विभाग में एक सक्रिय सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट में प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुण पति त्रिपाठी, निरंजन दास, और व्यवसायी अनवर ढेबर का नाम प्रमुखता से शामिल है। इनके अलावा विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह जैसे लोगों के भी सिंडिकेट में शामिल होने की बात कही गई है।
EOW के मुताबिक, यह सिंडिकेट शासकीय शराब दुकानों में बिकने वाली शराब की सप्लाई पर हर पेटी के हिसाब से अवैध कमीशन वसूल करता था। ये कमीशन करोड़ों में थे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
छत्तीसगढ़ सरकार और जांच एजेंसियां अब इस घोटाले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां तथा खुलासे संभव हैं।
दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश आई बाढ़ से दंतेवाड़ा जिले में 100 से ज्यादा गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है। 200 से ज्यादा मकान ढह गए। पनेड़ा के पास नेशनल हाईवे के पास पुल का अप्रोच बह जाने से करीब 20 घंटों तक यहां आवाजाही बंद रही। वायसेना भी रेस्क्यू में जुटी रही। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। पुल के दोनों तरफ ट्रक और बसों की लंबी लाइन लग गई। दंतेवाड़ा नगर समेत आस-पास के गांवों में कुल करीब 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है।
बता दें कि दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे शंखनी-डंकनी नदी का पानी नहीं बह पाया और आसपास के गांवों में भारी तबाही मच गई। करीब 53 साल पहले सन 1972 में डंकनी नदी का ऐसा रौद्ररूप देखने को मिला था।
सीएम विष्णु देव साय ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अफसरों से कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राहत और बचाव के काम तेजी से करें। राहत शिविरों में ठहरे सभी लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 4 जिलों में 43 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज और जीवन में संतुलन ही धर्म है, जो किसी भी अतिवाद से बचाता है। भारत की परंपरा इसे मध्यम मार्ग कहती है और यही आज की दुनिया की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के समक्ष उदाहरण बनने के लिए समाज परिवर्तन की शुरुआत घर से करनी होगी। इसके लिए संघ ने पंच परिवर्तन बताए हैं – कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध (स्वदेशी) और नागरिक कर्तव्यों का पालन। आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी को प्राथमिकता दें तथा भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल स्वेच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव में नहीं।
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा – नए क्षितिज’ के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, उत्तर क्षेत्र के प्रांत संघचालक पवन जिंदल और दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल मंच पर उपस्थित रहे।
संघ कार्य कैसे चलता है?
मोहन भागवत ने कहा कि संघ का कार्य शुद्ध सात्त्विक प्रेम और समाजनिष्ठा पर आधारित है। “संघ का स्वयंसेवक कोई व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा नहीं रखता। यहाँ इंसेंटिव नहीं हैं, बल्कि डिसइंसेंटिव अधिक हैं। स्वयंसेवक समाज-कार्य में आनंद का अनुभव करते हुए कार्य करते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन की सार्थकता और मुक्ति की अनुभूति इसी सेवा से होती है। सज्जनों से मैत्री करना, दुष्टों की उपेक्षा करना, कोई अच्छा करता है तो आनंद प्रकट करना, दुर्जनों पर भी करुणा करना – यही संघ का जीवन मूल्य है।
हिन्दुत्व क्या है
हिन्दुत्व की मूल भावना पर कहा कि हिन्दुत्व सत्य, प्रेम और अपनापन है।’ हमारे ऋषि-मुनियों ने हमें सिखाया कि जीवन अपने लिए नहीं है। यही कारण है कि भारत को दुनिया में बड़े भाई की तरह मार्ग दिखाने की भूमिका निभानी है। इसी से विश्व कल्याण का विचार जन्म लेता है।
दुनिया किस दिशा में जा रही है
सरसंघचालक ने चिंता जताई कि दुनिया कट्टरता, कलह और अशांति की ओर जा रही है। पिछले साढ़े तीन सौ वर्षों में उपभोगवादी और जड़वादी दृष्टि के कारण मानव जीवन की भद्रता क्षीण हुई है। उन्होंने गांधी जी के बताए सात सामाजिक पापों, “काम बिना परिश्रम, आनंद बिना विवेक, ज्ञान बिना चरित्र, व्यापार बिना नैतिकता, विज्ञान बिना मानवता, धर्म बिना बलिदान और राजनीति बिना सिद्धांत” का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे समाज में असंतुलन गहराता गया है।
धर्म का मार्ग अपनाना होगा
सरसंघचालक ने कहा कि आज दुनिया में समन्वय का अभाव है और दुनिया को अपना नजरिया बदलना होगा। दुनिया को धर्म का मार्ग अपनाना होगा। “पूजा-पाठ और कर्मकांड से परे धर्म है। सभी प्रकार के रिलिजन से ऊपर धर्म है। धर्म हमें संतुलन सिखाता है – हमें भी जीना है, समाज को भी जीना है और प्रकृति को भी जीना है।” धर्म ही मध्यम मार्ग है जो अतिवाद से बचाता है। धर्म का अर्थ है मर्यादा और संतुलन के साथ जीना। इसी दृष्टिकोण से ही विश्व शांति स्थापित हो सकती है।
धर्म को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा, “धर्म वह है जो हमें संतुलित जीवन की ओर ले जाए, जहाँ विविधता को स्वीकार किया जाता है और सभी के अस्तित्व को सम्मान दिया जाता है।” उन्होंने बल दिया कि यही विश्व धर्म है और हिन्दू समाज को संगठित होकर इसे विश्व के सामने प्रस्तुत करना होगा।
विश्व की वर्तमान स्थिति और उपाय
वैश्विक संदर्भ में उन्होंने कहा कि शांति, पर्यावरण और आर्थिक असमानता पर चर्चा तो हो रही है, उपाय भी सुझाए जा रहे हैं, लेकिन समाधान दूर दिखाई देता है। “इसके लिए प्रमाणिकता से सोचना होगा और जीवन में त्याग तथा बलिदान लाना होगा। संतुलित बुद्धि और धर्म दृष्टि का विकास करना होगा।”
भारत ने नुकसान में भी संयम बरता, भारत के आचरण की चर्चा करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि “हमने हमेशा अपने नुकसान की अनदेखी करते हुए संयम रखा है। जिन लोगों ने हमें नुकसान पहुँचाया, उन्हें भी संकट में मदद दी है। व्यक्ति और राष्ट्रों के अहंकार से शत्रुता पैदा होती है, लेकिन अहंकार से परे हिन्दुस्तान है।” उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को अपने आचरण से दुनिया में उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।
उन्होंने कहा कि आज समाज में संघ की साख पर विश्वास है। “संघ जो कहता है, उसे समाज सुनता है।” यह विश्वास सेवा और समाजनिष्ठा से अर्जित हुआ है।
भविष्य की दिशा
भविष्य की दिशा पर सरसंघचालक ने कहा कि संघ का उद्देश्य है कि सभी स्थानों, वर्गों और स्तरों पर संघ कार्य पहुँचे। साथ ही समाज में अच्छा काम करने वाली सज्जन शक्ति आपस में जुड़े। इससे समाज स्वयं संघ की ही तरह चरित्र निर्माण और देशभक्ति के कार्य को करेगा। इसके लिए हमें समाज के कोने-कोने तक पहुंचना होगा। भौगोलिक दृष्टि से सभी स्थानों और समाज के सभी वर्गों एवं स्तरों में संघ की शाखा पहुंचानी होगी। सज्जन शक्ति से हम संपर्क करेंगे और उनका आपस में भी संपर्क कराएंगे।
उन्होंने कहा कि संघ मानता है कि हमें समाज में सद्भावना लानी होगी और समाज के ओपिनियन मेकर्स से निरंतर मिलना होगा। इनके माध्यम से एक सोच विकसित करनी होगी। वे अपने समाज के लिए काम करें, उसमें हिन्दू समाज को अंग होने का अनुभव पैदा हो और वे भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों का स्वयं समाधान ढूँढे। दुर्बल वर्गों के लिए काम करें। संघ ऐसा करके समाज के स्वभाव में परिवर्तन लाना चाहता है।
मोहन भागवत ने बाहर से आक्रामकता के कारण धार्मिक विचार भारत में आए। किसी कारण से उन्हें कुछ लोगों ने स्वीकार किया। “वे लोग यहीं के हैं, लेकिन विदेशी विचारधारा होने के कारण जो दूरियाँ बनीं, उन्हें मिटाने की ज़रूरत है। हमें दूसरे के दर्द को समझना होगा। एक देश, एक समाज और एक राष्ट्र के अंग होने के नाते, विविधताओं के बावजूद, समान पूर्वजों और साझा सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ना होगा। यह सकारात्मकता और सद्भाव के लिए आवश्यक है। इसमें भी हम समझ-बूझकर एक-एक कदम आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं।”
आर्थिक प्रगति के नए रास्ते
आर्थिक दृष्टि पर उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयोग हुए हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक प्रतिमान गढ़ना होगा। हमें एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत करना होगा, जिसमें आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और पर्यावरण का संतुलन हो। ताकि वे विश्व के लिए उदाहरण बने।
पड़ोसी देशों से रिश्तों पर उन्होंने कह कि “नदियाँ, पहाड़ और लोग वही हैं, केवल नक्शे पर लकीरें खींची गई हैं। विरासत में मिले मूल्यों से सबकी प्रगति हो, इसके लिए उन्हें जोड़ना होगा। पंथ और संप्रदाय अलग हो सकते हैं, पर संस्कारों पर मतभेद नहीं है।”
पंच परिवर्तन – अपने घर से शुरुआत
उन्होंने कहा कि दुनिया में परिवर्तन लाने से पहले हमें अपने घर से समाज परिवर्तन की शुरुआत करनी होगी। इसके लिए संघ ने पंच परिवर्तन बताये हैं। यह हैं कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व की पहचान तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन। उन्होंने उदाहरण दिया कि पर्व-त्योहार पर पारंपरिक वेशभूषा पहनें, स्वभाषा में हस्ताक्षर करें और स्थानीय उत्पादों को सम्मानपूर्वक खरीदें।
उन्होंने कहा कि हंसते-हंसते हमारे पूर्वज फाँसी पर चढ़ गए, लेकिन आज आवश्यकता है कि हम 24 घंटे देश के लिए जीएँ। “हर हाल में संविधान और नियमों का पालन करना चाहिए। यदि कोई उकसावे की स्थिति हो तो न टायर जलाएँ, न हाथ से पत्थर फेंकें। उपद्रवी तत्व ऐसे कार्यों का लाभ उठाकर हमें तोड़ने का प्रयास करते हैं। हमें कभी उकसावे में आकर अवैध आचरण नहीं करना चाहिए। छोटी-छोटी बातों में भी देश और समाज का ध्यान रखकर अपना काम करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने होंगे और इसके लिए स्वदेशी को प्राथमिकता देनी होगी।
अंत में सरसंघचालक जी ने कहा कि “संघ क्रेडिट बुक में नहीं आना चाहता। संघ चाहता है कि भारत ऐसी छलांग लगाए कि उसका कायापलट तो हो ही, पूरे विश्व में सुख और शांति कायम हो जाए।”
रायपुर। निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से अगले दो दिन तक दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में कुछ स्थानों पर अति भारी बारिश होने की संभावना है. मानसून इस समय बस्तर संभाग के जिलों में ही मेहरबान है जिसके चलते लगातार बारिश हो रही और इधर धूप का असर होने से उमस से बेचैनी छाई हुई है.
27 अगस्त को बिलासपुर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस अधिक है. प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 33 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में रहा. बिलासपुर सहित संभाग के जिलों में इन दिनों बारिश थम गई है, और पूरे दिन धूप का असर रहा, जिससे उमस दिनभर परेशान करती रही.
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के बस्तर संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर भारी बारिश हुई, सुकमा में एक-दो स्थानों पर बहुत अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिसमें सुकमा व बस्तानार में 21 सेंमी वर्षा हुई है. मौसम विभाग के अनुसार एक चिन्हित निम्न दाब का क्षेत्र उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओड़िशा तट पर स्थित है, इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है.
रायपुर। दुर्गा पूजा, दीपावली एवं छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में होने वाली अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है. इसमें बिलासपुर-यलहंका (बेंगलुरु)-बिलासपुर के मध्य 22 फेरों के लिये साप्ताहिक फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है. जो 9 सितंबर से 18 नवंबर तक चलेगी. इससे यात्रियों को कंफर्म बर्थ के साथ यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी. गाड़ी संख्या 08261 बिलासपुर-यलहंका (बेंगलुरु) फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन बिलासपुर से 9 सितम्बर से 18 नवम्बर तक प्रत्येक मंगलवार को तथा गाड़ी संख्या 08262 यलहंका (बेंगलुरु)-बिलासपुर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन यलहंका से 10 सितंबर से 19 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार को चलेगी.
इन गाड़ियों का वाणिज्यिक ठहराव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर, भाटापारा, रायपुर, दुर्ग, राजनादगांव, डोंगरगढ़ एवं गोंदिया स्टेशनों में दिया गया है. बिलासपुर-यलहंका फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन प्रत्येक मंगलवार को बिलासपुर से 11 बजे रवाना होगी. जो भाटापारा 11.38 बजे, रायपुर 12.45 बजे, दुर्ग 14.20 बजे, राजनादगांव, डोंगरगढ़ 15.13 बजे, गोंदिया 16.25 बजे, वडसा 17.57 बजे, चांदाफोर्ट 19.43 बजे दूसरे दिन बुधवार को 19 बजे बलहंका पहुंचेगी.
इसी तरह यलहंका-बिलासपुर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन प्रत्येक बुधवार को यलहंका से 21.00 बजे रवाना होगी. जो तीसरे दिन शुरूवार को गोंदिया 00.05 बजे, डोंगरगढ़ आगमन 1.12 बजे, राजनादगांव 1.37 बजे, दुर्ग 2.45 बजे, रायपुर 3.25 बजे, भाटापारा 4.14 बजे, होते हुए 5.30 बजे बिलासपुर पहुंचेगी. इस फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन में 1 एसएलआरडी, 3 सामान्य, 4 स्लीपर, 2 एसी-थ्री इकोनामी, 08 एसी-श्री, 1 एसी टू तथा जनरेटर कार सहित कुल 20 कोच की सुविधा उपलब्ध होंगे.
रायपुर। चक्रधर समारोह हमें अतीत की स्वर्णिम स्मृतियों से जोड़ता है और हमारे अमूल्य विरासत को संजोने का महान संकल्प है। राजा चक्रधर सिंह ने कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जो सपना रायगढ़ की धरती से देखा था, यह उत्सव उस स्वप्न का प्रतीक है। राज्यपाल रमेन डेका आज रायगढ़ जिले में आयोजित 40वें चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भगवान गणपति की पूजा अर्चना की और संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह का पुण्य स्मरण कर उन्हें नमन किया।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा को हम रजत जयंती के रूप में मना रहे हैं और इस दौरान छत्तीसगढ़ की संस्कृति को समृद्ध बनाने में चक्रधर समारोह का योगदान अग्रणी है। श्री डेका ने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ में बहुत गहरा संबंध है और ब्रिटिश काल में इस प्रदेश से लोग असम गए थे। उन्होंने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने साहित्य और कला के संरक्षण के जो प्रयास असम में किए थे, वही प्रयास महाराज चक्रधर ने रायगढ़ की धरती से किया। श्री डेका ने बताया कि असम में राजा चक्रधर सिंह की स्मृति में पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ की धरती भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर है। रायगढ़ घराने की छाप न केवल देश में बल्कि विश्वभर में है। राजा चक्रधर सिंह ने कथक नृत्य को नई ऊंचाइयां दीं और अपनी रचनाओं नर्तन सर्वस्व, तालतोय निधि और राग रत्न मंजूषा के माध्यम से संगीत और नृत्य को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि कला हमारे भीतर संवेदनाओं को जगाती है और जीवन को सुंदर बनाती है। आधुनिकता की दौड़ में जब लोग संस्कृति से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ का नाम लेते ही हमारे मन में संगीत की मिठास, नृत्य की लय और कला के रंग दिखाई देते हैं। यही वो धरती है, जहां बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई, हरिप्रसाद चौरसिया की बाँसुरी और पं. जसराज सहित साहित्य जगत के महान विभूतियों के सुर गूंजते रहे हैं। उन्होंने इस खास मौके पर रायगढ़ की जनता को इस महान परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
40वें चक्रधर समारोह के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। उन्होंने कहा कि आदिकाल से ही संगीत, नृत्य और साहित्य जैसी विधाएँ राजाओं के आश्रय में पल्लवित होती आई हैं और इन्हीं परंपराओं ने भारत को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।
राजा चक्रधर सिंह को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि जब कथक में केवल जयपुर और बनारस घराने ही प्रसिद्ध थे, उस समय रायगढ़ घराने की स्थापना कर उन्होंने भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया। श्री शेखावत ने कहा कि आज यह समारोह उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करने का गौरवशाली अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सक्षम और सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को नक्सल छवि से मुक्ति मिल रही है और प्रदेश अब संस्कृति तथा पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जूझते हुए जिस प्रदेश को कभी पिछड़ेपन की दृष्टि से देखा जाता था, वही आज अपनी लोककलाओं और पर्यटन स्थलों के कारण विश्व स्तर पर पहचान बना रहा है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। हमारी लोककलाएँ, लोकनृत्य और लोकपरंपराएँ पुनः संरक्षित और सशक्त हो रही हैं। श्री शेखावत ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी दस दिनों तक रायगढ़ सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा और देश-विदेश से आए कलाकार अपनी कला के माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन को और भव्य बनाएँगे।
वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि चक्रधर समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही रायगढ़ में लगातार विकास कार्यों को गति मिल रही है, जिससे यहां की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान और अधिक मजबूत हो रही है। श्री चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आस्था के प्रमुख केंद्रों, पर्यटन स्थलों को लगातार विकसित करने का काम केंद्र सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के सहयोग से भोरमदेव मंदिर सहित अनेक विकास कार्यों के लिए विशेष रूप से राशि आवंटित की गई है।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली से आए अतिथियों ने चक्रधर समारोह को गरिमामयी बनाया है। श्री सिंह ने कहा कि संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह ने कथक नृत्य को नई पहचान दी। उन्होंने विधिवत प्रशिक्षण से रायगढ़ घराने को प्रतिष्ठा दिलाई और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि एक गोंड आदिवासी राजा द्वारा कथक नृत्य को इस ऊँचाई तक पहुँचाना इतिहास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव याद किया जाएगा। रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि इस भव्य आयोजन से रायगढ़ की प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ रही है तथा यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिल रही है।
चक्रधर समारोह के अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तोखन साहू, कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल, लोकसभा क्षेत्र जांजगीर-चांपा की सांसद कमलेश जांगड़े, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, नगर निगम के महापौर जीववर्धन चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी कर्मचारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित रहे।
रायपुर। रायगढ़ में आयोजित हो रहे चक्रधर समारोह के मंच पर दिल्ली से पधारे देश के प्रख्यात कथक नर्तक पंडित राजेंद्र गंगानी ने अपनी मोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह के 40वें संस्करण की शुरुआत उनके प्रस्तुति से हुई।
जयपुर घराने के वरिष्ठ कलाकार पंडित गंगानी ने अपनी अद्भुत नृत्य शैली में पारंपरिक कथक की झलक प्रस्तुत की। महज चार वर्ष की आयु से उन्होंने नृत्य साधना प्रारंभ की थी। वर्ष 2003 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया, साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें अनेक पुरस्कार और अलंकरण प्राप्त हुए हैं। उनकी कला में परंपरा और आधुनिकता का अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिसने श्रोताओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चक्रधर समारोह छत्तीसगढ़ की परंपरा, इतिहास और कलाओं की सुंदरता को अनुभव करने का अद्भुत अवसर है। रायगढ़ का चक्रधर समारोह छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला की पहचान है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव की परंपरा से जुड़ा यह आयोजन आज भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की लय और माधुर्य से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध करता है। यह समारोह न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक अस्मिता को गौरवान्वित करता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कला-प्रेमियों को हार्दिक आमंत्रण देते हुए कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की स्मृति में आयोजित यह समारोह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक यात्रा को और समृद्ध करता है। रायगढ़ की पुण्यभूमि, हमारी सांस्कृतिक धरोहर और कलाओं से परिपूर्ण है। यह वही धरती है जहाँ महाराजा चक्रधर सिंह ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य को नई पहचान दी और रायगढ़ को कला की राजधानी बना दिया। उन्होंने समस्त कला-प्रेमियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि वे इस आयोजन का हिस्सा बनें और भारतीय कला-संस्कृति के माधुर्य का अनुभव करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चक्रधर समारोह की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों को कला और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगी और न केवल रायगढ़, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ बनाएगी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी सक्रियता से कार्य करे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि राहत शिविरों में ठहरे सभी लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने प्रशासन को बाढ़ से प्रभावित गाँवों तक तुरंत सहायता पहुँचाने और आपदा नियंत्रण कक्षों से स्थिति की निगरानी करने के आदेश दिए।
उल्लेखनीय है कि लगातार हो रही बारिश से प्रदेश के चार जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 26 और 27 अगस्त को सबसे अधिक वर्षा दंतेवाड़ा जिले में दर्ज की गई, जहाँ क्रमशः 93.7 मिमी और 118.4 मिमी बारिश हुई। सुकमा में 35 से 109.3 मिमी, बीजापुर में 34.9 से 50.2 मिमी तथा बस्तर में 67.3 से 121.3 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई जिससे 25 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले ने जानकारी दी कि प्रभावित लोगों के लिए 4 जिलों में कुल 43 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें दंतेवाड़ा जिले से 1,116, सुकमा से 790, बीजापुर से 120 और बस्तर से 170 , इस प्रकार कुल 2,196 प्रभावितों को राहत शिविर में ठहराया गया है। बाढ़ से अब तक 5 जनहानि, 17 पशुधन हानि, 165 मकानों को आंशिक और 86 मकानों को पूर्ण क्षति की सूचना मिली है। सभी जिलों में नगर सेना एवं एस.डी.आर.आफ के द्वारा राहत बचाव कार्य किया जा रहा है एवं राहत शिविर में ठहराये गये लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग जिलों से बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सतत संपर्क बनाये हुए है एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। जिला सुकमा में आपदा मित्रों के द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने हेतु जिला प्रशासन का सहयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनहानि और नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी और पुनर्वास कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन और राहत दल लगातार सक्रिय रहें, हर जरूरतमंद तक तुरंत मदद पहुँचे और राहत सामग्री समय पर मिले।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आम नागरिकों से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आवश्यकता की स्थिति में तुरंत स्थानीय नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास जताया कि प्रशासन और जनता के सामूहिक सहयोग से हम इस आपदा पर शीघ्र काबू पाएंगे और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन जल्द बहाल होगा।
रायपुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज को झकझोर देने वाली एक मानवीय कहानी सामने आई है। भाजपा के तत्कालीन मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने अपनी गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से टूटकर मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। सड़क हादसे में स्थायी विकलांगता का शिकार हुए यादव ने पत्र लिखकर अपनी व्यथा प्रकट की है।
इस घटना की जानकारी लगते ही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विशंभर यादव और उनकी पत्नी से फोन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं। रायपुर में उनके इलाज की संपूर्ण व्यवस्था की जाएगी। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—
“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।”
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विशंभर यादव को अच्छा इलाज दिलाना और उन्हें स्वस्थ करना उनकी प्राथमिकता होगी।
हादसे की दर्दनाक पृष्ठभूमि
जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रायपुर सभा में शामिल होने के लिए सूरजपुर जिले के कार्यकर्ताओं को लेकर जा रही बस बेमेतरा के पास हादसे का शिकार हो गई थी। इस हादसे में दो कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी, जबकि तत्कालीन भाजपा मंडल महामंत्री विशंभर यादव गंभीर रूप से घायल हुए।
दिल्ली एम्स में उनका रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया, लेकिन वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। एक महीने से अधिक इलाज के दौरान करोड़ों का खर्च परिवार ने स्वयं वहन किया। भाजपा संगठन की ओर से शुरू में सहयोग का आश्वासन दिया गया, लेकिन समय बीतने के साथ यह मदद ठंडी पड़ गई।
आर्थिक संकट और भाजपा से नाराजगी
विशंभर यादव ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इलाज में 30 से 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। हर महीने 30 से 40 हजार रुपये का मेडिकल खर्च अलग से हो रहा है। इलाज के चलते परिवार की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई। पत्नी के जेवर तक बिक गए और रिश्तेदारों से भी कर्ज लेना पड़ा।
उन्होंने दुख जताया कि कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीढ़ बताने वाली भाजपा अब उनकी सुध तक नहीं ले रही है। उनके दोनों शिक्षित पुत्रों को नौकरी तक नहीं दिलाई गई। कई बार पार्टी नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने फोन तक रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।
इच्छा मृत्यु की मांग
इन्हीं परिस्थितियों से टूटकर विशंभर यादव ने मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि जब जीना ही बोझ बन जाए और इलाज का खर्च उठाना संभव न हो, तो मर जाना ही उचित है।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे रायपुर आकर इलाज कराएं। उनकी पूरी जिम्मेदारी ली जाएगी।
बीजापुर। नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है। जिले में 30 माओवादी संगठन से अलग होकर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें 20 इनामी माओवादी भी शामिल हैं जिन पर कुल मिलाकर 81 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर पारिवारिक और सुरक्षित जीवन जीने की इच्छा जताई है।
जानकारी के मुताबिक, इन माओवादियों ने सब-डिवीजन ब्यूरो इंचार्ज के नेतृत्व में आत्मसमर्पण किया। उनका कहना है कि शासन की विकास योजनाओं, सुरक्षा कैम्पों के विस्तार और सामुदायिक पुलिसिंग से प्रभावित होकर उन्होंने संगठन से मोहभंग किया।
आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान
आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के कई महत्वपूर्ण स्तर के कैडर शामिल हैं—
DVCM 1 कम्पनी नंबर 2 के सदस्य
ACM-2 के 5 सदस्य
प्लाटून पार्टी सदस्य – 4
एरिया कमेटी पार्टी सदस्य – 5
एरिया कमेटी PLGA सदस्य – 1
CNM सदस्य – 2
जानताना सरकार सदस्य – 6
मिलिशिया सदस्य – 2
DAKMS सदस्य – 2
यह सूची बताती है कि आत्मसमर्पण करने वाले केवल निचले स्तर के ही नहीं बल्कि ऊपरी संरचना से भी जुड़े थे। इससे माओवादी संगठन की कमर तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।
जनवरी से अब तक की बड़ी सफलता
आंकड़ों की मानें तो जनवरी 2024 से अब तक 496 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और 190 माओवादी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं। इस तरह की लगातार कार्रवाई और आत्मसमर्पण से साफ है कि माओवादियों का नेटवर्क अब कमजोर पड़ रहा है।
सरकार और सुरक्षा बलों का कहना
शासन की ओर से कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, सुरक्षा बलों का कहना है कि यह आत्मसमर्पण उनकी रणनीति और जनता के सहयोग का परिणाम है.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान सियोल में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर एसोसिएशन (ATCA) के चेयरमैन ली जे जेंग एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। ATCA एक सशक्त औद्योगिक नेटवर्क है, जिसमें आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल क्षेत्र की 60 से अधिक प्रमुख कंपनियाँ शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ATCA प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेशकों के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ली जे जेंग और उनके साथ आए वरिष्ठ अधिकारियों को आमंत्रित किया कि वे अपने आगामी भारत दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ अवश्य आएँ और राज्य में उपलब्ध निवेश व सहयोग की संभावनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करें।
ATCA ने छत्तीसगढ़ की कंपनियों के साथ बी2बी साझेदारी में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान मौजूद हैं, जो विश्वस्तरीय प्रतिभा उपलब्ध कराते हैं। राज्य का ‘प्लग एंड प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर और सशक्त लॉजिस्टिक्स नेटवर्क छत्तीसगढ़ को ATCA के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और भारत में उनके विस्तार का स्वाभाविक हब बनाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित हो रहा है और यहाँ उद्योग-अनुकूल नीतियाँ, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, कुशल मानव संसाधन तथा मज़बूत बुनियादी ढाँचा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे उभरते क्षेत्रों में ATCA कंपनियाँ यहाँ आकर निवेश करें और साझेदारी के नए आयाम स्थापित करें। इससे प्रदेश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उद्योगों को भी नई ताक़त मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान सियोल में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में भाग लिया, जिसका आयोजन इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स इन कोरिया (ICCK) के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। उन्होंने उल्लेख किया कि दक्षिण कोरिया भारत के शीर्ष तीन इस्पात निर्यात गंतव्यों में शामिल है और छत्तीसगढ़, देश का अग्रणी इस्पात उत्पादक राज्य होने के नाते, इस सहयोग को और गहरा करने तथा निवेश के नए अवसर प्रदान करने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों से समृद्ध है, जो ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। राज्य में प्रचुर मात्रा में लिथियम उपलब्ध है, जो ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) क्रांति और नई पीढ़ी के उद्योगों को गति देने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का स्वाभाविक केंद्र बन सकता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने ICCK को नॉलेज पार्टनर के रूप में शामिल करने की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–30 के तहत तकनीक, स्किलिंग और वैश्विक सहयोग को एक नई दिशा दी जाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कोरिया की नवाचार क्षमता और छत्तीसगढ़ के संसाधनों के मिलन से विकास का एक नया युग लिखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रत्येक निवेशक को “सिंगल विंडो क्लियरेंस” से लेकर भूमि आवंटन, आवश्यक अनुमतियों और सहयोगी नीतियों तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्षिण कोरिया कंपनियों की भागीदारी से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक परिदृश्य में नए अवसरों का सृजन होगा और दक्षिण कोरिया-भारत औद्योगिक सहयोग को एक नई ऊँचाई मिलेगी।
रायपुर। राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर आज सुबह आने वाली 2 प्रमुख फ्लाइट्स को खराब मौसम के चलते अलग-अलग शहरों में डायवर्ट कर दिया गया. दिल्ली से रायपुर आ रही Air India की फ्लाइट A12793 को भुवनेश्वर डायवर्ट कर दिया गया. जबकि कोलकाता से रायपुर आरही Indigo फ्लाइट को नागपुर डायवर्ट कर दिया गया. फ्लाइट डायवर्ट होने से यात्रियों में हड़कंप मच गया. भुवनेश्वर में फंसे हवाई यात्रियों ने जमकर हंगामा किया.
एयर इंडिया की फ्लाइट A12793, जो दिल्ली से रायपुर सुबह 8 बजे लैंड करने वाली थी, अचानक लैंडिंग से पहले ऊपर उठी और खराब मौसम के चलते भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर उतारी गई. यात्रियों के अनुसार, विमान जैसे ही रायपुर एयरपोर्ट के करीब पहुंचा, तभी अचानक लैंडिंग रोक दी गई और विमान ऊपर उठ गया. इससे यात्रियों में घबराहट फैल गई.
भुवनेश्वर पहुंचने के बाद यात्रियों ने एयर इंडिया के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और एयरपोर्ट पर हंगामा किया. उनका आरोप था कि एयरलाइन की ओर से समय पर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई. बाद में एयर इंडिया ने बयान जारी कर बताया कि कम विजिबिलिटी की वजह से फ्लाइट को डायवर्ट करना पड़ा और सुबह 9:30 बजे भुवनेश्वर से रायपुर के लिए दोबारा उड़ान भरी जाएगी. सभी यात्रियों को सुरक्षित बताया गया और आवश्यक मदद उपलब्ध कराई गई.
कोलकाता-रायपुर इंडिगो फ्लाइट नागपुर डायवर्ट
इसी दौरान, इंडिगो की कोलकाता से रायपुर आने वाली फ्लाइट को भी मौसम खराब होने के कारण नागपुर एयरपोर्ट की ओर भेजा गया. हालांकि, इंडिगो की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, जिससे यात्रियों में असमंजस की स्थिति बनी रही. नागपुर में रुके यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार रायपुर पहुंचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी.
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
रायपुर एयरपोर्ट पर मौसम की वजह से फ्लाइट डायवर्शन कोई नया मामला नहीं है. जनवरी 2023 में भी एयर इंडिया और इंडिगो की दो फ्लाइट्स को क्रमशः नागपुर और भुवनेश्वर की ओर डायवर्ट करना पड़ा था. उस समय भी वजह कम दृश्यता ही बताई गई थी.
यात्रियों की नाराजगी और मांग
भुवनेश्वर और नागपुर में फंसे यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और एयरलाइंस से समय पर सूचना और बेहतर सुविधाओं की मांग की. कई यात्रियों ने मुआवजे की भी मांग उठाई.
सूत्रों के अनुसार, डायवर्टेड दोनों फ्लाइट्स करीब ढाई घंटे की देरी से रायपुर पहुंचीं और इसके बाद पुनः अपने गंतव्य यानी दिल्ली और कोलकाता के लिए रवाना हुईं.